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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि

अटल जी ने विकास के विजन के साथ देश को बढ़ायाः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि  मुख्यमंत्री ने महामना मदन मोहन मालवीय व राजा बिजली पासी की जयंती पर उन्हें किया नमन  सीएम योगी ने दी क्रिसमस की बधाई  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने लोकभवन स्थित अटल जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। सीएम ने महामना मदन मोहन मालवीय, राजा बिजली पासी की जयंती पर उन्हें नमन किया और क्रिश्चियन बंधुओं को क्रिसमस की भी बधाई दी।  सीएम योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज पावन जयंती है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को विकास के नए विजन के साथ बढ़ाने का कार्य किया। यह वर्ष विशेष है, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशताब्दी महोत्सव का आयोजन पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। अटल जी की कविताओं के काव्य पाठ, उनके लेखन पर वाद-विवाद, पत्रकारिता, संसद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अटल जी महत्वपूर्ण भाषण आदि को लेकर पूरे देश में शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं में अनेक कार्यक्रम भी हुए।  अटल जी ने संसद में सर्वाधिक समय तक उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया सीएम योगी ने कहा कि अटल जी की पैतृक भूमि उत्तर प्रदेश के आगरा के बटेश्वर में है। उनकी उच्च शिक्षा कानपुर और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत बलरामपुर से शुरू हुई थी। संसद में उन्होंने सर्वाधिक समय तक उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी का विराट व्यक्तित्व व कृतित्व देशवासियों को प्रेरणा प्रदान करता है।  डबल इंजन सरकार ने किया राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण सीएम योगी ने कहा कि अटल जी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने और विचार परिवार को निरंतरता देने के लिए डबल इंजन सरकार ने लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण किया है। यहां भारत की तीन महान विभूतियां की प्रतिमाएं व डिजिटल म्यूजियम भी है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा राष्ट्र के प्रति एकता व अखंडता का संदेश देगी। पं. दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का संकल्प व अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा समरसता क साथ ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अभियान को आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाएगी। पीएम के करकमलों से राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण होगा।  सीएम ने महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती पर भी उन्हें किया याद   सीएम योगी ने पं. मदन मोहन मालवीय को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महान राष्ट्रवादी नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पं. मदन मोहन मालवीय की भी आज पावन जयंती है। मालवीय जी का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर देशवासियों को दृष्टि दी। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।  सीएम ने महाराजा बिजली पासी को भी किया नमन  सीएम योगी ने महाराजा बिजली पासी की पावन जयंती पर उन्हें भी नमन किया। कहा कि लखनऊ के महान योद्धा बिजली पासी ने भारत की सनातन परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए विदेशी हुकुमतों की जड़ों को उखाड़ फेंका था। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं का डटकर मुकाबला किया। सीएम ने बताया कि डबल इंजन सरकार बिजली पासी के किलों के पुनरुद्धार के लिए निरंतर कार्य करते हुए उस परंपरा से जुड़े सभी महान योद्धाओं के प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित कर रही है।  सीएम ने दी क्रिसमस की बधाई  सीएम ने क्रिश्चियन बंधुओं को क्रिसमस की भी बधाई दी। कहा कि सरकार प्रदेश में शांति व सौहार्द पूर्ण ढंग से इस त्योहार का भी आनंद लेने का अवसर उपलब्ध कराएगी।  इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य गोविंद नारायण शुक्ल आदि मौजूद रहे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित है, राष्ट्र प्रेरणा स्थल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल, सभी तैयारियां पूरी  डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित है, राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र नायकों की कांस्य प्रतिमाओं का करेंगे लोकार्पण, 2 लाख से अधिक लोग होंगे साक्षी राष्ट्रीय चिन्हों और मालाओं से सजाया गया है राष्ट्र प्रेरणा स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की पूरी तैयारी      लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बन कर तैयार भव्य 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह स्थल भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी कहे जाने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का अनुपम प्रयास है। इस संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर  भव्य उद्घाटन समारोह के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों समेत, 2 लाख से अधिक लोग इस अवसर के साक्षी बनेंगे। सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, ट्रैफिक डायवर्जन के साथ उद्घाटन समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की भी सभी तैयारियों को मूर्त रूप दिया जा चुका है। प्रदेश की राजधानी प्रधानमंत्री की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनेगी।  राष्ट्र नायकों की मूर्तियों के लोकार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करेंगे प्रधानमंत्री राष्ट्र प्रेरणा स्थल के भव्य उद्घाटन समारोह के आयोजन के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण और पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के विशाल प्रांगण में फूलों से कमल की आकृति की रंगोली बनाई जा रही हैं। साथ ही प्रेरणा स्थल की बाहरी दीवारों पर कला संस्कृति विभाग की ओर से राष्ट्रीय सांस्कृतिक चिन्हों का अलंकरण किया गया है। राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं के अनावरण का कार्यक्रम 2 बजे अपराह्न शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से प्रेरणा स्थल पहुंच कर सबसे पहले राष्ट्र नायकों की मूर्तियों के लोकार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उसके बाद राष्ट्र नायकों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को समर्पित संग्रहालय का उद्घाटन कर, उसका अवलोकन करेंगे। संग्रहालय के ओरिएंटेशन रूम में राष्ट्र नायकों के जीवन पर आधारित वीडियो एवी का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री जनसंबोधन करेंगे, इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहेंगे। भावी पीढ़ियों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करेगा राष्ट्र प्रेरणा स्थल   लखनऊ के वसंत कुंज में राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में बनाया गया है। प्रेरणा स्थल में राष्ट्रवाद के शिखर पुरुषों डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है। जिनका निर्माण विश्व विख्यात मूर्तिकार राम सुतार और मंटू राम आर्ट क्रिएशंस ने किया है। प्रतिमाओं को फेसेड लाइटिंग और प्रोजेक्शन मैपिंग से सजाया गया है। साथ ही परिसर में राष्ट्र नायकों को समर्पित संग्रहालय का निर्माण भी किया गया है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वॉल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के म्यूरल आर्ट से देश की राष्ट्रीयता की यात्रा को दर्शाया गया है। संग्रहालय के कोर्टयार्ड में राष्ट्रीय भावना की प्रतीक भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। राष्ट्र नायकों को समर्पित गैलरियां उनके जीवन, विचारधारा और संघर्षों को जीवंत बनाती हैं। साथ ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड और कैफेटेरिया का भी निर्माण किया गया है। इसके अलावा परिसर में 3000 की क्षमता वाले एम्फीथिएटर और लगभग 2 लाख की क्षमता के रैली स्थल का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति का बिंदु है, बल्कि भावी पीढ़ियों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करेगा।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप जलाकर दी अटल जी को श्रद्धांजलि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अर्पित किए श्रद्धासुमन   लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति के समक्ष दीप जलाकर पुण्य स्मृतियों को किया नमन  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर बुधवार को लोकभवन में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने लोकभवन परिसर में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के माध्यम से न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और सार्वजनिक जीवन में उनकी मर्यादित राजनीतिक शैली को स्मरण किया जा रहा है। लोकभवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भी अटल जी के जीवन और कृतित्व को केंद्र में रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पूरा देश करेगा अटल जी की स्मृतियों को याद गुरुवार को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में विभिन्न स्मरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से अटल जी के विचारों, नीतियों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। संगोष्ठियों, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उनकी विरासत को सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में संवाद, सहमति और राष्ट्रहित के संतुलन का प्रतीक माना जाता रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान देश ने राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए। उनकी कवि संवेदना और राजनेता के रूप में दूरदर्शिता आज भी सार्वजनिक जीवन में आदर्श के रूप में देखी जाती है।

यूपी में सरकारी संपत्तियों के दाम घटेंगे, विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद की पेशकशों पर 25% तक छूट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की वर्षों से न बिक पाई फ्लैट व प्लॉट जैसी संपत्तियों की कीमतों में बड़ी राहत दी जाएगी। योगी सरकार के नए फैसले के तहत ऐसी अनिस्तारित संपत्तियों की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। इसके साथ ही सेल के माध्यम से बिक्री को बढ़ावा देने के लिए आवंटियों को अतिरिक्त रियायतें भी दी जा सकेंगी। नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी कम होंगे राज्य सरकार द्वारा ब्याज दरों और अन्य चार्जेज को व्यावहारिक बनाए जाने से विकास प्राधिकरण और परिषद की नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी 10 से 15 प्रतिशत तक कम होंगे। दरअसल, अभी तक 26 वर्ष पुराने शासनादेशों के आधार पर ही संपत्तियों का मूल्य तय किया जा रहा था, जिसमें 12 से 15 प्रतिशत तक ब्याज दर, 15 प्रतिशत कंटीजेंसी चार्ज और 10 से 15 प्रतिशत ओवरहेड चार्ज शामिल थे। इससे संपत्तियों के दाम काफी बढ़ गए थे और खरीदार नहीं मिल पा रहे थे। नई आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस तैयार वर्तमान स्थिति यह है कि प्रदेश में कुल 22,350 अनिस्तारित संपत्तियों में करीब 7,200 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसी समस्या को देखते हुए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने पुराने शासनादेशों को समाप्त कर नई आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस तैयार की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस (मूलभूत सिद्धांत)-2025 को मंजूरी दे दी गई। नई गाइडलाइंस के अनुसार, वे संपत्तियां जो तीन वर्ष पुरानी हैं और पांच बार विज्ञापन निकालने के बावजूद नहीं बिक पाई हैं, उन्हें सेल के माध्यम से बेचने पर 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकेगी। जानकारी एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर उपलब्ध होगी हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छूट के बाद संपत्ति की कीमत पहली बार विज्ञापन में तय की गई मूल कीमत से कम न हो। सभी अनिस्तारित संपत्तियों की जानकारी एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इन संपत्तियों की बिक्री में किसी भी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं होगा और पहले से प्राधिकरण या परिषद की संपत्ति रखने वाले लोग भी इन्हें खरीद सकेंगे। भुगतान व्यवस्था में भी राहत दी गई है     45 दिन में एकमुश्त भुगतान पर 6 प्रतिशत     60 दिन में भुगतान पर 5 प्रतिशत     90 दिन में भुगतान पर 4 प्रतिशत की छूट मिलेगी। निम्न आय वर्ग की संपत्तियों पर ब्याज दर घटाई गई कार्नर, पार्क फेसिंग या 18 मीटर अथवा उससे अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित संपत्तियों पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज भी घटा दिए गए हैं। अब प्रत्येक के लिए 5 प्रतिशत और तीनों सुविधाओं के होने पर 15 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज ही लिया जाएगा। निम्न आय वर्ग (LIG) की संपत्तियों पर ब्याज दर घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे उन्हें 2 प्रतिशत की अतिरिक्त राहत मिलेगी। इसके अलावा, नई कास्टिंग गाइडलाइंस लागू होने से विकास प्राधिकरण और परिषद की नई योजनाओं की संपत्तियों के दाम भी 10 से 15 प्रतिशत तक कम होंगे। इस तरह रखा जाएगा ब्याज दर नई व्यवस्था के तहत ब्याज दर को अधिकतम 15 प्रतिशत रखने के बजाय अब इसे स्टेट बैंक के एमसीएलआर से केवल एक प्रतिशत अधिक रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इन नई गाइडलाइंस से पूरे प्रदेश में संपत्तियों के मूल्यांकन की एक समान व्यवस्था बनेगी, कीमतें व्यावहारिक होंगी और अनिस्तारित संपत्तियों की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकेगी।  

यूपी पंचायत चुनाव से पहले सियासी हलचल: संभल में फर्जी वोटिंग केस, 48 लोगों पर मामला दर्ज

संभल  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से ठीक पहले संभल के गांव विलालपत से सामने आया फर्जी वोटर बनाने का मामला प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। फर्जी दस्तावेज और गलत आधार संशोधन के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के आरोप में 48 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई लेखपाल गुन्नू बाबू कीअसमोली थाने में दर्ज शिकायत पर की गई।  मामला तब उजागर हुआ, जब जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र सिंह हाल ही में गांव विलालपत पहुंचे। वे वहां एसआईआर के कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान गांव से जुड़ी गंभीर शिकायतें उनके संज्ञान में आईं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच समिति गठित की। समिति ने 19 दिसंबर को अपनी जांच आख्या सौंपी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि कई लोगों ने बीएलओ को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिनके आधार पर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कर दिए गए। यह सीधा-सीधा चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ का मामला बताया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 दिसंबर को जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए। इसके बाद 22 दिसंबर को तहसीलदार ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। लेखपाल गुन्नू बाबू ने बताया कि डीएम संभल के आदेश पर असमोली थाने में मामला दर्ज किया गया एफआईआर में ग्राम विलालपत के 48 नामजद आरोपी शामिल हैं, जिनमें पुरुष और महिला दोनों हैं। सभी पर फर्जी दस्तावेज के जरिए वोट बनवाने का आरोप है। जांच आख्या में यह भी कहा गया है कि ग्राम विलालपत में आधार कार्ड में गलत तरीके से संशोधन कराकर वोट बनवाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है तथा आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं। यह मामला सिर्फ फर्जी वोट बनवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत चुनाव से पहले लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा फर्जीवाड़ा बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव था? क्या कार्रवाई सिर्फ 48 नामों तक सीमित रहेगी या फर्जी वोटर नेटवर्क की पूरी परतें उखड़ेंगी?

विपक्ष हर मुद्दे को केवल वोट बैंक के नजरिए से देखता है, चाहे किसान हों या दलित: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष को किसानों के मुद्दे पर आइना दिखाया। उन्होंने बताया कि किस तरह पूर्व की सरकारों में किसानों की अनदेखी की गई। किसानों को सिर्फ वोटबैंक की तरह देखा गया, उनके उत्थान के लिए कोई विशेष कार्य नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज खेती को बाजार, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का मजबूत तंत्र तैयार हो चुका है। एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक पार्क और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किसानों की उपज अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंच रही है। एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूती देने के लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग सेंटर और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश भी बढ़ा है। 20 प्वाइंट में मुख्यमंत्री के भाषण के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं– 1.    अन्नदाता किसान हमारे लिए वोट नहीं, वह सम्मान का पात्र है। 2.    यूपी के पास उपजाऊ जमीन और प्रचुर जल संसाधन होने के बावजूद पहले किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बीज नहीं दिए गए। 3.    किसान दिवस के अवसर पर किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर विधान भवन के सामने आयोजित कार्यक्रम में विपक्ष की गैरमौजूदगी दुर्भाग्यपूर्ण रही। 4.    सीएम ने कहा– विपक्ष हर मुद्दे को केवल वोट बैंक के नजरिए से देखता है, चाहे किसान हों या दलित। इसी वजह से उनके हितों में वास्तविक काम नहीं हुआ। किसानों के बारे में विपक्ष का आचरण यही है। 5.    मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने चौधरी चरण सिंह सीड पार्क के लिए जमीन आवंटन का काम प्रारंभ किया। आपके समय में क्या होता था? उस दौरान लागत ज्यादा थी, उत्पादन कम था, बाजार नहीं था, किसान तबाह था, परेशान था। बिचौलियों के द्वारा लाभ ले लिया जाता था। 6.    आज किसान सुरक्षित हैं। किसान को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यूपी आज देश के अंदर गन्ना उत्पादन का नंबर एक का राज्य है। 7.    आपके समय में चीनी मिलें बिकती थीं, बंद होती थीं। वर्षों-वर्षों गन्ना मूल्य बकाया रहता था, किसान तरसता था। अब यह स्थिति नहीं है। अन्नदाता किसान हमारे लिए वोट नहीं, वह सम्मान का पात्र हैं। 8.    अन्नदाता को नई तकनीक के साथ आच्छादित किया जा रहा है। 9.    22 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई की सुविधा दी गई है। विपक्ष ने 8 प्रतिशत कृषि विकास की दर रखी थी। अब यह बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंच चुकी है। 10.    एमएसपी के साथ ही डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने में आज उत्तर प्रदेश देश के अंदर नंबर एक स्थान पर है। 11.    देश के अंदर उत्तर प्रदेश कृषि योग्य भूमि का केवल 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन अच्छा बीज, समय पर बीज, अच्छी तकनीक से तीन-तीन फसल किसान ले रहा है। इसी का परिणाम है कि देश के कुल खाद्यान्न का 21 प्रतिशत अकेले यूपी पैदा कर रहा है। 12.    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिये अब तक 94,668 करोड़ रुपये सीधे डीबीटी के माध्यम से अन्नदाता के खाते में पहुंचाए हैं। इसमें किसी को संदेह नहीं होगा। इसमें भी चेहरा नहीं देखा गया। किसान किसान है। आपके लिए वह भेदभाव का शिकार हो सकता है, हमारे लिए नहीं। 13.    पूरे देश में अकेले यूपी में 55 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन हो रहा है। यूपी में पहले एथेनॉल उत्पादन जो केवल 41 करोड़ लीटर था, आज 182 करोड़ लीटर हो गया है। 14.    हर खेत को पानी के लक्ष्य को नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन जैसी परियोजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। इसके परिणामस्वरूप देश की कुल 86 प्रतिशत सिंचित भूमि अकेले उत्तर प्रदेश के पास है और यूपी देश का सर्वाधिक सिंचित भूमि वाला राज्य बन गया है। 15.    सीएम योगी ने कहा कि किसानों को ऊर्जा और तकनीक दोनों स्तर पर राहत दी गई है। पीएम कुसुम योजना के तहत 94 हजार अन्नदाता किसानों को सोलर पैनल उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है और 16 लाख किसानों के ट्यूबवेल के बिजली बिल माफ कर सरकार उसके लिए पैसा उपलब्ध करा रही है। 16.    उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु-अनुकूल आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी से बढ़ रही है। 17.    गोवंश संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में भी सरकार ने ठोस काम किया है। प्रदेश में 16 लाख से अधिक गोवंश के लिए गौ संरक्षण स्थल बनाए गए हैं। 18.    जो अन्नदाता किसान अपने घर में गाय पालते हैं, उन्हें वेरिफिकेशन के बाद ₹1500 प्रति गाय का भुगतान किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। 19.    स्मार्ट खेती और मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती के विस्तार में भी उत्तर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान बनाया है। 20.    मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण आय और पोषण दोनों को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास मिलकर किसानों की खुशहाली और प्रदेश की समग्र कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने की सीएम विवेकाधीन कोष की सराहना, सीएम योगी ने आभार के साथ गिनाए सपा काल के घोटाले

नेता प्रतिपक्ष बोले- कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में जरूरतमंदों के लिए संजीवनी साबित हो रही है सरकार की योजना सत्ता–विपक्ष के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी योजना से हो रहे हैं लाभान्वितः माता प्रसाद पांडे   लखनऊ, शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच सकारात्मक संवाद देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की खुले मंच से प्रशंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आभार जताते हुए पूर्ववर्ती सरकार की नीतिगत विफलताओं और घोटालों को सदन के सामने रखा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इसके माध्यम से न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष के विधायकों की संस्तुतियों पर भी जरूरतमंदों को सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से मुस्लिम समाज के लोग भी समान रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के वक्तव्य पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका आभार व्यक्त किया, लेकिन अपने संबोधन में उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान हुए घोटालों और प्रशासनिक लापरवाहियों का उल्लेख भी किया। मुख्यमंत्री ने गिनाए घोटाले और अनियमितताएं मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए। अनेक छात्रों की स्कॉलरशिप रोकी गई या समय पर नहीं दी गई, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने पेंशन योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले दिव्यांगजन, निराश्रित महिलाएं और वृद्धजन केवल ₹300 से ₹750 की अधूरी और अनियमित पेंशन पाते थे, जबकि वर्तमान सरकार डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था के तहत सालाना ₹12,000 सीधे उनके खातों में भेज रही है। मुख्यमंत्री योगी ने सड़क निर्माण योजनाओं में ‘टोकन मनी’ की व्यवस्था को भी गंभीर अनियमितता बताया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को स्वीकृति देकर मात्र ₹1 लाख जारी किया जाता था, जिससे कार्य ठप रहता था और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती थीं। मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में भी पिछली सरकार की नीतियों को विफल बताया और कहा कि 2017 से पहले की लापरवाही के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रह गया था।

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर हुई 81, अब रेफरल सिस्टम को सीमित कर प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में बेहतर उपचार की व्यवस्था की जा रही सुनिश्चितः मुख्यमंत्री

  विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के लिए सरकार को अब तक 98 लाख से अधिक नागरिकों के सुझाव प्राप्त हुए हैं, 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की जा रहीं नीतियांः योगी   लखनऊ, विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विकास कार्यों की गति और विकसित उत्तर प्रदेश के रोडमैप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति पहले दिन जैसी ही मजबूत है और योजनाओं को अब टोकन फंडिंग नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय प्रावधानों के साथ ज़मीन पर उतारा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करना आवश्यक है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर अब 81 हो चुकी है। आपके क्षेत्र में भी माधव बाबू के नाम पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किया गया है। पहले स्थिति यह थी कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता था तो उसे गोरखपुर भेज दिया जाता था, फिर एम्स या लखनऊ आना पड़ता था। इससे मरीज और उसके परिजनों को भारी परेशानी होती थी। अब हमने इस व्यवस्था को समाप्त किया है। सभी मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि रेफर करने की आदत छोड़कर वहीं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, और इस दिशा में कार्य भी हो रहा है। यह प्रदेश का 81वां मेडिकल कॉलेज है। अमेठी जैसे क्षेत्र, जहां वर्षों तक कांग्रेस का प्रभाव रहा, वहां भी मेडिकल कॉलेज नहीं बन पाया, जबकि अब हमारी सरकार ने वहां यह कार्य प्रारंभ किया है। मैं मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने भूमि उपलब्ध कराई और वहां मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ। इस सत्र में वहां कक्षाएं भी प्रारंभ हो चुकी हैं। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज की दिशा में कार्य प्रगति पर है। सरकार ने भूमि प्रस्ताव शीघ्र मंगवाया है और धन की व्यवस्था भी कर दी गई है। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। अब तक 98 लाख से अधिक लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश के लिए अपने सुझाव साझा किए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं एक और महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख करना चाहूंगा। पिछले सत्र में 13–14 अगस्त को इस सदन में ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ विषय पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई थी। इस चर्चा के बाद प्रदेशभर के लगभग 300 बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श किया गया और उन्हें विभिन्न संस्थानों में भेजकर इस विषय पर संवाद कराया गया। इसके बाद एक पोर्टल विकसित किया गया, जिसके माध्यम से प्रदेश की जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि अब तक 98 लाख से अधिक लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश के लिए अपने सुझाव साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश कैसे बने, इस विषय पर प्राप्त सुझावों को लेकर हम आईआईटी कानपुर के सहयोग से विभिन्न सेक्टरों में कार्य कर रहे हैं। सरकार की इच्छाशक्ति आज भी पहले दिन जैसी मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि सरकार की इच्छाशक्ति पहले दिन जैसी थी, आज भी वैसी ही है और उसी दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। सप्लीमेंट्री डिमांड्स में भी उन्हीं क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां वास्तविक आवश्यकता थी। अब सरकार टोकन मनी की नीति पर नहीं चलती। पहले 25 करोड़ की सड़क के लिए मात्र 1 लाख रुपये जारी कर दिए जाते थे, जिससे काम संभव ही नहीं था। अब सरकार ने स्पष्ट नीति तय की है कि एक साथ 40 से 50 प्रतिशत धनराशि जारी की जाएगी और 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण होते ही अगली किस्त जारी की जाएगी, जिससे कार्यों की गति बनी रहे। कार्ययोजना और डीपीआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा रही है। वर्ष 2024–25 और 2025–26 में विकास की यह गति और अधिक तेज होती हुई दिखाई देगी। मुख्यमंत्री का शायराना अंदाज मुख्यमंत्री ने सदन में अपनी बात की शुरुआत और अंत दोनों शायरी के साथ किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूछा था कि…'इधर उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा'…वहीं, सीएम ने अपने संबोधन के अंत में नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि अनावश्यक नकारात्मकता से बचें। हर विषय को जाति या संकीर्ण दृष्टि से देखने की आदत प्रदेश के हित में नहीं है। उत्तर प्रदेश को जितना नुकसान पहले हो चुका है, उससे अब बचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अंत में यही कहूंगा कि… राह में मुश्किल हों हजार, तुम दो कदम बढ़ाओ तो सही, हो जाएगा हर सपना साकार, तुम चलो तो सही, तुम चलो तो सही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश के जो सपने इस सदन ने देखे हैं, उन्हें साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

एक्सप्रेस-वे व लॉजिस्टिक पार्क से किसानों की उपज को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक मिली कनेक्टिविटीः योगी आदित्यनाथ

  पीएम कुसुम योजना से 94 हजार किसानों को सोलर पैनल, 16 लाख ट्यूबवेल के बिजली बिल माफः मुख्यमंत्री योगी गोवंश संरक्षण, दुग्ध-मत्स्य उत्पादन और श्री अन्न की खेती में यूपी अग्रणी, खेती, कनेक्टिविटी, दुग्ध-मत्स्य और स्मार्ट एग्रीकल्चर में यूपी को बढ़त लखनऊ, विधान सभा के शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज खेती को बाजार, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का मजबूत तंत्र तैयार हो चुका है। एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक पार्क और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किसानों की उपज अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंच रही है। एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूती देने के लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग सेंटर और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश भी बढ़ा है। किसानों को ऊर्जा और तकनीक दोनों स्तर पर राहत दी गई मुख्यमंत्री ने कहा कि हर खेत को पानी के लक्ष्य को नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन जैसी परियोजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। इसके परिणामस्वरूप देश की कुल 86 प्रतिशत सिंचित भूमि अकेले उत्तर प्रदेश के पास है और यूपी देश का सर्वाधिक सिंचित भूमि वाला राज्य बन गया है। सीएम योगी ने कहा कि किसानों को ऊर्जा और तकनीक दोनों स्तर पर राहत दी गई है। पीएम कुसुम योजना के तहत 94 हजार अन्नदाता किसानों को सोलर पैनल उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है और 16 लाख किसानों के ट्यूबवेल के बिजली बिल माफ कर सरकार उसके लिए पैसा उपलब्ध करा रही है। उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु-अनुकूल आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण आय और पोषण दोनों को मिला बढ़ावा अन्य क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवंश संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में भी सरकार ने ठोस काम किया है। प्रदेश में 16 लाख से अधिक गोवंश के लिए गौ संरक्षण स्थल बनाए गए हैं। जो अन्नदाता किसान अपने घर में गाय पालते हैं, उन्हें वेरिफिकेशन के बाद ₹1500 प्रति गाय का भुगतान किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट खेती और मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती के विस्तार में भी उत्तर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान बनाया है। इसके साथ ही मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण आय और पोषण दोनों को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास मिलकर किसानों की खुशहाली और प्रदेश की समग्र कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।

श्रीगोरक्षपीठ के प्रति थी गहरी श्रद्धा, महंत अवेद्यनाथ से था आत्मीय नाता

भाई की शादी में सहबाला बनकर आये थे पहली बार गोरखपुर आये थे अटल जी महराजगंज में चुनाव प्रचार के लिए आये अटल अचानक पहुंचे गोरक्षपीठ लखनऊ, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करना केवल एक प्रधानमंत्री को स्मरण करना नहीं है। यह उस व्यक्तित्व को याद करना है, जिसने सत्ता से पहले संवेदना और राजनीति से पहले संबंधों को महत्व दिया। श्रीगोरक्षपीठ से उनका जुड़ाव इसी भावभूमि पर खड़ा था। यह रिश्ता औपचारिक मुलाकातों का नहीं, बल्कि विश्वास, श्रद्धा और साझा वैचारिक चेतना का था। गोरखनाथ मंदिर और गोरक्षपीठ अटल जी के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक थे। प्रोटोकॉल पर भारी पडी श्रद्धा:- 22 मार्च 2004 का दिन इस रिश्ते की गहराई को सबसे स्पष्ट रूप में सामने लाता है। लोकसभा चुनाव के प्रचार के सिलसिले में अटल जी उस दिन महराजगंज में जनसभा को संबोधित कर चुके थे। कार्यक्रम के बाद उन्हें दिल्ली लौटना था और गोरखपुर का संबंध केवल एयरपोर्ट तक सीमित था। लेकिन गोरखपुर पहुंचते ही उन्होंने अचानक गोरखनाथ मंदिर जाने का निर्णय लिया। यह कोई तयशुदा कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मन से निकला आग्रह था। प्रधानमंत्री के इस फैसले से प्रशासनिक तंत्र असहज हो उठा। सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला दिया गया, लेकिन अटल जी ने शांति और दृढ़ता के साथ कहा कि वे महंत अवेद्यनाथ से अवश्य मिलेंगे। उस समय अटल जी के घुटने में काफी दर्द था। वह वाहन से उतरकर व्हीलचेयर के सहारे मंदिर परिसर तक पहुंचे। मंदिर में प्रवेश करते ही उन्होंने पहले गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन पूजन किया और फिर गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, उस दिन दोनों के बीच जो संवाद हुआ, वह केवल शिष्टाचार नहीं था। श्रीरामजन्मभूमि सहित राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने और जन्मभूमि यज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में महंत अवेद्यनाथ के योगदान के प्रति अटल जी के मन में गहरा सम्मान था। यह सम्मान केवल राजनीतिक सहमति का परिणाम नहीं था, बल्कि संघर्ष और वैचारिक दृढ़ता की स्वीकृति था। इसी कारण दोनों के बीच का संबंध समय के साथ और प्रगाढ़ होता गया। 1989 का दौर इस रिश्ते की एक महत्वपूर्ण कसौटी बना। जनता दल और भाजपा के गठबंधन के कारण गोरखपुर संसदीय सीट जनता दल के खाते में चली गई। संत समाज के आग्रह पर महंत अवेद्यनाथ ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उस समय भाजपा नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया कि वह खुलकर सहयोग नहीं कर पाएंगे। इसके बावजूद महंत अवेद्यनाथ चुनाव मैदान में उतरे और भारी मतों से विजयी होकर संसद पहुंचे। इस राजनीतिक परिस्थिति का अटल जी और महंत अवेद्यनाथ के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा। मतभेदों के बीच भी सम्मान और संवाद बना रहा। गोरखपुर से था अटल का पारिवारिक लगाव: गोरखपुर से अटल जी का रिश्ता केवल आध्यात्मिक या वैचारिक नहीं था, वह गहरे पारिवारिक भाव से भी जुड़ा था। 1940 में वह पहली बार यहां अपने बड़े भाई की बारात में सहबाला बनकर आए थे। तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह बालक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। गोरखपुर में उनके भाई की ससुराल होने के कारण यह शहर उनके लिए हमेशा घर जैसा रहा। जीवन के हर पड़ाव पर, चाहे वह राजनीति का संघर्ष हो या प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी, गोरखपुर उनके जीवन में विशेष स्थान रखता रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रोटोकॉल ने उनकी निजी यात्राओं को सीमित जरूर किया, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। 1998 में गोरखपुर में एक जनसभा के दौरान उन्होंने स्वयं कहा था कि इस शहर से उनका विशेष नाता है, क्योंकि यहां उनकी ससुराल है और यहां के लोगों से उनका आत्मीय संबंध है। श्री गोरक्षपीठ और अटल बिहारी वाजपेयी का संबंध सत्ता और संत के बीच का औपचारिक संवाद नहीं था। यह विश्वास, विचार और श्रद्धा की साझी यात्रा थी। उनकी जयंती पर जब देश उन्हें स्मरण करता है, तो गोरखपुर और गोरक्षपीठ उन्हें उस नेता के रूप में याद करते हैं, जिसने प्रोटोकॉल से पहले श्रद्धा को और राजनीति से पहले रिश्तों को महत्व दिया।