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निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यालयों में सीखने के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से जुलाई में प्रदेश के सभी जनपदों में ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा।  प्रदेश के 33 केंद्रों पर 6 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में विभिन्न जनपदों के शैक्षणिक अधिकारी और विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की यह पहल निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य, विद्यालय गुणवत्ता सुधार, निपुण 2.0, बालवाटिका संचालन तथा डेटा आधारित अनुश्रवण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षा सुधार का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचें। इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटरों तथा जिला समन्वयकों को एक साझा मंच पर लाकर शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन की रणनीति तैयार की जाएगी। कार्यशालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति, निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर, विद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा निपुण विद्यालय लक्ष्यों पर विशेष मंथन होगा।  कार्यशालाओं में परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, उनकी नियमित समीक्षा तथा डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यालय में सीखने के परिणामों का सतत मूल्यांकन हो और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। निपुण भारत मिशन के विस्तार के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक प्रस्तावित लक्ष्य आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा-शिक्षण के लिए 10 प्वाइंट टूलकिट, कैच-अप शिक्षण तथा निपुण प्लस में प्रस्तावित सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन तथा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को विद्यालयों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों की सीखने की नींव और अधिक मजबूत हो सके। कार्यशालाओं में विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा, एआईपीएफएसएसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, बीईओ और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, विद्यालय गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना तथा शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने 295 करोड़ से अधिक लागत वाली 319 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

गोरखपुर मुख्यमंत्री ने गांधी इंटर कॉलेज, महुआपार बड़हलगंज में शनिवार को 295 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 319 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह धरा मां सरयू के आंचल में है। यहां के नौजवानों ने हर जगह अपनी प्रतिभा व परिश्रम का लोहा मनवाया है। एक समय बाढ़ की त्रासदी और कनेक्टिविटी के अभाव में क्षेत्र के लोग पलायन करते थे। आजीविका के लिए विदेश जाना पड़ता था, लेकिन अब यहां के नौजवान को बाहर नहीं जाना होगा। उसे यहीं रोजगार के ढेर सारे अवसर मिलेंगे। अब आपके द्वारा चुने गए विधायक-सांसद डबल इंजन सरकार की ताकत का इस्तेमाल करते हुए विदेश के लोगों को चिल्लूपार में काम करने का अवसर देने जा रहे हैं। विदेशी लोग यहां आकर चाकरी करेंगे। सीएम ने विश्वास जताया कि विकास व विरासत की यात्रा के साथ चिल्लूपारवासी बिना रुके-बिना झुके निरंतर आगे बढ़ेंगे।  सीएनजी-एथेनॉल ने बंद नहीं होने दिया काम सीएम योगी ने कहा कि हम लोगों ने धुरियापार में बंद पड़ी चीनी मिल की खाली जमीन पर सीएनजी का प्लांट लगवाया। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया में संकट है, लेकिन सीएनजी-एथेनॉल के कारण हमारे यहां काम बंद नहीं हुआ। ऊर्जा में आत्मनिर्भर अमेरिका में भी महंगाई चार गुना हो गई है। वहां 100 रुपये की वस्तु 400 रुपये में मिल रही है, लेकिन भारत में महंगाई नियंत्रित है। धुरियापार में लगने जा रही सीमेंट फैक्ट्री सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत गरीब कल्याण, विकास व सुरक्षा का बेहतरीन माहौल देते हुए माफिया को मिट्टी में भी मिलाता है। एक समय रामजानकी मार्ग पर आवागमन ठप होता था। उपचार के लिए लखनऊ जाने को मजबूर होना पड़ता था। कनेक्टिविटी, रोडवेज बस व अन्य साधन तक नहीं थे। जैसे-तैसे व्यवस्था चल पाती थी, लेकिन आज कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। 2017 के पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि धुरियापार में इंडियन ऑयल का सीएनजी प्लांट लगेगा या सहजनवां का गीडा आ पाएगा। अब हम यहां ग्रेटर गीडा बनाने जा रहे हैं। अभी से हजारों करोड़ रुपये के प्रस्ताव आ गए हैं, जिन्हें हमें उद्योग के रूप में स्थापित करना है। इसमें सीमेंट की फैक्ट्री धुरियापार में लगने जा रही है। पावर प्लांट, आधुनिक पेंट व अत्याधुनिक डिस्टलरी भी स्थापित होगी, जहां मॉडर्न मेडिसिन, एलोपैथिक दवा भी बनेगी। यहां भारी पैमाने पर निवेश के प्रस्ताव आ रहे हैं।  राजेश त्रिपाठी जितने प्रस्ताव देंगे, सरकार स्वीकृत करेगी  सीएम ने कहा कि विधायक राजेश त्रिपाठी जितने भी प्रस्ताव देंगे, सरकार उन्हें स्वीकृत करेगी। राजेश त्रिपाठी ने यहां होमियोपैथिक कॉलेज स्वीकृत कराया था, उस समय काम बढ़ा, लेकिन सपा सरकार ने आते ही काम रोक दिया। उस समय चुने गए लोगों ने कान में तेल डालकर इसे अनसुना कर दिया था। 2017 में सरकार आने पर राजेश जी इस काम के लिए रोज मिलते थे। आज इस विधानसभा क्षेत्र में आयुष के डॉक्टर बन रहे हैं। चिल्लूपार ट्रेडिशनल मेडिसिन का नया केंद्र बन रहा है। जितनी फास्ट कनेक्टिविटी-उतनी तेज प्रगति सीएम योगी ने बताया कि मैंने जलशक्ति मंत्री से कहा है कि बाढ़ बचाव के लिए जो भी प्रस्ताव आएंगे, उन समस्याओं का समाधान होना चाहिए। सीएम ने कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए कहा कि यह जितनी फास्ट होगी, प्रगति उतनी तेज गति से बढ़ेगी। प्रगति होगी तो नौजवान को पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने क्षेत्र में नौकरी व रोजगार मिलेगा, यही देश में डबल इंजन सरकार के कार्यों की पहचान है। गीडा यहीं आ रहा है, यहां के नागरिकों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर बढ़ेंगे। नौजवानों को बाहर नहीं जाना होगा। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से अब बेहतर कनेक्टिविटी सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार अब विकास की प्रक्रिया से जुड़ा है। एक तरफ लखनऊ को जोड़ने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे तो दूसरी तरफ गोरखपुर-वाराणसी को जोड़ने वाला फोरलेन का नेशनल हाइवे है। इस विधानसभा क्षेत्र से कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है। यहां से तीन घंटे में लखनऊ, दो घंटे में वाराणसी, आधे-पौने घंटे में गोरखपुर पहुंच जाएंगे।  सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने तेज की विकास प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने विपरीत मौसम के बावजूद कार्यक्रम में आए आमजन के हौसले को सलाम किया और कहा कि आपके उत्साह को देखते हुए आंधी-तूफान भी थम गया। कल्याण चाहने वालों को डबल इंजन सरकार के साथ चलना होगा। सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने मिलकर विकास की प्रक्रिया को तेज किया। विकास की हर योजना चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में आ रही है। यह क्षेत्र अब विकास से वंचित नहीं रहेगा। विकास की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े, यही यूपी की पहचान है।  कमल पर वोट देते हैं तो तर जाती है पीढ़ी दर पीढ़ी सीएम ने कहा कि आप कमल पर वोट देते हैं तो पीढ़ी दर पीढ़ी तर जाती है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सभी अपमानित हुए थे, वहां लगातार आंदोलन चलता रहा। संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं, लेकिन जब मोदी जी पीएम बने और यूपी में डबल इंजन सरकार आई तो अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया। यह काम कांग्रेस या सपा नहीं कर पाती।  जब विधायक ही ठेका-पट्टा करेगा तो क्या होगा  सीएम ने कहा कि जो लोग आस्था-महापुरुषों को सम्मान, विकास की योजनाएं, नौजवान को रोजगार, उद्योग-धंधे नहीं ला सकते, बेटी-बहन को सुरक्षा, बाढ़ की समस्या का समाधान और सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते, ऐसे लोगों को नहीं चुनना चाहिए। जब गलत व्यक्ति को चुनते हैं तो अपने ऊपर बोझ व कलंक का ठप्पा लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के साथ यही होता था, गलत लोग चुनकर जाते थे तो जनता का पैसा कुछ लोगों के ही विकास में लगता था। नौकरी में सेंध लगती थी। नौजवानों को नौकरी नहीं मिलती थी। पैसे का लेनदेन शुरू हो जाता था। ठेके पट्टे के लिए मारपीट होने लगती थी। जब विधायक स्वयं ठेका करेगा तो क्या होगा, यह बताने की आवश्यकता नहीं। गोरखपुर के 800 से अधिक नौजवान पुलिस में भर्ती सीएम ने कहा कि पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के भी लगभग 800 से अधिक नौजवान शामिल थे। आज सरकारी सेवाओं में गोला, बड़हलगंज, गगहा, बांसगांव, खजनी, सिकरीगंज, चौरीचौरा, पिपरौली, सहजनवा, पाली से भी नौजवानों … Read more

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 14 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 14 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

200 बेड व अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बुजुर्गों को मिलेगा समर्पित इलाज, मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता व समयबद्ध निर्माण के दिए निर्देश

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 200 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया। सात मंजिला इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी परियोजना की नियमित निगरानी करने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बुजुर्गों को समर्पित यह अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ देश का तीसरा तथा उत्तर भारत का प्रमुख जरा (वृद्धावस्था) चिकित्सा केंद्र होगा। इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। केंद्र में बुजुर्गों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक (वृद्धावस्था चिकित्सा) ओपीडी संचालित की जाएगी। इसके अलावा मेमोरी क्लीनिक, गठिया (अर्थराइटिस) क्लीनिक समेत वृद्धावस्था से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के उपचार हेतु विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस केंद्र में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, अत्याधुनिक रेडियोलॉजी एवं जांच सुविधाएं, पुनर्वास सेवाएं, डे-केयर सेंटर, आईसीयू तथा प्राइवेट वार्ड की व्यवस्था भी होगी। इसके साथ ही यह संस्थान जरा चिकित्सा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। शैक्षणिक गतिविधियों के तहत यहां जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों और नर्सों को बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। वरिष्ठ चिकित्सकों एवं सीनियर रेजिडेंट की सीटों में वृद्धि के साथ-साथ एमडी जेरिएट्रिक मेडिसिन की स्नातकोत्तर सीटें भी बढ़ाई जाएंगी। वृद्धावस्था संबंधी रोगों पर अनुसंधान, उपचार पद्धतियों का विकास तथा बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा दिशानिर्देश तैयार करने का कार्य भी इस केंद्र में किया जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के शुरू होने के बाद पूर्वांचल सहित उत्तर भारत के लाखों बुजुर्ग मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

गो संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार का विजन : छोटी लागत में बड़ी बचत कर सकेंगे ग्रामीण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अब गो सेवा को ग्रामीण समृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। प्रदेश में गांवों के एक लाख से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य गो संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी घरेलू बचत बढ़ाना है।  योगी सरकार का विजन है कि ग्रामीण परिवार कम लागत में अपने घरों पर ही मिनी बायोगैस संयंत्र लगाकर रसोई गैस के खर्च में बड़ी कमी ला सकें। गो सेवा आयोग की इस योजना के अनुसार 25 हजार से 50 हजार रुपये की लागत में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा सकेंगे। इससे गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तो तैयार होगा ही साथ में किसानों को जैविक खाद भी बड़े पैमाने पर प्राप्त होगी। इसके साथ ग्रामीणों को रसायनमुक्त भोजन मिलेगा।  गो संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण साबित होगी। स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और गो पालन को एक साथ जोड़ने वाली इस पहल से गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू खर्च में होगी बचत उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योजना के लागू होने पर रसोईघरों में एलपीजी की खपत में भी कमी आएगी, जिससे घरेलू खर्च में उल्लेखनीय बचत होगी। उन्होंने बताया कि मिनी बायोगैस प्लांट के माध्यम से किसान बायोगैस तैयार करेंगे और उससे निकलने वाली स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति इस योजना के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार कम खर्च में अपने घरों पर संयंत्र स्थापित कर सकेंगे। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी। साथ ही गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर गो पालकों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल से उत्तर प्रदेश में ‘गो सेवा से समृद्धि’ का नया मॉडल विकसित हो रहा है, जहां गो संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता एक साथ आगे बढ़ेंगे।

57,694 ग्राम पंचायतों में सचिवालय, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्वच्छता अभियान से ग्रामीण विकास को मिली नई गति

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने पिछले पांच वर्षों में ग्रामीण विकास, डिजिटल सुशासन, स्वच्छता और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभाग की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रस्तुत किए गए विवरण में ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए किए गए कार्यों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।       उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 57,694 ग्राम पंचायतें हैं और ग्रामीण आबादी लगभग 15.53 करोड़ है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 78 प्रतिशत है। बीते वर्षों में सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित किए गए हैं तथा 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया। पंचायत सचिवालयों में फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के तहत 54,958 कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से 49.38 लाख से अधिक सेवाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराई गईं। इससे पंचायतों की आय और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि हुई।       स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने सामुदायिक शौचालय निर्माण में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। राज्य में हजारों गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रे-वाटर मैनेजमेंट और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल के माध्यम से पंचायतों की आय में भी वृद्धि हुई है।    विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के क्षमता विकास पर भी विशेष जोर दिया है। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाखों जनप्रतिनिधियों और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत गेटवे पोर्टल और परिवार रजिस्टर के डिजिटलीकरण जैसे नवाचार ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।       आगामी वर्षों के लिए विभाग ने मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, डिजिटल लाइब्रेरी विस्तार, पंचायत उत्सव भवन और मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

दालमंडी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासनिक कार्रवाई पर ब्रेक

वाराणसी  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है. अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अस्थायी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना को लेकर चिंतित थे।  याचिकाकर्ता ने नोटिस को दी थी चुनौती यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि कार्रवाई में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हैं और बिना उचित सुनवाई के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।  हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें पेश करने का अवसर दिया है. यह मामला दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम ने उनके मकान को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है, जबकि उनकी आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही विधिवत तामील किया गया है. ऐसे में मकान गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती।  मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को संयुक्त समिति गठित कर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने और उनके पक्ष पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बाद में जारी नोटिस में कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भवन को जर्जर पाया गया है और उसे ध्वस्त किया जाना आवश्यक है।  याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता काज़ी मुहम्मद अकरम एवं उनकी टीम ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई असंवैधानिक एवं अवैध होगी. पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया।  20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति प्रदान की गई है।  खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए. साथ ही 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।  हाईकोर्ट के इस आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में आने वाले प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।   

गाय के असामान्य व्यवहार से फैली भीड़, जांच में हाइपोग्लाइसीमिया की पुष्टि

श्रीवस्ती यूपी श्रावस्ती जिले के बसभरिया पुरैना गांव में एक गाय का असामान्य व्यवहार पिछले एक सप्ताह तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। गाय लगातार सात दिनों तक एक खेत में चक्कर लगाती रही, जिससे उसे देखने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया। हालांकि पशु चिकित्सकों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गाय किसी चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि एक बीमारी की वजह से ऐसा व्यवहार कर रही थी। 7 दिनों से खेत के चक्कर लगा रही थी गाय ग्रामीणों के अनुसार गाय ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे खेत में घूमना शुरू किया था। इसके बाद वह रुक-रुक कर लगातार सात दिनों तक उसी खेत में परिक्रमा करती रही। गाय के इस व्यवहार को देखकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे चमत्कार मान लिया और खेत में पहुंचकर गाय की पूजा-अर्चना करने लगे। कुछ श्रद्धालुओं ने तो स्वयं भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी। गाय के दर्शन के लिए पहुंचने लगे लोग गांव में लगातार बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल होने लगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंच रहे थे, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने भी स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी। उधर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव पहुंची और गाय की जांच की। उत्तर प्रदेश के जिला श्रावस्ती में गाय पिछले 8 दिन से एक ही खेत के लगातार चक्कर लगा रही थी। लोगों ने चमत्कार मानकर पूजा–अर्चना शुरू कर दी। गाय की तरह लोगों ने भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी।      सर्रा बीमारी से पीड़ित निकली गाय डॉक्टरों ने बताया कि गाय ‘सर्रा’ यानी हाइपोग्लाइसीमिया नामक बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण पशु असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और लगातार एक ही दिशा में घूमने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। टीम ने गाय का उपचार शुरू कर दिया और उसकी स्थिति पर निगरानी रखी। आठवें दिन पुलिस मौके पर पहुंची और अनावश्यक भीड़ को हटाने के लिए लोगों को समझाया। इसके बाद गाय को उसके मालिक के सुपुर्द कर दिया गया। साथ ही परिवार को भी निर्देश दिए गए कि घटना को लेकर भीड़ इकट्ठा न होने दें। डॉक्टर बोले- धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी गाय पशु चिकित्सकों का कहना है कि उपचार के बाद गाय धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। हालांकि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बावजूद कई लोग अब भी इस घटना को चमत्कार या किसी विशेष संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल गांव में हालात सामान्य हैं और लोग गाय के पूरी तरह स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे हैं।

सीएम योगी का बयान: कृषि और विज्ञान भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कृषि प्रधान देश भारत का किसान हमेशा से नवाचारी रहा है और खेती किसानी में नए प्रयोग कर कृषि योग्य भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में दिलचस्पी जाहिर करता रहा है। यही कारण है कि भारत में कृषि क्षेत्र कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है। योगी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा, पहले किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी, जो अपने उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम करती थी। भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था। विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण सीएम योगी विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है। दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए थे। हमें यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु की दो पौधों वाली कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवों में ही नहीं, जड़-पौधों में भी चेतना होती है। उन्होंने बचपन में अपनी मां द्वारा पौधे लगाए जाने का जिक्र किया और कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल बना दिया गया था, उनके बनाए उत्पादों को बेकार बताया गया था, परिणामस्वरूप वे बाजारों से बाहर हो गए थे। 2017 के बाद एक जिला एक उत्पाद दिया जोर सीएम योगी ने कहा, 2017 के बाद हमने 'एक जिला एक उत्पाद' शुरू करके डिजाइन और पैकेजिंग पर जोर दिया। बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर कार्य कर प्राथमिकता के आधार पर समय से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।

लर्निंग गैप भरने की पहल: परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में शुरू होगा विशेष शिक्षण कार्यक्रम

 लखनऊ अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई) के अनुरूप प्रदेश सरकार जुलाई से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करने जा रही है। इससे विद्यार्थियों के सीखने के अंतर (लर्निंग गैप) को भरना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई में सभी विद्यालयों में 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद अगस्त से जनवरी 2027 तक प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण कराया जाएगा। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का फॉर्मेटिव असेसमेंट कराया जाएगा। इसके आधार पर उनकी जरूरतों के अनुसार समूह बनाए जाएंगे और अलग-अलग शिक्षण योजनाएं तैयार की जाएंगी। नई अवधारणाओं को विद्यार्थियों को दैनिक जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़कर पढ़ाया जाएगा ताकि सीखना आसान और स्थायी बन सके। विद्यालयों में बिग बुक, वार्तालाप कार्ड, पोस्टर, पुस्तकालय की किताबें, गणित किट और स्थानीय स्तर पर तैयार शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाया जाएगा। भाषा शिक्षण में पहले दो अक्षरों वाले शब्द, फिर छोटे वाक्य और उसके बाद अनुच्छेद पढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। गणित को खेल आधारित बनाया जाएगा। किसी बच्चे को नहीं कहा जाएगा कमजोर कैच-अप शिक्षण में पहले शिक्षक उदाहरण देंगे, फिर विद्यार्थियों के साथ अभ्यास करेंगे और अंत में बच्चे स्वयं कार्य करेंगे। पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोआपरेटिव लर्निंग जैसी विधियों का भी प्रयोग होगा। भाषा खेल, कहानी, चित्र आधारित गतिविधियां, रोल प्ले, स्किट और प्रतियोगिताओं के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा। किसी भी विद्यार्थी को कमजोर या पीछे होने का एहसास नहीं कराया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं को सकारात्मक शैक्षिक सहयोग के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य पुस्तिकाओं और नोटबुक की नियमित जांच होगी तथा गलतियों को दंड नहीं बल्कि सीखने का अवसर माना जाएगा।