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बेल्जियम से आया 308 पहियों का महाकाय ट्रक, UP में देखने उमड़ी सैकड़ों की भीड़

लखनऊ उत्तर प्रदेश के चंदौली का एक वीडयो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें 308 पहियों वाला महाकाय ट्रक पचपेड़वा इलाके में पहुंचा है. नेशनल हाईवे-19 पर खड़े इस विशालकाय ट्रक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. लोग सड़क किनारे खड़े होकर 308 पहियों वाले इस महाकाय ट्रक की तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं. कई लोग सेल्फी लेने के लिए सड़क के बीच तक पहुंच जा रहे हैं।   करीब 180 टन वजनी वेसल को लेकर चल रहा यह ट्रक लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहा है. वहीं लोगों के उत्साह और भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद हैं, ताकि कोई अनहोनी न हो.जानकारी के मुताबिक, बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचे करीब 180 टन वजनी लोहे के इस विशाल पार्ट्स को नेशनल हाईवे-19 के जरिए उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ले जाया जा रहा है।  308 पहियों वाले ट्रक को देखने पहुंचे लोग  यह ट्रक ओडिशा से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा है. बिहार के कैमूर जिले में पहुंचने के बाद 308 पहियों वाले इस ट्रक पर लदे विशाल लोहे के पार्ट्स का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इसके बाद से ही इसे 'वायरल ट्रक' के नाम से जाना जाने लगा. अब वह जहां-जहां से यह गुजर रहा है, वहां इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है. ट्रक चालक ने मीडिया से कैमरे पर बात नहीं की लेकिन ऑफ कैमरा उसने अपना नाम शाहनवाज हुसैन बताया और खुद को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का रहने वाला बताया।  भीड़ की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा ट्रक उसके मुताबिक वह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से इस विशाल लोहे के पार्ट्स को लेकर बलरामपुर की ओर जा रहा है. रास्ते में लोगों की भारी भीड़ की वजह से ट्रक को आगे बढ़ाने में काफी परेशानी हो रही है.  308 पहियों वाला यह ट्रांसपोर्टर करीब एक लीटर डीजल में 4  किलोमीटर तक का माइलेज देता है. करीब 40 से 50 लोग इसके साथ चल रहे हैं और भारी भीड़ और रास्ते की परिस्थितियों की वजह से यह ट्रक एक दिन में लगभग 10 से 20 किलोमीटर ही चल पा रहा है।  इस ट्रक को देखने पहुंचे लोगों में भी खासा उत्साह है. गाजीपुर से शक्तिनगर जा रहे त्रिलोकीनाथ ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस 'वायरल ट्रक' के वीडियो देखे थे और आज पहली बार इसे सामने से देखने का मौका मिला. उन्होंने परिवार के साथ ट्रक की तस्वीरें भी लीं. वहीं मुगलसराय से पहुंचे साहिल अहमद ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस ट्रक को वायरल होते देखा था. मुगलसराय इलाके में ट्रक पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वह इसे देखने पहुंचे. मौके पर काफी भीड़ मौजूद है।  लोग ट्रक के साथ खिंचवा रहे फोटो इस्लामपुर से पहुंचे शाहजहां ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार 308 पहियों वाली गाड़ी पर इतना बड़ा आइटम लदा हुआ देखा है. उन्होंने इसे आकर्षण का केंद्र बताया. उनका कहना है कि उन्हें अंदाजा है कि यह किसी शुगर प्लांट से जुड़ा उपकरण हो सकता है.बारिश की वह से फिलहाल भीड़ कुछ कम हुई है, लेकिन इससे पहले बड़ी संख्या में लोग यहां मौजूद थे. लोग ट्रक के साथ सेल्फी ले रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव पर संकट के बादल, जनगणना के चलते बढ़ सकता है इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सियासी टाइमिंग के बीच उलझते नजर आ रहे हैं। जनगणना के कार्य के पूरा होने तक वार्डों के परिसीमन और नए नगरीय निकायों के गठन का काम अटकने के कारण चुनाव कार्यक्रम करीब छह महीने आगे खिसकने की पूरी संभावना बन रही है। परिसीमन और जनगणना का पेंच प्रदेश के कुल 413 नगरीय निकायों (जिसमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं) में 7,679 पार्षद पदों के साथ-साथ महापौर और अध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं। हालांकि, इन चुनावों की राह में जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। आबादी के नए आंकड़ों के बिना वार्डों का परिसीमन और आरक्षण तय करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अलावा, सरकार द्वारा कुछ ग्रामीण पंचायतों को मिलाकर नई नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की गई है, जिस पर जनगणना पूरी होने तक विराम लग गया है। आयोग की तैयारी बनाम सरकार के अधिकार क्षेत्र     राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा चुका है और ईवीएम की मांग का प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया गया है।     आयोग का स्पष्ट कहना है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है, जबकि वार्ड परिसीमन, नए निकायों का गठन और आरक्षण की पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। प्रत्यक्ष प्रणाली और राजनीतिक समीकरण इस बार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के नियम के चलते परिसीमन के बाद सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक दल इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, लेकिन चुनाव में देरी होने से दलों की पूरी चुनावी रणनीति और टिकट वितरण के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

लहसुन में छिपा कैंसर से लड़ने वाला राज! सागर यूनिवर्सिटी स्कॉलर UK में कराएगा पेटेंट

सागर वैसे तो लहसुन में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. लेकिन लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर गुण का फायदा लहसुन को सीधे खाने से नहीं मिलता. सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने लहसुन में ऐसे कंपाउंड की खोज की है, जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हुआ है. खास बात ये है कि मुंबई के ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) ने इस रिसर्च पर मुहर लगाई है।  रिसर्च का स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर टारगेटेड थेरेपी के जरिए सफल प्रयोग भी किया गया. ये कैंसर के अलावा दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है. अब बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च का यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहा है. वहीं इसका मेडिसिन के रूप में उपयोग हो सके, इसलिए क्लिनिकल ट्रायल की भी तैयारी की जा रही है।  बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च डॉ. हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने रिसर्च डिपार्टमेंट के असि. प्रोफेसर डॉ सी पी उपाध्याय के मार्गदर्शन में की है. इस रिसर्च की खासियत ये है कि इसमें लहसुन के एंटी कैंसर गुणों का उपयोग कर ऐसा बसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया, जो टारगेट डिलीवरी के जरिए सीधा कैंसर कोशिकाओं पर काम करता है और दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है, ये पूरी तरह से जैविक है।  रिसर्च स्कॉलर मनीष मांझी बताते हैं कि, ''स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लहसुन का उपयोग सदियों से होता रहा है. लहसुन में कई तरह के बायोटेक कंपाउंड पाए जाते हैं. हमने उन कंपाउंड को एक्सट्रैक्ट करके उसकी एंटी कैंसर प्रॉपर्टी पर काम किया है. स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर इसका परीक्षण किया गया, इसके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।  एंटी कैंसर गुणों से भरपूर लहसुन कई बीमारियों के इलाज में कारगर लहसुन में एंटी कैंसर गुण भी पाए जाते हैं. लेकिन जब इसे भोजन में उपयोग करते हैं, तो इसके एंटी कैंसर गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिलता है. क्योंकि मानव शरीर लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर कंपाउंड को अवशोषित नहीं कर पाता है. इस रिसर्च में इसी एंटी कैंसर कंपाउंड की खोज कर एक वसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया. जिसे टारगेट डिलीवरी के जरिए कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाया जाता है. ये कंपाउंड शरीर की दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने का काम करता है।  सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च का मुंबई की ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) में परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल पाया गया. रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी बताते हैं कि, ''स्तन कैंसर के लिए जो दवाएं उपयोग होती हैं, वह कैंसर के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं. लेकिन हमने नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए लहसुन का ऑर्गेनिक कंपाउंड वाला नैनोपार्टिकल बनाया, जो ज्यादा प्रभावी है. ये शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना कैंसर की कोशिकाओं पर काम करता है।  पेटेंट और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी रिसर्च गाइड असि. प्रोफेसर डॉ. सी पी उपाध्याय बताते हैं कि, ''लहसुन काफी गुणकारी है. लेकिन इसमें ऐसे कई तत्व होते हैं, जो मानव शरीर सीधे अवशोषित नहीं कर पाता है. जिससे लहसुन के गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिल पाता है. ऐसी स्थिति में हमारा उद्देश्य था कि हमारे पास लहसुन के बारे में जो जानकारी है, उसके आधार पर ये पता लगाएं कि लहसुन में ऐसे कौन-कौन से कंपाउंड हैं. जिस पर काम कर सकते हैं. विशेष तौर पर हमने एंटी कैंसर कंपाउंड पर काम किया, जिसमें तीन तरह के कंपाउंड मिले. लेकिन एक कंपाउंड Diallyl Disulfide मिला, जो विशेष रूप से स्तन कैंसर (Breast Cancer) और कैंसर कोशिकाओं में जहरीलेपन को बढ़ाकर उन्हें खत्म करने और कैंसर सिग्नल्स को रोकने में मदद करता है।  डॉ. उपाध्याय बताते हैं कि, ''ये कंपाउंड लहसुन में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन शरीर में अवशोषित नहीं होने के कारण हमने इसे आइसोलेट किया और वसायुक्त नैनो पार्टिकल बनाकर उस पर Diallyl Disulfide कंपाउंड को लोड किया. मुंबई में ACTREC में इसका परीक्षण कराया,तो पाया कि ये कैंसर की कोशिकाओं पर ही काम करता है और स्तन कैंसर को बड़ी तेजी से और प्रभावित तरीके से कम करता है. अब हम इसका यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहे हैं और भविष्य में इसका उपयोग मेडिसिन के तौर पर हो सके, उसके लिए भी ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में एक्सप्रेसवे का बड़ा नेटवर्क, भोपाल से दिल्ली-आगरा कनेक्टिविटी होगी तेज

सागर  मध्य प्रदेश के रोड प्रोजेक्ट जहां देश के दूसरे राज्यों को बेहतर कनेक्टिवटी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही मध्य प्रदेश के शहरों को देश के महानगरों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में बन रहे दो एक्सप्रेस वे के चलते देश की राजधानी दिल्ली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब आ रही है. दरअसल, भोपाल ग्वालियर और ग्वालियर आगरा एक्सप्रेस वे से मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर तक हाईस्पीड कनेक्टिवटी मिलने जा रही है।  भोपाल से ग्वालियर तक फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड कारीडोर बनेगा, तो ग्वालियर से आगरा तक 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा. इन दोनों एक्सप्रेस वे के कम्पलीट होने के बाद भोपाल से दिल्ली के बीच की दूरी में करीब 4 घंटे का फर्क आएगा. फिलहाल इस सफर में 11-12 घंटे लगते हैं. लेकिन इन दोनों प्रोजेक्ट के कम्पलीट होने पर 7-8 घंटे का समय लगेगा. फिलहाल इन प्रोजेक्ट के निर्माण के पहले की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक, 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इनका काम शुरू हो जाएगा।  भोपाल-ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे भोपाल ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच करीब 320 किमी का प्रोजेक्ट है. जो भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके से शुरू होकर ब्यावरा, गुना, शिवपुरी होते हुए ग्वालियर तक पहुंचेगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर का सफर तय करने में 425 किमी दूरी तय करना होती है, जो सीधे 100 किमी कम हो जाएगी और करीब 320 किमी का सफर तय करना होगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7-8 घंटे का समय लगता है, जो घटकर 5 से 6 घंटे रह जाएगा. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस प्रोजेक्ट का DPR तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया पर काम कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इसका काम शुरू हो जाएगा।  क्या कहते हैं जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि, ''ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दिल्ली से शानदार कनेक्टिवटी देने का काम करेंगे. इन प्रोजेक्ट का काम पूरा होते ही मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर सहित मुरैना, गुना, शिवपुरी, राजस्थान का धौलपुर और यूपी के आगरा मथुरा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जो दिल्ली एनसीआर को जोड़ने का काम करेगी।  इस प्रोजेक्ट के कारण भोपाल के उत्तरी इलाके की प्रापर्टी में उछाल आएगा.खासकर सागर विदिशा रोड़ पर सूखी सेवनिया से जहां रोड शुरू होगी, वहां रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ेगी. गुना और ग्वालियर बाॅयपास से गुजरने वाले इस फोरलेन पर लाजस्टिक कंपनियां अपने गोदाम, कोल्ड स्टोरेज चैन और ट्रक टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट आ रहे हैं. एक प्रोजेक्ट पर एमपीआरडीसी और एक पर एनएचएआई काम कर रहा है।  ग्वालियर-आगरा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे ग्वालियर से आगरा को जोड़ने के लिए 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो ग्वालियर के सुसेरा बाॅयपास से शुरू होगा. जो राजस्थान के धौलपुर से आगरा, आगरा इनर रिंग रोड से मथुरा और मथुरा से दिल्ली एनसीआर को जोड़ देगा. इसकी लंबाई करीब 90 किमी होगी. इसकी प्रारंभिक लागत 4600 करोड़ आंकी गयी है. इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में करीब 549 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।  फिलहाल भोपाल से आगरा जाने में करीब 11-12 घंटे समय लगता है. इस सिक्स लेन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ये सफर 7 घंटे में पूरा जाएगा. फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. ये प्रोजेक्ट ग्वालियर से मुरैना और मुरैना से धौलपुर, धौलपुर से आगरा और आगरा मथुरा होते हुए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा।   

₹250 करोड़ का चमचमाता जेट बनेगा CM का नया सफर साथी, जल्द होगी एंट्री

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की री-ट्रेनिंग और इस हाई-टेक विमान के प्रोटोकॉल को लेकर यह बात सामने आई है कि फिलहाल भारतीय पायलटों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। जमीनी स्तर पर एक्टिव रहते हैं सीएम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्रालय के वल्लभ भवन में बैठने की बजाए जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने और जायजा लेने अक्सर निकल जाया करते हैं। वे अक्सर ही अलग-अलग जिलों के प्रवास पर रहते हैं, इसलिए त्वरित गति का इस्तेमाल करने के लिए इस विमान का भी उपयोग किया जाएगा। सुपर-मिड साइज है यह बिजनेस जेट 6,297 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप रेंज, हवा में उड़ता आलीशान विमान और 250 करोड़ की कीमत वाला सुपर-मिड साइज बिजनेस जेट 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' अब मध्य प्रदेश के आसमान पर उड़ते रहेगा। मुख्यमंत्री जैसे अति-विशिष्ट और संवेदनशील पद की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर उठा रही है। कनाडा से उड़ान भरने को तैयार यह विमान 30 सितंबर तक भोपाल पहुंचने वाला है, लेकिन इससे पहले इसकी हर तकनीकी बारीकी को परखा जा रहा है। विमानन संचालनालय में नियमित पद पर पदस्थ सीनियर पायलट विश्वास राय इस नए प्लेन को उड़ाने के लिए कनाडा में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्लेन को उड़ाने के लिए तीन पायलटों की व्यवस्था रहेगी, लेकिन एक बार में दो पायलट ही प्लेन उड़ाएंगे। जब तक पायलट की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक विमान निर्माता कंपनी एक साल के लिए अपने एक पायलट की सेवाएं मध्य प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराएगी। तीसरे पायलट की नियुक्ति के लिए निजी एविएशन कंपनियों से दरें मांगी गई हैं। राज्य सरकार ने इस नए स्टेट जेट प्लेन की खरीदी के लिए अपने बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर से अत्याधुनिक चैलेंजर 3500 जेट विमान खरीदा जा रहा है। वर्तमान में, राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर किराए के विमानों पर निर्भर रहती है। नए विमान के आने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सरकार अभी किराए के विमान का उपयोग करने के लिए प्रति घंटा दो से पांच लाख रुपये किराया देती है। इसके अलावा, प्लेन का उपयोग हो या न हो, स्टेट हैंगर पर खड़े रहने का प्रतिदिन 10 लाख रुपये भुगतान करना होता है। इसके लिए अलग-अलग 12 विमान कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। पिछले लंबे समय से यही व्यवस्था है, जिस वजह से राज्य का एक बड़ा बजट किराया भरने में ही चला जाता है। यह जेट प्लेन केवल छह शहरों की हवाई पट्टियों पर ही उतरने लायक है। इन शहरों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सिंगरौली शामिल हैं। इन शहरों के अलावा मुख्यमंत्री इस प्लेन का उपयोग प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने में नहीं कर पाएंगे। इस प्लेन की सीटिंग कैपेसिटी आठ प्लस टू है, जिसका अर्थ है कि प्लेन में आठ यात्री बैठ सकेंगे और दो पायलट रहेंगे। देसी पायलट अटक रहे फिलहाल यह जानकारी सामने आई है कि इस हाई-टेक जेट को आसमान में उतारने के लिए भेजे गए दोनों भारतीय पायलट जब अपनी पहली कोशिश में कठिन टेस्ट पूरी तरह पास नहीं कर पाए, तो सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए उन्हें दोबारा गहन ट्रेनिंग दिलाई गई। अब ये दोनों पायलट सह-पायलट की भूमिका निभाएंगे। जबकि विमान की मुख्य कमान एक अनुभवी विदेशी पायलट के हाथों में होगी। विदेशी पायलट फिलहाल उड़ाएंगे विमानन नियमों के मुताबिक इसके लिए 'फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथराइजेशन' (FATA) की मंजूरी ली गई है। विमान नियम 1937 और डीजीसीए के कड़े मानकों के तहत 65 वर्ष से कम आयु और बड़े विमानों का कम से कम दो हजार घंटे का अनुभव रखने वाले विदेशी पायलट ही ऐसे विमानों को संभाल सकते हैं, जिसकी वैधता दिसंबर 2026 तक है। टर्बुलेंस को भी देता है मात गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुराने टर्बोप्रॉप विमान के मुकाबले यह नया विमान लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह जेट 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़कर टर्बुलेंस को मात देता है। इसकी 870 किमी/घंटा की रफ्तार इसे भोपाल से सीधे टोक्यो तक पहुंचाने में सक्षम है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के तमाम कड़े दौर से गुजरने के बाद यह वीवीआईपी जेट मुख्यमंत्री के सुरक्षित और आरामदायक दौरों का नया सारथी बनने जा रहा है। पुराने टर्बोप्रॉप विमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस जेट को उतरने के लिए कम से कम 5,500 फीट लंबे रनवे की जरूरत होगी, जिससे यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो सहित चुनिंदा हवाई पट्टियों पर ही संचालित हो सकेगा।  

फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का ऐलान, जोधपुर-जयपुर समेत इन शहरों के यात्रियों को मिलेगी सुविधा

 जोधपुर  त्योहारों में घर लौटने और यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। सूबेदारगंज से भगत की कोठी के बीच 1 अक्टूबर से फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा। द्विसाप्ताहिक ट्रेन दोनों दिशाओं में 18-18 फेरे लगाएगी। इससे जोधपुर, जयपुर, आगरा, मथुरा और इटावा सहित मार्ग के यात्रियों को अतिरिक्त रेल सुविधा मिलेगी। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेन संख्या 04193 सूबेदारगंज-भगत की कोठी फेस्टिवल स्पेशल 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को संचालित होगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 7.25 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 5.40 बजे भगत की कोठी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04194 भगत की कोठी-सूबेदारगंज फेस्टिवल स्पेशल 2 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को चलेगी। भगत की कोठी से यह ट्रेन रात 8.40 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 7.30 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। ट्रेन का संचालन इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से किया जाएगा। 20 डिब्बों की होगी ट्रेन सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार ट्रेन का दोनों दिशाओं में जोधपुर, गोटन, मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, कुचामन सिटी, नावां सिटी, फुलेरा, जयपुर, गांधीनगर, दौसा, बांदीकुई, राजगढ़, अलवर, मथुरा, आगरा कैंट, फतेहाबाद, इटावा, गोविंदपुरी और फतेहपुर स्टेशनों पर ठहराव रहेगा। ट्रेन में कुल 20 डिब्बे होंगे। इनमें सात एसी थ्री-टियर, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी, एक पावर कार और एक गार्ड डिब्बा शामिल है। रामदेवरा मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन बंद जोधपुर. बाबा रामदेव मेले के समापन के साथ रेलवे की ओर से संचालित मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन बंद किया जा रहा है। मेला अवधि में यात्रियों की सुविधा के लिए जोधपुर मंडल ने विभिन्न मार्गों पर पांच जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। भगत की कोठी-रामदेवरा के बीच दो जोड़ी तथा जोधपुर-रामदेवरा के बीच एक जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें संचालित की गईं। इसके अलावा लालगढ़-रामदेवरा के बीच फलोदी होकर दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन हुआ। श्रीगंगानगर-पोकरण के बीच संचालित मेला स्पेशल ट्रेन 26 सितंबर को अपनी अंतिम ट्रिप करेगी। साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश ट्रेन परिवर्तित मार्ग से चलेगी जयपुर. गाजियाबाद यार्ड में तकनीकी कार्य के कारण साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश ट्रेन परिवर्तित मार्ग से संचालित होगी। रेलवे के अनुसार ट्रेन 19031 साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश 4 दिसंबर को साबरमती से प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन परिवर्तित मार्ग दिल्ली-दिल्ली शाहदरा-नोली-शामली-टपरी होकर संचालित होगी। यह ट्रेन गाजियाबाद, नया गाजियाबाद, मोदीनगर, मेरठ कैंट, मेरठ सिटी, सकौती टांडा, मुजफ्फरनगर और देवबंद स्टेशनों पर ठहराव नहीं करेगी।

उज्जैन में सिटी बस सेवा होगी शुरू, 12 रूट पर चलेंगी AC ई-बसें

उज्जैन   महाकाल की नगरी उज्जैन में सरकारी परिवहन सेवा का इंतजार खत्म हो गया है। दो-तीन दिनों में सिटी 2 बस सेवा फिर शुरू होने वाली है। इसके लिए शुक्रवार-शनिवार को 10 ई-बसें (Ujjain e-buses service) शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को सबसे पहले उज्जैन दर्शन रूट पर उतारकर सिटी बस सेवा की शुरुआत की जाएगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना में शुक्रवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में भोपाल से कुछ जिलों में संचालन के लिए 351 बसों को झंडी दिखाई। उज्जैन की 10 सिटी बसें भी शामिल थीं। ये बसें शुक्रवार देर रात या शनिवार सुबह तक शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को 27 किलोमीटर से अधिक लंबे उज्जैन दर्शनी रूट पर संचालित किया जाएगा। संभावना है कि दो-तीन दिन में बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद यात्रियों को आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस इन ई-बसों मैं सुलभ सफर की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि, अभी इसका किराया घोषित नहीं किया गया है। जल्द ही किराया और फेरों की संख्या निर्धारित की जाएगी। यूसीटीएसएल को सौंपी संचालन की कमान मप्र में बसों के संचालन के लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (एमपीवायपीआइएल) नाम से राज्य स्तरीय कंपनी बनाई जा रही है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री है। परिवहन सचिव मनीष सिंह है। जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत उज्जैन में सिटी बस संचालन के लिए उज्जैन नई व्यवस्था में यूसीटीएसएल अब सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (यूसीटीएसएल) थी। एमपीवायपीआइएल के अधीन सहायक कंपनी के रूप में कार्य करेगी। इसका कार्य क्षेत्र भी बढ़ाया है। अब यूसीटीएसएल के अधीन संभाग के सभी सातों जिलों की बस सेवा रहेगी। उज्जैन से ही संभाग के जिलों की बस सेवा पर नियंत्रण रखा जाएगा। उज्जैन में संचालित ई-सिटी बसों का संचालन यूसीटीएसएल के पूर्व माध्यम से होगा। संचालन के लिए में ही निजी ऑपरेटर का चयन किया जा चुका है। शासन ने उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी को जिम्मेदारी भी सौंपी है। इस रूट पर चलेगी उज्जैन दर्शन सेवा है। उज्जैन दर्शन रूट की लंबाई 27.01 किलोमीटर है। यह सिटी बस के आंतरिक शहर के लिए निर्धारित 12 रूट में तीसरे नंबर का सबसे बड़ा रूट इसमें मेघदूत वन से बस मिलेगी। उज्जैन दर्शन रूट मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा, जो महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, शिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर, भर्तृहरि गुफाएं, गढ़कालिका, काल भैरव, सिद्धवट मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर से होते हुए पुनः मेघदूत वन पर समाप्त होगा। शुरुआत में इस रूट पर 10 बसें उतारी जाएंगी। कुछ दिनों में इस रूट पर बसों की संख्या 15 भी हो सकती है। तीन महीने में 12 रूट पर दौड़ेंगी 100 बसें शहर को सिटी बस के लिए केंद्र से कुल 100 ई-बसें आवंटित हुई है। मक्सी रोड पुराने डिपो पर ई-बस डिपो तैयार किया जा रहा है। यहां चार्जिग स्टेशन का निर्माण जारी है। एक-दो दिन में 100 में से 20 बसें उज्जैन पहुंच जाएंगी। इससे यूसीटीएसएल उज्जैन दर्शन के बाद एक-दो और रूट पर ई-बस सेवा शुरू कर देगा। संभावना है कि तीन महीने में सभी 100 बसें उज्जैन को उपलब्ध हो जाएंगी। ऐसा होने पर इस वर्ष के अंत या नए साल की शुरुआत में सभी 100 बसें निर्धारित सभी 12 रूट पर दौड़ती नजर आएंगी। ये रूट शहर के एक से दूसरे छोर को जोड़ने के साथ ही आसपास के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों को भी उज्जैन से जोड़ रहे है। जल्द ऑन रोड होंगी बसें बस सुविधा के लिए उज्जैन की बसों को भोपाल में हरी झंडी दिखाई गई है। 10 ई-बसें उज्जैन के लिए रवाना हो गई हैं। दो तीन दिन में इन्हें ऑनरोड कर दिया जाएगा। शुरुआत उज्जैन दर्शन रूट से की जा रही है। चरणबद्ध रूप से सभी 100 ई-बसें ऑनरोड हो जाएंगी।-संदीप सोनी, सीईओ, यूसीटीएसएल 11 रूट पर मिलेंगी बसें  उज्जैन दर्शन के बाद चरणबद्ध रूप से शेष 11 रूट पर सिटी बस सेवा शुरू की जाएगी। बसें इलेक्ट्रिक होंगी. 7 सीसीटीवी कैमरों संग अन्य सुरक्षा से लैस होंगी। रूट-यू1: तपोभूमि से पान बिहार, लंबाई 33.35 किमी। रूट-यू2: रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, लंबाई 9.48 किमी। रूट-यूः कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, लंबाई 12.94 किमी। रूट-यू 4: देवासगेट से तपोभूमि, लंबाई 16.78 किमी। रूट-यूडः देवासगेट से ताजपुर, लंबाई 16 किमी। रूट-यू 6: देवासगेट से सांवराखेड़ी नए आरटीओ, लंबाई 8.97 किमी। रूट-यू महाकाल चौराहे से अभिलाषा कॉलोनी, 11.52 किमी। रूट-यू४: देवासगेट से नानाखेड़ा, लंबाई 4.25 किमी। रूट-यू9: अवंतिका विवि जवासिया से नानाखेड़ा, लंबाई 17.84 किमी। रूट-यू 10: देवासगेट से मरलीपुरा, लंबाई 5.03 किमी। रूट-यू11: तपोभूमि से नजरपुर, लंबाई 28.44 किमी। रूट-यू 12: उज्जैन दर्शन, लंबाई 27.01 किमी। (अभी किराया दर व रूट पर बसों की संख्या घोषित नहीं की गई

बिहार जेल नियमों में बड़ा बदलाव, प्रधान जिला जज होंगे परिदर्शक मंडल के अध्यक्ष

 पटना  राज्य की जेलों की निगरानी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। सरकार ने बिहार कारा हस्तक के नियमों में संशोधन किया है। यह बदलाव सर्वोच्च न्यायालय के 30 जुलाई और 10 सितंबर 2026 के आदेश के आलोक में किया गया है। संशोधन के तहत नियम में जहां जिला मजिस्ट्रेट लिखा है, उसे हटाकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किया जाएगा। यानी अब जिले में जेलों के परिदर्शक मंडल के पदेन अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट की जगह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश होंगे। सभी जेलों के लिए बनेगा एक परिदर्शक मंडल संशोधित व्यवस्था के अनुसार जिले की सभी जेलों के सरकारी और गैर-सरकारी परिदर्शकों को मिलाकर एक परिदर्शक मंडल बनेगा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश इसके पदेन अध्यक्ष होंगे। सरकारी और गैर-सरकारी परिदर्शक मिलकर जिले की जेलों का निरीक्षण करेंगे। परिदर्शकों को कम से कम तीन महीने में एक बार जिले की जेलों का भ्रमण करना होगा। इस दौरान जेलों की व्यवस्था और बंदियों से जुड़ी स्थिति का जायजा लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में संशोधन नियम में यह बदलाव सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे भारत की जेलों में भेदभाव से संबंधित मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत जेलों की निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी में न्यायिक स्तर पर बदलाव किया गया है।  

धान बेचने मंडी जाने से पहले जान लें नियम, ई-खरीद एप से घर बैठे बनेगा ई-गेट पास

हांसी  जिले के खेतों में लहलहा रही धान की फसल अब मंडियों की ओर बढ़ने वाली है। इस बार एक लाख 79 हजार 300 एकड़ में धान की बिजाई हुई है। रकबा बढ़ने के कारण हांसी की मुख्य अनाज मंडी और सिसाय सब यार्ड में पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक आवक होने की संभावना है। खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के तहत सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होकर 15 नवंबर तक चलेगी। खरीद की जिम्मेदारी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को सौंपी गई है। तीनों एजेंसियां निर्धारित दिनों में धान खरीदेंगी। हांसी मंडी में मुख्य रूप से 1509, पीआर और 1121 किस्म का धान पहुंचता है। इनमें पीआर धान को सरकारी एजेंसियां खरीदेंगी, जबकि बासमती श्रेणी की 1509 और 1121 किस्म की खरीद व्यापारी करेंगे। बढ़े हुए रकबे को देखते हुए मंडी प्रशासन के सामने खरीद, तुलाई और समय पर उठान की बड़ी चुनौती रहेगी। किसानों को गेट पास के लिए मंडी के बाहर कतार में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए ई-खरीद एप की सुविधा दी गई है। सरकारी खरीद का लाभ लेने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य रहेगा। पंजीकरण नंबर डालकर घर बैठे बनेगा ई-गेट पास किसान को मोबाइल में ई-खरीद एप डाउनलोड कर मेरी फसल-मेरा ब्यौरा का पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद एप पर किसान और उसकी पंजीकृत फसल का पूरा रिकार्ड दिखाई देगा। किसान विभागीय शेड्यूल के अनुसार मंडी में फसल लाने का दिन चुनकर ई-गेट पास तैयार कर सकेगा। मंडी पहुंचने पर क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद प्रवेश मिलेगा। एप का इस्तेमाल नहीं करने वाले पंजीकृत किसान मंडी में मोबाइल नंबर बताकर भी गेट पास बनवा सकेंगे। इस व्यवस्था से मंडी के प्रवेश द्वार पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है। हांसी और सिसाय में तीन एजेंसियां संभालेंगी खरीद सरकारी खरीद के लिए हांसी में मुख्य यार्ड और सिसाय में सब यार्ड बनाया गया है। सिसाय केंद्र पर केवल धान खरीदा जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। मंडी प्रशासन खरीद एजेंसी और दिन की जानकारी किसानों तक पहुंचाएगा। ढेरी की खरीद से पहले पंजीकरण, गेट पास और गुणवत्ता की जांच होगी। संबंधित विभागों को मंडियों में सफाई, बिजली, पेयजल, तुलाई और उठान की व्यवस्था समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। धान में 17, बाजरे में 13 प्रतिशत नमी स्वीकार किसानों से धान और बाजरे की फसल अच्छी तरह सुखाकर मंडी लाने की अपील की गई है। धान में अधिकतम 17 प्रतिशत और बाजरे में 13 प्रतिशत तक नमी स्वीकार की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक नमी मिलने पर सरकारी खरीद नहीं होगी और किसान को फसल सुखाकर दोबारा लानी पड़ेगी। मंडी में गुणवत्ता की जांच के बाद ही ढेरी खरीद के लिए स्वीकृत होगी। किसानों के लिए अटल कैंटीन में 15 रुपये में भोजन की थाली उपलब्ध रहेगी। मंडी प्रशासन ने स्वच्छ पेयजल और सुलभ शौचालय की व्यवस्था करने का भी दावा किया है।

प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।