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केंद्र की बड़ी पहल, दोराहा-धुरी में रेल ओवरब्रिज से बढ़ेगी पंजाब की कनेक्टिविटी, रवनीत बिट्टू खुश

चंडीगढ़  पंजाब को केंद्र सरकार की बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने घोषणा की कि दोराहा और धुरी में रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) बनाने को मंजूरी मिल गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। रवनीत सिंह बिट्टू ने इसे पंजाब के इंफ्रास्ट्रक्चर सफर में मील का पत्थर बताया और कहा कि ये प्रोजेक्ट सड़कों को जोड़ने से ज्यादा पंजाब की आर्थिक खुशहाली को रफ्तार देंगे। उन्होंने बताया कि ये परियोजनाएं लंबे समय से राजनीतिक कारणों से लटकी हुई थीं, लेकिन केंद्र सरकार ने प्राथमिकता देकर मंजूरी दी। लोग वर्षों से धरने-प्रदर्शन कर रहे थे।  अब जल्द काम शुरू होगा। कुल 124 करोड़ रुपए की इन परियोजनाओं से दोनों इलाकों में यातायात की पुरानी परेशानियां दूर होंगी। दोराहा (लुधियाना जिले में) में 70 करोड़ रुपए की लागत से आरओबी बनेगा। यह लेवल क्रॉसिंग नंबर 164ए के पास होगा, जो अंबाला-लुधियाना रेल खंड पर है। यहां ट्रेन गुजरने पर फाटक बंद रहते हैं, जिससे जाम लगता है और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ब्रिज बनने से सड़क यातायात सुचारू होगा, समय बचेगा और दुर्घटनाएं कम होंगी। धुरी (संगरूर जिले में) में 54 करोड़ रुपए से आरओबी का निर्माण होगा। यह बठिंडा सेक्शन के नॉन-इंटरलेवल क्रॉसिंग क्षेत्र में बनेगा, जहां जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग (जीएडी) को मंजूरी मिल चुकी है। धुरी में फाटक बंद होने से शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। कई बार 3-4 घंटे जाम रहता है, जिससे स्कूल, बाजार और रोजमर्रा का काम प्रभावित होता है। इस ब्रिज से एक लाख से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा होगा। ये परियोजनाएं पंजाब में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं। आरओबी से यातायात बेहतर होगा, व्यापार और परिवहन बढ़ेगा तथा दैनिक जीवन आसान बनेगा। केंद्र सरकार की यह पहल राज्य के विकास में बड़ा योगदान देगी। बिट्टू ने पंजाब के लोगों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि ये बदलाव आर्थिक प्रगति को नई गति देंगे।

2 लाख के केबल चोरी करते कबाड़ी समेत 6 गिरफ्तार

कोरबा. आरडीएसएस योजना के गोदाम से 2 लाख रुपये कीमत का एल्यूमिनियम केबल चोरी के मामले में उरगा पुलिस ने कबाड़ी समेत कबाड़ चोर गिरोह को पकड़ लिया। लबेद गांव में बिजली विभाग का केबल कन्वर्जन कार्य पूरा होने के बाद केबल-तार गोदाम में रखा गया था। सोमवार रात चोरों ने धावा बोलकर सारा माल उड़ा लिया। रिपोर्ट पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर सूचना से संदेह के आधार पर मालवाहक ट्रक तक पहुंची। चालक से सख्ती से पूछताछ करने पर उसने झगरहा के कबाड़ी मदन अग्रवाल (43) के संरक्षण में गिरोह द्वारा चोरी करना कबूल लिया। मुख्य आरोपी कबाड़ी मदन समेत सुरेश कुमार सोहा (34), संजय मंडावर (28), सचिन बागड़ी (25), अर्जुन गोड़ (22) और सागर कुमार बरेठ (22) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से चोरी का पूरा केबल-तार बरामद हो गया। सभी को कोर्ट पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। पुलिस ने अन्य संलिप्तों की तलाश जारी रखी है।

प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर सस्पेंस, GST विभाग में मचा हड़कंप, सरकार अनजान

लखनऊ अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तीफे का एलान किए जाने के बावजूद, अब तक उनका त्यागपत्र न तो शासन स्तर पर पहुंचा है और न ही राज्य कर आयुक्त कार्यालय में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि हो सकी है. सूत्रों के मुताबिक, विभागीय अधिकारी स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि जब तक लिखित रूप में इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक आगे की किसी भी कार्रवाई पर निर्णय नहीं लिया जा सकता. प्रशांत कुमार सिंह ने इसी मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावनात्मक बयान देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. इस एलान ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में बल्कि सियासी हलकों में भी हलचल मचा दी थी. यह इस्तीफा एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा गया, लेकिन उसी दिन देर रात उनके बड़े भाई डॉक्टर विश्वजीत ने यह आरोप लगा दिया था कि प्रशांत फर्जी दिव्यांग प्रमाण के सहारे नौकरी पाई और जब कार्रवाई होने की तैयारी थी तो उससे बचने को इस रूप में इस्तीफे दिया. अब जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, तो पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े होने लगे हैं. राज्य कर आयुक्त से मांगी गई पूरी रिपोर्ट इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ चल रही जांच, अब तक की गई विभागीय कार्रवाई, जारी नोटिस और भविष्य में संभावित कार्रवाई से जुड़े सभी बिंदुओं को शामिल किया जाए. सूत्रों के अनुसार, शासन यह भी जानना चाहता है कि इस्तीफे की घोषणा किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसका सीधा संबंध प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ चल रही जांच से है. रिपोर्ट शासन को मिलते ही आगे की रणनीति तय की जाएगी.  फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का दावा पूरे विवाद की जड़ में प्रशांत कुमार सिंह के सगे भाई, डॉक्टर विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए बेहद गंभीर आरोप हैं. डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की है. उन्होंने इस मामले में न सिर्फ विभागीय स्तर पर शिकायत की, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई. डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने 20 अगस्त 2021 को औपचारिक रूप से प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच कराने की मांग की थी. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने दो बार प्रशांत को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया, लेकिन दोनों ही मौकों पर वे पेश नहीं हुए. डॉ. विश्वजीत का कहना है कि यह अपने आप में संदेह पैदा करने वाला तथ्य है. यदि प्रमाणपत्र वैध और सही है, तो जांच से बचने की क्या आवश्यकता थी? डॉ. विश्वजीत सिंह ने उस पत्र को भी दिखाया है, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिव्यांग प्रमाणपत्र की विधिवत जांच कराने के निर्देश दिए गए थे. इस पत्र के सामने आने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया. सूत्र बताते हैं कि मऊ से जुड़े प्रकरण में सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे शासन को भेजा जाना है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं. बीमारी को लेकर सवाल डॉ. विश्वजीत सिंह ने एक और अहम सवाल उठाया है. उनका दावा है कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर प्रशांत कुमार सिंह ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया, वह बीमारी चिकित्सकीय दृष्टि से 50 वर्ष की आयु से पहले होना अत्यंत दुर्लभ है. ऐसे में कम उम्र में उस बीमारी के आधार पर दिव्यांगता का प्रमाणपत्र मिलना, कई सवालों को जन्म देता है. यही नहीं, डॉ. विश्वजीत का कहना है कि 2021 से अब तक प्रशांत कुमार सिंह को कम से कम तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा और न ही लिखित जवाब दिया. राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का विषय प्रशांत कुमार सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इन दिनों चर्चा में है. जानकारी के अनुसार, वे कभी वरिष्ठ नेता अमर सिंह की पार्टी ‘लोकमंच’ में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. इसके बाद उन्होंने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सेल टैक्स विभाग में चयन पाया. उनका एक और पोस्टर वायरल हो रहा है जिसमें भगवा बैकग्राउंड के बीच वह अपनी फोटो लगाए हैं और उस पर अटल बिहारी वाजपेई की कविता लिखी है. बताया जा रहा है कि वह बीजेपी से टिकट के दावेदार भी थे.

आगरा में ताबड़तोड़ पुलिस एनकाउंटर, राज चौहान हत्याकांड का मुख्य आरोपी अरबाज मारा गया

आगरा यूपी के आगरा में हुए राज चौहान हत्याकांड के मामले में पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन हुआ है. हत्यारोपियों से पुलिस की तीन अलग-अलग मुठभेड़ हुईं जिसमें मुख्य आरोपी अरबाज खान उर्फ मंसूरी ढेर हो गया. वहीं, दो अन्य आरोपी आशु तिवारी और मोहित पंडित के पैर में गोली लगी है. इस मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.   आपको बता दें कि आगरा CP दीपक कुमार के निर्देश पर डीसीपी सिटी अली अब्बास के नेतृत्व में ये बड़ी कार्रवाई हुई है. तीनों आरोपियों पर पुलिस ने 25-25 हजार का इनाम रखा था. तीनों ही बीते 23 जनवरी को हुए राज चौहान हत्याकांड में फरार चल रहे थे. राज चौहान की गोली मारकर हत्या की गई थी. इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने 9 टीमें बनाई थीं. इनपुट मिलने पर आरोपियों की घेराबंदी की गई. बचने के लिए इन्होने पुलिस टीम पर फायर किया. आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई. इसमें अरबाज मारा गया, जबकि आशु और मोहित घायल हो गए. उन्हें इलाज के लिए SN मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है. मुठभेड़ थाना ट्रांस यमुना और डोकी क्षेत्र में हुई.  आगरा पुलिस का बयान 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बरेली पुलिस ने लिखा- पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के निर्देशन में 29 जनवरी 2026 की रात चेकिंग के दौरान अभियुक्त मोहित पंडित को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में मोहित के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद की है. 23 जनवरी को हुई इस हत्या के बाद से ही पुलिस टीमें अपराधियों की तलाश में जुटी थीं. इसी तरह थाना डौकी पुलिस टीम द्वारा इनामिया अभियुक्त आशु तिवारी को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया. उसके कब्जे से 1 तमंचा, 1 जिंदा कारतूस व 1 खोखा कारतूस.315 बोर बरामद हुआ.   फिलहाल, आधी रात को हुई इन तीन मुठभेड़ों में एक बदमाश मारा गया जबकि दो को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया. हत्याकांड में शामिल कई और लोगों को चिन्हित किया गया है. उनकी भी गिरफ्तारी की कोशिश जारी है.

Property Alert: भोपाल के रियल एस्टेट में उछाल, कुछ इलाकों में कीमतें 20% तक बढ़ीं

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रॉपर्टी रेट में एक बार फिर बढ़ोतरी करने की तैयारी है। इस बार शहर के साथ-साथ जिलेभर की प्रापर्टी 15 से 20 फीसदी तक महंगी करने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर जिलेभर में जिन स्थानों पर अधिक दामों पर रजिस्ट्रियां हुईं हैं, वहां के रिकॉर्ड पंजीयन विभाग ने राजस्व विभाग से मांगा है। इन क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों और प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त के आधार पर प्रापर्टी के नए दाम निर्धारित किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि, उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक मंगलवार को तय थी, लेकिन किसी कारण से बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में जल्द ही बैठक आयोजित कर गाइडलाइन के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसे अंतिम रूप देने के बाद जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। इस तरह जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नई कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर रजिस्ट्रेशन और राजस्व विभाग के अफसरों द्वारा सर्वे जारी है। पटवारियों से तैयार कर मांगा गया रिकॉर्ड भोपाल जिले की नगरीय और ग्रामीण सीमा में आने वाले क्षेत्रों में इन दिनों जमकर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त की गई है। ऐसे में इन इलाकों का रिकॉर्ड पटवारियों से तैयार कर मांगा गया है, जिससे पता चल सके कि, यहां कितनी जगह तय दाम से अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां हुईं हैं। अधिक दाम पर होने वाली रजिस्ट्रियों को ही दाम में वृद्धि करने का आधार बनाया जाएगा। इसके लिए हुजूर, कोलार, बैरसिया तहसील के एसडीएम, तहसीलदार द्वारा पटवारियों से सर्वे करवाकर जानकारी जुटाई जा रही है। इन इलाकों में खूब बिक रही प्रापर्टी भोपाल के कटारा हिल्स, अवधपुरी, खजूरी कलां, 11 मील, सहारा एस्टेट, सलैया, मिसरोद, समरधा, कोलार, नर्मदापुरम रोड, रातीबड़, नीलबड़, मुगालिया छाप, ईंटखेड़ी छाप, फंदा, खजूरी सड़क, भैंसाखेड़ी, कोलूखेड़ी, परवलिया सड़क, चंदूखेड़ी, गांधीनगर, जेल रोड, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, बिलखिरिया, रायसेन रोड, कान्हासैया, ओंकारा सेवनियां, सूखी सेवनियां, भोपाल बायपास, जगदीशपुर, ईंटखेड़ी, लांबाखेड़ा, करोंद, पलाशी, मुबारकपुर, डोबरा, परेवाखेड़ा, अचारपुरा, पुरामनभावन, देवलखेड़ी, गोलखेड़ी, श्यामपुर समेत नगरीय और ग्रामीण सीमा में प्रापर्टी खरीदी जा रही है। फरवरी में तय होंगी नई दरें मीडिया रिपोर्ट्स में पंजीयन विभाग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने का हवाला देकर बताया कि, कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर तैयारियां चल रही हैं, कुछ ही दिन में प्रस्ताव तैयार होगा, जिसे उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में रखा जाएगा। जिन क्षेत्रों में तय दाम से अधिक दाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं, वहां पर 15 से 20 फीसदी तक प्रापर्टी रेट में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए राजस्व विभाग से जानकारी मांगी गई है।

ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत, 5 रुपये में मिले 1 लाख 57 हजार नए विद्युत कनेक्शन

अब तक एक लाख 57 हजार ग्रामीण कृषकों ने लिया मात्र 5 रुपये में नवीन विद्युत कनेक्शन भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है। नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

पीएम सूर्य घर योजना से बड़ा लाभ, 29 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के खातों में पहुंचे ₹228+ करोड़

पीएम सूर्य घर योजना में अब तक 29 हजार 275 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयन्त्र लगाने पर 78 हजार की सब्सिडी मिलेगी भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल 29 हजार 273 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इन्हें 228 करोड़ से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। तब से लेकर आज दिनांक तक हजारों बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। योजना में शामिल होने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।  

खेती को राहत: रबी सीजन से पहले 400 केवी विद्युत टावर मजबूत किए गए

रबी सीजन में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने चार्ज 400 केवी टावरों में की गई स्ट्रेंथनिंग भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 400 केवी कटनी–दमोह एक्स्ट्रा हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन के टावरों के सुदृढ़ीकरण का प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इनमें से अनेक टावरों का काम चालू ट्रांसमिशन लाइन में ही किया गया ताकि प्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों और उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होती रहे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि बिरसिंहपुर थर्मल पावर प्लांट से विद्युत की निर्बाध निकासी तथा रबी सीजन में बढ़ी हुई अधिकतम विद्युत मांग के बीच प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाये रखने की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद 400 के वी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों की स्ट्रेंथनिंग का कार्य बिना शटडाउन लिए, चालू लाइन पर ही किया गया। इससे उत्पादन एवं आपूर्ति पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इसलिए जरुरत पडी स्ट्रेथनिंग एवं रेट्रोफिटिंग की एम पी ट्रांसको के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस विभाग के मुख्य अभियंता  दीपक कुमार अग्रवाल ने बताया कि समय के साथ कमजोर हुए कुछ टावरों को मजबूती प्रदान करने तथा बदलती मौसमीय परिस्थितियों और तेज हवाओं को ध्यान में रखते हुए एमपी ट्रांसको प्रबंधन द्वारा टावरों का टेक्निकल आडिट करवाने के बाद स्ट्रेंथनिंग एवं रेट्रोफिटिंग का निर्णय लिया गया था।  

झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ. असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा? असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है. वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है. हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है. गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है? सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके. गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें. हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है? कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले: इंडिया-EU ट्रेड डील से राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूती

भारत और यूरोपियन यूनियन ट्रेड डील से राज्यों को भी मिलेगा लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते (न्यू ट्रेड डील) पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत में आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिए यूरोपियन यूनियन के साथ यह ट्रेड डील अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इस डील से देशभर में वस्तुएं सस्ती होंगी और राज्यों को भी इसका भरपूर लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ट्रेड डील हमारी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक रूप से समृद्ध और सशक्त हो रहा है। दुनिया के कई देशों में आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर उथल-पुथल का वातावरण बना हुआ है। ऐसे समय में भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों से डेढ़ अरब की आबादी के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। यह ट्रेड डील इसी दिशा में एक बेहद कारगर कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया को दिए संदेश में यह विचार व्यक्त किए।