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दिल्ली में ट्रैफिक पाबंदियों के बीच राहत, छात्रों के लिए 1 घंटे पहले शुरू होगी मेट्रो

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर जबरदस्त तैयारी की गई है। ऐसे में दिल्ली के कई रूट पर ट्रैफिक पाबंदियों के बीच छात्रों और आम लोगों की असुविधा न हो, इसके दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बड़ा फैसला लिया है। डीएमआरसी ने कहा कि मेट्रो सेवाएं रविवार 13 सितंबर को सुबह 6 बजे से शुरू हो जाएंगी। डीएमआरसी ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए बताया कि परीक्षा देने जा रहे छात्रों और आम जनता की सुचारू और समय पर आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण ट्रैफिक पाबंदियों के बीच, रविवार 13 सितंबर को सभी लाइनों पर मेट्रो ट्रेन सेवाएं सुबह 06:00 बजे से शुरू होंगी। डीएमआरसी ने क्यों लिया ये फैसला डीएमआरसी ने इस फैसले को लेकर कहा कि छात्रों और यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं। आम तौर पर दिल्ली के कई रूट जिनमें पिंक, मजेंटा और ग्रे लाइन पर रविवार को मेट्रो सेवाएं सुबह सात बजे शुरू होती हैं। हालांकि, इस रविवार मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शुरू होंगी। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस बार नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इसे लेकर दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कई प्रमुख स्थान अगले तीन दिन तक बंद रहेंगे, जिनमें राष्ट्रपति भवन म्यूजियम और अमृत उद्यान भी शामिल हैं। राष्ट्रपति भवन म्यूजियम और अमृत उद्यान रहेंगे बंद अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति भवन म्यूजियम और अमृत उद्यान को शुक्रवार से रविवार तक विजिटर्स के लिए बंद रखा गया है। एक अधिकारी ने बयान में कहा कि शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में 'चेंज ऑफ गार्ड' सेरेमनी भी नहीं होगी। यह कदम ब्रिक्स प्रतिनिधियों को होने वाली परेशानी को कम करने और शिखर सम्मेलन स्थल के आसपास आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाकर सड़कों पर भीड़ कम करने की कोशिश का हिस्सा है। स्कूल, ऑफिस रहेंगे बंद, जानें ट्रैफिक एडवाइजरी दिल्ली सरकार ने पहले ही 11 सितंबर को अपने कार्यालयों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने भी उस दिन केंद्र सरकार के कार्यालयों में छुट्टी की घोषणा करते हुए एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की। इसमें बताया गया कि शिखर सम्मेलन के चलते दिल्ली के मुख्य रास्तों पर दोपहर 2 बजे से रात 8.30 बजे तक ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा और आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। ब्रिक्स समिट, मेट्रो के इस्तेमाल की सलाह पुलिस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, खासकर मेट्रो का इस्तेमाल करें। तय डायवर्जन रूट और ट्रैफिक कर्मियों के निर्देशों का पालन करें। पुलिस ने कहा कि इमरजेंसी और जरूरी सेवाओं वाली गाड़ियों को निकलने में प्राथमिकता दी जाएगी। राजधानी में होने वाले ब्रिक्स समिट को लेकर फैली अटकलों के बीच दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जारी की है। डीएमआरसी ने साफ किया है कि मेट्रो सेवा सामान्य रूप से जारी रहेगी। डीएमआरसी ने की है खास तैयारी डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि सेवा से जुड़ी जानकारी यात्रियों को सूचित की जाती है कि अगले आदेश तक सभी मेट्रो स्टेशन खुले रहेंगे। जब तक कोई विशेष घोषणा न की जाए, तब तक कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे आगे की जानकारी के लिए डीएमआरसी की वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या 'दिल्ली मेट्रो सारथी' ऐप देखते रहें। यह जानकारी इस मामले पर कई सवाल मिलने के बाद जारी की जा रही है। क्या बंद रहेंगे मेट्रो स्टेशन? जानिए अपडेट दरअसल, ब्रिक्स समिट के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक पाबंदियों को लेकर लोगों में भ्रम था कि क्या मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे? इसे लेकर डीएमआरसी को यह स्पष्टीकरण देना पड़ा। इससे पहले डीएमआरसी ने एक अन्य एडवाइजरी में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर स्थित दिल्ली मेट्रो म्यूजियम ब्रिक्स समिट के दौरान बंद रहेगा। डीएमआरसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर स्थित दिल्ली मेट्रो म्यूजियम 11 से 13 सितंबर, 2026 (शुक्रवार से रविवार) तक बंद रहेगा। हम 15 सितंबर, 2026 (मंगलवार) को आप सभी का स्वागत करने के लिए वापस आएंगे, क्योंकि 14 सितंबर (सोमवार) को म्यूजियम की साप्ताहिक छुट्टी होती है। ब्रिक्स समिट को लेकर लिए गए कई अहम फैसले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी ब्रिक्स समिट को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने जनता को अदालतों में कामकाज और मामलों की तारीखों में बदलाव के बारे में जानकारी दी है, खासकर भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट स्थल के पास स्थित अदालतों के लिए। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर को होने वाली नेशनल लोक अदालत अब 10 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। निचली अदालतों में 11 और 12 सितंबर को छुट्टी रहेगी, इसलिए इन दो तारीखों पर सूचीबद्ध मामले अब 14 सितंबर को सुने जाएंगे।

दिल्ली में वोटर लिस्ट सुधार की कवायद तेज, 9 सितंबर तक 2.12 लाख लोगों ने Form-6 से किया दावा

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए क्लेम और ऑब्जेक्शन की प्रक्रिया जारी है। ड्राफ्ट रोल में नाम न आने के बाद लोग फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। सभी 13 जिलों में 9 सितंबर तक 2,12,400 फॉर्म-6 के आवेदन दाखिल मिनट पते हुए है। जबकि ड्राफ्ट रोल में करीब 43 लाख लोगों के नाम अबसेंट, शिफ्टेड, डेड, डप्लीकेट (ASDD) लिस्ट में शामिल किए गए हैं। उसके अनुपात में यह आंकड़ा अभी काफी कम है। हालांकि, 30 सितंबर तक आवेदन का वक्त है और उम्मीद की जा रही है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। 35,495 और नए आवेदन प्राप्त हुए 31 अगस्त से 9 सितंबर की अवधि के दौरान 35,495 और नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। नए आवेदनों के मामले में वेस्ट दिल्ली जिला सबसे आगे रहा, जहां इस अवधि में 4,387 आवेदन मिले। इसके बाद नॉर्थ वेस्ट में 3,586, ईस्ट में 3,583, साउथ ईस्ट में 3,400 और नॉर्थ ईस्ट में 3,150 आवेदन दर्ज किए गए। साउथ वेस्ट में 3,025, साउथ में 3,030, नॉर्थ में 2,604, सेंट्रल नॉर्थ में 2,488, आउटर नॉर्थ में 2,433, ओल्ड दिल्ली में 1,529, सेंट्रल में 1,518 और नई दिल्ली जिले में 762 नए आवेदन फॉर्म-6 के तहत प्राप्त हुए। 30 अगस्त तक 1,351 आवेदन मिले थे प्रवासी या ओवरसीज भारतीय वोटर्स के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6A के तहत 30 अगस्त तक 1,351 आवेदन मिले थे, जबकि 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच 83 अतिरिक्त आवेदन दर्ज हुए। वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर ऑब्जेक्शन दर्ज कराने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-7 की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। 30 अगस्त तक जहां 51,471 फॉर्म-7 प्राप्त हुए थे, वहीं 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच 374 नए आवेदन मिले। वोटर लिस्ट में एड्रेस के बदलाव, सुधार या नया फोटो पहचान पत्र (EPIC) जारी करने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-8 के आवेदनों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। 30 अगस्त तक दिल्ली भर में 2.60,768 फॉर्म 8 प्राप्त हुए थे, जबकि 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच 14,538 नए फॉर्म-8 मिले हैं। 29 अक्टूबर तक सभी भेजे गए क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा किया जाएगा।

BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली हाई अलर्ट, 500 CCTV से निगरानी; VVIP मूवमेंट पर ट्रैफिक डायवर्जन

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों और अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ब्रिक्स को लेकर दिल्ली में पहरा दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली बंद नहीं होगी लेकिन वीवीआईपी के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक को रोका जा सकता है। कुछ जगहों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। VVIP मूवमेंट को लेकर खास तैयारी अधिकारियों के अनुसार जहां सुरक्षा व्यवस्था अनुमति देगी, वहां यातायात सामान्य रूप से जारी रहेगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के काफिले के गुजरने के दौरान आम वाहनों पर लगने वाली रोक की कोई निश्चित अवधि नहीं होगी। सुरक्षा स्थिति और परिस्थितियों के आधार पर वाहनों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि व्यवस्था इस तरह की गई है कि विदेशी मेहमानों की कड़ी से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था हो और आम जनता को कम से कम परेशानी हो। ट्रैफिक एडवाइजरी देखकर ही घर से निकलें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने इसे ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं कि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो। यातायात व्यवस्था को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी की जा चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन में भाग के लिए शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंच गए। वहीं चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की है। यह सात साल के अंतराल के बाद भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली में सम्मेलन में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, अबू धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख आदि शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने आवाजाही के लिए चिह्नित मार्गों का व्यापक निरीक्षण किया है। कई सरकारी एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ समन्वय संबंधी बैठकें भी की गई हैं। सुरक्षा ऐसी, परिंदा भी न मार सके पर सुरक्षा व्यवस्था हवाई अड्डे, विदेशी नेताओं को ठहराए जाने वाले होटलों, भारत मंडपम और उन अन्य स्थानों तक रहेगी जहां ये विदेशी मेहमान जाएंगे। नई दिल्ली इलाके में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के अलावा चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सम्मेलन स्थल और विदेशी मेहमानों को ठहराए जाने वाले होटलों में प्रवेश नियंत्रण, पहचान सत्यापन, खुफिया जानकारी जुटाने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इन रास्तों से बचकर यातायात पुलिस के अनुसार शिखर सम्मेलन के दौरान 35 से अधिक सड़कें प्रभावित हो सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोका रोड ,बाराखंभा रोड ,टॉल्स्टॉय मार्ग ,अफ्रीका एवेन्यू रोड, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड शामिल हैं। साकेत स्थित होटल से मध्य दिल्ली के बीच मिस्र के प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही के कारण दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर खासकर व्यस्त समय में यातायात का दबाव और बढ़ सकता है। हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट को लेकर बड़ी तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन के बड़े स्तर को देखते हुए हर दिन कई बार ‘हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट’ होंगे। किसी विदेशी नेता को हवाई अड्डे से होटल, होटल से सम्मेलन स्थल और वहां से द्विपक्षीय बैठकों या अन्य कार्यक्रमों में ले जाने के दौरान एक दिन में पूरे शहर में करीब 70-80 या उससे अधिक ‘हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट’ हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हर वीवीआईपी अवागमन के लिए अलग से यातायात नियंत्रण, रास्तों पर प्रवेश प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन में समन्वय करना पड़ता है और इसी वजह से आम लोगों और यात्रियों पर इसका असर सामान्य वीआईपी दौरे की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।

एंटी-एयरक्राफ्ट गन एक्टिव BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली छावनी में तब्दील, इमारतों पर स्नाइपर और आसमान में एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात

नई दिल्ली ब्रिक्स समिट के दौरान दिल्ली और मेहमानों की सुरक्षा में एंटी-ड्रोन सिस्टम, एंटी-एयरक्राफ्ट गन, स्नाइपर और एंटी-सबोटाज टीमें लगाई गई हैं. अगले तीन से चार दिनों तक नई दिल्ली में ऊंची ऊंची बिल्डिगों पर अगर बंदूकधारी कमांडो दिख जाएं तो चौकिए नहीं. यही नहीं आपको एंटी ड्रोन सिस्टम, एंटी एयरक्राफ्ट गन भी दिख सकता है।  दिल्ली में 11 से लेकर 13 दिसंबर तक 35 रूट और 11 होटल सुरक्षा घेरे में रहेंगे. भारत मंडपम और प्रतिनिधियों के ठहरने वाले होटलों पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी ग्रिड लगाया गया है।  ब्रिक्स समिट का मुख्य कार्यक्रम भारत मंडपम में होगा. डीसीपी नई दिल्ली सचिन शर्मा बताया कि दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सिक्योरिटी में लगाए गए हैं. 100 से ज्यादा NSG कमांडो और एंटी-ड्रोन सिस्टम एक्टिवेट किए गए हैं।  दिल्ली में एंटी-एयरक्राफ्ट गन, स्नाइपर और एंटी-सबोटाज टीमें एक्टिवेट कर दी गई हैं। करीब 30 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिनमें DCP स्तर के अधिकारी शामिल हैं, सुरक्षा की निगरानी करेंगे।  1000 से ज्यादा दिल्ली पुलिस SWAT कमांडो भी तैनात किए गए हैं. शनिवार से कई सड़कों पर ट्रैफिक प्रतिबंध, 22 रूट पर पुलिस की विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है।  एयरपोर्ट से होटल तक कड़ी निगरानी विदेशी मेहमानों के एयरपोर्ट पहुंचने से लेकर उनके होटल और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के दौरान सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाएगा. भारत मंडपम और प्रमुख होटलों में एंट्री-एग्जिट की जांच, निगरानी, सर्विलांस और वेरिफिकेशन की व्यवस्था की गई है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को भी तैयार रखा गया है।  दिल्ली पुलिस ने आसपास के राज्यों के साथ भी सुरक्षा को लेकर समन्वय किया है, ताकि दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों और लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।  ड्रोन उड़ाने पर रोक समिट के दौरान सुरक्षा के लिहाज से तय इलाकों में ड्रोन या किसी भी तरह के अनधिकृत फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को उड़ाने की अनुमति नहीं होगी. पुलिस ऐसे इलाकों में आसमान से होने वाली गतिविधियों पर भी नजर रखेगी।  कंट्रोल रूम से होगी निगरानी  वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान कमांड और कंट्रोल रूम से पूरे सुरक्षा इंतजाम की निगरानी की जाएगी. कैमरों और दूसरे निगरानी सिस्टम के जरिए रास्तों पर नजर रखी जाएगी. किसी जगह इमरजेंसी, एंबुलेंस की जरूरत या अचानक ट्रैफिक समस्या होने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।  पुलिस ने साफ किया है कि सभी रास्ते लगातार बंद नहीं रहेंगे. प्रतिबंध वीवीआईपी मूवमेंट के समय और जरूरत के मुताबिक ही लगाए जाएंगे. आम लोगों से अपील की गई है कि वे प्रभावित रास्तों से बचें और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें।  VVIP काफिलों की आवाजाही के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट और 35 से ज्यादा प्रमुख सड़कों को चिन्हित किया गया है।  भारत मंडपम के 5 किलोमीटर के दायरे में मल्टी-लेयर सिक्योरिटी रहेगी.  * दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती * NSG कमांडो और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट * IB, SPG, NSG और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात * करीब 7 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती BRICS सम्मेलन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती होगी VVIP काफिलों की आवाजाही और आम ट्रैफिक के बीच तालमेल. इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने करीब 35 प्रमुख सड़कों पर जरूरत के मुताबिक ट्रैफिक रोकने और डायवर्जन का प्लान तैयार किया है।  इन रास्तों पर दिखेगा ट्रैफिक का असर सरदार पटेल मार्ग मदर टेरेसा क्रिसेंट तीन मूर्ति मार्ग अकबर रोड तेज जनवरी मार्ग राजेश पायलट मार्ग सुब्रमण्यम भारती मार्ग मथुरा रोड मोतीलाल नेहरू मार्ग डॉ. जाकिर हुसैन रोड जनपथ अशोका रोड बाराखंभा रोड टॉल्स्टॉय मार्ग नीति मार्ग एपीजे अब्दुल कलाम रोड प्रेस एन्क्लेव रोड लाल बहादुर शास्त्री मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कें.  VVIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया जाएगा. इसके लिए 22 प्रमुख डायवर्जन पॉइंट चिन्हित किए गए हैं। इनमें पटेल चौक, RML अस्पताल राउंडअबाउट, धौला कुआं, मोती बाग फ्लाईओवर, नीला गुंबद, ओबेरॉय फ्लाईओवर और मंडी हाउस जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।  मथुरा रोड और भारत मंडपम की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए लोधी रोड और लोधी फ्लाईओवर जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं धौला कुआं और सरदार पटेल मार्ग की तरफ VVIP मूवमेंट के दौरान रिंग रोड, वंदे मातरम मार्ग और NH-48 जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकेग।  BRICS सम्मेलन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए करीब 5000 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी है. ये पुलिसकर्मी सिर्फ ट्रैफिक डायवर्जन नहीं संभालेंगे. बल्कि VVIP काफिलों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही भी सुनिश्चित करेंगे. इसके लिए इन चीजों की तैनाती की गई है।  * GPS आधारित ट्रैकिंग * CCTV सर्विलांस * टेक्निकल मॉनिटरिंग * रियल टाइम कम्युनिकेशन * क्विक रिस्पॉन्स टीम * मेडिकल और फायर रिस्पॉन्स VVIP काफिले में शामिल वाहनों की लोकेशन और मूवमेंट पर GPS के जरिए नजर रखी जाएगी. किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा अलर्ट की स्थिति में क्विक रिस्पॉन्स टीमें तत्काल कार्रवाई करेंगी. इसके साथ फायर सर्विस, एंबुलेंस और मेडिकल इमरजेंसी रिस्पॉन्स को भी अलर्ट मोड पर रखा जाएगा।  मेट्रो सेवा पर सामान्य तौर पर रोक नहीं दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि ट्रैफिक प्रतिबंधों का मतलब यह नहीं है कि सामान्य आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी. प्रभावित न होने वाले रास्तों पर सामान्य ट्रैफिक चलता रहेगा. मेट्रो सेवा पर भी सामान्य तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, हालांकि यात्रियों को संबंधित स्टेशनों और निकास की ताजा जानकारी पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। 

‘नॉन-वेज बंद नहीं करेंगे’, दुर्गा पूजा समितियों ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर जताई नाराजगी

 नई दिल्ली 'दुर्गा पूजा में नॉन-वेज़ खाना बंगाल का कल्चर है और बिन बंगाली कल्चर समझे इस पर टिप्पणी भी गलत है।' दिल्ली की दुर्गा पूजा समितियों का यही मानना है। दिल्ली में 350 से ज्यादा दुर्गा पूजा समितियां नवरात्र में पूजा का पंडाल सजाती हैं। इन समितियों का कहना है कि वो बिन सोचे-समझे की गई किसी टिप्पणी पर दुर्गा पूजा में नॉन-वेज खाना बंद नहीं करेंगे। दरअसल बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की उस टिप्पणी ने बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार से बचने और पूजा पंडालों के आसपास नॉन-वेज की बिक्री ना करने की अपील की। दिल्ली के 'मिनी बंगाल' और दुर्गा पूजा के हब चितरंजन पार्क की मेला ग्राउंड दुर्गा पूजा समिति के असिस्टेंट ट्रेजरर अधिक मित्रा ने कहा कि दुर्गा पूजा हमारे लिए वो पल है जब हम मां दुर्गा का उनके मायके में वापस आने पर स्वागत करते हैं। पांच दिन वो हमारे घर में रहती हैं और हम उनकी देखभाल एक प्यारी बेटी की तरह करते हैं। मां को भोग में खिचड़ी, लूची, पायेश,… चढ़ाया जाता है, जो सात्विक और शाकाहारी होता है। बाकी परिवार के लिए माछ-भात और मटन पकता है, वह खास बंगाली अस्मिता है। खुद भी आएं, दूसरों को भी लाएं दिल्ली की अरामबाग दुर्गा पूजा समिति के प्रेजिडेंट अभिजीत बोस ने कहा कि यह पूर-नस्ल वेज़ और नॉन-वेज़ के नाम पर माहौल खराब करने का है। धीरेंद्र शास्त्री का बयान बिल्कुल गलत है। उन्हें बंगालियों की दुर्गा पूजा के बारे में पता ही नहीं है। वह हमारी पूजा की तुलना नॉर्थ की नवरात्र की पूजा से कर रहे हैं, जबकि हमारी पूजा का नेचर ही अलग है। बंगाल में पूजा में बलि दी जाती है। दिल्ली में यह नहीं होता तो यहां हम मां को फल, सब्ज़ी यह सब बलि के रूप में देते हैं। ऊपर से भोग में प्याज़-लहसुन तक नहीं होता। पंडाल के बाहर ग्राउंड में हम नॉन-वेज़ स्टॉल लगाते हैं क्योंकि बंगाली नॉन-वेज खाते हैं। मंडप के बाहर होती व्यवस्था मिलनी कल्चरल एंड वेलफेयर समिति की दुर्गा पूजा के प्रेजिडेंट मृणाल बिश्वास ने कहा कि हमारी पूजा मंडप के अंदर वेज़ तक खाने की इजाज़त नहीं होती। मंडप के बाहर वेज़, नॉन वेज़ दोनों खाने की व्यवस्था होती है। मैं खुद वेज़ हूं मगर दुर्गा पूजा में नॉन-वेज़ ना मिले, यह तो थोपने वाली बात है। बंगाल में तो काली पूजा में मछली का भोग लगता है क्योंकि बंगाल की ज्योग्राफी में नदी है, तो मछली उनका खाना है। नई दिल्ली काली बाड़ी के प्रेजिडेंट डॉ सुब्रतो गांगुली ने कहा कि नॉन-वेज़ की बहस में दिल्ली की कोई भी पूजा समिति नहीं फंसेगी। बयान ही नासमझी का है। नॉर्थ-इंडिया के ट्रेडिशन को पूरे भारत में कैसे लागू किया जा सकता है?

‘कॉकरोच पार्टी’ टिप्पणी पर बैकफुट पर सौरव दास-रांका, ट्वीट हटाने को तैयार; कोर्ट ने दी नसीहत

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह संयोजक सौरव दास को अदालत ने गौरव भाटिया पर किए गए सभी पोस्ट को हटाने को कहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाटिया के मानहानि मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सीजेपी नेताओं को नसीहत के साथ एक मौका दिया और कहा कि वे खुद उन पोस्ट्स को हटा दें। अदालत ने कहा कि बिना किसी तथ्य को परखे इस तरह साझा करना ठीक नहीं है। अदालत के निर्देश के बाद सौरव दास ने भाटिया के खिलाफ एक और विवादित पोस्ट को डिलीट कर दिया है। सौरव दास ने एक फर्जी न्यूज कार्ड को शेयर किया था जिसमें गौरव भाटिया को गिरप्तार किए गए विवादित यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को दिमागी नक्सल कहते हुए दिखाया गया था। भाटिया ने इसे फर्जी करार देते हुए सौरव दास को पोस्ट डिलीट करने और माफी मांगने मांगने को कहा था। सौरव दास ने उस पोस्ट को डिलीट कर दिया, लेकिन माफी मांगने से इनकार करते हुए भाटिया की एक आपत्तिजनक तस्वीर शेयर कर दी थी। भाजपा नेता की ओर से किए गए 2 करोड़ के मानहानि मुकदमे पर जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कहा कि सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से गौरव भाटिया पर बिना जांच परखे किए गए पोस्ट गलत हैं। अदालत ने उन्हें खुद ही उन्हें हटाने का मौका दिया। वहीं, अभिजीत दीपके की ओर से कहा गया कि उन्होंने इस पर कुछ नहीं लिखा था, इसलिए उन्हें प्रतिवादियों में से हटा दिया जाए। 'पोस्ट हटाने पर विचार करें' सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने के अलग-अलग तरीके होते हैं. कोर्ट ने कहा कि दोनों युवा हैं और उनकी अपनी चिंताएं हो सकती हैं, लेकिन बिना सत्यापन किसी पर इस तरह हमला करना उचित नहीं है. कोर्ट ने कहा कि अगर वे अपनी ओर से पोस्ट हटाने को तैयार हैं तो अपना जवाब दाखिल करें।  सौरव दास के वकील ने बताया कि संबंधित पोस्ट पहले ही हटा दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा भी कुछ सामग्री पोस्ट की गई है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन कई बार बात को स्पष्ट और संयमित तरीके से रखना जरूरी होता है।  CJP के अभिजीत दीपके को लेकर सवाल सुनवाई की शुरुआत में कोर्ट ने कहा कि CJP के अभिजीत दीपके के खिलाफ कोई आरोप नहीं है. उनके वकील निखिल गांधी ने कहा कि दीपके की ओर से ऐसा कोई पोस्ट नहीं किया गया और उन्हें मामले से हटाया जाना चाहिए।  भाटिया की ओर से कहा गया कि मामला सिर्फ एक-दो पोस्ट तक सीमित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक पूरा तंत्र काम कर रहा है और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।  कोर्ट ने भाटिया से भी कहा कि विवाद को अदालत में लाने के बजाय दूसरे तरीके से सुलझाने की कोशिश की जा सकती थी. इस पर भाटिया ने कहा कि यह गंभीर मानहानि का मामला है और पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचने के कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा है।  कोर्ट ने दास और रांका के वकील से अपने मुवक्किलों से निर्देश लेकर आने को कहा. कोर्ट ने कहा, "आप युवा हैं, आपके सामने लंबा रास्ता है. अदालतों में समय क्यों बिताना चाहते हैं? अदालत ने और क्या समझाया अदालत ने मौखिक रूप से कहा, 'विरोध जताने के कई तरीके हैं। आप सभी युवा हैं। आपको बेचैनी हो सकती है। लेकिन इस तरह बिना पुष्टि के हमला करना ठीक नहीं है। यदि आप खुद इन्हें हटाना चाहते हैं तो अपना जवाब दीजिए। हम इसे हटाने का आदेश नहीं जारी करना चाहते हैं।' इस बीच सौरव दास के वकील ने कहा कि उन्होंने ट्वीट को पहले ही डिलीट कर दिया है। इस पर अदालत ने कहा, 'लेकिन आपने कुछ कुछ और भी डाला है। आपको अभिव्यक्ति का अधिकार है, लेकिन यह सही तरीके से हो। ताकि आपकी मंशा सही दिशा में रहे। हम समझते हैं, क्योंकि हम भी इस उम्र से गुजरे हैं।' अदालत ने भाटिया से क्या कहा अदालत ने भाटिया से कहा कि इस तरह के मुद्दों से निपटने के और भी तरीके हैं। उन्होंने कहा कि वह अदालत आने की बजाय प्रतिवादियों से बात कर सकते थे। हालांकि भाटिया ने कहा, 'यह गंभीर मानहानि का मामला है। ऐसे पोस्ट इंटरनेट पर नहीं हो सकते हैं, क्योंकि उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं। यह मेरी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। हमने उन्हें एक मौका दिया था।' अदालत ने सीजेपी नेताओं के वकीलों से कहा कि वह निर्देश प्राप्त करें और बताएं कि वे खुद हटाने को तैयार हैं या नहीं।

5 दशक पुरानी खतरनाक इमारत को मशीन से तोड़ना पड़ा भारी, 20 मजदूरों से शुरू हुई मैनुअल तोड़फोड़

नई दिल्ली  सत्य निकेतन में खतरनाक घोषित की गई बिल्डिंग की हालत देखकर MCD की टीम के होश उड़ गए। अधिकारियों को डर था कि तोड़ने के दौरान बिल्डिंग भरभराकर गिर सकती है और एक बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए कार्रवाई शुरू करने से पहले ग्राउंड फ्लोर और बराबर वाली बिल्डिंग को लोहे के मोटे गर्डर से सपोर्ट दिया गया है। इसके बाद ही टॉप फ्लोर से तोड़फोड़ शुरू की गई। इस दौरान सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया। MCD के सीनियर अधिकारी के मुताबिक, बुधवार को टीम ने कार्रवाई से पहले पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया। सत्य निकेतन की यह बिल्डिंग 5 दशक से ज्यादा पुरानी थी। बेसमेंट और 5 मंजिल की बिल्डिंग दो हिस्सों में बनी थी। करीब 2 दशक बाद पुराने स्ट्रक्चर पर बाकी मंजिलें बनाई गई थीं। 4 इंच की दीवारें खड़ी कर एक-एक मंजिल बनाई गई थी। पिलर भी नहीं था। बिल्डिंग गिराने के खतरे से पहले दिया सहारा अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग की हालत देखकर आशंका थी कि ऊपर के लिंटर पर हथौड़े चलाने से कंपन के कारण पूरा स्ट्रक्चर गिर सकता है। इसलिए तोड़ने से पहले इसे मजबूत किया गया। आगे और पीछे निकाले गए छज्जों समेत पूरे ग्राउंड फ्लोर पर मोटे लोहे के गर्डर लगाए गए। लिंटर डालने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की शटरिंग भी लगाई गई। बराबर वाली बिल्डिंग इससे सटी हुई है, इसलिए उसे भी गर्डर से सपोर्ट दिया गया। मशीन से नहीं, 20 मजदूरों से हो रही जर्जर बिल्डिंग की तोड़फोड़ दोनों बिल्डिंगों को सुरक्षित करने के बाद MCD ने तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारी के अनुसार बिल्डिंग इतनी कमजोर है कि इसे तोड़ने के लिए जेसीबी या दूसरी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए 20 लेबर को मैनुअल तोड़फोड़ के लिए लगाया गया है। धूल-मिट्टी को रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी हो रहा है।

पुतिन-शी-पेजेशकियन की सुरक्षा पर खास फोकस, ड्रोन से लेकर पैराग्लाइडर तक पर नजर

नई दिल्ली  भारत मंडपम् में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और हाई-प्रोफाइल डेलिगेशंस पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ वीवीआईपी रूट और होटलों तक ही मुस्तैद नहीं रहेंगी, बल्कि कई टीमें इस दौरान हवाई गश्त पर भी रहेंगी। सिक्योरिटी असेसमेंट ने इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन में ड्रोन, पैराग्लाइडर और दूसरे रिमोट कंट्रोल्ड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से जुड़े खतरे को भी प्रमुखता से शामिल किया है। मौजूदा वैश्विक तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा का फोकस सबसे ज्यादा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को लेकर है। वीवीआईपी नेताओं के काफिले में शामिल सभी गाड़ियों में जीपीएस डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे कंट्रोल रूम से उनकी रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सके। मुख्य कार्यक्रम स्थल और होटलों में एंट्री के लिए हाईटेक फेशियल रिकग्निशन और बायोमीट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। एंटी-ग्राफिटी गश्त, पिकेट चेकिंग और स्टैटिक तैनाती से पूरे इलाके को कवर किया गया है। 30 हजार जवानों के घेरे में दिल्ली, 100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात सेंट्रल एजेंसियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरी दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों और 100 से ज्यादा NSG कमांडो की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रोग्राम स्थल और होटलों की सुरक्षा में 7 हजार जवानों को लगाया गया है। 11 प्रमुख होटलों से भारत मंडपम् तक वीवीआईपी काफिलों के लिए अलग-अलग रूट तैयार किए गए हैं। अलग-अलग मेहमानों के लिए एंट्री गेट और ड्रॉप पॉइंट भी अलग रखे गए हैं, ताकि दो देशों के काफिले एक साथ सामने न आएं।

लाल किला बम धमाके की पूरी साजिश बेनकाब, उमर उन नबी समेत 13 आरोपियों पर NIA की चार्जशीट में बड़े खुलासे

नई दिल्ली दिल्ली में लाल किला के पास पिछले साल 10 नवंबर को बम ब्लास्ट हुआ था. इस मामले में जांच कर रही NIA ने अब चार्जशीट दाखिल कर दी है. NDTV के पास इस चार्जशीट की कॉपी है. इसके मुताबिक, इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी ही था. डॉ. उमर ही वह आतंकी था जो सुसाइड बॉम्बर था।  NIA ने अपनी चार्जशीट में 13 लोगों को आरोपियों बनाया है. इस चार्जशीट में सभी 13 आतंकियों की तस्वीर भी सामने आ गई है. चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि जांच के दौरान जो सबूत हाथ लगे, उससे साबित होता है कि धमाके के वक्त उमर कार में ही मौजूद था। लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 29 लोग घायल हो गए थे।   राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में अहम दावे सामने आए हैं। NIA की चार्जशीट RC-21/2025/NIA/DLI के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी ने कार के अंदर रहते हुए कथित तौर पर IED को सक्रिय किया था।एनआईए के मुताबिक, धमाके के समय आरोपी उमर उन नबी कार के अंदर मौजूद था और उसने कथित तौर पर एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को सक्रिय किया। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इस पूरे घटनाक्रम को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जोड़ते हुए जांच के निष्कर्ष पेश किए हैं।NIA ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री का प्रभाव था। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास कथित तौर पर ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक/हत्यारा कैसे बनें’ मिली थी, जिसे एजेंसी ने AQAP से जुड़ा मैनुअल बताया है। NIA का कहना है कि इस सामग्री में विस्फोटक, हथियार, गुप्त अभियानों और IED से संबंधित जानकारी के अलावा ऑपरेशनल सुरक्षा, निगरानी, बच निकलने और गुप्त गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी शामिल थी। एजेंसी के मुताबिक, बरामद दस्तावेज केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनमें ऐसी जानकारियां भी थीं जिनका इस्तेमाल किसी आतंकी सेल की गतिविधियों में किया जा सकता था। कार के अंदर बैठकर खुद दबाया था बटन NIA की चार्जशीट में साफ लिखा है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त गाड़ी के अंदर ही मौजूद था. उसने कार के भीतर बैठकर कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया और आईईडी (IED) को खुद एक्टिवेट कर दिया. यह हमला अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. आतंकी किसी भी कीमत पर लाल किले जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगह पर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे।  ‘How to Become an Assassin’ मैनुअल से ली गई ट्रेनिंग जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आतंकी रेडिकलाइजेशन के लिए ऑनलाइन डार्क कंटेंट का सहारा ले रहे थे. आरोपी अल-कायदा (AQAP) से जुड़े एक डिजिटल मैनुअल फॉलो कर रहे थे, जिसका टाइटल था— ‘Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin’. इस किताब में सिर्फ नफरत भरे भाषण ही नहीं थे बल्कि हथियारों, एक्सप्लोसिव्स, TATP के इस्तेमाल और रिमोट-कंट्रोल डेटोनेटर बनाने की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान बनाने, चोरी-छिपे मूवमेंट करने और अकेले हमला करने की स्ट्रैटेजी भी सिखाई गई थी।  ‘पैनिक अटैक’ के चक्कर में जल्दी कर दिया ब्लास्ट NIA के खुलासे के मुताबिक, आतंकी लाल किले की रेकी पिछले लगभग दो सालों से कर रहे थे. दिसंबर 2023 से ही उमर उन नबी अपने साथियों के साथ कई बार लाल किले के चक्कर काट चुका था. हालांकि हमले की तारीख पहले से 10 नवंबर तय नहीं थी. दरअसल, श्रीनगर में जब उसके साथी आतंकियों की धरपकड़ शुरू हुई तो उमर बुरी तरह घबरा गया. उसे लगा कि पुलिस उस तक कभी भी पहुंच सकती है. इसी डर और पकड़े जाने के खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के पास जाकर खुद को उड़ा लिया।  लोकतंत्र के खिलाफ नफरत और शरिया का एजेंडा अल-फलाह स्थित ठिकाने से NIA को हाथ से लिखे कई नोट्स मिले हैं. इन नोट्स में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खारिज करते हुए शरिया कानून लागू करने की बातें लिखी थीं. चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की वजह यही थी कि यह ‘भारतीय राज्य और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक’ है।    हिंसक विचारधारा का आरोप अपनी चार्जशीट में एनआईए ने कुछ प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी व्यवस्था’ बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, इस सामग्री में यह विचार भी सामने रखा गया कि मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री, गजवा-ए-हिंद के संदर्भ और इराक, अफगानिस्तान तथा अमेरिका में हुए विभिन्न विद्रोहों का उल्लेख भी था। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को कथित AGuH मॉड्यूल की वैचारिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा है। फर्जी पहचान और गुप्त गतिविधियों की ट्रेनिंग का दावा चार्जशीट में NIA ने यह भी कहा है कि बरामद सामग्री में कथित आतंकी नेटवर्क के सदस्यों के लिए ऑपरेशनल निर्देश मौजूद थे। एजेंसी के मुताबिक, इनमें पहचान छिपाने, गुप्त तरीके से घुसपैठ करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग फर्जी पहचान तैयार करने जैसे तरीकों का उल्लेख था। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में हमले की रणनीतियों, लक्षित हमलों, अकेले किए जाने वाले हमलों और आत्मघाती हमलों से जुड़ी सामग्री भी मौजूद थी।  

सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में CM रेखा गुप्ता, दिल्ली के कई इलाकों में होगी बुलडोजर कार्रवाई

नई दिल्ली सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी को अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को 17 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के बाद बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में बुलडोजर ऐक्शन लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारी ग्राउंड पर रहें। उन्होंने दिल्ली के सभी पीजी-हॉस्टल का सघन निरीक्षण करने को कहा है और अवैध निर्माण पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि जो भी निर्माण अवैध पाया जाता है उसके लिए दोषी अधिकारियों की पहचान की जाए। बिल्डिंग रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह पता लगाया जाए कि किस वर्ष और किसके अधिकार क्षेत्र में उसका निर्माण किया गया था। ताबड़तोड़ चल रही है कार्रवाई सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक और अवैध भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को निगम ने अलग-अलग इलाकों में 17 इमारतों को ध्वस्त किया और पांच संपत्तियों को सील कर दिया। इसके अलावा 9 लोगों को कारण बताओ नोटिस, दो को सीलिंग नोटिस और 15 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया है। किन इलाकों में कार्रवाई मंगलवार को एमसीडी ने सैदुलाजाब, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, तिलक नगर, करमपुरा, करोलबाग, रमेश नगर, मानसरोवर गार्डन, चांदनी चौक और नेहरू विहार समेत कई इलाकों में कार्रवाई की। इन इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध इमारतों का निर्माण किया गया है। किसी मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया है तो कई को तय मापदंड से अधिक ऊंचा बनाया गया है। कई इमारतों का ढांचा बेहद कमजोर पाया गया है। बड़े पैमाने पर जारी किए गए हैं नोटिस सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शीर्ष सरकारी और एमसीडी अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास वाले इलाकों में निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए। खासतौर पर उन मकानों का निरीक्षण करने को कहा गया है, जिनमें प्रथम दृष्टया ऊंचाई और मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, एक से 8 सितंबर के बीच नगर निकाय ने 48 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 15 संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि के दौरान, निगम ने अनधिकृत निर्माण के लिए 90 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 124 कारण बताओ नोटिस और 66 तोड़फोड़ आदेश जारी किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक जून से 31 अगस्त के बीच एमसीडी ने 959 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 456 संपत्तियों को सील किया। इस अवधि के दौरान अनधिकृत निर्माण के लिए 1,461 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 590 कारण बताओ नोटिस और 687 तोड़फोड़ आदेश जारी किए गए।