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भारत दुनिया का सबसे सक्षम देश बन रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

घर में बहन-बेटियों के साथ आती है हर सिद्धि, बहनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत दुनिया का सबसे सक्षम देश बन रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव को चांदबड़ के वार्ड 37 में बहनों ने बांधी राखी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति में रक्षाबंधन का विशेष महत्व है। जब तक घर में बेटा न आए सिद्धि नहीं होती, लेकिन घर में जब तक बेटी न जाए हर सिद्धि अर्थात पूर्णता प्राप्त नहीं हो सकती है। रक्षाबंधन त्यौहारों का राजा है। बहनों के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जाता है। बहनों के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को भोपाल के चांदबड़ क्षेत्र के वार्ड 37 में आयोजित विशाल रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का सिर धड़ से अलग किया तब भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी। इस पर द्रौपदी ने साड़ी का पल्लू फाड़कर भगवान श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांधा था। यह राखी का प्रतीक था। इसके बाद से रक्षाबंधन की परम्परा प्रारंभ हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब परिवारों को आवास, गैस चूल्हा और अन्य सुविधाएं देने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बहनों को लोकसभा और राज्यसभा में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे किसानों और जवानों की क्षमताओं पर भरोसा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सबसे सक्षम देश बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कतिपय लोग चुनाव आयोग और सेना का भी सम्मान नहीं करते। रक्षाबंधन कार्यक्रम के पूर्व चांदबड़ क्षेत्र में हुए रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नागरिकों ने पुष्पहारों से और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बहनों ने रक्षासूत्र बांधे। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि नरेला क्षेत्र में 16 साल से भव्य रक्षाबंधन महोत्सव मनाया जा रहा है। पिछले साल डेढ़ लाख बहनों ने महोत्सव में राखियां बांधी थीं। भाई-बहन का रिश्ता अटूट होता है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश भी विकास के पथ पर अग्रसर है। हमें लव जिहाद के कुचक्र के खिलाफ और नशा मुक्ति के लिए संकल्प लेने की आवश्यकता है। रक्षाबंधन महोत्सव में महापौर श्रीमती मालती राय, पार्षद श्रीमती वंदना हेमराज कुशवाहा, रविंद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें उपस्थित थीं।  

ट्रेन इमरजेंसी कोटे में गिरावट, वंदे भारत और शताब्दी के मुकाबले इन 3 ट्रेनों में ज्यादा

ग्वालियर हाई स्पीड वंदे भारत, शताब्दी, राजधानी जैसी ट्रेनें ग्वालियर से निकलती हैं लेकिन इन ट्रेनों से ज्यादा इमरजेंसी कोटे की डिमांड बरौनी मेल, बुंदेलखंड एक्सप्रेस और रतलाम इंटरसिटी में रहती है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब इसमें सीट पाने के लिए आवेदन नहीं किया जाता हो। हालात यह है कि ग्वालियर से चलने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग होने के बाद इमरजेंसी कोटे का सहारा लेना पड़ रहा है। झांसी मण्डल से गुजरने वाली 143 ट्रेन में इमरजेंसी कोटा प्रदान किया गया है। इस कोटे की बर्थ सांसद, विधायक, रेल अधिकारियों व अन्य वीआईपी को उपलब्ध कराई जाती है। अधिकांश ट्रेनों में स्लीपर और एसी का अलग- अलग इमरजेंसी कोटा फिक्स है। उसी के आधार पर रेलवे यह कोटा देती है। ग्वालियर से चलने वाली बरौनी, बुंदेलखंड और रतलाम इंटरसिटी में अधिक भीड़ होने की वजह से इमरजेंसी कोटे की डिमांड भी ज्यादा आती है। हालात यह हो जाते हैं कि कभी- कभी सीट से ज्यादा कोटे आ जाते हैं। वहीं वंदे भारत, शताब्दी आदि ट्रेनों में यात्रियों के कोटे इतने नहीं आते हैं।- अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम झांसी ग्वालियर से बरौनी जाने वाली बरौनी मेल, रतलाम जाने वाली रतलाम इंटरसिटी और बनारस के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस एक मात्र सीधी ट्रेनें हैं। इसमें से बरौनी मेल बिहार से होकर हावड़ा तक पहुंचती है। इसमें सबसे ज्यादा भीड़ छठ पूजा के दौरान होती है लेकिन दीपावली से काफी पहले ही यह ट्रेन फुल हो जाती है। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में स्पेशल ट्रेन को भी चलाया जाता है। उसके बावजूद भी यात्रियों को जगह नहीं मिल पाती है। वंदे भारत, शताब्दी में आसानी से मिलती है सीट ग्वालियर से निकलने वाली वंदे भारत, शताब्दी और अन्य ट्रेनों में यात्री को आसानी से टिकट मिल जाता है। इन ट्रेनों में अगर वेटिंग भी होती है तो अक्सर वह वेटिंग भी कंफर्म हो जाती है। लेकिन ग्वालियर से चलते वाली ट्रेनों में काफी बुरा हाल है।

बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए सरकार की बड़ी योजना, छात्रवृत्ति 1,000–25,000 रुपये

बीड़ी और खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई में सरकार देगी सहयोग, ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ राज्य सरकार देगी 1,000 से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए सरकार की बड़ी योजना, छात्रवृत्ति 1,000–25,000 रुपये सरकारी छात्रवृत्ति योजना: बीड़ी और खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई में मदद, ऑनलाइन आवेदन शुरू बीड़ी व खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति, आवेदन ऑनलाइन शिक्षा में समान अवसर: श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगी आर्थिक सहायता, ऑनलाइन आवेदन जारी बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को बढ़ावा, सरकार देगी 1,000–25,000 रुपये की छात्रवृत्ति भोपाल  शैक्षणिक सत्र-2025-26 के लिए शिक्षा के लिये वित्तीय सहायता योजना के अंतर्गत मान्यता प्राप्त शिक्षण-संस्थाओं में अध्ययनरत प्रदेश के बीड़ी, चूना पत्थर एवं डोलोमाट और लौह-मैग्रीज-क्रोम अयस्क खनन श्रमिक एवं उनके पुत्र-पुत्रियों को शिक्षा के लिये कक्षा एक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति की राशि रूपये 1000/- से 25000/- स्वीकृत की गई है। योजनांतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिये पात्र विद्यार्थियों के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया दिनांक-02.06.2025 से प्रारम्भ हो चुकी है। इसकी अंतिम तिथि प्री. मेट्रिक के लिये 31 अगस्त 2025 एवं पोस्ट मेट्रिक के लिये 31 अक्टूबर 2025 निर्धारित है। छात्रवृत्ति के लिये आवेदन करने के लिए ओ.टी.आर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) और फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। आवेदन की पात्रता व संबंधित अन्य जानकारी/शर्तें नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर उपलब्ध है। ऑनलाइन आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन कर अपलोड करें जो कि स्पष्ट और पठनीय हो। ऑनलाइन आवेदन करने संबंधी अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी के लिये जबलपुर मुख्यालय के दूरभाष क्रमांक 0761-4039511, 4039510 या e-mail ID -wc.jabalpur@rediffmail.com. wcjab@mp.gov.in तथा कल्याण प्रशासक कार्यालय, इन्दौर के दूरभाष क्रमांक- 0731-2703530 व e-mail-ID waind@mp.gov.in पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है। मध्यप्रदेश परिक्षेत्र में संचालित अपने नजदीकी औषधालयों एवं केन्द्रीय चिकित्सालय सागर में व्यक्तिगत रूप से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। शिक्षण संस्थान द्वारा सत्यापित नहीं किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा। सभी विद्यार्थियों से अनुरोध है कि आवेदन के पश्चात् अपने विद्यालय/महाविद्यालय में संपर्क स्थापित कर अपने आवेदन को स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) के माध्यम से ही सत्यापित करवाना सुनिश्चित करें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच बढ़ाने के लिए विमान सेवाओं का विस्तार

सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच के लिए प्रदेश में किया जाएगा विमान सेवाओं का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच बढ़ाने के लिए विमान सेवाओं का विस्तार मुख्यमंत्री ने किया विमान सेवाओं के विस्तार का ऐलान, सुदूर अंचलों तक पहुंचेगी हवाई सुविधा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच संभव करने के लिए सरकार द्वारा विमान सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है, प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक हवाई अड्डा और हर 75 किलोमीटर पर एक हवाई पट्टी उपलब्ध हो। इससे न केवल शहरी क्षेत्र बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाके भी हवाई नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की कड़ी में रीवा, सतना और दतिया में नए हवाई अड्डों का शुभारंभ किया गया है। प्रदेश में हवाई अड्डों की संख्या बीते एक वर्ष में 5 से बढ़कर 8 हो गई है। शिवपुरी में नए हवाई अड्डे के लिए अनुबंध भी हो चुका है। मध्यप्रदेश हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा देना है। नए हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों के निर्माण से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। साथ ही ­स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।  

एशियन डेवलपमेंट बैंक सहयोग से नेमावर में पेयजल परियोजना, जल्द लाभान्वित होंगे हजारों लोग

भोपाल  मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीनस्थ उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा देवास जिले के नेमावर नगर परिषद् में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) के सहयोग से एक महत्वाकांक्षी जल प्रदाय परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना 10 वर्षों के संचालन एवं संधारण के साथ लगभग 21 करोड़ रूपये की लागत से क्रियान्वित की जा रही है। इसके अंतर्गत 1640 घरों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे 6,498 की आबादी को प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। परियोजना के तहत् मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी से पानी लाकर उसे 2.41 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शोधित किया जाएगा। शोधित जल को लगभग 36 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन के माध्यम से पूरे नगर में पहुँचाया जाएगा। शहर में जल भंडारण के लिए 2 ओवरहैड टैंक का निर्माण भी पूर्णता की ओर है। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायित्व और नियमितता प्राप्त होगी। यह परियोजना नेमावर नगर में नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता – शुद्ध पेयजल – की सुनिश्चित आपूर्ति के लिये एक बड़ा कदम है। परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के सामाजिक एवं स्वास्थ्य स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आयेगा।  

ऊर्जा मंत्री तोमर का निर्देश: झांकी-पंडाल सजाने के लिए अस्थाई कनेक्शन का ही उपयोग करें

भोपाल गणेशोत्सव त्यौहार तथा अन्य त्यौहारों में पंडालों को अस्थायी कनेक्शन देने के लिए विद्युत वितरण कंपनियों ने माकूल प्रबंध किए हैं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने धार्मिक उत्सव समितियों और बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे गणेशोत्सव के दौरान धार्मिक पण्डालों एवं झॉंकियों में बिजली साज-सज्जा,नियमानुसार ऑनलाइन अस्थाई कनेक्शन लेकर ही करें। अस्थाई कनेक्शन लेने के लिये क्या करें बिजली कंपनी के पोर्टल http://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home पर जाकर निर्धारित प्रपत्र में सही, संयोजित विद्युत भार को दर्शाते हुए अस्थायी कनेक्शन के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें। लायसेंसी विद्युत ठेकेदार की टेस्ट रिपोर्ट आवेदन में संलग्न करें एवं वायरिंग इत्यादि लायसेंसधारी विद्युत ठेकेदार से ही करवाएं। आवेदन में दर्शाए अनुसार विद्युत भार के अनुरूप सुरक्षा निधि एवं अनुमानित विद्युत उपभोग की राशि अग्रिम जमा कराकर बिजली कंपनी से अस्थाई कनेक्शन की रसीद अवश्य लें। रसीद की लेमीनेटेड प्रति अनिवार्य रूप से पंडाल/झॉंकी के सामने लगाएं। आवेदित विद्युत भार से अधिक भार का उपयोग विद्युत साज-सज्जा के लिए न करें। विद्युत कनेक्शन मीटरीकृत होगा एवं विद्युत देयक की बिलिंग नियमानुसार अस्थायी कनेक्शन के लिये लागू घरेलू दर पर की जाएगी। झांकियों के निर्माण एवं विद्युत साज-सज्जा में सुरक्षा नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। अनधिकृत तरीके से विद्युत का उपयोग न करें। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी कॉल कर सकते हैं। अस्थाई कनेक्शन न लेने से होने वाले नुकसान अधिक भार से ट्रांसफार्मर के जलने की संभावना तथा दुर्घटना की आशंका। पारेषण एव वितरण प्रणाली पर विपरीत असर होने से अंधेरे की संभावना। अनधिकृत विद्युत उपयोग करने पर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत उपयोगकर्ता एवं जिस विद्युत ठेकेदार से कार्य कराया गया है, उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही। अनधिकृत विद्युत उपयोग की दशा में संबंधित विद्युत ठेकेदार के लायसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही।  

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार MP में, चीन से आज़ादी की राह आसान: मुख्यमंत्री यादव

मध्यप्रदेश अब बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स हब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार MP में, चीन से आज़ादी की राह आसान: मुख्यमंत्री यादव मध्यप्रदेश में मिला रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार, चीन पर निर्भरता होगी समाप्त: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब क्रिटिकल मिनरल्स हब बनेगा। मध्यप्रदेश ऊर्जा राजधानी के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा। इसके साथ ही भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी देश बनेगा। सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) का अकूत भंडार मिलने से अब भारत की चीन जैसे देशों पर निर्भरता नहीं रहेगी। केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद में जानकारी दी थी कि भारत में पहली बार इतनी विशाल मात्रा में इन दुर्लभ तत्वों का पता चला है। यह उपलब्धि भारत को ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ओर बड़ा कदम रेयर अर्थ एलिमेंट्स को आधुनिक तकनीक का आधार कहा जाता है। अब तक भारत इन खनिजों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर रहा है। प्रदेश के सिंगरौली की यह खोज भारत को आयात-निर्भरता से मुक्त कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगी। आने वाले समय में यह खोज आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ ही औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देगी। सिंगरौली : भविष्य का क्रिटिकल मिनरल हब कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा किए गए शोध में सिंगरौली की कोयला खदानों और चट्टानों में REEs (जैसे स्कैंडियम, यिट्रियम आदि) की आशाजनक सांद्रता पाई गई है। कोयले में इनकी औसत मात्रा 250 पीपीएम और गैर-कोयला स्तर पर लगभग 400 पीपीएम आंकी गई है। जुलाई 2025 में इस खोज की आधिकारिक घोषणा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कोयले की राख और ओवरबर्डन भी क्रिटिकल मिनरल्स का सैकण्डरी स्रोत बन सकते हैं। आईआरईएल के साथ सहयोग रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज को देखते हुए राज्य सरकार अब इनके प्रसंस्करण और शोध-अन्वेषण के लिए बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में जुटी है। हाल ही में खनिज संसाधन विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड (आईआरईएल) की भोपाल इकाई का दौरा किया और संभावित सहयोग पर चर्चा की। विभाग रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रहा है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और उद्योग को विश्वस्तरीय आधार प्रदान करेगा। वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत सिंगरौली जिले में मिले इस खजाने से भारत ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और उच्च तकनीकी उद्योगों में आत्मनिर्भर बनेगा। आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश केवल ऊर्जा राजधानी ही नहीं बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा। चीन पर निर्भरता समाप्त होगी और भारत वैश्विक मंच पर शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित होगा। प्रमुख स्रोत और भूगर्भीय संरचनाएँ रेयर अर्थ एलिमेंट्स प्राकृतिक रूप से कई खनिज संरचनाओं में पाए जाते हैं। इनमें बास्टनेसाइट, जेनोटाइम, लोपेराइट और मोनाजाइट प्रमुख हैं। भारत के तटीय क्षेत्रों की रेत और अपक्षयित ग्रेनाइट मिट्टी भी इन तत्वों से समृद्ध मानी जाती है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उपयोग रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग अनेक आधुनिक उद्योगों में किया जाता है, इसमें प्रमुख हैं:-     रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक : सैमरियम-कोबाल्ट और नियोडिमियम चुम्बक उच्च-प्रदर्शन वाले हथियारों, उपग्रह संचार और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में अनिवार्य हैं।     पेट्रोलियम उद्योग : लैंथेनम और सेरियम का उपयोग ऑटोमोटिव कैटेलिटिक कन्वर्टर्स और रिफाइनिंग में उत्सर्जन कम करने में होता है।     स्थायी चुम्बक : नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन तथा सैमरियम-कोबाल्ट चुम्बक इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए आवश्यक हैं।     डिस्प्ले और प्रकाश उपकरण : यूरोपियम, टर्बियम और यिट्रियम एलईडी, एलसीडी और फ्लैट पैनल डिस्प्ले में उपयोग में आते हैं। कैमरा और स्मार्टफोन लेंस 50% तक लैथेनम से निर्मित होता है।     ऑटोमोबाइल सेक्टर : हाइब्रिड वाहनों की बैटरियों में लैथेनम आधारित मिश्र धातुओं का प्रयोग होता है।     इस्पात और मिश्रधातु : मिशमेटल (सेरियम, लैथेनम, नियोडिमियम और प्रेजोडायमियम का मिश्रण) इस्पात की गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी है।     स्वास्थ्य क्षेत्र : गैडोलीनियम MRI स्कैन में कंट्रास्ट एजेंट के रूप में प्रयोग होता है, जबकि ल्यूटेटियम और यिट्रियम समस्थानिक कैंसर उपचार और PET इमेजिंग में सहायक हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की प्रदेश के दुग्ध संघों की गतिविधियों की समीक्षा

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का लाभ गोशाला प्रबंधन और गोवंश के स्वास्थ्य में भी लिया जाए जहां दुग्ध संघ की पहुंच सीमित है, वहां निजी दुग्ध व्यवसायियों को किया जाए प्रोत्साहित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ दुग्ध उत्पादों की बेहतर ब्राडिंग, गोवंश की समुचित देखभाल, वेटनरी क्षेत्र में आवश्यक प्रशिक्षण और उन्नत अधोसंरचना स्थापित करने में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का हरसंभव लाभ लिया जाए। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों तक डेयरी नैटवर्क का विस्तार सुनिश्चित किया जाना है। इससे 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन होगा। बढ़े हुए दुग्ध संकलन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतम दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की जाए। प्रदेश में निर्मित होने वाले दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्राडिंग सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और प्रदेश के दुग्ध संघों की गतिविधियों के संबंध में मंत्रालय में हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। सभी विश्वविद्यालयों में वैटनरी के कोर्स किए जाएं संचालित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैटनरी कॉउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में वैटनरी के कोर्स संचालित किए जाएं। उन्होंने नगरीय‍निकायों की बड़ी गो-शालाओं के उन्नयन और प्रबंधन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सहयोग लेने की आवश्यकता भी बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी दुग्ध संघों में एक समान उत्पाद निर्माण सुनिश्चित करने के लिए स्टेण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर अपनाना आवश्यक है। दुग्ध उत्पादकों को दुध-मूल्य के नियमित और समय पर भुगतान की व्यवस्था की नियमित मॉनीटरिंग हो। जिन क्षेत्रों में दुग्ध संघ की पहुंच सीमित है, वहां निजी दुग्ध व्यवसायियों को अद्यतन तकनीक का आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर दुग्ध व्यवसाय को प्रोत्साहित और सशक्त किया जाए। प्रदेश के दुग्ध संघ, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और मध्यप्रदेश कृषि उद्योग निगम में बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो। सभी दुग्ध संघ अपने सदस्यों की बेहतरी के लिए कर रहे हैं नवाचार बैठक में जानकारी दी गई कि सम्पूर्ण डेयरी चैन का डिजिटाइजेशन करने के लिए दुग्ध संघों में प्रक्रिया आरंभ की गई है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ द्वारा मोबाइल एप का उपयोग आरंभ किया गया है, जिससे दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वारा प्रदाय किए गए दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है। भोपाल दुग्ध संघ द्वारा शहरी उपभोक्ताओं को दूध की गुणवत्ता की जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 'दूध का दूध-पानी का पानी' अभियान आरंभ किया गया है। भोपाल दुग्ध संघ ने 'सांची भात योजना' भी आरंभ की है, जिसमें सहकारी समितियों के सदस्यों की बेटियों के विवाह के अवसर पर दुग्ध संघ की ओर से 11 हजार रूपए और वस्त्र, भात के रूप में प्रदान किए जाएंगे। उज्जैन दुग्ध संघ द्वारा पशुधन स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव, चेयरमैन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड डॉ. मीनेष शाह, वेटनरी कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा सहित पदाधिकारी उपस्थित थे।  

आचार्य द्विवेदी ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिन्दी साहित्य के महान निबंधकार व उपन्यासकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जयंती पर उनका स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'पद्म भूषण' से सम्मानित आचार्य श्री द्विवेदी भारतीय संस्कृति के गहन अध्येता थे, उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपनी कालजयी लेखनी से समृद्ध किया। आचार्य श्री हजारी प्रसाद द्विवेदी की कृतियां नई प्रतिभाओं के लिए पथ प्रदर्शक हैं।  

आजीविका-मिशन प्रतिभा के अवसर और सम्मान देने का बना मंच : मंत्री पटेल

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत लेखनशाला भोपाल बहुत से लोगों में प्रतिभा होती है, लेकिन उनके पास कोई मंच नहीं होता। आज आजीविका मिशन ऐसा सशक्त मंच बनकर उभरा है, जो उनकी प्रतिभा को अवसर और सम्मान दोनों प्रदान कर रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल मंगलवार को होटल कोर्टयार्ड मैरियट में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत तीन दिवसीय जेंडर रिसोर्स सेंटर की एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) लेखनशाला को संबोधित कर रहे थे। इस लेखनशाला में देशभर के 20 राज्यों से प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान ‘संघर्ष से सम्मान की ओर’ कॉफी बुकलेट का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह तथा आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस आयोजन का उद्देश्य जेंडर रिसोर्स सेंटर की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना तथा राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करना है।