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सुखबीर बादल से AAP ने पूछा सवाल, बहरीन से बीवी लाने और गाड़ी देने का मामला

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के जनरल सेक्रेटरी और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेताओं सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया पर निशाना साधा है. उन्होंने इसी के साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी की सराय में रह रही एक बहरीन की महिला के आरोपों पर लगातार चुप्पी पर भी सवाल उठाया. बलतेज पन्नू ने कहा कि वह इस मामले पर पहले ही करीब चार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं, लेकिन सिख समुदाय के उठाए गए सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिला है. बलतेज पन्नू ने कहा, “हरसिमरत कौर बादल महिलाओं के मुद्दों पर प्रोग्राम और रैलियों में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन एक महिला के महीनों तक एसजीपीसी की साड़ी में रहने से जुड़े आरोपों पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं. वह इन सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही हैं? जब एक महिला के साथ हुए बर्ताव और एसजीपीसी के रिसोर्स के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं, तो चुप्पी क्यों है?” इन सवालों का जवाब कब देंगे? हरजिंदर सिंह धामी पर सवाल उठाते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “धामी साहब ने मीडिया का सामना करने के बजाय एक वीडियो भी जारी किया है. आज जब पटियाला में मीडिया ने उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने फिर कहा कि वह इस मामले पर कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि वह वहां किसी और काम से आए थे. हरजिंदर सिंह धामी कब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इन सवालों का जवाब देंगे?” आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “यह कोई साधारण राजनीतिक विवाद नहीं है. एक एसजीपीसी संगठन, एसजीपीसी के रिसोर्स और जिस तरह से एक महिला को महीनों तक वहां रखा गया, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सिख समुदाय को सवाल पूछने और साफ जवाब पाने का पूरा हक है.” उन्होंने कहा, “महिला ने कहा है कि उसने हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर सिंह बादल को सब कुछ बता दिया था. क्या यह कमेटी हरजिंदर सिंह धामी से पूछताछ करेगी? क्या यह सुखबीर सिंह बादल से पूछताछ करेगी? क्या यह जांच करेगी कि उन्हें क्या पता था, उन्हें कब पता चला और क्या कार्रवाई की गई?” रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “अगर एसजीपीसी सच में बिना किसी भेदभाव के जांच चाहती है, तो यह काम अनुभवी लोगों को देना चाहिए. किसी रिटायर्ड सिख जज या रिटायर्ड सीनियर पुलिस अधिकारी से जांच करने को कहा जा सकता था. ये जूनियर मेंबर न तो कानून के माहिर हैं और न ही प्रशासन के. बिना किसी स्वतंत्र और अनुभवी जांच के, सीनियर लोगों से जुड़े मामले में सही जांच कैसे हो सकती है?” बलतेज पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी ने जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया है, लेकिन सवाल उठाया कि क्या यह कदम सिर्फ मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए उठाया गया है. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने कमेटी को 15 दिन का समय दिया है. क्या यह सोचा जा रहा है कि 10 या 15 दिन बाद मामला पीछे छूट जाएगा और लोग इसे भूल जाएंगे? लोग इस मुद्दे को नहीं भूलेंगे. पूरी दुनिया में सिख समुदाय इस बारे में बात कर रहा है और पंजाबी मीडिया चैनलों द्वार भी इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही हैं. “15 दिन बाद भी सवाल कायम रहेंगे. 10 दिन बाद भी रहेंगे और 10 महीने बाद भी रहेंगे जब तक सही जवाब नहीं मिल जाते. ₹1 लाख एक बहरीन की महिला के अकाउंट में ट्रांसफर बलतेज पन्नू ने मामले में नया खुलासा करते हुए कहा, 23 जुलाई, 2026 को पंजाब नेशनल बैंक में एसजीपीसी सेक्रेटरी के नाम पर खोले गए अकाउंट से ₹1 लाख एक बहरीन की महिला के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे. यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद से दिए गए थे? इस पेमेंट को किसने मंज़ूरी दी? यह पैसा किस हेड में ट्रांसफर किया गया? एसजीपीसी को इन सवालों के जवाब देने चाहिए.”बलतेज पन्नू ने पूछा, “क्या इससे बड़ा कोई सबूत हो सकता है? एफआईआर खुद एक बड़ा सबूत थी, लेकिन किसी ने उन सवालों के जवाब नहीं दिए. अब यह एसजीपीसी के अकाउंट से उस महिला के अकाउंट में ट्रांसफर है जिसने आरोप लगाया था. यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद के लिए दिए गए थे?” बलतेज पन्नू ने कहा, “यह सिर्फ़ एक ट्रांसफर है. बाकी पेमेंट का क्या? कैश खर्च का क्या? उसके रहने, खाने, घूमने और दूसरी सुविधाओं पर हुए खर्च का क्या? गाड़ी एसजीपीसी ने दी थी, उसका फ्यूल एसजीपीसी ने दिया था, ड्राइवर को एसजीपीसी ने दिया था और सेवादार एसजीपीसी के कर्मचारी थे. इसके अलावा, अगर उसे पर्सनल खर्च के लिए भी पैसे दिए जा रहे थे, तो उन आठ महीनों के पूरे खर्च का हिसाब दिया जाना चाहिए.” दुनिया भर की सिख कम्युनिटी का योगदान बलतेज पन्नू ने कहा, “ये संस्थाएं कुर्बानियों से बनी हैं. दुनिया भर की सिख कम्युनिटी इनमें अपना योगदान देती है. वे इसलिए योगदान नहीं देते कि आप एक महिला को एसजीपीसी सराय में ले आएं, उसे आठ महीने तक वहां रखें, उसे परेशान करें और कम्युनिटी को कोई यह भी न बताए कि उसे वहां क्यों और किस मकसद से रखा गया था. सिख कम्युनिटी को यह जानने का हक है कि उसकी संस्थाएं कैसे चल रही हैं. उसे यह जानने का हक है कि उसका पैसा कैसे खर्च हो रहा है. किसी को भी कम्युनिटी के योगदान को पर्सनल या राजनीतिक रिसोर्स के तौर पर इस्तेमाल करने का हक नहीं है.” बलतेज पन्नू ने सवाल किया, “11 साल से एसजीपीसी के चुनाव क्यों नहीं हुए? सिख संगत को अपने प्रतिनिधि चुनने से क्यों दूर रखा जा रहा है? ये वो सवाल हैं जो सिख संगत और सिख बुद्धिजीवियों को पूछने चाहिए,”

पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव! राजा वड़िंग ने खुद को बताया ‘पूर्व अध्यक्ष’

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी अंदरूनी कलह और गुटबाजी के बीच सबसे बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा पार्टी हाईकमान द्वारा मंजूर कर लिया गया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर मुहर तब लग गई जब खुद राजा वड़िंग ने अपने इंटरनेट मीडिया खातों के प्रोफाइल बायो में बदलाव करते हुए खुद को 'पूर्व अध्यक्ष, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी' लिख दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद पंजाब मामलों के प्रभारी सचिन पायलट की अंतरिम रिपोर्ट और पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत के बाद अंजाम में आई है। पिछले कई महीनों से राज्य इकाई में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच तीखी खींचतान चल रही थी। विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए हाईकमान ने यह कड़ा कदम उठाया है।

मोहाली में फैक्टरी के पास भड़की आग, सूखी झाड़ियों ने पकड़ी लपटें

मोहाली. फेज-5 में किसान मंडी के पास गुरुवार सुबह करीब सात बजे सूखी झाड़ियों और कचरे में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और धुएं का गुबार आसपास फैल गया। आग की लपटों के पास ही स्वराज ट्रैक्टर फैक्टरी स्थित होने के कारण बड़ा हादसा होने का खतरा पैदा हो गया था। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया। फायर अफसर लखविंदर सिंह ने बताया कि यदि हवा का रुख फैक्टरी की तरफ होता तो ट्रैक्टर फैक्टरी को नुकसान पहुंच सकता था। मौके पर पहुंचे सीनियर डिप्टी मेयर आर.पी. शर्मा ने आग बुझाने वाले कर्मचारियों को आवश्यक हिदायतें दीं।

नंगल के गुरप्रीत सिंह को सऊदी में फांसी की सजा, परिवार ने मांगी मदद

नंगल. काम के सिलसिले में विदेश गए नंगल के पास पत्ती लोअर गांव के युवक गुरप्रीत सिंह उर्फ बब्बी को सऊदी अरब में कथित नशीले पदार्थ के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। इस सूचना के बाद परिवार में मातम का माहौल है। परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर गुरप्रीत की सजा कम करवाने और उसकी वतन वापसी के लिए प्रयास करने की अपील की है। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत सिंह को मिली मृत्युदंड की जानकारी नंगल के तहसीलदार के माध्यम से परिवार को दी गई। इससे पहले 24 सितंबर को रूपनगर के उपायुक्त को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास की ओर से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र के माध्यम से गुरप्रीत को सुनाई गई मौत की सजा की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई। दिवंगत जरनैल सिंह का बेटा गुरप्रीत करीब चार वर्ष पहले काम के सिलसिले में मस्कट गया था। उसकी मां जसवंत कौर ने बताया कि गुरप्रीत उनका इकलौता बेटा है। बेटे को मौत की सजा मिलने की जानकारी से परिवार बेहद परेशान है। ट्रक चलाने का करता था काम परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, गुरप्रीत सिंह ट्रक चालक के तौर पर काम करता था। काम के सिलसिले में उसका मस्कट से सऊदी अरब आना-जाना रहता था। परिवार का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले उसके ट्रक से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बरामद हुए थे। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत करीब दो वर्ष तक जेल में रहा। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि परिवार का दावा है कि गुरप्रीत निर्दोष है और उसे इस मामले में फंसाया गया है। परिवार अब सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। मां बोली, इकलौते बेटे को बचाएं गुरप्रीत की मां जसवंत कौर ने कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस से संपर्क किया है। उन्होंने इस मुलाकात में मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से भी अपील की है कि उनके बेटे को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। जसवंत कौर का कहना है कि उनका बेटा परिवार का इकलौता सहारा है। उन्होंने सरकार से सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ राजनयिक स्तर पर मामला उठाने और गुरप्रीत की सजा कम करवाने की दिशा में प्रयास करने की मांग की है। सरपंच ने भी सरकार से लगाई गुहार गांव की सरपंच मोनिका देवी ने कहा कि गुरप्रीत को मौत की सजा मिलने की जानकारी से गांव के लोग भी दुखी हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक माध्यमों से सऊदी अरब के अधिकारियों के समक्ष उठाया जाए। परिवार को अब केंद्र और पंजाब सरकार से राहत की उम्मीद है। गुरप्रीत की मां और ग्रामीण चाहते हैं कि मामले में कानूनी और राजनयिक स्तर पर आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए, ताकि सजा के खिलाफ उपलब्ध विकल्पों पर कार्रवाई हो सके। मंत्री हरजोत बैंस उठाएंगे मर्सी पटीशन की मांग इस मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मंत्री बैंस ने बताया कि वे गुरप्रीत सिंह की सजा माफ कराने (मर्सी पिटीशन) की याचिका को तुरंत भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष रखेंगे, ताकि इसे कूटनीतिक स्तर पर सऊदी अरब सरकार के सामने उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि युवक की सुरक्षित वतन वापसी और उसके परिवार की सहायता के लिए वे अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करेंगे।

पंजाब कांग्रेस में बदलाव की तैयारी, सचिन पायलट संभालेंगे संगठन की कमान

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच अब संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की अटकलों के बीच माना जा रहा है कि आज या अगले एक-दो दिन में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हाई कमान की ओर से सिंगल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला ले लिया गया है और इस संबंध में अमरिंदर सिंह को भी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि, अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। कांग्रेस संगठन में बदलाव की तैयारी प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही पंजाब कांग्रेस संगठन में कई अन्य पदों पर भी फेरबदल किए जाने की संभावना है। हाईकमान 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ नई टीम के गठन पर भी नजर रहेगी। दरअसल, एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कमेटी का गठन किया था। इसके बाद पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए। पंजाब कांग्रेस में दिखी गुटबाजी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह समेत कई नेताओं ने संगठन से जुड़े फैसलों को लेकर असहमति जताई थी। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग भी लगातार चर्चा में रही। विवाद के बीच पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी भूपेश बघेल को जिम्मेदारी से हटाया गया और पांच सितंबर को सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। सचिन पायलट ने की नेताओं से मुलाकात पायलट ने इसके बाद पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं से मुलाकात कर एकजुटता बनाने की कोशिश की। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सके। अब वड़िंग के स्थान पर नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को साथ लेकर चलने की होगी। वहीं, वड़िंग को किसी दूसरे प्रदेश में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी है। आने वाले दिनों में कार्यकारी अध्यक्षों और संगठन के अन्य पदों पर भी बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हाईकमान पंजाब कांग्रेस की नई टीम में किन नेताओं को जगह देता है और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को किस तरह तैयार करता है।

पंजाब में बेअदबी कानून पर मंथन, सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय कमेटी

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (शोध) एक्ट 2026 को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने इस एक्ट से संबंधित संशोधनों पर सहमति बनाने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है। यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ बैठकें कर एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर सहमति बनाने का काम करेगी। दोनों कमेटियों के बीच तालमेल के लिए पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। समिति में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गुरबीर सिंह और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी व पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जतिंदर सिंह औलख को शामिल किया गया है। विधि अधिकारी प्रीत इंदर पॉल सिंह भी इस सात सदस्यीय समिति के सदस्य हैं।  हरजीत संधू नोडल अफसर नियुक्त पंजाब सरकार द्वारा हरजीत सिंह संधू पीसीएस को 23.09.2026 के आदेशों के माध्यम से नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। वह पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के बीच तालमेल स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इस कमेटी द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्राप्त सुझावों और मार्गदर्शन को पूरे सत्कार के साथ विचार के अधीन लाया जा रहा है। पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनका कार्य दोनों समितियों के बीच तालमेल स्थापित करना होगा। यह समिति श्री अकाल तख्त साहिब की समिति के साथ बैठकें करेगी। इन बैठकों में एक्ट के संशोधनों पर सहमति बनाई जाएगी।  यह काम करेगी कमेटी पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी विचार-विमर्श करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ आवश्यक विचार-विमर्श और तालमेल करेगी। सभी सुझावों एवं विचारों को ध्यान में रखते हुए मामले को अंतिम रूप दिया जाएगा।

स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति 3 हफ्ते में छोड़ेंगे पद, हाईकोर्ट का निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति पद पर पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट के समक्ष संबंधित कुलपति की ओर से कहा गया कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद पर बने रहने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे। इसके बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को इस्तीफा स्वीकार करने और कुलपति पद पर अंतरिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए। नियुक्ति को यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर दी गई थी चुनौती डॉ. डीएस मोर उर्फ देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की थी। इसमें संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अशोक कुमार की नियुक्ति को गैरकानूनी और शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के विपरीत की गई है। इसके अलावा कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े 15 जुलाई 2024 के पत्र को भी चुनौती दी गई थी। इस्तीफा स्वीकार होने तक वरिष्ठ डीन संभालेंगे जिम्मेदारी हाई कोर्ट ने कहा कि कुलपति अपना इस्तीफा तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करेंगे और राज्य सरकार इस्तीफा मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार करेगी। इस बीच विश्वविद्यालय के कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के नियमों के नियम-दो में दी गई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति का पद इस्तीफे के कारण रिक्त होने की स्थिति में वरिष्ठ डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों का निर्वहन कराया जाए। यह व्यवस्था नए कुलपति की नियुक्ति होने तक जारी रहेगी। नई नियुक्ति में यूजीसी के 2018 नियमों का सख्ती से पालन हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के अगले कुलपति की नियुक्ति यूजीसी के 2018 के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए की जाए। अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के डा एस. मोहन बनाम सेक्रेटरी टू द चांसलर, पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी एवं अन्य मामले में 2026 में दिए फैसले को भी ध्यान में रखने को कहा है। 31 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी सभी जरूरी कार्रवाई हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार करने, अंतरिम व्यवस्था करने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने समेत सभी आवश्यक कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे किए जाएं। मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी के सहयोग की भी पीठ ने सराहना की।

पंजाब कांग्रेस में घमासान के बीच सिंगला ने खोले पत्ते, बोले- हाईकमान लेगा फैसला

चंडीगढ़. 'मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए?'- पंजाब कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन और संगठन में जारी खींचतान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पंजाब कांग्रेस चुनाव प्रबंधन व समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला का यह बेबाक बयान सामने आया है। बीती रात से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान पद के लिए चली आ रही खींचतान के बीच ये उनका पहला रिएक्शन है, जो सामने आया है। राज्य इकाई की कमान संभालने की रेस में सबसे आगे चल रहे सिंगला ने दिल्ली जाने और पार्टी हाईकमान से मुलाकात करने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अध्यक्ष पद को लेकर जारी घमासान और दिल्ली दौरों से जुड़े सवालों पर विजय इंदर सिंगला ने साफ लहजे में कहा- भाई, मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए? मेरे संगरूर के गांवों में पहले से कार्यक्रम तय हैं और मैं उन्हीं में व्यस्त हूं। मैं दिल्ली तभी जाता हूं जब वहां कोई काम होता है या फिर हाईकमान की ओर से कोई बुलावा आता है। फिलहाल दिल्ली जाने का ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं है। पंजाब कांग्रेस में सुगबुगाहट तेजह विजय इंदर सिंगला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब कांग्रेस में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह किसी नए चेहरे को कमान सौंपने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे का मुख्य मकसद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़ों के बीच राजनीतिक संतुलन स्थापित करना है। हाईकमान के फैसले का इंतजार जारी हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले विजय इंदर सिंगला को इस अंदरूनी खींचतान के बीच एक सर्वमान्य और तटस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस बयान से साफ है कि वे फिलहाल अपनी जमीनी राजनीति और संगरूर क्षेत्र के दौरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं तथा हाईकमान के औपचारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

CM मान आज जारी करेंगे मावां-धीयां योजना की तीसरी किस्त, 36 लाख महिलाओं को फायदा

 चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज गोइंदवाल साहिब में 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत महिलाओं को सम्मान राशि की तीसरी किस्त जारी करेंगे। इस किस्त में 36 लाख 87 हजार 677 महिलाओं के खातों में 1,262 करोड़ 54 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। मान सरकार ने अब तक इस योजना के तहत कुल 73 लाख 99 हजार महिलाओं को लाभ पहुंचाया है। इन महिलाओं के खातों में कुल 2,562 करोड़ 33 लाख रुपये की सम्मान राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। यह राशि दो किस्तों में वितरित की गई है।  कार्यक्रम में सरकार की ओर से योजना के तहत महिलाओं और बेटियों से जुड़ी आर्थिक सहायता की किस्त जारी की जाएगी।‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ का उद्देश्य महिलाओं और बेटियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। आज गोइंदवाल साहिब में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान इसी को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कार्यक्रम में शामिल होकर योजना को लेकर जानकारी साझा करेंगे और लाभार्थियों से भी संवाद करेंगे। इस के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,000 और अनुसूचित जाति (SC/ST) की महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की वित्तीय सहायता दी जाती है। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 3,000 रुपये की सम्मान राशि मिलती है। वहीं, अनुसूचित जाति की महिलाओं को 4,500 रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ना है। 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ योजना के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पात्र महिलाओं को लाभ दिया जाता है। एक परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। राशि सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए ट्रांसफर की जाती है। पहली किस्त जुलाई 2026 में तीन महीने की राशि एक साथ जारी की गई थी। सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹3,000 और अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹4,500 मिले। ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया है। सरकार की ओर से करीब 97% महिलाओं को योजना के दायरे में लाने का अनुमान बताया गया है।

233 स्थानों पर अवैध खनन का मामला, पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को 4 सप्ताह का दिया समय

 चंडीगढ़  पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित अवैध खनन के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में राज्य में 233 स्थानों पर अवैध खनन गतिविधियों की पहचान होने के बाद हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को गुरबीर सिंह पन्नू बनाम भारत संघ तथा इससे संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किए। मामला पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित अवैध खनन गतिविधियों से जुड़ा है। 48 घंटे में हलफनामा दाखिल करने का आदेश सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों के बावजूद पंजाब के खनन निदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने 48 घंटे के भीतर हलफनामा दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।  233 स्थानों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी सख्ती अदालत ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तीन जुलाई 2026 की रिपोर्ट में राज्य के 233 स्थानों पर अवैध खनन की पहचान की गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने और मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करते हैं तो अगली सुनवाई में उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा हलफनामे के माध्यम से अदालत में पेश करना होगा। 16 नवंबर को अगली सुनवाई अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। इस दौरान राज्य सरकार को बताना होगा कि अवैध खनन वाले चिन्हित स्थानों पर क्या कार्रवाई की गई और जिम्मेदार व्यक्तियों व अधिकारियों के खिलाफ कौन-कौन से कदम उठाए गए।