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हिंदू महिला बनेगी मुस्लिम पति की संपत्ति की वारिस? अदालत में सुनवाई

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में इंदौर की एक हिंदू युवती और जबलपुर के मुस्लिम युवक हसनैन अंसारी के अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ा एक विवाद विशेष विवाह अधिनियम की संवैधानिकता के प्रश्न तक पहुंच गया है। युवती के पिता और विश्व हिंदू परिषद के धर्म प्रसार विभाग के पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा चार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका में मुस्लिम पति की संपत्ति में हिंदू पत्नी के उत्तराधिकार के अधिकार और विवाह के बाद उत्पन्न होने वाले कानूनी प्रश्न उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य प्रश्न है कि विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत मुस्लिम युवक और हिंदू युवती का विवाह होने के बाद हिंदू पत्नी को मुस्लिम पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार किस कानून के तहत मिलेगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। क्या है पूरा मामला? प्रकरण के अनुसार, युवती और हसनैन अंसारी ने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह के लिए आवेदन किया था। इस पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नवंबर 2024 में युवती के पिता की याचिका पर हाई कोर्ट की युगलपीठ ने विवाह प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब युवती के पिता की ओर से दायर नई याचिका में इस प्रकरण का दायरा केवल विवाह प्रक्रिया के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विशेष विवाह अधिनियम की धारा-चार के अंतर्गत हिंदू युवती और मुस्लिम युवक के विवाह पश्चात महिला व उसके बच्चों को मिलने वाले अधिकारों को सुनिश्चित किए जाने पर केंद्रित हो गया है। केंद्र सरकार का जवाब मिलने के बाद हाई कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा। याचिका में यह हैं प्रश्न? युवती के पिता की ओर से विशेष विवाह अधिनियम की धारा -चार को चुनौती देते हुए अंतरधार्मिक विवाह की वैधानिकता और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले उत्तराधिकार के अधिकारों पर सवाल उठाया गया है। याचिका में विशेष विवाह अधिनियम और मुस्लिम पर्सनल ला के बीच उत्पन्न होने वाली कानूनी स्थिति का भी मुद्दा उठाया गया है। ऐसे मामले में पत्नी और संतान के उत्तराधिकार तथा व्यक्तिगत कानून से जुड़े प्रश्नों पर भी न्यायालय से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।  

इंदौर T20 के लिए आउटफील्ड पर बनेगा ‘चेक्स’ पैटर्न, 1200 छात्र करेंगे रजिस्ट्रेशन

इंदौर इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी-20 इंटरनेशनल मैच की तैयारियां तेज हो गई हैं।मैदान को मैच के लिए तैयार करने के साथ इस बार टीवी प्रसारण और दर्शकों के लिए आउटफील्ड को खास लुक दिया जा रहा है। घास पर ‘चेक्स’ यानी चौकड़ी वाला पैटर्न तैयार किया जाएगा। मंगलवार को स्टूडेंट कन्सेशन टिकटों की बुकिंग शुरू होते ही 1200 छात्रों का रजिस्ट्रेशन कुछ ही मिनटों में पूरा हो गया। दस्तावेजों की जांच के बाद इन्हें टिकट दिए जाएंगे। सामान्य टिकटों की बिक्री 25 सितंबर से सामान्य श्रेणी के दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बिक्री 25 सितंबर की सुबह 6 बजे से शुरू होगी। ऐसे में मैच देखने के इच्छुक दर्शकों की नजर अब टिकट विंडो खुलने पर है। होलकर में भारत ने 4 में से 3 टी-20 जीते इंदौर के होलकर स्टेडियम में अब तक 4 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 3 मुकाबले जीते हैं, जबकि एक में उसे हार मिली। भारत का T20I रिकॉर्ड 75% जीत का है। अब 11 अक्टूबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाला मुकाबला इस मैदान का पांचवां टी-20 इंटरनेशनल होगा। शाम 7 बजे शुरू होगा मुकाबला भारत-वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज 6 अक्टूबर से शुरू होगी। इंदौर में सीरीज का तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे खेला जाएगा। इससे पहले 6 अक्टूबर को लखनऊ और 9 अक्टूबर को रांची में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी। सीरीज के आखिरी दो मुकाबले हैदराबाद और बेंगलुरु में खेले जाएंगे। 1 हजार से शुरू होगी टिकट की कीमत होलकर स्टेडियम में मैच देखने के लिए दर्शकों को कम से कम 1 हजार रुपए खर्च करने होंगे। यह सबसे सस्ते टिकट की कीमत है। वहीं, पैवेलियन का टिकट 12 हजार 500 रुपए का होगा। बाकी कैटेगरी के टिकटों की कीमत एमपीसीए जल्द जारी करेगा। वेस्टइंडीज की T20I टीम शाई होप (कप्तान), ज्वेल एंड्रयू, रोस्टन चेस, मैथ्यू फोर्ड, शिमरोन हेटमायर, अकील होसेन, शमार जोसेफ, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल, कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैमसन, रोमारियो शेफर्ड, शमार स्प्रिंगर। 22 दिसंबर 2017: रोहित का तूफान, भारत 88 रन से जीता होलकर में पहला टी-20 इंटरनेशनल भारत और श्रीलंका के बीच 22 दिसंबर 2017 को हुआ। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 260/5 का विशाल स्कोर बनाया। कप्तान रोहित शर्मा ने सिर्फ 35 गेंदों में शतक पूरा किया और 43 गेंदों पर 118 रन बनाए। केएल राहुल ने भी 89 रन की पारी खेली। जवाब में श्रीलंका की टीम 172 रन पर सिमट गई और भारत ने 88 रन से मुकाबला जीता। 7 जनवरी 2020: भारत ने 7 विकेट से जीता मैच दूसरा टी-20 इंटरनेशनल भारत और श्रीलंका के बीच 7 जनवरी 2020 को हुआ। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 142/9 रन बनाए। भारत ने केएल राहुल के 45 रन की मदद से 17.3 ओवर में 144/3 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत ने यह मैच 7 विकेट से, 15 गेंद बाकी रहते जीता। नवदीप सैनी प्लेयर ऑफ द मैच रहे। 4 अक्टूबर 2022: रुसो के शतक ने भारत को हराया होलकर में तीसरा टी-20 भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच 4 अक्टूबर 2022 को हुआ। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 227/3 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। राइली रुसो ने सिर्फ 48 गेंदों में शतक जड़ा। भारत की टीम 18.3 ओवर में 178 रन पर ऑलआउट हो गई और दक्षिण अफ्रीका ने 49 रन से जीत दर्ज की 14 जनवरी 2024: भारत ने तीसरी जीत दर्ज की चौथा टी-20 इंटरनेशनल भारत और अफगानिस्तान के बीच 14 जनवरी 2024 को खेला गया। अफगानिस्तान ने 172 रन बनाए। जवाब में भारत ने यशस्वी जायसवाल के 68 रन और शिवम दुबे के नाबाद 63 रन की मदद से 15.4 ओवर में 173/4 बनाकर मैच जीत लिया। भारत ने 6 विकेट से जीत दर्ज की। सामान्य टिकटों की ऑनलाइन बिक्री 25 सितंबर से सामान्य श्रेणी के क्रिकेट प्रेमियों के लिए ऑनलाइन टिकट बिक्री 25 सितंबर की सुबह 6 बजे से प्रारंभ होगी। इस घोषणा के बाद से ही मुकाबला देखने के इच्छुक दर्शकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। होलकर स्टेडियम में प्रवेश के लिए सबसे कम कीमत का टिकट 1 हजार रुपए निर्धारित किया गया है, जबकि पैवेलियन श्रेणी के टिकट का मूल्य 12 हजार 500 रुपए रखा गया है। अन्य श्रेणियों के टिकटों की दरों का आधिकारिक ऐलान मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा शीघ्र किया जाएगा। होलकर स्टेडियम में भारतीय टीम का शानदार रिकॉर्ड इंदौर का यह मैदान भारतीय टीम के लिए भाग्यशाली माना जाता रहा है। होलकर स्टेडियम में अब तक कुल 4 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से भारत ने 3 मैचों में जीत हासिल की है और केवल 1 मैच में पराजय का सामना करना पड़ा है। इस मैदान पर भारतीय टीम का जीत का प्रतिशत 75 रहा है। 11 अक्टूबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाला यह मैच इस स्टेडियम में खेला जाने वाला पांचवां टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा।  शाम 7 बजे से खेला जाएगा मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज के मध्य पांच मैचों की टी-20 सीरीज की शुरुआत 6 अक्टूबर से होने जा रही है। सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में तथा दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची में आयोजित होगा। इसके पश्चात सीरीज का तीसरा मैच इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे से खेला जाएगा। सीरीज के अंतिम दो मुकाबले क्रमशः हैदराबाद और बेंगलुरु के मैदानों पर आयोजित किए जाएंगे।

CM साय के नेतृत्व में ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आवास, सुरक्षा और सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आवास की सौगात, शांति बाई का बदला जीवन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा सुरक्षा और सम्मान ग्राम पंचायत धनौली की शांति बाई को आवास के साथ विधवा पेंशन से मिला आर्थिक संबल रायपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत धनौली निवासी श्रीमती शांति बाई के लिए पक्का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है। कभी मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों की चिंता के बीच जीवन बिताने वाली शांति बाई आज अपने पक्के और सुरक्षित आशियाने में सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत शांति बाई के परिवार को पक्का आवास उपलब्ध हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र और राज्य स्तर की योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांति बाई के लिए बदली जिंदगी की तस्वीर शांति बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश का मौसम शुरू होते ही घर की सुरक्षा और परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। घर के आसपास कीचड़ और पानी जमा होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। कच्चे घर में रहने के दौरान हर बारिश एक नई परेशानी लेकर आती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद उनकी जिंदगी में यह स्थिति बदल गई है। मजबूत दीवारों और सुरक्षित छत वाले नए घर ने परिवार को मौसम की चिंता से काफी राहत दी है। अपने नए आशियाने को देखकर शांति बाई के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन से जुड़ा प्रयास शांति बाई के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र सरकार की ग्रामीण आवास संबंधी योजनाओं के उस व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। उनके मामले में आवास की सुविधा के साथ सामाजिक सुरक्षा के रूप में विधवा पेंशन का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उन्हें नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। शांति बाई कहती हैं कि पक्का घर मिलने से परिवार को सुरक्षा और सुविधा मिली है। पेंशन की सहायता से घर के जरूरी खर्चों में भी मदद मिलती है। उनके अनुसार आवास और पेंशन, दोनों का लाभ उनके लिए जीवन को अधिक सुरक्षित बनाने वाला सहयोग साबित हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार केंद्र एवं राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ग्रामीण परिवारों के जीवन में आवास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इसी समग्र कल्याणकारी दृष्टिकोण का हिस्सा है। शांति बाई का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि किसी परिवार के लिए पक्का घर मिलने से केवल रहने की जगह नहीं बदलती, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और भविष्य को लेकर विश्वास भी मजबूत होता है। अब बारिश में घर की चिंता नहीं रहती शांति बाई अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि पहले बारिश के दिनों में कच्चे घर को लेकर चिंता बनी रहती थी। अब पक्का घर मिलने के बाद परिवार सुरक्षित महसूस करता है। वे आवास योजना का लाभ मिलने और पेंशन से आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। शांति बाई की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन में आने वाले बदलाव की एक व्यक्तिगत मिसाल है। पक्का आवास उनके परिवार को मौसम की कठिनाइयों से राहत देने के साथ सुरक्षित जीवन का आधार उपलब्ध करा रहा है, वहीं विधवा पेंशन उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। पक्का घर, सुरक्षित जीवन और सामाजिक सुरक्षा, शांति बाई के जीवन में इन सुविधाओं का साथ उनके लिए नई उम्मीद और संतोष का आधार बना है।

CM यादव 27 सितंबर को स्टार्टअप संचालकों से करेंगे संवाद

मुख्यमंत्री-स्टार्टअप संवाद 27 सितम्बर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्टार्टअप संचालकों से होंगे रूबरू-नए आइडिया पर होगी चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार 27 सितम्बर 2026 को आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, भोपाल में मुख्यमंत्री स्टार्टअप संवाद के तहत युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से प्रारंभ होगा। संवाद में प्रदेश से लगभग 200 स्टार्टअप संचालक सम्मिलित होंगे। एमएसएमई आयुक्त श्री कुमार पुरषोत्तम ने मंगलवार को वी सी के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों से अपने जिले के नव उद्यमियों को संवाद में सहभागिता करवाने के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिंदुवार समीक्षा की। स्टार्टअप संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के युवा, नवाचारी एवं उभरते हुए स्टार्टअप उद्यमियों से सीधे संवाद करेंगे। यह संवाद प्रदेश में विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम, युवाओं की उद्यमशील सोच, नवाचार तथा रोजगार सृजन की संभावनाओं को समझने और उन्हें प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ स्टार्टअप संस्थापकों को अपने अनुभव, उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ एवं सुझाव साझा करने का अवसर मिलेगा। एमएसएमई विभाग ने स्टार्टअप संचालकों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी जारी कर सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।  

लखपति दीदी योजना में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, 13.96 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर

छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक संपन्न लक्ष्य के 179 प्रतिशत महिलाएं लखपति दीदी बन हुईं आत्मनिर्भर रायपुर  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा संचालित लखपति महिला पहल को प्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिली है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023-26 के लिए छत्तीसगढ़ को 7.82 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक प्रदेश की 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।        लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के 27 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन ने लखपति महिला पहल के अंतर्गत प्रदेश में संचालित गतिविधियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। विभागीय अभिसरण से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर        बैठक में विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों को और गति देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल        लखपति महिला पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। बैठक में इस दिशा में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर, बिना PUC के 1 अक्टूबर से नहीं मिलेगा Fuel

 नई दिल्ली No Valid PUCC No Fuel Rule: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और आपका आना-जाना गाजियाबाद-दिल्ली के बीच होता रहता है तो ये ख़बर आपके लिए बेहद जरूरी है. गाजियाबाद में वाहन चालकों के लिए एक अक्टूबर से फ्यूल खरीदने के नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा. जिला पूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।  वाहन मालिकों से कहा गया है कि वे 30 सितंबर से पहले अपने वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांच लें और प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या जल्द समाप्त होने वाला है तो समय रहते उसे रिन्यू करा लें. जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंप पर फ्यूल देने से पहले वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की जाएगी।  इसके लिए जिले के पेट्रोल पंपों पर विशेष ऐप की व्यवस्था की गई है. वाहन का नंबर स्कैन या दर्ज करने के बाद ऐप के माध्यम से तत्काल पता चल सकेगा कि संबंधित वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध है या नहीं. वैध प्रमाणपत्र होने पर ही फ्यूल दिया जाएगा.  उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से फिलहाल व्यवस्था को लेकर पेट्रोल पंपों पर परीक्षण भी किया जा रहा है, ताकि एक अक्टूबर से इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कत न आए. पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित तिथि से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए।  वाहन चालकों को पहले से जानकारी देने पर जोर नई व्यवस्था को लेकर वाहन चालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिक आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय 30 सितंबर तक अपने दस्तावेज जांच लें. खासतौर पर ऐसे वाहन जिनका PUCC पहले ही समाप्त हो चुका है या उसकी अवधि खत्म होने वाली है, वे समय रहते प्रमाणपत्र बनवा लें।  हालांकि, ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि कई वाहन चालकों को अभी तक इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है. कुछ वाहन मालिकों ने प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और फ्यूल लेने से पहले उसकी जांच को लेकर जानकारी की कमी की बात कही. वहीं, कुछ वाहन चालकों ने प्रदूषण जांच को जरूरी बताते हुए व्यवस्था का समर्थन भी किया. दूसरी ओर, इसे लागू करने के तरीके को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आपात स्थिति में फ्यूल की जरूरत पड़ने पर क्या होगा और पेट्रोल पंपों पर जांच के कारण भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था होगी।  जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि बिना वैलिड PUCC वाहन चलाने पर केवल पेट्रोल-डीजल मिलने में परेशानी नहीं होगी, बल्कि नियमों के तहत चालान की कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है. विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ लोगों को समय से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित करना है। 

सिंहस्थ की तैयारियां तेज, उज्जैन में 50 किमी सड़कें और पानी-सीवरेज नेटवर्क बनेगा

 उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 50 किमी लंबी सीमेंट की सड़क बनाने का काम शुरू हो गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) 600 करोड़ रुपये की लागत से इनका निर्माण करवा रहा है। इसके लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया है। सड़कें बनाने की समय सीमा जुलाई 2027 तय की गई है। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में यह सड़कें करीब 24 मीटर चौड़ी रहेंगी। मेला क्षेत्र में कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां अभी फसल लगी हुई है। ऐसे में इन इलाकों में अभी सड़क बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा 20 किसानों को 9 करोड़ रुपये का मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री भी करवाई गई है। वहीं अन्य किसानों से भी जमीन को लेकर बात जारी है। जिन जमीनों पर फसल लगी है उसकी कटाई खत्म होने के बाद वहां सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा। सड़क के साथ पेयजल और सीवरेज की भी होगी व्यवस्था उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र में सड़कों के साथ पेयजल और सीवरेज की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों से जमीन अधिग्रहण के लिए यूडीए करीब 450 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सिंहस्थ क्षेत्र में सीवरेज निर्माण को लेकर पहले विरोध भी हुआ था। खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाने होते हुए गणेश चौक तक करीब 730 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस काम पर लगभग 9.80 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सोमवार से सड़क की सीमा तय करने के लिए नपती और मार्किंग का काम शुरू कर दिया गया है। इस सड़क चौड़ीकरण से कुल 272 भवन प्रभावित होंगे। नगर निगम की टीम ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर सड़क की नपती की और तय सीमा के हिसाब से भवनों को चिन्हित करना शुरू किया। मार्किंग के जरिए यह तय किया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण में कौन से भवन आएंगे। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर भवन निरीक्षक शिवम गुप्ता और निगम की टीम ने सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने सड़क की सीमा के हिसाब से नपती की और प्रभावित होने वाले भवनों से जुड़ी जरूरी जानकारी भी जुटाई। नगर निगम के मुताबिक, खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक का रास्ता शहर के मुख्य और व्यस्त रास्तों में से एक है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। इसी को देखते हुए इस रास्ते को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। नपती और सर्वे का काम पूरा होने के बाद नियमों के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

इंदौर एयरपोर्ट के पास शुरू हुआ अंडरग्राउंड मेट्रो टनल का काम

इंदौर  प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर के बाद अब मेट्रो रेल प्रशासन ने अपनी पहली भूमिगत मेट्रो निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया. मंगलवार को शहर के एयरपोर्ट स्थित साइट पर टनल बोरिंग मशीन की मदद से भूमिगत टनल निर्माण का कार्य शुरु हुआ है. यह इंदौर शहर के इतिहास में पहली बार है, जब टनल बोरिंग मशीन ने भूमिगत होकर टनल निर्माण का कार्य शुरू किया है।  निर्माण कार्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सख्त निर्देश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी टीम को आगामी टनल निर्माण कार्यों में सुरक्षा, गुणवत्ता एवं निर्धारित तकनीकी मानकों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।  उन्नत तकनीक से टनल निर्माण इंदौर में अंडरग्राउंड तरल की खुदाई के विरोध के चलते भूमिगत निर्माण के दौरान आमजन और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं. मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक चैतन्य ने बताया, " जमीन और भवनों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए विस्तृत इंस्ट्रूमेंटेशन स्क्रीम तैयार की गई है।  उन्होंने आगे बताया, "इसके अंतर्गत लगाए जाने वाले सेंसर जमीन और भवनों में होने वाले अत्यंत मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएंगे. इससे आवश्यकता होने पर समय रहते उचित निर्णय लिया जा सकेगा. इस प्रकार सुरंग निर्माण के दौरान आमजन की सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और जमीन की स्थिरता की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।  कैसे काम करती है टीबीएम नर्मदा? टीबीएम नर्मदा, अर्थ प्रेशर बैलेंस (ईपीबी) मिक्स शील्डतकनीक पर आधारित है. मशीन के आगे बढ़ने के साथ प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स स्थापित होती जाती हैं. निर्धारित अलाइनमेंट पर सटीक संचालन, गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, आपात स्थिति में वन सेकेंड इमरजेंसी स्टॉप, 24×7 कंट्रोल रूम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं टनल निर्माण की सुरक्षा एवं निगरानी सुनिश्चित करती हैं।  नर्मदा मशीन का कटिंग व्हील 6.65 मीटर व्यास का है और कुल लंबाई लगभग 102 मीटर है. इस मशीन ने 25 अप्रैल 2026 को थाईलैंड में Factory Acceptance Test (FAT) सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद इसे इंदौर लाया गया और साइट पर सावधानीपूर्वक असेंबल करने के पश्चात एयरपोर्ट स्टेशन से लॉन्च किया गया है. सतह से लगभग 20 मीटर तक की गहराई में यह मशीन एयरपोर्ट स्टेशन से भूमिगत टनल का निर्माण करेगी। 

डायल-112 हीरोज: आधी रात दो अलग-अलग घटनाओं में डायल 112 बनी मददगार—आधी रात रास्ता भटकी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को जवानों ने परिजनों से मिलाया

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता के साथ-साथ संवेदनशील मानवीय जरूरतों में भी तत्परता से लोगों की मदद कर रही है। 23 सितम्बर की देर रात प्रदेश में सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं में डायल-112 के जवानों ने अपनी तत्परता और संवेदनशीलता से एक ओर रास्ता भटकी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उनके परिजनों से मिलाया, वहीं दूसरी ओर घर में घुसे सांप को सुरक्षित पकड़वाकर परिवार को राहत दिलाई। सागर में आधी रात रास्ता भटकी बुजुर्ग महिला को मिला परिवार का सहारा सागर जिले के थाना बीना क्षेत्र में खुरई रोड स्थित पावर हाउस के पास 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला रास्ता भटक जाने के कारण अकेली मिलीं। इस संबंध में 23 सितम्बर को रात्रि करीब 1 बजे राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही बीना थाना क्षेत्र में तैनात एफआरवी वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक विक्रम प्रताप एवं पायलट फरहान खान ने मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग महिला को सुरक्षित संरक्षण में लिया। जवानों ने एफआरवी वाहन से आसपास के क्षेत्रों में जाकर परिजनों की तलाश की और लोगों से पूछताछ की। इसी दौरान महिला के परिजन भी उनकी तलाश करते हुए वहां पहुंच गए। पहचान एवं सत्यापन के बाद डायल-112 जवानों ने बुजुर्ग महिला को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। देवास में घर में घुसे सांप को सुरक्षित पकड़वाकर जंगल में छुड़वाया देवास जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत विकास नगर में 23 सितम्बर की रात करीब 2:20 बजे एक घर में सांप घुस आने की सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल से जिला देवास डायल-112 कंट्रोल रूम को प्राप्त हुई। सूचना पर तत्काल एफआरवी क्रमांक 08 को मौके के लिए रवाना किया। एफआरवी स्टाफ एएसआई सुरेश चंद्र शिवर एवं पायलट विजय मालवीय ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। घर के अंदर सांप मौजूद होने की जानकारी मिलने पर एफआरवी स्टाफ ने तत्काल सर्पमित्र को मौके पर बुलवाया। सांप को सुरक्षित पकड़वाकर जंगल में छुड़वा दिया गया, जिससे परिवार को राहत मिली और सांप को भी सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। डायल-112 एफआरवी स्टाफ की त्वरित कार्रवाई से कॉलर को तत्काल सहायता मिली। कॉलर ने डायल-112 की तत्परता की सराहना करते हुए पुलिस जवानों का धन्यवाद व्यक्त किया। डायल-112 — संकट की घड़ी में त्वरित सहायता और संवेदनशीलता का भरोसा मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही जरूरतमंदों की सुरक्षा और सहायता के लिए निरंतर तत्पर है। आमजन किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में डायल-112 पर कॉल कर पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 

योगी सरकार बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटी, एसएलडीसी के आधुनिकीकरण के निर्देश

लखनऊ  प्रदेश में सुचारु, सुरक्षित और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार विद्युत व्यवस्था को मजबूत बनाने पर लगातार जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने लखनऊ स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र के आवश्यक आधुनिकीकरण को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। ग्रिड फ्रीक्वेंसी स्थिर रखने और ओवरलोडिंग रोकने पर जोर निरीक्षण के दौरान रणवीर प्रसाद ने एसएलडीसी की कार्य प्रणाली, रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग, स्काडा सिस्टम और लोड प्रबंधन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सम्पूर्ण विद्युत व्यवस्था में एसएलडीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एसएलडीसी ही वह केंद्र है, जो प्रदेश के विद्युत भार (लोड) का रियल टाइम आंकलन एवं पूर्वानुमान करता है। उत्पादन केंद्रों से प्राप्त बिजली एवं वितरण निगमों की मांग के बीच संतुलन बनाता है। ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को स्थिर रखता है तथा लाइनों को ओवरलोड होने से बचाता है। सतर्कता से लोड डिस्पैच करने के निर्देश प्रमुख सचिव ने कहा कि ट्रिपिंग, ब्रेकडाउन की स्थिति में त्वरित रिस्टोरेशन एवं वैकल्पिक स्रोत से आपूर्ति सुनिश्चित करता है। नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर/विंड) के एकीकरण एवं ए.बी.टी. मीटरिंग का प्रबंधन करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाला एक महीना गर्मी एवं अधिक मांग के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है, इसलिए पूरी सावधानी के साथ लोड डिस्पैच किया जाए। जिससे कहीं भी अनावश्यक ओवरलोडिंग व ट्रिपिंग न हो और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति मिल सके।