samacharsecretary.com

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज 2026: 25 जुलाई तक करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, जानें प्रदेश की समृद्ध विरासत

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत "बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश"की जिला स्तरीय क्विज 07 अगस्त को होगी आयोजित मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता और उपविजेता टीमों को मिलेगा पर्यटन का आकर्षक उपहार साल 2025 में 24489 विद्यार्थियों ने लिया था उत्साहपूर्वक हिस्सा, 8163 विद्यालयों ने द्वारा कराया गया था पंजीयन भोपाल  मध्यप्रदेश के समृद्धशाली इतिहास, परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विविधताओं, कला, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन की असीम संभावनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 'पर्यटन क्विज-2026' का आयोजन किया जा रहा है। जिला स्तरीय इस क्विज में भाग लेने के लिए विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन पंजीयन 1 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक शाम 5:30 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट    https://www.mptourism.com/tourismquiz2026/schools/ के माध्यम से किया जा सकता है। विद्यार्थियों में पर्यटन के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने, मध्यप्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से जुड़े ज्ञान का संचार करने के उद्देश्स से आयोजित हो रहे इस क्विज में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, सी.बी.एस.ई. (CBSE) एवं केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं से 12वीं के अध्ययनरत छात्र-छात्राएं सहभागिता कर सकते हैं। 7 अगस्त को"बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश" की जिला स्तरीय क्विज मध्य प्रदेश पर्यटन क्विज-2026 "बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश" का जिला स्तरीय आयोजन आगामी 07 अगस्त 2026 को प्रदेश के समस्त जिलों में एक साथ किया जाएगा। पर्यटन क्विज-2026 क्विज में पूछे जाने वाले प्रश्न मध्य प्रदेश के पर्यटन, कला, संस्कृति, धार्मिक, प्राकृतिक परिवेश और ऐतिहासिक संवर्धन पर आधारित होंगे। जिला स्तर पर प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण की लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित शीर्ष 06 टीमों के मध्य द्वितीय चरण में 'ऑडियो-विजुअल/मल्टीमीडिया' आधारित क्विज का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली विद्यालयीन टीम राज्य स्तरीय क्विज में जिले का प्रतिनिधित्व करेगी। साल 2025 में 24,489 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया था हिस्सा मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2016 से (कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020-21 को छोड़कर) प्रतिवर्ष पर्यटन क्विज का सफल आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में आयोजित पर्यटन क्विज को विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह प्राप्त हुआ, जिसमें 24,489 विद्यार्थियों ने भागीदारी की तथा 8,163 विद्यालयों ने अपने विद्यार्थियों का पंजीयन कराया। यह उल्लेखनीय सहभागिता विद्यार्थियों में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पर्यटन क्विज-2026 का ध्येय भी विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों से परिचित कराना, उनमें पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अपने गौरवशाली प्रदेश की विरासत और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ना है, ताकि भावी पीढ़ी प्रदेश की अनमोल धरोहरों से परिचित हो सके।  मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता टीमों को मिलेगा निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का उपहार मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को पर्यटन के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक जिले की प्रथम तीन विजेता टीमों को मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के होटलों में 2 रात्रि एवं 3 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन प्रदान किया जाएगा। वहीं, अगली तीन उपविजेता टीमों को 1 रात्रि एवं 2 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन दिया जाएगा।इन कूपनों के अंतर्गत विद्यार्थियों के आने-जाने, आवास, भोजन तथा स्थानीय भ्रमण का संपूर्ण व्यय मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।  

खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार का कर्तव्य है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लिया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में किया जाए। किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष रूप से सहायक है। किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के केन्द्रों का अधिक से अधिक विस्तार हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत अब तक हुए कार्यक्रमों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे। बैठक में आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्व और त्यौहारों तथा फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। सुगमता और सरलता सुनिश्चित करते हुए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए। सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव और संभागीय मुख्यालयों पर होंगे फूड फेस्टिवल मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि ऑनलाईन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा का शुभारंभ जुलाई माह में ही किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भी होगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मैदानी कार्यकर्ताओं तथा पशुपालकों को पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे और सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल होंगे। इंदौर में होगा सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम बैठक में बताया गया कि खरगौन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अन्तर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुट पालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव के.सी गुप्ता, नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, उमाकांत उमराव, आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।  

CM मोहन यादव ने की बारिश की समीक्षा, अधिकारियों को किसानों को समय पर मार्गदर्शन देने के निर्देश

भोपाल   संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कम बारिश की संभावना को संकट के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय रहते तैयारी करने का अवसर माना जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।  मुख्यमंत्री  यादव ने  कहा कि कम वर्षा की संभावना को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर तैयारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और किसानों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित न हो।अधिकारियों ने बताया कि यादव ने सचिवालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं अन्य विभागों द्वारा अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की। किसानों को वैज्ञानिक खेती और कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाएगा प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तरीके और उचित तैयारी के साथ कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के बारे में जागरूक किया जाए, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बुआई में जल्दबाजी न करें, पर्याप्त नमी के बाद ही करें खेती मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह देने के निर्देश दिए कि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुआई न करें। खेतों में नमी संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही फसल का चयन किया जा सके। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दो वर्षों में जल संरक्षण और जलापूर्ति को मजबूत करने की तैयारी बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर आपूर्ति की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा होगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा। 'जलाभिषेक 2.0' अभियान के तहत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल संरचनाओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा। मनरेगा के सहयोग से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस सरकार सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी। "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही रबी सीजन से पहले नहरों की सफाई और मरम्मत पूरी करने तथा अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। कम पानी वाली खेती और जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना तैयार बैठक में जानकारी दी गई कि दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जलाशयों के संचालन के लिए तय होगा स्पष्ट प्रोटोकॉल सरकार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों के संचालन में तय नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। जल उपयोग की प्राथमिकता में सबसे पहले पेयजल, उसके बाद सिंचाई और अंत में विद्युत उत्पादन रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर रियल-टाइम जल डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे जलाशयों और जल संसाधनों की लगातार निगरानी की जा सके। "जल गंगा संवर्धन" अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए अलग आकस्मिक योजना तैयार होगी। फसल बीमा, डिजिटल सर्वे और सोशल मीडिया से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के तहत फसल क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के अधिकारियों का संयुक्त प्रशिक्षण पहले ही पूरा कराया जाएगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और दावों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यवाही की जा रही है। राज्य स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उन्नत बीज वितरण, फसल प्रदर्शन और बलराम तालाब योजना के तहत वर्षा जल संरक्षण के लक्ष्य जिलों को दिए जा चुके हैं। सरकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, खेती से जुड़ी सलाह और आवश्यक जानकारी लगातार उपलब्ध कराएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों को सिंचाई, जलभराव, जीवन रक्षक … Read more

सरकारी नौकरी का मौका! MPESB में कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर आज से आवेदन, जानें योग्यता

भोपाल   मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), भोपाल ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रुप-2, सब-ग्रुप-1 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,784 रिक्तियां भरी जाएंगी। इच्छुक उम्मीदवार 17 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आज से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अभ्यर्थी 17 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 2 अगस्त से भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह भर्ती परीक्षा समूह-2, उप समूह-1 के तहत आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 73% आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती में राज्य की आरक्षण व्यवस्था लागू की है। अनुसूचित जाति (SC) को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत (न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 73 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर परिणाम घोषित किए जाएंगे। आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट इस भर्ती में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। 2 अगस्त को दो पालियों में होगी परीक्षा कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा में आधार सत्यापन अनिवार्य परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र भी साथ लाना होगा। पहचान पत्र के बिना परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। परीक्षा शुरू होने के बाद से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन उम्मीदवारों को आवेदन की पात्रता नहीं कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष भी इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे करें आवेदन योग्य और पात्र अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 17 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी नियम – परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक (आधार आधारित) सत्यापन अनिवार्य होगा। – प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी है। – परीक्षा केंद्र पर तय रिपोर्टिंग समय के बाद एंट्री नहीं मिलेगी। – मोबाइल, स्मार्ट वॉच और कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बैन रहेंगे। – परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर खत्म होने से पहले उम्मीदवार कक्ष नहीं छोड़ सकेंगे। ये लोग नहीं कर पाएंगे आवेदन – जिन उम्मीदवारों के 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते। – यदि पुरुष का विवाह 21 वर्ष और महिला का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हुआ हैए तो वे पात्र नहीं होंगे। – महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी सिद्ध पाए गए पुरुष आवेदक भी इस भर्ती के लिए अयोग्य होंगे। – योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन?     आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक होगा।      आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है।     अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है।     SC/ST/OBC/EWS/PwD, महिला उम्मीदवार, पूर्व सैनिक एवं संविदा कर्मचारी न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं।     पूर्व सैनिकों को सेवा अवधि के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ भी मिलेगा।     आयु में छूट मध्य प्रदेश शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।  

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर बनेगा वैदिक अध्ययन और भारतीय दर्शन का प्रमुख केंद्र: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  

इंदौर दुष्कर्म केस: हिंदू नाम बताकर संबंध बनाने का आरोप, पीड़िता सिलीगुड़ी से पहुंची मध्य प्रदेश

 इंदौर  धार्मिक पहचान छुपाकर गायिका के साथ दुष्कर्म करने वाले मुस्लिम युवक को बाणगंगा पुलिस ने गिरफ्तार किया है।उसने अपना नाम राहुल बताकर युवती से दोस्ती की और बातचीत के बहाने कमरे पर ले गया। वहां जबरन संबंध बनाए, विरोध करने पर मांग पर सिंदूर भर दिया और कहने लगा आज से वह उसका पति हो गया। बाणगंगा थाने के टीआइ सियारामसिंह गुर्जर के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम अगस्त 2024 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हुआ। पीड़िता वहां एक इवेंट के लिए गई थी। बाद में जब उसे पता चला कि राहुल मुस्लिम है, उसका पूरा नाम मोहम्मद राहुल पुत्र अब्दुल शेख है और उसके कई लड़कियों से संबंध हैं तो विरोध जताया। आरोपित ने युवती को कमरे में कैद कर लिया और मारपीट करने लगा। अक्टूबर 2025 में पीड़िता किसी तरह उसके चंगुल से निकली और दिल्ली में रहने वाली सहेली के पास पहुंची। वहां उसने बच्चे को जन्म दिया। इस साल मार्च में पीड़िता इंदौर में बेटे को लेकर मां के साथ रहने लगी। आरोपित उससे मिलने के बहाने इंदौर पहुंचा और पुन: संबंध बनाए। बाद में मारपीट भी की। पीड़िता ने हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं की मदद ली और आरोपित को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। टीआइ के अनुसार, आरोपित पुलिस को बरगला रहा है।

प्रजनन अधिकार पर अहम फैसला, इंदौर हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी को दी गर्भपात की इजाजत

इंदौर  इंदौर हाई कोर्ट ने एक महिला को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. महिला अपने पति से काफी दिनों से अलग रह रही थी और दोनों के बीच तलाक को लेकर सहमति भी बन गई थी. लेकिन पति के मुकर जाने के बाद और कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं होने के चलते इंदौर हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में पीड़िता को इस तरह की अनुमति दी है. कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत यह फैसला सुनाया है।  गर्भवती महिला ने लगाई थी याचिका इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ में महिला की ओर से एक याचिका लगाई गई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिला पति से अलग रह रही है और आगे वैवाहिक संबंध नहीं रखना चाहती है. ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसे अपनी प्रजनन संबंधित स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है. इसी कानून के तहत उसे गर्भपात करने की अनुमति दी जाना चाहिए।  कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ पति बता दें कि पति-पत्नी दोनों में तलाक को लेकर सहमति बन गई थी, लेकिन इसी दौरान पति तलाक देने से मुकर गया जिसके चलते कोर्ट ने उसे नोटिस जारी किया. लेकिन वह कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और लेकिन उसके बाद भी पति-पत्नी अलग रह रहे थे. पत्नी ने गर्भपात करवाने को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की शरण ली और कोर्ट को उसके द्वारा इस बात की जानकारी दी कि उसे 13 हफ्ते का गर्भ है. कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद उसे गर्भपात करने की अनुमति दे दी है. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने यह भी कहा है कि, महिला को गर्भपात के लिए पति की सहमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पति उससे अलग रह रहा है।  क्या है मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट एक मौलिक मानवाधिकार है, जो महिलाओं को परिवार नियोजन, गर्भधारण करने या न करने, और बच्चों की संख्या व अंतराल के बारे में फैसला करने का अधिकार देता है. खास बात यह है कि, पति-पत्नी के बीच चल रहा अलगाव भी अबॉर्शन की अनुमति के लिए एक वैध और कानूनी आधार माना जा सकता है। 

मध्य प्रदेश में बारिश का कहर, उज्जैन में शिप्रा नदी उफान पर; इंदौर की सड़कें दरिया, भोपाल में लंबा जाम

उज्जैन /भोपाल /इंदौर  मध्य प्रदेश में मौसम लगातार करवट ले रहा है, जहां जुलाई की शुरुआत में हुई मूसलाधार बारिश ने एमपी में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. बुधवार शाम से देर रात तक हुई बारिश के कारण प्रदेश के कई शहरों में जलभराव हो गया और नालों में तेज बहाव की स्थिति बन गई. इंदौर और भोपाल में बारिश का कहर देखने को मिला. इंदौर में तेज बारिश जानलेवा साबित हुई. शहर में अलग-अलग स्थानों पर दो युवक नालों के तेज बहाव में बह गए।  इस दौरान उज्जैन के इंगोरिया थाना क्षेत्र के गांव गांवड़ी लोधा में सहायक सचिव नाले में बह गए, जिनका शुक्रवार सुबह तक कोई सुराग नहीं लग पाया. वहीं, एक युवक रपट पुलिया पार करने के दौरान बाइक सहित पानी के तेज बहाव के साथ बह गया. गनीमत रही कि वह तैरने जानता था, जिससे तैरकर वह किनारे पहुंचा और झाड़ियां पकड़ कर अपनी जान बचा ली. लेकिन इस घटना में उसी बाइक पानी में बह गई. वहीं, इंदौर में नाले में बहकर 2 युवकों की मौत हो गई है।  सहायक सचिव नहीं मिला कोई सुराग इंगोरिया थाना प्रभारी दीपेश व्यास ने बताया, "गांवड़ी लोधा ग्राम पंचायत के सहायक सचिव सूर्य प्रताप सिंह सोनगरा गुरुवार शाम 07:30 बजे करीब घर लौट रहे थे. तभी नाले पर बनी पुलिया को बाइक से पार करने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वे बाइक सहित बह गए." इस मामले में होमगार्ड की प्लाटून कमांडर शीला ने बताया, "बड़नगर से जवानों को भेज दिया गया है. रात होने के कारण रेस्क्यू संभव नहीं हो पाया है. रेस्क्यू टीम सुबह 6 बजे रवाना होगी." रात के करीब 1 बजे सहायक सचिव की बाइक मिली, तो लोगों को उम्मीद जगी, लेकिन शुक्रवार सुबह तक सहायक सचिव का कोई सुराग नहीं मिला है।  मंडला में जलमग्न हुई सड़कें मंडला नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 14 सुभाष वार्ड में पहली ही बारिश पूरी सड़क जलमग्न हो गई. गंदा पानी कई घरों में घुस गया. करीब एक घंटे बाद सड़क से पानी तो उतर गया, लेकिन पूरी सड़क पर कीचड़ और गंदगी फैल गई. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनसुनवाई के दौरान नगरपालिका अधिकारियों ने 1 सप्ताह में समस्या के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जलभराव के कारण भविष्य में कोई दुर्घटना, जनहानि या अन्य अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका प्रशासन की होगी।  निगम मुख्यालय में पहली बारिश में भरा पानी मध्य प्रदेश के नए निगम मुख्यालय में पहली बारिश में ही पानी घुस गया. इससे करोड़ों रुपए के बने नए भवन की पोल खुल गई है. लगभग 75 करोड रुपए में बनी बिल्डिंग का पिछले महीने ही लोकार्पण हुआ था. नगर निगम के नए मुख्यालय में तेज बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भर गया. अब बारिश के बाद आधुनिक निगम मुख्यालय वॉटर लॉबी बना नजर आया।  थोड़ी बारिश में सड़कें हुई लबालब इसके अलावा भोपाल के कई क्षेत्रों में थोड़ी बारिश के बाद ही सड़कें लबालब हो गईं. तेज बारिश में निचले इलाकों में वाटर लॉगिंग की समस्या साफ दिखाई दी. इससे भोपाल नगर निगम के दावों की पोल खोल दी. सड़क किनारे के छोटे नाले भी कई जगह ओवरफ्लो दिखाई दिए. इसके अलावा बारिश की वजह से सड़कों पर लंबा जाम लग गया और धीमी गति से वाहन रेंगते हुए नजर आए।  जबलपुर में तेज बहाव में बह गई बोलेरो जबलपुर में सुबह से लगातार बारिश हो रही है. बेलखेड़ा क्षेत्र में नाले उफान पर हैं. इस दौरान उफनते नाला पार करते समय बड़ा हादसा हो गया, जब बोलेरो नाले में बह गई. इसमें ड्राइवर की मौके पर मौत हो गई और तीन लोग बोलेरो का शीशा तोड़कर बाहर निकल आए. मृतक ड्राइवर का नाम रवि पिल्ले बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि नाले में तीन फुट से ज्यादा पानी था. पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।  उज्जैन में बारिश के बाद जलभराव उज्जैन में हुई बारिश के बाद जगह-जगह जल भराव की स्थिति नजर आई. नई सड़क, बहादुर गंज, चामुंडा माता मंदिर चौराहा, इंदौर गेट, गदा पुलिया, नीलगंगा, एटलस चौराहा से लेकर ऐसे तमाम जगहों पर पानी भरा हुआ नजर आया. वहीं ग्राम पंचायत गांवड़ी लोधा में पानी के तेज बहाव में अपनी टूव्हीलर बाइक सहित गांव में ही खंती में बहे सहायक सचिव बह गए. सहायक सचिव का नाम सूर्य प्रताप सिंह सोनगरा है।  पिता के लिए खाना ले जाते समय नाले में बहा युवक इंदौर में बारिश के दौरान जलभराव हो गया. इसी दौरान लसूड़िया मोरी निवासी 34 साल के गोलू पंवार रात करीब 9 बजे अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था. नाले के किनारे से गुजरते समय उसका पैर फिसला और वह नाले के तेज बहाव में बह गया. सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया. गुरुवार सुबह गोलू का शव बरामद कर लिया गया।  वहीं इंदौर के अहीरखेड़ी क्षेत्र में महेश चौहान अपने दोस्त मनीष के साथ पुल की रपट पार कर रहा था. अचानक दोनों नाले के तेज बहाव में बह गए. मनीष किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन महेश अब भी लापता है. पुलिस और रेस्क्यू टीम आसपास के नालों और नदी किनारों पर लगातार उसकी तलाश कर रही है. प्रशासन ने लोगों से बारिश के दौरान नालों, पुलिया और रपट पार नहीं करने तथा सतर्क रहने की अपील की है।  पुलिस ने लोगों से की अपील एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल एक युवक का शव बरामद हो चुका है, जबकि नाले में बहा दूसरा युवक अब भी लापता है. पुलिस और एसडीआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक जोखिम नहीं उठाने और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। 

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. साहा बोले- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास की नई ऊंचाइयों पर भारत

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है: त्रिपुरा मुख्यमंत्री डॉ. साहा ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान, शोध और प्रशिक्षण का सशक्त मंच है MIDCOMS : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 28 वें AOMSI मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस एवं 14 वें पीजी कन्वेंशन—MIDCOMS 2026 का किया शुभारंभ भोपाल त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तीव्र गति से परिवर्तन और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, अधोसंरचना और तकनीक सहित सभी क्षेत्रों में देश की प्रगति उल्लेखनीय है। डॉ. साहा भोपाल में एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया (AOMSI) के 28वें मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस एवं 14वें पीजी कन्वेंशन—MIDCOMS 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी जैसे विशेषज्ञता आधारित क्षेत्रों में निरंतर प्रशिक्षण, शोध और आधुनिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के सम्मेलन चिकित्सकों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने तथा नवीनतम उपचार पद्धतियों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. साहा ने कहा कि त्रिपुरा में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। एमबीबीएस सीटों में कई गुना वृद्धि की गई है। राज्य ने जीएसटी संग्रह, कानून-व्यवस्था एवं अन्य विकास संकेतकों में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि बेहतर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा एवं उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन भी किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सशक्त अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, आयुष्मान भारत योजना, चिकित्सा शिक्षा विस्तार, टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से देश का स्वास्थ्य क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी चिकित्सा शिक्षा, सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं, ट्रॉमा केयर और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि MIDCOMS 2026 जैसे राष्ट्रीय सम्मेलन युवा सर्जनों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध और नवाचार से जोड़ते हैं। देश के वरिष्ठ विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उन्हें अधिक दक्ष, आत्मविश्वासी और संवेदनशील चिकित्सक बनने के लिए प्रेरित करेगा। AOMSI के अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। पीपुल्स ग्रुप के वाइस चेयरमैन रोहित पंडित AOMSI के महासचिव डॉ. कलारामन बालारामन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से आए 1300 से अधिक ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन, विशेषज्ञ, शिक्षकगण, स्नातकोत्तर विद्यार्थी एवं प्रतिनिधिगण भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में नवीनतम शोध, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण एवं नवाचार पर विचार-विमर्श किया जाएगा।  

होम गार्ड्स की कराएं भर्ती, अग्निवीरों को दिया जाएगा सुरक्षा बलों की नियुक्ति में आरक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

"स्कूल चलें अभियान के दौरान ही कराएं सांदीपनि विद्यालय भवनों का लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव होम गार्ड्स की कराएं भर्ती, अग्निवीरों को दिया जाएगा सुरक्षा बलों की नियुक्ति में आरक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समय पाबंदी के लिए मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल में लगाई जाएंगी बॉयोमेट्रिक मशीन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भेल से भूमि वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से करें समन्वय यूनियन कार्बाइड की भूमि पर बनेगा भव्य स्मारक ग्रामीण क्षेत्रों आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए चलेगा अभियान धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों पर धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र निर्माण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न प्रासंगिक विषयों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्यवाही की समीक्षा बैठक लेकर दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन की प्राथमिकता वाले विषयों पर त्वरित कार्यवाही की जाए। अभियान चलाकर लक्ष्य पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन दिनों स्कूल चलो अभियान चल रहा है। 15 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान अधिकाधिक सांदीपनि विद्यालय भवनों को लोकार्पण एवं स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसी सत्र में अधिकतम लाभ मिल  सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश का सबसे बड़ा उत्कृष्ट नवाचार है। स्कूल शिक्षा विभाग इसकी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग के लिए कार्य योजना तैयार करे। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। यहां सती अनुसुईया मंदिर परिसर, सती अनुसुईया मल्टी फैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर का निर्माण होना है, यह काम तेजी से पूरा कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार तैयार है। जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री की बैठक में इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थलों (जैसे माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा, मैहर आदि) में धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र, प्याऊ, पेयजल टंकी, अस्पताल एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवन निर्माण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया जाए। यह प्रोत्साहन रजिस्ट्री शुल्क में छूट, अनुदान या अन्य रियायत स्वरूप में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर विभागों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्य योजना (कार्यवाही) के संबंध में समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड (भेल) को शासन द्वारा दी गई जमीन की भेल के लिए वर्तमान में अनुपयोगी भूमि उनसे वापस लेने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय से समन्वय कर यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की रासायनिक कचरे से मुक्त भूमि पर एक भव्य स्मारक का निर्माण होना है, इसके लिए एप्को कार्य योजना तैयार करे और वर्तमान में गुजरात के भुज में तैयार म्यूजियम का मौका मुआयना कर भोपाल में भी ऐसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए विधिवत् प्रस्ताव दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए राज्य के 53 हजार गांवों में अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस अभियान व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए गाँव-गाँव शिविर लगाकर ग्रामीणों के पंजीयन किए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रकिया को और भी सरल बनाया जाए। ग्रीष्मकाल में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था के लिए पहले से बेहतर तैयारी कर ली जाए। इस वर्ष प्रदेश के किसी भी जिले में पेयजल परिवहन की स्थिति निर्मित नहीं हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में महाकालेश्वर मंदिर की तरह होमगार्ड्स के पदों का सृजन किया जाए और मंदिर समिति के वहन पर इनकी नियुक्ति की जाए। अग्निवीरों को मध्यप्रदेश पुलिस में विशेष सशस्त्र बल (आरक्षक पद) की नियुक्ति में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव गृह को निर्देशित किया कि वे इस संबंध में अतिशीघ्र कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन की व्यवस्था है कि सभी शासकीय सेवक कार्य दिवसों में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक कार्यालय में रहकर अपने पदेन कार्य  सम्पन्न करें। समय की पाबंदी सबके लिए जरूरी है। राज्य मंत्रालय, विध्याचल एवं सतपुड़ा में  अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तय समय पर उपस्थिति एवं रवानगी के लिए बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभाग अपने-अपने स्कूल चला रहे हैं, इन सभी स्कूलों को युक्तियुक्तकरण किया जाए। सभी वर्गों के छात्रावासों को संयुक्त रूप से एक छात्रावास में परिवर्तित कर विद्यार्थियों को यहां रखा जाए। इससे उनमें समरसता का भाव विकसित होगा। इन्हें समरसता छात्रावास का नाम दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट एवं ममलेश्वर के विकास के लिए भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए वन भूमि का उपयोग कर लिया जाए। बताया गया कि इस कार्य के निमित्त भूमि आवंटन की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम वन गमनपथ परियोजना एवं श्रीकृष्ण पाथेय के निर्माण में तेजी लाएं और इसे समय-सीमा में पूरा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की दताना-मताना हवाई पट्टी के स्थान पर नवीन हवाई अड्डे के निर्माण कार्य में शीघ्र कार्यवाही की जाए। प्रयास करें कि यहां जल्द से जल्द यहां भूमि-पूजन कर लिया लाए। बताया गया कि नए हवाई अड्डे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए धारा 11 की कार्रवाई भी की जा चुकी है। जल्द ही नवीन हवाई अड्डे निर्माण का भूमि-पूजन करवाया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागों के अधिकारियों को दिए गए लक्ष्यों की जल्द से जल्द पूर्ति के लिए कार्य योजना बनाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।