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लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी ‘जोनल कान्फ्रेन्स-2026’

लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में जुटेंगे कई राज्यों के कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल लखनऊ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित 'द सेंट्रम होटल' में आगामी 24 अप्रैल, 2026 को 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' का आयोजन किया जाना है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इस जोनल कान्फ्रेन्स में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखण्ड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के माननीय कृषि मंत्रीगण प्रतिभाग करेंगे। इसके अतिरिक्त केन्द्र शासित प्रदेश चण्डीगढ़ एवं लद्दाख के प्रशासक तथा भारत सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। यह कार्यक्रम 24 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे से प्रारम्भ होकर सायं 7:30 बजे तक प्रस्तावित है। पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से कृषि विकास और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से संवाद किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रेस कान्फ्रेन्स और मीडिया ब्रीफिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

योगी सरकार का कदम: मद्यनिषेध विभाग को मिला नया बल, संगठित तरीके से नशामुक्ति अभियान को मिली गति

योगी सरकार में मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित ढांचे से तेज हुआ नशामुक्ति अभियान 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों से 75 जिलों तक पहुंचा जनजागरण, समाजोत्थान मिशन को मिली रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में मद्यनिषेध विभाग को अधिक संगठित, सक्रिय और जनकेंद्रित स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति, शराब सेवन और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को चुनौती मानते हुए सरकार ने विभागीय ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को गांव से शहर तक विस्तार दिया गया है। परिणामस्वरूप मद्यनिषेध विभाग केवल औपचारिक प्रशासनिक इकाई न रहकर समाज में चेतना जगाने वाला प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, संवाद अभियान, रैलियां और सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां लगातार चलाई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में नशामुक्त समाज की अवधारणा को मजबूती मिल रही है। नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर रही सरकार  योगी सरकार के कार्यकाल में विभाग द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंचों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक, रैली, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, सेमिनार और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से बचाकर स्वस्थ और सक्षम बनाना है। इसी कारण मद्यनिषेध विभाग को सामाजिक उत्थान से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में स्थापित 7 क्षेत्रीय मुख्यालय  मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में विभाग के 7 क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित हैं, जिनमें लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 75 जनपदों में मद्यनिषेध संबंधी योजनाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों का संचालन किया जा रहा है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रदेश के हर हिस्से तक सरकार की नशामुक्ति नीति पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यालय स्तर पर तैनात हैं राज्य मद्यनिषेध अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कार्यों के संचालन के लिए 7 क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी, 6 उप क्षेत्रीय अधिकारी, 27 जिला मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी तथा 7 प्राविधिक पर्यवेक्षक तैनात हैं। इनके साथ कार्यालयी स्टाफ, वाहन चालक और सहायक कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो सके। मुख्यालय स्तर पर भी राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, उप राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, लेखाकार, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी, बजट प्रबंधन, समीक्षा और फील्ड स्तर तक निर्देशों के प्रभावी पालन में मदद मिली है।

मिर्जापुर हादसा: ट्रक की ब्रेक फेल, बोलेरो को टक्कर मारने के बाद 9 लोगों की जलकर मौत

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रमंडगंज घाटी की ढलान पर तेज रफ्तार और ब्रेक फेल ट्रक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते चार वाहन आपस में टकरा गए और एक बोलेरो आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से 9 लोग बोलेरो में जिंदा जल गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण सड़क हादसे पर सीएम योगी ने दुख जताया है। ब्रेक फेल ट्रक बना हादसे की वजह पुलिस के मुताबिक हादसा ड्रमंडगंज घाटी के पास रात करीब 8:30 बजे हुआ। मध्य प्रदेश से चना लादकर आ रहा एक ट्रक ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मार दी और उसे धकेलते हुए आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रक में दे मारा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने भी संतुलन खो दिया और वह आगे चल रही कार से टकरा गया। कुछ ही पलों में सड़क पर मलबा, आग और चीख-पुकार का भयावह दृश्य फैल गया। 9 लोग जिंदा जले टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि उसमें सवार लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। बोलेरो में मौजूद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक कार सवार व्यक्ति और एक ट्रक चालक ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया। कुल 11 मौतों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मैहर धाम से लौट रहे थे श्रद्धालु पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के अनुसार बोलेरो सवार सभी लोग प्रयागराज के मांडा क्षेत्र के हाटा गांव के रहने वाले थे। ये लोग मैहर धाम से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोलेरो में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन मृतकों की संख्या और स्थिति ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और फायर टीम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया, लेकिन आग की तीव्रता के चलते बोलेरो सवारों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान कराने और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आधे घंटे बाद बचाव टीम पहुंची स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड को सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची. तब तक आग पूरी तरह विकराल रूप ले चुकी थी और सभी लोग जलकर दम तोड़ चुके थे. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  हादसे में मरने वालों में बोलेरो सवार 9 लोग शामिल हैं, जो मैहर से दर्शन कर लौट रहे थे. इनमें एक ही परिवार के मां, बेटा और बेटी के अलावा दूसरे परिवार के मां-बेटे की भी मौत हुई है. इसके अलावा एक अन्य कार सवार व्यक्ति की भी जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी केबिन में फंसने के कारण जान गंवा बैठा. इस तरह कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।  शव बुरी तरह झुलस चुके थे मृतकों की पहचान में काफी दिक्कतें आईं, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके थे. बाद में परिजनों ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर अपने प्रियजनों की पहचान की. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजन अपने प्रियजनों के शव लेकर घर लौट रहे हैं. बोलेरो में सवार वीना सिंह, इनका बेटा पीयूष सिंह, बेटी सोनम की मौत हुई है. वहीं, पंकज सिंह, वंदना सिंह और शिव सिंह की भी मौत हुई है. ये सभी मिर्जापुर के रहने वाले थे। 

अशोका गार्डन, ऐशबाग-सेमरा में आज बिजली कटौती

भोपाल भोपाल के करीब 40 इलाकों में आज गुरुवार को 5 से 6 घंटे तक बिजली कटौती होगी। इन इलाकों में बिजली कंपनी मेंटेनेंस करेगी। इसके चलते सप्लाई पर असर पड़ेगा। जिन इलाकों में बिजली बंद रहेगी, उनमें विनीतकुंज, ऐशबाग, बरखेड़ी, चांदबड़, अशोका गार्डन, सेमरा, तुलसी नगर, अशोक विहार, इंद्रा कॉलोनी समेत कई बड़े इलाके भी शामिल हैं। ऐसे में बिजली संबंधित जरूरी काम पहले से निपटा लें। ताकि परेशानी का सामना न करना पड़े। इन इलाकों में पड़ेगा असर सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक आम्र ईडन गार्डन, शिवालय, गिरधर परिसर, आम्र वैली, विधान एलिना, मंगेश हाइट, विनीत कुंज बी सेक्टर, पार्क सेरेना कॉलोनी, कस्टम कॉलोनी, विवेकानंद नगर, न्यू फोर्ट एक्सटेंशन, अवंतिका फेस-3, सुरेंद्र मणिक एवं आसपास के इलाके। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बाग उमराव दूल्हा, इंद्रा कॉलोनी, ऐशबाग, महामाई का बाग, बरखेड़ी फाटक, चांदबड़, शंकराचार्य नगर, धोबी घाट, कौशल्या टॉवर, वर्धमान ग्रीन एवं आसपास। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक अशोक विहार, अंत्योदय नगर, अशोका गार्डन, एकता पुरी, स्वदेश नगर, विनायक होम्स, सेमरा, बैंक कॉलोनी, रानी अमन बाई कॉलोनी, तुलसी नगर, सोनिया विहार, नवीन नगर, फूटी बावड़ी एवं आसपास। सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक बंजारी बस्ती, दशहरा मैदान एवं आसपास।

वर्षा जल संरक्षण में डिंडोरी ने देश में प्राप्त किया पहला स्थान, खंडवा दूसरे स्थान पर

जल गंगा संवर्धन अभियान वर्षा जल संरक्षण में प्रदेश का जनजातीय जिला डिंडोरी देश में प्रथम स्थान पर, खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर जिलों की सूची में खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर भोपाल  मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 अप्रैल को जारी रैंकिंग में प्रदेश का डिंडोरी जिला देश में पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्षा जल संरक्षण के आह्वान के अनुरूप प्रदेश सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। अभियान के तहत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही जलाशयों और गड्ढों का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है। डिंडोरी में 1.23 लाख से अधिक जल संरचनाएं जल संचय जनभागीदारी अभियान के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी एवं आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डैशबोर्ड के माध्यम से प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। 22 अप्रैल की रैंकिंग में डिंडोरी जिले में देश में सर्वाधिक 1 लाख 23 हजार से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। खंडवा जिले में 87 हजार से अधिक संरचनाएं निर्मित की गई हैं। प्रदेश में 3.97 लाख से अधिक जल संरचनाएं निर्मित प्रदेश में अब तक 3 लाख 97 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। वर्षा जल संरक्षण के इस कार्य में मध्यप्रदेश का उल्लेखनीय योगदान है। प्रधानमंत्री का संदेश: “जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल का संग्रह करें” जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा “जल संचय, जनभागीदारी अभियान” संचालित किया जा रहा है। यह पहल “जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के अंतर्गत 6 सितंबर 2024 से प्रारंभ की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है। जनभागीदारी से सुदृढ़ हो रहा जल संरक्षण अभियान का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करना और जल संरक्षण में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए कम लागत वाली वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट, रूफटॉप वर्षा जल संचयन, जलाशयों एवं गड्ढों का पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से इन कार्यों को गति दी जा रही है। इस पहल के तहत विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और नागरिकों को जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जन-जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से जल संरक्षण तथा उसके कुशल उपयोग के प्रति व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जल संचय, जनभागीदारी अभियान जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक प्रभावी और दीर्घकालिक पहल है। यह सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।  

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान नई दिल्ली   Border Security Force की 25वीं वाहिनी द्वारा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों की पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पेंशन अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह अदालत 29 अप्रैल 2026 को New Delhi स्थित छावला शिविर में आयोजित होगी। यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसमें दिल्ली क्षेत्र, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से जुड़े सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार भाग ले सकेंगे। अदालत का उद्देश्य लंबित पेंशन शिकायतों का निस्तारण करना और संबंधित मामलों में सहायता प्रदान करना है। जिन लोगों को पेंशन से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी है, वे निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों द्वारा मौके पर मामलों की जांच कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। पेंशन अदालत में आने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र, पेंशन अभिलेख और अन्य आवश्यक कागजात साथ लेकर आएं, ताकि प्रक्रिया में सुविधा हो सके। अधिक जानकारी और सहायता के लिए 011-20895035 पर संपर्क किया जा सकता है। यह आयोजन Border Security Force मुख्यालय के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

एमपी कैडर की IAS अनुग्रह पी को मिली अहम जिम्मेदारी, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में CVO नियुक्त

भोपाल भारत की प्रशासनिक सेवा में एक अहम बदलाव के तहत मध्य प्रदेश कैडर से आने वाली 2011 बैच की आईएएस अधिकारी अनुग्रह पी (Anugraha P IAS) ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) का पदभार संभाल लिया है। यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के प्रमुख बंदरगाहों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय निकाय Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा लिया गया है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार होता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुकीं अनुग्रह पी का यह पदभार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी वे विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और केंद्रीय विभागों में सेवाएं दे चुकी हैं। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का महत्व Chennai Port Authority देश के सबसे पुराने और व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। यह दक्षिण भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र है। चेन्नई पोर्ट का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मुख्य विशेषताएं     भारत के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्रों में शामिल     ऑटोमोबाइल, कंटेनर और बल्क कार्गो का बड़ा हब     हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है     अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में CVO की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है। क्या होता है CVO? चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) किसी भी सरकारी संस्था में भ्रष्टाचार की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। CVO का मुख्य उद्देश्य संस्थान में कार्यरत अधिकारियों के आचरण की निगरानी करना और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना होता है। मुख्य जिम्मेदारियां     भ्रष्टाचार के मामलों की जांच     कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी     शिकायतों का निवारण     नियमों के पालन को सुनिश्चित करना नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल अनुग्रह पी की नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा अनुमोदित की गई है। आमतौर पर CVO का कार्यकाल 3 से 5 वर्षों का होता है, जिसमें अधिकारी को संस्थान में सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाती है। यह नियुक्ति सरकार की “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) नीति के तहत की गई है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाता है। IAS अनुग्रह पी की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। नई भूमिका में प्रमुख चुनौतियां 1. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पोर्ट जैसे बड़े संस्थान में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। बड़ी मात्रा में आने-जाने वाला माल और संबंधित प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 2. डिजिटल ट्रांसपेरेंसी ई-गवर्नेंस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निगरानी को मजबूत बनाना, ताकि हर लेन-देन और गतिविधि पारदर्शी और ट्रैक की जा सके। 3. शिकायत निवारण तंत्र कर्मचारियों और हितधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना ताकि संस्थान में कार्यक्षमता बनी रहे।

रीवा में एयरबस जैसे बड़े विमान की लैंडिंग, 2300 मीटर रनवे बनाने के लिए 140 एकड़ भूमि का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा

रीवा रीवा एयरपोर्ट पर भविष्य में एयरबस (Airbus A320) जैसे 150 से 180 सीटर बड़े विमानों की लैंडिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर 2300 मीटर की जाएगी और 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।  140 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण, रिपोर्ट भोपाल भेजी रीवा एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिसके बाद इसे 'हवाई हब' के रूप में विकसित करने की योजना है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 140 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा जमीन के सीमांकन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट भोपाल भेज दी गई है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 830 किसान प्रभावित होंगे, जिन्हें सरकार द्वारा 340 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। नियमित विमान सेवा शुरू होने के बाद पांच माह में रीवा में 20,000 लोगों ने हवाई सफर किया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि रीवा में हवाई यात्रा को लेकर काफी पोटेंशियल है। जिस वजह से सरकार ने भी रीवा एयरपोर्ट का विस्तार करने पर सहमति जताई है। 2300 मीटर होगा रनवे, अभी सिर्फ ATR-72 की होती है लैंडिंग वर्तमान में रीवा एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1800 मीटर लंबा है। यह रनवे अभी केवल ATR-72 जैसे छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है और अब तक यहां ऐसे ही विमान संचालित होते रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर करीब 2300 मीटर की जाएगी। रनवे के इस विस्तार के बाद Airbus A320 जैसे 150 से 180 सीट क्षमता वाले बड़े विमान भी रीवा एयरपोर्ट पर आसानी से उतर सकेंगे। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए शुरू होंगी सीधी उड़ानें एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार होने और बड़े विमानों की लैंडिंग की सुविधा मिलने के बाद रीवा से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई सेवाएं शुरू होने की संभावना है। भविष्य में यहां से मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। इन महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी होने से न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की यातायात सुविधा मजबूत होगी। साथ ही इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर, लखनऊ से इंदौर तक बनेगा

सागर  लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है।  ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा।  एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा।  बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।  330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है। बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

UP बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के 53 लाख छात्रों का रिजल्ट आज शाम 4 बजे घोषित होगा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट आज 23 अप्रैल को शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट घोषित होने के बाद परीक्षा में शामिल छात्र आधिकारिक वेबसाइट – upsmp.edu और upresults.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख और मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए छात्रों को अपने लॉगिन डिटेल्स जैसे रोल नंबर आदि दर्ज करने होंगे।  आज खत्म हो जाएगा 53 लाख छात्रों का इंतजार एशिया के सबसे बड़े बोर्ड में शामिल यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आज , शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा. इस साल बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच कराई गई थीं और इन्हें केवल 15 कार्य दिवसों में पूरा कर लिया गया. इस साल कक्षा 10वीं-12वीं की परीक्षा में कुल 53 लाख 37 हजार 778 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें हाईस्कूल के 27 लाख 61 हजार 696 और इंटरमीडिएट के 25 लाख 76 हजार 82 विद्यार्थी थे. वहीं, परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बोर्ड ने सख्त इंतजाम किए थे. इसके अलावा, इस बार पूरे प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।  52 लाख छात्रों का आज  होगा इंतजार खत्म  यूपी बोर्ड के 52 लाख से ज्यादा छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. पहले ऐसे कहा जा रहा था कि  रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी होगा, लेकिन बोर्ड की ओर से आधिकारिक तारीख का ऐलान कर दिया गया है. रिजल्ट के साथ ही बोर्ड टॉपर्स की लिस्ट भी जारी कर सकता है. सचिव भगवती सिंह की तरफ से रिजल्ट की तारीख बताई गई है. पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो हाई स्कूल में 90.11 प्रतिशत छात्र पास हुए, वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 81.15 फीसदी छात्रों ने बाजी मारी।  फेल होने पर परेशान न हो छात्र  यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. यूपी बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन करेगा. इसकी सूचना रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद दी जाएगी. इसके अलावा, छात्र अपनी कॉपियों की स्क्रूटनी के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  डिजीलॉकर पर मिलेगा रिजल्ट  यूपी बोर्ड इस साल भी छात्रों को डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट उपलब्ध कराएगा. छात्र अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उपयोग कर डिजिलॉकर अकाउंट बना सकते हैं. रिजल्ट के कुछ घंटों बाद ही डिजिटल मार्कशीट वहां अपलोड कर दी जाएगी, जो कि भविष्य के एडमिशन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए पूरी तरह से वैध मानी जाएगी।  UP Board 10th-12th Result 2026: कहां देख सकेंगे यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं रिजल्ट? यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे जारी होने के बाद छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन आसानी से देख सकेंगे. इसके लिए बोर्ड ने कई आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध कराई हैं, जहां से छात्र बिना किसी परेशानी के अपना परिणाम चेक कर सकते हैं. रिजल्ट देखने के लिए छात्र इन वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं: – upmsp.edu.in – upresults.nic.in – results.upmsp.edu.in – results.digilocker.gov.in UP Board 10th-12th Result 2026: कैसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026? UP Board 10th-12th Result 2026 LIVE: अगर आप यूपी बोर्ड का रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।  2. वेबसाइट के होमपेज पर आपको 10वीं (हाईस्कूल) और 12वीं (इंटरमीडिएट) रिजल्ट 2026 का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना रोल नंबर भरना होगा. रोल नंबर डालने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।  4. जैसे ही आप सबमिट करेंगे, आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा।  5. अब आप अपनी मार्कशीट को ध्यान से देख सकते हैं, उसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट भी निकालकर रख लें।