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राजस्थान में अगले चार दिन भारी बारिश के आसार, आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

जयपुर प्रदेश में मॉनसून सक्रिय है.  जयपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर संभाग में कई जगहों पर जमकर बरसात हुई. आज प्रदेश में बांसवाड़ा, बारां, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, सलूंबर, उदयपुर में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.  31 जिलों में आंधी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है.  राजधानी जयपुर में सोमवार को दिन भर की उमस के बाद देर शाम हल्की बरसात हुई.  इस दौरान सीकर के श्रीमाधोपुर में सर्वाधिक 75 मिमी बरसात दर्ज की गई. सड़कों पर भरा पानी बार‍िश होने से सड़कों पर पानी भर गया. जयपुर के मानसरोवर में सड़क धंस गईं, ज‍िसकी वजह से लंबा जाम लग गया. जाम से न‍िकलने के ल‍िए भार मशक्‍कत करनी पड़ी.   सक्रिय रहेगा मॉनसून मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक डॉ राधेश्याम शर्मा ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक राजस्थान में मॉनसून सक्रिय रहेगा. इस दौरान दक्षिण पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना भी है. पूर्वी भारत में बना डिप्रेशन अब दक्षिण-पूर्वी झारखंड और उत्तरी उड़ीसा के आसपास पहुंच गया है, जिसका असर राजस्थान में भी देखने को मिलेगा. भारी से अति भारी बारिश का अनुमान 6 से 9 जुलाई के बीच उदयपुर और कोटा संभाग सहित दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में कहीं-कहीं भारी से अति भारी बारिश हो सकती है.  वहीं जयपुर, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर और जोधपुर संभाग में भी मेघगर्जन के साथ मध्यम से तेज बारिश की संभावना है.   10 जुलाई के बाद बारिश में कमी की संभावना पश्चिमी राजस्थान में भी 7 और 8 जुलाई को बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं.  लगातार हो रही बारिश को देखते हुए लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है.  हालांकि, 10 जुलाई के बाद भारी बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना है.

DGP मकवाणा बोले- ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ही युवा अधिकारियों की सबसे बड़ी पूंजी

ईमानदारी और सत्यनिष्ठा एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है- डीजीपी मकवाणा नवचयनित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को डीजीपी का मार्गदर्शन मध्‍यप्रदेश संवर्ग के 8 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने की सौजन्‍य भेंट भोपाल  मध्‍यप्रदेश संवर्ग 2025 बैच के 08 परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्‍यालय में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सौजन्‍य भेंट की। डीजीपी मकवाणा ने सभी अधिकारियों से परिचय प्राप्‍त कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्‍होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरी तन्‍मयता से प्राप्‍त करें ताकि शासन की जनकल्‍याणकारी योजनाओं का उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन कर सकें। उन्होंने कहा कि वे अपने अधीनस्थ अमले से भी सीखने में संकोच न करें। पुलिस महानिदेशक ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नए आपराधिक कानून, साइबर सुरक्षा, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स एवं नशा मुक्ति जैसे विषय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बदलती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता है। डीजीपी ने अपने सेवाकाल के अनेक अनुभव साझा किए। उन्होंने मंदसौर की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी से बड़ी भीड़ को भी शांतिपूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने मुरैना में पदस्थापना के दौरान सड़क सुरक्षा अभियान और निष्पक्ष जांच के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि डायल-100 से 112 आपातकालीन सेवा में परिवर्तन आसान नहीं था। लगभग छह से सात महीने के अथक प्रयासों, टीमवर्क और समर्पण से इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए धैर्य और सतत प्रयास आवश्यक हैं। नक्सल चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में नक्सल समस्या से मुक्ति प्राप्त की। यह सुरक्षा बलों, प्रशासन और जनता के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और उसके बाद ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय हमेशा तथ्यों और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी (Honesty) और सत्यनिष्ठा (Integrity) एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है। अधिकारियों को भ्रष्टाचार, भौतिकवादी सोच और व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी पद का अहंकार अपने ऊपर हावी न होने दें और प्रत्येक नागरिक की समस्या को स्वयं की समस्या समझकर उसका समाधान करने का प्रयास करें। डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि सीखने का सर्वोत्तम अवसर होती है। इस दौरान किसी भी विषय पर प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए, चाहे वह जूनियर से पूछना हो या सीनियर से। निरंतर सीखने की भावना ही एक सफल अधिकारी की पहचान है। साहबगिरी' नहीं, जनसेवा का भाव रखें डीजीपी ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि चयन के बाद कभी भी 'साहबगिरी' को अपने सिर पर न चढ़ने दें। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच अपनाने, विनम्र बने रहने और अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ऐसा कैडर है जहां वरिष्ठ अधिकारी सहज उपलब्ध रहते हैं और सीखने का अनुकूल वातावरण मिलता है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को इस प्रतिष्ठित सेवा में चयन पर बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। इसी दौरान पुलिस महानिदेशक ने वर्तमान में प्रदेशभर में संचालित "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान तथा आगामी 15 जुलाई से प्रारंभ होने वाले "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और नशा मुक्त समाज के निर्माण में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों को इन अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाना चाहिए, ताकि समाज को साइबर अपराधों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से सुरक्षित रखा जा सके।  इस अवसर पर आर.सी.व्‍ही.पी. नरोन्‍हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की कोर्स एसोसिएट डायरेक्‍टर सुप्रिया शर्मा, पीएसओटू डीजीपी विनीत कपूर, एसओटू डीजीपी मलय जैन, प्रशिक्षु आईएएस खोत पुष्पराज नानासाहेब, सुआयुषी बंसल, माधव अग्रवाल, श्लोक वाइकर, सुआशी शर्मा, शैलेंद्र चौधरी, सुशिल्पा चौहान, सुसौम्या मिश्रा उपस्थित रहीं।  

बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित कई योजनाएं स्वीकृत

रायपुर. नकटी गांव में हालिया प्रशासनिक कार्रवाई के बाद आज जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) राशि परिषद के सदस्यों के बीच कलेक्ट्रेट स्थित रेड क्रॉस सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में करीब 37 करोड़ रुपये के DMF फंड के उपयोग को लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यावरण और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि DMF का प्रत्येक रुपया जिले के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और इसका उपयोग केवल जनहित तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास में हो। सांसद ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिक्षा के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बैठक में आत्मानंद स्कूलों के संचालन के लिए अतिथि शिक्षकों के वेतन मद में 8 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। वहीं सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 8.30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। अधिकारियों को अधूरी पाइपलाइन परियोजनाएं जल्द पूरी करने तथा गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वाटर रिचार्ज कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। पर्यावरण संरक्षण को लेकर सांसद ने सख्त रुख अपनाते हुए इस मद की राशि 60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने के निर्देश दिए। साथ ही जिले की बंद पड़ी खदानों की फेंसिंग और व्यवस्थितीकरण कर दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की बात कही। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 6 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इसके तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएगी। मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों की दवाइयों के लिए 50 लाख रुपये अलग से मंजूर किए गए। ग्रामीण विकास और अन्य योजनाओं को भी मिली मंजूरी बैठक में 348 गांवों में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने में सहायता, लंबित 14 हजार मामलों के त्वरित निराकरण, अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति, मॉडल महतारी सदन के निर्माण, आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार, कौशल विकास तथा पशुपालन विभाग के लिए भी वित्तीय प्रावधान किए गए। बैठक में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, DMF शासी परिषद के नवनियुक्त सदस्य, कलेक्टर गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ कुमार विश्वरंजन, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

जनसहभागिता से 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करेगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी

उत्सवपूर्ण माहौल में 12 जुलाई को एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी जनसहभागिता से 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करेगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा वृक्षारोपण महायज्ञ: मुख्यमंत्री योगी 12 जुलाई का वृक्षारोपण महायज्ञ बने जनभागीदारी का नया कीर्तिमान, सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ जुटें: मुख्यमंत्री योगी हरित उत्तर प्रदेश की दिशा में तेज कदम, मुख्यमंत्री ने की वृक्षारोपण महाभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा वन एवं वृक्षावरण बढ़ाने में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धि, अब हरित विकास के नए लक्ष्य की ओर बढ़ा प्रदेश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का व्यापक जनआंदोलन है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जनभागीदारी का महायज्ञ बनाते हुए आगामी 12 जुलाई को उत्साह और उत्सवपूर्ण वातावरण में इस वर्ष वृक्षारोपण महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है, इसमें प्रत्येक नागरिक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, किसान, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सभी सरकारी विभागों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और उसके वृक्ष बनने से तय होगी। यह औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा। मुख्यमंत्री सोमवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वृक्षारोपण महाभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में हरित विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पर्यावरण संरक्षण को जनसहभागिता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए तथा प्रत्येक विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी गंभीरता और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करे। उन्होंने निर्देश दिए कि 12 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान को पूरी तैयारी, समन्वय और जवाबदेही के साथ संपन्न कराया जाए। पौधरोपण स्थलों का पूर्व सत्यापन, गड्ढों की तैयारी, पौधों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का चयन, सिंचाई, जियो टैगिंग तथा नियमित अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधरोपण के समय प्रत्येक एक घंटे के अंतराल पर प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 15 प्रतिशत तथा वर्ष 2047 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आगामी पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण की कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे लगभग 72 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण की क्षमता विकसित होगी। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उत्तर प्रदेश ने हरित क्षेत्र बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। वर्ष 2017 से 2023 के बीच वन एवं वृक्षावरण में लगभग 3.38 लाख एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का वन एवं वृक्षावरण वर्ष 2017 के 9.18 प्रतिशत से बढ़कर 9.96 प्रतिशत हो गया है। वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा कार्बन स्टॉक में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच प्रदेश में 242 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जबकि वर्ष 2009 से 2016 के बीच यह संख्या 51.48 करोड़ थी। बैठक में बताया गया कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पौधशालाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्तमान में 1,939 विभागीय पौधशालाओं के साथ उद्यान, रेशम तथा निजी पौधशालाओं के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त 38 नई पौधशालाएं भी स्थापित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई के महाअभियान के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, पंचायतीराज, राजस्व, नगर विकास सहित सभी संबंधित विभागों से उन्हें आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप विभागीय माइक्रोप्लान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थी किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाए। रोपे जाने वाले पौधों में अधिकतम जैव विविधता सुनिश्चित की जाए तथा फलदार, छायादार, औषधीय और इमारती प्रजातियों का संतुलित समावेश हो। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान में रेलवे, रक्षा मंत्रालय, हाईकोर्ट सहित सभी न्यायालयों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कार्मिकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में अगले तीन दिनों के भीतर सभी स्तरों पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए। बैठक में आगामी विशेष पहलों की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत मिशन छाया, समरस वन, समृद्धि वन, सिटी वन, कपि वन, महर्षि चरक औषधि वन, ऊर्जा वन, पौराणिक वन तथा अविरल धारा वन जैसी अभिनव अवधारणाओं पर कार्य किया जा रहा है। हीट वेव के प्रभाव को कम करने के लिए सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर छायादार वृक्ष लगाने हेतु मिशन छाया संचालित किया जाएगा। खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए समृद्धि वन, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए समरस वन तथा मानव और वानर संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से नगर क्षेत्रों के बाहर कपि वन विकसित किए जाएंगे। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी, सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित विभागों के मंडल एवं जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़: CM साय का आज बड़ा एक्शन, दो विभागों की समीक्षा के साथ विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे बैठक

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री निवास से रवाना होकर स्पीकर हाउस पहुचेंगे, जहां वह विधानसभा सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात करेंगे. इसके बाद वे मंत्रालय महानदी भवन पहुंचकर झारखंड सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ बैठक करेंगे. दोपहर में मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जिनमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग और राजस्व एंवआपदा प्रबंधन विभाग की बैठक शामिल है. वहीं नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में बुलाई गई भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे. BJP विधायक दल की होगी बैठक रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी आज विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेगी. बैठक शाम 7 बजे नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में होगी. इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. पार्टी ने सभी भाजपा विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य की है. बैठक में मानसून सत्र की रणनीति, सरकार के एजेंडे और विपक्ष के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

रीवा लौटते समय दर्दनाक सड़क हादसा, पूर्व विधायक के परिवार के 5 सदस्यों की जान गई

 मैहर  मैहर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर  देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नादन थाना क्षेत्र के ग्राम रीघरा के पास रात करीब एक बजे हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। तेज रफ्तार से चल रही एक्सयूवी कार सामने चल रहे ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें सवार लोग कार के अंदर ही फंस गए। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां से जन्मदिन मनाकर वापस मैहर लौट रहे थे। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया घायल को प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर रेफर किया गया है। मृतकों की पहचान अंकुर पटेल, मृदुन पटेल, विशेष पटेल, हरिशंकर पटेल तथा एक अन्य परिजन के रूप में हुई है। संजीव कुमार पटेल की हालत चिंताजनक बताई जा रही है सभी मृतक पूर्व विधायक स्वर्गीय लालजी पटेल के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। हादसे में संजीव कुमार पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल भी अस्पताल पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।  

CM योगी आज प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी दौरे पर, कई विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी दौरे पर प्रतापगढ़ में 384 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास व जनसभा को करेंगे संबोधित सीएम योगी सुल्तानपुर में पीडब्ल्यूडी कार्यों की समीक्षा बैठक के साथ 819 करोड़ की परियोजनाओं की देंगे सौगात वाराणसी में विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद करेंगे बाबा कालभैरव और काशी विश्वनाथ के दर्शन करेंगे लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 7 जुलाई को प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री पहले प्रतापगढ़ पहुंचेंगे, जहां राजकीय इंटर कॉलेज में 384 करोड़ रुपए से अधिक की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।  प्रतापगढ़ दौरे के बाद मुख्यमंत्री सुल्तानपुर पहुंचेंगे, जहां कलेक्ट्रेट सभागार में वह अयोध्या मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा व नये कार्यों की कार्य योजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री सुल्तानपुर व इसौली विधानसभा क्षेत्रों में 819 करोड़ रुपए से अधिक की 99 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। सीएम यहां विभिन्न विभागों की योजनाओं के लाभार्थियों को चेक/प्रशस्ति पत्र प्रदान करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। सुल्तानपुर दौरे के बाद मुख्यमंत्री वाराणसी के सर्किट हाउस पहुंचेंगे, जहां वाराणसी के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद वह पहले कालभैरव मंदिर में और इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन/पूजन करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' के बेटे के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। सीएम सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे।

CM योगी ने प्रयागराज मंडल के 3194 विकास कार्यों को दी मंजूरी, परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

सीएम योगी ने प्रयागराज मंडल में प्रस्तावित 3194 कार्यों को दी स्वीकृति, चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की सावन में शिव भक्तों की सुविधा के लिए आए प्रस्ताव, कांवड़ पथ विकसित करने के निर्देश 15 अगस्त तक सभी स्वीकृत विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने का सीएम ने दिया निर्देश मंडल से प्राप्त प्रस्तावों की क्रमवार समीक्षा करने और सभी जनप्रतिनिधियों से उनके महत्वपूर्ण सुझाव एवं फीडबैक लेने के सीएम ने दिए निर्देश प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा की। सीएम ने विकास कार्यों की परियोजनाओं को स्वीकृति देने के बाद 15 अगस्त तक सभी परियोजनाओं में निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सावन में कांवड़ यात्रियों के साथ-साथ सामान्य नागरिकों की सुविधा के लिए अलग कांवड़ पथ बनाने के निर्देश दिये। मंडल के 3194 विकास कार्य की परियोजनाओं को सीएम ने दी स्वीकृति संगम नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2026-27 के लिए मंडल के 3194 विकास कार्य की परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें प्रयागराज जनपद के 1168 प्रतापगढ़ के लिए 1,092 , फतेहपुर के लिए 521 कार्यों और कौशाम्बी में लगभग 313 विकास कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को मेला प्राधिकरण स्थित आईसीसीसी सभागार में लोक निर्माण विभाग के प्रयागराज मंडल के कार्यों की समीक्षा बैठक में इसका अनुमोदन किया गया। बैठक में सबसे पहले प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग ने गत वर्ष स्वीकृत परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति से अवगत कराते हुए वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा क्षेत्रवार प्रस्तावित विकास कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने मंडल की कुल 28 विधानसभा क्षेत्रों-प्रयागराज के 12, प्रतापगढ़ के 7, फतेहपुर के 6 तथा कौशाम्बी के 3 विधानसभा क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों की क्रमवार समीक्षा की तथा सभी जनप्रतिनिधियों से उनके सुझाव एवं फीडबैक लिया।   समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री की तरफ से वर्ष 2026-27 के लिए प्रयागराज जनपद में लगभग ₹9,668.27 करोड़ की लागत से प्रस्तावित 1,168 कार्यों, प्रतापगढ़ में लगभग ₹2,053.36 करोड़ की लागत के 1,092 कार्यों, फतेहपुर में लगभग ₹3,378.37 करोड़ की लागत के 521 कार्यों तथा कौशाम्बी में लगभग ₹915.13 करोड़ की लागत के 313 विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई। सावन में कांवड़ पथ विकसित करने के निर्देश सावन का महीना निकट है इसे देखते हुए शिव भक्तों की सुविधा के लिए समीक्षा के दौरान कांवड़ यात्रा के समय शास्त्री पुल पर बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से पुल के समानांतर कांवड़ पथ विकसित करने का प्रस्ताव बैठक में दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए, जिससे कांवड़ यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित होने के साथ-साथ सामान्य यातायात एवं व्यापारिक गतिविधियां भी निर्बाध रूप से संचालित रह सकें। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों की परियोजनाओं को लेकर न हो विलंब इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा क्षेत्रवार प्राप्त विकास प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करें। स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का चयन किया जाए। जो निर्माण कार्य सबसे ज्यादा जरूरी हो उसका प्रस्ताव सबसे पहले दें। यदि किसी प्रस्ताव में संशोधन या नया सुझाव देना हो तो उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि समय पर मंजूरी दी जा सके। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी प्रक्रियाएं तय समय सीमा में पूरी हों।  सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त तक सभी स्वीकृत विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं की नियमित और प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने के लिए कहा ताकि सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

भारतीय कला-संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय मंच, भातखंडे के नए परिसर की रूपरेखा पर हुआ मंथन लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव देश-विदेश के कलाकारों का नया ठिकाना बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नवीन परिसर 'नादाधीनम् जगत्' की अवधारणा पर बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस परिसर सीएम योगी के विजन पर आगे बढ़ेगा भातखंडे, भारतीय संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय परिसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत भारतीय संस्कृति, संगीत, लोक परंपराओं और प्रदर्शन कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर एक ऐतिहासिक पहल बनने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के काकराबाद में प्रस्तावित इस विश्वस्तरीय परिसर को केवल संगीत विश्वविद्यालय तक सीमित न रखकर भारतीय संस्कृति के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से सोमवार को अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने परिसर की रूपरेखा पर विस्तृत मंथन किया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नया परिसर आने वाले सैकड़ों वर्षों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रदर्शन कलाओं का सबसे बड़ा केंद्र बने। बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को एक ही मंच पर समेटने वाला ऐसा संस्थान आज देश में नहीं है, जहां शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कलाएं, दृश्य एवं ललित कलाएं, साहित्य, दर्शन, योग, अध्यात्म, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कला शिक्षा का समन्वित अध्ययन एवं शोध हो सके। इसी दृष्टि से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के नए परिसर को देश के पहले समग्र 'संस्कृति विश्वविद्यालय' के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपॉजिटरी और भारतीय प्रदर्शन कलाओं के संग्रहालय जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में प्रस्तावित परिसर के लिए कई अत्याधुनिक सुविधाओं पर भी सहमति बनी। नए परिसर में संगीत, नृत्य, रंगमंच, योग एवं अध्यात्म, दृश्य एवं ललित कला, साहित्य एवं दर्शन, फिल्म निर्माण तथा कला एवं सांस्कृतिक प्रबंधन जैसे विषयों के विशेष विद्यालय स्थापित किए जाने के सुझाव दिए गए। साथ ही ध्वनि-विज्ञान आधारित अभ्यास कक्ष, आधुनिक नृत्य स्टूडियो, संगीत एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, एआई म्यूजिक लैब, विष्णु नारायण भातखंडे ग्रैंड ऑडिटोरियम, ब्लैक बॉक्स थिएटर, शास्त्रीय नृत्य थिएटर, रेसाइटल हॉल और मुक्ताकाशी मंच जैसी आधुनिक अधोसंरचनाओं का भी निर्माण करने का सुझाव दिया गाया। इसके अलावा सांस्कृतिक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, मीडिया एवं कंटेंट लैब तथा बौद्धिक संपदा (आईपी) सहायता केंद्र विकसित कर भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की योजना रखी गई। बैठक में पद्ममालिनी अवस्थी ने परिसर को प्रकृति और भारतीय परंपरा के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने व्यापक वृक्षारोपण, खुले एवं प्राकृतिक वातावरण, शिक्षकों के लिए आवासीय व्यवस्था, उत्तर भारतीय और कर्नाटक संगीत के समन्वय, उत्तर प्रदेश के पारंपरिक घरानों को संस्थान से जोड़ने, थिएटर कॉम्प्लेक्स, एग्जीबिशन हॉल, इंटरएक्टिव लर्निंग स्पेस तथा इंटीग्रेटेड नॉलेज सिस्टम पर आधारित विशेष लैब स्थापित करने का सुझाव दिया। वहीं प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने विश्वविद्यालय को संगीत संस्थान से आगे बढ़ाकर समग्र संस्कृति विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में पद्मप्रो. वामन केंद्रे सहित अन्य विशेषज्ञों ने लोक एवं जनजातीय कलाओं, थिएटर, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल आर्ट्स और साहित्य को एकीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल आर्ट सेंटर की स्थापना, इसे सभी कलाओं के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने तथा देश-विदेश के प्रख्यात कलाकारों को नियमित रूप से आमंत्रित कर विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनाने का सुझाव दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह परिसर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर की कला शिक्षा और शोध का अवसर भी उपलब्ध कराएगा। अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ऐसा विश्वस्तरीय संस्थान विकसित करने का अनूठा अवसर है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप भी हो। उन्होंने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को विश्व के अग्रणी प्रदर्शन कला संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए ऐसा परिसर विकसित किया जाएगा, जिसकी वास्तुकला, शैक्षणिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक वातावरण स्वयं भारतीयता का अनुभव कराए। यहां आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी, कलाकार और आगंतुक भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं से जुड़ाव महसूस करे और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए राष्ट्रीय स्तर की आर्किटेक्चरल डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित करने की भी योजना है, ताकि देश के श्रेष्ठ वास्तु विशेषज्ञ इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि परिसर की रूपरेखा में भारत के विभिन्न घरानों और सांस्कृतिक परंपराओं की भौगोलिक विविधता भी झलकनी चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक दायरे को पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं से आगे बढ़ाते हुए डिजिटल आर्ट्स, एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, वर्चुअल प्रोडक्शन, म्यूजिक टेक्नोलॉजी, अंतर्विषयक शोध, बौद्ध सांस्कृतिक दर्शन, सांस्कृतिक कूटनीति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि यह संस्थान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सके। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर भारतीय संस्कृति, संगीत और प्रदर्शन कलाओं के समग्र विकास का एक विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। यहां परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा, शोध और सृजन का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में कुलसचिव एस.पी. सिंह, पद्मभूषण पं. अजय चक्रवर्ती, प्रो. श्रुति बंदोपाध्याय, पद्मडॉ. शोवना नारायण, प्रो. अनुपम महाजन, पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह, पद्मप्रो. वामन केंद्रे, प्रो. सिद्धार्थ सिंह तथा डॉ. वंदना सहगल सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

UP में पौधरोपण का बनेगा नया रिकॉर्ड, CM योगी बोले- ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ के भाव को करें आत्मसात

'माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:' के भाव को आत्मसात कर पौधरोपण का नया रिकॉर्ड बनाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों व पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के पार्षदों आदि से किया संवाद 12 जुलाई को वृक्षारोपण महाभियान-2026 के तहत लगाएं ‘एक पेड़ मां के नाम’, उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे, सुबह 7 से शाम छह बजे तक होगा वृहद आयोजन मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से की अपील- जनसहभागिता से पौधरोपण महाभियान को बनाएं सफल, इसके लिए दो दिन के भीतर कर लें तैयारी  पौधे लगाएं और हर हाल में उसकी सुरक्षा पर भी दें पूरा ध्यानः मुख्यमंत्री 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति, इनकी सहभागिता से हासिल किया जाएगा हर लक्ष्यः मुख्यमंत्री  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने'पौधरोपण महाभियान-2026' के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद किया। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षदों आदि की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।   12 जुलाई को लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधेः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान जनांदोलन का स्वरूप ले चुका है। 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर भी पांच करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार विगत 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश में 247 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।  जनप्रतिनिधि दो दिन के भीतर बैठक कर पूरी करें तैयारी  मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। कई विशिष्ट वन भी किए जाएं स्थापित, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाए जाएं छायादार पौधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन स्थापित किए जाएं। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी हो। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएं। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाए।  हर हाल में सुनिश्चित हो पौधों की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपलब्ध कराया जाए। यह पौधा कुपोषण से बचाव में काफी कारगर साबित होता है। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से संवाद बनाकर उन्हें भी पौधरोपण जन अभियान से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत सरोवरों, नदियों के किनारे, खाली जमीन, हाइवे-एक्सप्रेसवे के किनारे, मंडी समितियों में आवश्यकतानुसार फलदार-छायादार पौधे रोपित किए जाएं। गंगा जी, यमुना जी समेत अन्य नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधे लगवाने के साथ इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ट्री गार्ड आदि लगाकर इनकी सुरक्षा भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।  नर्सरियों में उपलब्ध हैं 57 करोड़ से अधिक पौधे मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ वर्ष पहले जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ किया गया था, तब वन एवं उद्यान विभाग की नर्सरियों में पांच करोड़ पौधे भी उपलब्ध नहीं थे। आज स्थिति यह है कि दोनों विभागों के पास 57 करोड़ से अधिक पौधों का भंडार है। इनमें फलदार, औषधीय, इमारती तथा सजावटी प्रजातियों सहित सभी प्रकार के पौधे शामिल हैं और प्रत्येक जनपद में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा उत्तर प्रदेश  उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय दायित्व है। ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है और उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति  उन्होंने कहा कि प्रदेश के 72 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि सभी जनप्रतिनिधि पूरी सक्रियता से इस अभियान से जुड़ेंगे तो वृक्षारोपण का लक्ष्य सहजता से प्राप्त किया जा सकेगा और यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करेगा। मुख्यमंत्री का पौधों के संरक्षण व संवर्धन पर रहा जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण और संवर्धन की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई, सुरक्षा एवं देखरेख की व्यवस्था करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सुरक्षित पौधा ही भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेगा। महाभिय़ान को जन जागरूकता व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जोड़ें  मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आम, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, हरड़ सहित पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नुक्कड़ नाटक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए, जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वाभाविक जागरूकता और उत्साह का वातावरण बने। प्रत्येक कार्यक्रम की कराएं फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक वृक्षारोपण कार्यक्रम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कर वन विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इससे अभियान की पारदर्शी मॉनिटरिंग के साथ-साथ … Read more