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अर्चना चिटनिस की पहल से भोपाल-भुसावल के बीच नई ट्रेन के लिए रास्ता हुआ साफ, विस में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित

बुराहनपुर  बुराहनपुर क्षेत्र के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अर्चना चिटनिस की पहल पर भोपाल से भुसावल के मध्य नई ट्रेन अथवा मेमू रेल सेवा प्रारंभ करने का अशासकीय संकल्प विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया है। अब यह प्रस्ताव भारत सरकार के रेल मंत्रालय को भेजा जाएगा, जिससे बहुप्रतीक्षित रेल सुविधा को मूर्त रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठ गया है। आम यात्रियों की परेशानी का मुद्दा उठाया सदन में प्रस्ताव रखते हुए चिटनिस ने कहा कि भोपाल और भुसावल के बीच लंबी दूरी की ट्रेनें तो संचालित हैं, लेकिन सामान्य श्रेणी के डिब्बों की कमी और बिना आरक्षण यात्रा की मजबूरी के कारण आम नागरिक, विद्यार्थी, मरीज और दैनिक यात्री भारी कठिनाइयों का सामना करते हैं। उन्होंने बताया कि भोपाल, बुरहानपुर, हरदा, खंडवा, टिमरनी, खिड़किया और इटारसी जैसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाली सुगम रेल सेवा समय की आवश्यकता है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई सेवा शुरू करना अब अत्यंत प्रासंगिक हो गया है। ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया अर्चना चिटनिस ने सदन को बताया कि वर्ष 1975 से 1980 के बीच इस मार्ग पर ट्रेन संचालित होती थी, जिसे उस समय यात्रियों की कमी के कारण बंद कर दिया गया था। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे इस रूट पर नियमित रेल सेवा की मांग लगातार तेज हो रही है। व्यावहारिक समाधान का सुझाव उन्होंने व्यावहारिक विकल्प भी सुझाया। यदि नई ट्रेन स्वीकृत करना संभव न हो, तो वर्तमान में चल रही ट्रेन संख्या 11115/11116 को भोपाल तक विस्तारित किया जाए। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन इटारसी स्टेशन पर लगभग 17 घंटे तक खड़ी रहती है, जबकि उसी समय में वह भोपाल जाकर वापस लौट सकती है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और यात्रियों को सुविधाजनक समय-सारणी मिल सकेगी। ग्रामीण अंचल और व्यापार को मिलेगा लाभ प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि नई रेल सेवा से मार्ग के छोटे स्टेशनों, किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र के आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे जनहित में महत्वपूर्ण कदम बताया। अंततः सदन ने सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर केंद्र सरकार से नई रेल सेवा प्रारंभ करने का अनुरोध किया।

जायका टीम ने भोपाल में एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन और महावड़िया सब स्टेशन का सूक्ष्म मूल्यांकन किया

जायका टीम ने किया भोपाल में एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन एवं महावड़िया सब स्टेशन का सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन सब स्‍टेशन बनने से हुए लाभ के संबंध में स्‍थानीय व्‍यापारियों से किया वार्तालाप भोपाल जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण के लिये मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत भोपाल में हुए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण कर उनका सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन किया गया। जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की। महावड़िया सब स्टेशन एवं लाइन का किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन महावड़िया तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी महावड़िया-मुगलियाछाप डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निरीक्षण कर सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। सब स्‍टेशन के संचालन-संधारण की जानकारी प्राप्‍त जायका टीम ने सब स्‍टेशन के संचालन एवं संधारण कार्यों की जानकारी, पदस्थ कर्मचारियों की योग्‍यता और उनके दैनिक कार्यों का विवरण, आपातकालीन स्थिति से निपटने की कार्ययोजना तथा सब स्‍टेशन से पर्यावरण को होने वाले वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण के संबंध में भी जानकारी ली। निरीक्षण उपरांत जायका टीम ने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उपयोगिता जानने के लिए व्‍यापारियों से की चर्चा जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित महावड़िया सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ जायका टीम ने सब स्‍टेशन के नजदीक स्थित व्‍यापारियों के प्रतिष्‍ठानों में जाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया। व्‍यापारियों ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे व्‍यापार के संचालन करने में अब उन्‍हे आसानी हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। उपभोक्ताओं ने बताये फायदे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) की टीम ने भोपाल स्थित महावडिया सब स्टेशन के मूल्‍यांकन एवं निरीक्षण के दौरान सबस्‍टेशन के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में हुए बदलावों की जानकारी ली गई। सबस्‍टेशन के सामने स्थित डेयरी के संचालक श्री दिनेश यादव (यादव डेयरी) ने बताया कि सन् 2021 के पूर्व में बिजली सप्लाई मंडीदीप सबस्‍टेशन से आती थी, जिसमें लाइन की लंबाई अधिक होने से अनेक बार ट्रिपिंग एवं वोल्‍टेज में उतार –चढाव (फ्लक्चुएशन) की समस्या रहती थी। अब सबस्‍टेशन बनने से यह समस्या पूर्णतः समाप्त हो गई है। उन्हें अपनी दुकान पर फ्रिज एवं रेफ्रिजरेटर चलाने में कोई कठिनाई नहीं होती, जिससे दूध, दही आदि सामग्री अधिक समय तक सुरक्षित रहती है। इससे दुकान की आय में वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, श्री बाबूलाल विश्वकर्मा (विश्वकर्मा वेल्डिंग) ने बताया कि पहले बिजली कटौती एवं लाइन फॉल्ट के कारण वेल्डिंग कार्य रुक जाता था, जिससे कार्य अवधि कम रहती थी। अब सतत एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा उच्च वोल्टेज के कारण उनका कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। अब वह अपने ग्राहकों काम समय पर करके देने में सफल हो रहे है। स्थानीय नागरिकों ने भी बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से पहले लंबे समय तक विद्युत व्यवधान बना रहता था, जो अब न्यूनतम हो चुका है। इससे क्षेत्र में घरेलू और व्यावसायिक गतिविधियों को स्थिरता एवं गति मिली है।  

4 लाख 42 हजार से अधिक किसानों ने गेहूँ उपार्जन के लिए समर्थन मूल्य पर पंजीयन कराया

4 लाख 42 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन 7 मार्च तक होगा पंजीयन भोपाल खाद्य , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 4 लाख 42 हजार 288 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 54 हजार 587, उज्जैन में एक लाख 48 हजार 905, ग्वालियर में 9695, चम्बल में 4692, जबलपुर में 39 हजार 885, नर्मदापुरम में 34 हजार 181, भोपाल में एक लाख 9 हजार 134, रीवा में 13 हजार 260, शहडोल में 2551 और सागर में 25 हजार 398 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क,  लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। 

भोपाल में धर्मांतरण का काला सच: लड़कियों से बार-बार दुष्कर्म, अहमदाबाद-मुंबई कनेक्शन और ‘जन्नत’ का हाथ

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘द केरल स्टोरी’ जैसे एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस रैकेट में दो मुस्लिम बहनें शामिल हैं, जो हिंदू युवतियों को फंसाने के लिए कभी सहेली बन जाती हैं तो कभी ननद और भाभी की भूमिका में आ जाती हैं। दोनों ने प्रेमी के साथ मिलकर कई हिंदू युवतियों का शारीरिक शोषण करवाया है। इस रैकेट के संपर्क में कई हिंदू युवतियों के होने और इनके मोबाइल में कई संदिग्ध वाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जिनमें कई युवतियों की फोटो है। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह युवतियों को नौकरी और हाईप्रोफाइल लाइफ स्टाइल के नाम पर अपने झांसे में लेकर देह व्यापार में धकेलता होगा।  पुलिस ने रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा, उसके मुस्लिम प्रेमी चंदन यादव और कथित बहन आफरीन को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। पुलिस इस गिरोह में शामिल तीन अन्य आरोपी बिलाल, यासिर और चानू की तलाश कर रही है। फिलहाल दो युवतियों ने एक साथ मामला दर्ज कराया है, जो मूलतः छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। इस गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद कुछ और युवतियों के सामने आकर शिकायत दर्ज कराए जाने की संभावना हैं।   आरोप है कि यह गिरोह गरीब घर की हिंदू युवतियों को निशाना बनाकर उनसे दोस्ती करता था और नौकरी के नाम पर अपने चंगुल में लेकर हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का खर्च उठाता था। गरीब घर की युवतियों को जैसे ही हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का शौक लग जाता, रैकेट उन्हें पब और पार्टियों में ले जाकर बड़े घर के रईसजादों के साथ शारीरिक संबंध बनाने यानी देह व्यापार करने के लिए मजबूर करता था। यह रैकेट कई युवतियों को मुंबई और अहमदाबाद तक सप्लाई कर चुका है।  हिंदू नाम रखकर युवतियों को फंसाते थे बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि तीन आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों के मोबाइल भी जब्त कर जांच में लिए गए हैं, कुछ और संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जल्दी ही कुछ और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।   पीड़िताओं ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा का लिव-इन पार्टनर चंदन यादव भी धर्म बदलकर मुस्लिम बन चुका है। उसने हिंदू युवतियों पर विश्वास कायम करने के लिए हिंदू नाम रखा हुआ है।   ब्यूटीशियन को किस तरह फंसाया गया देहव्यापार व धर्मांतरण के दलदल में पहली पीड़िता छत्तीसगढ़ के मुंगेली क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय ब्यूटीशियन है। 31 दिसंबर 2024 को शाहपुरा स्थित एक होटल में दोस्त की बर्थडे पार्टी में उसकी मुलाकात आफरीन नाम की युवती से एक हिंदू युवती ने कराई थी। ब्यूटीशियन की उक्त सहेली ने हिंदू युवतियों को मुस्लिम युवक और युवतियों द्वारा बहुत सम्मान और प्यार दिए जाने का झांसा देकर आफरीन से दोस्ती करने को कहा था। जबकि ब्यूटीशियन की उक्त हिंदू युवती खुद धर्म परिवर्तन कर ‘जन्नत’ बन चुकी है और वर्तमान में अमरीन के मुंहबोले भाई की पत्नी बनकर रह रही है। जनवरी 2025 में ब्यूटीशियन और आफरीन सरगना अमरीन उर्फ माहिरा के साथ एक साथ रहने लगीं।  पहली पीड़िता से किसने और कहां-कहां किया दुष्कर्म ब्यूटीशियन के साथ पहली बार चंदन ने अगस्त 2025 में अपनी बहन के नारायण नगर स्थित घर पर दुष्कर्म किया। इसके बाद नवंबर 2025 में अमरीन गांधी नगर क्षेत्र स्थित अब्बास नगर में अपने माता-पिता के घर में ले गई, जहां उसके भाई बिलाल ने नशीला पेय पिलाकर दुष्कर्म किया।  दिसंबर 2025 में अमरीन ने ब्यूटीशियन को निजी काम का हवाला देकर अहमदाबाद ले गई। वहां यासिर नामक युवक ने उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता जनवरी 2026 में भोपाल छोड़कर रायपुर में अपने मामा के यहां रहने चली गई। अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच चंदन ने ब्यूटीशियन से अमरीन के सागर रॉयल विला स्थित मकान व अन्य स्थानों पर कई बार भोपाल में दुष्कर्म किया है।  दूसरी पीड़िता को अपने घर में रखकर देह व्यापार में धकेला रैकेट की सरगना आमरीन से वर्ष 2024 में दीपावली के समय 35 वर्षीय महिला की एक मॉल में मुलाकात हुई। उक्त महिला अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ भोपाल के अशोका गार्डन में रहती थी। पति से तलाक हो चुका है। वह मूलतः छत्तीसगड़ की रहने वाली है। अमरीन ने उक्त महिला को पहले अपने घर में दो माह तक काम पर रखा। इसके बाद होशंगाबाद रोड स्थित सागर रॉयल विला स्थित डुप्लेक्स में रख लिया। इसके बाद उससे चंदन ने दुष्कर्म किया। फिर यासिर और चानू नाम के व्यक्ति अमरीन से मिलने आते और उक्त महिला से दुष्कर्म करते थे। बाद में उसे दूसरे युवकों से संबंध बनाने के लिए भोपाल में भेजा जाने लगा तो वह काम छोड़कर बच्चों के साथ वापस छत्तीसगढ़ चली गई।   तीन आरोपी पकड़े गए, बाकी चल रहे फरार इस मामले में अब तक रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा, उसकी कभी सहेली तो कभी बहन बताने वाली आफरीन और अमरीन का लिव-इन पार्टनर चंदन यादव गिरफ्तार किए गए हैं। तीनों बागसेवनिया पुलिस की रिमांड पर हैं। अमरीन का भाई बिलाल, मुंहबोला भाई चानू और अहमदाबाद निवासी यासिर फरार हैं। दूसरी पीड़िता से एक-दो अन्य युवकों ने दुष्कर्म किया, उनके नामों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने दो पीड़िताओं की शिकायत पर अब तक छह आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया है।  

MP में 2 मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 1.5 लाख यात्रियों को होगा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह हड़ताल होली के त्यौहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। बस एसोसिएशन का विरोध सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। उन्होंने परमिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि रूट आवंटन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाया गया है।  डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में संशोधन का कोई लचीला प्रावधान नहीं है। परमिट नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड और परमिट निरस्त करने के सख्त नियम बनाए गए है। ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी और नगर परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी बसों के रूट सीमित किए जा रहे हैं।  बता दें प्रदेश में वर्तमान में लगभग 28,000 बसें संचालित होती हैं, जिनमें ऑल इंडिया परमिट और स्टेज कैरिज बसें शामिल हैं। यदि यह हड़ताल होती है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। रोजाना सफर करने वाले करीब 1.5 लाख यात्रियों का आवागमन बाधित होगा। इससे ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिकों और बुकिंग एजेंटों सहित हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। होली के कारण ट्रेनों में पहले से ही भारी वेटिंग है। ऐसे में बसों का बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। फिलहाल, परिवहन विभाग की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बस संचालकों ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई जिलों में आरटीओ को ज्ञापन सौंपना शुरू कर दिया है।  सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है सम्मेलन में बस संचालकों ने एकमत होकर कहा कि जब सरकार की अपनी बसें ही नहीं है तो यह सेवा सरकारी कैसे हुई? सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पहले ही जनता का पैसा सरकार सूत्र सेवा बसों के रूप में बर्बाद कर चुकी है। अब फिर से द्वेष और दुर्भावना से जनता और ऑपरेटरों को धोखे में रख निजी कंपनियों को फायदा देने के मकसद से बसों से स्थायी परमिटों पर संचालन कर रहे। बस ऑपरेटर के परमिट सरकार छीनना चाहती है और बस ऑपरेटरों को बेरोजगार करना चाहती है। आंदोलन की चेतावनी हड़ताल की रणनीति तय करने के लिए सागर में संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायसेन समेत कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो प्रदेश में दैनिक यात्रियों, छात्रों और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे, 2 मार्च से करेंगे हड़ताल सरकार का अड़ियल रवैया देख बस ऑपरेटरों में गहरा रोष है। जिसको लेकर बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। मांगें नहीं मानी गई तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसके लिए शासन जिम्मेदार होगा। बैठक में प्रदेश की सभी यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। क्या है 'मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना'? सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रख रही है। इसके तहत लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। खासकर उन ग्रामीण रूटों पर जहां अभी निजी बसों की कमी है या कनेक्टिविटी खराब है। सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर काम करेगी। बसों की निगरानी सरकार करेगी, ट्रैकिंग के लिए बनेगा ऐप योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन उनका नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास होगी। बसों की ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और टाइम-टेबल के लिए एक मोबाइल एप और डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस सम्मेलन के दौरान मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन, बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय, खंडवा जिले से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बस ऑपरेटर मौजूद थे। अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कुशल मिश्रा ने प्रदेश सरकार द्वारा जो नई नीति लाई गई है, जिसके तहत प्राइवेट बस वालों से अनुबंध कराया जाएगा. उसी विषय पर आज हमारी पत्रकार वार्ता थी. हमारी 22 तारीख को सागर जिले में यूनियन की बैठक हुई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि आगामी 2 मार्च से प्रदेश में बसों की हड़ताल होगी, क्योंकि कोई भी प्राइवेट बस संचालक अनुबंध नहीं करना चाहता है. हमारी मांग यही है कि यह अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए. यदि सरकार को गाड़ियां चलानी हैं, तो वह अपनी खुद की गाड़ियां चलाए, अपने मार्ग स्वयं तय करे और कंप्यूटर प्रणाली से संचालन करे. इसमें प्राइवेट बस संचालकों को क्यों शामिल किया जा रहा है.

केंद्र सरकार की मंजूरी से MP और CG में बनेंगे 2.88 लाख नए घर, महिलाओं को मिलेगा अहम हिस्सा

भोपाल /रायपुर  केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास की सुविधा को विस्तार देते हुए सोमवार को लगभग 2.88 लाख और घरों के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई इस नवीनतम स्वीकृति के तहत कुल 2,87,618 घरों का निर्माण किया जाएगा। इस नए निर्णय के साथ ही पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या अब 13.61 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। महिलाओं और वंचित वर्गों को प्राथमिकता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना में सामाजिक न्याय और समावेशिता का विशेष ध्यान रखा गया है। स्वीकृत घरों में से 1.60 लाख से अधिक घर महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, 22,581 घर वरिष्ठ नागरिकों के लिए और 8 घर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वीकृत किए गए हैं। श्रेणीवार विवरण देखें तो इसमें ओबीसी वर्ग के लिए 82,190 घर, एससी (SC) लाभार्थियों के लिए 35,525 और एसटी (ST) वर्ग के लिए 9,773 घर आरक्षित किए गए हैं। 16 राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों के तहत होगा निर्माण यह महत्वपूर्ण निर्णय मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकीथला की अध्यक्षता में आयोजित 'केंद्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति' की बैठक में लिया गया। योजना के तहत नए घर 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे, जिनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और बंगाल जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं। निर्माण की श्रेणियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है।     लाभार्थी आधारित निर्माण: 1.66 लाख घर।     भागीदारी में किफायती आवास: 1.09 लाख घर।     किफायती किराये के आवास: 12,846 घर। 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' को हरी झंडी परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, पुडुचेरी और राजस्थान में तीन 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' (डीएचपी) को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आधुनिक और लागत-कुशल निर्माण तकनीकों का प्रदर्शन करना है। प्रत्येक डीएचपी परियोजना में 40 आवास इकाइयां शामिल होंगी, जो भविष्य के शहरी आवास निर्माण के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेंगी।  

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट का दिखाई देना, शुभ संकेत

भोपाल पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, स्थानिक और लुप्त प्राय फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को पहली बार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है, जो इस प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट की खोज भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह खोज इस तथ्य को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह पक्षी विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक है और चीता परियोजना से जुड़े पर्यावास प्रबंधन के साथ इसके संभावित पारिस्थितिक संबंध हैं। फॉरेस्ट आउलेट मध्य भारत का एक स्थानिक (endemic) पक्षी है, जिसे 1872 में पहली बार खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, 1997 में इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से खोजा गया, जिसने पक्षी विज्ञान की दुनिया में सनसनी फैला दी थी। वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें मध्यप्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) के हिस्से शामिल हैं। मध्यप्रदेश में फॉरेस्ट ऑउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही पाया जाता था। इस दुर्लभ पक्षी को सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े श्री लाभ यादव ने पारोंद बीट में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा था, जिससे प्रजाति के अत्यधिक सीमित वितरण और संरक्षण स्थिति के कारण वन विभाग का ध्यान तुरंत आकर्षित हुआ। प्रमुख पहचान लक्षणों के आधार पर,वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कंजर्वेशन सोसायटी, पुणे के श्री विवेक पटेल ने मौके पर ही इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो राष्ट्रीय उद्यान से प्रजाति का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया। अधिकांश उल्लुओं के व्यवहार के विपरीत, फॉरेस्ट ऑउलेट मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहने वाला पक्षी है। यह सुबह 6:00 से 10:00 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और कड़ी धूप में भी ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बैठा देखा जा सकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट को वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा 'लुप्त प्राय' श्रेणी में रखा गया है।इसकी कुल वैश्विक वयस्क संख्या 250 से 999 के बीच होने का अनुमान है। मध्यप्रदेश में इसके वितरण को समझने के लिए और सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट, जिसे कभी विलुप्त माना जाता था और 1997 में पुनः खोजा गया था, वर्तमान में मध्य भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और पर्यावास के क्षरण और विखंडन से लगातार खतरे का सामना कर रहा है। यह नया रिकॉर्ड कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है। फॉरेस्ट आउलेट का दिखाई देना संकेत दे रहा है कि चीता के लिये किये जा रहे संरक्षण प्रयासों से पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार होने से अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की भी वापसी हो रही है। मध्यप्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस प्रजाति के मिलने से पक्षी संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों में उत्साह की लहर है।  

विधानसभा में विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक सम्पन्न; नवाचारों और योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा है कि विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध घुमन्तु समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इन वर्गों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने, शिक्षा एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ कार्य किया जा रहा है। राज्यमंत्री  गौर ने विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-6 में विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, नवाचारों और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर सागर (बण्डा) विधायक  वीरेंद्र सिंह लोधी, सेंधवा विधायक  मोंटी सोलंकी और विभाग के संचालक  बुद्धेश वैद्य उपस्थित रहे। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि विभाग द्वारा इन समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं के समेकित विकास के लिये प्रथम चरण में प्रदेश के 12 जिलों में 'जन अभियान परिषद' के माध्यम से सर्वेक्षण का कार्य करवाया जा रहा है। इनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, कटनी, धार, सीहोर, विदिशा, मंदसौर, रायसेन, शाजापुर एवं राजगढ़ जिले शामिल हैं। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि राष्ट्रीय विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय कल्याण एवं विकास बोर्ड द्वारा संचालित 'सीड' परियोजना के आवास घटक के तहत प्रदेश में 3047 पात्र हितग्राहियों की सूची स्वीकृति हेतु भेजी गई है। इसके अंतर्गत 7 जिलों के हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 100 प्रतिशत अनुदान (केंद्र सरकार) दिलाने के लिए एम.ओ.यू. पर सहमति बन चुकी है। केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा गठित राष्ट्रीय बोर्ड के माध्यम से 'सीड परियोजना' में समुदाय के विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग प्रदान की जा रही है। 'बडी फॉर स्टडी' संस्था के माध्यम से विद्यार्थी संघ लोक सेवा आयोग, म.प्र. लोक सेवा आयोग, एसएससी, ग्रामीण बैंक, क्लेट, जेईई, नीट और एनडीए जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में इस योजना से 94 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कार्यवाही प्रचलन में है। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में निवासरत विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों के परिवारों के लिए जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को अत्यधिक सरल कर दिया गया है। अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से सुगमता से जाति प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। राज्यमंत्री  गौर ने शासन की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी पात्र हितग्राही लाभ से वंचित न रहे। बैठक में उपस्थित समिति सदस्यों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।  

ग्वालियर और कटनी में ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़

भोपाल  प्रदेश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्यवाहियां की जा रही है। इसी क्रम में ग्वालियर एवं कटनी जिलों में पुलिस ने अलग-अलग प्रकरणों 10 लाख 1 हजार रूपए नगद, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन, चेक बुक सहित लगभग 13 लाख 98 हजार रुपये की संपत्ति जप्त की हैं। दोनों मामलों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के माध्यम से बड़े पैमाने पर 3 करोड़ 29लाख रूपएका आर्थिक लेन-देन का भी खुलासा हुआ है। ग्वालियर जिले में क्राइम ब्रांच पुलिसने थाना महाराजपुरा क्षेत्र स्थित आदर्श कॉलोनी पिंटोपार्क के एक मकान पर प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान कमरे में 03 व्यक्ति मोबाइल एवं लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित करते पाए गए, जिन्हें मौके से गिरफ्तार किया गया। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में विभिन्न ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों पर सक्रिय आईडी, ट्रांजेक्शन डाटा, यूपीआई क्यूआर कोड, बैंक खातों से संबंधित विवरण तथा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से निर्देश प्राप्त होने संबंधी डिजिटल साक्ष्य मिले है। प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी कमीशन के आधार पर कार्य करते हुए लोगों को गेमिंग एप में जीत का प्रलोभन देकर रकम निवेश करवाते थे तथा म्यूल बैंक खातों के माध्यम से राशि का ट्रांसफर कराते थे। अवैध लाभ का हिस्सा नगद एवं विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जाता था, साथ ही प्रत्येक लेन-देन के लिए अलग-अलग खाते उपयोग किए जाते थे जिससे ट्रैकिंग कठिन हो सके। आरोपियों के कब्जे से 4लाख 49 हजार रूपएनगद, 03 लैपटॉप, 10 मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, एक बैग सहित 8 लाख 69 हजार रूपए की सामग्री जप्त की गई। इसी प्रकार कटनी जिले के थाना माधवनगर क्षेत्र में कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन किए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पाया गया कि बंधन बैंक,एचडीएफसी बैंकएवं आईडीबीआई बैंकके खातों के माध्यम से लगभग 3करोड़ 29लाख रूपए का लेन-देन किया गया। आरोपियों के कब्जे से 5 लाख 52 हजार रूपएनगद, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल फोन एवं अन्य दस्तावेज जप्त किए हैं। प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की तलाश एवं विस्तृत जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस राज्य में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं साइबर आधारित आर्थिक अपराधों के विरुद्धजीरो टॉलरेंसकी नीति अपनाते हुए निरंतर सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इन अपराधों में संलिप्त संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके नेटवर्क, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट्स तथा तकनीकी संसाधनों को चिन्हित कर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।  

हृदयघात से बेहोश व्यक्ति को डायल-112 जवानों ने समय पर सीपीआर देकर बचाया

भोपाल  डायल-112 आपात स्थितियों में केवल त्वरित पहुँच ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मानवीय हस्तक्षेप के माध्यम से वन रक्षा का भरोसेमंद माध्यम है। देवास जिले में डायल-112 जवानों ने समय पर सीपीआर देकर हृदयघात से पीड़ित व्यक्ति की जान बचाकर अपनी दक्षता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। दिनांक 24 फरवरी 2026 को देवासजिले के थाना टोकखुर्द अंतर्गत ग्राम कलमा स्थित शर्मा  पेट्रोल पंप के पास एक व्यक्ति के अचानक हृदयघात का दौरा पड़ने से बेहोश हो जाने की सूचनाडायल-112 राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूमभोपालको प्राप्त हुई। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना टोकखुर्द क्षेत्र में तैनात नजदीकी डायल-112 को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 एफआरवी में तैनातप्रधान आरक्षक  राकेश डामोरएवंपायलट  यशवंत पटेलने पाया कि व्यक्ति बेहोशी की अवस्था में है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाएसीपीआरदेना प्रारंभ किया। कुछ मिनटों की निरंतर और सटीक प्रक्रिया के पश्चात पीड़ित को होश आया। इसके पश्चात डायल-112 जवानों द्वारा चिकित्सा वाहन की सहायता से पीड़ित व्यक्ति को उपचार हेतुजिला अस्पताल देवासपहुँचाया। डायल-112 टीम की तत्परता, नियमित प्रशिक्षण और व्यावसायिक दक्षता के कारण यह वन रक्षक सहायता समय पर संभव हो सकी। पीड़ित के परिजनों ने डायल-112 सेवा की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस स्टाफ का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज द्वारा प्रदर्शित यह साहसिक एवं मानवीय कार्य पुलिस के “जन-सेवा, जन-सुरक्षा” के संकल्प को सुदृढ़ करता है।