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AAP में छिड़ा गृहयुद्ध, राघव चड्ढा ने खुद पर लगे आरोपों को बताया ‘मजबूरी में किया गया स्क्रिप्टेड हमला’

 नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं पर तीखा हमला बोला है, जिन्होंने हाल ही में उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से AAP के कुछ नेता सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रहे थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं। राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ करीब 3 मिनट का एक वीडियो शेयर कर उन्हें आईना दिखा दिया है। राघव चड्ढा ने आरोपों पर पलटवार करते हुए 'एक्स' पर लिखा, "AAP के मेरे उन साथियों के लिए, जिन्हें यह वीडियो जारी करने के लिए मजबूर किया गया कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में नाकाम रहे, उनके लिए पेश है एक छोटा सा ट्रेलर… पिक्चर अभी बाकी है।" राघव ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए आगे कहा किपंजाब उनके लिए केवल राजनीति या चर्चा का विषय नहीं है। उन्होंने लिखा, "पंजाब मेरी भूमि है, मेरा कर्तव्य है, मेरी मिट्टी है और मेरी रूह है।" उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ संसद में पंजाब के हक की आवाज उठाते हुए अपने पुराने वीडियो का एक संकलन भी शेयर किया, ताकि यह साबित किया जा सके कि उन्होंने हमेशा पंजाब के हितों की बात की है।   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक करता है। उनके ‘मजबूर किया गया’ शब्द के इस्तेमाल से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर ही कोई गुट उनके खिलाफ सक्रिय है। फिलहाल, इस 'ट्रेलर' के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि राघव की 'पूरी पिक्चर' में क्या खुलासे होते हैं। राघव संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में नाकाम रहे : ‘आप’ का आरोप ‘आप’ ने कल पंजाब से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने में संसद में नाकाम रहने का आरोप लगा राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा था कि उनकी 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, ‘आप’ के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा और पार्टी नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि कई अहम मामलों पर चड्ढा की चुप्पी 'निराशाजनक' है। चीमा ने कहा कि पंजाब के विधायकों द्वारा राज्यसभा के लिए चुने गए चड्ढा से राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के मुद्दों का सशक्त प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने इससे जुड़ा 'एक भी संवेदनशील मुद्दा' नहीं उठाया। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास निधि के लगभग 8,500 करोड़ रुपये के लंबित बकाया और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित लगभग 60,000 करोड़ रुपये के नुकसान सहित प्रमुख वित्तीय मुद्दों को संसद में उजागर नहीं किया गया। राघव की की 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत : चीमा उन्होंने जीएसटी मुआवजे में बदलाव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्त पोषण से संबंधित मुद्दों के कारण हुए वित्तीय नुकसान को भी उन मामलों में गिनाया जिन्हें सांसद कथित तौर पर उठाने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि पिछले साल पंजाब में आई बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये की पूरी वित्तीय सहायता पंजाब को नहीं मिली है। चीमा ने कहा कि यह मुद्दा संसद में भी नहीं उठाया गया। मंत्री ने चड्ढा की चुप्पी को 'निराशाजनक' बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी को सांसद से उम्मीद थी कि वह इन मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे, लेकिन उनकी 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत है। 'आप' की पंजाब इकाई के प्रमुख अरोड़ा ने कहा कि जनता के मुद्दों को निडर होकर उठाना पार्टी के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है और इससे किसी भी तरह का विचलन 'अप्रत्याशित' है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लंबित वित्तीय और राहत संबंधी मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।

नितिन नवीन का बयान: कांग्रेस के शासनकाल में लोग रोटी के लिए भटकते थे

श्रीभूमि   असम के श्रीभूमि में आयोजित जनसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भाजपा-एनडीए की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सभा में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले समय में असम में भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनने जा रही है और जनता का पूरा आशीर्वाद पार्टी को मिलने वाला है। नितिन नवीन ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा सरकार ने असम के विकास और उसकी समृद्ध विरासत, दोनों को आगे बढ़ाने का काम किया है। इससे पहले राज्य को अपराध का गढ़ बना दिया गया था। कांग्रेस के शासनकाल में लोगों को रोटी के लिए भटकना पड़ता था, रोजगार के अवसर नहीं थे और न ही महिलाओं और राज्य की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित थी।  इसी कारण असम की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर सजा दी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और असम तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सड़क, बिजली, रोजगार जैसे हर क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। बराक वैली का जिक्र करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि एक समय यह इलाका उपेक्षा और भेदभाव का शिकार था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के जरिए इस क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हुई है और लोगों तक सुविधाएं पहुंच रही हैं। नितिन नवीन ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत असम में 22 लाख गरीबों को पक्के घर दिए जा चुके हैं। साथ ही आने वाले समय में 15 लाख और मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ओरुनोडोई (अरुणोदय) योजना के तहत लाभार्थियों को अब 3,000 रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के घर बनाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए लगातार काम कर रही है। बता दें कि अरुणोदय योजना असम सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करना है।महिलाओं के सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार माताओं-बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। रोजगार के मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने 2 लाख युवाओं को नौकरी देने का संकल्प लिया है। साथ ही नए उद्योग लगाने वालों को 5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता देने की योजना भी बनाई गई है। उन्होंने पूर्व यूपीए सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस समय पक्की सड़कों का निर्माण नहीं किया गया, बल्कि यह तर्क दिया जाता था कि सड़क बनने से विदेशी घुसपैठ बढ़ेगी। इसके उलट, केंद्र सरकार ने चीन सीमा तक पक्की सड़कें बनाईं, जिससे अब कोई भी देश भारत की जमीन पर नजर डालने की हिम्मत नहीं कर सकता। असम में विधानसभा चुनाव केवल एक ही चरण में संपन्न होंगे। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर मतदान 9 अप्रैल को होगा।

MP में राज्यसभा चुनाव का गणित बदलेगा, भाजपा तीसरे प्रत्याशी को उतारने की तैयारी में, कांग्रेस की सीट पर नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. . एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा  मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं।  जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित  राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है।  क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी। इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है। खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है। एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट  राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है.  बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके।  एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।  

कांग्रेस नेता उदित राज का हमला: AAP पर धोखा और लूट के आरोप, राघव चड्ढा को बताया सही

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से सियासत तेज है। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा है कि राघव ने कुछ भी गलत नहीं किया है बल्कि उन्होंने सही काम किया है। उदित राज ने साथ ही यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को बदनाम करने की काफी कोशिश कि लेकिन वे कुछ भी साबित नहीं कर सके। आप नेता राघव चड्ढा के विवाद पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, ‘आप ने जनता को धोखा दिया, लूट मचाई और कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की, फिर भी उनके खिलाफ कभी कोई आरोप साबित नहीं हुआ। उन्हें इससे सबक लेना चाहिए था। अब वे शिकायत कर रहे हैं कि राघव चड्ढा उनका साथ नहीं दे रहे हैं। राघव चड्ढा ने कुछ भी गलत नहीं किया। वास्तव में, उन्होंने सही काम किया है और दूसरों को भी उसी रास्ते पर चलना चाहिए।’ 'बीजेपी से मिलकर ही कांग्रेस को उखाड़ा' उदित ने कहा ‘राघव चड्ढा ने इनके साथ (आप) सही किया बल्कि इन्हें तो और सबक सिखाना चाहिए। इन्होंने और नेताओं के साथ क्या किया और अब ये कह रहे हैं कि राघव हमारा साथ नहीं दे रहे हैं। बीजेपी से मिल गए हैं। अरे तुमने बीजेपी से मिलकर ही कांग्रेस को उखाड़ा। आज अपनी सुविधा के हिसाब से व्यक्तिगत महत्वकांक्षा को हासिल करने के लिए अपनी ही पार्टी बनाई वरना इनके पास दम था रामलीला मैदान में लाखों लोगों को खाना खिलाने में। ये लोग अपने इतिहास को देख लें। राघव चड्ढा ने कोई गलत काम नहीं किया बल्कि एकदम सही काम किया और लोगों को भी करना चाहिए।’ 'आपको बोलना चाहिए' उदित ने इससे पहले  भी इस मुद्दे पर कहा था कि राघव को इस मुद्दे पर खुलकर बोलना चाहिए और चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ‘खामोशी होनी ही नहीं चाहिए। अगर राजनीति में हैं तो इस मुद्दे पर तो खामोशी का मतलब ही नहीं होता। राघव जन समस्याओं को उठाते हैं और ऐसे में उन्हें सब साफ कर देना चाहिए। कोई भी खामोश नहीं रहता है। अगर पार्टी ने कोई अपमान नहीं किया है तो ये भी बताएं। और पार्टी से नाखुश हैं तो ये भी बताएं। ये क्या दोहरा चरित्र है। खामोश किसने करवाया है ये भी बताएं। पॉलिटिकल चीजें निजी नहीं होती हैं बल्कि पब्लिक होती हैं। आप क्यों इस तरह से अनुमान लगा रहे हैं या किसी को अंधेरे में रख रहे हो या लुका छिपी कर रहे हो या रहस्य पैदा दर रहे हो। आपको बोलना चाहिए।’ पार्टी के फैसले पर राघव ने क्या कहा? राघव ने पार्टी के इस फैसले पर  आरोप लगाते हुए कहा पार्टी उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि 'जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं और शायद मैं ऐसे विषय उठाता हूं, जो आमतौर पर संसद में नहीं उठाए जाते लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है? मैं यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने से रोका जाए।'

बीजेपी ने एमपी में 89 सदस्यीय जंबो टीम बनाई, दो पूर्व मंत्रियों सहित 11 विधायकों को दिया महत्वपूर्ण दायित्व

भोपाल  मध्यप्रदेश भाजपा ने मीडिया में पार्टी का पक्ष प्रमुखता से रखने के लिए अब तक की सबसे लंबी मीडिया टीम बनाई है। 89 सदस्यों की नई जंबो टीम की  घोषणा हुई। इसमें दो पूर्व मंत्रियों को भी अहम दायित्व दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मीडिया टीम में 33 को प्रदेश प्रवक्ता बनाया। मीडिया विभाग में प्रदेशभर के प्रमुख नेता, कार्यकर्ताओं को स्थान दिया गया है। सबसे खास बात यह है कि सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान के अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को भी अहम पदों से नवाजा गया है। मध्यप्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्याम टेलर ने भी प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी। भाजयुमो प्रदेश ने अपनी कार्यकारिणी में 56 कार्यकर्ताओं को स्थान दिया है। भोपाल से दो और शेष इंदौर, रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, बैतूल, जबलपुर और सागर से एक- एक नाम शामिल मीडिया टीम में दो पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस और ऊषा ठाकुर सहित 11 वर्तमान और 5 पूर्व विधायकों के नाम हैं। इसके अलावा 47 सदस्यों की सूची में 41 को मीडिया पैनलिस्ट और अन्य 6 को प्रदेश मीडिया विभाग का सदस्य बनाया गया है। वहीं 9 को प्रदेश सह मीडिया प्रभारी की कमान सौंपी गई। इसमें भोपाल से दो और शेष इंदौर, रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, बैतूल, जबलपुर और सागर से एक- एक नाम शामिल है। टीम में चिटनीस-ठाकुर सहित मंत्री शाह के भाई भी प्रदेश भाजपा की जंबो मीडिया टीम में मंत्री विजय शाह के भाई संजय शाह भी शामिल हैं। वे हरदा की टिमरनी सीट से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान विधायकों में पूर्व में मंत्री रह चुकीं अर्चना चिटनीस और उषा ठाकुर के अलावा कुंवर सिंह टेकाम, गौरव पारधी, नीरज सिंह लोधी, संदीप जायसवाल, संतोष वरकड़े, दिलीप परिहार, संजय शाह, योगेश पंडाग्रे, छाया मोरे शामिल हैं। भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित, 56 कार्यकर्ताओं को दी जगह भाजपा मीडिया विभाग में एक मुश्त नियुक्तियों के बाद देर शाम भाजपा युवा मोर्चा ने भी प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने अपनी कार्यकारिणी में 56 कार्यकर्ताओं को स्थान दिया है। इसमें कटनी के मृदुल मिश्रा, धार के जय सूर्या, उज्जैन ग्रामीण के अनिल वर्मा, जबलपुर के योगेंद्र सिंह ठाकुर, राजगढ़ के पवन शर्मा, इंदौर के विवेक शर्मा और भिंड के विश्व प्रताप सिंह को उपाध्यक्ष बनाया है। युवा मोर्चा की इस टीम में डिंडौरी के राकेश परस्ते व रतलाम के विप्लव जैन को महामंत्री का जिम्मा दिया है।

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस में बढ़ी हलचल, तीन दावेदारों पर मंथन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर चुनाव होना है। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है और दिग्विजय सिंह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे अब राज्यसभा नहीं जाएंगे। इसके बाद मध्यप्रदेश काग्रेस में हलचल तेज है और मध्यप्रदेश से तीन नाम चर्चाओं में है। आंकड़ों के हिसाब से एक सीट कांग्रेस को मिलना तय है। मौजूदा सदस्य दिग्विजय सिंह ने भले ही दोबारा राज्यसभा में जाने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने अपने खास समर्थक पीसी शर्मा (pc sharma) का नाम आगे बढ़ा दिया है। इधर, दिल्ली की पसंद मीनाक्षी नटराजन है तो दलित कोटे से सज्जन सिंह वर्मा ताल ठोक रहे हैं। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होने वाले हैं। मध्यप्रदेश में विधायकों की संख्या के हिसाब से दो सीट भाजपा और एक कांग्रेस के पास जाना तय है। इसके चलते कांग्रेस में अंदरूनी घमासान चल रहा है। दावेदारों की फेहरिस्त में सांसद रही मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर है, जिसे कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (rahul gandhi) आगे बढ़ा सकते हैं। मध्यप्रदेश मे इस वक्त राज्यसभा के 11 सांसद है। इनमें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म होने वाला है।  वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने भी दांव खेलते हुए कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा (pc sharma) का नाम आगे कर दिया। उनका तर्क है कि कांग्रेस के पास मजबूत ब्राह्मण नेता नहीं है। शर्मा को बनाने से बड़े समाज की पार्टी को सहानुभूति मिलेंगी। इधर, सांसद रहे सज्जन सिंह वर्मा (sajjan singh verma) भी राज्यसभा जाना चाहते हैं। हालांकि उनके साथ विडंबना है कि लॉबिंग करने वाला दिल्ली में कोई बड़ा नेता नहीं है। हालांकि उन्हें विश्वास है कि पार्टी दलित कार्ड खेलते हुए उन्हें मौका दे सकती है। कांग्रेस के लिए जीत आसान नहीं राज्यसभा सदस्य बनने के लिए 58 वोट की आवश्यकता है तो कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे। उसमें विधायक मुकेश मल्होत्रा (mukesh malhotra) को सुप्रीम कोर्ट ने विधायक बने रहने की राहत तो दे दी है, लेकिन वोटिंग का अधिकार छीन लिया। बुधवार को दतिया विधायक राजेंद्र भारती (rajendra bharti) को कोर्ट ने जेल भेज दिया। उनके वोट को लेकर भी संकट खड़ा है। इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी उन्हें नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास 63 वोट ही बचे हैं जिसमें से पांच वोट क्रॉस वोटिंग में चले गए तो खेल बदल जाएगा। तीसरी सीट भी भाजपा के पास जा सकती है। ऐसा ही कुछ जादू भाजपा हरियाणा में दिखा चुकी है। देखें राजनीतिक गणित 0-कांग्रेस के विधायक मकेश मल्होत्रा वोट नहीं डाल पाएंगे। कोर्ट ने हाल ही में उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया था, लेकिन वे अपील में चले गए तो उन्हें स्टे दे दिया, लेकिन वोट नहीं डाल पाएंगे। 0-विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे ने बजट सत्र में पारिवारिक कारण बताकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कटारे ने साफ कर दिया है कि उनका किसी से कोई विवाद भी नहीं है और वे भाजपा में जाने का सोच भी नहीं सकते हैं। 0- इसके अलावा बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर भी दल बदल कानून के तहत मामला चल रहा है। 0-कल ही दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया। गुरुवार को उन्हें तीन साल की सजा सुना दी। अब ऐसी स्थिति में वे विधायक रहेंगे तो ही वोट डाल पाएंगे।

अमित शाह ने ममता को दी चुनौती, कहा- 15 दिन तक बंगाल में ही रहूंगा

 कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच सीधे टक्कर देखने को मिली रही है. इसी क्रम में शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में नंदीग्राम पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ललकारते हुए बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने घोषणा की कि वह आगामी 15 दिनों तक लगातार पश्चिम बंगाल में ही रहकर चुनावी कमान संभालेंगे।  गुरुवार को अमित शाह कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि  मैं बंगाल चुनाव में 15 दिन तक बंगाल में ही रहने वाला हूं. मैं यहां खासतौर पर शुवेंदु अधिकारी के नामांकन के लिए आया हूं. शुभेंदु की जीत बंगाल में परिवर्तन की नींव रखेगी।  'बंगाल में होगी दीदी की हार' अमित शाह ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली बार दीदी नंदीग्राम में हार गई थीं और इस बार वह भवानीपुर के साथ-साथ पूरे बंगाल को खो देंगी. उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी का नामांकन बंगाल में टीएमसी के पतन की शुरुआत है. शाह ने जोर देकर कहा कि नंदीग्राम की जनता इस बार फिर से इतिहास दोहराएगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।  'मैंने पूरे बंगाल का किया दौरा' उन्होंने दावा करते हुए कहा कि मैंने पूरे बंगाल का दौरा किया है और जहां भी जाता हूं, वहां एक ही आवाज़ गूंज रही है- ममता बनर्जी को बाय-बाय कर दो. चुनाव से पहले ही बंगाल का दौरा करें, जहां भी जाएं, हर जगह यही आवाज़ सुनाई दे रही है कि सरकार को विदा कर दो और ममता बनर्जी को बाय-बाय कह दो।  गृह मंत्री ने बंगाल की ज्वलंत समस्याओं को उठाते हुए कहा कि बंगाल की जनता टीएमसी की टोलबाजी और गुंडागर्दी से पूरी तरह त्रस्त है.आए दिन हो रहे बम धमाकों और बेरोजगारी से युवा परेशान हैं. राज्य में आए दिन होने वाले बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने घुसपैठियों को संरक्षण दिया है, जिससे राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है।  शाह ने युवाओं से वादा किया कि भाजपा सरकार आने पर बेरोजगारी को खत्म किया जाएगा और विकास की नई लहर लाई जाएगी, ताकि बंगाल फिर से अपनी पुरानी पहचान पा सके। 

AAP का बड़ा कदम: राघव चड्डा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया

नई दिल्ली राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका मिला है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है. इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी कैंची चली है. जी हां, आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा की जगह अब नया उपनेता चुना लिया है. अब आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल राज्यसभा में उपनेता होंगे. आम आदमी पार्टी ने इस बाबत राज्यसभा सचिवालय को पत्र सौंपा है।  सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यह भी सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए. दरअसल, राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे. लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे. चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।      सूत्र बताते हैं कि पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं. वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे।  राघव चड्ढा केजरीवाल के बरी होने पर भी चुप थे हालांकि, आम आमदी पार्टी ने इस फैसले के पीछे का कारण नहीं बताया है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है. राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।  राघव चड्ढा पर यह एक्शन क्यों? पहली वजह: जब दिल्ली में शराब कांड मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कईयों को जमानत मिली तब उस पर भी वह चुप थे।  दूसरी वजह: राघव राज्यसभा में पार्टी के कोटे से तय किए हुए समय में बोल रहे थे. इस वजह से पार्टी के अन्य सांसदों को मौका या तो नहीं मिल पाता था या कम मिलता था।  तीसरी वजह: पार्टी का स्टैंड सही से नहीं रख पा रहे थे या पार्टी के मुद्दों पर बोलने से बचते थे।  चौथी वजह: आप का अंदरूनी कलह  बहरहाल, राघव चड्डा ने इस पर अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. इस घटना से आम आदमी पार्टी का अंदरूनी कलह सामने आ गया है. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल सीमित संख्या में सांसद हैं. संजय सिंह जेल में होने के बाद राघव चड्डा को अनौपचारिक रूप से उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी. वे कई महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय रहे. लेकिन पार्टी का कहना है कि व्यक्तिगत स्टाइल के बजाय सामूहिक फैसला जरूरी है।  राघव ने किन-किन मुद्दों को उठाया:     राइट टू रिकॉल (जनता को नेता वापस बुलाने का अधिकार)     मिडिल क्लास पर टैक्स बोझ:     खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा:     गिग वर्कर्स (10 मिनट डिलीवरी वाले कामगारों) की सुरक्षा     एयरपोर्ट पर महंगा चाय-पानी और फ्लाइट टिकट की समस्याएं  

तमिलनाडु ओपिनियन पोल: इंडिया ब्लॉक के किले पर संकट, BJP गठबंधन को मिल रही मजबूत बढ़त

चेन्नई  तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही रोमांचक और अनिश्चित रही है. 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वोटवाइब के वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य में सत्ता की लड़ाई बेहद करीबी होने वाली है. सहयोगी चैनल सीएनएन-न्यूज18 पर विशेष रूप से जारी इस सर्वे के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन यानी एनडीए को 115-125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सत्तारूढ़ डीएमे-कांग्रेस गठबंधन (कांग्रेस, भाकपा और माकपा सहित) यानी इंडिया गठबंधन को 104-114 सीटें मिलने का पूर्वानुमान है. ऐसे में देखा जाए तो तमिलनाडु इंडिया गठबंधन का एक तरह से अंतिम किला है. यह भी इस बार ढह जाने की संभावना है।  कुल 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है. ऐसे में साफ दिख रहा है कि राज्य में कांटे की टक्कर है. इससे पहले के वोट ट्रैकर पोल में डीएमके गठबंधन को 113-123 सीटों पर बढ़त दिखाई गई थी, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन को 106-116 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेटेस्ट पोल में थोड़ी सी शिफ्ट एआईएडीएमके की तरफ हुई है, जो दर्शाता है कि अंतिम दिनों में वोटर मूड में बदलाव संभव है. अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके युवा और शहरी वोटरों पर दांव लगा रही है और इसे 2-8 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि टीवीके का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, लेकिन यह वोट कटौती का खेल जरूर बदल सकती है।  मुख्यमंत्री की पसंद- स्टालिन बनाम ईपीएस ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री की पसंद के सवाल पर एमके स्टालिन 39.8 फीसदी के साथ थोड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि ई के पलानिस्वामी 38.8 फीसदी लोग अपनी पंसद बताते हैं. विजय को 13.6 फीसदी लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है. लिंग और जाति का फैक्टर यहां साफ नजर आता है. महिलाएं और एससी/दलित वोटर स्टालिन के पक्ष में ज्यादा झुके हुए हैं, जबकि पुरुष और अपर कास्ट हिंदू ईपीएस को अधिक पसंद करते दिख रहे हैं. युवा वोटरों में विजय के प्रति आकर्षण दिख रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की राजनीति अभी भी जाति, लिंग और उम्र के आधार पर बंटी हुई है।  डीएमके सरकार की परफॉर्मेंस पर राय बंटी हुई है. सिर्फ 35.5 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा या बहुत अच्छा बताया, जबकि 40.8 फीसदी ने खराब या बहुत खराब कहा. महिलाओं और बुजुर्ग वोटरों में संतोष ज्यादा है, वहीं युवा और अपर कास्ट हिंदू ज्यादा आलोचनात्मक हैं।  मुख्य मुद्दे क्या हैं? सर्वे में वोटरों ने जो मुद्दे सबसे ज्यादा उठाए उनमें कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (23.1 फीसदी), शराब और नशीले पदार्थ (20.8 फीसदी) और बेरोजगारी (17.3 फीसदी) प्रमुख हैं. भ्रष्टाचार, महंगाई और विकास संबंधी चिंताएं भी शामिल हैं. एससी/दलित वोटर बेरोजगारी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि अपर कास्ट वोटर कानून-व्यवस्था पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. ये मुद्दे चुनावी रणनीति तय करने में दोनों गठबंधनों के लिए अहम होंगे।  फ्रीबीज का असर सीमित तमिलनाडु में फ्रीबीज (मुफ्त योजनाएं) की राजनीति लंबे समय से चर्चा में रही है, लेकिन इस पोल में इसका प्रभाव काफी सीमित नजर आया. 44.2 फीसदी वोटरों ने कहा कि फ्रीबीज उनका वोट तय नहीं करते, जबकि 28.9 फीसदी ने फ्रीबीज देने वाली पार्टियों के खिलाफ वोट करने की बात कही. सिर्फ 8.6 फीसदी ही फ्रीबीज से सकारात्मक रूप से प्रभावित हैं. अपर कास्ट हिंदू (31.8 फीसदी) और OBC (30.6 फीसदी) फ्रीबीज के खिलाफ सबसे ज्यादा हैं, जबकि एससी/दलित वोटरों में वेलफेयर स्कीम्स अभी भी कुछ असर रखती हैं. यह इंगित करता है कि अब वोटर परफॉर्मेंस, मुद्दों और नेतृत्व पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।  ईरान युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक नजरिया पोल में एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भी सवाल पूछा गया. यह सवाल ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर था. 40.9 फीसदी वोटरों ने भारत के प्रदर्शन को बहुत अच्छा बताया, 15.3 फीसदी ने अच्छा, 20.6 फीसदी ने औसत और 17.8 फीसदी ने खराब राय दी. यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी तमिलनाडु के वोटर सकारात्मक सोच रखते हैं, हालांकि 5.5 फीसदी कुछ नहीं कह सकते रहे, जो जागरूकता की कमी या उदासीनता दर्शाता है।  नई सरकार या हंग असेंबली? वर्तमान पोल के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन 115-125 सीटों के साथ बहुमत (118) के काफी करीब है, लेकिन अभी भी अनिश्चितता बाकी है. डीएमके गठबंधन 104-114 सीटों पर सिमट सकता है, लेकिन छोटे बदलाव से नतीजे पलट सकते हैं. टीवीके अगर 4-5 सीटें भी जीत ले या वोट काटे तो गठबंधनों का गणित बिगड़ सकता है. पिछले पोल से तुलना करें तो पहले डीएमके को मामूली बढ़त दिख रही थी, अब एआईएडीएमके ने थोड़ी बढ़त हासिल कर ली है. यह दर्शाता है कि अंतिम चरण में कैंपेन, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन की मजबूती फैसला करेंगे. तमिलनाडु की राजनीति में ड्रामे की कमी नहीं रहती – पिछले चुनावों में भी अंतिम समय में कई सरप्राइज देखे गए हैं।  ऐसे में यह ओपिनियन पोल साफ संकेत देता है कि तमिलनाडु एक और कड़ी टक्कर देखने को तैयार है. एआईएडीएमके-बीजेपी को मामूली बढ़त है, लेकिन डीएमके की सत्ता में वापसी की संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती. विजय की टीवीके युवा वोटरों को आकर्षित कर कुछ हलचल जरूर पैदा कर सकती है। 

निर्मला सप्रे का हाई कोर्ट में बयान: मैं कांग्रेस में हूं, 9 अप्रैल को स्पीकर के सामने रखेंगे नेता प्रतिपक्ष सिंघार अपना पक्ष

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को बीना विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में उस समय नया मोड़ आया जब हाई कोर्ट के पूछने पर निर्मला सप्रे की ओर से दावा किया गया कि वे अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं। अब इस मामले में याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को विधानसभा स्पीकर के सामने नौ अप्रैल को अपना पक्ष रखना है। सिंघार की याचिका पर विस अध्यक्ष ने निर्णय क्यों नहीं लिया इसके मद्देनजर कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को नियत की है। सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पक्ष रखा। विगत सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि 16 माह बीतने के बावजूद सिंघार की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष ने निर्णय क्यों नहीं लिया। विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की है उल्लेखनीय है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यह याचिका दायर की है। सिंघार ने कांग्रेस की बीना से विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2024 को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की थी। लेकिन निर्धारित 90 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। विधायक पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया है कांग्रेस ने अपनी ही पार्टी की विधायक पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई, 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं।