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मध्यप्रदेश का 2026 हॉलीडे कैलेंडर घोषित, 127 दिन होंगे अवकाश, फाइव-डे वर्किंग नियम लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी साल 2026 के लिए सरकारी छुट्टियों का कैलेंडर फाइनल कर लिया है। नए कैलेंडर के साथ ये भी स्पष्ट हो गया है कि, अगले वर्ष राज्य के सरकारी कर्मचारियों को कितने दिन छुट्टी मिलेगी और कितने दिन काम करना होगा। ये आम लोगों के लिए भी लाभकारी होगा, इसी के आधार पर हम संबंधित विभाग में काम के लिए कार्य दिवस में जा सकेंगे। राज्य सरकार के अनुसार, साल 2026 में कुल 127 दिन छुट्टी रहेगी। ऐसे में यहां 238 दिन सरकारी दफ्तर खुलेंगे। इन अवकाशों में शनिवार, रविवार और सार्वजनिक छुट्टी भी शामिल हैं। छुट्टियों पर गौर करें तो साल 2026 में 52 शनिवार, 52 रविवार और 23 सार्वजनिक अवकाश शामिल हैं। यानी पूरे साल में आधे से ज्यादा दिन कार्यालय बंद रहेंगे। कार्यदिवसों की संख्या 238 रहेगी, जिसमें सामान्य प्रशासन और शासकीय कामकाज किया जाएगा। 2025 की तुलना में एक छुट्टी का इजाफा साल 2025 की तुलना में 2026 में कर्मचारियों को एक सार्वजनिक अवकाश अधिक मिलेगा। सरकार ने इस बार गणेश चतुर्थी (14 सितंबर) को भी सार्वजनिक अवकाश की सूची में शामिल किया है, जिससे कुल सार्वजनिक छुट्टियों की संख्या 23 हो गई है। इसके अलावा, कर्मचारियों को 62 ऐच्छिक अवकाशों की एक लंबी सूची भी दी गई है, जिसमें से वे अपनी सुविधानुसार किन्हीं तीन छुट्टियों का चुनाव कर सकते हैं। साल 2026 में सरकारी कर्मचारियों को 2025 की तुलना में एक सार्वजनिक अवकाश अधिक मिलेगा। इस बार गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक अवकाश की सूची में जोड़ा गया है। 14 सितंबर को पड़ने वाली इस छुट्टी के शामिल होने से कुल सार्वजनिक अवकाशों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इससे त्योहारों के दौरान कर्मचारियों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। ऐच्छिक अवकाश भी निर्धारित इसके अलावा राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए 62 ऐच्छिक अवकाश भी निर्धारित किए हैं। हालांकि, इनमें से कर्मचारियों को सिर्फ 3 छुट्टियां ही चुनने की अनुमति होगी। ये अवकाश अलग-अलग धर्मों, समाजों और स्थानीय पर्वों से जुड़े हैं, ताकि कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत आस्था और जरूरत के हिसाब से छुट्टी दी जा सके। 6 बड़े त्योहार वीकेंड पर हालांकि, इस कैलेंडर में कर्मचारियों को थोड़ी चिंता में डालने वाली बात भी सामने आई है। वो ये कि, साल 2026 में पड़ने वाले 6 प्रमुख त्योहार और जयंतियां शनिवार या रविवार को पड़ रही हैं। इसका मतलब ये है कि, इन मौकों पर अलग से अतिरिक्त छुट्टी नहीं दी गई है। इससे लगातार छुट्टियों का फायदा उठाने की संभावनाएं कम हुई हैं और लंबी यात्रा या पारिवारिक योजनाओं पर असर पड़ने की संभावना बढ़ी है। फाइव-डे वर्किंग सिस्टम रहेगा सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि सप्ताह में पांच दिन काम करने की व्यवस्था यानी फाइव-डे वर्किंग सिस्टम आगे भी जारी रहेगा। ये व्यवस्था कोरोना महामारी के दौरान लागू हुई थी और तब से कर्मचारी इसे बनाए रखने की मांग कर रहे थे। लंबे समय से चर्चा थी कि, पहले और तीसरे शनिवार को कार्यदिवस बनाया जा सकता है, लेकिन सरकार ने फिलहाल इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया है। ड्यूटी आवर में भी कोई बदलाव नहीं सरकार के स्तर पर काम के घंटे बढ़ाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन था। हालांकि इस पर कर्मचारियों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, मौजूदा ड्यूटी आवर ही लागू रहेंगे। नए कैलेंडर के साथ अब कर्मचारियों और विभागों की वार्षिक कार्ययोजना भी इसी के अनुसार तय की जाएगी। शनिवार-रविवार ने 'खाई' 6 छुट्टियां, कर्मचारियों को नुकसान हालांकि 2026 में 6 महत्वपूर्ण त्योहार और जयंतियां शनिवार या रविवार को पड़ रही हैं, जिससे कर्मचारियों को अलग से छुट्टी का लाभ नहीं मिल पाएगा। इन प्रमुख त्योहारों के वीकेंड पर पड़ने से कर्मचारियों को लगातार मिलने वाली छुट्टियों के अवसर कम हो गए हैं, जिसका असर उनके घूमने-फिरने या लंबे अवकाश की योजनाओं पर पड़ सकता है। कर्मचारियों के लिए 62 ऐच्छिक अवकाशों का विकल्प सार्वजनिक अवकाशों के अलावा, कर्मचारी दिए गए 62 ऐच्छिक अवकाशों में से कोई भी तीन चुन सकते हैं: अवकाश नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन (1 जनवरी 2026 से लागू) सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1977 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होंगे। इन बदलावों का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ेगा।     संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव): महिला कर्मचारियों को मिलने वाले 730 दिनों के संतान पालन अवकाश के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अवकाश के पहले 365 दिनों के लिए पूरा वेतन मिलेगा, लेकिन दूसरे 365 दिनों के लिए केवल 80% वेतन का ही भुगतान किया जाएगा। यह अवकाश 18 वर्ष तक की संतान के लिए स्वीकृत होगा।     अवकाश लेने की सीमा: एक कैलेंडर वर्ष में कोई भी कर्मचारी तीन बार से अधिक संतान पालन अवकाश नहीं ले सकेगा। हालांकि, एकल महिला (सिंगल मदर) कर्मचारियों को विशेष छूट देते हुए एक कैलेंडर वर्ष में छह बार तक यह अवकाश लेने की पात्रता दी गई है।     शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश: प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को अब वर्ष में दस दिन के अर्जित अवकाश की पात्रता होगी, जो उनके लिए एक बड़ी राहत है। 5-डे वर्किंग सिस्टम रहेगा जारी प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि सप्ताह में पांच दिन (सोमवार से शुक्रवार) काम करने की व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। कोरोना महामारी के दौरान संक्रमण को रोकने के लिए इस व्यवस्था को लागू किया गया था। लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार पुरानी व्यवस्था (पहले और तीसरे शनिवार को कार्य दिवस) को फिर से बहाल कर सकती है, लेकिन फिलहाल इसे यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही काम के घंटे बढ़ाए जाने को लेकर भी प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बनी। दशहरा से पहले अतिरिक्त छुट्टी का प्रस्ताव खारिज भोपाल के जिला प्रशासन ने दशहरा के एक दिन पहले स्थानीय अवकाश का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था। विभाग ने इसे आगे भी बढ़ाया, लेकिन मुख्य सचिव कार्यालय से इसे हरी झंडी नहीं मिली। इसका कारण यह बताया गया कि अक्टूबर महीने में पहले से ही कई छुट्टियां थीं … Read more

खंडवा में फर्जीवाड़े का आरोप: कलेक्टर और सीईओ ने कहा, अवॉर्ड के लिए लगाए गए सभी आरोप झूठे

खंडवा   केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान (JSJB 1.0)’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए खंडवा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। खंडवा के कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ राष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड लेने दिल्ली गए थे। दो करोड़ रुपए की इनाम राशि जिले को मिला था। अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस इनाम के लिए फर्जीवाड़ा हुआ है। काम दिखाने के लिए एआई की तस्वीरें अपलोड की गईं। इन आरोपों पर खंडवा कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ ने सच बताया है। साथ ही मीडिया की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। छवि धूमिल करने की है कोशिश खंडवा जिला प्रशासन ने आधिकारिक रूप से उस रिपोर्ट को भ्रामक, तथ्यहीन और प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है। जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का अभियान से कोई संबंध नहीं है। समाचार बिना सत्यापन और अपूर्ण जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया। अभियान में 1.29 लाख जल संरक्षण कार्यों की फोटो अपलोड डॉ. गौड़ा ने जानकारी दी कि JSJB 1.0 अभियान पिछले वर्ष शुरू हुआ था और 31 मई 2025 को समाप्त हो चुका था। अभियान के दौरान जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी स्तर पर जनभागीदारी से विभिन्न संरचनाएं तैयार कराई गईं। मीडिया रिपोर्ट में 1714 फोटो की जानकारी उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में मात्र 1714 फोटो अपलोड करने का दावा किया गया है, जबकि वास्तविक रूप से 1,29,046 कार्यों की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई, जिसका डेस्क और फील्ड वेरिफिकेशन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया गया। इसी आधार पर खंडवा को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इन संरचनाओं में रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट, डगवेल-बोरवेल रिचार्ज, चेकडैम और स्टॉपडैम की मरम्मत, गली प्लग, बोल्डर वॉल, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन पॉन्ड सहित कई कार्य शामिल थे। प्रशासन के अनुसार अभियान में न्यूनतम लागत और अधिकतम जनभागीदारी को सिद्धांत बनाया गया। आरोपों पर दी सफाई अक्टूबर 2025 की जिन फोटो को आधार बनाकर आरोप लगाए गए हैं, वे जल शक्ति अभियान- कैच द रेन के पोर्टल की हैं, जो JSJB 1.0 से पूरी तरह अलग है। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि पुरानी जनसुनवाई शिकायतों को मिलाकर भ्रम फैलाने का प्रयास है। गौड़ा ने कहा कि रिपोर्ट पुरानी जनसुनवाई शिकायतों पर आधारित है, जिन पर पहले ही जांच और कार्रवाई की जा चुकी है। इसे राष्ट्रीय पुरस्कार से जोड़ना एक सुनियोजित भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। कौन हैं डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता गौरतलब है कि डॉ नागार्जुन बी गौड़ा 2019 बैच के अधिकारी हैं। हरदा में पोस्टिंग के दौरान भी इन पर जुर्माना माफ करने और जमीन खरीदने के आरोप लगा थे। वह मूल रूप से कर्नाटक के निवासी हैं। एमबीबीएस करने के बाद 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले मणिपुर कैडर मिला था। इसके बाद कैडर ट्रांसफर करवाकर एमपी आए है। अभी खंडवा जिला पंचायत के सीईओ हैं। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल की वजह से चर्चा में हैं। इसी काम में जिला प्रशासन पर खेल करने का आरोप लगा है।

मध्यप्रदेश में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बड़ा बदलाव, 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और आयुष महाविद्यालयों की शुरुआत

प्रदेश में 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, शिक्षा में गुणात्मक सुधार का नया अध्याय मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) का परिसर अब भोपाल के RGPV में संचालित आयुष क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्वीकृति और 800 आयुष आरोग्य मंदिरों का संचालन प्रारंभ उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उपलब्धियों की दी जानकारी भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में "दो वर्षों की विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजनाओं" को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग के दो वर्षों की उपलब्धियां एवं आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना साझा की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, प्रमुख सचिव आयुष डी पी आहूजा, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा आर माहेश्वरी एवं आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारगण उपस्थित थे। उच्च शिक्षा की प्रमुख विभागीय उपलब्धियां और नवाचार उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग अपनी स्पष्ट नीतियों और नवाचारों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के अनुरूप उच्च शिक्षा को गुणात्मक, बहुविषयक, रोजगारोन्मुखी और समावेशी बनाने के लिए विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। शैक्षणिक सुधार और नवीन विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूर्ण रूप से लागू किया गया है । साथ ही, वर्तमान सत्र से एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और अंतःविषय (Interdisciplinary) विकल्प भी शुरू किए गए हैं । तीन नए विश्वविद्यालयों—गुना में क्रांतिवीर तात्या टोपे, खरगोन में क्रांति सूर्य टंट्या भील, और सागर में रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक, कुल 55 महाविद्यालयों को 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में उन्नत किया गया है । इसके लिए ₹336 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है और 1845 नवीन पद सृजित किए गए हैं। रोजगार और प्लेसमेंट, भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण मंत्री परमार ने बताया कि स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत 378 रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों के जरिए 16,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है । अब तक 1,655 विद्यार्थियों का प्रत्यक्ष प्लेसमेंट सुनिश्चित हुआ है । इसके अलावा, IIT दिल्ली के सहयोग से 68 कॉलेजों में AI और FinTech जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। परमार ने बताया कि पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करने के लिए विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं ताकि विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें । डिजिटल नवाचार, छात्र कल्याण मंत्री परमार ने बताया कि विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और मोबाइल-फ्रेंडली बनाया है, जिससे पोर्टल शुल्क समाप्त होने पर विद्यार्थियों को ₹5 करोड़ का सीधा लाभ हुआ है । प्रदेश में 1047 स्मार्ट क्लासरूम, 200 वर्चुअल लैब और 544 ई-लाइब्रेरी विकसित की गई हैं। वर्ष 2024-25 में 'गांव की बेटी योजना' से 1.34 लाख से अधिक और 'प्रतिभा किरण योजना' से 7,500 से अधिक छात्राएं लाभान्वित हुई हैं । अनुसूचित जाति/जनजाति के लगभग 3.91 लाख विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें और स्टेशनरी प्रदान की गई है । भर्ती प्रक्रिया एवं सकल नामांकन अनुपात मंत्री परमार ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए लोक सेवा आयोग के माध्यम से वर्ष 2022 में 2053 पदों पर भर्ती की गई और वर्तमान में 2197 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परमार ने कहा कि आने वाले समय में सकल नामांकन अनुपात (GER) को वर्तमान 28.9% से बढ़ाकर 35% तक ले जाने का लक्ष्य है । मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर अनुभव, अनुसंधान और व्यावहारिक ज्ञान के पथ पर अग्रसर है। तकनीकी शिक्षा की प्रमुख विभागीय उपलब्धियां और नवाचार तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश का तकनीकी शिक्षा विभाग प्रदेश के युवाओं को 'आत्मनिर्भर' और 'वैश्विक प्रतिस्पर्धी' बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। "विकास और सेवा के 2 वर्ष" के अंतर्गत विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। प्रवेश और नामांकन में बड़ी उछाल मंत्री परमार ने बताया कि सत्र 2025-26 में विभाग द्वारा चलाए गए विशेष जागरूकता अभियानों के कारण शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के सकल नामांकन में 21.38% की वृद्धि हुई है। वहीं, ऑनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 25.99% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। छात्र कल्याण और वित्तीय सहायता मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश के मेधावी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 78,218 लाभार्थियों को ₹750 करोड़ की राशि वितरित की गई। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत 14,447 विद्यार्थियों को ₹14.55 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। शैक्षणिक नवाचार और राष्ट्रीय संस्थान मंत्री परमार ने बताया कि मध्यप्रदेश के लिए यह गर्व का विषय है कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर का परिसर अब भोपाल स्थित RGPV में स्थापित हो चुका है, जहाँ सत्र 2025-26 से प्रवेश भी प्रारंभ हो गए हैं। साथ ही, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के 50 मेधावी विद्यार्थियों को IIT इंदौर और 50 छात्राओं को MANIT भोपाल में अध्ययन की विशेष सुविधा प्रदान की गई है । भविष्य की कार्ययोजना और सुधार मंत्री परमार ने बताया कि आगामी वर्षों में विभाग AI, ड्रोन तकनीक जैसे नवीनतम पाठ्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगा। प्रदेश के सभी शासकीय तकनीकी संस्थानों में एक समर्पित 'डिजिटल सेल' का गठन किया जाएगा और विद्यार्थियों की उपस्थिति 'सार्थक ऐप' के माध्यम से रियल-टाइम सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, सिंगरौली में ₹76.56 करोड़ की लागत से खनन प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (College of Mining Technology) का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। परमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन … Read more

राज्यपाल पटेल ने कहा, विजेता खिलाड़ी महिला सशक्तिकरण का प्रतीक हैं

विजेता खिलाड़ी महिला सशक्तिकरण का प्रतीक : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने किया ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप-2025 की विजेता खिलाड़ियों का सम्मान राष्ट्रीय टीम की प्रदेश की खिलाड़ियों ने लोकभवन में की सौजन्य भेंट भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप – 2025 की विजेता टीम की बेटियां महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में विजेता होना दिव्यांगजनों के हौसलें और दिव्यता का उत्कृष्ट उदाहरण है। बेटियों की उपलब्धि प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिला खिलाड़ियों ने मध्यप्रदेश और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। राज्यपाल पटेल सोमवार को राष्ट्रीय ब्लाइंड महिला टी-20 टीम की प्रदेश की खिलाड़ी सुसुषमा पटेल, सुसुनीता सराठे और सुदुर्गा येवले से लोकभवन में चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने तीनों खिलाड़ियों का शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। उन्होंने खिलाड़ियों और उनके कोच का भी उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल पटेल ने उन्हें बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। भारतीय महिला (ब्लाइंड) क्रिकेट टीम ने 23 नवम्बर 2025 को कोलंबो में आयोजित टी-20 वर्ल्डकप के फ़ाइनल मैच में नेपाल को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सुसुनीता सराठे , दमोह ज़िले की सुसुषमा पटेल और बैतुल ज़िले की सुदुर्गा येवले प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल रहीं हैं।  

ग्वालियर स्टेशन की सुरक्षा में लापरवाही: 33 सीसीटीवी कैमरे डेढ़ साल से बंद, यात्रियों की सुरक्षा खतरे में

ग्वालियर  झांसी मंडल का दूसरा बड़ा स्टेशन ग्वालियर है। जहां प्रतिदिन करीब 65 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है। वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही आ रही है। स्टेशन परिसर में लगभग डेढ साल से जीआरपी के 33 सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हुए है। जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इन बंद कैमरों के कारण किसी भी घटना के बाद फुटेज तक नहीं मिल पाते है। जिससे महीनों तक उस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। जबकि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़ भाड़ वाले इलाके में सीसीटीवी निगरानी काफी जरूरी है। स्टेशन परिसर में चोरी, झपटमारी, गुमशुदगी या संदिग्ध गतिविधियों के मामले जीआरपी के पास ही आते है। रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के चलते इन कैमरों को हटा दिया गया है। इंटरसिटी में चोरी का नहीं लगा सुराग ग्वालियर से इंदौर की तरफ जाने वाली इंटरसिटी में 20 नवंबर को एक महिला यात्री के ट्रेन में चढ़ते समय बैग से आभूषणों का डिब्बों गायब हो गया। महिला यात्री के पर्स में से किसी ने इस डिब्बे को निकाल लिया। इस मामले में जीआरपी नैरोगेज ने कुछ लोगों से पूछताछ की। लेकिन फुटेज नहीं मिलने से अभी तक चोर पकड़ में नहीं आ पाए है। इसी तरह की अन्य घटनाएं भी हो चुकी है। लेकिन फुटेज के चक्कर में जांच पूरी नहीं हो पाई है। इससे पीडि़त आज भी थानों के चक्कर काट रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद रेलवे स्टेशन पर लगातार कैमरे नहीं होने से अपराधियों के हौसले भी बुलंद है। यहां सबसे ज्यादा प्लेटफार्म एक पर परेशानी है। जबकि सबसे ज्यादा यात्रियों की भीड़ भी इसी प्लेटफार्म पर रहती है। ऐसे में अपराधी भी इसी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निशाना किसी भी घटना को लेकर बनाते है। सबसे अच्छे जीआरपी के कैमरे वहीं बंद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए रेलवे, आरपीएफ और जीआरपी के कैमरे लगे हुए है। इसमें सबसे अच्छी क्वालिटी के कैमरे जीआरपी के ही है। यहीं कैमरें बंद पड़े हुए है। उसके बाद सबसे खराब क्वालिटी के कैमरे के है। इन कैमरों में पास के लोग ही नहीं दिखते है। वहीं आरपीएफ के कैमरें प्लेटफॉर्म चार पर सबसे ज्यादा है। इनका कहना है एजीएम से कर चुके है शिकायत कैमरें न होने की शिकायत अभी हाल ही में एजीएम के निरीक्षण के दौरान की थी। लेकिन कैमरे न होने से कई बार मामले नहीं सुलझ पाते है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर रेलवे के कई अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन कुछ नहीं हुआ है। दीपशिखा सिंह, टीआई नैरोगेज जीआरपी अधिकारियों को है जानकारी जीआरपी के कैमरे लगभग डेढ साल से बंद है। इसकी जानकारी रेलवे के अधिकारियों को भी है। इन कैमरों के बंद होने से कई बार हमारी जांचे भी प्रभावित होती है। ऐसे में काफी परेशानी आ रही है। इसके लिए स्टेशन निर्माण कर रही कंपनी से भी अब बात करेंगे। जितेंद्र सिंह चंदेलिया, टीआई जीआरपी

भोपाल मेट्रो में लागू नए नियम, नो डिस्टरबेंस जोन में शांति बनाए रखना जरूरी, उल्लंघन पर सजा

भोपाल  भोपाल मेट्रो के शुरू होते ही प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहता, इसी का नतीजा है कि यात्रियों की सुविधाओं के साथ ही प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। दरअसल मेट्रो प्रबंधन ने प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। ये वही पोस्टर हैं, जिनपर लिखा है… भोपाल मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को अब नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल और जुर्माने समेत दोनों के तहत दंड दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है। मेट्रो भोपाल में सफर करने से पहले… क्या करें और क्या न करें…? परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत होगी सजा इन पोस्टर्स पर लिखे गए नियमों को लेकर यात्रियों को सख्त हिदायत दी गई है। यदि वे किसी भी नियम का उल्लंघन करते पाए गए, तो उनके खिलाफ मेट्रो रेलवे परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस अधिनियम के मुताबिक नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना और जेल तक की सजा का प्रावधान है। इन गतिविधियों पर रोक इन पोस्टर्स पर स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि मेट्रो परिसर में और ट्रेन में भीख मांगना, भीड़ जुटाना या किसी भी तरह की नारेबाजी, उत्पादों की मांग करना और किसी भी तरह की सामुहिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है। धारा 62 रहेगी लागू यहां मेट्रो अधिनियम की धारा 62 भी लागू की गई है। इसके तहत मेट्रो परिसर में प्रदर्शन करने, लिखने, चिपकाने और निर्देशों का पालन न करने पर 500 रुपए तक का जुर्माना और यात्री को ट्रेन से बाहर करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा मेट्रो परिसर में या ट्रेन में पालतू जानवरों को लाने की अनुमति नहीं है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित होंगी। धारा 73 के तहत सामान बेचा तो जुर्माना भीड़ और अव्यवस्था को रोक्ने के लिए मेट्रो परिसर में भीख मांगना, सामान बेचना या यात्रियों को किसी भी तरह से परेशान करने पर भी सख्ती से निपटा जाएगा। धारा 73 के तहत मेट्रो परिसर में अनाधिकृत रूप से सामान बेचने पर 400 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। प्रबंधन ने की अपील, कतार में रहें मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों से अपील भी की है कि वे मेट्रो परिसर में कतार में रहें। अपने सामान का ध्यान रखें। टिकट जांच के समय अधिकृत कर्मचारी को ही टिकट दिखाएं, जरूरत पड़ने पर मेट्रो सुरक्षा और ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें। यहां पढ़ें यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सख्त नियम मेट्रो ट्रैक पर उतरने या चलने पर धारा 64-2 के तहत 6 महीने की जेल या 500 रुपए का जुर्माना महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल या 250 रुपए जुर्माना इमरजेंसी अलार्म का दुरुपयोग करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के काम में बाधा डालने वाले पर 1000 रुपए का जुर्माना और 1 साल की जेल का प्रावधान मेट्रो अधिनियम 2002 के तहत ये धाराएं लागू धारा- 59:भोपाल मेट्रो या मेट्रो परिसर में शराब पीना, उपद्रव करना, ट्रेन में फर्श पर बैठना, थूकना या झगड़ा करने पर 200 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। टिकट या पास जब्त किया जा सकता है, ट्रेन से बाहर भी निकाला जा सकता है। धारा 60: आपत्तिजनक सामग्री ले जाने पर 200 रुपए का जुर्माना। धारा 62: रेलवे पर प्रदर्शन करने, कोच में लिखने/चिपकाने या हटने से इनकार करने पर 500 रुपए का जुर्माना और ट्रेन से बाहर निकाला जाना धारा 63: मेच्रो की छत पर यात्रा करने पर 5 हजार का जुर्माना धारा 64-1: महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल औऱ 250 रुपए जुर्माने का या दोनों का प्रावधान धारा 64-2: मेट्रो ट्रेक पर अवैध प्रवेश, पैदल चलने पर 69 महीने की जेल या 500 रुपए जुर्माना या दोनों की सजा धारा 68: ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के कार्य में बाधा डाले जाने पर 1 साल की जेल या 1000 रुपए जुर्माना या दोनों। धारा 69: बिना वैध पास या टिकट के यात्रा करने पर 50 रुपए का सरचार्ज और तय किराये का अधिकतम किराया देना होगा।

सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम, स्विट्ज़रलैंड से निवेश लाने के लिए वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में एमपी का रोडमैप पेश करेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए किए गए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचार अब स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के सम्मेलन में भी बताए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल के साथ 19 से 23 जनवरी के बीच दावोस में होने वाले इस सम्मेलन में शामिल होने स्विट्जरलैंड जाएंगे। सम्मेलन में मुख्यतः इकोनोमिक ग्रोथ, एआइ के प्रभाव, जलवायु परिवर्तन, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ाने पर चर्चाएं होगी। उद्योग, ऊर्जा में निवेश के लिए प्रदेश का रोडमैप दुनिया के सामने रखा जाएगा। साझा करेंगे जानकारियां वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की बैठक में विश्व भर के नेता और बिजनेस लीडर्स शामिल होते हैं। भारत का भी एक केन्द्रीय प्रतिनिधिमंडल मंत्री की अध्यक्षता में फोरम की बैठक में शामिल होता है। इसमें राज्यों के भी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पहले पूर्व सीएम कमलनाथ फोरम की बैठक में शामिल हुए थे। अब सीएम डॉ यादव देश में चल रहे आर्थिक परिवर्तन के हिस्से के रूप में मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, नवाचार, निवेश अवसरों और सफलता की कहानियों के बारे में फोरम के मंच पर जानकारियां साझा करेंगे। 'पीपीपी' पर रहेगा जोर कार्यक्रम पांच वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित होगा। जहां आर्थिक प्रगति के लिए सभी की भागीदारी के साथ सार्वजनिक-निजी संवाद और सहयोग को बढ़ाने पर चर्चाएं होंगी। प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में होने वाली पैनल चर्चाओं, राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और सरकार-से-व्यवसाय तथा सरकार-से-सरकार बैठकों की श्रृंखला में भाग लेगा। साथ ही वैश्विक राजनीतिक और बिजनेस लीडर्स के साथ स्थिरता सहित अन्य विषयों पर होने वाले सत्रों में भी भाग लेगा।

मध्यप्रदेश में 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ, नए साल से बिजली बिल में 15% की बढ़ोतरी

भोपाल  नए साल में शहर के 33 हजार से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का झटका लगेगा। बिजली कंपनी ने बिलिंग फार्मूले में परिवर्तन करते हुए किलोवॉट की जगह किलो वोल्ट एम्पियर से बिलिंग का फार्मूला लागू करने का फैसला लिया है। इसके असर यह होगा कि अनुपयोगी बिजली का बिल बनेगा और उपभोक्ता से इसकी वसूली की जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर बड़े संस्थान, उद्योग उपभोक्ताओं पर आएगा। इससे इनका बिजली बिल पंद्रह फीसदी तक बढ़ जाएगा। बिजली दर बढ़ाने का या पिछले दरवाजे का रास्ता है। मप्र विद्युत नियामक आयोग को कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ में इसे प्रस्तावित किया है। केवीए को प्रकट शक्ति यानी अपेरेंट पावर भी कहते हैं। ये सप्लाई की गई कुल बिजली है। प्रस्ताव आयोग को दिया कंपनी ने अपना एआरआर प्रस्ताव आयोग को दिया है। इसमें तमाम तरह के प्रस्ताव है। आयोग के निर्णय के आधार पर ही दर और तरीका तय होगा। – क्षितिज सिंघल, एमडी, मध्यक्षेत्र ऐसे समझें पूरा हिसाब बिजली का बिल किलोवॉट की बजाय किलो वोल्ट एम्पीयर के आधार पर बनाना तय किया जा रहा है। किलोवॉट बिजली की वास्तविक खपत को बताता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर लॉस वाली बिजली का भी आंकलन करता है। यदि पुराने उपकरण, वायरिंग से परिसर में बिजली का तकनीकी हानि होती है तो वह भी उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाएगी। अभी एचटी उपभोक्ताओं के बिल इससे बनेंगे, धीरे-धीरे अन्य उपभोक्ताओं तक भी इसे बढ़ाएंगे। जिले में फिलहाल 33000 एचटी उपभोक्ता इसके दायरे में रहेंगे। बिजली कंपनी को ये लाभ लाइन लॉस कम। ट्रांसफॉर्मर व केबल पर कम दबाव। सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बिल केवीए पर शिफ्ट इसका उद्देश्य है पावर फैक्टर सुधारना। ग्रिड पर अनावश्यक लोड कम करना। बिजली आपूर्ति को अधिक कुशल बनाना। उपभोक्ता को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना। जिले में बिजली लाइन के तकनीकी लॉस को घटाने 15 साल में 3000 करोड़ खर्च कर चुके हैं। इससे एचवीडीएस सिस्टम विकसित करने से लेकर नई लाइन बिछाने, फीडर सेपरेशन समेत ट्रांसफार्मर – सब स्टेशन की क्षमता वृद्धि तक की गई। ये औसत 15 फीसदी है जो बिलिंग सिस्टम बदलने से ग्राहक की जेब पर शिफ्ट हो जाएगा। लापरवाही से बढ़ेगा बिल केवीए आधार पर बिलिंग से वही उपभोक्ता लाभ में रहेंगे जो सही तरीके से बिजली का उपयोग करेंगे। लापरवाही करने वालों का बिल बढ़ेगा। यदि किसी परिसर में बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर, वायरिंग, उपकरण नए व बेहतर है तो किलोवॉट व केवीए एक समान रहेंगे। यहां बिल में अंतर नहीं होगा। जहां पुराने उपकरण, पुरानी वायरिंग है वहां बिजली का पॉवर फैक्टर खराब होगा। केवीए और किलोवॉट में अंतर होगा। इससे बिल बढ़ेगा। बीएमसी ने नहीं भरा बिजली बिल, बिजली कटी राजधानी के कोटरा क्षेत्र स्थित पीएम आवास योजना के गंगानगर में निगम न बिल का भुगतान नहीं करने से बिजली कंपनी ने कनेक्शन काट दिया। इससे रविवार को ब्लॉक सी-1 और सी-3 की लिफ्ट 10 घंटे तक बंद रहीं। नौ मंजिला इमारत में रहने वाले रहवासियों, विशेषकर जैसे बने रहे। रहवासियों के बुजुर्ग और मरीज दिनभर बंधक अनुसार रविवार 12 बजे अचानक लिफ्ट बंद हो गई। जब लिफ्ट मेंटेनेंस स्टाफ से संपर्क किया तो पता चला कि बिजली बिल बकाया होने से सप्लाई काट दी है। काफी हंगामे और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शाम 6 बजे बिजली बहाल हुई। ब्लॉक सी-1 के फ्लैट नंबर 602 में रहने वाले 62 वर्षीय परशुराम कुम्हरे ने बताया कि उनकी पत्नी की हाल ही में सर्जरी हुई है। लिफ्ट बंद होने से पत्नी को सीढ़ियों से ले जाने में भारी दिक्कतें हुई। इस मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय शर्मा का कहना है कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और नियमानुसार रहवासियों को सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी

शिवराज सिंह चौहान ने एमपी में 2 ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ाने की घोषणा, जनता से किया ‘सेवा’ का वादा

विदिशा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा रेलवे स्टेशन पर नई ट्रेन सुविधाओं की सौगात दी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे जीवन के दो आदर्श है एक प्रेम और दूसरा जनता की सेवा। सबसे प्रेम करो, हम सब एक ही परिवार है। समाज के अलग-अलग वर्गों के कल्याण के लिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है, इसलिए विदिशा को सड़क व रेल मार्ग से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे है।  विदिशा रेलवे स्टेशन को मिला स्टॉपेज विदिशा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज को समर्पित करते हुए उन्होंने बताया कि विदिशा स्टेशन पर गाड़ी संख्या 12629/12630 का ठहराव दिया गया है। इसके अलावा रायसेन जिले के सांची स्टेशन पर गाड़ी संख्या 16031/16032 तथा दीवानगंज स्टेशन पर गाड़ी संख्या 18235/18236 के प्रायोगिक ठहराव (हाल्ट) की घोषणा की गई है। बेंगलुरु तक आना जाना होगा आसान इस मौके पर उन्होंने कहा कि यशवंतपुर-हजरत निजामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का प्रदेश में दूसरा स्टॉपेज विदिशा है। इस सुविधा से विदिशा के नागरिकों का बेंगलुरु की और आना-जाना आसान होगा। इन नवीन स्टॉपेज से विदिशा के नागरिको को पढ़ाई, रोजगार, व्यापार और उद्योग के लिए विशेष सहलियत मिलेगी। विदिशा, गंजबासौदा और नहीं छोड़ी जाएगी। यह ट्रेनें विदिशा को समर्पित है। संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का विदिशा में हाल्ट का समय विदिशा स्टेशन पर दिल्ली की ओर जाने वाली गाड़ी संख्या 12629 यशवंतपुर-नई दिल्ली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (Yesvantpur-New Delhi Sampark Kranti) का आगमन रात 12.45 बजे होगा. जहां यह दो मिनट का ठहराव करेगी। यह हाल्ट 1 जनवरी से प्रारंभ होगा। इसी प्रकार बेंगलुरु की ओर जाने वाली गाड़ी संख्या 12630 नई दिल्ली-यशवंतपुर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का आगमन शाम 5.28 बजे होगा। इस ट्रेन की सुविधा विदिशावासियों को 31 दिसंबर से मिलने लगेगी। सांची पर अंडमान एक्सप्रेस का हाल्ट सांची रेलवे स्टेशन पर अंडमान एक्सप्रेस (Andaman Express) का भी ठहराव दिया गया है। कटरा की ओर जाने वाली गाड़ी संख्या 16031 चेन्नई-श्री वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस (Chennai-Shri Vaishno Devi Katra Express) सुबह 9.38 बजे रुकेगी, जबकि चेन्नई की ओर जाने वाली गाड़ी संख्या 16032 श्री वैष्णो देवी कटरा-चेन्नई एक्सप्रेस रात 1.18 बजे रुकेगी। यह हाल्ट 29 दिसंबर से प्रारंभ हो जाएगा। सांची में इस ट्रेन के स्टॉपेज से विदिशा जिले के यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। विधायक के घर पहुंच श्रद्धा सुमन अर्पित किए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) गंजबासौदा पहुंचे जहां उन्होंने क्षेत्रीय विधायक हरि सिंह रघुवंशी के निवास पर पहुंचकर उनकी मां के निधन हो जाने पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है उनके साथ कुरबाई विधायक हरिसिंह सप्रे सहित कई भाजपाई मौजूद थे। कार्यक्रम में नेता रहे मौजूद कार्यक्रम को विदिशा विधायक मुकेश टंडन, सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी तथा नपा अध्यक्ष प्रीति शर्मा ने भी संबोधित किया। कुरवाई विधायक हरिसिंह सप्रे सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, डीआरएम, स्टेशन मास्टर, रेलवे अधिकारी एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार को पहुंचे डेढ़ लाख भक्त, सर्दियों में बढ़ी श्रद्धा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार करीब डेढ़ लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया। शनिवार को जिस सम्राट अशोक सेतु पर ताला लगा दिया गया था। रविवार को उसे 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों के लिए खोला गया। महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक का निर्माण होने के बाद से सप्ताहंत में भक्तों की संख्या सर्वाधिक रहती आ रही है। इसका असर साल के आखिरी रविवार को भी नजर आया। देशभर से आए डेढ़ लाख से अधिक भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। शनिवार से भक्तों का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था, जनदबाव के चलते प्रशासन को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा था। रविवार को भी इसका असर दिखाई दिया। मंदिर प्रशासन ने उत्तर व पूर्व के सभी द्वारों को बंद कर केवल पश्चिम दिशा के श्री महाकाल महालोक व सम्राट अशोक सेतु से सामान्य व शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया। अतिरिक्त इंतजाम शुरू किए बीते दो दिनों की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति व जिला प्रशासन द्वारा 31 दिसंबर व 1 जनवरी के लिए अतिरिक्त इंतजाम जुटाए जा रहे हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजेग लगाने का काम शुरू हो गया है। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अन्य इंतजाम भी किए जा रहे हैं। कालभैरव मंदिर में भी दर्शनार्थियों का ताता महाकाल मंदिर के अलावा कालभैरव, मंगलनाथ, अंगारेश्वर व चिंतामन गणेश मंदिर में भी आस्था उमड़ रही है। रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान कालभैरव के दर्शन किए। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था स्थगित रही। जिला प्रशासन की ओर से जारी सूची के आधार पर ही प्रोटोकाल दर्शन कराए जा रहे थे। मंदिर में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार महाकाल मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार है। आसपास गली तथा शहनाई गेट के सामने मुख्य द्वार पर अवैध पार्किंग हो रही है, जो थोड़ा बहुत रास्ता बचता है उस पर हार फूल, माला, पूजन सामग्री बेचने वाले दुकान लगा लेते हैं। भारी भीड़ के बीच में सड़कों पर हो रहे इस अतिक्रमण को देखने वाला कोई नहीं है।