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धोखाधड़ी मामले के बाद बड़ा फैसला, खिलाड़ियों की कारतूस खरीद पर नजर; गन लाइसेंस पर लगी सीमा

भोपाल. भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा। यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के 'खोखों' (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग से हटाया गया अतिक्रमण, 2 मंजिला होटल ध्वस्त

चित्तौड़गढ़ विश्व विरासत में शुमार ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर प्रशासन का बुलडोजर चला. फोर्ट के भीतर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने यह कार्रवाई की. यहां पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध 2 मंजिला होटल बनाया जा रहा था. प्रशासन रविवार (14 जून) अलसुबह भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण को ढहा दिया. सुबह ठीक 4 बजे, जब पूरा शहरवासी गहरी नींद में थे, तब प्रशासनिक अमला अपने दुर्ग पर पहुंचा. अवैध रूप से बन रही इमारत को जमींदोज करने के लिए 10 जेसीबी, 8 ट्रेक्टर, 3 ब्रेकर मशीनों की मदद ली गई. सुरक्षा के लिहाज से दुर्ग की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया. चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. शहर कोतवाली में नामजद मामला भी दर्ज पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठक में प्लानिंग बनाई गई और आज सुबह एक्शन लिया गया. जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. कलक्टर के आदेश के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में एक नामजद मामला भी दर्ज हुआ. पुरातत्व विभाग की जमीन पर पहली बार ऐसी कार्रवाई पुरातत्व विभाग के अधिकारी मनोज द्विवेदी ने बताया कि हमारे संरक्षित क्षेत्र में यह अवैध निर्माण किया गया था. अवैध निर्माण हटाने को लेकर पहले नोटिस भी दिया गया था. जिला प्रशासन के सहयोग से पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण होटल को हटा दिया गया है. राजस्थान में यह अपने आप में पहली ऐसी बड़ी कार्रवाई है, जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है. अगर ऐसी कार्रवाई होती रही, तो हमारी राष्ट्रीय धरोहरें हमेशा सुरक्षित रहेंगी. 8 से 10 रेस्टोरेंट पर चल सकता है बुलडोजर प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र के आसपास हलचल तेज हो गई है. साल 2020 के बाद से चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर करीब 8 से 10 अवैध रेस्टोरेंट और होटलों का निर्माण हुआ है. इन सभी पर कार्रवाई के लिए दिल्ली स्थित आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को पत्र लिखा जा चुका है. जैसे ही वहां से उच्च स्तरीय स्वीकृति मिलेगी, दुर्ग पर बने अन्य अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है.

रांची के तीन लापता बच्चों का मामला, CCTV बंद होने से बढ़ी जांच की मुश्किलें

रांची धुर्वा क्षेत्र से लापता तीन बच्चों करण, अर्जुन और शिवा नायक की तलाश में जुटी पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, तीनों बच्चे 3 जून को हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और दोपहर तक स्टेशन परिसर में मौजूद थे। हालांकि, जिस समय उनके गायब होने की आशंका है, उसी दौरान स्टेशन का सीसीटीवी सिस्टम करीब तीन घंटे तक बंद रहा, जिससे जांच में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज के अनुसार तीनों बच्चे स्टेशन के प्रवेश द्वार से अंदर गए थे। कुछ समय तक स्टेशन परिसर में रहने के बाद वे बाहर निकले और यार्ड क्षेत्र की ओर चले गए। बाद में वे दोबारा स्टेशन के अंदर आए। इस दौरान तीनों बच्चों को स्टेशन परिसर स्थित प्याऊ में पानी पीते हुए भी देखा गया। इसके बाद वे स्टेशन परिसर में बैठे नजर आए। जांच में पता चला है कि दोपहर करीब डेढ़ बजे तक तीनों बच्चों की गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड हो रही थीं। लेकिन डेढ़ बजे से लेकर शाम साढ़े चार बजे तक स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे तकनीकी खराबी के कारण बंद रहे। इसी तीन घंटे की अवधि में तीनों बच्चे लापता हो गए। जब साढ़े चार बजे के बाद कैमरे दोबारा चालू हुए, तब तक बच्चों का कोई पता नहीं था। बच्चों की तलाश में रांची पुलिस की टीम पहुंची पुरी पुलिस का कहना है कि यदि उस समय सीसीटीवी कैमरे चालू रहते तो यह स्पष्ट हो सकता था कि बच्चे स्टेशन से बाहर निकले थे या फिर किसी ट्रेन में सवार होकर चले गए। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं तीनों बच्चे उसी दौरान हटिया स्टेशन से गुजरने वाली तपस्विनी एक्सप्रेस में तो नहीं चढ़ गए थे। बच्चों की तलाश के लिए रांची पुलिस की एक टीम ओडिशा के पुरी भेजी गई है। पुलिस विभिन्न राज्यों में भी संभावित सुरागों की जांच कर रही है। बच्चों को घर भेजने के नाम 18 सौ रुपये ठगी करने का हुआ प्रयास इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। करण की मां को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर दावा किया कि यदि उसे 1800 रुपये भेजे जाएं तो वह बच्चों का टिकट कटाकर उन्हें वापस भेज देगा। पुलिस ने जब उस मोबाइल नंबर की जांच की तो उसका लोकेशन हैदराबाद में मिला। जांच में सामने आया कि फोन करने वाला व्यक्ति साइबर ठग था, जो बच्चों के लापता होने की घटना का फायदा उठाकर ठगी करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, करण की मां ने उसकी बातों में आकर कोई पैसा नहीं भेजा। बच्चों की सकुशल वापसी की मांग को लेकर भाजपा ने निकाला मशाल जुलूस धुर्वा क्षेत्र से लापता तीन मासूम बच्चों करण, अर्जुन और शिवा नायक की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर शनिवार को भाजपा धुर्वा मंडल के तत्वावधान में विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। मंडल अध्यक्ष उमेश यादव के नेतृत्व में शालीमार बाजार (स्टेडियम रोड) से पुराना विधानसभा चौक तक निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, महिलाएं, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जुलूस के दौरान प्रतिभागियों ने बच्चों की शीघ्र बरामदगी की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और खोज अभियान में तेजी लाने की मांग की। उपस्थित लोगों ने मशाल जलाकर बच्चों की सकुशल घर वापसी के लिए प्रार्थना भी की। इस अवसर पर भाजपा रांची महानगर अध्यक्ष वरुण साहू ने कहा कि तीन मासूम बच्चों का कई दिनों से लापता रहना बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन को इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ युद्धस्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और इतने दिनों बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से विशेष जांच दल गठित कर सभी संभावित पहलुओं की गंभीरता से जांच करने और बच्चों की जल्द बरामदगी करने की मांग की। साथ ही कहा कि जब तक बच्चे सकुशल अपने परिवारों के पास नहीं लौटते, भाजपा इस मुद्दे को उठाती रहेगी। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह केवल तीन परिवारों का मामला नहीं बल्कि पूरे रांची शहर और झारखंड की चिंता का विषय बन गया है। मशाल जुलूस के माध्यम से जनता ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षित वापसी तक समाज और भाजपा परिवार चुप नहीं बैठेगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बच्चों की जल्द बरामदगी नहीं होती है तो पार्टी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगी। जुलूस में पूर्व जिला अध्यक्ष केके गुप्ता, महामंत्री बलराम सिंह, जितेंद्र वर्मा, उमेश यादव, राकेश भास्कर, पंकज शहदेव, गुमशुदा बच्चों की मां डोली देवी, उमेश रंजन साहू, राजू सिंह, बीना मिश्रा, संकेत तिवारी, रेखा महतो, लगन राम, नयन परमार, चंदन पटेल, अजय मुंडा, अभय राम, पैरों देवी, मंजू उपाध्याय, राधिका देवी, गीता गुप्ता सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

गाने के बोलों को लेकर हिसार में बवाल, पुलिस और महिला आयोग से शिकायत

 हिसार  हरियाणा में कुछ समय पहले रैपर बादशाह के चर्चित गीत टटीरी को लेकर उठा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब हरियाणवी गीत कालेज वाली छोरी विवादों में घिर गया है। हिसार में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने इस गाने में कंडक्टरों और कालेज जाने वाली छात्राओं को लेकर कथित आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाते हुए पुलिस और महिला आयोग से कार्रवाई की मांग की है। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि गाने में कंडक्टरों और बसों से कालेज आने-जाने वाली छात्राओं की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। इससे न केवल रोडवेज कर्मचारियों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, बल्कि छात्राओं के बारे में भी अनुचित संदेश जाता है कर्मचारियों ने हिसार सिटी थाना पुलिस को लिखित शिकायत देने के साथ-साथ हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को भी शिकायत भेजी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गाने को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से हटाया जाए और इसके लेखक, निर्देशक व गायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। एक्टर नवीन नारू बोले- जान बूझकर गाने को बनाया जा रहा विवादित वहीं इस गाने में अभिनय कर रहे नवीन नारू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह गीत केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है और इसमें किसी वर्ग या पेशे को निशाना नहीं बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि गाने की लोकप्रियता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही, इसलिए इसे विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नवीन ने बताया कि गाने की शूटिंग हिसार में हुई है और रिलीज के बाद इसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। इंटरनेट मीडिया पर इस गाने पर बड़ी संख्या में रील भी बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में भी तीन सदस्य कंडक्टर हैं, इसलिए किसी पेशे का अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस कर रही जांच शिकायत मिलने के बाद मामला प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में आया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि जांच में गाने में अश्लील या आपत्तिजनक टिप्पणियां पाए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले बादशाह के टटीरी गीत को लेकर भी हरियाणा में काफी विवाद हुआ था। टटीरी गाने को लेकर रोडवेज अधिकारियों ने भी शिकायतें दी थी। वहीं अब दोबारा से रोडवेज कर्मियों ने कालेज वाली छोरी को लेकर शिकायत दी है। इस गाने के विवाद ने हरियाणवी संगीत जगत में नई बहस छेड़ दी है।

पटना कोचिंग विवाद से जुड़ा मामला, नेपाल में संदिग्ध हालात में मौत

पटना खान सर कोचिंग सेंटर विवाद मामले में आरोपी पटना के चर्चित ज्ञान बिंदु जी.एस. एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद के भाई की अचानक में मौत हो गई है। रौशन आनंद के भाई की नेपाल में मौत हुई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नेपाल के एक होटल में रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव ठहरे हुए थे। लेकिन रविवार की सुबह अचानक प्रिंस यादव की मौत की बात सामने आई है। प्रिंस यादव की ब्रेन हेमरेज से मौत की बात सामने आ रही है। यह भी कहा जा रहा है कि खान सर के कोचिंग सेंटर से जुड़े विवाद में प्रिंस यादव भी आरोपी थे। कहा जा रहा है कि रौशन आनंद सर के भाई की मौत के बाद उनके साथ होटल में मौजूद सभी युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस हिरासत में लिए गए युवकों से पूछताछ कर रही है। कहा जा रहा है कि नेपाल पुलिस इस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। प्रिंस यादव की मौत की पुष्टि के बाद उनके शव को भारत लाया जा रहा है। प्रिंस यादव रौशन आनंद सर के छोटे भाई बताए जा रहे हैं। पटना में फैजल खान उर्फ खान सर के कोचिंग सेंटर खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट पर 2 जून को हुए हमले और तोड़फोड़ के मामले में केस दर्ज होने के बाद से रौशन आनंद पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। इस पूरे विवाद में दर्ज एक दूसरे केस में खान सर भी आरोपी हैं। हालांकि, खान सर ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी है और फिलहाल कोर्ट ने 20 जून तक खान की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नेपाल के होटल में प्रिंस यादव के साथ उनके 6-7 दोस्त भी थे। नेपाल पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है और प्रिंस की मौत की पड़ताल कर रही है। कहा यह भी जा रहा है कि साल 2021 में भी रौशन आनंद सर के भाई प्रिंस यादव पर खान सर की कोचिंग सेंटर पर हमले का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के बाद पुलिस प्रिंस यादव को भी तलाश रही थी लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रिंस यादव नेपाल चले गए थे। सुपौल यादव बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले थे। बहरहाल अभी प्रिंस यादव की मौत की जांच चल रही है। क्या है खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमले का विवाद आपको बता दें कि 2 जून की रात खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमला, तोड़फोड़ और मारपीट की घटना हुई थी। एक गार्ड को वहां बुरी तरह पीटा गया था। इस मामले में खान सर ने आरोप लगाया था कि पास ही स्थित ज्ञान बिंदु कोचिंग सेंटर के लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में ज्ञान बिंदू के निदेशक रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रौशन आनंद सर की जमानत याचिक अदालत से खारिज हो गई थी। इस घटनाक्रम के बाद खान कोचिंग सेंटर पर बवाल का एक अन्य वीडियो भी वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में नजर आ रहा था कि दो सुरक्षा गार्ड वहां फायरिंग कर रहे थे। इस फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने खान सर के कोचिंग सेंटर पर दबिश दी थी। पुलिस ने फायरिंग के आरोप में खान सर के दो अंगरक्षकों को अरेस्ट किया था। दोनों ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही फायरिंग की थी। इसके बाद पुलिस ने खान सर पर आर्म्स ऐक्ट तथा हत्या के प्रयास से संबंधित संगीन धाराओं में केस दर्ज किया था। हालांकि, खान सर ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी है। अदालत ने 20 जून तक खान सर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

सुबह 6 बजे से शुरू होगी खास मुहिम, कई बड़े चेहरे होंगे शामिल

नई दिल्ली  यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार रविवार को बड़ा जन-अभियान शुरू करने जा रही है। सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व में 'मां यमुना तट स्वच्छता अभियान' के तहत यमुना के 28 घाट, तटों और रिवरफ्रंट क्षेत्रों में एक साथ सफाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 'एक संकल्प-स्वच्छ यमुना' थीम पर आधारित इस अभियान में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसद-मंत्री समेत आम लोग, स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन श्रमदान करेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सुबह 6 बजे गीता कॉलोनी स्थित ठोकर नंबर-14 घाट पर अभियान का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसकी स्वच्छता और संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। इसी सोच के साथ इस पहल को जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम के स्वच्छ भारत विजन से प्रेरित यह अभियान यमुना संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 'मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य' अभियान के तहत 12 टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया था। इस बार अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यमुना को स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सके। यमुना सफाई अभियान के तहत चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, गांधी नगर घाट, पुराना लोहे पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, सोनिया विहार के विभिन्न घाट, निगम बोध घाट, यमुना बैंक, कालिंदी कुंज समेत 28 प्रमुख स्थलों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों भी इस अभियान में भागीदार होंगे। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत दिल्ली सरकार के मंत्री अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर अभियान का नेतृत्व करेंगे। नागरिकों को यह संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट यमुना में नहीं डालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

नालंदा, गया और भोजपुर की विरासत का बढ़ा सम्मान, तीन अनूठे उत्पाद GI टैग से हुए सम्मानित

पटना बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस गौरवशाली सूची में नालंदा की विश्वप्रसिद्ध 'बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक', गयाजी का अनूठा 'पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट' तथा भोजपुर की ऐतिहासिक 'पीढ़िया पेंटिंग' शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त व अथक प्रयासों से बिहार की इस अनमोल हस्तशिल्प विरासत को यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। इस जीआई टैग के मिलने से अब इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े स्थानीय बुनकरों, मूर्तिकारों और कलाकारों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी। पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के मार्गदर्शन से पूरी हुई पंजीकरण प्रक्रिया इन पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जीआई पंजीकरण की इस बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में देश के जाने-माने विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा है। नाबार्ड ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि बिहार के इन तीनों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का अमूल्य मार्गदर्शन और विशेष तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके कुशल दिशा-निर्देशन और वैज्ञानिक दस्तावेजों की तैयारी के कारण ही बिहार के इन तीन बेजोड़ शिल्पों को भौगोलिक संकेतक की सूची में शामिल कराना संभव हो पाया। बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का बढ़ेगा दुनिया में मान इस ऐतिहासिक टैग के मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दुनिया भर के बाजारों में बिहार के इन तीनों विशिष्ट उत्पादों की प्रामाणिकता और शुद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा। बौद्ध कला के प्रतीकों को समेटने वाली नालंदा की बावन बूटी साड़ी, पहाड़ों को तराशकर बनाई जाने वाली गयाजी की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की लोक परंपरा को दर्शाने वाली पीढ़िया पेंटिंग के नाम पर अब कोई भी नकली उत्पाद नहीं बेच पाएगा। कला समीक्षकों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी के स्थानीय युवाओं को भी अपने पारंपरिक रोजगार से जुड़ने की एक नई प्रेरणा मिलेगी।

तूफान और बारिश के बाद सुहाना हुआ मौसम, अब बढ़ी नमी से लोग बेहाल

लखनऊ यूपी के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात तूफान के साथ हुई बारिश से मौसम सुहाना हो गया। रात से शनिवार तड़के तक 19 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम है। तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम यूपी में बारिश का ट्रेंड भी बदल रहा है। पिछले तीन दिनों से दोपहर या शाम के बजाय देर रात बारिश हो रही है। शुक्रवार रात करीब 1:20 बजे शुरू हुई बारिश बाद में तूफानी रूप ले गई। तड़के तक तेज हवाओं के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहा। इसके असर से अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.3 डिग्री कम होकर 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा। नम हवाओं ने दिन और रात दोनों समय लोगों को राहत पहुंचाई। मौसम विभाग के अनुसार 15, 18 और 19 जून को बादल छाए रहने के साथ हल्की बूंदाबांदी या बौछार पड़ सकती है। अन्य दिनों में आसमान साफ रहने और गर्मी बढ़ने की संभावना है। बादल छाने से बदला मौसम तेज धूप के बीच आसमान में बादलों की आवाजाही और पुरवा हवा चलने से मौसम का मिजाज बदल गया है, जिसस लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अब उमस ने जन जीवन को बेहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने यूपी के अलग-अलग इलाकों में तेज हवा चलने और हल्की बारिश की संभावना व्यक्त किया है। पुरवा हवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे सड़कों पर आने-जाने वाले लोग पसीने से लथपथ नजर आने लगे हैं। हालांकि द्वितीय शनिवार को छुटटी होने के कारण दोपहर में सड़क और बाजारों पर आवाजाही आम दिनों की तुलना में बेहद कम दिखी। उमसभरी गर्मी के कारण लोगों के घरों में लगे पंखा और कूलर बेमतलब साबित हो रहे हैं। लोग चिपचिपी गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय का सहारा लेने लगे हैं। मौसम की तल्खी में आई कमी से सब्जी उत्पादकों को राहत मिली है। पिछले दिनों भीषण गर्मी और लू के कारण हरी सब्जियां खेतों में ही झुलस रही थीं। किसान हर दिन सिंचाई करने को लचार थे, बावजूद उत्पाद बेहद कम हो रहा था। आसमान में बादलों की आवाजाही से फसलों को राहत मिली है। भीषण गर्मी के बीच मौसम के मिजाज में आंशिक बदलाव तो आया है, लेकिन लोगों को राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है। शनिवार को आसमान में बादलों की आवाजाही के चलते चिलचिलाती धूप से तो कुछ राहत मिली, लेकिन हवा थमने के कारण बढ़ी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। उमस भरी इस गर्मी के बीच बिजली विभाग की लापरवाही ने कोढ़ में खाज का काम किया। बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने लोगो का हाल बेहाल कर दिया।