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सीएम बलरामपुर में 78 विकास परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण व शिलान्यास

मुख्यमंत्री योगी शनिवार को बलरामपुर को 803 करोड़ रुपए से अधिक की देंगे सौगात सीएम बलरामपुर में 78 विकास परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण व शिलान्यास रेहरा बाजार के बिलरिया में जनसभा को करेंगे संबोधित, लाभार्थियों को बांटेंगे चेक व प्रमाण पत्र लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार(10 अक्टूबर) को बलरामपुर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री जिले को 803 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 78 विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देंगे। कार्यक्रम का आयोजन विकास खंड रेहरा बाजार के ग्राम बिलरिया (उतरौला) में किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक व प्रमाण पत्र भी वितरित करेंगे। सीएम योगी यहां जनसभा को संबोधित भी करेंगे। इस कार्यक्रम में जिला पंचायत प्रशासक आरती तिवारी, विधान परिषद सदस्य साकेत मिश्रा व अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह, तथा विधायक रामप्रताप वर्मा उर्फ शशिकांत वर्मा, कैलाश नाथ एवं पल्टूराम समेत कई जनप्रतिनिधि व गणमान्य मौजूद रहेंगे।

यूपी के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार ने दी बड़ी सौगात

राज्य कर्मचारियों के लिए योगी सरकार की बड़ी सौगात सचिवालय प्रशासन विभाग और एक्सिस बैंक के बीच एमओयू, कर्मचारियों को मिलेंगे स्पेशल सैलरी अकाउंट के साथ सुरक्षा और कल्याण के अतिरिक्त लाभ पात्र राज्य कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर, साथ ही 30 लाख रुपये का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश के राज्य कर्मचारियों के कल्याण और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। सचिवालय प्रशासन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और एक्सिस बैंक के बीच एमओयू किया गया है। इसके तहत प्रदेश के राज्य सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से तैयार सैलरी अकाउंट के साथ कई अतिरिक्त सुरक्षात्मक और कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर एमओयू के तहत पात्र राज्य कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध होगा। इससे आकस्मिक परिस्थितियों में कर्मचारी और उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को 30 लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए मात्र सात रुपये प्रतिदिन के नाममात्र प्रीमियम की व्यवस्था की गई है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक स्वास्थ्य खर्चों के समय अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी। बच्चों की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक की सहायता व्यवस्था के तहत आश्रित बच्चों की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का सावधि जीवन बीमा कवर भी मिलेगा। एमओयू के तहत कर्मचारियों के लिए विशेष वेतन खाता उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं के साथ सुरक्षा और कल्याण से जुड़े अतिरिक्त लाभ भी मिलेंगे।

राष्ट्र की प्रगति को नई रफ्तार देंगे नवनिर्वाचित सदस्य, मुख्यमंत्री ने जताया भरोसा

राष्ट्र की प्रगति को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे नवनिर्वाचित सदस्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित भाजपा प्रत्याशियों को दी बधाई राष्ट्र की प्रगति को नई रफ्तार देंगे नवनिर्वाचित सदस्य, मुख्यमंत्री ने जताया भरोसा उत्तर प्रदेश से भाजपा के धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, रामप्रताप सिंह चौहान, श्रुति गंगवार निर्वाचित लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव-2026 में उत्तर प्रदेश से निर्विरोध निर्वाचित होने पर भाजपा के सभी प्रत्याशियों को बधाई दी है।  गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, रामप्रताप सिंह चौहान, श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया था। इन सभी आठों प्रत्याशी ने निर्विरोध जीत दर्ज की।  मुख्यमंत्री ने सभी को शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि निर्विरोध निर्वाचित सभी सदस्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने तथा राष्ट्र की प्रगति को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही, उच्च सदन की गरिमा को अभिवर्धित करेंगे। मुख्यमंत्री ने सभी को उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलकामनाएं भी प्रेषित कीं।

लखनऊ में बाढ़ प्रभावितों तक नावों से पहुंच रहा भोजन और राशन, 1,900 फूड पैकेट बांटे गए

योगी सरकार के निर्देश पर बाढ़ प्रभावितों को नावों से पहुंचाया जा रहा भोजन और राशन लखनऊ के जलभराव वाले क्षेत्रों में 1,900 खाद्य पैकेट और पेयजल वितरित नावों के जरिए भोजन पैकेट के साथ कच्चा और सूखा राशन भी पहुंचाया लोहरामऊ और दाउदनगर में ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव, शनिवार से तीन ड्रोन लगाने की तैयारी नगर आयुक्त ने फैजुल्लागंज और गुल्मी खेड़ा समेत प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा   लखनऊ,   गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से जलभराव की समस्या से जूझ रहे लखनऊ के इलाकों में योगी सरकार के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं। लखनऊ नगर निगम की टीमें प्रभावित परिवारों तक भोजन, राशन और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के साथ सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के इंतजामों में जुटी हैं। शुक्रवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने फैजुल्लागंज, गुल्मी खेड़ा समेत विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नावों से पहुंचाई गई राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन की परेशानी को देखते हुए नावों के माध्यम से लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। निजी संस्थाओं के सहयोग से नगर निगम की टीम ने करीब 500 से 600 पके भोजन के पैकेट के साथ कच्चा और सूखा राशन वितरित किया। जोन-3 और जोन-6 के अंतर्गत हयात नगर, बरावन कला, टांड़ खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, दौलत खेड़ा, लक्ष्मी हॉस्पिटल वाली गली और गुल्मी खेड़ा समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई गई। नगर निगम की टीम ने सुबह और शाम दोनों पालियों में कुल 1,900 खाद्य पैकेट और पेयजल की बोतलें वितरित कीं। प्रशासन का जोर प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर है। अधिकारियों ने संभाली राहत कार्यों की कमान जोन-3 में जोनल अधिकारी अजीत राय, जोनल सेनेटरी ऑफिसर सचिन सक्सेना और अधिशासी अभियंता नजमी मुजफ्फर ने राहत कार्यों की निगरानी की। वहीं, जोन-6 में जोनल अधिकारी अमरजीत सिंह यादव, जोनल सेनेटरी ऑफिसर राकेश कुमार और अधिशासी अभियंता अशोक यादव ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में राहत सामग्री के प्रबंधन के लिए करीब 70 कर्मचारियों को लगाया गया। कर्मचारियों ने पिछले दो दिनों में पहुंची खाद्य सामग्री को उतारकर ट्रैक्टरों पर लोड किया, जिससे इसे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में आसानी हो सके। बीमारियों की रोकथाम के लिए ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव  जलभराव के बाद मच्छरों के प्रजनन और संक्रामक बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए लोहरामऊ और दाउदनगर में ड्रोन के जरिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। जलस्तर स्थिर होने के बाद अभियान का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। शनिवार से तीन ड्रोन लगाने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव किया जा सके। नगर निगम की टीमें राहत वितरण, सफाई, स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में लगी हैं।

उज्ज्वला योजना के तहत फ्री मिलेंगे 2 गैस सिलेंडर, जानें कब से कब तक मिलेगा लाभ

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलेंगे दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल पहले चरण में अक्टूबर-दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी-मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में दो चरणों में (होली व दीपावली पर) उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को निःशुल्क सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। इस कदम से लाभार्थियों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ी है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर धुएं से पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को कम करने में भी मदद मिली है। विगत वर्ष की तरह चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल दिए जाएंगे। पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर राज्य सरकार के ऊपर कुल 2,142.78 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय भार आएगा। योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ऐसे एसीटीसी लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक होंगे और आधार प्रमाणित होगा। ऐसे लाभार्थी ही निःशुल्क एलपीजी रिफिल के लिए पात्र होंगे। सरकार के इस निर्णय से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से आच्छादित लाभार्थियों का जीवन-यापन सुविधाजनक होगा।

UP के किसानों के लिए बड़ा फैसला, खरीफ सीजन 2026-27 में 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी सरकार

किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति को मंजूरी   मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद के लिए प्रदेश में 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव   बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 और हाइब्रिड ज्वार में 324 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी   किसानों से 31 दिसंबर तक होगी खरीद, यथासंभव 48 घंटे में बैंक खाते में पहुंचेगा भुगतान   लखनऊ  प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति तय कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। खरीद के लिए 455 क्रय केंद्र खोलने की तैयारी है। बाजरे और हाइब्रिड ज्वार के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हुई है। खरीद की अवधि एक अक्टूबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने क्रय नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों से भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। उपज का भुगतान बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर सीधे किसानों के खातों में कराया जाएगा।   बाजरा 2900 और मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा नई क्रय नीति के अनुसार, बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसमें 125 रुपये की वृद्धि हुई है। मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वहीं, हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 3699 रुपये से बढ़कर 4023 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसमें 324 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ज्वार मालदांडी का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।   बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य प्रदेश में मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद शामिल है। सबसे अधिक खरीद का लक्ष्य बाजरे के लिए रखा गया है।   बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र खुलेंगे मोटे अनाज की खरीद के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र होंगे। क्रय केंद्र मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जहां संबंधित फसल की अच्छी आवक होती है और सरकारी खरीद की पर्याप्त संभावना रहती है।   इन 25 जिलों में होगी मक्का की खरीद मक्का की खरीद बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर में की जाएगी।   बाजरे की खरीद के लिए 33 जिले निर्धारित बाजरे की खरीद बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर में होगी।   ज्वार की खरीद के लिए चुने गए 13 जिले ज्वार की सरकारी खरीद उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में की जाएगी।   ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य सरकारी खरीद के लिए किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। क्रय केंद्रों पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद होगी। इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। खरीद की प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन संचालित होगी।   आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे मिलेगा भुगतान किसानों से खरीदी गई उपज का भुगतान उनके आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों का सत्यापन होगा। सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में धनराशि भेजने की व्यवस्था की गई है।

जेवर एयरपोर्ट का नाम होगा ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’, योगी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’: सीएम योगी सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री के सम्मान में योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, नामकरण प्रस्ताव पारित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में गिनाईं पीएम मोदी के 25 वर्षों की उपलब्धियां कहा- सेवा, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास तक पहुंची यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित मुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी: सीएम लखनऊ  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर अब ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एयरपोर्ट के नामकरण का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिए गए इस निर्णय को मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति प्रदेश सरकार की कृतज्ञता और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके मार्गदर्शन एवं योगदान के सम्मान का प्रतीक बताया। कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया है। 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री जी ने सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों की निरंतर और समर्पित सार्वजनिक सेवा पूरी की। यह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। 25 वर्षों की यह यात्रा ‘सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम’ की भावना से संचालित रही है। यह यात्रा केवल सत्ता या शासन की यात्रा नहीं, बल्कि ‘जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास’ की यात्रा है। जेवर एयरपोर्ट का नामकरण, प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता का संदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर प्रधानमंत्री जी की ओर से उत्तर प्रदेश को मिली एक बड़ी सौगात है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। इसी भावना के साथ कैबिनेट ने एयरपोर्ट का नाम ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ किए जाने का प्रस्ताव पारित किया है। कैबिनेट प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, उनके सतत मार्गदर्शन, उत्तर प्रदेश के विकास के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता और देश को नई दिशा देने वाले नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करती है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जी के यशस्वी नेतृत्व के प्रति अभिनंदन भी व्यक्त किया। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा, निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम करती रहेगी। काशी से जेवर तक, यूपी से प्रधानमंत्री का विशेष जुड़ाव मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी काशी से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उत्तर प्रदेश की धरती से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री जी ने काशी आगमन पर कहा था- ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है।’ इसके बाद काशी और प्रधानमंत्री जी का संबंध केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा। काशी के विकास, आध्यात्मिक पुनर्जागरण और उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के बीच एक नया संबंध बना। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और केंद्र-प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से उत्तर प्रदेश में विकास की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश प्रशासनिक जड़ता, असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था। इसके बाद पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल वातावरण को विकास का आधार बनाया गया। 2,483 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और नमो भारत से बदली कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग ₹60 हजार करोड़ खर्च किए गए हैं। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई गति दी है। ₹30 हजार करोड़ से अधिक लागत से दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत/आरआरटीएस परियोजना देश में हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन की नई मिसाल बनी है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है। इसी बदलती कनेक्टिविटी का नया केंद्र जेवर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने जा रहा है। सीएम ने इसे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और भविष्य में देश के बड़े एविएशन हब में विकसित होने वाली परियोजना बताया। फ्रेट कॉरिडोर से डिफेंस कॉरिडोर तक, औद्योगिक तस्वीर बदली मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के बड़े लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। दादरी ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख जंक्शन बन चुका है। 1,050 किलोमीटर से अधिक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रदेश से गुजर रहा है। वाराणसी में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर देश का पहला मल्टीमॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और 100 एकड़ का देश का पहला फ्रेट विलेज विकसित हुआ है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल असेंबली यूनिट, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और 1,000 एकड़ का पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क औद्योगिक विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं। किसानों को सीधे लाभ, फसल ऋण से गन्ना भुगतान तक किसान कल्याण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है। करीब 86 लाख किसानों की ऋणमाफी की गई है। प्रदेश में 5.50 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹13,42,978 करोड़ का फसल ऋण वितरित किया गया। 79.51 लाख किसानों को फसल क्षति के मद में भुगतान मिला है, जबकि गन्ना किसानों को ₹3.30 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। आवास, राशन और पानी से गरीबों के जीवन में बदलाव मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास मिले हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 3.67 करोड़ राशन कार्डधारक परिवारों के करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत 2.46 करोड़ से अधिक ग्रामीण … Read more

मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर में विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये मंजूर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए कुल 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 164.87 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमन्य की गई है। इसमें से पहली किस्त के रूप में 115 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति देते हुए धनराशि अवमुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। इस योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के साथ बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। शासन ने 6 अप्रैल 2023 को इस योजना को लागू किया था। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दी जा सकती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप सफलतापूर्वक संपन्न

लखनऊ रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश तथा भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के इन-स्पेस और नगर विकास विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रूपाम सभागार में हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग, जियोस्पेशियल इंडस्ट्री और प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने इन-स्पेस के विशेषज्ञों और देश भर से आए इंडस्ट्री पार्टनर्स से आग्रह किया कि आधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग प्रदेश के किसानों की खेती-बाड़ी सुधारने, सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में पैदावार बढ़ाने तथा सूखा और बाढ़ से बेहतर ढंग से निपटने में किया जाए। उन्होंने गवर्नेंस, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा नेटवर्क तथा सुरक्षित पुलों, सड़कों और नहरों की वैज्ञानिक प्लानिंग में भी इन तकनीकों के इस्तेमाल पर बल दिया, ताकि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 का संकल्प पूरा हो सके। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश के समस्त भूखंडों के जियोटैगिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को अपने खेत की सही बाउंड्री की जानकारी मिल सकेगी और भूमि विवादों का निस्तारण आसान होगा। उन्होंने भवन कर के लिए शत-प्रतिशत घरों की मैपिंग स्पेस एप्लीकेशंस के माध्यम से कराने की भी बात कही, ताकि नगर विकास विभाग अपने संसाधनों में वृद्धि कर सके। इस पूरे आयोजन में उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। विभाग ने न केवल इस कार्यशाला की परिकल्पना और सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया, बल्कि रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर के माध्यम से कृषि, वन, जल, भू-संसाधन, शहरी प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपग्रह आधारित तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाया। प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी, जबकि विशेष सचिव एवं आरएसएसी-यूपी निदेशक रमेश चन्द्र ने स्पेस टेक्नोलॉजी को नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर प्रदेश के विकास को नई गति देने का आह्वान किया। कार्यशाला में रिमोट सेंसिंग सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिरुद्ध उनियाल ने खनिज, जल और आपदा प्रबंधन पर, वैज्ञानिक आलोक सैनी ने शहरी विकास एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर तथा डॉ. पी.पी.एस. यादव ने पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। नगर विकास, आवास, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, वन, ग्रामीण विकास सहित प्रदेश के 50 से अधिक विभागों और जनपदों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। 22 इंडस्ट्री पार्टनर्स ने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए, जबकि 75 प्राइवेट फर्मों ने सक्रिय भागीदारी की। इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिकों और कई जनपदों के जिलाधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। अंतिम सत्र में प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और स्पेस एप्लीकेशंस से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच राउंड टेबल चर्चा हुई, जिसमें विभागों की समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर विस्तार से बातचीत हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निरंतर और दूरदर्शी प्रयासों से उत्तर प्रदेश आज अंतरिक्ष तकनीक को ज़मीनी स्तर पर अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। यह कार्यशाला सुशासन, उत्पादकता और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम साबित हुई है।

वाराणसी एयर शो के लिए बड़ा फैसला, 19 से 26 अक्टूबर तक मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध

वाराणसी वाराणसी नगर निगम ने भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ पर नमो घाट पर आयोजित भव्य एयर शो के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल के 30 किलोमीटर के दायरे में मीट, मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगा दी है. यह रोक 19 से 26 अक्टूबर तक लागू रहेगी. लड़ाकू विमानों को 'बर्ड हिट' के खतरे से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है. राज्य सरकार द्वारा 'स्टेट इवेंट' घोषित इस कार्यक्रम में 22, 23 और 25 अक्टूबर को मुख्य एयर शो होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. पशु चिकित्सा अधिकारी और नगर निगम टीमों को दुकानें बंद कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।  लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए फैसला नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि उड़ने वाले लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के दृष्टिगत बर्ड हिट की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है. संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे दुकानदारों को नोटिस जारी करें और व्यक्तिगत रूप से जाकर दुकानें न खोलने की सख्त हिदायत दें. 26 अक्टूबर को स्टैंडबाय दिन रखा गया है।  नमो घाट पर 20 लाख लोगों के आने का अनुमान इस ऐतिहासिक एरियल डिस्प्ले-2026 को देखने के लिए गंगा घाटों पर लगभग 20 लाख दर्शकों के जुटने की उम्मीद है. इतनी बड़ी भीड़ और जल सुरक्षा को देखते हुए गंगा के गहरे पानी वाले क्षेत्रों में प्रभावी बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं. दर्शकों को अनियंत्रित होकर गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए संवेदनशील रास्तों पर बैरियर भी लगाए जाएंगे।  स्वच्छता और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए 20 से 26 अक्टूबर तक विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा. इसके अलावा श्रद्धालुओं और दर्शकों की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में मोबाइल टॉयलेट स्थापित किए जा रहे हैं. आवारा पशुओं पर नियंत्रण और मोबाइल टावर की व्यवस्था भी नगर निगम द्वारा की जा रही है।