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BJP का बड़ा प्लान: असम में 18% वोट हासिल करना, कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ी

गुवाहाटी  असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। भगवा खेमा अगर यहां सरकार बनाने में सफल होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50% वोट लाने का लक्ष्य दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 % था। वहीं, सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी। भाजपा अध्यक्ष के द्वारा दिए गए टारगेट को अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो सभी दलों का सूपड़ा साफ कर देगी। विपक्ष सिर्फ 20-28 सीटों पर सिमट जाएगा। आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता अभी भी कायम है। कांग्रेस की बात करें तो असम विधानसभा की राह आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे से जहां पार्टी आंतरिक चुनौती से जूझ रही है, वहीं महाजोत में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने को लेकर महाजोत के कई घटकदल दबाव बनाए हुए हैं। असम में अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस असम में पार्टी को एकजुट रखने में विफल रही। भूपेन बोरा ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी। पार्टी को डर है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे मतदाताओं में पार्टी की छवि कमजोर होगी। इसके साथ महाजोत में सीट बंटवारा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि, 2021 के महाजोत में कई बदलाव हुए हैं। एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) दोनों महाजोत से अलग हो चुके हैं। बीपीएफ अब एनडीए का हिस्सा है, वहीं मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अगुआई में एआईयूडीएफ अकेले चुनाव लड़ेगा। वहीं, असम जातीय परिषद और अखिल गोगोई का रायजोर दल अब महाजोत में शामिल हैं। कांग्रेस ने एजेपी और रायजोर दल दोनों को महाजोत में 11-11 सीट देने की पेशकश की है, पर दोनों दल इससे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस इन्हें अधिक सीट देती है, तो चुनाव में कांग्रेस को कम सीट पर लड़ना होगा।असम में दूसरे दलों के साथ गठबंधन किए बगैर भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।

मां कामाख्या के दरबार पहुंचीं प्रियंका गांधी वाड्रा, असम दौरे की शुरुआत पूजा से

गुवाहाटी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा गुरुवार को दो दिन के दौरे पर गुवाहाटी पहुंचीं। यहां उन्होंने मां कामाख्या देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर भी साझा की। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ''असम में मां कामाख्या देवी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया एवं असम व समस्त देश के कल्याण की कामना की। हमारे हर एक भारतवासी भाई-बहन पर मां की कृपा बनी रहे। जय मां कामाख्या।'' इस दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी माता की चुनरी ओढ़े, माला लटकाए और माथे पर टीका लगाए दिखाई दी। इस मौके पर उनके साथ लोकसभा सांसद गौरव गोगोई भी नजर आए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बोरझार में प्रसिद्ध गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के तुरंत बाद प्रियंका गांधी सीधे ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर पहुंची और वहां पूजा-अर्चना की। मंदिर दर्शन के बाद वह राजीव भवन पहुंचीं, जो असम प्रदेश कांग्रेस समिति का मुख्यालय है। यहां वह उम्मीदवारों के चयन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता करेंगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि प्रियंका गांधी असम में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर करीब से नजर रख रही हैं। पार्टी के पदाधिकारी बता रहे हैं कि इस बार उम्मीदवारों का चयन करने के लिए ऐसा व्यापक और व्यवस्थित तरीका अपनाया गया है, जिसमें जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और जिला स्तर के नेताओं से विस्तृत सुझाव और जानकारी ली जा रही है। राजीव भवन में होने वाली बैठकों में संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा, संगठन की तैयारियों की समीक्षा होगी, और राज्य नेतृत्व तथा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। पार्टी के अंदर के लोगों ने कहा कि चुनाव से पहले जीतने योग्य उम्मीदवार तय करने और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है। असम कांग्रेस के नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि प्रियंका गांधी आने वाले महीनों में राज्य के कई और दौरे कर सकती हैं। इन दौरों का उद्देश्य जमीन पर हो रही प्रगति पर नजर रखना, अलग-अलग क्षेत्रों से राजनीतिक सुझाव लेना और चुनाव अभियान तेज होने पर केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच करीबी बातचीत बनाए रखना होगा। कांग्रेस उम्मीदवार चयन का काम जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद फरवरी के अंत तक असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जा सकती है।

राहुल गांधी समेत 25 कांग्रेस सांसदों को हत्या की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कोटा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित 25 सांसदों की हत्या की धमकी देने वाले शख्स को राजस्थान में गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर धमकी वाला वीडियो वायरल होने के बाद कोटा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ऐक्शन लिया। राहुल गांधी और अन्य सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अपमान का आरोप लगाते हुए आरोपी ने यह धमकी दी थी। उसकी पहचान राज सिंह आमेरा के रूप में हुई है। वह खुद को करणी सेना और भाजपा का कार्यकर्ता बताते हुए कहता है कि राहुल गांधी को घर घुसकर गोली मार देगा। वहीं, भाजपा ने कहा है कि आरोपी का उनकी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि पुलिस को एक वीडियो प्राप्त हुआ था, जिसमें उद्योग नगर थाना क्षेत्र के प्रेम नगर निवासी राज आमेरा नामक युवक कांग्रेस सांसदों और राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी दे रहा था। वीडियो के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है। वीडियो में खुद को करणी सेना का बताते हुए शख्स ने संसद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर में हुई घटना का जिक्र किया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। आरोपी के पहले पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी खुद को फेमस करने के लिए इस तरह के विडियो बनाकर वायरल करता था। क्या बोला वायरल वीडियो में राज सिंह आमेरा वीडियो में कई आपत्तिजनक टिप्पणी करता दिखाई दे रहा है। वह खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए राहुल गांधी को घर में घुसकर गोली मारने की बात कहता है। वह कहता है, 'जिस तरह से भारत की संसद में कांग्रेस के 25 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपशब्द बोले हैं उसकी हम भाजपा के कार्यकर्ता भरसक निंदा करते हैं। इससे भाजपा और करणी सेना के कार्यकर्ताओं में काफी रोष व्याप्त है। दोबारा ऐसी घटना हुई तो उन सांसदों के घर में घुसकर हम तोड़फोड़ करेंगे। ये घटना राहुल गांधी के आदेश पर हुई इसलिए राहुल गांधी कान खोलकर सुन ले कि दोबारा ऐसी घटना हुई तो तेरे घर में घुसकर हम गोली मार देंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अगर 24 घंटे के अंदर अगर उन 25 सांसदों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो हम सभी को गोली मार देंगे। चाहे इसके लिए हमें जेल हो जाए।' भाजपा ने कहा- आरोपी से कोई संबंध नहीं भाजपा कोटा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने बयान जारी करते हुए कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं। भाजपा एक अनुशासित और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की पार्टी है। इस प्रकार की भाषा और आचरण हमारी विचारधारा और नैतिक मूल्यों के खिलाफ है। लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध किसी भी कृत्य को भाजपा कभी स्वीकार नहीं करती। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन से अनुरोध करता है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

राज्यसभा चुनाव: तेजस्वी की रणनीति क्या—एक सीट पर दांव या NDA करेगी पूरा कब्जा?

नई दिल्ली राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को 10 राज्यों में होने वाले चुनाव के ऐलान के साथ बिहार में यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्य की 5वीं सीट के लिए लालू यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) कैंडिडेट उतारेगी या सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को वॉकओवर दे देगी। बिहार से 5 राज्यसभा सांसद हरिवंश, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। लालू यादव की पार्टी से जिन दो सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वो दोनों राजद के खजाने के मजबूत खंभे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 243 सीटों की विधानसभा में 202 विधायक एनडीए के पास हैं। बचे हुए 41 एमएलए में महागठबंधन के 35 ही हैं। बाकी 6 असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के हैं। राज्यसभा सांसद चुनाव के तय नियमों के अनुसार इन 5 सीट पर होने वाले चुनाव में 41 विधायकों का वोट हासिल करने वाला ही संसद पहुंच पाएगा। एनडीए कैंप में बीजेपी के 89, जेडीयू के 85, लोजपा-आर के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 कुल 202 विधायक हैं। एनडीए कैंप से तीन सांसद रिटायर हो रहे हैं, जिनमें दो जेडीयू के हरिवंश और रामनाथ गुप्ता जबकि तीसरे रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा खुद हैं। एनडीए के पास 202 विधायक हैं तो चार सीट तो उनकी पक्की है। सारा मसला 5वीं सीट को लेकर फंस रहा है, जिसे जीतने के लिए एनडीए के पास जरूरत से 3 वोट कम हैं। 41-41 वोट के हिसाब से एनडीए के 164 विधायक 4 सांसद जिता सकते हैं। इसके बाद एनडीए के पास 38 वोट बचते हैं, जो 5वीं सीट के लिए सीधे तौर पर काफी नहीं हैं। लेकिन मजेदार बात यह भी है कि एनडीए से बाहर पूरे विपक्ष के पास कुल 41 वोट ही है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास राजद के 25, कांग्रेस के 6, सीपीआई-एमएल के 2, सीपीएम और आईआईपी के 1-1 कुल 35 विधायक ही हैं। इसके पास एक सांसद को जिताने के 41 वोट से 6 कम वोट हैं। विपक्ष में एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक हैं, लेकिन वो विपक्षी गठबंधन के साथ रहें, तभी राजद के एक सांसद की मुश्किल से बात बन सकती है। लालू और तेजस्वी के सामने मुश्किल ये है कि राज्यसभा लड़ना है तो पहले तो वो प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह में से किसी को कैंडिडेट चुनें। उसके बाद ओवैसी और मायावती के विधायकों का समर्थन भी हासिल करें। लेकिन, 5वीं सीट के लिए राजद के चुनाव लड़ते ही विपक्षी विधायकों के बीच खेला होने का खतरा बहुत ज्यादा है। एनडीए का सबसे बड़ा दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस खेल में अपना हुनर पहले के राज्यसभा चुनावों में भी दिखा चुकी है। बिहार में एनडीए के नेता रह-रहकर राजद और कांग्रेस में टूट की बातें करते ही रहते हैं। इस बार राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी के राजनीतिक सूझ-बूझ और समन्वय की परीक्षा हो सकती है, अगर वो राजद की तरफ से एक सीट के लिए कैंडिडेट देते हैं। बीजेपी की राजनीति के तौर-तरीकों से यह तय है कि एनडीए 5 की 5 सीट लड़ेगी। अगर तेजस्वी किसी को लड़ाते हैं तो चुनाव में कुल 6 कैंडिडेट होंगे और फिर वोटिंग हो जाएगी। नजदीकी नंबर के जटिल खेल में वोटिंग को अपने पक्ष में करना बीजेपी को बहुत अच्छे से आता है। महागठबंधन में तोड़-फोड़ हो या मायावती या ओवैसी की पार्टियों में, ऑपरेशन लोटस की सूरत में तेजस्वी को नुकसान के गंभीर आसार हैं। इसलिए चर्चा यह होने लगी है कि राजद विपक्ष को एकजुट रखने की कीमत पर चुनावी एडवेंचर से दूर रह सकता है।  

पालतू डॉग ‘हेनरी’ पर टकराव, महुआ मोइत्रा ने HC में लगाई गुहार

नई दिल्ली TMC नेता महुआ मोइत्रा ने अपने पालतू रॉटवीलर कुत्ते 'हेनरी' की कस्टडी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जय अनंत देहाद्रई के साथ चल रहे इस अनोखे कानूनी विवाद की पूरी जानकारी पढ़ें। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्रई के बीच कानूनी लड़ाई अब उनके पालतू कुत्ते 'हेनरी' (रॉटवीलर नस्ल) की कस्टडी तक पहुंच गई है। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें उनके पालतू कुत्ते हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया था। गुरुवार को जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने महुआ के पूर्व प्रेमी और वकील जय अनंत देहाद्रई को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान देहाद्रई व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और उन्होंने तर्क दिया कि मोइत्रा की इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए। कैश-फॉर-क्वेरी मामला यह पालतू कुत्ते का विवाद दोनों के बीच चल रही एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जंग का हिस्सा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब देहाद्रई ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के बदले व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से रिश्वत ली थी। गंभीर आरोप: देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि मोइत्रा ने अपने लोकसभा के लॉगिन क्रेडेंशियल हिरानंदानी को दिए थे, ताकि वह अपनी पसंद के सवाल सीधे पोस्ट कर सकें। आरोप है कि उनके द्वारा पूछे गए 61 सवालों में से 50 हिरानंदानी से संबंधित थे। संसद से निष्कासन: इन आरोपों के आधार पर लोकसभा की आचार समिति ने जांच की और उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश की। परिणामस्वरूप, 8 दिसंबर, 2023 को महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासित कर दिया गया। मोइत्रा का बचाव: उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हिरानंदानी उनके मित्र हैं, लेकिन किसी भी तरह के 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन) से इनकार किया। मानहानि का मुकदमा और कोर्ट की टिप्पणी महुआ मोइत्रा ने देहाद्रई और निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। हालांकि, मार्च 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने तब कहा था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत नहीं हैं कि मोइत्रा ने अपने लॉगिन क्रेडेंशियल शेयर किए और उपहार स्वीकार किए। फिलहाल यह मुख्य मामला अभी भी अदालत में लंबित है।  

सियासी पलटवार: 9 पार्षदों के फैसले से BJP बैकफुट पर, कांग्रेस की मेयर कुर्सी तय

मुंबई  महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार (18) को जानकारी देते हुए बताया कि अलग हुए पार्षदों की ओर से गठित भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन ने 90 सदस्यीय निकाय में 46 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कांग्रेस का मेयर बनना तय? उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने शिवसेना का समर्थन किया था. पिछले महीने हुए भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस अब अपना मेयर और डिप्टी मेयर नियुक्त करने के लिए तैयार दिख रही है. भिवंडी-निजामपुर में किस पार्टी के पास कितनी सीटें? महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिलीं थीं, उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिली.  वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई.

राज्यसभा में बदलता गणित: शरद-सिंघवी की कुर्सी खाली, BJP कब्जे की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

भूपेन बोरा ने कांग्रेस को ठुकराया, भाजपा में शामिल होने का लिया फैसला, CM हिमंत ने स्वागत किया

गुवाहाटी  असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर नया ट्विस्ट नजर आ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  दावा किया कि 22 फरवरी को भाजपा ज्वॉइन करेंगे। उन्होंने यह भी कहाकि उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी भाजपा में आएंगे। बता दें कि सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में शीर्ष नेतृत्व के मनाने पर उन्होंने अपने फैसले पर फिर से विचार करने की बात कहते हुए इस्तीफा वापस ले लिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी ने भी उन्हें मनाया था। लेकिन मंगलवार को उनके भाजपा जॉइन करने की बातें होने लगीं। हिमंत बोले उनके लिए घरवापसी हिमंत ने अपने बयान में कहाकि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पहले ही उनकी जॉइनिंग अप्रूव कर दी है। भाजपा में उनका स्वागत है। उन्होंने कहाकि भूपेन बोरा को वह सभी सम्मान दिया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं। भाजपा से जुड़ना उनके लिए घरवापसी जैसा होगा, क्योंकि यह उनके जैसे लोगों की ही पार्टी है, जो अपने पिता की विरासत वाली सियासत नहीं करते हैं। इससे पहले सरमा, गुवाहाटी के घोरमारा इलाके में बोरा के आवास पर गए, जहां उनकी पत्नी और बेटे ने मुख्यमंत्री की आरती की और स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व में कहा था कि बोरा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और वादा किया था कि वह उन्हें विधानसभा चुनाव में सुरक्षित सीट से जीतने में मदद करेंगे। दिन में क्या बोले थे भूपेन बोरा वहीं, आज दिन में कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूछे जाने पर मंगलवार रात तक इस बारे में अपना अंतिम निर्णय घोषित करेंगे कि वह इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं। बोरा ने आज सुबह पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं। बोरा ने बिना नाम लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि वह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में रहने को तैयार हैं, लेकिन एपीसीसी (आर) में नहीं, जो स्पष्ट रूप से पार्टी के धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन की ओर इशारा था। उन्होंने कहाकि मैंने अपने त्यागपत्र में भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है। आरोप भी लगाया था बोरा ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया। हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद समागुरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था। पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया था, जो भाजपा के दीप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए थे। बोरा ने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव में, कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का विरोध किया था और मैंने इस संबंध में पार्टी आलाकमान को कई बार पत्र लिखा था। चुनावों के बाद, गठबंधन खत्म हो गया और पिछले लोकसभा चुनाव में हुसैन को इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ, उन्होंने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।

असम राजनीति में नया ट्विस्ट: हिमंत सरमा-भूपेन बोरा गठजोड़, कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं

गुवाहाटी  असम विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. यह खबर आते ही कांग्रेस में भूचाल मच गया. पार्टी आलाकमान के एक्टिव होने और मान-मनौव्वल के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह ने जरूर कहा कि उन्हें मना लिया गया है और मामले को सुलझा लेंगे, लेकिन लगता है कि बात नहीं बन सकी है. यही वजह है कि अब भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने जा रहे है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को भपेन बोरा के घर जाकर मुलाकात किया. इसके बाद हिमंत ने मीडिया से कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे.उन्होंने कहा कि बोरा को बीजेपी में लेने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरी झंडी दे दी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया इस मामले में भूपेन बोरा से बात करेंगे. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा.  असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने की बात मीडिया से कह रहे थे, तो उनके बगल में भूपेन बोरा बैठे हुए थे. कांग्रेस को झटका ऐसे समय लगा है, जब प्रियंका गांधी असम के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि हेमंत सरमा और भूपेंद्र बोरा की यारी, असम में कितना पड़ेगी कांग्रेस पर भारी?  प्रियंका के दौरे से पहले कांग्रेस को लगा झटका कांग्रेस दस साल से असम की सत्ता से बाहर है और बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने के रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में कर ही थी. कांग्रेस अपनी वापसी के लिए असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में सौंप रही है. प्रियंका असम चुनाव के लिए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. प्रियंका असम के दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचेंगी.  प्रियंका गांधी अपने दो दिवसीय दौरा पर संगठन को सियासी धार देने की है. दोनों दिन प्रदेश नेताओं, जिला अध्यक्षों और फ्रंटल संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में बैठकों करेंगी. मकसद साफ है, पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद सुलझाना,आपसी तालमेल बेहतर करना और उम्मीदवारों के चयन से पहले एकजुट ढांचा तैयार करना. इन कवायद के बीच भूपेन बोरा का कांग्रेस से इस्तीफा और अब बीजेपी के दामन थामने से प्रियंका गांधी के जरिए माहौल बनाने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है.  भूपेन बोरा और हिमंता सरमा से सियासी यारी भूपेन बोरा से कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद दूसरे दिन ही असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को उनके घर जाकर मुलाकात की. इसके बाद बोरा के साथ मीडिया के सामने आए उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे. हिमंत सरमा ने कहा कि दिलीप सैकिया भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करेंगे. उनके साथ गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर में कई कांग्रेस नेता भी बीजेपी में शामिल होंगे. वे कांग्रेस में आखिरी मान्यता प्राप्त हिंदू नेता हैं. मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा को पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा क्योंकि यह एक ऐसी पार्टी है जिसमें उनके जैसे कई लोग हैं, जिनके पिता किसी उच्च पद पर नहीं रहे. कांग्रेस अब मुख्यधारा के असमिया लोगों की पार्टी नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि एक सच्चा कांग्रेसी नेता इस बात से दुखी होगा कि उसकी पार्टी चुनाव जीतने के लिए संघर्ष नहीं कर रही है.  हिमंत सरमा ने कहा कि मैंने भी यही पीड़ा झेली थी.जब मैं बीजेपी में शामिल होने गया, तब मुझे भी ऐसे फोन आए थे.ये लोग सामंतों की तरह जीते हैं. उन्हें लगता है कि एक फोन करने से फैसला बदल जाएगा. भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल होते हैं तो फिर उनकी और हिमंत की सियासी जोड़ी का मुकाबला कांग्रेस को असम में करना होगा?  भूपेन बोरा कौन है और क्या है सियासी आधार भूपेन बोरा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं. 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठनात्मक राजनीति में मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं. भूपेन बोरा ऐसे नेता हैं, जिन्होनें जमीनी कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाला नेता माना जाता है. भूपेन बोरा का जन्म असम में हुआ और उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी संगठन में अहम भूमिकाएं निभाते गए. वे चार बार विधायक रहे और आक्रामक राजनीति के लिए पहचाने जाते हैं. एक संगठनकर्ता के रूप में बोरा की पहचान अनुशासित कार्यशैली, कैडर-बेस्ड राजनीति और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति के लिए होती है.  कांग्रेस को दोबारा से खड़े करने में रोल अदा किया 5 साल पहले 2021 में जब असम में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था. विधानसभा चुनाव के फौरन बाद जुलाई में दो बार के विधायक रह चुके भूपेन बोरा को असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. करीब चार साल साल तक बोरा ने पूरी मेहनत की. उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर पूरे असम में पदयात्रा भी की और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर नज़र आए.प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने, बूथ-स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और युवाओं व अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने पर खास जोर दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली थी. यात्रा जब गुवाहाटी पहुंची तो प्रशासन ने राहुल गांधी को शहर के अंदर से गुजरने से रोक दिया और बाहर से निकालने को कहा.इससे नाराज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड पर आक्रामक प्रदर्शन किया जिसकी अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा कर रहे थे. उस समय भूपेन बोरा महज प्रदर्शन की औपचारिकता नहीं कर रहे थे बल्कि वाक़ई में आरपार में मूड में थे.  भूपेन बोरा ks बीजेपी में जाने से क्या होगा नुकसान असम विधानसभा चुनाव … Read more

5 साल पुराने कांड में विवाद, रवनीत बिट्टू ने प्रियंका गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

चंडीगढ़  केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला है। बिट्टू ने ऐलान किया है कि वह प्रियंका गांधी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करवाएंगे। यह शिकायत करीब पांच साल पहले किसान आंदोलन के दौरान घटी उस घटना की जांच के लिए होगी, जब बिट्टू को प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भेजा गया था और वहां उन पर 'जानलेवा हमला' हुआ था। बिट्टू का दावा: 'लिंचिंग' की साजिश थी 'द ट्रिब्यून' को दिए एक इंटरव्यू में रवनीत बिट्टू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें प्रियंका गांधी की मंशा पर कोई संदेह नहीं था, बावजूद इसके कि प्रियंका यह अच्छी तरह जानती थीं कि किसान बिट्टू के प्रति कितने आक्रोशित थे। बिट्टू ने कहा- मैं इस बात की जांच करवाना चाहता हूं कि आखिर मुझे वहां भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या थी। क्या वह कोई बड़ी घटना करवाना चाहती थीं? उस दिन कुछ भी हो सकता था। प्रियंका गांधी की ओर से यह एक हताशा भरा प्रयास था ताकि किसानों के बीच भाजपा विरोधी भावनाओं को और भड़काया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि वह और विधायक कुलबीर जीरा उस दिन किसानों की भीड़ द्वारा लगभग 'लिंच' कर दिए गए होते। उन्हें अब आशंका है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने का एक पूर्व-नियोजित 'प्लान और डिजाइन' तैयार किया गया था, ताकि इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदला जा सके। राहुल गांधी के 'गद्दार' वाले बयान पर पलटवार बिट्टू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस तरह की हल्की बातें करके अपने पद की गरिमा गिराई है। बिट्टू ने सवाल किया कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता और सांसद हैं जो दूसरी पार्टियों से आए हैं। तो क्या राहुल गांधी का मतलब है कि उनके साथ मौजूद ऐसे सभी नेता गद्दार हैं? कांग्रेस का पलटवार: 'आकाओं को खुश करने की कोशिश' पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने बिट्टू के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि बिट्टू द्वारा प्रियंका गांधी को इस विवाद में घसीटना केवल सुर्खियां बटोरने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- सालों बाद बिट्टू की याददाश्त अचानक वापस आ गई है, ठीक उसी वक्त जब उनके राजनीतिक आकाओं ने उन पर शिकंजा कसा है। पंजाब की राजनीति का यह 'फुस हो चुका कारतूस' अब सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिट्टू के आरोपों को बचकानी हरकत बताया। उन्होंने कहा- यह कहना कि प्रियंका गांधी ने उन्हें जबरदस्ती विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा, हास्यास्पद है। बिट्टू को अपने नए आकाओं की 'गुड बुक्स' में रहने के लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है, यह देखकर दुख होता है।