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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार  नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री  साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा। इस अवसर पर सु निशा द्विवेदी, सु चित्रा पटेल, सु लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक सु संगीता लकड़ा एवं सु आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से हरियाणा में बारिश और तेज आंधी की संभावना

चंडीगढ़ हरियाणा में अप्रैल के जाते-जाते मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने आज, गुरुवार (30 अप्रैल) को प्रदेश के 6 जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की चेतावनी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आज पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत और पानीपत में धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही गुरुग्राम, नूंह, पलवल और फरीदाबाद जैसे जिलों में भी हल्की से मध्यम बूंदाबांदी हो सकती है। भिवानी सबसे गर्म, सोनीपत में ठंडक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में औसतन 1.2°C की बढ़ोतरी देखी गई है।     सबसे कम तापमान: सोनीपत में 20.2°C दर्ज किया गया।     सबसे अधिक तापमान: भिवानी में न्यूनतम तापमान 28°C रहा, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है।     अधिकतम तापमान: नूंह (बोपानी) में पारा 38.7°C तक पहुँचा, जबकि नारनौल में 36.5°C और हिसार में 38.6°C रिकॉर्ड किया गया। 2 मई से फिर बदलेगा मौसम राहत की बात यह है कि भीषण गर्मी से फिलहाल कुछ दिन और निजात मिलेगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि 2 से 5 मई के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दोबारा बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बन रही है। मौसम विभाग ने की एडवाइजरी मौसम में अचानक आए इस बदलाव और तेज हवाओं को देखते हुए विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है:     किसान भाई: कटी हुई फसलों और अनाज को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें।     आम नागरिक: आंधी के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।     वाहन चालक: धूल भरी आंधी के दौरान दृश्यता कम होने पर सावधानी से वाहन चलाएं।

जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज दुर्घटना: 4 की गई जान, 14 सुरक्षित; सर्च ऑपरेशन तेज

जबलपुर नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर से करीब 25 किमी दूर बरगी बांध में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया, जहां तेज आंधी के दौरान एक क्रूज डूब गया। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस क्रूज में करीब 29 पर्यटक सवार थे। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं। शाम की घटना घटना शाम करीब छह बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार क्रूज पर्यटकों को लेकर बांध की लहरों के बीच चल रहा था, तभी अचानक तेज आंधी चली और क्रूज अनियंत्रित होकर पानी में समा गया। 15 लोगों को बचाया गया अब तक करीब 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। क्रूज के कैप्टन महेश पटेल लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। मंत्री मौके के लिए रवाना घटना की जानकारी मिलते ही राकेश सिंह डुमना एयरपोर्ट से सीधे घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।

तारीखों के पीछे सियासी रणनीति: सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार और बंगाल चुनाव का कनेक्शन

पटना  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म होते ही बिहार के लोगों का फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 दिन पुरानी सरकार के कैबिनेट विस्तार पर आ गया है। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले सीएम बने सम्राट चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ 15 अप्रैल को शपथ ली थी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के पूरी तरह गठन के लिए बंगाल चुनाव के खत्म होने का इंतजार चल रहा था। ऐतिहासिक 92 फीसदी से ऊपर वोटिंग के साथ दो चरण में बंगाल का चुनाव खत्म हो चुका है। अब चर्चा है कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार 3 मई या 6 मई को हो सकता है। सम्राट कैबिनेट के विस्तार के लिए 3 मई और 6 मई की अटकल को भी बंगाल चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल से चुनाव की आंतरिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसमें चुनाव नतीजों में पार्टी के संभावित प्रदर्शन का अनुमान होगा। बंगाल चुनाव की इंटरनल रिपोर्ट में अगर हर हाल में भाजपा की जीत का भरोसा जताया गया होगा तो पार्टी नतीजों के बाद 6 मई को बिहार कैबिनेट का विस्तार करवा सकती है। लेकिन, अगर बंगाल से आई रिपोर्ट में भाजपा की जीत को लेकर कोई किंतु-परंतु जैसी आशंका होगी तो पार्टी की कोशिश होगी कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार चुनाव नतीजों से पहले ही 3 मई को निबटा लिया जाए। बिहार में सीएम समेत 36 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा होंगे जदयू के मंत्री, बड़े मंत्रालय भी मिलेंगे? सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद से ही कैबिनेट में भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या को लेकर भी अटकलों का दौर चल रहा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से ज्यादा थी। जदयू के नेताओं का कहना है कि सम्राट चौधरी की सरकार में मॉडल वही रहेगा। यानी भाजपा का सीएम है तो जदयू के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी। मंत्रालय बंटवारे में भी नीतीश के फॉर्मूले से चले तो जदयू को कई बडे़ मंत्रालय भी मिल सकते हैं। सम्राट सरकार में सीएम और दोनों डिप्टी सीएम के अलावा भाजपा के 14 और जदयू के 15 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 मंत्री पद नहीं भरे जाएंगे नीतीश कुमार की ही तरह सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 पद भरने के बदले 1-2 मंत्रियों की जगह बनाकर रख सकते हैं, ताकि भविष्य में दूसरे दलों में तोड़-फोड़ की जरूरत पड़े तो डील के लिए ऑफर का इंतजाम रहे। सरकार में 1-2 मंत्रियों की जगह खाली हो तो उसकी बदौलत सामने वाली पार्टी के कुछ विधायकों को अपने वश में करना आसान हो जाता है। भाजपा और जदयू दोनों अपने कोटे से कम से कम 1-1 पद खाली रख सकती है। पिछली सरकार में जदयू के ज्यादातर मंत्री फिर से जगह पाएंगे। भाजपा के भी ज्यादातर मंत्री फिर से आएंगे, लेकिन नीतीश मिश्रा, कृष्ण ऋषि, नीरज सिंह बबलू जैसे कुछ पुराने मंत्री फिर से सरकार में आ सकते हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को क्या मिलेगा? सीएम सम्राट और डिप्टी सीएम विजय और बिजेंद्र को छोड़कर नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे सारे नेता फिलहाल पूर्व मंत्री बने हुए हैं। नीतीश की अगुवाई वाली सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनको फिर मौका मिलेगा या नहीं और मिला तो मंत्रालय पुराना रहेगा या बदल जाएगा। इन पूर्व मंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की हो रही है, जिन्हें पहली किस्त में सरकार में जगह नहीं मिल पाई। सोशल मीडिया पर इसे लेकर पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों की भरमार लगी है। विजय सिन्हा को मंत्री बनाया जाएगा, इस पर संशय नहीं है, लेकिन पुराने मंत्रालय ही मिलेंगे या और बड़ा मंत्रालय मिलेगा, इस पर अटकलबाजी चल रही है। नीतीश सरकार में विजय कुमार सिन्हा के पास राजस्व और भूमि सुधार, खनन और भूतत्व के अलावा भाजपा के अध्यक्ष बने नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद से नगर विकास और आवास विभाग भी था। राजस्व और भूमि सुधार में विजय का तेवर भरा रूप दिख रहा था। चर्चा है कि उन्हें पथ निर्माण विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है, जो पिछली सरकार में नितिन नबीन के बाद दिलीप जायसवाल को मिला था। सम्राट चौधरी सरकार में दीपक कुशवाहा का क्या होगा, चिराग और मांझी बदलेंगे मंत्री? चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को पहले की तरह कैबिनेट में 2-1-1 मंत्री मिलेंगे, यह मोटा-माटी तय दिख रहा है। जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा फिर से मंत्री बनेंगे, यह भी तय दिख रहा है। चिराग पासवान भी अपने दोनों पुराने मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह को रिपीट करेंगे, इसकी प्रबल संभावना है।  

विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने सुलझाए लंबित प्रकरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी नीतियों एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की सक्रियता के चलते राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षों से लंबित विद्युत प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है। योजना के तहत हजारों उपभोक्ताओं को राहत ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लंबित विद्युत देयकों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट दी जा रही है।  इसी क्रम में सूरजपुर जिले के एक उपभोक्ता को 90 हजार रुपये से अधिक के बकाया बिल पर 55 हजार रुपये से अधिक की छूट प्रदान की गई, जिससे उन्होंने शेष राशि का भुगतान कर अपना खाता पूर्णतः शून्य कर लिया। लंबित अमानत राशि का त्वरित भुगतान फोरम की सक्रिय पहल के तहत लंबे समय से लंबित अमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के मामलों का भी निराकरण किया जा रहा है। एक प्रकरण में एक वर्ष से लंबित राशि को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किया गया। साथ ही, इस प्रकार की देरी पर फोरम द्वारा संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। समयबद्ध समाधान पर जोर विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। योजना का लाभ लेने की अपील विभागीय अधिकारियों ने प्रदेश के सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ का अधिकतम लाभ उठाएं। शासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पुराने बकाया से मुक्ति दिलाकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जा सके।

सम्राट सरकार से बनी सहमति, अंचल अधिकारियों की हड़ताल खत्म, जमीन के काम होंगे तेज

पटना बिहार में लंबे समय से चल रही अंचलाधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों की हड़ताल खत्म हो गई है। सम्राट सरकार से वार्ता पर सहमति बनने के बाद सीओ, आरओ समेत अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर गए सभी सीओ-आरओ ने काम पर लौटने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार से उनकी मांगों पर वार्ता की सहमति बन गई है। इसके बाद बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ ने गुरुवार को सामूहिक अवकाश खत्म करने का ऐलान कर दिया। हड़ताल खत्म होने के बाद अंचलों में अटके जमीन के काम फिर से सुचारु हो सकेंगे, यह आम जनता के लिए भी राहत भरी खबर है। राज्य भर के अंचलाधिकारी (सीओ) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 9 मार्च को अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। राजस्व इस बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से कई बार उन्हें का काम पर लौटने की अपील की गई। तत्कालीन विभागीय मंत्री सह डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हड़ताली अफसरों को सैलरी ब्रेक, निलंबन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके असर से कुछ अधिकारियों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। हालांकि, बड़ी संख्या में सीओ-आरओ अपनी मांगों पर डटे रहे। इससे अंचलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे थे। काम पर नहीं लौटने वाले कुछ अधिकारियों पर विभाग ने ऐक्शन लेकर निलंबित भी किया। इससे सरकार और हड़ताली पदाधिकारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा था। साथ ही अंचलों में निबंधन से लेकर जमीन से जुड़े अन्य काम अटक गए थे। राज्य सरकार ने वैकल्पिक उपाय भी अपनाते हुए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अंचलों के अतिरिक्त प्रभार दिए थे। इससे अन्य कर्मचारियों का वर्क लोड बढ़ गया था। हड़ताल से प्रभावित हो रहा था जनगणना का काम जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। अभी स्व-गणना का काम चल रहा है। 2 मई से प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना भी करेंगे। बिहार में जनगणना के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में सीओ, आरओ और राजस्व कर्मियों की हड़ताल से जनगणना का काम भी प्रभावित हो रहा था। 55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार ने सुलह का रास्ता निकाल दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से हड़ताली अधिकारियों को उनकी मांगों पर विचार करने के लिए आश्वासन दिया है। इसके बाद, बिहार संयुक्त सेवा महासंघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 4 मई से वे अपना योगदान देंगे। 55 दिनों के बाद सीओ काम पर लौट जाएंगे। प्रधान सचिव पद से हटाए गए दो दिन पहले ही सम्राट सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को हटा दिया था। उनका तबादला बिहार राज्य योजना पर्षद में बतौर परामर्शी (सलाहकार) कर दिया गया था। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीके अनिल के ट्रांसफर के पीछे की मुख्य वजह सीओ-आरओ हड़ताल को ही मानी गई थी। सीके अनिल 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।  

महंगाई का असर: दिल्ली में ई-रिक्शा सफर होगा महंगा, नई दरें जल्द लागू

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले महीने से लागू होने की संभावना है। फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में ई-रिक्शा वर्ष 2010 से चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। वहीं, इसी अवधि में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के किराए दो बार बढ़ चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बैटरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में इजाफे के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है, ताकि ड्राइवरों की आय प्रभावित न हो। रिक्शा ड्राइवरों और मैन्युफैक्चरर्स की बैठक में फैसला यह फैसला बुधवार को ई-रिक्शा ड्राइवरों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह भी मौजूद थे। बैठक में किराया बढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कुल 2 लाख ई-रिक्शा चल रहे वर्तमान में दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि करीब 1.5 लाख बिना रजिस्ट्रेशन के भी सड़कों पर चल रहे हैं। ये ई-रिक्शा खासकर मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बने हुए हैं। अभी अधिकांश जगहों पर पहले दो किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 5 रुपये किराया लिया जाता है। 2022 का सर्कुलर लिया वापस इस बीच, दिल्ली सरकार ने 2022 के उस सर्कुलर को वापस लेने का भी फैसला किया है, जिसमें कंपनियों को अपने नाम पर कई ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक कार्ट रजिस्टर कराने की अनुमति दी गई थी। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कुछ कंपनियों के हाथों में मालिकाना हक के केंद्रीकरण को रोकना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के शोषण को कम करना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मालिक-ड्राइवर को अधिक अवसर मिलेंगे, आत्मनिर्भर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ई-रिक्शा सेक्टर में एकाधिकार की संभावना भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का ढांचा भी मजबूत होगा।

जनगणना अभियान शुरू: हरियाणा में सिरसा-करनाल ने मारी बाजी, नूंह पिछड़ा

चंडीगढ़. हरियाणा में 77 लाख से अधिक परिवार हैं, पर अभी तक मात्र दो लाख 46 हजार परिवारों ने ही स्वगणना कराई है। गुरुवार को स्वगणना का अंतिम दिन है, शुक्रवार से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू हो जाएगा। स्वगणना में सिरसा और करनाल सबसे आगे हैं, जबकि नूंह पिछड़ा हुआ है। जनगणना निदेशक ललित जैन ने प्रदेश के लोगों से कहा है कि वे अंतिम दिन अधिक से अधिक स्वगणना के लिए आगे आएं। जनगणना निदेशालय हरियाणा के निदेशक डा. ललित जैन के अनुसार स्वगणना बहुत ही सरल प्रक्रिया है और पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर इसे पांच-सात मिनट में पूरा किया जा सकता है। इसके बाद जनगणना करने वाले (एन्यूमरेटर) के साथ केवल वह जारी किया गया आइडी नंबर साझा करना होगा। पूरे राज्य में एक मई से वास्तविक मकान सूचीकरण और जनगणना कार्य शुरू होंगे। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सभी एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर को पूरा सहयोग दें और उन्हें सही, सटीक तथा अद्यतन जानकारी प्रदान करें। इस जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा। आवश्यक जानकारी देने से इन्कार है दंडनीय अपराध जनगणना निदेशक ने चेतावनी दी कि जनगणना अधिकारियों को जरूरी जानकारी देने से इन्कार करना या उनके साथ असहयोग करना जनगणना अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। यदि किसी एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर या नागरिक को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे अपने संबंधित सुपरवाइजर से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जनगणना विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध कराया गया है, जिस पर कोई भी नागरिक, गणनाकार या पर्यवेक्षक अपनी समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है। प्रत्येक शिकायत या समस्या पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला     स्वगणना कराने वाले परिवार सिरसा     22,845 करनाल     22,836 जींद     19,486 फतेहाबाद     14,602 सोनीपत     12,780 महेंद्रगढ़     12,674 गुरुग्राम     12,607 हिसार     11,927 रोहतक     11,366 यमुनानगर     11,348 पंचकूला     10,910 झज्जर     10,560 रेवाड़ी     10,494 फरीदाबाद     9,623 चरखी दादरी     9,586 भिवानी     8,307 हांसी     7,963 कैथल     6,341 कुरुक्षेत्र     4,912 अंबाला     4,846 पानीपत     4,841 पलवल     3,134 नूंह     1,897

न्यायिक सेवाओं में बड़ा बदलाव, ई-कोर्ट सर्विस ऐप का नया वर्जन 5 मई से होगा लॉन्च

 रांची  न्यायिक सेवाओं को और अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-कोर्ट सर्विस मोबाइल प का नया संस्करण 4.0 आगामी पांच मई से लांच किया जाएगा। इस संबंध में झारखंड हाई कोर्ट के केंद्रीय परियोजना समन्वयक द्वारा राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पत्र में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्देशानुसार एप का यह नया संस्करण कई तकनीकी और उपयोगकर्ता सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है। इसमें एंड्रायड 14 सपोर्ट, बेहतर परफार्मेंस, आसान नेविगेशन और नया यूजर फ्रेंडली इंटरफेस शामिल है, जिससे एक हाथ से भी आसानी से उपयोग संभव होगा। नए वर्जन में केस स्टेटस सेक्शन के माध्यम से सीधे आदेश और निर्णय की पीडीएफ डाउनलोड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा माई केसेस सेक्शन में बेहतर रिस्पांस, केस कंवर्जन ट्रैकिंग फीचर, ईपे, एनजेडीजी और ईफाइलिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत क्विक लिंक में जोड़ा गया है। कोर्ट परिसरों का लोकेशन जानने के लिए भूवन मैप्स का भी इंटीग्रेशन किया गया है। हाई कोर्ट ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नोटिस को वेबसाइट, ई-सेवा केंद्रों और कोर्ट परिसरों में प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को अपने पुराने डेटा का बैकअप लेने की सलाह दी गई है। ई-कोर्ट मोबाइल एप संस्करण 4.0 की मुख्य विशेषताएं     उन्नत तकनीक: यह ऐप अब पुराने कोर्डोवा हाइब्रिड फ्रेमवर्क से रिएक्ट नेटिव (React Native v0.77.0) पर शिफ्ट हो गया है, जिससे इसकी गति और कार्यक्षमता (Performance) काफी बेहतर हो गई है।     Android 14 सपोर्ट: यह नया संस्करण Android 14 (API स्तर 34) का समर्थन करता है।     बेहतर डेटा हैंडलिंग: उच्च डेटा वॉल्यूम को संभालने में यह पहले से अधिक सक्षम है।     उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण: संस्करण 4.0 के लिए उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण वीडियो जारी कर दिए गए हैं।  

Sri Guru Granth Sahib सत्कार कानून पर बवाल, चर्च ने उठाई सेक्युलरिज्म पर चिंता

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के बहुचर्चित “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और संवैधानिक चुनौती पहुंच गई है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया (सीआईपीबीसी) ने इस संशोधन कानून को धर्म-विशेष आधारित, भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे रद्द घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को पृथक और अधिक कठोर दंडात्मक संरक्षण देकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है। चर्च का तर्क है कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीक को ऐसा विशिष्ट विधायी संरक्षण नहीं दे सकता, जिससे अन्य धार्मिक समुदायों के बीच असमानता की भावना उत्पन्न हो। याचिका में इसे संविधान की मूल संरचना में शामिल धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया गया है। अन्य धर्म भी प्रभावित हो सकते हैं इंडियन चर्च एक्ट, 1927 के तहत गठित धार्मिक निकाय होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार स्वयं अपने पूर्व प्रस्तावित “पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025” में स्वीकार कर चुकी थी कि पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित नहीं, बल्कि गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 2026 के संशोधन के जरिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ के लिए पृथक कठोर आपराधिक ढांचा तैयार करना राज्य की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रावधानों पर विशेष आपत्ति याचिका में संशोधन कानून के उन प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की प्रिंटिंग, प्रकाशन, भंडारण और वितरण पर कड़ा नियामक नियंत्रण, एसजीपीसी के माध्यम से केंद्रीय रजिस्टर, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाना तथा गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। चर्च का कहना है कि इस प्रकार का विशेष दंड विधान अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कमतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। एसआर बोम्मई, केशवानंद भारती और शायरा बानो जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य धार्मिक तटस्थता से विचलित नहीं हो सकता। एक धर्मग्रंथ को कानून संरक्षण साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सहित मौजूदा केंद्रीय कानून धार्मिक भावनाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए पृथक राज्य कानून विधायी संतुलन और संवैधानिक वैधता दोनों पर सवाल खड़े करता है। चर्च की जनरल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह सभी धर्मग्रंथों के सम्मान और अंतर-धार्मिक सौहार्द के पक्ष में है, लेकिन किसी एक धर्मग्रंथ को विशिष्ट कानूनी संरक्षण देकर अन्य आस्थाओं को अपेक्षाकृत कमतर दर्जा देना संवैधानिक समानता के विरुद्ध है।