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सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश भर में बुनियाद सुविधाओं का हो रहा विस्तार, हर वर्ग का हो रहा उत्थान

 सीएम डैशबोर्ड की सितंबर माह की रिपोर्ट में डीएम हमीरपुर ने पहला, औरेया ने दूसरा और श्रावस्ती ने तीसरा स्थान प्राप्त किया लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले साढ़े आठ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों काे साकार करने में सीएम डैशबोर्ड अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम डैशबोर्ड से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में सीएम डैशबोर्ड की सितंबर माह की रिपोर्ट में प्रदेशभर में हमीरपुर ने बेहरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि औरेया ने दूसरा और श्रावस्ती ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की हर माह सीएम डैशबोर्ड से की जाती है समीक्षा सीएम डैशबोर्ड द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की जाती है। डैशबोर्ड द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। सीएम डैशबोर्ड की सितंबर माह की रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं औरेया जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि श्रावस्ती ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी श्रावस्ती अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों, और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।   उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप श्रावस्ती में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि श्रावस्ती पिछले कई माह से मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट में टॉप फाइव जिलों में अपने जगह बनाए हुए है। श्रावस्ती ने विकास एवं राजस्व कार्यों की संयुक्त रैंकिंग में 10 में से 9.28 अंक प्राप्त किए हैं, जिसका रेश्यो 92.80 प्रतिशत है। वहीं, राजस्व कार्यों की श्रेणी में जनपद ने 9.26 अंक (92.60 प्रतिशत) हासिल किये हैं। डैशबोर्ड के अनुसार श्रावस्ती ने 49 विभागों के अंतर्गत 110 कार्यक्रमों की समीक्षा में 96 कार्यक्रमों में ‘ए’ श्रेणी प्राप्त की है, जबकि 52 कार्यक्रमों में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसी तरह मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवे पायदान पर है। वहीं टॉप टेन जिलों में अंबेडकरनगर, कुशीनगर, महराजगंज, कनौज और शाहजहांपुर ने जगह बनायी है।

गोमती केवल नदी नहीं, सांस्कृतिक चेतना और जीवनधारा की प्रतीक : मुख्यमंत्री

  ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ बनेगा आस्था, पर्यावरण और विकास के संगम का प्रतीक, मुख्यमंत्री ने जनता से की सहभागिता की अपील सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर कड़ाई से लागू होगा प्रतिबंध, सीवर सिस्टम को चोक करने में इसकी बड़ी भूमिका भूतपूर्व सैनिकों, विशेषज्ञों सहित विभिन्न सरकारी विभाग एकजुट होकर करेंगे काम, लखनऊ में मंडलायुक्त को समन्वय की जिम्मेदारी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्वच्छ, अविरल और निर्मल गोमती’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीलीभीत से गाजीपुर तक प्रवाहित गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और जीवनधारा की प्रतीक है। गोमती का पुनर्जीवन केवल जल शुद्धिकरण का नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण के पुनर्संवर्धन का व्यापक अभियान है। यह मिशन पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी साझा प्रतिज्ञा का प्रतीक बनेगा। टेरिटोरियल आर्मी की पहल पर आयोजित इस बैठक में बैठक में मेजर जनरल सलिल सेठ, ब्रिगेडियर नवतेज सिंह सोहल, ब्रिगेडियर सी. माधवाल, कर्नल अरविन्द एस. प्रसाद, ले. कर्नल सचिन राणा, ले.कर्नल सौरभ मेहरोत्रा, मेजर के.एस. नेगी, प्रो. (डॉ.) वेंकटेश दत्ता, ले. कर्नल हेम लोहुमी, एस.एम. (सेवानिवृत्त) के साथ-साथ शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। बैठक में मुख्यमंत्री ने मिशन की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक परियोजना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से चलने वाली एक जन-आंदोलनात्मक पहल होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमती में एक भी बूंद सीवरेज न गिरे, इसके लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि नदी किनारे बसे अवैध बस्तियों में घुसपैठियों की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि गोमती के तटों पर स्वच्छता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने कहा कि मिशन का दायरा पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती नदी के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र को कवर करेगा, जिससे गोमती अपने पूरे विस्तार में स्वच्छ, अविरल और निर्मल रूप पुनः प्राप्त कर सके। मुख्यमंत्री ने मिशन के अंतर्गत नगरीय सीवेज का 95 प्रतिशत से अधिक अवरोधन, नदी प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक लाना और नदी तटीय पारिस्थितिकी का पुनरुद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया। बैठक में यह जानकारी दी गई कि गोमती में गिरने वाले 39 प्रमुख नालों में से 13 अब भी बिना उपचारित हैं। वर्तमान में छह एसटीपी 605 एमएलडी की कुल क्षमता के साथ संचालित हैं। इन्हें पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने हेतु नालों को एसटीपी तक मोड़ने, नए संयंत्र स्थापित करने और पुराने संयंत्रों के उन्नयन की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मिशन केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नदी के जैविक, सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक पुनर्जीवन का माध्यम बनेगा। कार्ययोजना के अंतर्गत लखनऊ में इकाना वेटलैंड और साजन झील जैसे नए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे। नदी किनारे के अवैध अतिक्रमणों को हटाने, घाटों के सौंदर्यीकरण, और तटीय हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से प्रतिबंध लागू किया जाएगा, क्योंकि सीवर सिस्टम को चोक करने और प्रदूषण बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत इसी वर्ष जनवरी में गठित गोमती टास्क फोर्स में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, लखनऊ नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण तथा अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। इनमें बीबीएयू लखनऊ के प्रो. (डा.) वेंकटेश दत्ता और अतुल्य गंगा ट्रस्ट के सह-संस्थापक ले. कर्नल देवेंद्र चौधरी (सेवानिवृत्त) प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं। यह टास्क फोर्स शासन और समाज के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रही है। बैठक में बताया गया कि गोमती टास्क फोर्स द्वारा अब तक नदी तटों पर पैदल और नौका गश्त, एक हजार टन से अधिक जलकुंभी की सफाई, नालों का सर्वेक्षण कर प्रदूषण स्रोतों की पहचान, तथा 100 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 70,000 से ज्यादा नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। ‘नदी योग अभियान’ के अंतर्गत 21 अप्रैल से 21 जून 2025 तक पाँच प्रमुख घाटों पर प्रतिदिन योग, घाट-सफाई और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 50,000 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया और 300 टन से अधिक जलकुंभी हटाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमती का जल जीवन का आधार है, और इसे स्वच्छ, अविरल तथा निर्मल बनाए रखना उत्तर प्रदेश की नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टास्क फोर्स की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित हों, त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए और हर स्तर पर पारदर्शिता व जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गोमती पुनर्जीवन मिशन के लिए आवश्यक संसाधनों; जैसे ट्रैक बोट, फ्लोटिंग बैरियर, एक्सकेवेटर और अन्य उपकरण की उपलब्धता में सरकार किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की सहभागिता से संचालित एक संकल्प यात्रा बनेगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में शैक्षणिक व अन्य सामाजिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि यह मिशन एक जनांदोलन का स्वरूप ग्रहण कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज और शासन साथ कदम बढ़ाएँगे, तभी गोमती अपनी स्वाभाविक निर्मलता और जीवनदायिनी धारा पुनः प्राप्त कर सकेगी।

डिजिटल यूपी: योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश बना नया आईटी हब

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग उत्तर प्रदेश को आईटी हब बनाने की दिशा में कर रहा ठोस प्रयास माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, पेटीएम, टीसीएस , मैक इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने प्रदेश में किया निवेश सेक्टर में ₹5,584 करोड़ का निवेश और 53,000 रोजगार के अवसर हुए सृजित लखनऊ,  कुछ साल पहले तक उत्तर प्रदेश का नाम सुनते ही लोग कृषि और पारंपरिक उद्योगों की बात करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि और सशक्त नीतियों ने अब यह धारणा बदल दी। आज लखनऊ, कानपुर और नोएडा जैसे शहरों में आईटी पार्क्स की जगमगाहट नई कहानी कह रही है। यूपी अब सिर्फ भारत का हृदय नहीं, बल्कि डिजिटल भारत का मस्तिष्क भी बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी केवल तकनीक नहीं, यह परिवर्तन की शक्ति है। सीएम योगी के इसी सूत्रवाक्य को आगे बढ़ते हुए प्रदेश के आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने हर युवा को अवसर देने और उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा आईटी हब बनाने की दिशा में ठोस प्रयास प्रारंभ किए हैं। 15 हजार करोड़ से 75 हजार करोड़ तक बढ़ा यूपी का आईटी निर्यात 2015 में जहां प्रदेश का आईटी निर्यात केवल ₹15,000 करोड़ था, वहीं आज यह आंकड़ा ₹75,000 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। यह केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की मेहनत और योगी सरकार के तकनीकी विजन की सफलता का प्रतीक है। योगी सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी नीति 2017-2022 ने निवेशकों के लिए दरवाज़े खोले हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, पेटीएम, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, मैक इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों ने प्रदेश में निवेश कर भरोसे की नई मिसाल कायम की। परिणामस्वरूप ₹5,584 करोड़ का निवेश और 53,000 रोजगार अवसर सृजित हुए। नई आईटी एवं आईटी जनित सेवा नीति-2022 के तहत दो नई परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया गया है, जिनसे 900 युवाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं ₹48 करोड़ से अधिक निवेश वाली तीन परियोजनाएं मंज़ूरी के इंतज़ार में हैं। आईटी को मिला उद्योग का दर्जा, बदला निवेश का माहौल योगी सरकार ने आईटी और आईटीईएस क्षेत्र को “उद्योग का दर्जा” देकर इतिहास रच दिया। अब आईटी कंपनियों को औद्योगिक श्रेणी की भूमि औद्योगिक दरों पर मिल रही है। इस फैसले से निवेशक आत्मविश्वास के साथ उत्तर प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के सहयोग से नोएडा, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और आगरा में आईटी पार्क्स और एसटीपीआई केंद्र संचालित हो रहे हैं। अब यही रौशनी वाराणसी, बरेली और गोरखपुर की ओर बढ़ रही है, जहां नए केंद्र बन रहे हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि छोटे शहर भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल होंगे। ‘युवा यूपी’ का नया चेहरा कानपुर की दीप्ति हो या गोरखपुर के आर्यन — इन युवाओं ने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने ही शहर में बड़ी आईटी कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। योगी सरकार की नीति ने उनकी यह इच्छा पूरी की है। आज ये युवा अपनी प्रतिभा से न सिर्फ अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि प्रदेश को नई पहचान भी दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने आईटी और आईटीईएस परियोजनाओं के लिए एक डेडीकेटेड ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है, जिससे आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो गई है।

सीएम योगी ने पत्रकारों को दी लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर प्रदेशभर में होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी

 राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आयोजन का हिस्सा बनेंगे यूपी के खिलाड़ी, कलाकार और युवा प्रदेश की हर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा से होते हुए तीन दिवसीय 8 से 10 किलोमीटर की निकाली जाएगी पद यात्रा स्थानीय स्तर पर आयोजित की जाएगी निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिता, संगोष्ठी और नुक्कड़ नाटक लखनऊ, भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में 31 अक्टूबर को रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जाएगा। सरकार और भारतीय जनता पार्टी मिलकर इसे भव्य-दिव्य बनाएगी। वहीं 31 अक्टूबर से 26 नवंबर के बीच सरदार @150 यूनिटी मार्च आयोजित किया जाएगा। इसका हिस्सा प्रदेश के हर जनपद के खिलाड़ी, कलाकार समेत पांच-पांच युवा बनेंगे। ये सभी युवा लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म भूमि से लेकर केवड़िया गुजरात तक की 150 किलोमीटर की यात्रा से जुड़ेंगे। इन सभी को चार प्रमुख केंद्र होते हुए सरदार साहब की पावन जन्मभूमि तक बस द्वारा पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यहां से सभी 150 किलोमीटर की पद यात्रा में शामिल होंगे। इस राष्ट्रीय पद यात्रा में सरदार साहब की जन्मभूमि करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया तक की यात्रा गुजरात में आयोजित होगी। यह राष्ट्रीय पद यात्रा होगी, जिसमें हजारों युवा अभियान का हिस्सा बनेंगे। सभी युवा जन जागरण अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगे। यह जानकारी रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेसवार्ता में पत्रकारों को दी। स्थानीय स्तर पर आयोजित किये जाएंगे विभिन्न कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश की हर लोकसभा क्षेत्र में तीन दिवसीय 8 से 10 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली जाएगी, जो सभी विधानसभा से होकर गुजरेगी। पद यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर आम जनमानस में जागरूकता पैदा करने के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किये जाएंगे। इसमें भारत की एकता और अखंडता में सरदार साहब के योगदान पर निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिता, सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन पर आधारित संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक आदि होंगे। इसके अलावा युवाओं के लिए नशा मुक्त भारत शपथ ग्रहण कार्यक्रम, विभिन्न क्षेत्रों में वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल अभियान का आयोजन होगा। योग और स्वास्थ्य से संबंधित शिविर भी लगेगा। पूरे प्रदेश में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके अलावा पद यात्रा के दौरान स्थानीय कमेटियों, विभिन्न समाजसेवी संगठनों, सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सरदार साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण-श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। लौह पुरुष के सामने नहीं चली जूनागढ़ के नवाब और हैदराबाद के नजाम की सीएम योगी ने बताया कि अखंड भारत से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल से जुड़े, राष्ट्रीयता से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये जाएंगे। कार्यक्रमों को मंत्री, सांसद, विधायक समेत सभी कार्यकर्ताओं द्वारा माई भारत, एनसीसी, एनएसएस आदि के द्वारा अभियान को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि  31 अक्टूबर (वल्लभ भाई पटेल की जयंती) से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक वृहद कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ ही अखंड भारत के शिल्पी भी हैं। अखंड भारत का जो स्वरूप हमें आज दिखाई देता है, इसके शिल्पी के रूप में पूरा भारत लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मरण करता है, उनके प्रति सदैव कृतज्ञता ज्ञापित करता है। देश के अंदर सैकड़ों रियासतों को भारत गणराज्य का हिस्सा बनाने और फिर भारत के वर्तमान स्वरूप को उन्होंने उस समय जिस दूरदर्शिता और सूझ-बूझ के साथ लागू किया था, आज वह भारत हम सबको देखने को मिलता है। हर व्यक्ति जानता है कि उस समय कुछ रियासतें ऐसी भी थीं, जिसमें (जूनागढ़ का नवाब और हैदराबाद का निजाम) आदि मनमानापन करना चाहते थे, लेकिन लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के सामने उनकी एक न चली। अंततः लौह पुरुष के दृढ़ निश्चय के सामने उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। ये दोनों रियासतें भी भारत का हिस्सा बनीं। वर्ष 2014 से लौह पुरुष की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है देश सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश 2014 से लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है। भारतीय जनता पार्टी 2014 से ही 'रन फॉर यूनिटी' आयोजित कर रही है। भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर देश और प्रदेशभर में 31 अक्टूबर को 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन किया जाएगा।

आजम खां से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने खोला राजनैतिक मंथन, कहा- ‘सब कुछ हो सकता है’

लखनऊ अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के शनिवार को रामपुर पहुंचने पर राजनीतिक गलियारे में खलबली मच गई। रामपुर में उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में प्रमुख रहे आजम खां से उनके आवास पर भेंट की। मुलाकात के संबंध में स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। आजम खां से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष भावना वाला बताने के साथ सरकार बनने पर कार्रवाई करने वाले को परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि आजम खां पर राजनीतिक द्वेष भावना से कार्रवाई की गई है। स्वामी प्रसाद ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर भी तंज कसा और कहा कि इस सरकार में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। बेरोजगारी तो चरम सीमा पर है। सरकार का प्राइमरी स्कूल बंद करने का फैसला बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने बरेली में बीते दिनों हुए बवाल के बारे में कहा कि भाजपा के इशारे पर तो यह सारा उपद्रव सोची-समझी साजिश के तहत कराया गया था। स्वामी प्रसाद ने कहा कि भाजपा तो हिंदू और मुस्लिम की राजनीति करती है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में ‍उत्तर प्रदेश में मुसलमान को लगातार टारगेट किया जा रहा है। यहां पर तो मस्जिदों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। अखिलेश और आजम खां की मुलाकात पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव बेहद अवसरवादी हैं और आजम साहब से भेंट करने के बाद उनका संवेदनशील होना को घड़ियाली आंसू जैसा है। इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य का आजम खां के आवास के बाहर पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां ने स्वागत किया। स्वामी प्रसाद दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर आजम खान के आवास टंकी नंबर पांच, घेर मीर बाज खान पहुंचे। सपा, बसपा और भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ आजम खां ने घर के अंदर अकेले में मुलाकात की।  

उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और एमएलसी डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल का अखिलेश यादव पर करारा प्रहार

  बोलेः अखिलेश ने मान्यवर कांशीराम और बाबा साहब का किया अपमान, जेपीएनआईसी में जमकर लूटा जनता का पैसा योगी सरकार ने किया स्मारकों का संरक्षण, सपा राज में अंधकार में डूबा था आंबेडकर स्मारकः डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि सपा शासनकाल (2012–2017) दलितों के अपमान, भ्रष्टाचार और परिवारवाद का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि जिस समय पूरे देश में मान्यवर कांशीराम जी के नाम से बने संस्थानों को सम्मान दिया जा रहा था, उसी समय अखिलेश यादव ने उनके नाम को मिटाने का काम किया। डॉ. निर्मल ने कहा कि लखनऊ का उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, जो मान्यवर कांशीराम जी के नाम से था, उससे नाम हटाया गया। यही नहीं, कांशीराम जी के नाम से चलने वाली सभी सरकारी योजनाओं के नाम भी बदल दिए गए। यह कृत्य दलितों के सम्मान पर गहरी चोट थी। उन्होंने कहा कि बहन मायावती जी की रैली ने समाजवादी पार्टी के असली चरित्र का पर्दाफाश कर दिया है जो दलित विरोधी और महापुरुषों के प्रति अपमानजनक रवैया रखने वाली पार्टी है। अखिलेश के राज में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का प्रतीक बना जेपीएनआईसी सपा सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के प्रतीक बने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत ₹200 करोड़ की लागत से हुई थी, लेकिन 2017 तक इसकी लागत बढ़कर ₹867 करोड़ हो गई और फिर भी परियोजना अधूरी रही। ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह केंद्र “कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का अड्डा” बन गया। उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने आते ही जेपीएनआईसी समिति को भंग कर यह परियोजना एलडीए के सुपुर्द की, ताकि इसे पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा सके। सरकार ने ₹882.74 करोड़ की धनराशि ऋण के रूप में स्थानांतरित कर दी है, जिसे 30 वर्षों में लौटाया जाएगा। अब इस परियोजना के अंतर्गत आधुनिक ऑडिटोरियम, कन्वेंशन सेंटर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, मल्टीपरपज कोर्ट और मल्टीलेवल पार्किंग (750 वाहनों की क्षमता) का निर्माण कराया जा रहा है। इसे अब इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान की तर्ज पर लर्निंग सेंटर के रूप में जनता के लिए खोला जाएगा, न कि अखिलेश यादव के शासनकाल में लूट के केंद्र के रूप में। अखिलेश ने दलितों का किया उत्पीड़न डॉ. निर्मल ने कहा कि अखिलेश यादव जिस कांग्रेस के साथ आज गलबहियां कर रहे हैं, उसी कांग्रेस ने देश में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का अपमान किया था। यह वही कांग्रेस है जिसने बाबा साहब को भारत रत्न देने में देरी की, उनके नाम पर कोई प्रतिमा नहीं लगवाई और प्रमोशन में आरक्षण के बिल को संसद में फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि अब अखिलेश यादव संविधान की किताब लेकर घूम रहे हैं ताकि अपने पापों को छुपा सकें, लेकिन जनता सब जान चुकी है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी ने न सिर्फ दलितों के आरक्षण का विरोध किया, बल्कि लाखों दलित कर्मचारियों का रिवर्जन कर दिया, उनकी जमीनों पर अवैध कब्जे कराए और उत्पीड़न किया। 2012 से 2017 के बीच डॉ. आंबेडकर स्मारक में रातभर अंधेरा रहता था, लाइटें बंद थीं, पत्थर टूटे पड़े थे, पीतल की पट्टिकाएं उखाड़ी गई थीं। सपा ने स्मारकों को नष्ट करने का काम किया। इसके विपरीत, योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी ईमानदारी से बाबा साहब आंबेडकर की धरोहरों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ.बाबा साहब आंबेडकर हमारी आस्था के केंद्र हैं। भारतीय जनता पार्टी ने न केवल उनके विचारों को सहेजा, बल्कि उनके सभी पांच तीर्थ स्थलों का विकास किया, दलितों को आर्थिक सशक्तिकरण दिया, संसद और विधान परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाया। यही सच्चा सामाजिक न्याय है।” दलित समाज को भ्रमित नहीं कर पाएंगे सपा और कांग्रेस डॉ. निर्मल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश की एकमात्र ऐसी पार्टी है जहां परिवारवाद की कोई जगह नहीं, अध्यक्ष और नेताओं का चयन लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है। जबकि कांग्रेस, सपा और बसपा जैसी पार्टियां परिवारवाद को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि जो कहते हैं कि बसपा को योगी आदित्यनाथ की जरूरत है, उन्हें यह समझना चाहिए कि योगी जी ने जिस ईमानदारी और पारदर्शिता से बाबा साहब के स्मारकों को सम्मान दिया है वह किसी अन्य सरकार ने कभी नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश का दलित समाज जाग चुका है। उत्तर प्रदेश की जनता जान चुकी है कि कौन दलितों के अधिकारों की रक्षा करता है और कौन उन्हें भ्रमित करता है। 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी का वही हश्र होगा जो कांग्रेस का हुआ, जनता उसे पूरी तरह खारिज कर देगी। जेपी के नाम पर फाइव स्टार प्रोजेक्ट समाजवाद नहीं, अमीरों की मौज-मस्ती थीः असीम अरुण योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी कहने वाले अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर जो परियोजना बनाई थी, वह समाजवाद नहीं बल्कि विलासिता और दिखावे का प्रतीक थी। मंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण जी ने हमेशा सादगी और गरीबों के कल्याण का संदेश दिया, जबकि अखिलेश सरकार ने उनके नाम पर फाइव स्टार सुविधाओं वाला प्रोजेक्ट खड़ा करने की योजना बनाई थी। असीम अरुण ने कहा कि यह बड़े अचरज की बात है जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर लखनऊ में एक फाइव स्टार व्यवस्था बनाई जा रही थी। अखिलेश यादव जी द्वारा इस फाइव स्टार व्यवस्था में बिल्डिंग के ऊपर एक हेलीकॉप्टर उतरने की जगह बनाई गई थी। ऊंचे तल पर स्विमिंग पूल बनाया गया था। फाइव स्टार कमरे बनाए गए। इसको समाजवादी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कहा जाए तो इससे ज्यादा हंसी की बात और क्या होगी। साथ ही साथ भ्रष्टाचार का इसमें जो आलम रहा वो तो और अनूठा था। एक समिति बनाई गई जिसे पहले 200 करोड रुपए दिए गए और बाद कुल 867 करोड रुपए प्रदान कर दिए गए। फिर भी वह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया। अब इस पूरे प्रोजेक्ट की जांच चल रही है और सीएजी ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। योगी सरकार इस प्रोजेक्ट को वापस ला रही है, लेकिन ध्यान रखा जा रहा है कि यह अमीर लोगों की मौज … Read more

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पलटवार, बोले – सपा का लोकतंत्र और संविधान से कोई लेना-देना नहीं

जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण सपा का राजनीतिक पाखंड, अखिलेश की राजनीति परिवारवाद और स्वार्थवाद पर आधारित लखनऊ, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा हमेशा से लोकतंत्र के विरोध में रही है। आज वही पार्टी कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सत्ता पाने की साजिश कर रही है, यह वही कांग्रेस है जिसने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र को कुचला था। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव जिस कांग्रेस के साथ मंच साझा कर रहे हैं, उसी कांग्रेस ने जयप्रकाश नारायण जी जैसे लोकतंत्र के प्रहरी को जेल में डाला था। एक तरफ आप जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं, दूसरी तरफ उन्हीं को जेल भेजने वालों से गठबंधन करते हैं, यह राजनीतिक पाखंड है। सपा का लोकतंत्र या संविधान से कोई लेना-देना नहीं ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को लोकतंत्र या संविधान से कोई लेना-देना नहीं, उनका मकसद केवल सुर्खियां बटोरना और सत्ता की कुर्सी पर बैठना है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति परिवारवाद और स्वार्थवाद पर आधारित है, जबकि भारतीय जनता पार्टी सर्व समाज की पार्टी है, जो बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान के अनुरूप काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि जयप्रकाश नारायण जी की जयंती भाजपा पूरे देश और दुनिया में मना रही है, क्योंकि इमरजेंसी के दौरान सबसे अधिक जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ता जेलों में बंद किए गए थे। वहीं कई समाजवादी भी जेल भेजे गए थे, लेकिन सपा आज उनका त्याग भुलाकर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता की सौदेबाजी कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जनता सब जानती है। सपा अब लोकतंत्र की नहीं, केवल सत्ता की पार्टी बन चुकी है। भाजपा जनता की सेवा और संविधान की रक्षा के लिए काम करती रहेगी।

सीएम योगी ने सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ परिसर में आयोजित प्रबुद्धजन संवाद संगम कार्यक्रम में लिया भाग

लोकमंगल और राष्ट्रीय एकता के साथ ही अध्यात्म का केंद्र है सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ- मुख्यमंत्री राम मंदिर के निर्माण से भारत की आध्यात्मिक अस्मिता को मिली नई ऊंचाई, साकार हुआ सनातन संकल्प- सीएम योगी गाजीपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक चेतना में है और जब तक भारत का नागरिक अपनी आध्यात्मिकता और राष्ट्रीयता के भाव से कार्य करेगा, तब तक देश को विश्वगुरु के रूप में स्थापित होने से कोई नहीं रोक सकता। सीएम योगी शनिवार को गाजीपुर स्थित सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ परिसर में आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता विषयक प्रबुद्धजन संवाद संगम’ में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें भगवती मां परम्बा बुढ़िया देवी के दर्शन और 900 वर्ष पुरानी संन्यासी परंपरा के इस सिद्ध पीठ में पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नंदन यति जी महाराज के सानिध्य में उपस्थित होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह पीठ न केवल अध्यात्म का केंद्र है, बल्कि लोकमंगल और राष्ट्रीय एकता का भी सशक्त माध्यम है। राम मंदिर से भारत की आध्यात्मिक अस्मिता को मिली नई ऊँचाई- सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर निर्माण केवल एक धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि भारत की आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों रामभक्तों ने संकल्प लिया था ‘राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’, तब लोगों ने इसे असंभव माना था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पूज्य संतों के आशीर्वाद से यह संकल्प अब साकार है। सीएम योगी ने कहा कि 2020 में राम मंदिर की आधारशिला रखे जाने से लेकर 2024 में भगवान श्रीराम के अपने गर्भगृह में विराजमान होने तक की यात्रा भारत की आस्था, एकता और संकल्प शक्ति की मिसाल है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में चारों द्वारों का नाम चार प्रमुख आचार्यों  शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, रामानंदाचार्य और माधवाचार्य के नाम पर रखा गया है। दक्षिण से उत्तर तक, भारत एक ही आध्यात्मिक सूत्र में बंधा है- सीएम योगी सीएम ने रामायण की कथाओं से प्रेरणा लेते हुए अयोध्या के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को महर्षि वाल्मीकि के नाम, राम मंदिर परिसर में सप्त ऋषियों व तुलसीदास की प्रतिमाएं, गिद्धराज जटायु की मूर्ति और निषादराज के नाम पर रैन बसेरा बनाने का भी उल्लेख किया। वनवास के दौरान सबसे पहले सहयोग करने वाले निषादराज को सम्मान मिला है। मतंग ऋषि की शिष्या शबरी ने राम भक्ति के लिए जीवन समर्पित किया, जिनके नाम पर भोजनालय बन रहे हैं। ऋषि परंपरा की भविष्यवाणी से प्रेरित होकर हम गाजीपुर मेडिकल कॉलेज को विश्वामित्र के नाम पर समर्पित किया है। यह भारत की एकता में विविधता की झलक है। यह दिखाता है कि दक्षिण से उत्तर तक, भारत एक ही आध्यात्मिक सूत्र में बंधा है। मठ-मंदिर ही राष्ट्र की आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे मठ और मंदिर केवल उपासना के स्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज में जाति या संप्रदाय के नाम पर वैमनस्य फैलाने की कोशिश होती है, तब यही मठ और संत समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। इतिहास उठाकर के देखिए कि जब भी हम बंटे थे तो कटे थे, और जब एक थे तो नेक थे। सीएम योगी ने मंच से वीर अब्दुल हमीद और महावीर चक्र विजेता राम उग्रह पांडेय के परिवारों का सम्मान करते हुए कहा कि गाजीपुर की धरती ने देश को असंख्य वीर सपूत दिए हैं। गहमर गांव देश का सबसे बड़ा सैनिक ग्राम है यह इस जनपद का गौरव है। डबल इंजन सरकार ने जो कहा है, वही किया है- सीएम योगी सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने जो कहा है, वही किया है और जो कहा है, उतना ही बोला है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा के प्रसार, धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और गाजीपुर को पर्यटन व अध्यात्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं। संतों की साधना भूमि पर विकास कार्यों का उद्देश्य केवल भौतिक नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान भी है। सीएम योगी ने कहा कि सरकार की नीति ‘परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम्’ के सूत्र पर आधारित है। सज्जनों का संरक्षण और दुष्ट प्रवृत्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस ही सरकार का धर्म है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत तभी सशक्त बनेगा, जब हर नागरिक अपनी आध्यात्मिक चेतना को जागृत रखे और भौतिक प्रगति को उसी आधार पर जोड़े। उन्होंने कहा कि आस्था और विकास का संगम ही नया भारत बनाएगा। हमारी परंपरा हमें केवल भक्ति नहीं, बल्कि कर्म और राष्ट्रधर्म की शिक्षा देती है। सीएम योगी परमपूज्य ब्रह्मलीन श्री महंथ रामाश्रय दास जी की प्रतिमा का किया अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद गाजीपुर के श्री मंहत रामाश्रय दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भुड़कुड़ा में पहुँचकर परमपूज्य ब्रह्मलीन श्री महंथ रामाश्रय दास जी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया और विद्यार्थियों से राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

मिशन शक्ति 5.0 : शक्ति संवाद कार्यक्रम से बालिकाओं और महिलाओं की आवाज़ को मंच दे रही योगी सरकार

 संवाद के माध्यम से विभिन्न योजनाओं की लाभार्थी महिलाओं और बालिकाओं ने रखी अपनी बातें  विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से 14.70 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा मिशन शक्ति का संदेश लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत शनिवार को पूरे प्रदेश में एक विशेष पहल “शक्ति संवाद – बालिकाओं और महिलाओं की आवाज़ को मंच” के रूप में आयोजित की गई। यह कार्यक्रम अन्तर्राष्ट्रीय बालिका सप्ताह की थीम पर आधारित रहा। सप्ताह के समापन के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर में 2,000 से अधिक लाभार्थियों से सीधा संवाद किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से योगी सरकार यह साबित करने में कामयाब रही कि यदि शासन और समाज एक साथ काम करें, तो हर महिला और बालिका के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। मिशन शक्ति की इस नई पहल ने उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। महिला एंव बाल विकास विभाग ने महिलाओं और बालिकाओं की वास्तविक जरूरतें, चुनौतियां और अनुभव सीधे प्रशासन तक पहुंचाने और शासन योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ उपलब्ध कराने के लिए इस कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में आयोजित किया। इस मौके पर जनपदों में जिलाधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि स्वयं लाभार्थियों से जुड़े। संवाद श्रृंखला में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य), पति की मृत्यु उपरांत महिला पेंशन योजना सहित कई प्रमुख योजनाओं की लाभार्थी महिलाओं और बालिकाओं ने अपनी बातें रखीं। बालिकाओं ने बताया कि योजनाओं के माध्यम से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी विकसित हुई। वहीं अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि लाभार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान “शक्ति संवाद” ने शासन और समाज के बीच एक मजबूत साझेदारी के पुल के रूप में काम किया। लाभार्थियों ने कहा कि मिशन शक्ति के अंतर्गत मिले अवसरों ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अब वे स्वयं और अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जोहरी ने कहा कि शक्ति संवाद केवल योजनाओं की जानकारी या समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह उन बालिकाओं और महिलाओं की आवाज़ को सम्मान देने का प्रयास है, जो चुनौतियों के बावजूद आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर हैं। मिशन शक्ति के अंतर्गत हमारी प्राथमिकता है कि हर लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ-साथ उनकी समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।” 14.70 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा मिशन शक्ति का संदेश विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 22 सितम्बर से 11 अक्टूबर 2025 के बीच मिशन शक्ति के पांचवें चरण में कुल 14.70 लाख से अधिक लोगों को जागरूक किया गया, जिसमें महिलाएं, पुरुष, बालक और बालिकाएं सभी शामिल रहे। इस दौरान विभिन्न जनपदों में शक्ति संवाद, कार्यशालाएं, संवाद श्रृंखलाएं और जागरूकता अभियान के माध्यम से समाज में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का संदेश दिया गया।

मौलाना तौकीर रजा का 1997 का लोन अब होगा वसूला, बरेली हिंसा के बीच जांच जारी

बदायूं  बरेली हिंसा के आरोपी मौलाना तौकीर रजा को लेकर एक और मामला सामने आया है. ये मामला करीब 30 साल पुराने कर्ज का है. यूपी के बदायूं जिले की एक सहकारी समिति ने दावा किया है कि मौलाना रजा ने साल 1997 से पहले खाद खरीदने के लिए लोन लिया था, जिसकी रकम अब ब्याज समेत बढ़कर 28 हजार रुपये हो गई है. मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बकाया वसूली की तैयारी शुरू कर दी है. एजेंसी के अनुसार, बरेली में 26 सितंबर को हुई हिंसा के बाद मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार कर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेजा गया था. अब बदायूं से उसके खिलाफ तीन दशक पुराना बकाया कर्ज निकलकर सामने आया है. बदायूं के रसूलपुर पुठी गांव स्थित साधन सहकारी समिति के सचिव हृदयेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति की बकायेदारों की सूची की समीक्षा के दौरान उन्हें ‘तौकीर रजा’ नाम मिला. जब उन्होंने और जांच की, तो पता चला कि यह वही मौलाना तौकीर रजा है, जो बरेली हिंसा के मामले में जेल में बंद है. हृदयेश सिंह ने बताया कि रजा ने 1997 से पहले खाद खरीदने के लिए समिति से 5,055 रुपये का कर्ज लिया था. उस समय कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन मौलाना ने कभी यह रकम वापस नहीं की. समय के साथ ब्याज बढ़ता गया, और अब यह रकम 28,346 रुपये हो चुकी है. तीन दशक पुरानी फाइल से निकला नाम हृदयेश सिंह कहते हैं कि जब हमने पुराने रिकॉर्ड खंगाले, तो इस नाम पर नजर पड़ी. जब ब्योरा देखा तो साफ हो गया कि यह वही तौकीर रजा है. गांव के लोग भी यह बात कन्फर्म कर चुके हैं कि तौकीर रजा पहले यहां रहता था, अब जमीन बेचकर कहीं और चला गया. समिति ने अब पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी है. बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश राय ने कहा कि उन्हें यह रिपोर्ट मिली है. सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार मुन्‍नालाल मिश्रा ने बताया कि रजा को जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा और बकाया वसूली की कार्रवाई की जाएगी. मौलाना रजा और बरेली हिंसा बीते 26 सितंबर को बरेली में उस समय तनाव फैल गया था, जब पोस्टर मामले में दर्ज एफआईआर के विरोध में लोग प्रदर्शन करने लगे थे. शुक्रवार की नमाज के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें कई लोग घायल हो गए. पुलिस ने अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें 125 नामजद और 3,000 से अधिक अज्ञात आरोपी शामिल हैं. इस हिंसा के सिलसिले में मौलाना तौकीर रजा सहित 88 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. डीएम अवनीश राय ने कहा कि अगर कोई सरकारी बकाया है तो उसकी वसूली नियमों के अनुसार होगी. यह व्यक्ति चाहे कोई भी क्यों न हो. दूसरी तरफ, सहकारी समिति के अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने केवल पुरानी देनदारी का हिसाब निकाला है, और किसी तरह की राजनीतिक मंशा इसमें शामिल नहीं है.