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राजस्थान के मौसम का बदला मिजाज, 7 सितंबर के बाद घटेगी बारिश, 12-13 सितंबर से फिर अलर्ट

जयपुर राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक ज्यादातर इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है। राहत के इस दौर के बाद 12-13 सितंबर से फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 7 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। 7 सितंबर को इन इलाकों में बारिश के आसार मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगह बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बना सिस्टम कमजोर राजस्थान में पिछले दिनों हुई बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) प्रमुख मौसम सिस्टम था। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ी थीं। IMD ने 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी। अब यह सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके कमजोर होने के साथ राजस्थान में मानसून की सक्रियता भी कम होने की संभावना है। इसलिए 7 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों घट सकती हैं। 8 से 10 सितंबर तक बारिश से राहत मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 सितंबर के बीच राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। यानी अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। 12-13 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून बारिश में यह कमी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 12 से 15 सितंबर के बीच पूरबाई हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ सकती है। इससे पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में कई स्थानों पर खंड-खंड बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा रह सकती हैं। हालांकि इस दौरान किसी एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसलिए इस दौर को फिलहाल नमी बढ़ने और पूरबाई हवाओं के असर से संभावित बारिश के चरण के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। 16-17 सितंबर से फिर कम हो सकती है बारिश मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 सितंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर कमी आ सकती है। हालांकि 10 से 15 दिन के विस्तारित पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले किसी नए मौसम सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और हवाओं के रुख का राजस्थान की बारिश पर असर पड़ सकता है। इसलिए अगले चरण की बारिश को लेकर स्थिति साफ होने के साथ पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।  

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 9 दिन भव्य उत्सव, 16 हजार किलो सामग्री से सजेगा मोदक दरबार; देखें खास आकर्षण

 जयपुर जयपुर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश के सबसे बड़े उत्सवों में से एक मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का गणेश चतुर्थी महोत्सव आज से भक्ति और उल्लास के साथ शुरू हो गया. महिलाओं की कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ. अब 7 से 15 सितंबर तक मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में हर दिन गजानन का दरबार अलग रंग और अलग स्वरूप में नजर आएगा. 14 सितंबर को भगवान गणेश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, जबकि 15 सितंबर को गणेशजी नगर भ्रमण पर निकलेंगे।  महोत्सव के शुभारंभ पर सोमवार सुबह महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और जलाभिषेक के साथ उत्सव की शुरुआत हुई. मंदिर में आने वाले दिनों में भगवान गणेश के लिए अलग-अलग झांकियां सजाई जाएंगी. फल, सब्जी और फूलों की झांकियों के साथ भक्ति संगीत, ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक के कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।  पुष्य नक्षत्र पर 348 किलो पंचामृत से अभिषेक 8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र के विशेष संयोग पर भगवान गणेश का 348 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा. इसमें 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी शामिल होगा. इसी दिन केले और छप्पन भोग की झांकी सजेगी. शाम 6 बजे ध्रुपद गायन का आयोजन होगा।  9 सितंबर को मोदकों से सजेगा गजानन का दरबार गणेशोत्सव के तीसरे दिन मोदक झांकी खास आकर्षण होगी. इसके लिए करीब 3 हजार किलो घी, 3 हजार किलो बेसन, 9 हजार किलो शक्कर और 1000 किलो सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाएगा. 251-251 किलो के दो विशाल मोदक, 51-51 किलो के पांच, 21-21 किलो के 21 और 1.25 किलो के 1100 मोदक तैयार किए जाएंगे. सुबह 5 बजे से दर्शन होंगे और शाम 7 बजे श्रद्धालुओं को निशुल्क प्रसाद वितरित किया जाएगा. इस दिन बाहर से लाया गया प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था नहीं रहेगी।  13 सितंबर को 3500 किलो मेहंदी से होगा सिंजारा 13 सितंबर को सिंजारा उत्सव का रंग मोतीडूंगरी में नजर आएगा. इस दिन सोजत की करीब 3500 किलो मेहंदी से भगवान गणेश का सिंजारा किया जाएगा. रात 7:30 बजे पांच स्थानों से मेहंदी वितरित की जाएगी और महिलाओं व कन्याओं के लिए अलग काउंटर रहेगा. इसी दिन गणेशजी को ननिहाल से आई नवीन पोशाक पहनाई जाएगी. तीन महीने में तैयार हुआ मोती, सोना, पन्ना और माणक जड़ित नौलखा हार और स्वर्ण मुकुट भी धारण कराया जाएगा।   14 सितंबर को 19 घंटे दर्शन, दोपहर में आधे घंटे पट मंगल 14 सितंबर को गणेश जन्मोत्सव का सबसे बड़ा आयोजन होगा. मंगला आरती से लेकर रात 11:40 बजे शयन आरती तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे. इस दौरान विशेष पूजन सुबह 11:20 बजे, श्रृंगार आरती 11:30 बजे, भोग आरती दोपहर 2:15 बजे और संध्या आरती शाम 7 बजे होगी. दोपहर 1:30 से 2 बजे तक आधे घंटे के लिए पट मंगल रहेंगे. यानी जन्मोत्सव के दिन करीब 19 घंटे दर्शन की व्यवस्था रहेगी।  पहली बार महिलाओं की अलग लाइन, 6 एंट्री और 8 एग्जिट गेट जन्मोत्सव पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए इस बार दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. पिछले साल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद पहली बार महिलाओं के लिए अलग दर्शन लाइन बनाई जा रही है. श्रद्धालुओं के लिए 6 एंट्री और 8 एग्जिट पॉइंट रहेंगे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया भी बढ़ाया जाएगा।  बुजुर्गों के लिए 100 ई-रिक्शा, 500 स्वयंसेवक संभालेंगे मोर्चा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निशक्तजनों और बुजुर्गों के लिए 100 ई-रिक्शा और 4 इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसें चलाई जाएंगी. व्यवस्थाओं को संभालने के लिए करीब 500 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. श्रद्धालुओं से कैमरा और भारी सामान साथ नहीं लाने की अपील की गई है।  15 सितंबर को गजानन निकलेंगे नगर भ्रमण पर नौ दिवसीय उत्सव का समापन 15 सितंबर को गणेशजी की शोभायात्रा के साथ होगा. इस दौरान एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड पर यातायात व्यवस्था में बदलाव रहेगा. श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्रा को देखते हुए प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा।  इन रास्तों से होगा प्रवेश श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए एमडी रोड, जेएलएन मार्ग और तख्तेशाही रोड का इस्तेमाल किया जाएगा. जेडीए सर्किल, भैरव पथ और आरबीआई की ओर बैरिकेडिंग रहेगी. प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का फोकस इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराने पर है। 

पाकिस्तान सीमा के करीब होगा भारत का बड़ा एयर एक्सरसाइज, 40 हजार फीट तक एयरस्पेस रिजर्व

जोधपुर भारत और पाकिस्तान के बीच बनी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सठे राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में भारतीय वायुसेना अपने सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति-2026' की मेजबानी करने जा रही है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित होने वाले इस मेगा एक्सरसाइज को लेकर वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कुल 17 दिनों के लिए एक 'नोटम' (NOTAM – Notice to Airmen) जारी कर दिया है। इसके तहत जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के विशाल हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सीमा पार महज 20 किलोमीटर की दूरी तक भारतीय लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनाई देगी, जिससे पाकिस्तानी सेना और वहां के रणनीतिकारों में जबर्दस्त खलबली मच गई है। इस मेगा एयर एक्सरसाइज में दुनिया के 8 शक्तिशाली देश अपने उन्नत एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स के साथ सीधे तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा करीब 30 से अधिक देशों के रक्षा प्रतिनिधि और सैन्य अधिकारी ऑब्जर्वर के तौर पर इस ऐतिहासिक अभ्यास के साक्षी बनेंगे। राजस्थान के 4 प्रमुख सीमावर्ती जिलों के ऊपर 40 हजार फीट तक के आसमान को सैन्य उड़ानों के लिए पूरी तरह रिजर्व किया गया है। भारतीय वायुसेना का यह कदम न केवल अपनी सामरिक ताकत और त्वरित कार्रवाई की रणनीति को परखने का जरिया है, बल्कि यह पाकिस्तान को उसकी दहलीज पर भारत की अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी का सीधा संदेश भी है। पाकिस्तान सीमा में हलचल, पाक सेना में इमरजेंसी बैठकें! भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए नोटम का दायरा इतना व्यापक है कि बीकानेर के नाल एयरबेस के पास इसका एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतने कम फासले पर आधुनिक युद्धक विमानों के अभ्यास की खबर मिलते ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद के सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है। मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी थलसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने आपातकालीन बैठकें बुलाकर सीमा पर अपनी चौकसी और रडार सर्विलांस बढ़ा दिया है। भारत के इस युद्धाभ्यास में मित्र देशों के अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी शामिल हो रहे हैं, इसी वजह से पाकिस्तान ने सीमा पार अपनी जासूसी और निगरानी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। 40 हजार फीट की ऊंचाई तक सील होगाएयरस्पेस, जानिए नोटम का पूरा शेड्यूल 'तरंगशक्ति-2026' अभ्यास के दौरान आम नागरिक उड़ानों की सुरक्षा और वायुसेना के लड़ाकू जहाजों के निर्बाध संचालन के लिए एयरस्पेस को 40 हजार फीट की ऊंचाई तक आरक्षित किया गया है। यह नोटम 17 दिनों के दौरान लगातार लागू नहीं रहेगा, बल्कि इसे अलग-अलग चरणों में सुबह 9:00 बजे से लेकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक प्रभावी बनाया गया है। पहला चरण: 21 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक दूसरा चरण: 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीसरा चरण: 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अंतिम चरण: 7 अक्टूबर 2026 को इन निर्धारित तिथियों पर जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर और जैसलमेर सेक्टर में वायुसेना के विमान अपनी युद्धक क्षमताओं, हवा से हवा में ईंधन भरने, और सटीक बॉम्बिंग का अभ्यास करेंगे। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। यहां दुनिया की 8 प्रमुख वायुसेनाओं के स्क्वाड्रन अपने-अपने लड़ाकू जहाजों के साथ पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस और जगुआर जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान विदेशी फाइटर जेट्स के साथ मिलकर मॉक-ड्रिल और कॉम्बैट ऑपरेशन्स को अंजाम देंगे। 30 देशों के सैन्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख और रणनीतिक महत्व कितना बढ़ चुका है। इस अभ्यास के जरिए मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा रणनीति और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान को नई मजबूती मिलेगी। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है यह अभ्यास राजस्थान से सटी पश्चिमी सीमा हमेशा से ही रक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रही है। पोकरण और थार के रेगिस्तान में वायुसेना का यह बहुराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन भारत की ऑपरेशनल रेडिनेस (युद्धक तैयारी) का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'तरंगशक्ति-2026' से भारतीय वायुसेना न केवल अपने नए हथियारों और रणनीति का परीक्षण करेगी, बल्कि सीमा पार से होने वाली किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी और धार देगी। अगले 17 दिनों तक राजस्थान का आसमान वायुसेना के पराक्रम का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल बने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

जयपुर राजस्थान उच्च न्यायालय को नया प्रशासनिक और न्यायिक प्रमुख मिल गया है। जयपुर स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उन्हें अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई। समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी नियुक्ति का आधिकारिक वारंट पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के कई सदस्य, राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान व पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी और नए चीफ जस्टिस के परिजन विशेष रूप से मौजूद रहे। शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद नए मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद वे बिना किसी देरी के जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ जस्टिस विनीत माथुर भी मौजूद रहे। राजस्थान में न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाने और लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिहाज से उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है। 1. राजस्थान के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभाला पदभार जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राज्य के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कमान संभाली है। इस पद पर आसीन होते ही वे राजस्थान की पूरी अधीनस्थ अदालतों और हाईकोर्ट के प्रशासनिक प्रमुख बन गए हैं। 2. छत्तीसगढ़ से जन्म और न्यायिक करियर का गहरा नाता जस्टिस संजय के. अग्रवाल का जन्म 15 जुलाई 1965 को हुआ था। राजस्थान हाईकोर्ट की जिम्मेदारी मिलने से ठीक पहले तक वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 3. 1989 में वकालत से शुरू हुआ न्यायिक सफर उन्होंने साल 1989 में बिलासपुर में एक वकील के रूप में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। लगभग दो दशकों तक वकालत में अपनी कानूनी समझ का लोहा मनवाने के बाद उन्होंने न्यायपालिका के उच्च पदों की ओर कदम बढ़ाया। 4. मार्च 2016 में बने थे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्थायी जज वे सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडिशनल जज (अतिरिक्त न्यायाधीश) नियुक्त किए गए थे। अदालत में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और निष्पक्ष कार्यशैली को देखते हुए मार्च 2016 में उन्हें स्थायी जज बना दिया गया था। 5. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विशेष सिफारिश पर हुई नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की आधिकारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी। 6. विवादों के बीच एक निष्पक्ष चेहरे के तौर पर हुई एंट्री राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले 11 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक फैसलों और केस लिस्टिंग को लेकर वकीलों के बीच कुछ असंतोष देखा जा रहा था। ऐसे माहौल में न्यायपालिका की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ से जस्टिस अग्रवाल को इस शीर्ष पद पर तैनात किया गया है। 7. 'सड़क मार्ग' से सफर तय करने वाली सादगी मुख्य न्यायाधीश के रूप में चयन के बाद उनकी सादगी भी चर्चा का विषय बनी रही। वे 6 सितंबर 2026 को बिलासपुर से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से बिना किसी विशेष तामझाम के साधारण तरीके से कार द्वारा सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचे, जहां हाईकोर्ट गेस्ट हाउस में उनका स्वागत किया गया था। 8. प्रशासनिक सुधारों और कोर्ट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव जस्टिस अग्रवाल को न केवल जटिल मुकदमों की सुनवाई करने, बल्कि अदालती इंफ्रास्ट्रक्चर, जजों की कार्यप्रणाली और केस रोस्टर मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक मामलों को कुशलता से संभालने का व्यापक अनुभव प्राप्त है। 9. त्वरित और तार्किक फैसलों के लिए जाने जाते हैं नए सीजे छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल को बड़े कानूनी मामलों में त्वरित, तार्किक और निष्पक्ष फैसले सुनाने के लिए जाना जाता था। वे अदालती कार्यवाहियों के दौरान अधिवक्ताओं की दलीलों को बेहद धैर्यपूर्वक सुनने के लिए भी लोकप्रिय हैं। 10. लगभग 11 महीने का रहेगा राजस्थान में कार्यकाल 15 जुलाई 1965 को जन्मे जस्टिस अग्रवाल 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर जून 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें करीब 10 से 11 महीने का समय मिलेगा, जिसमें वे राज्य में पेंडिंग मामलों के निपटारे पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की तैयारी शुरू, 120 KM की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन

जयपुर  प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी। 30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है। 90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

उदयपुर में परिवार के सामाजिक बहिष्कार का मामला, 5 पंचों समेत 6 लोगों पर केस दर्ज

उदयपुर उदयपुर के गोगुंदा क्षेत्र के भुताला गांव में मंदिर में प्रसादी करने पर एक परिवार का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 5 पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि समाज के लोगों ने परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और राशि नहीं देने पर परिवार को समाज से अलग कर दिया। पीड़ित गणेश सिंह ने बताया कि 24 मई 2026 को गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद आरोपी किशोर सिंह, तेज सिंह, नवल सिंह, मोहन सिंह, भैरू सिंह, चंदन सिंह, राम सिंह, काल सिंह, लहर सिंह, कान सिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य लोगों ने आपत्ति जताई। पीड़ित के अनुसार, अगले दिन पंचायत बुलाकर 1 लाख 51 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया। राशि देने में असमर्थता जताने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। विरोध करने पर मारपीट का आरोप पीड़ित ने आरोप लगाया कि परिवार को समाज के अन्य लोगों से मेल-जोल और संपर्क नहीं रखने की हिदायत दी गई। मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने से भी रोका गया। रिश्तेदार की मौत होने पर श्मशान में भी जाने नहीं दिया गया। आदेश का विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में एएसआइ विनेश कुमार ने बताया कि शनिवार को पंचायत के पांच प्रमुख पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। वाकली पुलिया से नदी में गिरी श्रद्धालुओं की जीप एक अन्य खबर के अनुसार धरियावद-उदयपुर-बांसी मार्ग पर वाकली पुलिया के समीप शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। श्री सांवलिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप शनिवार तड़के अनियंत्रित होकर पुलिया से सीधे नीचे सुखली नदी में जा गिरी। गनीमत रही कि हादसे में सभी 10 यात्री समय रहते वाहन से बाहर निकल गए। पुलिस के अनुसार मूंगाणा के समीप कुंडी गांव निवासी श्रद्धालु श्री सांवलिया जी के दर्शन कर जीप से अपने गांव लौट रहे थे। इस दौरान शनिवार तड़के करीब 4 बजे वाकली पुलिया के पास घुमावदार मोड़ पर चालक नियंत्रण खो बैठा और जीप नदी में जा गिरी। हादसा होते ही जीप में सवार यात्रियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत एक दूसरे का हाथ पकड़कर तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। जिस जगह ये हादसा हुआ वो जंगल का क्षेत्र होने एवं मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण हादसे की सूचना काफी देर से पुलिस को मिली।

855 वार्डों पर BJP की नजर, 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए तैयार हुआ ‘महाराष्ट्र मॉडल’

जयपुर  राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने इस बार ऐसा चुनावी प्रयोग किया है, जिसकी झलक अब तक मुख्य रूप से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिलती रही है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों को एक साथ जीतने के लक्ष्य के साथ 'महाराष्ट्र मॉडल' की तर्ज पर चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट तैयार किया है। इसके तहत महाराष्ट्र के करीब 20 विधायक-विधान परिषद सदस्य और बड़े नेताओं को अलग-अलग निगमों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि इनके साथ करीब 25-25 विशेषज्ञों की टीमें भी मैदान में उतारी गई हैं। इस पूरी रणनीति की कमान महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को दी गई है। क्र. सं.    नगर निगम    कुल वार्ड 1            जयपुर          150 2            जोधपुर        100 3              कोटा          100 4            अजमेर         80 5           बीकानेर         80 6           उदयपुर         80 7          भीलवाड़ा        70 8          भरतपुर          65 9           अलवर            65 10          पाली               65 कुल       10 नगर निगम    855 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं पर रहेगी नजर भाजपा ने राजस्थान के जिन दस नगर निगमों को इस बार अपने सबसे बड़े चुनावी टारगेट में शामिल किया है, उनमें कुल 855 वार्ड आते हैं। इन दसों नगर निगम क्षेत्रों में 60 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। खास बात यह है कि इन निगमों के 855 वार्ड प्रदेश में मौजूद कुल वार्डों का करीब 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। यही आंकड़ा भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि अगर इन दस नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन कर जीत हासिल की जाती है, तो इसका राजनीतिक असर और संदेश छोटे निकायों में जीत की तुलना में कई गुना बड़ा होगा। इसी वजह से भाजपा ने इन निगमों को अपने प्रमुख चुनावी लक्ष्य के तौर पर रखा है। यह महाराष्ट्र मॉडल इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता तक बार-बार पहुंच बनाना है। हर निगम के लिए अलग मिशन और अलग कमांड सिस्टम तैयार किया गया है। स्थानीय संगठन की रिपोर्ट के साथ बाहर से आई टीम का स्वतंत्र जमीनी फीडबैक सिस्टम तैयार किया गया। सभाओं से ज्यादा घर-घर पहुंच का टारगेट, मतदाताओं का फीडबैक और मौके की स्थिति के आधार पर तत्काल रणनीति बदलने की प्लानिंग।

राजस्थान हाईकोर्ट को मिला नया सीजे, जस्टिस संजय के. अग्रवाल की नियुक्ति पर राष्ट्रपति की मुहर

जयपुर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार रात एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) नियुक्त करने का वारंट जारी कर दिया है। राष्ट्रपति के वारंट के तुरंत बाद केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय ने भी उनकी आधिकारिक नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट को करीब 11 महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना नियमित और स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। हाईकोर्ट प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे राजभवन में आयोजित होने वाले एक गरिमामय समारोह में जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश, केंद्र की मुहर राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पद काफी समय से कार्यवाहक व्यवस्था के तहत चल रहा था। इस प्रशासनिक शून्यता को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसी सप्ताह जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की औपचारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन से त्वरित मंजूरी मिलने के बाद शनिवार देर रात अधिसूचना जारी कर दी गई। कॉलेजियम की इस सिफारिश के तहत देशभर के कई अन्य हाईकोर्ट में भी नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियां की गई हैं, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। नए सीजे जस्टिस संजय के. अग्रवाल का सफर 15 जुलाई 1965 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक नगर रतनपुर में जन्मे जस्टिस संजय के. अग्रवाल एक बेहद सम्मानित, जमीनी और समृद्ध न्यायिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तित्व हैं। उनके पिता श्री वीरेंद्र अग्रवाल और माता श्रीमती चमेली अग्रवाल हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा रतनपुर से पूरी करने के बाद गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर से विज्ञान स्नातक (B.Sc.) और कानून स्नातक (LL.B.) की डिग्रियां प्राप्त कीं। इसके बाद उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से मास्टर ऑफ लॉज (LL.M.) की उच्च शिक्षा हासिल की। 3 जनवरी 1989 को एक अधिवक्ता के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले जस्टिस अग्रवाल ने बिलासपुर जिला अदालत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबे समय तक सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों में वकालत की। वे छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के स्थायी वकील रहे और न्यायाधीश बनने से पहले छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता (Advocate General) के शीर्ष संवैधानिक पद को भी संभाल चुके हैं। न्यायिक करियर में शानदार अनुभव जस्टिस संजय के. अग्रवाल का न्यायिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्हें सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जिसके बाद मार्च 2016 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। हाल ही में उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी बनाया गया था। कानूनी मामलों की गहरी समझ, निष्पक्ष कार्यशैली और स्पष्ट निर्णयों के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस अग्रवाल के राजस्थान हाईकोर्ट का सीजे बनने से राज्य में लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण और न्यायिक प्रशासन में नई गति आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। मुख्य न्यायाधीशों के तबादले और नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर देश के विभिन्न हाईकोर्ट में भी नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियां की गई हैं: जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट जस्टिस वी. कामेश्वर राव: पटना हाईकोर्ट जस्टिस रविंद्र वी. घुगे: कलकत्ता हाईकोर्ट जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी: बॉम्बे हाईकोर्ट जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जस्टिस कृष्ण राम महापात्र: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट  

उम्मेद अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत करने के निर्देश, सैटेलाइट अस्पतालों में बढ़ेंगी सीजेरियन सुविधाएं

जयपुर  मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के सभागार में जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक ली। श्रीनिवास ने सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं एवं स्वस्थ शैशव के लिए संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए हाई रिस्क प्रेगनेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण एंटीनेटल केयर तथा नवजात शिशुओं के लिए कंगारू केयर जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रसव सखी सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उपयोगी कार्यप्रणालियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध परामर्श, आवश्यक जांच एवं समुचित फॉलोअप उपलब्ध कराने तथा हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान से लेकर उपचार तक निरंतर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।  उम्मेद चिकित्सालय में मानक प्रोटोकॉल एवं उपचार प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के मद्देनजर उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों एवं उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने ऑपरेशन थिएटरों में निर्धारित मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना, उपचार प्रक्रियाओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा मरीजों की सुरक्षा के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। श्रीनिवास ने एनेस्थिसियोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर एवं जटिल मामलों में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए। सैटेलाइट अस्पतालों में सीजेरियन सेवाओं के विस्तार की दिशा में कार्यवाही के निर्देश मुख्य सचिव ने जिले के सैटेलाइट अस्पतालों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए बिलाड़ा, भोपालगढ़, धवा, पीपाड़ शहर, ओसियां एवं बालेसर स्थित चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन एवं सहायक चिकित्सकीय सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा तथा उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों पर पड़ने वाले भार को भी कम किया जा सकेगा। उन्होंने इन चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ सीजेरियन सेक्शन सेवाओं को चरणबद्ध रूप से ऑपरेशनलाइज करने की दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस संबंध में आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता के लिए राज्य स्तर पर समुचित सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। एंटीनेटल केयर एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में प्रक्रिया-प्रवाह को और बेहतर बनाने के निर्देश मुख्य सचिव ने जिले में एंटीनेटल केयर की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए गर्भवती महिलाओं को निर्धारित अंतराल पर आवश्यक परामर्श एवं जांच सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाई रिस्क प्रेगनेंसी की शीघ्र पहचान, नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता के अनुरूप उपचार की समेकित व्यवस्था विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को उपयोगी बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में चिन्हित कर अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, एचडीयू एवं आईसीयू सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के बावजूद चिकित्सा सेवाओं के सुचारू संचालन की समीक्षा की। उन्होंने राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट एवं इंटेंसिव केयर यूनिट में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं को उपलब्ध कराई जा रही जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की सतत मॉनिटरिंग एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं एवं संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा गंभीर मामलों में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं में किए जा रहे सुधार एवं प्रक्रिया-प्रवाह को निरंतर आगे बढ़ाने तथा प्रभावी व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता बताई। बैठक में डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले की चिकित्सा व्यवस्थाओं, उपचार पद्धति, चिकित्सकीय संसाधनों, स्वास्थ्य अवसंरचना तथा विभिन्न चिकित्सा सेवाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।  

सवाई माधोपुर में 181 मिमी बारिश, स्कूलों में छुट्टी; 5-6 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट

सवाई माधोपुर  राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने भी 2 दिन कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया (WML) बना हुआ है। मानसून ट्रफ लाइन भी श्रीगंगानगर और WML से होकर गुजर रही है। इसके प्रभाव से 5 और 6 सितंबर को पूर्वी व पूर्वी-उत्तरी राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में बारां, दौसा, धौलपुर, झालावाड़, करौली और सवाई माधोपुर जिलों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी और अतिभारी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान सवाई माधोपुर के तलवाड़ा में सर्वाधिक 131 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। सवाई माधोपुर जिले में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। जिले सहित अधिकतर ग्रामीणों इलाकों में सुबह से ही बारिश हो रही है। खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध भारी बारिश के कारण ओवरफ्लो हो चुका है। इस सीजन में यह पहली बार है, जब मानसरोवर बांध पर चादर चली है। वहीं, भारी बारिश के चलते स्कूलों में शनिवार को छुट्टी घोषित की गई। बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि सवाईमाधोपुर जिले में कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मानसून ने जोरदार दस्तक दी। सुबह से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी जारी है। कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश से शहर की सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पानी भर गया। लगातार बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली। वहीं खरीफ फसलों के लिए भी बारिश को लाभदायक माना जा रहा है। लगातार दूसरे साल मानसरोवर बांध ओवरफ्लो जिले के खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध लगातार दूसरे साल ओवरफ्लो हुआ है। इससे पहले पिछले साल 30 जुलाई और 23 अगस्त को भारी बारिश के कारण बांध ओवरफ्लो हुआ था। दो बार बांध के ओवरफ्लो होने से सवाई माधोपुर और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली बोधल पुलिया भी दो बार टूटी थी। हालांकि, इस बार बांध के ओवरफ्लो होने से किसानों के चेहरे पर खुशी छलक पड़ी। क्योंकि 16 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। स्कूलों में छुट्टी घोषित सवाई माधोपुर जिले में लगातार बारिश एवं मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला कलक्टर काना राम के निर्देशानुसार 5 सितम्बर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश जिले के समस्त राजकीय एवं गैर-राजकीय विद्यालयों पर लागू रहेगा। यह अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगा। विद्यालयों का समस्त शिक्षक एवं अन्य स्टाफ नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करेगा। इसी क्रम में जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी 5 सितम्बर को अवकाश रहेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के मानदेयकर्मी विभागीय निर्देशानुसार नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवी लाल मीणा को मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के सहयोग से आदेशों की पालना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित राजकीय अथवा गैर-राजकीय विद्यालय के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को नदी-नालों, रपटों, झरनों तथा तेज जल बहाव एवं जलभराव वाले स्थानों पर जाने से रोकें और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। खण्डार में 24 घंटे में 181 मिमी बारिश पिछले 24 घंटे की बात करें तो जिले में कुल 474.30 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले के खण्डार क्षेत्र में सबसे ज्यादा 181 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मानसरोवर में 55, देवपुरा में 40, पांचोलास में 50, मोरा सागर में 16, भाड़ौती में 35, सवाईमाधोपुर मानटाउन में 55, सवाईमाधोपुर तहसील में 54, चौथ का बरवाड़ा में 30, बामनवास में 35, मलारना डूंगर में 33, बौली में 23, मित्रपुरा में 25, गंगापुर सिटी में 19, वजीरपुर में 7, तलावड़ा में 45, बरनाला में 42 और भांवरा में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई। जानिए आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार 5 सितंबर को भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं, एक-दो स्थानों पर अतिभारी बारिश की भी संभावना है। अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। 6 सितंबर को भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से भारी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। हालांकि भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।