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प्रगतिशील किसान खानेंद्र कुमेटी की प्रेरणादायक कहानी

प्रगतिशील किसान खानेंद्र कुमेटी की प्रेरणादायक कहानी   फसल उत्पादन में नैनो डीएपी एवं यूरिया के उपयोग से जमीन की बनी रहेगी उर्वरकता  रायपुर  नारायणपुर के ग्राम केरलापाल के निवासी खानेंद्र कुमेटी एक मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं। उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। कुछ वर्ष पहले तक वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें बहुत कम लाभ मिलता था। खेती की लागत बढ़ रही थी और उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो रहा था। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं हो पा रही थी। खानेंद्र कुमेटी ने हार मानने के बजाय नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उन्नत बीजों का उपयोग शुरू किया, खेतों में जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाया तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। फसल विविधीकरण के कारण उनकी आय के स्रोत बढ़ गए। उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई, जिससे पानी की बचत हुई और पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी मिलता रहा। इसके अतिरिक्त वे समय-समय पर मिट्टी परीक्षण भी करवाते हैं, जिससे फसल के अनुसार उचित उर्वरकों का चयन कर पाते हैं। खानेंद्र कुमेटी की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए। वे अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा करते हैं तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी पहल से गांव में कृषि के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और कई किसानों की आय में वृद्धि हुई है। आज खानेंद्र कुमेटी न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। उनका मानना है कि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और नवाचार ने उन्हें ग्राम केरलापाल के एक सम्मानित प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान दिलाई है। खानेंद्र कुमेटी की कहानी हमें यह संदेश देती है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और नई तकनीकों को अपनाने का साहस किसी भी किसान को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के लिए सबसे अच्छी नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की उपयोग से जमीन की उर्वरकता नष्ट नहीं होती और फसल को उत्पादन में सहायक होती है, कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी फसलों का भी उत्पादन करते हैं।

नैनो तकनीक से जिले के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: खेतों में नैनो यूरिया और डीएपी का सफल प्रयोग

नैनो तकनीक से जिले के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: खेतों में नैनो यूरिया और डीएपी का सफल प्रयोग प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता बने रोल मॉडल, कम लागत में बेहतर उत्पादन का दिया संदेश रायपुर सरगुजा जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खेती की लागत कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने तथा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किसान अब वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। इसी क्रम में अंबिकापुर के देवीगंज रोड निवासी एवं ग्राम बरकेला के प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता ने पिछले वर्ष अपने कृषि रकबे में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गुप्ता ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक दानेदार यूरिया एवं डीएपी का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से धान की फसल अधिक स्वस्थ, हरी-भरी तथा सुदृढ़ दिखाई दे रही है। फसल की वृद्धि बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन एवं भंडारण संबंधी समस्याओं में कमी आई है। पहले 65 एकड़ क्षेत्र के लिए बड़ी मात्रा में खाद की बोरियों को ट्रैक्टरों से लाना पड़ता था, जिससे परिवहन, मजदूरी एवं भंडारण पर अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की छोटी बोतलें आसानी से खेत तक पहुंचाई जा सकती हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है। गुप्ता के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में भी कमी आई है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी किफायती हैं, जिसके कारण उर्वरक पर होने वाला खर्च कम हुआ है तथा प्रति एकड़ शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना बढ़ी हुई है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा बहाव अथवा अन्य कारणों से नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो उर्वरकों का फसलों पर सीधे छिड़काव किया जाता है। इससे पौधों की पत्तियां पोषक तत्वों को शीघ्र अवशोषित कर लेती हैं और उर्वरक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप फसल को सीधे लाभ मिलता है तथा पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। किसानों से की आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित शंकर लाल गुप्ता ने क्षेत्र के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग न केवल किफायती है, बल्कि इसके परिवहन, भंडारण एवं उपयोग में भी सुविधा है। इससे खेती की लागत कम होती है और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है। मिट्टी एवं पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक नैनो उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह तकनीक उर्वरकों के अधिक दक्ष उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है। शंकर लाल गुप्ता के सफल अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान आधुनिक एवं स्मार्ट कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

पदमनी और मधु को मिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का संबल

महासमुंद/रायपुर. ’मां की मुस्कान, बच्चे का उज्ज्वल भविष्य: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना बनी भरोसे की साथी’मातृत्व का सफर हर महिला के लिए भावनाओं, जिम्मेदारियों और नए सपनों से भरा होता है। इस महत्वपूर्ण दौर में यदि समय पर सहयोग और सुरक्षा का साथ मिल जाए, तो यह अनुभव और भी सुखद बन जाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ऐसी ही एक संवेदनशील पहल है, जो गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित कर रही है। महासमुंद जिला के महासमुन्द नगर के वार्ड क्रमांक 11 निवासी पदमनी यादव के जीवन में यह योजना नई उम्मीद लेकर आई। गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर सुपरवाइजर शीला प्रधान ने उन्हें योजना की जानकारी दी। पंजीयन के बाद प्रथम संतान के जन्म पर उन्हें 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि से उन्होंने पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य परीक्षण तथा शिशु की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। पदमनी बताती हैं कि इस सहयोग ने उन्हें मातृत्व के दौरान आर्थिक चिंताओं से राहत दी और बच्चे की बेहतर परवरिश का आत्मविश्वास प्रदान किया। इसी तरह वार्ड क्रमांक 11 की मधु यादव को भी योजना से महत्वपूर्ण सहायता मिली। पहले बच्चे के जन्म पर 5 हजार रुपये तथा बेटी के जन्म के बाद 6 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होने से उन्हें मातृत्व संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिली। मधु कहती हैं कि योजना से मिले सहयोग ने उनके परिवार को संबल दिया और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने का अवसर प्रदान किया। आज दोनों माताएं अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर रही हैं और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं। उनका कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मातृत्व के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच और महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है। महासमुंद शहरी क्षेत्र में अब तक 321 हितग्राही महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि जिले में 27 हजार से अधिक महिलाएं इससे लाभान्वित हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवारों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है। योजना से लाभान्वित पदमनी और मधु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके जीवन में खुशियों और आत्मविश्वास की नई रोशनी लेकर आई है।

होमस्टे कारोबार को मिलेगा बढ़ावा, बैठक में ऋण सुविधा और पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा

रायपुर. छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के अंतर्गत नए हितग्राहियों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पर्यटन सूचना केंद्र जगदलपुर द्वारा जिला पंचायत बस्तर के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में इच्छुक हितग्राहियों ने भाग लिया। ’छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत आयोजित बैठक में हितग्राहियों को व्यवसाय संचालन, ऋण सुविधा एवं पर्यटन संभावनाओं की जानकारी’ दी गई। ’लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन करना’ इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नए हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय की बारीकियों से परिचित कराना, उन्हें पर्यटन आधारित स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना तथा छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति जागरूक करना था। इस सराहनीय पहल से बस्तर में सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होने की प्रबल उम्मीद है। ’पर्यटन स्थलों के विकास पर चर्चा’ बैठक के दौरान उपस्थित हितग्राहियों से उनके प्रस्तावित होमस्टे के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। अधिकारियों ने विशेष रूप से जाना कि हितग्राही किस स्थान पर होमस्टे स्थापित करना चाहते हैं और उस क्षेत्र के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल या आकर्षण मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध क्षेत्रों में होमस्टे विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ’सफल संचालन एवं नीतिगत नियमों की जानकारी’ इस अवसर पर हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय के सफल संचालन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्हें मुख्य मुख्य विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। अतिथि सत्कार के लिए पर्यटकों का स्वागत और आतिथ्य प्रबंधन, स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन, सुविधाएं व मार्केटिंग के रूप में पर्यटकों को दी जाने वाली आवश्यक सुविधाएं और डिजिटल प्रचार-प्रसार के तरीके, छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रावधान, पात्रता शर्तें एवं आवेदन की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। ’ऋण सुविधा एवं बैंकिंग सहयोग’ बैठक में उपस्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अधिकारियों ने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की जानकारी दी। उन्होंने हितग्राहियों को ऋण सुविधा, ब्याज अनुदान  तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया और आश्वस्त किया कि शासन की सहायता तथा बैंकिंग सहयोग से इच्छुक हितग्राही अपने होमस्टे व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकते हैं। ’बस्तर में सामुदायिक पर्यटन की अपार संभावनाएं’ कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित जिला पंचायत बस्तर के सहायक परियोजना अधिकारी तपन डे ने हितग्राहियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं पर्यटन स्थलों की विविधता होमस्टे व्यवसाय के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है। उन्होंने सभी हितग्राहियों को पर्यटकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने और उन्हें एक बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।

सुशासन तिहार शिविर में मुख्यमंत्री साय ने खोला विकास का पिटारा, कोंडागांव को मिले 152 करोड़

कोंडागांव. बड़े कनेरा में आयोजित समाधान शिविर केवल शिकायतों का मंच नहीं बल्कि विकास का रोडमैप बन गया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिविर में ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद लोगों की भागीदारी सरकार पर विश्वास दिखाती है. सुशासन तिहार के जरिए गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन और सूर्य घर योजना की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में रोजाना लगभग 1600 आवास बन रहे हैं. कार्यक्रम में 152 करोड़ 18 लाख रुपये के 43 विकास कार्यों की सौगात दी गई. इनमें 14 कार्यों का लोकार्पण और 29 नए कार्यों का भूमिपूजन शामिल है. सड़क, पर्यटन और भवन निर्माण से जुड़े कई नए प्रोजेक्ट घोषित किए गए. क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा हुई. विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर हितग्राहियों से फीडबैक लिया गया. शिविर ने प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत किया.

मधुमक्खियों के जानलेवा हमले से दहला धमतरी, सास ने गंवाई जान, दामाद घायल

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आया है, जहां सास और दामाद पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस हमले में सास की मौत हो गई और दामाद घायल हो गया है। यह घटना दुगली थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, पाल गांव में रहने वाली रामवती आज अपने दामाद के साथ सराई बिनने के लिए जंगल की ओर गई थी। इसी दौरान दोनों पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। घटना के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां रामवती की मौत हो गई और उसका दामाद घायल बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले ही स्टील सिटी दुर्ग भिलाई के एक सब्जी फार्म हाउस में मधुमक्खियों ने हमला कर दिया. इस हमले में 60 साल के एक मजदूर की जान चली गई. घटना मंगलवार की है, जब अचानक छत्ता गिरने से भड़की मधुमक्खियों ने खेत में काम कर रहे मजदूरों पर हमला कर दिया. मृतक की पहचान रमेश भोई के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे. फार्म हाउस में काम कर रहे मजदूरों के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे तेज हवा चल रही थी. इसी दौरान पेड़ पर लगा मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता अचानक टूटकर नीचे गिर गया. छत्ता गिरते ही मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और आसपास काम कर रहे मजदूरों पर झुंड बनाकर हमला कर दिया.स्थिति बिगड़ते देख अन्य मजदूर मौके से भागने में सफल रहे. रमेश भोई शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण तेजी से भाग नहीं सके और मधुमक्खियों के हमले का शिकार हो गए. देखते ही देखते वे गंभीर रूप से घायल हो गए.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: सहायता राशि से आसान हुई खेती

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: सहायता राशि से आसान हुई खेती करूहानार के चुन्नूलाल साहू को बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में मिल रही मदद  रायपुर   प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मुंगेली जिले के किसानों के लिए सहारा बन रही है। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को खेती-किसानी में बड़ी राहत प्रदान कर रही है। लोरमी विकासखंड के ग्राम करूहानार निवासी किसान चुन्नूलाल साहू ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली 06 हजार रुपये की सहायता राशि खेती-किसानी के कार्यों में काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस राशि से बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में जरूरी खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हुआ है।       किसान श्री साहू ने बताया कि उन्हें अब तक योजना की 22 किश्तों का लाभ प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही यह योजना किसानों के लिए संबल बन गई है। समय पर मिलने वाली राशि से खेती की तैयारी में सुविधा होती है और कृषि कार्यों में आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

नैनो उर्वरकों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा-कृषक छेदीलाल

नैनो उर्वरकों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा-कृषक छेदीलाल मुख्यमंत्री के सुशासन में किसानों को समय पर मिल रही कृषि आदान सामग्री रायपुर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है। ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है।            मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं। आधुनिक खेती से समृद्ध हो रहे कृषक छेदीलाल           पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे। नैनो उर्वरकों के चमत्कारी परिणाम            कृषक उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है। मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार           उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

रामाराम जलाशय योजना के जीर्णाेद्धार के लिए 1.16 करोड़ रुपये स्वीकृत

रामाराम जलाशय योजना के जीर्णाेद्धार के लिए 1.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किसानों को 69 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेगी सिंचाई की सुविधा रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा सुकमा जिले के विकासखण्ड सुकमा के अंतर्गत रामाराम जलाशय योजना के जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 1 करोड़ 16 लाख 6 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल सुकमा क्षेत्र में कृषि विकास को गति देने और स्थानीय किसानों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। योजना के मुख्य लाभ एवं क्रियान्वयन           इस योजना के प्रस्तावित कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर क्षेत्र के स्थानीय किसानों को 69 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। जल संसाधन विभाग द्वारा इस योजना के कार्यों को समय पर और गुणवत्तापूर्वक संपन्न कराने के लिए मुख्य अभियंता, गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग (जगदलपुर) को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है।  योजना के पूर्ण होने के बाद, रूपांकित सिंचाई क्षमता में आ रही कमी पूरी होगी और पूरे क्षेत्र को पर्याप्त सिंचाई का लाभ मिलेगा।

किसानों के लिए राहत की खबर, समितियों और निजी विक्रेताओं के पास खाद का पर्याप्त भंडार

समितियों और निजी विक्रेताओं के पास खाद का पर्याप्त भंडार, किसानों को निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कलेक्टर रोज कर रहे समीक्षा, 114 सहकारी समितियों सहित निजी दुकानों से हो रहा खाद का उठाव रायपुर खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है।      उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।       कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।