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लावारिस बैग बना सुराग: एयरपोर्ट से 10 करोड़ का गांजा जब्त, चौंकाने वाला खुलासा

गया जी बिहार के गया जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की। इस बीच करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य का ‘हाईटेक गांजा’ जब्त किया।  बरामदगी के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को और सख्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को थाई एयरवेज की बैंकॉक से आई एक शेड्यूल फ्लाइट से पहुंचे दो संदिग्ध बैग को कस्टम अधिकारियों ने जांच के दौरान अलग कर लिया था। बैग की स्थिति और उसमें मौजूद सामान को लेकर अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्हें निगरानी में रखा गया। तीन दिनों तक लावारिस पड़े थे बैग चौंकाने वाली बात यह रही कि ये दोनों बैग एयरपोर्ट पर लगातार तीन दिनों तक लावारिस पड़े रहे, लेकिन कोई भी यात्री उन्हें लेने नहीं पहुंचा। इससे कस्टम विभाग का शक और गहरा गया। अंततः अधिकारियों ने नियमों के तहत बैग की तलाशी लेने का फैसला किया। कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई तलाशी के दौरान बैग के अंदर से करीब 10 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया। यह गांजा पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक यानी हाइड्रोपोनिक विधि से तैयार किया जाता है, जिसकी गुणवत्ता और कीमत दोनों काफी अधिक होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। क्या कोई संगठित गिरोह है ? इस बरामदगी के बाद एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। कस्टम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़ा हो सकता है और इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल कस्टम विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन बैग को एयरपोर्ट तक कौन लाया और इन्हें लेने कोई क्यों नहीं पहुंचा। साथ ही अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।

बिहार में पुलिस महकमे में बदलाव: लखीसराय और नवगछिया के SP समेत 7 अधिकारियों के ट्रांसफर

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा पर हैं। राज्य में विधि व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कहते आ रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को गृह विभाग की आरक्षी शाखा से सात पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया दिया गया। इनमें भारतीय पुलिस सेवा के चार और बिहार पुलिस सेवा के तीन अधिकारी शामिल हैं। पहले चार आईपीएस अफसर के बारे में जानते हैं। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के गृह जिले के एसपी कौन बने? गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, 2012 बैच के अधिकारी अजय कुमार पांडेय को मद्य निषेध एवं एएनटीएफ का डीआईजी बनाया गया है। वह वर्तमान में पटना में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीआईजी पद पर तैनात हैं। 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रेरणा कुमार को  लखीसराय की एसपी पद की जिम्मेदारी दी गई है। वह वर्तमान में लखीसराय में पुलिस अधीक्षक के पद तैनात हैं। वहीं 2016 राजेश कुमार को नवगछिया में एसपी के पद पर तैनात किया गया है। वह वर्तमान में मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, में पुलिस अधीक्षक के पद तैनात हैं। 2019 बैच के अधिकारी को बिहार पुलिस मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक (कर्मिक 1) के पद पर तैनात किया गया है। वर्तमान में वह लखीसराय से पुलिस अधीक्षक पर तैनात हैं। बाढ़ के एसडीपीओ 1 की जिम्मेदारी आनंद कुमार सिंह को गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी राम कृष्णा को बाढ़ का एसडीपीओ एक बनाया गया है। वह वर्तमान में कटिहार में पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) के पद पर हैं। इनके अलावा आनंद कुमार सिंह को पुलिस उपाधीक्षक उच्च न्यायालय, सुरक्षा, पटना के पद पर तैनात किया गया है। वह वर्तमान में बाढ़ के एसडीपीओ 1 के पद पर तैनात हैं। वहीं पुलिस उपाधीक्षक, उच्च न्यायालय सुरक्षा, पटना में पुलिस उपाधीक्षक पद पर तैनात विनोद राम को बिहार पुलिस मुख्यालय में योगदान देने के लिए कहा गया है।

नए मुख्यमंत्री पर फैसला एनडीए के हाथ में, रामकृपाल यादव का बड़ा बयान

  पटना, बिहार की सियासत एक बार फिर गर्म होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चल रही अटकलों के बीच बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि एनडीए नेतृत्व ही तय करेगा कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। जनता दल (यूनाइटेड) में नेतृत्व को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की। राम कृपाल यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ही जदयू के संस्थापक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि समता पार्टी से विकसित होकर जदयू बना और इस पूरी यात्रा में नीतीश कुमार ने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार ने खुद फैसला लिया है कि अब वे मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन नई सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी तय किया है कि वे पार्टी संगठन की जिम्मेदारी आगे भी संभालते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का सपना है कि साल 2030 तक बिहार एक विकसित राज्य बने। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे लगातार काम करते रहे हैं और आगे भी उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राम कृपाल यादव ने कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भी उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन में बंगाल बर्बाद हो चुका है और वहां के लोगों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि अत्याचार के कारण जनता डरी हुई है, लेकिन चुनाव में लोग अपने मत का सही इस्तेमाल करेंगे और टीएमसी को हटाकर भाजपा नेतृत्व वाली सरकार बनाएंगे। वहीं, वाराणसी में गंगा नदी के बीच नॉन-वेज इफ्तार पार्टी के आयोजन पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गंगा मां के रूप में पूजी जाती हैं और यह एक बेहद पवित्र स्थल है। खासकर बनारस के घाटों पर दुनियाभर से लोग आते हैं। ऐसे स्थान पर इस तरह का आयोजन करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने इसे सनातन और हिंदू धर्म का गंभीर अपमान बताया और कहा कि इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।  

पुलिस को धमकी देने वाले अपराधी कुंदन ठाकुर का एनकाउंटर, ‘15 लाशें गिरने’ की दी थी चेतावनी

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में एक तरफ पुलिस को खुली चुनौती देने वाला कुख्यात अपराधी, दूसरी तरफ उसकी तलाश में जुटी टीम और फिर गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच खत्म हुई एक खौफनाक कहानी. लेकिन इस मुठभेड़ की सबसे दर्दनाक बात रही एक STF जवान की शहादत। घटना सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं थी, बल्कि उससे पहले की कहानी कहीं ज्यादा खतरनाक और चौंकाने वाली है. मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर का एक ऑडियो अब सामने आया है, जिसने पुलिस और आम लोगों दोनों को हैरान कर दिया है. इस ऑडियो में कुंदन ठाकुर जिस बेखौफ अंदाज में पुलिस को धमकी देता सुनाई दे रहा है, वह बताता है कि उसका मनोबल किस कदर बढ़ा हुआ था. बताया जा रहा है कि यह ऑडियो मुठभेड़ से दो दिन पहले का है, जिसमें कुंदन ठाकुर ने चकिया के अपर थानाध्यक्ष को फोन कर सीधी चुनौती दी थी. उसने कहा था जहां मन करे जगह और समय तय कर लीजिए, मैं वहां पहले से मौजूद रहूंगा. 10 से 15 पुलिस वालों की लाशें गिरेंगी और आप लोग मुझे पकड़ भी नहीं पाएंगे। यही नहीं, उसने पुलिस पर परिवार को परेशान करने का आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया कि अगर मेरे परिवार को तंग किया गया, तो मैं भी आपके परिवार वालों को नहीं छोड़ूंगा. बातचीत के दौरान उसकी आवाज में न डर था, न झिझक… बल्कि एक तरह की खुली चुनौती थी. ऑडियो में कुंदन ठाकुर बार-बार यह दोहराता है कि वह भागने वालों में नहीं है. उसने पुलिस से कहा अगर मुठभेड़ होगा तो हम भागेंगे नहीं, सामने से सामना करेंगे. जब पुलिस ने पूछा कि क्या वह धमकी दे रहा है, तो उसने जवाब दिया धमकी नहीं, सलाह दे रहे हैं। पुलिस के रडार पर था चंदन  पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुंदन ठाकुर लंबे समय से पुलिस के रडार पर था. उसकी गतिविधियों को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही थी. इसी बीच पुलिस को उसके ठिकाने की पुख्ता जानकारी मिली, जिसके बाद देर रात एक विशेष टीम ने इलाके में नाकेबंदी कर दी. जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, वहां मौजूद अपराधियों ने बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी में एक STF जवान गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. यह खबर मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई. अपने साथी को खोने के बाद भी पुलिस टीम पीछे नहीं हटी. आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें कुंदन ठाकुर समेत दो अपराधी मौके पर ही ढेर हो गए. इस पूरी कार्रवाई में कुछ समय के लिए पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंजता रहा। लगातार दे रहा था धमकी  पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि कुंदन ठाकुर लगातार पुलिस को धमकियां दे रहा था और उसे पकड़ने के लिए कई दिनों से प्रयास किए जा रहे थे. उन्होंने कहा कि जैसे ही पुलिस ने ठिकाने को घेरा, अपराधियों ने हमला कर दिया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. एसपी के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान जिस मकान में अपराधी छिपे थे, उसके मालिक उज्जवल कुमार और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है. उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अपराधियों को किस तरह शरण दी जा रही थी. घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है और आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

Tele ICU Service: झारखंड के हर जिले में नई सुविधा, अब दूर बैठे विशेषज्ञ देंगे मरीजों को सलाह

रांची. राज्य के सभी मेडिकल कालेजों व जिला सदर अस्पतालों में टेली आइसीयू की स्थापना की जाएगी। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन तथा सदर अस्पतालों के पदाधिकारियों व चिकित्सकों के साथ वर्चुअल माध्यम से बैठक की। इस क्रम में उन्होंने इसके लिए आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधन की तत्काल व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के पांच जिले गुमला, सिमडेगा, चतरा और रांची के सदर अस्पताल टेली आइसीयू से जुड़े हुए हैं। इन अस्पतालों का मेंटर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) है, जहां से सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर टेली आइसीयू एवं एआइ तकनीक के माध्यम से गंभीर मरीजों की निगरानी कर उन्हें परामर्श दे रहे हैं। सभी जिलों में लागू होगी व्यवस्था अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस व्यवस्था को सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। बैठक में संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त नियुक्तियां भी की जाएंगी। वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया गया। बैठक में मेडिकल उपकरणों की खरीद पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। जिन अस्पतालों में उपकरणों की खरीद लंबित है, उनकी निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा बैठक में एसएनए स्पर्श और मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने जिलों से अद्यतन जानकारी ली। अधिसंख्य जिलों द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया और शेष राशि भी शीघ्र खर्च करने के निर्देश दिए गए।

Jharkhand HC Decision: CISF असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती जारी रहेगी, कोर्ट ने रोक लगाने से मना किया

रांची. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कोर्ट यह निर्देश दिया कि असिस्टेंट कमांडेंट की विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति इस केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी। इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को भी दे दी जाए। प्रार्थी ने कहा कि नियमावली के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही यूपीएससी ने असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए विज्ञापन निकाला है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। प्रार्थी ने सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमवाली को चुनौती देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग की गाइडलाइन के तहत हर पांच साल में इस नियुक्ति नियमावली की समीक्षा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रार्थी का यह भी कहना था कि सीआईएसएफ के अन्य विंग में असिस्टेंट कमांडेंट के शत प्रतिशत पद इंस्पेक्टर पद से प्रोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। जबकि उक्त नियमावली के तहत केवल 30 प्रतिशत पद ही इंस्पेक्टर पद से असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रोन्नति देने का प्रविधान है। इसलिए वर्ष 2009 की नियुक्ति नियमावली और असंवैधानिक और गलत है।

CM फेस पर सस्पेंस: नीतीश कुमार ने सम्राट की पीठ थपथपाई, ‘जिंदाबाद’ के नारों से गरमाई सियासत

भागलपुर. राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद की पहली समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में संकेत दे दिया। उनकी सभा बैजानी में थी। नीतीश ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई। केंद्र सरकार के सहयोग का बखान किया।लोगों को भरोसा दिया कि राज्य में आगे भी सबकुछ अच्छा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भीड़ से हाथ उठाने का आग्रह किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री मंच पर अगल-बगल में खड़े थे। अन्य नेता भी खड़े थे। पीठ पर रखा हाथ, दूसरा हाथ हवा में लहराया मुख्यमंत्री मंच पर तेज कदम बढ़ाते हुए बढ़े। कई नेताओं को किनारे करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। उनकी पीठ पर एक हाथ रखा। दूसरा हाथ हवा में लहरा दिया। सम्राट के दोनों हाथ जुड़ गए। भीड़ ने भीड़ से सम्राट चौधरी जिंदाबाद का नारा बुलंद किया। सम्राट के बगल में विजय चौधरी खड़े थे। इस सभा में एक तरह से नीतीश ने अपने उत्तराधिकारी का साफ संकेत दिया। भीड़ से उस पर मुहर भी लगवा दी। संयोग यह कि मंच का संचालन कर रही महिला ने भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया। प्राय: सभी समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी चोधरी जाते रहे हैं, लेकिन राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद की समृद्धि यात्रा के हरेक मंच पर सम्राट को पहले की तुलना में अधिक तरजीह मिल रही है। सीमांचल की यात्रा में भी दिखी थी ऐसी तस्वीर इससे पहले, सीमांचल की समृद्धि यात्रा में भी नीतीश ने सम्राट की पीठ पर हाथ रखकर भीड़ का अभिवादन करवाया था। जदयू के मंत्रियों में संसदीय कार्य एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को तरजीह मिल रही है। शपथ ग्रहण के क्रम के अनुसार नीतीश मंत्रिमंडल में सम्राट चौधरी को दूसरा स्थान प्राप्त है। वे नीतीश मंत्रिमंडल के पहले गृह मंत्री हैं।

CM पद की रेस में नया मोड़: अशोक चौधरी का बयान—नौंवा फेल क्लेम करे तो निशांत क्यों पीछे?

पटना नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री पर बयानबाजी तेज हो गई है। अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता एवं नीतीश के करीबी मंत्री अशोक चौधरी ने इसमें ट्विस्ट दे दिया है। उन्होंने संकेत दिए कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार भी सीएम की रेस में हैं। निशांत ने पिछले दिनों ही राजनीति में कदम रखा और जेडीयू की सदस्यता ली थी। दूसरी ओर, चर्चा है कि नीतीश के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री बना सकती है। बिहार में 5 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मंत्री अशोक चौधरी ने सोमवार शाम पटना में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या नीतीश के बेटे बिहार में एनडीए की नई सरकार में डिप्टी सीएम बनेंगे? इसके जवाब में अशोक चौधरी ने कहा- निशांत कहीं भी जा सकते हैं, स्काई इज द लिमिट। उन्होंने मीडिया से कहा कि आप निशांत को डिप्टी सीएम पर ही क्यों रोक रहे हैं, भविष्य में कहीं भी कुछ भी हो सकते हैं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या निशांत मुख्यमंत्री बनेंगे, तो अशोक चौधरी ने कह दिया- क्यों नहीं बन सकते हैं? मंत्री ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, "नौंवा फेल अगर अपने आप को क्लेम कर सकता है प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए, तो जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई किया है वो क्यों नहीं क्लेम कर सकता है देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए।" मंत्री ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में आरजेडी का एक भी एमएलसी नहीं करेगा। राज्यसभा चुनाव में आरजेडी कैंडिडेट एडी सिंह की हार पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पर जो व्यक्तिगत प्रहार करता है, तो जनता उन्हें उसी तरीके से जवाब देती है। बता दें कि नीतीश कुमार ने पिछले दिनों राज्यसभा जाने का ऐलान किया। 16 मार्च को हुए चुनाव में वे राज्यसभा चुनाव जीत भी गए। अब वे आने वाले दिनों में सीएम पद से इस्तीफा देंगे और बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। नीतीश के बाद एनडीए में बिहार का अगला सीएम कौन होगा, इस पर अटकलबाजी चल रही है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है, जबकि जेडीयू से किसी को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। नीतीश के राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद उनके बेटे निशांत कुमार भी राजनीति में आ गए। चर्चा यह भी चल रही है कि अप्रैल में बनने वाली एनडीए की नई सरकार में निशांत को डिप्टी सीएम जैसा कुछ बड़ा पद मिल सकता है। निशांत पेशे से इंजीनियर हैं। हालांकि, जेडीयू के अंदर निशांत कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए माहौल भी बनाया जा रहा है। निशांत जहां-जहां जा रहे हैं, वहां जेडीयू कार्यकर्ता उन्हें भावी सीएम के रूप में देख रहे हैं और नारेबाजी भी कर रहे हैं। अब मंत्री अशोक चौधरी के निशांत को लेकर आए बयान ने सूबे की सियासत में बिहार के नए सीएम की चर्चा में ट्विस्ट आ गया है।  

राज्यसभा चुनाव पर कांग्रेस में कलह? MLA बोले- नेता सक्रिय नहीं थे, बयान से मचा सियासी बवाल

पटना. राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता Manoj Biswas के बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पार्टी द्वारा जिस उम्मीदवार को नामित किया गया, वह उन्हें पसंद नहीं था, इसी कारण उन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। मनोज बिस्वास ने यह भी कहा कि इस चुनाव में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष की सक्रिय भागीदारी नजर नहीं आई। उनके अनुसार, ऐसे अहम चुनाव में नेतृत्व की अनुपस्थिति ने कई नेताओं को असहज कर दिया। ‘मतदाताओं की भावना का रखा ख्याल’ उन्होंने कहा कि वे जनता के वोट से विधायक बने हैं और खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन उन्हें मिला है। ऐसे में वे अपने मतदाताओं की भावनाओं के खिलाफ जाकर वोट नहीं दे सकते थे। पार्टी लाइन से अलग दिखा रुख Manoj Biswas का यह रुख पार्टी लाइन से अलग माना जा रहा है। आमतौर पर ऐसे चुनावों में पार्टी व्हिप का पालन किया जाता है, लेकिन इस बार उनका निर्णय अलग नजर आया। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इसे कांग्रेस के भीतर असंतोष का संकेत बता रहे हैं, वहीं पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मंथन शुरू हो सकता है। चुनावी रणनीति पर उठे सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया और रणनीति को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद सामने आए हैं। यह आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। इस घटना ने एक बार फिर पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत असहमति के बीच संतुलन की बहस को हवा दी है। क्या नेताओं को खुलकर असहमति जतानी चाहिए या पार्टी निर्णय का पालन करना चाहिए—यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है। आगे क्या होगा, इस पर नजर अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले पर क्या रुख अपनाता है। क्या इस बयान पर कोई कार्रवाई होगी या इसे व्यक्तिगत राय मानकर नजरअंदाज किया जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

Rajya Sabha Certificate मिला नीतीश कुमार को, संजय का दावा- अब बिहार को मिलेगी नई दिशा

पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित कर दी है। पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने राजनीतिक बढ़त को और मजबूत किया है। पहले से ही संख्या बल एनडीए के पक्ष में होने के कारण नतीजे लगभग तय माने जा रहे थे। इस जीत के साथ मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं। उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने औपचारिक रूप से सौंपा। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। ‘गौरव का क्षण’ बताया संजय झा ने Sanjay Jha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक जीवन जनता की सेवा और बिहार के विकास को समर्पित रहा है। संजय झा के अनुसार, राज्यसभा में नीतीश कुमार की मौजूदगी से बिहार के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी। साथ ही उनके अनुभव का लाभ राज्य सरकार को भी मिलता रहेगा। पहले श्रवण कुमार ने लिया था प्रमाण-पत्र इससे एक दिन पहले Shravan Kumar मुख्यमंत्री की ओर से प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे थे। इसके बाद आज औपचारिक रूप से यह प्रमाण-पत्र सौंपा गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई। विपक्ष पर भी साधा निशाना दिल्ली रवाना होने से पहले संजय झा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए को अपनी जीत पर शुरू से ही भरोसा था। जिन दलों के विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे, उन्हें अपने अंदर झांकने की जरूरत है। ‘संख्या बल में कोई चुनौती नहीं’ उन्होंने कहा कि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत था और किसी तरह की परेशानी नहीं थी। कुछ दल अपने ही विधायकों को संभालने में लगे रहे, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर नजर आई। आगे की राजनीति पर नजर इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में एनडीए का मनोबल और बढ़ गया है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासी दिशा और फैसलों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।