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Ganga Expressway: उद्योगों की रफ्तार बढ़ेगी, नए खरीदार मिलेंगे, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा फायदा

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ के उद्यमी उत्साहित हैं। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच दूरी और समय दोनों कम करेगा। इससे न सिर्फ लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि किसानों, व्यापारियों और उद्योगों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे। कृषि उत्पादों की तेज आपूर्ति और नए बाजारों तक पहुंच हो सकेगी। मेरठ के धातु व खेल उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग, गैस रेगुलेटर उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होंगे। आइआइए मेरठ मंडल चैप्टर के अध्यक्ष तनुज गुप्ता का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन, यातायात, व्यापार, उद्योग समेत सभी क्षेत्रों के लिए लाभकारी साबित होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी। माल ढुलाई में लगने वाले समय और खर्च दोनों कम हो जाएगा। मेरठ की 50 से अधिक गैस रेगुलेटर इकाई, 30 से अधिक धातु उत्पाद इकाई, 80 से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाई, खेल सामग्री, वस्त्र, कृषि आधारित सामग्री को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। बड़ी मात्रा में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मेरठ से गैस रेगुलेटर की आपूर्ति होती है। सिकंदराबाद और गुलावठी क्षेत्र से औद्योगिक निर्माण के लिए लोहे के पार्ट्स, केमिकल और पैकेजिंग सामग्री व हरदोई से खेल उद्योग के लिए लकड़ी की आपूर्ति आसानी से हो सकेगी। आइआइए मेरठ चैप्टर के अध्यक्ष अंकित सिंघल का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन, यातायात, व्यापार, उद्योग समेत सभी क्षेत्रों के लिए लाभकारी साबित होगा। पेपर उद्योग से संबंधित सामग्री, खेल उत्पाद, रबर उत्पाद, खाद, स्टील आदि उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। मेरठ आने वाले कृषि अपशिष्ट बगास व फल, सब्जी और फूल समेत विभिन्न सामग्री आसानी से मेरठ पहुंच जाएगी। परतापुर औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से माल ढुलाई में लगने वाले समय और खर्च दोनों कम हो जाएंगे। विशेष रूप से खेल सामग्री, वस्त्र, कृषि आधारित सामग्री और खाद्य सामग्री (पैक्ड अचार) को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नए बाजार के द्वार खुलेंगे। आइआइए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने बताया कि मेरठ के खेल उत्पाद की पूर्वी उप्र में भारी मात्रा में मांग है। खेल उत्पाद इकाइयों को लाभ मिलेगा। सब्जी मंडी एसोसिसेशन नवीन मंडी स्थल के अध्यक्ष पंडित ब्रजभूषण शर्मा का कहना है कि प्रयागराज से भिंडी व काशीफल, हरदोई से जवा मिर्च, बैंगन, शाहजहांपुर से बैंगन, खीरा व लौकी, बदायूं से मिर्च, संभल से आलू व फूलगोभी, बुलंदशहर से टमाटर व गोभी की आपूर्ति हो रही है। सर्दी के दौरान पूर्वी उप्र से बड़ी मात्रा में सब्जियों से भरे ट्रक यहां आते हैं। प्रतापगढ़ के आंवला की यहां काफी मांग है। फल सब्जी एसोसिएशन के अध्यक्ष इरशाद का कहना है कि बदायूं और प्रयागराज के अमरूद की यहां काफी डिमांड रहती है। बड़ी मात्रा में अमरूद वहां से यहां आता है। अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान आसान हो जाएगा।

गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा यूपी का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, 29 अप्रैल को पीएम करेंगे लोकार्पण

लखनऊ उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में 29 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक 'गंगा एक्सप्रेसवे' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा "इंडस्ट्रियल कॉरिडोर" बनने जा रहा है। बुनियादी ढांचे को औद्योगिक रफ्तार देने के लिए इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) मॉडल पर तैयार किया गया है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने की दिशा में संजीवनी साबित होगा। 594 किमी का विशाल इंडस्ट्रियल नेटवर्क यूपीडा (UPEIDA) की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 594 किमी लंबे कॉरिडोर के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की है। मेरठ से प्रयागराज तक फैले इन नोड्स को वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स की आधुनिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक 'इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट' में बदल देगी, जिससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी। निवेश की बारिश और रोजगार के अवसर गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योगों को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह है। अब तक सरकार को 987 निवेश प्रस्ताव (EOI) मिल चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹46,660 करोड़ के निवेश का लक्ष्य है। यह निवेश मुख्य रूप से एग्री-प्रोसेसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे क्षेत्रों में आएगा। इससे न केवल उद्योगों की लागत घटेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। क्षेत्रीय असमानता का अंत, हरदोई बनेगा सेंटर यह एक्सप्रेसवे कॉरिडोर यूपी के 12 जिलों के बीच विकास के संतुलन को बेहतर करेगा। हरदोई, उन्नाव, प्रतापगढ़ और रायबरेली जैसे जिलों में, जहाँ औद्योगिक गतिविधियां कम थीं, अब वहां विकास की नई लहर दौड़ेगी। इस योजना में बुलंदशहर नोड सबसे बड़ा क्लस्टर होगा, जो 2,798 एकड़ में फैला है। योगी सरकार का लक्ष्य सड़क निर्माण को केवल आवाजाही तक सीमित न रखकर, उसे प्रदेश के औद्योगिक सशक्तिकरण का जरिया बनाना है। मेरठ से प्रयागराज तक नोड्स की स्थिति (एट ए ग्लेंस) गंगा एक्सप्रेसवे पर उद्योगों का जाल कुछ इस तरह बिछाया गया है:     पश्चिमी यूपी: मेरठ (529 एकड़), हापुड़ (304 एकड़), बुलंदशहर (2,798 एकड़) और अमरोहा (348 एकड़)।     मध्य यूपी: संभल (591 एकड़), बदायूं (269 एकड़), शाहजहांपुर (252 एकड़) और हरदोई (335 एकड़)।     पूर्वी एवं तराई क्षेत्र: उन्नाव (333 एकड़), रायबरेली (232 एकड़), प्रतापगढ़ (263 एकड़) और प्रयागराज (251 एकड़)।  

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट, राजभर ने कहा,कोर्ट के आदेश होंगे लागू

लखनऊ यूपी के पंचायती राज मंत्री और सुल्तानपुर जिले के प्रभारी ओम प्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिले में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। समय पर चुनाव नहीं हो पाने के आसार पर उन्होंने साफ किया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार ही प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे या फिर पंचायत का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। नारी शक्ति वंदन बिल गिरने के बाद जिले में पहुंचे पंचायती राज मंत्री सोमवार को जिला पंचायत सभागार में मीडिया से बात कर रहे थे। इसके बाद वह भाजपा महिला मोर्चा की ओर से नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन व कांग्रेस और सपा के खिलाफ आयोजित रैली में हिस्सा लेंगे। विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने में लगाया अड़ंगा राजभर ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना परिसीमन करके महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की थी पर विपक्ष ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। सपा-कांग्रेस की मंशा ही नहीं है कि देश की महिलाओं को अधिकार मिले। देश की आबादी जब 68 करोड़ थी तो उसके अनुसार लोकसभा में 545 सीटों का निर्धारण किया गया। 2011 को हुई जनगणना के अनुसार, सीटों की संख्या 815 होनी चाहिए पर विपक्ष ने सरकार का साथ नहीं दिया जिससे बिल लोकसभा में गिर गया। विपक्ष नहीं चाहता कि राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। कांग्रेस ने 30 साल से इस बिल को लटका कर रखा है अब जब मोदी सरकार इस पर कार्रवाई कर रही है तो विपक्ष अड़ंगा डाल रहा है। राजभर ने कहा कि विपक्ष राजनीति में महिलाओं के आरक्षण का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को नहीं देना चाहता इसलिए विरोध कर रहा था।  

यूपी होमगार्ड परीक्षा में कड़ी सुरक्षा, दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानी

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होमगार्ड भर्ती परीक्षा के आखिरी दिन सोमवार को राजधानी के परीक्षा केंद्रों पर जबरदस्त सख्ती देखने को मिली। सुरक्षा और शुचिता के नाम पर हुई इस जांच के दौरान अभ्यर्थियों को कड़े नियमों से गुजरना पड़ा। केंद्रों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और चेकिंग के दौरान पुरुषों के जूते-बेल्ट तो उतरवाए ही गए, विवाहित महिलाओं के मंगलसूत्र, पायल और अन्य आभूषण तक उतरवा दिए गए। महाराजा बिजली पासी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय केंद्र पर सुरक्षा जांच के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब महिला पुलिसकर्मियों ने परीक्षार्थियों के धातु के गहने पहनने पर रोक लगा दी। हरदोई से आईं परीक्षार्थी सरिता देवी को कान की बाली, कंगन, पायल और मंगलसूत्र उतारने के निर्देश दिए गए। सरिता सहित कई अन्य महिला अभ्यर्थियों ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उनकी एक न सुनी गई। अंततः अभ्यर्थियों को अपने कीमती आभूषण केंद्र के बाहर खड़े परिजनों को सौंपने पड़े। जूते-घड़ी और बेल्ट पर भी रही पाबंदी आजमगढ़ से आए अभ्यर्थी शैलेश कुमार ने बताया कि परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले सभी के जूते और बेल्ट निकलवा दिए गए। मोबाइल, घड़ी और पेन ले जाने पर भी पूरी तरह पाबंदी रही। अभ्यर्थियों को केवल आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी गई। 300-400 किमी दूर सेंटर होने से नाराजगी परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी गाजीपुर, गोरखपुर, मऊ और देवरिया जैसे दूरदराज के जिलों से लखनऊ पहुंचे थे। परीक्षार्थियों ने विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि होमगार्ड जैसे पद की भर्ती के लिए 300 से 400 किलोमीटर दूर सेंटर आवंटित करना समझ से परे है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा, बल्कि अभ्यर्थियों को भारी मानसिक और शारीरिक थकान का सामना करना पड़ा। एसआई स्तर के कठिन सवालों ने उलझाया राजधानी के 55 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित इस परीक्षा के स्तर को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए।परीक्षार्थियों के अनुसार, होमगार्ड भर्ती के प्रश्नपत्र का स्तर उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती जैसा कठिन था। परीक्षा में सामान्य ज्ञान, हिंदी, विज्ञान, इतिहास और भूगोल विषय के सवाल शामिल किए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगभग 90 प्रतिशत प्रश्न काफी जटिल थे, जिन्हें हल करने में समय की कमी महसूस हुई।  

पंचायत चुनाव से पहले यूपी में बड़ा बदलाव, हर वोटर को मिलेगा 9 डिजिट का यूनिक नंबर

रायबरेली पंचायत चुनावों में फर्जी मतदान रोकने व डुप्लीकेट मतदाताओं को पकड़ने के लिए हर व्यक्ति का नौ अंक का एक यूनिक नंबर जारी होगा। इससे मतदान के दौरान होने वाले विवादाें को भी समाप्त किया जा सकेगा। यह नंबर 10 जून को जारी होने वाली मतदाता सूची में ही होगा। जनपद में 980 ग्राम सभा में चुनाव होने हैं। इसको लेकर जिला निर्वाचन विभाग ने करीब तैयारी पूरी कर ली है। अब सिर्फ को सभी को मतदाता सूची का इंतजार हैं। इस बार मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कमर कस ली है। इस बार प्रत्येक मतदाता को यूनिक स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) आवंटित किया जाएगा, जो मतदाता सूची में ही होगा। विधान सभा चुनाव के इलेक्टर फोटो आइडेंटिटी कार्ड (इपिक) की तरह यह नौ अंकों का विशेष नंबर मतदाता की पहचान बनेगा। ऐसे लिंक होगा यूनिक नंबर इस नंबर से मतदाता की व्यक्तिगत पहचान के साथ ही विकास खंड और गांव से भी वह डिजिटल रूप से जुड़ा रहेगा। अगर मतदाता का नाम किसी कारण वश सूची से हट जाएगा तो उसका एसवीएन नंबर भी स्वत: समाप्त हो जाएगा। इससे कोई भी उसके नाम पर मतदान नही कर सकेगा। दोबारा किसी अन्य को आवंटित नही किया जाएगा। इससे एक ही व्यक्ति के कई बूथों पर नाम होने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी विनायक शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए अलग साफ्टवेयर बनाया गया है। इसके माध्यम से हर मतदाता का एसवीएन जारी किया जाएगा। इस योजना से चुनाव में फर्जीवाड़ा पूरी तरह रुक सकेगा। इससे मतदान प्रक्रिया भी आसान होगी।

लू से बचाव के लिए स्कूलों और अस्पतालों में खास इंतजाम, डीएम ने दिए आदेश

लखनऊ  यूपी के कई जिले तप रहे हैं । पारा हाई है। भीषण गर्मी और हीट वेव के बढ़ते असर को देखते हुए शाहजहांपुर जिला प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक घंटे वाटर ब्रेक कराया जाए। बच्चों को धूप से बचाकर छायादार स्थानों पर बैठाया जाए और उनसे अनावश्यक शारीरिक कार्य न कराया जाए। डीएम का मानना है कि लगातार बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है। ऐसे में स्कूलों में समय-समय पर पानी पिलाना, पर्याप्त छाया की व्यवस्था करना और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है। निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालयों में शिक्षक बच्चों की सेहत पर नजर रखें और किसी बच्चे को चक्कर, घबराहट या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। शेल्टर हाउस, बस अड्डों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगाए गए वाटर कूलर की जानकारी लोगों तक पहुंचाने को कहा गया है। पेट्रोल पंपों पर भी पेयजल और शौचालय की सुविधा सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस अवसर पर नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी, अपर जिलाधिकारी प्रशासन रजनीश कुमार मिश्र एवं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अस्पतालों में तैयारी, दो-दो बेड रिजर्व किए गए हीट वेव को देखते हुए जिले के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेड आरक्षित किए जाएंगे। डॉक्टरों और स्टाफ को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। लू लगने, डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमजोरी से पीड़ित मरीजों को तत्काल उपचार देने की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर रेफर सेवा भी सक्रिय रहेगी। गोशालाओं में छाया और पानी पर दिया गया जोर भीषण गर्मी से गोवंशों को बचाने के लिए गोशालाओं में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा गया है। शेड के पास टाट या बोरों के पर्दे लगाने और उन पर पानी का छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं को धूप से बचाने और नियमित पानी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। लापरवाही पर कार्रवाई होगी। शाहजहांपुर में लू और उष्ण रात्रि की चेतावनी: लू एवं उष्ण रात्रि चेतावनी आज भी शाहजहांपुर जिले के लिए है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, फर्रुखाबाद, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, शाहजहांपुर आदि जगहों पर आगामी दो दिनों का अलर्ट है।

अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा, महिला सुरक्षा और आरक्षण पर उठाए सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रहे हैं। गाजीपुर दौरे से पहले इस कांड को लेकर उन्होंने यूपी का सियासी पारा चढ़ा दिया है। सोमवार को लखनऊ में बुलाई एक प्रेस कांफ्रेंस में सपा मुखिया ने गाजीपुर कांड के पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया। इसी प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल टॉपर कशिश और इंटरमीडिएट टॉपर अंशिका वर्मा को आईपैड देकर सम्मानित भी किया। अखिलेश यादव ने बताया कि समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सीमा राजभर और रामआश्रय विश्वकर्मा के नेतृत्व में गाजीपुर जाएगा। अखिलेश ने सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर द्वारा सपा पर गाजीपुर में माहौल खराब करने का आरोप लगाए जाने पर कहा कि उनका जवाब सीमा राजभर देंगी। अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को कहीं भी मौका मिल जाए तो सपाइयों पर गंभीर धाराएं लगाती है। असली पत्थरबाजों को तो छोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की इमेज खराब करने वालों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। अखिलेश ने कहा कि हिन्दुस्तानियत के खिलाफ पैदा हुए खतरे से एकजुट होकर लड़ेंगे। पीडीए को सम्मान दिलाने में पीढ़ियां लग जाएं तब भी दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि वह एकतंत्री लोगों और संविधान न मानने वालों से लड़ेंगे। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि पीडीए को उसका हक मिले। विजन इंडिया के तहत गाजियाबाद में किसानों को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने सपा की सरकार बनी तो यूपी में किसानों को 24 घंटे के अंदर भुगतान होगा। 15 हजार करोड़ का कार्पस फंड बनेगा। बुनकरों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। गाजीपुर कांड पर भाजपा को घेरा अखिलेश यादव ने गाजीपुर कांड पर भाजपा की घेराबंदी करते हुए कहा कि इस कांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदली गई। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि यूपी में महिलाओं-बेटियों के खिलाफ घटनाएं बढ़ी हैं। महिला सुरक्षा के सारे दावे फेल हुए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा से निवेदन है कि आग लगाना बंद करे। भाजपा की महिलाएं कह रही हैं कि जो आरक्षण देना है वो क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण देने के मामले पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का बिल तो संसद में कबका पास हो चुका है। सरकार को तत्काल इसे लागू कर देना चाहिए लेकिन मोदी सरकार खुद महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। स्वास्थ्य सेवाओं और डीजल-पेट्रोल-खाद का मुद्दा उठाया अखिलेश यादव ने यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक भाजपा सरकार नहीं हटेगी सुधार नहीं होगा। उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव खत्म होते ही सरकार डीजल-पेट्रोल और खाद के दाम बढ़ाएगी। एएमयू की तारीफ की इस मौके पर अखिलेश यादव ने एमपी यादव की पुस्तक अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि एएमयू से बेहतरीन छात्र निकले हैं और वे आज पूरी दुनिया में हैं।

चुनाव प्रचार से पहले योगी का जनता दर्शन, अधिकारियों को समयसीमा में समाधान के आदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प. बंगाल रवाना होने से पहले जनसेवा का संकल्प भी पूरा किया। मुख्यमंत्री ने सोमवार सुबह 'जनता दर्शन'  में प्रदेश भर से आए फरियादियों की पीड़ा सुनी और अधिकारियों को संवेदनशील होकर जनता की समस्याओं के निराकरण का निर्देश दिया। संवेदनशील होकर समस्याओं का कराएं समाधान मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में आए सभी फरियादियों से मुलाकात की। एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं, प्रार्थना पत्र लिया, फिर अधिकारियों को समय सीमा के भीतर समाधान कराने को कहा। राजस्व व पुलिस से जुड़ी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हीलाहवाली नहीं चलेगी, समयसीमा के भीतर समस्याओं का समाधान करके पीड़ित को सूचित करना होगा। अपने जनपद में अधिकारियों से मिलें, बेतहाशा गर्मी में न हों परेशान 'जनता दर्शन' में आए कुछ फरियादियों से मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या जनपद में किसी अधिकारी से मिलकर आपने समस्या बताई? पता चला-नहीं, इस पर मुख्यमंत्री ने फरियादियों से कहा कि बेतहाशा गर्मी में आप परेशान न हों। पहले अपने जनपद में तैनात अधिकारियों से पीड़ा बताएं। हर हाल में सुनवाई होगी और समस्या का यथोचित समाधान भी। मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि धूप-गर्मी में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बच्चों को किया दुलार, चॉकलेट भी दी मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में परिजनों के साथ आए बच्चों पर अपना स्नेह लुटाया। उन्हें चॉकलेट के साथ आशीर्वाद भी दिया। मुख्यमंत्री ने मां की गोद में बैठे बच्चों से पूछा-चॉकलेट चाहिए तो एक बच्चे ने मुस्कुराकर अभिव्यक्ति दी, इस पर मुख्यमंत्री ने उसे चॉकलेट दी। चॉकलेट पाकर बच्चा खिलखिला उठा।  

देसी पशुओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

लखनऊ पहले चरण में अवधी भेड़ व जौनपुरी बकरी, दूसरे चरण में गायों की अलग-अलग प्रजातियों पर काम किया जाएगा। कृषि विश्वविद्यालय जेनेटिक परीक्षण करेंगे। देसी नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का काम किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में देसी नस्ल के पशुओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत इन नस्लों का जेनेटिक परीक्षण कराया जाएगा। पहले चरण में अवधी भेड़ और जौनपुरी बकरी पर काम शुरू किया गया है, जबकि दूसरे चरण में गायों की विभिन्न देसी प्रजातियों पर शोध और परीक्षण किया जाएगा। सरकार की योजना है कि देसी नस्लों का संरक्षण करते हुए उन्हें समवर्ती (स्थानीय अनुकूल) नस्लों के साथ गर्भाधान कराकर नई और अधिक उपयोगी नस्ल विकसित की जाए। इससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और स्थानीय जलवायु के अनुकूल मजबूत नस्लें भी तैयार होंगी।   प्रदेश में बड़ी संख्या में देसी नस्ल के पशु मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में ये तेजी से खत्म हो रहे हैं। अधिक दूध उत्पादन की चाह में विदेशी नस्लों के सीमेन (वीर्य) का उपयोग किया गया, जिससे मिश्रित नस्लें तो तैयार हुईं, लेकिन वे प्रदेश की जलवायु और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से लंबे समय तक सफल नहीं रहीं। इससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे देखते हुए अब सरकार ने देसी नस्ल सुधार की नई रणनीति बनाई है। भारत सरकार के सहयोग से कृषि विश्वविद्यालयों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय पहले देसी नस्लों का नेटवर्क तैयार करेंगे, फिर उनका जेनेटिक परीक्षण कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण और पहचान दिलाएंगे। इसके बाद उनके गुणों, उपयोगिता और अगली पीढ़ी सुधार पर शोध किया जाएगा। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की टीम ने पहले चरण में जौनपुरी बकरी और अवधी भेड़ को चिह्नित कर इन पर काम शुरू कर दिया है। जिलेवार हो रही देसी नस्लों की पहचान जौनपुर जिले के जफराबाद और शाहगंज क्षेत्र की जौनपुरी बकरी को चिह्नित किया गया है। इसी तरह अयोध्या और बाराबंकी क्षेत्र में अवधी नस्ल की गाय की पहचान की गई है। भविष्य में बलिया, गाजीपुर और चंदौली की गंगातीरी गाय को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बुंदेलखंड की केन नस्ल, लखीमपुर की खेरीगढ़ी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की साहीवाल सहित कई अन्य नस्लों पर भी काम होगा। इसके लिए जिलेवार देसी नस्लों की पहचान की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बकरियों की नस्ल सुधार पर केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान भी कार्य कर रहा है। नस्ल संरक्षण के साथ पशुपालकों को फायदा देने का प्रयास नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के जेनेटिक विभाग के प्रो. जसवंत सिंह ने बताया कि देसी नस्लों को चिह्नित करने के लिए नेटवर्क परियोजना पर कार्य चल रहा है। इन नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा और इनके जेनेटिक पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उदाहरण के तौर पर जौनपुरी बकरी के जेनेटिक तत्वों की पहचान कर यह देखा जाएगा कि उसमें इटावा-औरैया क्षेत्र की जमुनापारी नस्ल के साथ क्रॉस ब्रीडिंग का कितना लाभ मिलेगा। पूरी रणनीति का उद्देश्य यह है कि देसी नस्लें भी सुरक्षित रहें और पशुपालकों की आय भी बढ़े। इसके लिए संबंधित क्षेत्र की जलवायु, चारा, खानपान और उत्पादक क्षमता पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। देसी बकरी: जौनपुरी, जमुनापारी, बरबरी, बुंदेलखंडी आदि। देसी भेड़- मुजफ्फरनगरी, जालोनी, भदौरी, अवधी आदि। देसी गाय: गंगातीरी, केनकथा, खेरीगढ़, मेवती, पोनवार, हरियाणा, साहीवाल आदि। देसी भैंस: भदवारी, तराई, यूपी मुर्रा आदि। देसी नस्लों को बचाना जरूरी गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन और मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के जरिए देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दे रही है। सभी कृषि विश्वविद्यालयों, पशु शोध संस्थानों को भी इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। देसी नस्लों को बचाना जरूरी है। इस दिशा में हर स्तर पर कार्य हो रहा है।  

अरुणाचल कनेक्शन से यूपी में लाइसेंस खेल, बिना लर्नर बने DL जारी

बस्ती यूपी के बस्ती जिले में दलालों के सिंडिकेट ने 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा दिए। इनसे करीब 4.75 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। दलालों ने फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं। इतना ही नहीं अफसरों की शह पर दलालों ने मिर्जापुर, संतकबीनगर, पडरैाना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के डीएल बस्ती से बनवा दिए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रामतीरथ मैार्य का डीएल नंबर यूपी63 20180030028 है। जोकि मिर्जापुर आरटीओ का है। उनके डीएल की बैकलॅाग एंट्री सेप्पा(अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में करवाई और बस्ती में वर्ष 2026 में एड्रेस चेंज की रसीद काटकर डीएल बनाया गया। ऐसे ही मनीष यादव का डीएल नंबर यूपी57 20170098799 है। यह पडरैाना का है। उनके डीएल की भी बैकलॅाग एंट्री सेप्पा से 2017 में हुई और बस्ती में रिन्यूवल करवाया गया। करण गुप्ता का डीएल नंबर यूपी51 20200018137 है, जिसकी बैकलॅाग एंट्री सियांग(अरुणाचल प्रदेश) से हुई और दलालों ने लाइसेंस बस्ती से बनवा दिया। यूपी51 20200034451, यूपी53 20190077236, यूपी57 20170098787, यूपी63 20180030001, यूपी63 20180030028, यूपी53 20190077236 सहित दर्जनों ऐसे फर्जी तरीके से बनवाए गए डीएल हैं, जिनका रिकॅार्ड अमर उजाला के पास है। इन डीएल में दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की शह पर फर्जी तरीके से डीएल बनवाकर आवेदकों से मोटी रकम वसूली है। खास बात यह है कि इन आवेदकों का लर्नर लाइसेंस नहीं बनवाया गया और नियमों को ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए हैं। प्रक्रिया: ऐसे बनते हैं डीएल डीएल बनवाने के लिए आवेदक को पहले लर्नर लाइसेंस बनवाना होता है। इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आवेदक को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं होती है। ऑानलाइन आवेदन कर टेस्ट देने के बाद यह बन जाता है। लर्नर बनने के एक महीने बाद से लेकर छह महीने के बीच परमानेंट डीएल बनता है। इसमें आरटीओ जाकर बायोमेटि्रक और वाहन टेस्ट पास करना पड़ता है। इसके बाद हफ्ते से दो हफ्ते के अंदर डाक से डीएल घर पहुंचता है। हेवी लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक के पास एक साल पुराना डीएल होना जरूरी है। खेल: अरुणाचल में फीडिंग, बस्ती में रिन्यूवल दलालों का सिंडिकेट बस्ती में अफसरों की शह पर काम कर रहा है। यही वजह है कि डीएल पडरैाना का हो, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर या अन्य किसी जिले का, उसकी बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा व सियांग से करवाई जाती है। उसके बाद डीएल में पता बदलने या रिन्यूवल का आवेदन बस्ती से करवाकर लाइसेंस बनवा दिया जाता है। इसके एवज में आवेदक से मोटी रकम वसूली जाती है। अफसरों की मिलीभगत से पनपा सिंडिकेट आरटीओ बस्ती परिवहन विभाग का संभाग है। संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर प्रमुख रूप से इसके अंतर्गत आते हैं। बस्ती में आरटीओ फरीदउद्दीन, आरआई सीमा गैातम, एआरटीओ माला बाजपेयी की तैनाती है। लेकिन दलालों का सिंडिकेट खुलेआम काम कर रहा है और अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं। उपरोक्त अफसरों की जवाबदेही भी है। उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लाजिमी हैं। वसूली: आवेदकों से डीएल के एवज में वसूले गए 4.50 करोड़ बस्ती में एक्टिव दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की मिलीभगत से जो रैकेट तैयार किया, उसमें अनुमानित तैार पर 4500 से अधिक डीएल बनवाए गए। आवेदकों से औसतन दस हजार रुपये वसूले गए। इससे करीब 4.75 करोड़ रुपये कमाए गए। सूत्र बताते हैं कि दलालों ने वसूली की इस रकम में अफसरों को भी हिस्सा दिया। सवाल: बैकलॅाग एंट्री क्यों, कहां हैं लर्नर लाइसेंस जनवरी, 2013 से पहले मैनुएली लाइसेंस बनते थे। जिनका रिकॅार्ड रजिस्टर में रखा जाता था। इसके बाद स्मार्ट कार्ड बनने शुरू हो गए। रिकॅार्ड कम्प्यूटर में रखा जाने लगा। वर्ष 2013 के बाद लाइसेंसों का रिकॅार्ड ऑनलाइन ही है। उन्हें रजिस्टर में रखने की आवश्यकता खत्म हो गई। लेकिन दलालों ने अफसरों से मिलीभगत कर बैकलॅाग एंट्री करवाई और एड्रेस चेंज व रिन्यूवल करवाकर डीएल बनवा दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि बैकलॅाग फीडिंग की जरूरत क्यों पड़ी। इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि लर्नर लाइसेंस बनवाए बगैर परमानेंड डीएल बना दिए गए। इतना ही नहीं भारी वाहनों के हेवी लाइसेंस के लिए एक साल पुराना लाइसेंस अनिवार्य है। इस नियम को भी ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए। सड़क सुरक्षा की सिर्फ फिक्र, संजीदगी नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लगातार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर तनिक भी संजीदगी नहीं बरत रहे हैं। यही वजह है कि लखनऊ राजधानी में सड़क हादसे बढ़ रहे हैं, फिर जिलों की स्थिति समझी जा सकती है। फर्जी तरीके से लाइसेंस बनाए जा रहे हैं, ऐसे में सड़क सुरक्षा को अमलीजामा पहनाया जाना नामुमकिन है।-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री