samacharsecretary.com

विवेक खंड-2 में 410 कारों की अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की योजना

 लखनऊ  गोमती नगर के विवेक खंड दो में भूमिगत पार्किंग बनाने के लिए गोमती नगर जनकल्याण महासमिति ने प्रयास तेज कर दिए हैं। विवेक खंड दो में बनने वाली यह ऐसी भूमिगत पार्किंग होगी जो आधुनिक सुविधाओं से जहां लैस होगी, वहीं गोमती नगर के विवेक खंड दो व आसपास क्षेत्र का जाम पूरी तरह नियंत्रित करने में सहायक भी होगी। इसमें स्मार्ट व्हीकल गाइडेंस एंड नेविगेशन होगा। आधुनिक सिक्योरिटी और सर्विलांस की सुविधा भी। आटोमेटेड पार्किंग के साथ ही वैलेट सिस्टम भी होगा। एसेस कंट्रोल, इलेक्ट्रानिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा सहित अन्य सुविधाओं से यह परिसर लैस होगा। खासबात है कि विवेक खंड दो स्थित लक्ष्मण मण्डपम के सामने स्थित पार्क में यह पार्किंग बनाने का प्रस्ताव है। महासमिति के महासचिव डा. राघवेंद्र शुक्ल कहते हैं कि प्रस्ताव बनकर तैयार है, लखनऊ विकास प्राधिकरण को इसे बनाना है। जल्द ही लोकार्पण इसका होना है। इस प्रयास से पत्रकारपुरम से लेकर विवेक खंड दो, तीन, रेलवे स्टेशन, मिठाई वाला चौराहे के आसपास के व्यापारी व ग्राहक अपने चार पहिया वाहन खड़ा कर सकेंगे। भूमिगत पार्किंग में चार पहिया वाहन 410 खड़े हों सकेंगे और दो पहिया वाहन 84 खड़े हो जाएंगे। पार्किंग का कुल क्षेत्र 14,176 वर्ग फिट का होगा। यह अपर ग्राउंड व लोअर ग्राउंड में बनाई जाएगी। महासिमित के अध्यक्ष प्रो (डा.) बीएन सिंह और सचिव संजय निगम कहते हैं कि गोमती नगर में सरकारी महिला डिग्री कालेज का स्थान तो है लेकिन डिग्री कालेज खुलवाने का प्रयास जारी है। महिला डिग्री कालेज में ही ला कालेज की स्थापना भी की जाएगी। उद्देश्य होगा कि छात्राओं को एक छत के नीचे उच्च शिक्षा मिल सके। इसके अलावा गोमती नगर में रेलवे स्टेशन तो खुल गया है, इससे गोमती नगर, इंदिरा नगर, चिनहट, शहीद पथ सहित चार लाख से अधिक आबादी को लाभ मिल रहा है। भविष्य में मुंशी पुलिया तक जाने वाली मेट्रो को विस्तार देते हुए गोमती नगर से भी जोड़ने की जरूरत है। निगम कहते हैं कि अगर यह सुविधा मिल जाए तो गोमती नगर भी चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के साथ ही नए व पुराने लखनऊ से मेट्रो के जरिए गोमती नगर से जुड़ा जाएगा। लखनऊ मेट्रो का विस्तार राजधानी में केंद्र व प्रदेश सरकार कर रही है। पुराने लखनऊ में मेट्रो का विस्तार इसी की बानगी है। समिति सदस्य कर्नल एएन पांडे व पीआर पांडे ने बताया कि विक्रांत खंड में जर्जर सड़कों एवं नालों के फिर से निर्माण को लेकर आवाज उठाई जा चुकी है। उम्मीद है कि कार्यदायी संस्थाएं जल्द ही इस दिशा में काम करेंगी। महासमिति सदस्य केके मौर्य और सी गोपाल कृष्णन नायर ने बताया कि विनीत खंड पांच और छह में पुरानी सीवर पाइपलाइन को बदलना और विकास खंड पांच में जिम जैसे कार्य भी महासमिति की सूची में प्राथमिकता है। इन पर जल्द ही काम होगा।

बालवाटिका को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक गढ़ने की पहली प्रयोगशाला बना रही योगी सरकार

लखनऊ. बालवाटिका को प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ योगी सरकार उसे भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बालवाटिका के नवीन पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास तथा आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है। इसी के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा इनके लिए चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला एवं संगीत आधारित सामग्री विकसित की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करतीं हैं।  योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित व समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित भी होंगे।  यह है उद्देश्य इस पाठ्यक्रम को तैयार करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें। यह हैं पाठ्यक्रम-बाल विकास के निर्धारित चरण पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता तथा सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। भविष्य में दिखेगा सकारात्मक प्रभाव एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85% क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से राहत प्रदान करने का बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में गन्ना किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नए बीज ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और आय को बढ़ाया जा सके। प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार करा रहा है, जिसके जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की किसानों के खेत में पहुंचने तक ट्रैकिंग होगी।  एडिशनल केन कमिश्नर, यूपी, वीके शुक्ला का कहना है कि किसान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं। गन्ने की खेती में यूपी का योगदान बेहद अहम रहा है। ऐसे में विभाग गन्ना किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। नया मोबाइल ऐप गन्ने के बीज वितरण की ट्रैकिंग से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा। इससे गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ऐप लॉचिंग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने बीजों की कालाबाजारी पर पूरी तरह नियंत्रण का प्लान बनाया है। प्लान के तहत गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इन बीजों की सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैकिंग की जाएगी। इससे बीज की ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को काफी लाभ होगा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने के साथ उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से बढ़िया पैदावार होने पर किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। यूपी-गुजरात की मदद से तैयार हो रहा मोबाइल ऐप गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग लखनऊ मुख्यालय के जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक विभाग कई विभागों की मदद से नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) इंस्टिट्यूट मिलकर गन्ना किसानों के लिए सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सबसे अच्छी बात है कि नए डिटिजल ऐप को तैयार करने में एक रूपये भी विभाग का खर्च नहीं हो रहा है। ये सारा काम पीएम गति शक्ति योजना के तहत किया जा रहा है। बीजों की ट्रैकिंग वाली ये मोबाइल ऐप एक से दो महीने में लॉन्च हो जाएगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। ऐप का जमीनी स्तर पर भी परिक्षण किया जाएगा। सीड (बीज) ट्रेस एंड टेस्टिंग ऐप के फायदे गन्ने का बीज तीन से चार चरणों के बाद किसानों तक पहुंचता है। सबसे पहले गन्ने का कोई भी बीज शोध केंद्रों से निकलता है। इसके बाद गन्ना विकास परिषद (आधार बीज उत्पाद केंद्र) तक पहुंचता है। फिर प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी तक जाता है। यहां से किसानों को वितरित होना शुरू होता है। इतने सारे चरणों में बीज की ट्रैकिंग संभंव नहीं हो पाती थी, लेकिन नए मोबाइल ऐप के जरिए यह संभंव हो पाएगा। किसान को मोबाइल ऐप पर ही बीज की उपलब्धता पता चलेगा। यहां से वह विभाग को बीज की मांग (डिमांड) भेज सकता है। फिर गन्ना विकास परिषद में तैनात गन्ना पर्यवेक्षक हर जिले में आने वाली डिमांड की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। मोबाइल ऐप पर गन्ना बीज पाने वाले किसानों का भी डाटा उपलब्ध रहेगा। इससे अगले चरण में उत्पादन की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी। ट्रैकिंग शुरू होने से गन्ने की वैराइटी को पैदावार के हिसाब से आगामी वर्षों में बदलना आसान हो पाएगा। फैक्ट फाइल यूपी में गन्ना किसान – 46.50 लाख (चीनी मीलों को सप्लाई करने वाले) कुल गन्ना उत्पादन – 83.25 टन प्रति हेक्टेयर कुल गन्ना बोआई (पिछले वर्ष) – 28.61 लाख हेक्टेयर

प्रदेश के सभी 75 जिलों में तैयार हो रही ‘साइबर सिंघम’ की फौज

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब तकनीक और वैज्ञानिक जांच का शिकंजा और कसने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य की पुलिसिंग को आधुनिक और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ( यूपीएसआईएफएस) में बड़े स्तर पर क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं। संस्थान में पांच चरणों में 500 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है, जिनमें अब तक 300 एक्सपर्ट तैयार हो चुके हैं और बाकी दो बैच का प्रशिक्षण जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये प्रशिक्षित अधिकारी केवल अपने तक जानकारी सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने-अपने कमिश्नरेट और जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे। यानी यूपीएसआईएफएस  में तैयार हो रहे ये एक्सपर्ट आगे पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग की एक मजबूत श्रृंखला विकसित करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ये अफसर वर्कशॉप आयोजित कर आरक्षी से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अफसरों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और वैज्ञानिक जांच की बारीकियां सिखाएंगे, जिससे पुलिस बल की समग्र कार्यक्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित किया जा सकेगा यूपीएसआईएफएस की यह पहल जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक सैंपलिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जा रही है, ताकि घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित और विश्लेषित किया जा सके। उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को मिलेगी नई धार : डॉ. जी.के. गोस्वामी संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी के अनुसार, अभी फॉरेंसिक एक्सपर्ट के तीन बैचों के जरिए पुलिस कर्मियों और अफसरों को तकनीकी बारीकियों में दक्ष बनाया गया है। आगे चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू किया जाएगा और इसके बाद पांचवें चरण में बाकी विशेषज्ञ भी तैयार कर लिए जाएंगे। ये विशेषज्ञ प्रदेश के सभी कमिश्नरेट और 75 जिलों के अफसरों को बारीकियां सिखाएंगे। योगी सरकार की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को नई धार मिलने जा रही है। यह पहल प्रदेश को आधुनिक, तकनीक सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था वाले राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार

‘मुख्यमंत्री युवा योजना’ से मिली स्वरोजगार की राह, इटावा के बिलाल हसन बने सफल उद्यमी सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए कारगर साबित हो रहीं योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार की हितकारी योजनाओं से आज उत्तर प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर बन रहा है। यह योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए जनपद इटावा के गाड़ीपुरा निवासी बिलाल हसन ने सरकारी योजना के सहयोग से खुद का कारोबार खड़ा किया है।  बिलाल हसन ने बताया कि उन्होंने जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत ₹10 लाख का ऋण प्राप्त किया। योजना के माध्यम से मिली सरकारी वित्तीय सहायता से उन्होंने अपना प्रिटिंग प्रेस और फ्लेक्स का व्यवसाय शुरू किया। वित्तीय सहायता और सरकारी सहयोग मिलने पर उन्होंने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया और लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।  अपने उद्यम के माध्यम से बिलाल हसन न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि आज वे 50 से 60 हजार रूपए महीना कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने 5 अन्य लोगों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दी है।   योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए एक सशक्त पहल बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान ऋण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि युवा खुद रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिल रही है। ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम ₹25 लाख तक का ऋण तथा सेवा क्षेत्र में अधिकतम ₹10 लाख तक का ऋण कुल परियोजना लागत के अनुसार अनुदान भी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। इच्छुक व्यक्ति जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर इस योजना का लाभ ले सकता हैं और उद्यमी बनने का सपना साकार कर सकता है।

राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता मामले में नया मोड़

लखनऊ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश आदेश दिया है। हाईकोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। राहुल गांधी पर भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता रखने का आरोप है। इसके खिलाफ विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि राहुल के पास दो देशों के पासपोर्ट हो सकते हैं, जोकि भारतीय कानून का उल्लंघन है। इसी को लेकर लंबे समय से हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सरकार से रिकॉर्ड पेश करने को कहा था। इससे पहले, लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ शिशिर फिर से कोर्ट पहुंचे थे। MP/MLA अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बीएनएस, सरकारी गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए हैं। इस मामले की पहले सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राहुल की ब्रिटिश नागरिकता के खिलाफ मिली शिकायत पर उसने क्या कार्रवाई की है। राहुल गांधी के मुकदमे में सुनवाई फिर टली वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जारी मानहानि केस की सुनवाई फिर टल गई है। याची के वकील सन्तोष पाण्डेय ने शुक्रवार को मौका लिया जिस पर एमपी – एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनवाई 22 अप्रैल को सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। राहुल की वायस रिकार्डिंग को विधि विज्ञान प्रयोगशाला से सत्यापित कराने की मांग पर सुनवाई में मुकदमा कई तारीखों से लम्बित है। कर्नाटक के बंगलूरू में आठ मई 2018 को एक जनसभा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। लखनऊ की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था. लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया था। 

भाकियू का हंगामा: हापुड़ कूच के दौरान टोल प्लाजा पर टकराव, पुलिस पर हमला

  हाथरस पूर्व मंत्री द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन ने शुक्रवार को कई जिलों में भारी बवाल कर दिया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने हाथरस में पुलिस के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की की और दरोगा के पैर पर गाड़ी चढ़ाई दी। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। हापुड़ कूच कर रहे कई कार्यकर्ताओं को अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा पर रोका गया तो वहां भी कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद भी उन्हें रोका नहीं जा सका। सैकड़ों कार्यकर्ता दर्जनों गाड़ियों से टोल प्लाजा पार करके निकल गए। वहीं भाकियू के बवाल को देखते हुए हापुड़, बुलंदशहर में भारी तादाद में पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है। कुछ दिन पहले एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान द्वारा किसान नेताओं पर अभद्र टिप्पणी की गई थी। जिसके विरोध में भाकियू ने पूर्व मंत्री के आवास के घेराव का ऐलान किया था। शुक्रवार को कई जिलों से भाकियू कार्यकर्ता पूर्व मंत्री का आवास घेरने के लिए प्रदर्शन करते हुए हापुड़ के लिए कूच कर गए। कार्यकर्ताओं का हुजूम दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ हापुड़ जा रहे कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिलों में रोक लिया गया। इसको लेकर हाथरस में एसपी सिटी एटा और भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित किसान पीछे हटने को तैयार नहीं थे। तनाव उस समय और बढ़ गया जब कार्यकर्ताओं ने पुलिस घेरा तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान एक गाड़ी कस्बा इंचार्ज के पैर पर चढ़ गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने सीओ की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। पूर्व मंत्री के आवास पर भारी पुलिस तैनात, सियासत गरमाई सलारपुर में हुई तीखी नोकझोंक के बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) और पूर्व मंत्री मदन चौहान के बीच का विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। पूर्व मंत्री के आवास के घेराव के ऐलान के बाद शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर की सड़कों पर तनाव का माहौल पैदा हो गया। पूर्व मंत्री के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। टकराव की आशंका को देखते हुए जिले के कई थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद सलारपुर में हुई एक नोकझोंक के बाद शुरू हुआ, जिसने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। कार्यकर्ताओं में मदन चौहान की टिप्पणियों को लेकर गहरा रोष है। पूर्व मंत्री के खिलाफ धरना देने हरदोई, लखनऊ से गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे सैकड़ों किसान बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव चितौड़ा में स्थित एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान और भाकियू भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के बीच हुई नोकझोक ने बढ़ा रूप ले लिया है। सोशल मीडिया से शुरू हुए विवाद अब धरना प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर जहां पूर्व मंत्री ने अपने आवास पर हवन पूजन करने की बात कहीं है वहीं दूसरी और हापुड़ जनपद के अलावा भाकियू भानू गुट के पदाधिकारी लखनऊ, हरदोई, संभल, बदायूं आदि जनपद से गढ़ पहुंच गए है। हालांकि पुलिस ने किसान संगठन के कई नेताओं को नजर बंद कर लिया है, लेकिन बहारी जनपदों के किसान गढ़ में पहुंच गए है। इस को लेकर पुलिस का सिरदर्द बढ़ गया है। क्या था मामला गांव चितौड़ा निवासी कुछ युवकों ने यूपी 37 के नाम से एक ढाबे का संचालन किया है। उसके शुभारंभ कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता एंव पूर्व मंत्री मदन चौहान को भी कार्यक्रम में बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान होटल संचालन के लिए भानु प्रताप ने एक ब्यान दिया। दिए गए ब्यान में उन्होंने कहा कि यह ढाबा किसान यूनियन के पदाधिकारियों का है इसको खुब चलावें, खूब खांवे और भाजपा को हरावें का ब्यान दिया। इस ब्यान को सुनकर उनके पड़ोस में बैठे मदन चौहान भड़क गए। पूर्व मंत्री ने उनके ब्यान की निंदा की उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ब्यान देना काफी गलत है। इस दौरान पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष में जमकर नोकझोक हुई। एक वीडियो में तो मदन चौहन ने भानु प्रताप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को गाली देने का आरोप लगाया। इस दौरान कार्यक्रम नोकझोक का अखाड़ा बन गया। मौके पर काफी भीड़ एकत्र हो गई। पूरे घटना क्रम की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग तरह तरह की चर्चा शुरू हो गई।

मुख्यमंत्री का आदेश: जन समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें अधिकारी

जन समस्याओं का त्वरित समाधान कराएं अधिकारी : मुख्यमंत्री लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री ने लोगों को दिया भरोसा, हर समस्या का प्रभावी निस्तारण कराएगी सरकार गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन, शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाएं। समस्या से जुड़ी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई करते हुए गुणवत्तापूर्ण व संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित कराएं। जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, “घबराइए मत। सरकार, आपकी हर समस्या पर प्रभावी समाधान सुनिश्चित कराएगी।”  शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में, महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी बातें सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र अपने हाथ में लेकर उसका अवलोकन कर समस्या/शिकायत का संज्ञान लिया। फिर, अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित और हस्तगत किया। साथ ही निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह शुक्रवार को भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार धन उपलब्ध कराएगी। कुछ महिलाओं ने आवास की समस्या मुख्यमंत्री को बताई। इस पर सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार हर जरूरतमंद को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास उपलब्ध कराने को संकल्पित हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो भी पात्र लोग पक्के आवास की सुविधा से वंचित हैं, उन्हें इसका लाभ दिलाया जाए।

उत्तर भारत में डबल मार: 40°C के करीब तापमान, हवा भी जहरीली

लखनऊ  उत्तर भारत में गर्मी अब सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के लिए दोहरी चुनौती बनकर सामने आ रही है। एक ओर आसमान से बरसती आग और पछुआ हवाओं की तपिश है, तो दूसरी ओर गिरती हवा की गुणवत्ता ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। लखनऊ में जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंचकर लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गया है। आने वाले दिनों में गर्मी और प्रदूषण दोनों के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लखनऊ में चटक धूप और पछुआ हवाओं ने बढ़ाई तपिश शहर में बीते दो दिनों से अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। गुरुवार को यह 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक रहा। सुबह से ही तेज धूप निकलने और दिनभर गर्म पछुआ हवाएं चलने के कारण गर्मी की चुभन लोगों को बेहाल कर रही है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है, जबकि लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। रात का तापमान भी 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे राहत कम ही मिल रही है। 2-3 दिन तक शुष्क रहेगा मौसम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना रहेगा। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और आने वाले 2–3 दिनों तक पछुआ हवाएं जारी रहेंगी। इससे तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। एनसीआर में गर्मी के साथ प्रदूषण का कहर गर्मी के साथ-साथ एनसीआर के शहरों में प्रदूषण ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में तापमान 38–39 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है। इसके साथ ही हवा की रफ्तार कम होने और धूल भरी हवाओं के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में जमा हो रहे हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। AQI ‘बहुत खराब’ स्तर पर, गाजियाबाद सबसे ज्यादा प्रभावित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का AQI 255 (खराब), ग्रेटर नोएडा का 318 और गाजियाबाद का AQI 308 दर्ज किया गया है। गाजियाबाद की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। बीते कुछ दिनों में यहां AQI 170 से बढ़कर 308 तक पहुंच गया है, जो तेजी से बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को दर्शाता है। धूल और हवाओं से बन रहे स्मॉग जैसे हालात विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की रफ्तार कम होने और धूल भरी हवाओं के चलते प्रदूषण के कण वातावरण में स्थिर हो रहे हैं। इससे स्मॉग जैसी स्थिति बन रही है, जो सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। अगर हवा की गति नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। 40 डिग्री पार जाने का अनुमान, लू चलने की चेतावनी मौसम विभाग के मुताबिक, 21 से 24 अप्रैल के बीच तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही लू चलने की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में दिन के समय बाहर निकलना और भी मुश्किल हो सकता है। स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा, विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और प्रदूषण का यह दोहरा असर शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने और पर्याप्त मात्रा में पानी व तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जल्द शुरू, 45 मिनट में पूरा होगा सफर

लखनऊ  दिल्‍ली-देहरादून एक्‍सप्रेसवे के बाद अब बहुत जल्‍द लखनऊ-कानपुर एक्‍सप्रेसवे का शुभारंभ हो सकता है। करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे 6 लेन एक्‍सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है। इसके खुल जाने से लखनऊ के अमौसी से कानपुर के आजाद चौक तक का सफर मात्र 35 से 45 मिनट में संभव हो जाएगा। जब लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे गाड़ियों के लिए खुल जाएगा, तो कार चालकों को 63 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए एक तरफ से 275 रुपये का टोल लगेगा। अगर 24 घंटे में वापसी हो जाती है तो 415 रुपये टोल लगेगा। जो लोग नियमित रूप से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करते हैं, उनके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा सालाना पास सेवा का विकल्प दिया जाएगा। इसका शुल्‍क 3,075 रुपये होगा। इस एक्सप्रेसवे पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों को फर्राटा भरने की अनुमति नहीं होगी। हमने कानपुर रिंग रोड पर काम पहले ही तेजी से शुरू कर दिया है। यह रिंग रोड कादर पटारी में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी। इससे गाड़ी मालिकों को अपनी मंजिल तक पहुंचने का एक और विकल्प मिल जाएगा और उन्हें शहर के ट्रैफिक से बिल्कुल भी जूझना नहीं पड़ेगा। सालाना पास से 200 बार टोल से गुजर सकेंगे वाहन सालाना पास की मदद से एक वाहन मालिक इस एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से 100 बार आना-जाना कर सकेगा। NHAI के अधिकारियों ने बताया कि सालाना पास के ज़रिए, एक वाहन को पास जारी होने के समय से एक साल के अंदर एक टोल प्लाजा से 200 बार गुजरने की अनुमति होती है। रोजाना सफर करने वालों का लगेगा मात्र 15.30 रुपये टोल हाईवे अथॉरिटी के कानपुर रीजनल ऑफिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कई लोग एक्सप्रेसवे की लागत पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें लगता है कि इसके चार्ज बहुत ज्‍यादा है। मैं बताना चाहता हूं सालाना पास एक्सप्रेसवे के साथ-साथ इस इलाके के दूसरे नेशनल हाईवे पर भी काम करेगा। इस पास से लोग एक साल में 200 बार टोल से गुजर सकेंगे या एक ही प्लाजा से 100 बार आना-जाना कर सकेंगे। ऐसे में, रोजाना सफर करने वालों के लिए एक ट्रिप की लागत 275 रुपये के बजाय घटकर 15.30 रुपये हो जाएगी। 120 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन दूसरी ओर, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब ट्रैफिक संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि इस छह-लेन वाले स्पीड कॉरिडोर को खोलने की तारीख तय की जा सके। इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से गाड़ियां चल सकें। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 3,700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसमें से 3,000 करोड़ रुपये सिविल कंस्ट्रक्शन के कामों पर खर्च किए गए हैं, जबकि बाकी रकम निजी जमीन खरीदने पर खर्च हुई है। दो साल में पूरा होगा कानपुर रिंग रोड का काम यह एक्सप्रेसवे सरोजिनी नगर के मीरानपुर पिनवट गांव से शुरू होगा और उन्नाव के कादर पटारी गांव में खत्म होगा। यह मौजूदा लखनऊ-कानपुर नेशनल हाईवे पर, जाजमऊ गंगा पुल से 5.5 किलोमीटर आगे स्थित है। कानपुर रिंग रोड को पूरा होने में लगभग दो साल लगेंगे।