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सिर्फ 5 महीने में BSF में प्रमोशन पाकर यूपी की शिवानी बनी मिसाल

दादरी आज के समय में लड़कियां बढ़-चढ़कर डिफेंस सेक्टर में शामिल हो रही हैं और काफी अच्छा कर रही हैं. वहीं इन दिनों उत्तर प्रदेश की एक बेटी अभी काफी चर्चा में हैं. उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में शामिल होने के पांच महीने के अंदर ही प्रमोशन पा लिया. ऐसा कहा जा रहा है कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पूरे छह दशक के इतिहास में पहली बार किसी के ज्वॉइनिंग के बाद इतनी जल्दी किसी को प्रमोशन दिया है.  यूपी की बेटी ने रचा इतिहास  उत्तर प्रदेश में दादरी की रहने वाली शिवानी ने BSF में इतनी तेजी से पहचान हासिल करने वाली पहली महिला कांस्टेबल के रूप में इतिहास रच दिया है. वे बढ़ई की बेटी हैं. वे अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जो भारत के डिफेंस सेक्टर में अपनी सेवा दे रही हैं.  विश्व वुशु चैंपियनशिप में जीता रजत पदक  दरअसल, 31 अगस्त से 8 सितंबर 2025 तक ब्राजील में आयोजित 17वीं विश्व वुशु चैंपियनशिप (World Wushu Championship 2025) में रजत पदक जीतने के बाद शिवानी को हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन मिला है. BSF के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने सीमा सुरक्षा बल के एक शिविर में कांस्टेबल शिवानी की खाकी वर्दी पर हेड कांस्टेबल का रिबन लगाया और उनके प्रमोशन की घोषणा की.  बीएसएफ कांस्टेबल को प्रमोशन मिलने में कितना वक्त मिलता है?  बीएसएफ कांस्टेबल को प्रमोशन मिलने में आमतौर पर 15-18 वर्ष का समय लगता है. हालांकि, शिवानी ने महज 21 साल की उम्र में BSF हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन पाकर इतिहास रच दिया है.  स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी शिवानी ने इसी साल (2025) में जून महीने में बीसीएफ ज्वॉइन किया था. वे हर दिन करीब 4 घंटे ट्रेनिंग लेती हैं. उन्होंने 2025 के विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था. वहीं उनका अगला गोल विश्व कप है और वे इसकी तैयारी कर रही हैं. वे स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी करेंगी.  

एक लाख के इनामी शूटर फैसल को एनकाउंटर में किया खत्म, संजीव जीवा गैंग पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

शामली  यूपी के शामली में झिंझाना क्षेत्र के वेदखेड़ी मार्ग पर देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच भोगीमजरा के जंगल में मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में झिंझाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश को मार गिराया, जबकि एक सिपाही घायल हो गया। मारा गया बदमाश संजीव जीवा गैंग का सक्रिय शूटर बताया जा रहा है, जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर था। गुरुवार रात करीब आठ बजे कुछ बदमाश वेदखेड़ी मार्ग पर लूटपाट कर रहे थे। इस दौरान बदमाशों ने वेदखेड़ी निवासी जीतराम पुत्र रामचन्द्र से नगदी, मोबाइल व बाइक लूट ली। सूचना पर झिंझाना थाना पुलिस व एसओजी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मारा गया बदमाश संजीव जीवा गैंग का शूटर फैसल निवासी खालापार मुजफ्फरनगर था और उस पर हत्या, लूट और रंगदारी समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं। मुठभेड़ के दौरान एसओजी के एक सिपाही दीपक निर्वाण को भी गोली लगी है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक बदमाश का एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस टीमों ने जंगल में कॉम्बिंग अभियान चलाया है। मौके से पुलिस ने दो बाइक, दो पिस्टल, कई जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए हैं। झिंझाना थाना प्रभारी ने बताया कि फरार बदमाश की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और घायल सिपाही का हालचाल लिया। इस मुठभेड़ के बाद इलाके में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह भी घटना स्थल का मुयायना करने पहुंचे। एसपी ने बताया कि मृतक संजीव जीवा गैंग का शूटर था। उस पर विभिन्न थानों में लूट हत्या डकैती आदि के मुकदमे दर्ज है।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के कानून पर जताई चिंता, धर्मांतरण पर कड़ा रुख और सेकुलरिज़्म की पुष्टि

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में लागू धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि इस कानून के माध्यम से अपना धर्म बदलने के इच्छुक लोगों की राह को कठिन बनाया गया है। इसके अलावा जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने किसी के धर्म परिवर्तन करने की प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता और हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता जताई। बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है कि कानून इसलिए बनाया गया है कि किसी के धर्म परिवर्तन करने की प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी के दखल को बढ़ाया जा सके। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यूपी के धर्मांतरण विरोधी कानून की वैधता पर फिलहाल अदालत विचार नहीं कर सकती। बेंच ने यह भी याद दिलाया कि भारत एक सेकुलर देश है और कोई भी अपनी इच्छा के अनुसार धर्मांतरण कर सकता है। बेंच ने कहा, 'इस मामले में उत्तर प्रदेश धर्मांतरण अधिनियम के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर विचार करना हमारे दायरे में नहीं आता। फिर भी हम यह मानने से खुद को नहीं रोक सकते कि धर्मांतरण से पहले और बाद में घोषणा से संबंधित नियम जो बनाए गए हैं, वह किसी व्यक्ति की ओर से दूसरे धर्म को अपनाने की औपचारिकता कठिन करने वाले हैं। यह स्पष्ट है कि इन नियमों के माध्यम से धर्मांतरण की प्रक्रिया में अधिकारियों का दखल बढ़ा दिया गया है। यहां तक कि जिला मजिस्ट्रेट को कानूनी रूप से धर्मांतरण के प्रत्येक मामले में पुलिस जांच का निर्देश देने के लिए बाध्य किया गया है।' इसके अलावा अदालत ने धर्मांतरण के बाद घोषणा करने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाया। बेंच ने कहा कि कौन किस धर्म को स्वीकार कर रहा है, यह उसका निजी मामला है। इस संबंध में घोषणा करने की बाध्यता तो निजता के खिलाफ है। बेंच ने कहा, 'यह सोचने की बात है कि आखिर क्या जरूरत है कि कोई बताए कि उसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है और अब वह किस मजहब को मानता है। इस पर विचार करने की जरूरत है कि क्या यह नियम निजता के प्रावधान का उल्लंघन नहीं है।' अदालत ने कहा- संविधान के मूल ढांचे में धर्मनिरपेक्षता शामिल राज्य में धर्मांतरण की कठोर प्रक्रिया को लेकर बेंच ने कहा कि यह ध्यान देना जरूरी है कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना और धर्मनिरपेक्ष प्रकृति क्या कहती है। अदालत ने कहा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना अत्यंत महत्वपूर्ण है और संविधान को उसकी 'महान और दिव्य' दृष्टि के पढ़ना चाहिए। उसके अनुसार ही व्याख्या होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि यद्यपि 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द 1976 में एक संशोधन के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था, फिर भी धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है, जैसा कि 1973 के केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के निर्णय में कहा गया था।

मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय

मुख्यमंत्री योगी का बड़ा निर्णय, 30 वर्ष बाद बढ़ेंगे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकार मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय वर्ष 1995 में तय सीमाएं अब पुरानी, लागत बढ़ने के अनुरूप अब हो रहा वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण मुख्य अभियंता को अब ₹10 करोड़, अधीक्षण अभियंता को ₹5 करोड़ तक कार्य स्वीकृति का अधिकार अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के अधिकारों में भी बढ़ोतरी से निर्णय प्रक्रिया होगी त्वरित मुख्यमंत्री के निर्णय से निविदा, अनुबंध व कार्यारंभ प्रक्रिया में तेजी, प्रशासनिक दक्षता व पारदर्शिता में वृद्धि होगी उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में होगा संशोधन विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद शामिल मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या बढ़ी, पदोन्नति प्रक्रिया स्पष्ट होगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पाँच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटने से निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष 1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष 1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए वित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा अधिकतम पाँच गुना तक तथा विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार मुख्य अभियंता को अब ₹2 करोड़ के स्थान पर ₹10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षण अभियंता को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटे कार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है। बैठक में उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में संशोधन के माध्यम से विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग की सेवा संरचना, पदोन्नति व्यवस्था तथा वेतनमान के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि नियमावली में किया जा रहा यह संशोधन विभागीय अभियंताओं की सेवा संरचना को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित नियमावली में विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद सम्मिलित किया गया है। इसके साथ मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या में वृद्धि की गई है। नवसृजित पदों को नियमावली में समाहित करते हुए उनके पदोन्नति स्रोत, प्रक्रिया और वेतनमान को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे सेवा संरचना अधिक पारदर्शी और संगठित हो सके। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य अभियंता (स्तर-एक) के पद पर पदोन्नति अब मुख्य अभियंता (स्तर-दो) से वरिष्ठता के आधार पर की जाएगी। इसी प्रकार मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया को नियमावली में स्पष्ट किया गया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता (स्तर-एक) तक के पदों के वेतनमान और मैट्रिक्स पे लेवल भी निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ चयन समिति की संरचना को अद्यतन किया गया है, ताकि पदोन्नति और नियुक्ति की कार्यवाही अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक प्रमुख विभाग है, इसलिए अभियंताओं की सेवा नियमावली को समयानुकूल, व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति व्यवस्था से विभाग की कार्यकुशलता, तकनीकी गुणवत्ता और सेवा भावना को नई दिशा मिलेगी।

टूरिस्टों के लिए अब सफारी का नया अंदाज: इटावा पार्क में चलें आकर्षक मिनी बसों में

इटावा इटावा सफारी पार्क में आने वाले पर्यटकों को सफारी की सैर कराने के लिए दो नई आकर्षक मिनी बस पहुंच रहीं हैं। इन बसों में पर्यटकों की सुविधा के हिसाब से डिजाइन किया गया है। अभी राजगीर सफारी में इसी तरह की बसों से पर्यटकों को सैर कराई जाती है अब यह बसें इटावा सफारी में भी पर्यटकों को घुमाएंगी। इनमें बैठकर पर्यटक आसानी से वन्य जीवों के दीदार कर सकेंगे। सफारी में जो व्यवस्था की गई है उसमें लायन सफारी में शेर खुले में भ्रमण कर रहे हैं और पर्यटक बंद वाहनों से इनका दीदार करते हैं। इस कार्य में अब इन बसों की सेवाएं भी ली जाएंगी।   इसके साथ ही इन बसों में यह व्यवस्था भी की गई है कि सफारी के वन्यजीवों के बारे में भी पर्यटकों को बसों में बैठे बैठे पूरी जानकारी मिलेगी। सफारी के शेरों का इतिहास भी बताया जाएगा। सफारी पार्क के निदेशक डा. अनिल पटेल ने बताया कि दो नई बसों की खरीद की गई है। जल्द ही यह सफारी पार्क पहुंच जाएंगी। इससे पर्यटकों का आवागमन सुगम होगा।  

SSC CHSL परीक्षा 2025: स्लॉट फुल होने पर भी मिलेगी दूसरी तिथि या शहर चुनने की सुविधा

 प्रयागराज SSC CHSL Exam 2025 कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने संयुक्त उच्च माध्यमिक स्तर परीक्षा (सीएचएसएल)-2025 के लिए एक बड़ा बदलाव करते हुए अभ्यर्थियों को अपनी परीक्षा का शहर, तिथि और पाली (शिफ्ट) खुद चुनने की सुविधा शुरू कर दी है। यह सुविधा 28 अक्टूबर की रात 11 बजे तक कैंडिडेट पोर्टल पर लाइव रहेगी।  पहले जैसी चयन व सबमिशन प्रक्रिया होगी कर्मचारी चयन आयोग ने यह भी बताया कि चुनी गई तिथि पर स्लाट उपलब्ध नहीं है तो उम्मीदवार या तो दूसरी तिथि चुन सकते हैं या दूसरा शहर चुन सकते हैं। फिर पहले जैसा ही चयन और सबमिशन प्रक्रिया अपनानी होगी।   एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर सुविधा आयोग के अनुसार उम्मीदवारों को एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट के कैंडीडेट पोर्टल पर लाग-इन करना होगा। इसके बाद अभ्यर्थी शहर, परीक्षा तिथि और शिफ्ट पर क्लिक करके स्लाट चुन सकेंगे। अभ्यर्थियों को आवेदन के समय दिए गए तीन पसंदीदा शहरों में उपलब्ध स्लाट दिखाई देंगे। किसी शहर में स्लाट उपलब्ध होने पर हरा रंग का ‘सेलेक्ट’ विकल्प दिखेगा। मनचाहा स्लाट के बाद ओटीपी वेरीफिकेशन मनचाहा स्लाट चुनने के बाद उम्मीदवार को ओटीपी वेरीफिकेशन के साथ ‘वैलीडेट एंड सबमिट’ करना होगा। 28 अक्टूबर रात 11 बजे तक स्लाट नहीं चुनने पर सिस्टम अपने आप उपलब्ध स्लाट आवंटित कर देगा। यह परीक्षा 12 नवंबर से शुरू होनी है। ऐसे में शहर आवंटन की जानकारी तीन नवंबर से पोर्टल पर उपलब्ध होगी। उम्मीदवार अपनी परीक्षा का शहर, तारीख और पाली की जानकारी उसी दिन देख सकेंगे। प्रवेशपत्र परीक्षा तिथि से तीन–चार दिन पहले डाउनलोड किए जा सकेंगे। अन्य परीक्षाओं में लागू हो सकता है निर्णय अब तक एसएससी की परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र और तिथि आयोग द्वारा आवंटित किए जाते थे, लेकिन अब एसएससी ने पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाते हुए उम्मीदवारों को सीधा विकल्प चुनने का अधिकार दिया है। यह सुविधा फिलहाल सीएचएसएल-2025 के लिए एक बार के रूप में लागू की गई है। अन्य परीक्षाओं में लागू होने को लेकर निर्णय बाद में लिया जाएगा।  

भैया दूज की अनोखी जश्न: जेल अधीक्षक को तिलक लगाकर ड्रम वाली मुस्कान ने मनाई खुशी

मेरठ  चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने जेल में भैया दूज मनाया है। गुरुवार को भाई दूज के मौके पर मेरठ कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने उन 27 महिला बंदियों से तिलक लगवाया, जिनके भाई मुलाकात के लिए नहीं पहुंचे। पति सौरभ की हत्या के आरोप में प्रेमी साहिल के साथ जेल में बंद मुस्कान के घर से उसका भाई भी जेल नहीं पहुंचा था। ऐसे में जेल अधीक्षक ने मुस्कान से भाई दूज का तिलक लगवाया। नीले ड्रम हत्याकांड से मुस्कान सुर्खियों में आई थी। उसकी मां कविता ने बताया है कि परिवार अब मुस्कान से कोई संबंध नहीं रखना चाहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी त्योहार पर वह उससे नहीं मिलेंगे, क्योंकि मुस्कान उनके जीवन का हिस्सा नहीं रही। वहीं, भैया दूज पर जेल परिसर में रोली, चावल, मिठाई और जलपान की विशेष व्यवस्था की गई। बहनों के लिए छायादार पंडाल लगाए गए, ताकि वह सहजता से पर्व मना सकें। सुबह से ही बंदियों और उनके परिजनों में उत्साह देखने को मिला और देर शाम तक तिलक का क्रम जारी रहा। डेरा सच्चा सौदा की ओर से फ्री भोजन की आयोज भैया दूज के अवसर पर मेरठ जिला कारागार परिसर में डेरा सच्चा सौदा के नेतृत्व में निशुल्क भोजन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बंदियों से मिलने आने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई। चार टुकड़ों में थी लाश; शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा का बयान सौरभ हत्याकांड में शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा धर्मेंद्र कुमार के जिला जज कोर्ट में 6 अक्टूबर को बयान दर्ज कराया था। दारोगा ने कोर्ट को बताया कि नीले ड्रम में लाश को सीमेंट से जमाया हुआ था। कटर से ड्रम और सीमेंट को काटकर मोर्चरी पर शव को बाहर निकाला गया। लाश टुकड़ों में मिली थी। सिर को धड़ से काटकर अलग किया गया था। दोनों हाथों को भी कलाई से काटकर अलग किया हुआ था। दोनों कटे हुए हाथ एक पॉलीथिन में बंद मिले थे। चाकू भी ड्रम के अंदर ही मिला था।  

योगी सरकार ने किया बड़ा फैसला: यूपी में 1022 नए अग्निशमन कर्मियों की भर्ती और हर जिले में फायर चौकी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेसवे पर हर 100 किमी की दूरी पर फायर टेंडर युक्त एक छोटी फायर चौकी बनाने के निर्देश दिए हैं। आग लगने पर इससे गोल्डन ऑवर में राहत दी जा सकेगी। इसके साथ ही अग्निकांड को रोकने और हादसा होने पर त्वरित राहत देने के लिए फायर महकमे में 1022 पद (98 राजपत्रित और 922 अराजपत्रित) बढ़ाए जाएंगे। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में भी पद बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग में पदों के सृजन व अभियोजन संवर्गीय अधिकारियों के कैडर रिव्यू के संबंध में बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर मंडल में विशेष यूनिट गठित की जाए। केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल हादसा होने पर विशेष यूनिट सहायक साबित होगी। बहुमंजिला इमारतों में हादसा होने पर भी इस यूनिट की मदद ली जा सकेगी। फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं में काम करने के लिए भी विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि फायर महकमे को अति आधुनिक उपकरणों और ट्रेनिंग के जरिए मजबूत किया जाए। बैठक में कुछ बड़े हादसों का भी जिक्र हुआ। अफसरों को समय-समय पर बड़े प्रतिष्ठानों, मॉल व मल्टीप्लेक्स के साथ बहुमंजिला अपार्टमेंट का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर जिले में लेखा कैडर स्थापित करने के भी निर्देश दिए। विभाग की नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की यूनिट तैनात की जा चुकी है। अग्निशमन विभाग में बढ़ेंगे 1022 पद मुख्यमंत्री योगी ने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि नए पद भी सृजित होने चाहिए। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने को भी कहा। इस निर्देश के साथ ही विभाग में राजपत्रित और अराजपत्रित स्तर के नए 1022 पदों के सृजित होने का रास्ता भी साफ हो गया।  

सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ

फोकस सेक्टर डेस्क से प्रदेश में निवेश को मिल रही नई उड़ान सीएम योगी की दूरदर्शी पहल से करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में, जल्द उतरेंगे धरातल पर टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में खुली निवेश की राह फोकस सेक्टर डेस्क की मदद से प्रदेश में निवेश प्रोत्साहन लागू करने की दिशा में इन्वेस्ट यूपी के प्रयासों को मिली सफलता सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब सिर्फ देश का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि भारत की सबसे तेज़ी से उभरती निवेश भूमि बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी द्वारा किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों ने प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। इसी दिशा में एक अहम कदम साबित हुई है—फोकस सेक्टर डेस्क की स्थापना, जिसने न केवल निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि उद्योग जगत में उत्तर प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में सीएम योगी के निर्देश पर इन्वेस्ट यूपी द्वारा गठित फोकस सेक्टर डेस्क अब प्रदेश में करोड़ों रुपये के निवेश को जुटाने में सफल रही है। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव न केवल मंजूरी के दौर में हैं, बल्कि जल्द ही धरातल पर उतरने वाले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में फोकस सेक्टर डेस्क की रणनीति ने न केवल निवेश प्रक्रिया को गति दी है, बल्कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में ठोस आधार भी तैयार किया है। टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में बड़े खिलाड़ी तैयार भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (ITTA), परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC), भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (CITI) और उत्तर भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (NITRA) की साझेदारी से इस सेक्टर में ग्रासिम, ट्राइडेंट, रिलायंस, जीईएसएल और श्याम संस जैसी बड़ी कंपनियां प्रदेश में निवेश कर रही हैं। उनके प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।  ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में नई ऊर्जा सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), एसीएमए, एसएमईवी और एआरएआई जैसी संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश में ऑटोमोबाइल उद्योग को नई रफ्तार मिल रही है। अशोक लेलैंड, मिंडा और टाटा मोटर्स (विस्तार परियोजना) जैसे दिग्गज निवेश के लिए तैयार हैं। केमिकल सेक्टर में औद्योगिक चमक भारतीय रासायनिक परिषद (ICC), ISCM Association और CHEMEXCIL के सहयोग से प्रदेश में रिलायंस इंडस्ट्रीज और दीपक नाइट्राइट जैसी कंपनियां बड़े निवेश की योजना पर काम कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रदेश बन रहा टेक हब ICEA, ELCINA, AIEA और IEEMA के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। डिक्सन, एम्बर, एचसीएल-फॉक्सकॉन, हायर और एलजी जैसी कंपनियों की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिससे प्रदेश भारत का अगला टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर से विश्व स्तरीय साझेदारी नैसकॉम के सहयोग से एडोब, एएमडी और जेपी मॉर्गन जैसी वैश्विक कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं।

मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ

केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने हेतु स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित हो: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए फायर सर्विस को अधिक सशक्त और आधुनिक बनाया जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग के विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताई मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के दिए निर्देश प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर की स्थापना और प्रशिक्षण संस्थान में नए पदों से प्रशासनिक दक्षता व प्रशिक्षण गुणवत्ता में होगा सुधार एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किमी पर छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए अग्निशमन विभाग की संरचना को अधिक सशक्त, आधुनिक तथा जनसुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं के समेकित स्वरूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री गुरुवार को अग्निशमन विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक रीजन में स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित की जाए, जो केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हों। मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जनशक्ति से सुसज्जित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभाग में नए पदों के सृजन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर स्थापित किया जाए। साथ ही, राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग में राजपत्रित संवर्ग के 98 तथा अराजपत्रित संवर्ग के लगभग 922 नए पद सृजित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे जनपद, रीजनल और मुख्यालय स्तर पर फायर सर्विस की कार्यक्षमता और जनसेवा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में फायर एवं आपात सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एक्सप्रेस-वे पर बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर फायर टेंडर सहित एक छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर राहत व बचाव कार्य प्रारंभ किया जा सके। बैठक में बताया गया कि नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की समुचित जनशक्ति पहले ही तैनात की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फायर सर्विस जनता के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। इसकी संरचना ऐसी होनी चाहिए, जो हर परिस्थिति में त्वरित, कुशल और उत्तरदायी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जाए, ताकि इसका लाभ शीघ्र जनता तक पहुँच सके।