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दो दिवसीय पुलिस महानिरीक्षक जोन/विसबल जोन की त्रैमासिक समीक्षा बैठक संपन्न

भोपाल.  पुलिस मुख्यालय भोपाल के कॉन्फ्रेंस हॉल मेंआयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की। बैठक के समापन अवसर पर पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े। डीजीपी मकवाणा ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत प्रस्तुत कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए। डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके। उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर उनका प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें। सीसीटीवी नेटवर्क, सेफगार्ड योजना एवं संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए।सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके। डीजीपी ने उपलब्ध मानव संसाधनों के समुचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देशित किया कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर पर पदस्थापना की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार संसाधनों का पुनर्विन्यास किया जाए। उन्होंने पुराने अभिलेख एवं आदेशों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी जिलों को पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का व्यवस्थित जिलेवार प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने तथा वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य डीजीपी मकवाणा ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी प्रकार अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह अभियान केंद्र सरकार एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध रूप से “ड्रग फ्री जोन” बनाने के निर्देश दिए। डीजीपी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में पुलिस कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण हेतु जिला पुलिस अधीक्षक प्रतिमाह सिविल सर्जन के साथ बैठक आयोजित करें। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए तथा चिन्हित अस्पतालों के साथ एमओयू कर उपचार एवं भर्ती की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाया जाए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण और क्रम से निराकरण सुनिश्चित करने तथा नियमित जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित कर समीक्षा बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जोनल स्तर पर प्रत्येक माह विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं एवं अभियानों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए। कार्यों को व्यवस्थितएवं परिणामोन्मुख तरीके से संचालित किया जाए। प्राथमिक जांचों एवं अन्य लंबित प्रकरणों को बिना अंतिम निष्कर्ष के लंबित न रखा जाए, बल्कि उन्हें तार्किक एवं विधिसम्मत परिणाम तक पहुंचाया जाए। विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली एवं अपराध नियंत्रण की हुई विस्तृत समीक्षा दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, विसबलजोनों के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा कर प्रभावी पुलिसिंग के लिए रणनीति तैयार करना था। समीक्षा के दौरान मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती तथा मॉबलिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की स्थिति का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण किया गया। अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों एवं आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा हुई। न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों, अवमानना प्रकरणों, सेवा संबंधी दावों, रिट याचिकाओं, स्थगन आदेशों तथा समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को न्यायालयीन मामलों की सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों तथा विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों से संबंधित लंबित प्रशासनिक मामलों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त सूबेदार, निरीक्षक एवं रक्षित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विगत छह माह में की गई कार्यवाहियों, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को कर रही है प्रोत्साहित

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है। छोटे उद्योग करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। हमारा उद्देश्य वर्ष 2047 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई स्थापित करने का है। सूक्ष्म, लघु, और मध्यम उद्यम प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर जिले में उद्योग, हर परिवार में रोजगार और हर युवा को अवसर देना राज्य सरकार का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। जिस प्रकार हर 12 वर्ष में सिंहस्थ स्नान का अवसर मिलता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन के 12 वर्ष से देशवासियों को अमृत स्नान का अवसर प्राप्त हुआ है। बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एमएसएमई क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से प्रोत्साहन राशि और हितलाभ वितरण के लिए आयोजित 'समृद्ध एमएसएमई- विकसित मध्यप्रदेश' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन के लिए संचालित गतिविधियों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औद्योगिक संगठनों ने किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया। साथ ही 31 मार्च 2026 तक की समस्त देयताओं का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को दो करोड़ 02 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को एक करोड़ 07 लाख रुपये मण्डीशुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों का विद्युत टैरिफ रुपए तीन करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण सिंगल क्लिक से किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी किया। विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा, अलाना ग्रुप के संस्थापक सुराशि बहल मेहरा और उद्यमी कुणाल ज्ञानी ने मध्यप्रदेश में उद्यम स्थापित करने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिक्की के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सरवैया तथा उद्यमी श्रीमती प्रतिभा यादव, डॉ. सुरेश दुबे, दिनेश चंदवानी, यशराज वर्मा से संवाद भी किया। 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को मिला रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमशीलता और नवाचारों में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी है। प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 4 लाख 41 हजार से अधिक इकाइयों की कमान बहनें संभाल रही हैं, यह महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी है। आगामी ढाई वर्षों में 4 हजार 500 करोड़ रुपये देकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती देने का लक्ष्य है। एमएसएमई विकास, नीति उद्यमियों को मजबूती प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत निवेश पर 40 प्रतिशत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 60 प्रतिशत तक प्रोत्साहन तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों को 8 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा रही है। एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए नियमों को सरल किया गया है। पिछले ढाई वर्षों में 30 नए औद्योगिक क्षेत्र और 14 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही 1 हजार 63 भूखंड, उद्यमियों को आवंटित किए जा चुके है। आने वाले ढाई वर्षों में 60 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर विकसित करने और 6 हजार से अधिक भू-खंड नए उद्यमियों को देने का लक्ष्य है। सरकार द्वारा दी जा रही सहायता केवलू अनुदान नहीं, बल्कि उद्यमियों के सपनों को गति देने का माध्यम है। इससे नए उद्योग स्थापित होंगे, उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को इससे नए अवसर प्राप्त होंगे। मध्यप्रदेश के उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। सरकार तकनीक, वित्त और आवश्यक मार्गदर्शन देकर स्थानीय उद्यमों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्टार्ट-अप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को "लीडर" श्रेणी का सम्मान मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 7 हजार 400 से अधिक हो चुकी है, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत 3 हजार 400 से अधिक स्टार्ट-अप्स का नेतृत्व हमारी बहनें कर रही हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' के तहत पिछले ढाई वर्षों में 23 हजार 500 से अधिक युवाओं को 1 हजार 630 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। स्टार्टअप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को "लीडर" श्रेणी का सम्मान मिला है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर हो। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सब्सिडी युक्त 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर को-वर्किंग स्पेस तैयार किए जाएंगे। राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों से प्रदेश के युवा उद्यमी वैश्विक स्तर पर बना रहे हैं पहचान सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को औद्योगिक विकास में आगे रखने के लिए अनथक परिश्रम किया है। वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभी वर्ग के उद्यमियों के साथ संवाद कर रहे हैं। प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अभूतपूर्व विकास हुआ है। प्रदेश की जीडीपी में कृषि की 40 प्रतिशत और उद्योगों की हिस्सेदारी मात्र 19 प्रतिशत थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे बदलने का संकल्प लिया है, उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश बदल रहा है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों के परिणाम स्वरूप प्रदेश के युवा उद्यमी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – मातृ शक्ति का आशीर्वाद बना संबल, विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुन्देलखंड की धरती ने अपने गौरवशाली अतीत को संजोकर रखा है। बुन्देलखंड के वीरों ने अतीत से लेकर आज तक देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। मातृ शक्ति का आशीर्वाद सरकार के लिए संबल प्रदान कर रहा है। उनकी सहभागिता एवं नेतृत्व के माध्यम से आज मध्यप्रदेश विकास पथ पर आगे बढ़ता हुआ भारत को विकसित बनाने में अपना सहयोग दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर जिले के केसली में रविवार को आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 190.85 करोड़ रुपये की लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करते हुए शिलापट्टिका का अनावरण किया। इसमें लगभग 68.83 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 25 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं 122.02 करोड़ रुपये की लागत से 28 कार्यों का भूमि-पूजन कर लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृ शक्ति का सशक्तिकरण और उनका नेतृत्व वर्तमान की आवश्यकता है और सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार का कार्य कर रही है। लाड़ली बहना योजना तीसरे साल में प्रवेश कर रही है, जिसके माध्यम से प्रत्येक माह बहनों के बैंक खातों में राशि प्रदान की जा रही है। लाड़ली बहना योजना हमारी माताओं बहनों के आर्थिक स्वावलंबन का आधार बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे सुखद बात क्या हो सकती है कि लाड़ली बहना योजना से मिली राशि से बहनें अपने परिवार के संचालन में सहयोग कर रही हैं। यह उनका समर्पण है, उनका अपना त्याग है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक स्तर में बड़ा सुधार आया है। उन्होंने कहा कि बहनों एवं मातृशक्ति के आशीर्वाद से राज्य सरकार निरंतर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आज उनके मन में शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का विश्वास बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। उनके खेतों के लिए पानी की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का है। जब किसान के खेत में पानी आता है तो उसके साथ उसके जीवन में बदलाव आता है। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए भी सरकार कार्य कर रही है। जहाँ सरकार ने गौमाताओं के लिए प्रतिदिन खर्च को बढाया है, वहीं दुग्ध उत्पादन एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए सरकार योजनाएं चला रही है एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों तक लगातार प्रधानमंत्री पद रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की लोकल्याणकारी योजनओं के माध्यम से आज जरूरतमंदों को आवास, स्वास्थ्य सहित समस्त सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अनेक कार्य किए जा रहे है। आवासहीनों को आवास, भूमिहीनों को भूमि के पट्टे मिल रहे हैं और महिलाओं को संबल मिल रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं की समाज एवं परिवार में स्थिति मजबूत हुई है। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि सरकार द्वारा आपके लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, पात्रता अनुसार उनका लाभ उठाइए। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केसली में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने केसली में सांदीपनि विद्यालय सेकण्ड फेज का कार्य प्रारंभ करने, शासकीय हाई स्कूल चिरचिटा सुखजू में हायर सेकण्डरी स्कूल तक उन्नयन करने, शासकीय हाई स्कूल देवरी, नाहरमऊ, नन्ही देवरी का उन्नयन करने, कृषि उपज मंडी केसली का नाम रानी अवंतिबाई के नाम पर रखने, देवरी में 100 बिस्तरों का अस्पताल स्टाफ सहित प्रारंभ करने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री ने केसली क्षेत्र में थावरी जलाशय (लागत लगभग 550 करोड़) की योजना को स्वीकृति दी तथा कहा कि किसानों की इस बहुप्रतीक्षित मांग से क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आएगी। मुख्यमंत्री ने देवरी में प्याज और लहसुन की खरीदी के लिए मंडी में खरीदी केन्द्र बनाने की घोषणा की। शासकीय महाविद्यालय देवरी में विज्ञान संकाय तथा कला संकाय में राजनीति विषय का आरंभ करने, केसली महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्ररंभ करने, देवरी नगर का नाम देवपुरी करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप देवखंडेराव मंदिर का पर्यटन स्थल के रूप में विकास किया जाएगा। ग्राम पंचायत गौरझामर एवं ग्राम पंचायत केसली को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। जनसामान्य में दिखा अपार उत्साह, मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहनों पर की पुष्पवर्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सागर जिले के देवरी विधानसभा अंतर्गत केसली ब्लॉक में यह पहला और महत्वपूर्ण आगमन था। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में उनका यह पहला दौरा था, जिसे लेकर स्थानीय जनता और प्रशासन में भारी उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैंप से लाड़ली बहनों के बीच पहुंचकर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कार्यक्रम में उपस्थित लाड़ली बहनों में उत्साह एवं उल्लास देखने को मिला। इस अवसर पर महिलाओं ने धन्यवाद लाड़ले भैया लिखे प्लेकार्ड प्रदर्शित कर मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। लाड़ली बहनों संग खेला सितोलिया, 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर जिले के केसली में एक बेहद अनूठे और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहाँ लाड़ली बहनों के साथ पारंपरिक खेल सितोलिया (पिट्टू) खेलकर 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न केवल कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद मैदान में उतरकर खेलों में सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें बच्चों व युवाओं की तरह पारंपरिक खेल खेलते देख वहाँ मौजूद महिलाओं और लाड़ली बहनों का उत्साह दोगुना हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को स्वस्थ, जागरूक और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। हितग्राहियों को वितरित किए … Read more

वन्यजीव संरक्षण, जल सुरक्षा और हरित भविष्य की आधारशिला हैं वन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया है। इस पहल से पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, साथ ही 68 हजार किलोग्राम कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन की रोकथाम भी हुई है। इतना ही नहीं, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्थानीय वन समितियों को लगभग 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। वन विभाग द्वारा वर्ष-2025 के विभिन्न पौधरोपण स्थलों पर रोपण कार्य पूरा होने के बाद शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों के संग्रहण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके उपरांत संग्रहित सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक किया गया, जिससे उसका सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (एनर्जी रिकवरी) के लिए अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां तथा इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी उन्नत तकनीकों के कारण इस प्रकार के अपशिष्ट का निस्तारण सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। यह व्यवस्था खुले में प्लास्टिक जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है। वन विभाग के अनुसार पौधरोपण के बाद पॉलीबैग्स् को वन क्षेत्रों में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में परिवर्तित होकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। अभियान की विशेष उपलब्धि यह है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आय का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, सामुदायिक विकास तथा जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे वन संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी को भी और अधिक मजबूती मिलेगी। दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल जन-सहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों एवं नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल वन क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संवर्धन के लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।  

मध्य प्रदेश में गन्ना बनेगा तरक्की का इंजन, एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां; किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर गाड़ियां पेट्रोल-डीजल से नहीं, बल्कि खेतों में लहलहाने वाले गन्ने के रस से बने एथेनॉल से दौड़ती नजर आएंगी। भारत सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। गन्ने के जूस से बनता है एथेनॉल, MP के इन जिलों को होगा सीधा फायदा एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के बाद बचे उप-उत्पाद (मोलासेस) से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है। मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। महाकौशल और निमाड़ क्षेत्र: नरसिंहपुर (प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला), छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है। मालवा और चंबल क्षेत्र: उज्जैन, धार, और ग्वालियर-दतिया के बेल्ट में भी किसान बड़े पैमाने पर गन्ना उगाते हैं। अब तक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल चीनी मिलों या स्थानीय गुड़ और खांडसारी उद्योग पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर भुगतान में देरी और सही दाम न मिलने की समस्या होती थी। लेकिन एथेनॉल की मांग 100% होने से अब गन्ने की सीधी खपत एथेनॉल प्लांटों में होगी। कच्चे तेल का आयात घटेगा, प्रदेश में पैदा होगा रोजगार मध्य प्रदेश में वर्तमान में कई चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी और एथेनॉल प्लांट जुड़े हुए हैं। गडकरी के इस फैसले के बाद राज्य में नए एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में निवेश बढ़ेगा। सस्ता और घरेलू ईंधन: चूंकि एथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी और घरेलू स्तर पर तैयार होता है, इसलिए इसे खाड़ी देशों से आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता भी पड़ेगा। प्रदूषण से मुक्ति: मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में यह ईंधन मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि एथेनॉल से चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। डेढ़ महीने में आ रही हैं गाड़ियां, किसानों को मिलेगा 'ग्रीन गोल्ड' का दाम केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां अगले डेढ़ महीने में 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) बाजार में उतार रही हैं। जैसे ही ये गाड़ियां सड़कों पर आएंगी, ईंधन की मांग बढ़ेगी। जानकारों का मानना है कि इस नीति से मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गन्ना अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि 'ग्रीन गोल्ड' (हरा सोना) बन जाएगा, जिससे उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

मूक-बधिर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार

पीथमपुर/धार. पीथमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक संवेदनशील व मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक युवक ने अपने पड़ोस में रहने वाली मूक-बधिर नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया। नाबालिग के गर्भवती होने पर बढ़ता पेट देख स्वजनों को शंका हुई और उससे इशारे में पूछा और फोटो दिखाने पर आरोपित के बारे में बताया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, पक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार नाबालिग मूक-बधिर किशोरी का युवक के घर आना-जाना था। युवक ने इसका फायदा उठाते हुए किशोरी से कई बार दुष्कर्म किया। इससे किशोरी गर्भवती हो गई। इस बात का खुलासा 3 जून को हुआ जब पिता ने बेटी का पेट असामान्य रूप से बढ़ा हुआ देखा। इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई अनहोनी की आशंका होने पर जब माता-पिता ने इशारों में पूछताछ की, तो बेटी रोने लगी। इसके बाद इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई। पिता ने किशोरी को आरोपित का फोटो दिखाया तो उसने पहचान की। पहले पीड़िता का परिवार सामाजिक बदनामी और डर के कारण शांत रहा, पर बाद में हिम्मत जुटा कर 11 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया पीड़िता के नाबालिग और दिव्यांग होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। वर्तमान में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसका सटीक कानूनी बयान दर्ज कराने के लिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। जिससे आरोपित को सख्त सजा दिलाई जा सके।

मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए खुशखबरी, सीएम मोहन यादव बोले- पुलिस भर्ती प्रक्रिया होगी नियमित

भोपाल. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि पूरी कोशिश है कि पुलिस के स्वीकृत पदों में एक भी रिक्त नहीं रहे। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। हां, पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे। उन्होंने यह भी कहा कि संभागीय स्तर पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकें होंगी, जिनमें वह खुद भी उपस्थित रहेंगे। पुलिस मुख्यालय में शनिवार को आईजी कांफ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा, थानों में शुचिता का माहौल रहे। पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, गश्त बढ़ाएं। देखें कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए। वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण करें और निगरानी भी करें। वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए। यह देखा जाए कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत करे। कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित निगरानी होगी। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, समस्त जोनल पुलिस महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साइबर अपराधों की रोकथाम को दें सर्वोच्च प्राथमिकता- सीएम सीएम ने आगे कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरुकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए। सांप्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा, धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को प्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। सांप्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा।

राजघराना गोलीकांड में नया मोड़: बाबा राजा ने सुनीता सिंह से रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बताई सच्चाई

सतना. नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में 11 जून को हुए चर्चित गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है। घटना के चार दिन बाद रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा पहली बार मीडिया के सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम में अपना पक्ष रखा। रुपेन्द्र सिंह ने बताया कि सुनीता को बार-बार मेरी दूसरी पत्नी व प्रेमिका बताया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं है वह न तो मेरी दूसरी पत्नी है न ही प्रेमिका। बल्कि सुनीता सिंह केवल उनकी वर्किंग पार्टनर व पेट्रेाल पम्प की बतौर मैनेजर कार्यरत है। सुनीता ने डिफेंस में चलाई गोली- बाबा राजा रुपेन्द्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने दावा किया कि घटना के दौरान उनके साथ पत्नी योगिता सिंह, साले और अन्य लोगों ने मारपीट की। उनके अनुसार दोपहर करीब 3:30 बजे विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्हें धक्का देकर गिराया गया, चश्मा टूट गया और फोटो फ्रेम लगने से वे घायल हो गए। रूपेंद्र सिंह ने कहा कि सुनीता सिंह उनके पेट्रोल पंप की मैनेजर और बिजनेस पार्टनर हैं। उनके मुताबिक मारपीट और धमकियों के बीच सुनीता ने आत्मरक्षा में दीवार की ओर फायरिंग की। उनका दावा है कि दीवार से टकराकर निकली गोली योगिता सिंह को लगी। उन्होंने कहा कि किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था। बाबा राजा ने अपनी सास के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थीं। धारा नौ के तहत दायर है तलाक का प्रकरण रूपेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि वैवाहिक संबंधों को बचाने के लिए उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत न्यायालय में मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि पत्नी और ससुराल पक्ष की नजर उनकी संपत्ति पर है।

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों को बड़ी सौगात, 37वीं किस्त के 1500 रुपए खाते में ट्रांसफर

सागर. मध्य प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए रविवार का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले की देवरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले केसली क्षेत्र से प्रदेश की लाडली बहनों के खातों में योजना की 37वीं किस्त की राशि सफलता पूर्वक ट्रांसफर कर दी। इस बार सरकार ने हर पात्र महिला के खाते में 1500-1500 रुपये की राशि भेजी है। इस सिंगल क्लिक ट्रांसफर के जरिए प्रदेश की लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में कुल 1,835 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पहुंचाई गई। इस मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल बहनों को आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी रफ्तार दी। सीएम डॉ. यादव ने केसली में 190.85 करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 53 विकास कार्यों की आधारशिला रखी और उद्घाटन किया। इसमें 28 नए कार्यों का भूमिपूजन तथा 25 पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण शामिल है। घर बैठे ऐसे जांचें अपनी भुगतान की स्थिति यदि आप लाडली बहना योजना के लाभार्थी हैं और यह चेक करना चाहते हैं कि आपके खाते में राशि पहुंची है या नहीं, तो आप इसकी ऑनलाइन जांच बेहद आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' वाले विकल्प को चुनें। इसके बाद मांगी गई जगह पर अपनी समग्र आईडी अथवा रजिस्ट्रेशन संख्या दर्ज करें। अब आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करके वेरिफाई करते ही आपके स्क्रीन पर भुगतान का पूरा विवरण आ जाएगा। अंतिम सूची में अपना नाम देखने का तरीका अगर आप यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आपका नाम लाभार्थियों की सूची में बरकरार है या नहीं, तो इसके लिए भी पोर्टल पर व्यवस्था की गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 'अंतिम सूची' के विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद अपना मोबाइल नंबर और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड दर्ज करें। 'ओटीपी प्राप्त करें' पर क्लिक करने के बाद मोबाइल पर आए वन-टाइम पासवर्ड को भरें। इसे सबमिट करते ही आपके सामने पूरी सूची आ जाएगी, जिसमें आप अपना नाम देख सकती हैं। नए रजिस्ट्रेशनों को लेकर क्या है स्थिति? लाडली बहना योजना के तहत नए आवेदन फॉर्म भरने का इंतजार कर रही महिलाओं को फिलहाल अभी और प्रतीक्षा करनी होगी। साल 2023 के बाद से ही योजना के नए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद हैं। हालांकि सरकार ने समय-समय पर आर्थिक सहायता राशि में बढ़ोतरी जरूर की है, लेकिन इस बार सागर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी नए फॉर्म भरे जाने को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में नई पात्र महिलाओं को अगली घोषणा तक थोड़ा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। राशि अंतरण एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन केसली, जिला सागर में लाड़ली बहना योजना अंतर्गत आयोजित लाड़ली बहनों के खाते में राशि अंतरण एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रम में सहभागिता — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 14, 2026

वाहन चालकों के लिए बड़ा बदलाव, मध्यप्रदेश में बिना OTP नहीं मिलेगा PUC सर्टिफिकेट

भोपाल. मध्यप्रदेश में अब पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी सत्यापन अनिवार्य (OTP Verification) कर दिया गया है। भोपाल सहित पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना ओटीपी सत्यापन के किसी भी वाहन का पीयूसी प्रमाण पत्र (PUC Certificate) जारी नहीं किया जाएगा। नई प्रणाली लागू होने से उन वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनके वाहन रिकॉर्ड में पुराना, गलत या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है। ऐसे वाहन मालिकों को पहले परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू हुई व्यवस्था सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने यह नई व्यवस्था लागू की है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा के अनुसार, जैसे ही किसी पीयूसी केंद्र पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किया जाएगा, सिस्टम वाहन डेटाबेस से वाहन मालिक का मोबाइल नंबर प्राप्त करेगा। इसके बाद उसी नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। वाहन प्रदूषण जांच में पास होने के बाद ओटीपी सत्यापन पूरा होने पर ही पीयूसी प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। फर्जी पीयूसी पर लगेगी रोक परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर कई वाहनों के पीयूसी सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे। वास्तविक वाहन मालिक की पहचान और मोबाइल सत्यापन नहीं होने के कारण रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल उठते थे। नई व्यवस्था में वाहन के पंजीयन रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही ओटीपी जाएगा। इससे गलत जानकारी देकर या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पीयूसी बनवाना आसान नहीं होगा। वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा? पीयूसी बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी अनिवार्य होगा। वाहन रिकॉर्ड में सही मोबाइल नंबर दर्ज होना जरूरी रहेगा। ओटीपी सत्यापन नहीं होने पर सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। गलत या पुराना नंबर होने पर रिकॉर्ड अपडेट कराना पड़ेगा। भविष्य में पीयूसी एक्सपायर होने से पहले मोबाइल अलर्ट मिलेगा। फर्जी जानकारी के आधार पर पीयूसी बनवाने पर रोक लगेगी। भोपाल में रोज 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट भोपाल आरटीओ डॉ. जितेंद्र शर्मा के अनुसार, राजधानी में लगभग 60 पीयूसी केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन करीब 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। पूरे मध्यप्रदेश में 550 से 600 पीयूसी केंद्रों के माध्यम से रोजाना 22 हजार से 25 हजार तक पीयूसी प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या लगभग 2.5 करोड़ बताई जा रही है, जबकि भोपाल में 20 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। वाहन मालिकों को मिलेगा एक्सपायरी अलर्ट परिवहन विभाग भविष्य में ऐसी व्यवस्था भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत पीयूसी की वैधता समाप्त होने से पहले वाहन मालिकों को मोबाइल संदेश भेजा जाएगा। इससे वाहन मालिक समय रहते सर्टिफिकेट का नवीनीकरण करा सकेंगे और नियम उल्लंघन से बच पाएंगे।