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स्टूल में खून दिखे तो न करें नजरअंदाज, जानें रंग क्या बताता है और कब तुरंत डॉक्टर से मिलें

मल में खून आना (Rectal Bleeding) एक ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग बवासीर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर बार इसका कारण बवासीर नहीं होता। कई बार यह पाचन तंत्र की गंभीर समस्याओं जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), डाइवर्टिकुलर डिजीज, पेट या आंतों में अल्सर, पॉलीप्स और यहां तक कि कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक स्टूल में खून का रंग बीमारी के कारण का महत्वपूर्ण संकेत देता है। चमकीला लाल खून आमतौर पर गुदा या निचली आंत से संबंधित समस्याओं की ओर इशारा करता है, जबकि गहरा लाल, मैरून या काला टार जैसा मल ऊपरी पाचन तंत्र में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। व्यक्ति को यदि पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर आना, मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मल में खून आना क्या बीमारी है? क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक मल में खून आने की स्थिति को रेक्टल ब्लीडिंग के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब होता है कि गुदा (रेक्टम) या पाचन तंत्र के किसी हिस्से से खून का निकलना, जो कि मल के साथ दिखाई देता है। यह ब्लड अलग-अलग रंग जैसे कि चमकीला लाल, गहरा लाल, मैरून या काला रंग का दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खून का रंग यह बताने में मदद करता है कि ब्लीडिंग पाचन तंत्र के किस हिस्से से हो रही है। मल में खून कौन से रंग का दिखाई दे सकता है? मल में खून का रंग और बनावट डॉक्टरों को संभावित कारण पहचानने में मदद करते हैं। चमकीला लाल खून  हेल्थडायरेक्ट के अनुसार यदि टॉयलेट पेपर, कमोड या स्टूल की सतह पर चमकीला लाल खून दिखाई दे, तो यह आमतौर पर गुदा या निचले कोलन से होने वाली ब्लीडिंग का संकेत होता है। इसके सामान्य कारण में बवासीर (Hemorrhoids), एनल फिशर (गुदा में दरार), रेक्टल इंफेक्शन और निचले कोलन की सूजन को शामिल किया जाता है। मल में खून आने के कारण  एनसीबीआई के मुताबिक यदि स्टूल गहरे लाल या मैरून रंग का दिखाई दे तो यह बड़ी आंत या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। इसके संभावित कारण में डाइवर्टिकुलर डिजीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), कोलन पॉलीप्स और कोलोरेक्टल कैंसर को शामिल किया जाता है। काला और चिपचिपा मल (Black, Tarry Stool) क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक यदि मल कोलतार (Tar) की तरह काला और चिपचिपा दिखे तो यह ऊपरी पाचन तंत्र जैसे पेट या छोटी आंत में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। पेट का अल्सर, गैस्ट्राइटिस, इसोफेगल वैरीसीज, पेट या डुओडेनम में ब्लीडिंग इसके संभावित कारण हो सकते हैं। मल में खून आने के क्या कारण हो सकते हैं?     बवासीर – एनआईएच के अनुसार बवासीर Rectal Bleeding का सबसे आम कारण माना जाता है। इसमें गुदा या मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है। इससे व्यक्ति को मल त्याग करते समय दर्द, खुजली या चमकीला लाल खून दिखाई देता है।     गुदा में दरार होना (Anal Fissure) – एनसीबीआई के अनुसार कब्ज या कठोर मल के कारण गुदा की त्वचा में छोटी-छोटी दरार बन सकती है, जिससे खून निकल सकता है।     इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज – क्रोहन और कोलाइटिस के मुताबिक क्रोहन रोग (Crohn's Disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियां आंतों में सूजन पैदा करती हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति को मल में खून, पेट दर्द, दस्त और लगातार वजन कम होने की समस्या का सामना करना पड़ता है।     डाइवर्टिकुलर डिजीज (Diverticular Disease) – एनएचएस के मुताबिक बड़ी आंत की दीवार में छोटे पाउच बन जाने को डाइवर्टिकुला कहा जाता है। इनके फटने या सूजन होने पर ब्लीडिंग हो सकती है।     कोलन कैंसर (Colon Cancer) – अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार कुछ मामलों में मल में खून आना कोलन कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेष रूप से यदि इसके साथ वजन घटना, कमजोरी या मल त्याग की आदतों में बदलाव भी हो। मल में खून आने के कारण किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्लिवलैंड क्लीनिक के अनुसार आगे बताए संकेतों या लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इनके महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।     बार-बार मल में खून आना     काला या टार जैसा मल     लगातार पेट दर्द     अचानक वजन घटना     चक्कर आना या कमजोरी     एनीमिया के लक्षण     मल त्याग की आदतों में बदलाव मल में खून आना एक ऐसा लक्षण है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि इसके पीछे बवासीर जैसी सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन कई बार अन्य गंभीर कारण भी इसकी वजह बन सकते हैं। यदि स्टूल में बार-बार खून दिखाई दे, काला मल आए या वजन कम होने जैसे लक्षण हों, तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। हमने इस लेख की समीक्षा कैसे की हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

WhatsApp का नया Username फीचर कितना सुरक्षित? कंपनी ने 7 सवालों के दिए जवाब, फ्रॉड पर भी किया साफ़ खुलासा

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।  हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके।  फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है।  व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा।  यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं।  केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता।  सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है।  मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है।  सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

Smartphone Battery Tips: 100% चार्ज करने की आदत पड़ सकती है भारी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

 नई दिल्ली आज के समय में लगभग हर स्मार्टफोन में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी दी जाती है. ऐसे में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या फोन को हमेशा 100% तक चार्ज करना सही है या फिर 80% पर ही चार्जिंग रोक देनी चाहिए? सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. लेकिन आखिर सच क्या है? अगर आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक अच्छी हालत में रहे, तो सिर्फ चार्ज करने का तरीका ही नहीं बल्कि कुछ छोटी-छोटी आदतें भी काफी फर्क डालती हैं।  क्या 100% तक चार्ज करना गलत है? सीधा जवाब है- नहीं. फोन को 100% तक चार्ज करना गलत नहीं है और इससे बैटरी फटने या तुरंत खराब होने का खतरा नहीं होता. आज के लगभग सभी स्मार्टफोन में ऐसी तकनीक होती है जो बैटरी फुल होने के बाद चार्जिंग को कंट्रोल कर देती है. यानी फोन 100% दिखाने के बाद भी बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज नहीं करता।  हालांकि, अगर आप रोजाना कई घंटों तक फोन को 100% चार्ज पर ही लगाए रखते हैं, खासकर गर्म माहौल में, तो इससे बैटरी की उम्र धीरे-धीरे कम हो सकती है. इसकी वजह बैटरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव और गर्मी है।  80% तक चार्ज करने की सलाह क्यों दी जाती है? बैटरी एक्सपर्ट्स का मानना है कि लिथियम-आयन बैटरियां 20% से 80% के बीच सबसे आरामदायक स्थिति में काम करती हैं. इसी वजह से कई कंपनियां अब फोन में चार्ज लिमिट, बैटरी प्रोटेक्शन और ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग जैसे फीचर देने लगी हैं।  उदाहरण के तौर पर, Apple ने iPhone में 80% से 100% तक चार्जिंग लिमिट चुनने का ऑप्शन दिया है. कंपनी का कहना है कि इससे लंबे समय में बैटरी की लाइफ बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।  क्या हमेशा 80% तक ही चार्ज करना चाहिए? जरूरी नहीं. अगर आप हर दो-तीन साल में नया फोन खरीद लेते हैं, तो 100% तक चार्ज करने की ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप अपना फोन चार-पांच साल तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो 80% या 85% तक चार्ज रखने की आदत बैटरी हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है।  सबसे ज्यादा नुकसान किस चीज से होता है? बैटरी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन गर्मी मानी जाती है. अगर फोन चार्जिंग के दौरान बहुत गर्म हो रहा है, धूप में रखा है या चार्जिंग के समय भारी गेम खेल रहे हैं, तो इससे बैटरी तेजी से खराब हो सकती है. फोन गिर रहा है या और बैटरी पर इंपैक्ट है तो भी बैटरी फटने का खतरा रहता है।  इसी तरह बैटरी को बार-बार पूरी तरह 0% तक खत्म करना भी अच्छी आदत नहीं मानी जाती. बेहतर होगा कि बैटरी 20% के आसपास पहुंचने पर फोन चार्ज कर दें।  रातभर चार्ज पर छोड़ना सही है? अगर आपका फोन नया है, तो आमतौर पर इसमें ऑप्टिमाइज्ड या एडेप्टिव चार्जिंग जैसे फीचर होते हैं. ये आपकी रोज की आदत को समझकर कुछ समय के लिए चार्जिंग रोक देते हैं और जरूरत पड़ने पर ही 100% तक पहुंचाते हैं. ऐसे में रातभर चार्जिंग पहले जितनी बड़ी चिंता की बात नहीं रही।  सबसे सही तरीका क्या है? अगर आपको पूरे दिन ज्यादा बैटरी चाहिए, तो फोन को 100% तक चार्ज करना बिल्कुल ठीक है. वहीं अगर आपकी प्रायॉरिटी बैटरी की लंबी लाइफ है और दिनभर 80% चार्ज आपके लिए काफी है, तो चार्ज लिमिट या बैटरी प्रोटेक्शन जैसे फीचर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।  यानी सबसे जरूरी बात यह नहीं है कि फोन 80% तक चार्ज करें या 100% तक, बल्कि यह है कि फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाएं, अच्छी क्वॉलिटी का चार्जर इस्तेमाल करें और बैटरी को बार-बार पूरी तरह खत्म होने न दें. यही आदतें आपके स्मार्टफोन की बैटरी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने में सबसे ज्यादा मदद करेंगी। 

यूआईडीएआई ने आधार ई-मेल अपडेट किया मुफ्त, सीमित समय तक मिलेगा फायदा सभी।

अगर आपके आधार कार्ड में अभी तक ई-मेल आईडी लिंक नहीं है या पुरानी ई-मेल बदल चुकी है, तो आपके लिए यह सही मौका है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सीमित समय के लिए आधार में ई-मेल अपडेट को मुफ्त कर दिया है. अब तय अवधि के दौरान यूजर्स बिना कोई शुल्क दिए अपनी नई ई-मेल आईडी आधार से जोड़ सकते हैं. इससे ओटीपी वेरिफिकेशन, ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल और आधार से जुड़े जरूरी अपडेट पाना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा. खास बात यह है कि यह सुविधा सिर्फ आधिकारिक आधार ऐप के जरिए मिलने वाली है. 31 दिसंबर तक नहीं लगेगा कोई शुल्क यूआईडीएआई ने 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक आधार में ई-मेल अपडेट करने पर शुल्क माफ कर दिया है. सामान्य तौर पर इस सेवा के लिए शुल्क देना पड़ता है, लेकिन फिलहाल यूजर्स बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपना ई-मेल जोड़ या बदल सकते हैं. यह राहत उन लोगों के लिए खास है जिन्होंने अब तक आधार में ई-मेल अपडेट नहीं कराया या नई ई-मेल आईडी इस्तेमाल कर रहे हैं सिर्फ आधिकारिक आधार ऐप से मिलेगा फायदा यह मुफ्त सुविधा केवल यूआईडीएआई के आधिकारिक आधार ऐप के जरिए उपलब्ध होगी. यदि कोई व्यक्ति आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य माध्यम से ई-मेल अपडेट कराता है, तो उसे निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है. इसलिए इस ऑफर का लाभ लेने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना जरूरी है. आधार में ई-मेल लिंक होना क्यों जरूरी है? आज कई सरकारी और डिजिटल सेवाओं में आधार का इस्तेमाल होता है. ऐसे में ई-मेल लिंक होने से कई फायदे मिलते हैं. यदि किसी कारण मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है और एसएमएस के जरिए ओटीपी नहीं मिलता, तो ई-मेल पर ओटीपी प्राप्त किया जा सकता है. इसके अलावा आधार से जुड़े जरूरी अपडेट, वेरिफिकेशन और ऑनलाइन दस्तावेज सेव करने जैसी सुविधाएं भी आसान हो जाती हैं. मोबाइल नंबर बदलने की स्थिति में भी ई-मेल एक अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प के रूप में काम आता है. घर बैठे ऐसे करें ई-मेल अपडेट सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में आधिकारिक आधार ऐप इंस्टॉल करें. इसके बाद आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की मदद से लॉगइन करें. प्रोफाइल सेक्शन में जाकर ई-मेल अपडेट का विकल्प चुनें. यहां अपनी नई ई-मेल आईडी दर्ज करें. इसके बाद उस ई-मेल पर भेजा गया ओटीपी दर्ज कर वेरिफिकेशन पूरा करें. प्रक्रिया पूरी होते ही आपकी ई-मेल आईडी आधार से लिंक हो जाएगी. किन लोगों को तुरंत अपडेट करना चाहिए? जिन लोगों ने अभी तक आधार में ई-मेल नहीं जोड़ा है, उन्हें इस मुफ्त सुविधा का लाभ जरूर लेना चाहिए. वहीं, अगर आपकी पुरानी ई-मेल आईडी बंद हो चुकी है या आपने नई ई-मेल बनाई है, तो उसे भी आधार रिकॉर्ड में अपडेट कर देना बेहतर रहेगा. इससे भविष्य में ओटीपी वेरिफिकेशन और ऑनलाइन सेवाओं के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

वजन घटाना है तो डिनर में शामिल करें मिलेट्स से बनी ये हेल्दी डिशेज रोज।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के कारण वजन बढ़ना एक आम समस्या है, जिससे आज बड़ी आबादी परेशान है. लोग वजन घटाने के लिए जिम या डाइटिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका सबसे सही और आसान रास्ता आपके किचन से ही होकर गुजरता है. दरअसल, हमारा रात का खाना (डिनर) वजन कंट्रोल करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. अगर आप रात में लाइट और न्यूट्रिशियस खाना खाते हैं, तो वजन तेजी से कम हो सकता है. अगर आप भी वेट लॉस जर्नी पर हैं, तो मिलेट्स यानी कि मोटे अनाज से बनी डिशेज आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं. मिलेट्स में भरपूर फाइबर, प्रोटीन और विटामिंस होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं और बार-बार भूख लगने की आदत को रोकते हैं. तो चलिए जानते हैं मिलेट्स से बनने वाले ऐसे 3 टेस्टी और आसान डिनर आइटम्स के बारे में, जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगे. डिनर में ट्राई करें ज्वार की वेज खिचड़ी खिचड़ी को हमेशा से ही पचाने में सबसे आसान और हल्का भोजन माना गया है. ऐसे में रात के खाने के लिए ज्वार की खिचड़ी भी आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबुत ज्वार को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद प्रेशर कुकर में थोड़े से घी, जीरे, हरी मिर्च और अपनी पसंदीदा सब्जियों जैसे गाजर, बीन्स, मटर और टमाटर के साथ इसे अच्छी तरह से पका लें. बता दें ज्वार में मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर रखता है और साथ ही आपके शरीर में एक्स्ट्रा फैट को भी जमा नहीं होने देता. यह सिंपल सी डिश स्वाद और सेहत का एक यूनिक कॉम्बिनेशन है. रागी का डोसा भी है एक हेल्दी ऑप्शन अगर आपको रात के समय अक्सर कुछ क्रिस्पी और टेस्टी खाने का होता है, तो आप रागी का डोसा आपके लिए एक परफेक्ट चॉइस साबित हो सकता है. रागी में आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम और आयरन मिल जाता है. रागी का डोसा बनाने के लिए रागी के आटे में थोड़ा सा दही, पानी, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च मिलाकर एक स्मूथ बैटर तैयार कर लें. इसके बाद एक नॉन-स्टिक तवे पर हल्का सा तेल लगाकर इसके पतले और करारे डोसे सेकें. अब इसे पुदीने या टमाटर की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें. यह एक बेहद कम कैलोरी वाला लाइट डिनर ऑप्शन है. तेजी से वजन घटाने के लिए बाजरे का उत्तपम बात चाहे सर्दियों के मौसम की हो या फिर नॉर्मल दिनों की, बाजरे को हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद माना गया है. अगर आप अपना बढ़ा हुआ वजन घटाना चाहते हैं तो रात के खाने में आपको बाजरे का उत्तपम जरूर ट्राय करना चाहिए. इसके लिए बाजरे के आटे में थोड़ा सा पानी और छाछ मिलाकर थोड़ा सा गाढ़ा घोल तैयार कर लें. अब इस घोल को तवे पर फैलाएं और ऊपर से बारीक कटी शिमला मिर्च, टमाटर और धनिया पत्ती डालें. इसे दोनों ही तरफ से हल्का सा सेक लें. बता दें बाजरा धीरे-धीरे डाइजेस्ट होता है, जिस वजह से रात के समय आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और आपको असमय भूख भी नहीं लगती है.

मोबाइल नंबर बिना WhatsApp इस्तेमाल होगा आसान, नए फीचर की करेगी सरकार समीक्षा।

अगर आप जल्द ही अपना मोबाइल नंबर बताए बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए WhatsApp इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. WhatsApp जल्द ही ऐसा बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिससे लोग फोन नंबर शेयर किए बिना एक-दूसरे से जुड़सकेंगे. हालांकि इस नए फीचर ने भारत सरकार का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार इस फीचर की गहराई से समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के नए रास्ते न खुल जाएं. अगर जांच में कोई गंभीर खामी सामने आती है, तो Meta से जवाब भी मांगा जा सकता है. WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर क्या है? व्हाट्सऐप एक नया यूजरनेम सिस्टम ला रहा है, जिसके बाद यूजर्स अपनी पहचान के लिए मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसका मकसद लोगों की प्राइवेसी बढ़ाना है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां किसी अनजान व्यक्ति या ग्रुप के साथ बातचीत करनी होती है. कंपनी के अनुसार, यूजरनेम बनाना पूरी तरह वैकल्पिक होगा. यूजर चाहें तो बाद में अपना यूजरनेम बदल भी सकेंगे या हटा भी सकेंगे. शुरुआत में यह सुविधा धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचाई जाएगी. सरकार क्यों कर रही है इस फीचर की समीक्षा? भारत में पिछले कुछ वर्षों में WhatsApp के जरिए होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर स्कैम के मामलों में तेजी आई है. ऐसे में सरकार यह समझना चाहती है कि मोबाइल नंबर छिपने के बाद कहीं अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाना और आसान तो नहीं हो जाएगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि WhatsApp ने फर्जी अकाउंट, पहचान की नकल (Impersonation) और साइबर अपराध रोकने के लिए कितनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है. यदि समीक्षा के दौरान कोई गंभीर कमी मिलती है, तो Meta को नोटिस जारी किया जा सकता है. कैसे काम करेगा नया सिस्टम? WhatsApp के अनुसार, यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर तक का हो सकेगा. कुछ बड़े सार्वजनिक व्यक्तियों और मशहूर हस्तियों के नाम सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि कोई दूसरा उनका गलत इस्तेमाल न कर सके. इसके अलावा कंपनी एक वैकल्पिक “यूजरनेम की” भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है. यह एक छोटा न्यूमेरिक कोड होगा, जिसे यूजर अपने भरोसेमंद लोगों के साथ साझा कर सकेंगे. इसका उद्देश्य फर्जी अकाउंट और नाम की नकल करने वालों से अतिरिक्त सुरक्षा देना है. Meta यह भी कहता है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले की तरह जारी रहेगा और निजी संदेश सुरक्षित रहेंगे. चिंता किस बात की है? डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर जहां प्राइवेसी बढ़ाएगा, वहीं साइबर अपराधियों को भी नया मौका दे सकता है. यदि कोई ठग किसी मशहूर व्यक्ति, बैंक, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बना ले, तो लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है. कुछ विशेषज्ञों ने Telegram का उदाहरण भी दिया है, जहां यूजरनेम आधारित सिस्टम का फायदा उठाकर कई फर्जी अकाउंट बनाए गए और लोगों से ठगी की गई. उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े WhatsApp बाजार में मजबूत एंटी-फ्रॉड सिस्टम बेहद जरूरी होंगे. आम यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर? अगर यह फीचर सुरक्षित तरीके से लागू होता है, तो यूजर्स को कई फायदे मिल सकते हैं. ग्रुप चैट, बिजनेस बातचीत और नए लोगों से संपर्क करते समय मोबाइल नंबर छिपा रहेगा, जिससे प्राइवेसी बेहतर होगी. लेकिन यूजर्स को भी सतर्क रहने की जरूरत होगी. किसी अनजान यूजरनेम से आए मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी होगा. संदिग्ध अकाउंट मिलने पर तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सलाह दी जाती है.  

NICU में बार-बार ब्लड टेस्ट पड़ सकते हैं भारी! रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा

नई दिल्ली जब कोई बच्चा समय से पहले जन्म ( प्रीटर्म बर्थ) ले लेता है तो उसको अच्छी देखभाल के लिए NICU में रखा जाता है. इस दौरान कई बार खून की जांच होती है. किसी संक्रमण का पता लगाने के लिए यह ब्लड टेस्ट किए जाते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले यह टेस्ट बच्चों की सेहत को बिगाड़ सकते हैं. एनआईसीयू में भर्ती हुए बच्चों पर हुई एक नई स्टडी में इस खतरे के बारे में बताया गया है. यह रिसर्च प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट में छपी है।  इस रिसर्च को 22 यूरोपीय देशों के 64 NICU में  भर्ती हुए 320 प्रीटर्म बर्थ वाले बच्चों पर किया गया है. इसमें बताया गया कि कुछ बच्चों को एनआईसीयू में से एक से तीन दिन में छुट्टी मिल जाती है तो कुछ को कई महीनों तकरखना पड़ता है. इस दौरान किए जाने वाले ब्लड टेस्ट से बच्चे के शरीर में पहले हफ्ते में ही खून की कमी हो सकती है. ये कमी उसको एनीमिया की बीमारी का शिकार बना सकती है. इस बीमारी से उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है. यह स्टडी यूरोप में NICU पर आधारित सबसे बड़ी स्टडी है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि एनआईसीयू में बच्चों का कितना खून केवल टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है।   28 दिनों के भीतर 50 फीसदी खून ले लिया जाता है रिसर्च में पता चला कि 24 सप्ताह में जन्मे बच्चों में 28 दिनों के भीतर जन्म के समय शरीर में मौजूद कुल खून का लगभग 50% ब्लड टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है. 25 सप्ताह में जन्मे बच्चों में लगभग 26% खून, 26 सप्ताह में लगभग 20% और 27 सप्ताह में लगभग 11.5% खून केवल टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है।  इन आंकड़ों से पता चलता है कि 24 सप्ताह में जन्मे बच्चों में तो जन्म के समय जितना खून था, उसका आधा सिर्फ ब्लड टेस्ट करने में खर्च हो जाता है. इससे आगे चलकर बच्चे के शरीर में खून की कमी होने का रिस्क होता है।  सबसे ज्यादा खून कब निकला? रिसर्चर्स ने पाया कि कुछ अस्पतालों में डॉक्टर NICU में मौजूद बच्चे का कम मात्रा में खून लेकर जांच करते हैं. जबकि कुछ अस्पताल उसी टेस्ट के लिए कई गुना ज्यादा खून लेते हैं. टेस्ट एक ही होता है, लेकिन खून की जरूरत अलग-अलग होती है. जहां अच्छे लैब और डॉक्टर हैं वहां कई टेस्ट के लिए एक बार ही सैंपल ले लिया जाता है, वहीं कई अस्पतालों में हर टेस्ट के लिए अलग- अलग बार सैंपल लिए जाते हैं।  इस तरह की जानी चाहिए बच्चों के खून की जांच रिसर्च में पाया गया कि जिन NICU में कम खून में जांच करने वाली मशीने थीं, वहां बच्चों का ब्लड लॉस लगभग आधा था. कम मात्रा में खून से जांच करने वाली मशीनों ज्यादा बेहतर हैं. रिसर्च से यह साफ हुआ है कि अगर कम खून में जांच करने वाली तकनीके अपनाई जाएं  तो बच्चों में खून की कमी का खतरा काफी कम हो सकता है. इससे एनीमिया की बीमारी का रिस्क भी कम रहता है।  क्या कहते हैं एम्स के एक्सपर्ट दिल्ली एम्स में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि NICU में भर्ती बच्चों को सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक रिस्क होता है. उनमें किसी बीमारी की जांच और अलग- अलग इंफेक्शन का पता लगाने के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, हालांकि टेस्ट जरूरत के हिसाब से ही होने चाहिए. एक बार के सैंपल से ही कई जांच की जा सकती हैं. ऐसे में बार- बार सैंपल लेना ठीक नहीं है. अगर बच्चे में खून की कमी हो जाती है तो फिर ये स्थिति भी खतरनाक हो सकती है. इससे एनीमिया की बीमारी का रिस्क होता है।  क्या होती है एनीमिया की बीमारी?  नवजात शिशुओं में एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या सामान्य से कम होती है. ऐसा कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो, रेड ब्लड सेल्स बहुत तेज़ी से टूट रहे हों, शरीर में पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स न बन रहे हों या बच्चे का बहुत ज़्यादा खून बह गया हो.  डॉ हिमांशु बताते हैं कि एनीमिया की बीमारी में लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं. इसमें स्किन का पीला पड़ना, कमजोरी होना और उसकी इम्यूनिटी पर भी इसका असर हो सकता है। 

टेक मार्केट में नए प्रोडक्ट्स की एंट्री, Galaxy A27 5G, TravelLite लैपटॉप और VlogMate Neo पेश

स्मार्टफोन की दुनिया में सैमसंग ने अपना नया और बेहद स्टाइलिश Samsung Galaxy A27 5G लॉन्च कर दिया है, जो शानदार AI फीचर्स और लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ आया है। वहीं, कंटेंट क्रिएटर्स और व्लॉगर्स की सहूलियत के लिए पोर्ट्रोनिक्स ने VlogMate Neo नाम का एक बेहद किफायती एआई-पावर्ड वायरलेस माइक्रोफोन बाजार में उतारा है। इसके साथ ही, लैपटॉप सेगमेंट में कदम बढ़ाते हुए Acer ने बिजनेस और कमर्शियल यूजर्स के लिए Acer TravelLite लैपटॉप पेश किया है, जो इंटेल के सबसे नए प्रोसेसर से लैस है। दूसरी ओर, भारतीय मोबाइल ब्रांड Ai+ के Nova 2 Neo और Nova 2 Pro स्मार्टफोन पहली ही सेल में कुछ मिनटों में आउट ऑफ स्टॉक होने के बाद अब फ्लिपकार्ट पर अपनी अगली सेल के लिए पूरी तरह तैयार हैं।     सैमसंग ने भारत में अपना नया स्टाइलिश और किफायती स्मार्टफोन Samsung Galaxy A27 5G लॉन्च किया है, जिसकी शुरुआती प्रभावी कीमत कैशबैक के बाद 28,999 रुपये से शुरू हो गई है।     यह फोन 3 जुलाई से लाइट ग्रीन, लाइट पिंक और ब्लैक कलर्स में सैमसंग स्टोर्स, पार्टनर आउटलेट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा ।     इस फोन की सबसे बड़ी यूएसपी इसका लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट है।     स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो Galaxy A27 5G में 120Hz सुपर एमोलेड इन्फिनिटी-ओ डिस्प्ले है। फोन में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है। भारी मांग के कारण वापस शुरू हुई इनकी सेल     भारतीय मोबाइल ब्रांड Ai+ ने Nova 2 Neo और Nova 2 Pro की 26 जून को फ्लिपकार्ट पर हुई पहली सेल में सारे डिवाइस चंद मिनटों में बिक गए।     भारी मांग को देखते हुए कंपनी ने इसकी अगली सेल 30 जून को दोपहर 12 बजे से दोबारा फ्लिपकार्ट पर लाइव हो गई है। इन दोनों स्मार्टफोन्स को 22 जून को पेश किया गया था।     ये दोनों ही स्मार्टफोन्स लेटेस्ट Android 16 पर आधारित भारत के पहले सॉवरेन मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम NxtQuantum OS पर काम करते हैं, जो यूजर्स को बेहद क्लीन और सुरक्षित सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस देता है। Acer ने पेश किया नया लैपटॉप     ​Acer ने भारतीय बाजार में कंपनियों, छोटे व्यवसायों (SMBs) और शैक्षणिक संस्थानों को ध्यान में रखकर अपना नया TravelLite TL24-54M बिजनेस लैपटॉप लॉन्च किया है।     इस लैपटॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंटेल की एडवांस 18A प्रोसेस नोड तकनीक पर बने Intel Core Series 3 प्रोसेसर से लैस है, जो बजट रेंज में भी शानदार एआई (AI) क्षमताएं और बेहतरीन पावर एफिशिएंसी देता है ।     सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद मजबूत है, जिसमें TPM 2.0, बायोस-लेवल सिक्योरिटी, प्राइवेसी कैमरा शटर और फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन जैसे फीचर्स दिए गए हैं।     इसमें 14 इंच का Full HD+ डिस्प्ले दिया गया है। परफॉर्मेंस को स्मूथ बनाने के लिए यह 64GB तक की DDR5 रैम और हाई-स्पीड PCIe Gen4 SSD स्टोरेज को सपोर्ट करता है। कीमत अभी कंपनी ने अनाउंस नहीं की है। एआई पावर्ड वायरलेस माइक्रोफोन     पोर्ट्रोनिक्स ने भारत में VlogMate Neo नाम का एक नया एआई पावर्ड टाइप-सी वायरलेस माइक्रोफोन लॉन्च किया है ।     इस डिवाइस की कीमत 3,999 रुपये है, लेकिन इसे 1,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। यह माइक्रोफोन व्लॉगर्स, इन्फ्लुएंसर्स और टीचर्स के लिए बेहतरीन टूल है।     इसमें डुअल-माइक्रोफोन सिस्टम और AI नॉइज रिडक्शन दिया गया है, जो आसपास के फालतू शोर को हटाकर साफ आवाज रिकॉर्ड करता है ।     यह पूरी तरह प्लग-एंड-प्लेहै, यानी इसे स्मार्टफोन के टाइप-सी पोर्ट में लगाते ही यह बिना किसी अतिरिक्त ऐप के काम करने लगता है।     इसकी वायरलेस रेंज 30 मीटर तक की है, जिससे क्रिएटर्स बिना ऑडियो क्वालिटी खराब हुए दूर से भी वीडियो शूट कर सकते हैं।

अब नंबर शेयर किए बिना होगी WhatsApp पर बातचीत, कंपनी ने लॉन्च किया नया प्राइवेसी फीचर

 नई दिल्ली WhatsApp जल्द अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है. अब किसी नए शख्स से बात करने के लिए आपको अपना मोबाइल नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जैसे टेलीग्राम पर यूजरनेम के जरिए कनेक्ट हो कर बातचीत कर सकते हैं, ठीक वैसे ही अब वॉट्सऐप में आ रहा है।  कंपनी ने आधिकारिक तौर पर नए Username फीचर का ऐलान कर दिया है. इस फीचर की मदद से लोग अपने फोन नंबर की जगह वॉट्सऐप यूजरनेम शेयर करके चैट शुरू कर सकेंगे।  कंपनी ने बताया है कि इस हफ्ते से यूजर्स अपने पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकेंगे. हालांकि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए धीरे-धीरे जारी किया जाएगा. जिन देशों में यह उपलब्ध होगा, वहां वॉट्सऐप खुद ऐप के अंदर नोटिफिकेशन देकर इसकी जानकारी देगा।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर क्या है? अब तक वॉट्सऐप पर किसी से बात करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी था. लेकिन नए फीचर के आने के बाद अगर आपने यूजरनेम बना लिया है, तो पहली बार आपसे संपर्क करने वाले शख्स को आपका मोबाइल नंबर नहीं दिखेगा. इससे आपकी प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।  वॉट्सऐप का कहना है कि आज कई लोग किसी इवेंट, क्लास, ऑफिस, सोसायटी या ग्रुप में जुड़ना चाहते हैं, लेकिन अपना निजी मोबाइल नंबर हर किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते. इसी जरूरत को देखते हुए कंपनी यह फीचर लेकर आई है. अब लोग अपना यूजरनेम देकर बातचीत शुरू कर सकेंगे।  कंपनी के मुताबिक वॉट्सऐप पर दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं. ऐसे में कई लोगों की पसंद एक जैसी हो सकती है. इसी वजह से कंपनी ने फीचर लॉन्च होने से पहले यूजरनेम रिजर्व करने का विकल्प शुरू किया है, ताकि यूजर्स अपनी पसंद का नाम पहले ही सिक्योर कर सकें।  अगर आपको यूजरनेम चुनने में परेशानी होगी तो वॉट्सऐप एक यूजरनेम जेनेरेटर भी देगा. यह आपकी पसंद के हिसाब से कुछ सुझाव दिखाएगा, जिनमें से आप कोई भी चुन सकते हैं।  यह फीचर खास तौर पर कंटेंट क्रिएटर, इंफ्लूएंसर, छोटे कारोबार और संस्थाओं के लिए भी काफी काम का होगा. अगर उनके पास पहले से इंस्टाग्राम या फेसबुक पर कोई यूजरनेम है, तो वे उसी यूजरनेम को वॉट्सऐप पर भी क्लेम कर सकेंगे. इससे सभी मेटा प्लेटफॉर्म पर उनकी एक जैसी पहचान बनी रहेगी।  वॉट्सऐप ने कहा है कि यह कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बनने जा रहा है. यहां यूजरनेम खोजने के लिए कोई पब्लिक डायरेक्ट्री नहीं होगी और न ही लोगों के यूजरनेम सर्च करके देखे जा सकेंगे. किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।  कंपनी ने सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए एक नया Username Key सिस्टम भी बनाया है. अगर कोई यूजर चाहे तो वह यह एक्स्ट्रा सिक्योरिटी ऑप्शन चालू कर सकता है. इसके बाद किसी नए शख्स को मैसेज भेजने के लिए सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उस Key की भी जरूरत पड़ सकती है. इससे अनजान लोगों के लिए संपर्क करना और मुश्किल हो जाएगा।  वॉट्सऐप का कहना है कि यूजरनेम फीचर शुरू होने के बाद अगर आपने इसे चालू कर दिया है, तो किसी नए व्यक्ति या बिजनेस से पहली बार बातचीत करते समय आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा. इससे आपकी निजी जानकारी पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित रहेगी। अगर आपके पास वॉट्सऐप का नया वर्जन है, तो फीचर उपलब्ध होने पर आप Settings > Account > Username में जाकर अपना यूजरनेम रिजर्व कर पाएंगे. अभी यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुई है. कंपनी आने वाले महीनों में इसे धीरे-धीरे दुनिया भर के यूजर्स तक पहुंचाएगी।  वॉट्सऐप का मानना है कि यूजरनेम फीचर उसकी प्राइवेसी स्ट्रैटिजी का अगला बड़ा कदम है. इससे यूजर्स को नए लोगों से बात करते समय अपना मोबाइल नंबर शेयर करने की मजबूरी नहीं रहेगी और वे पहले से ज्यादा  सुरक्षित तरीके से वॉट्सऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। 

mAadhaar App कल से करेगा काम बंद, UIDAI के नए ऐप पर ऐसे करें आसान शिफ्ट

 नई दिल्ली अगर आपके फोन में mAadhaar ऐप है, तो यह खबर आपके काम की है. सरकार ने ऐलान किया है कि 30 जून से mAadhaar ऐप बंद कर दिया जाएगा. इसकी जगह अब नया Aadhaar App इस्तेमाल करना होगा. UIDAI ने लोगों से कहा है कि वे जल्द से जल्द नया ऐप डाउनलोड कर लें।  UIDAI ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर बताया है कि mAadhaar ऐप को रिटायर किया जा रहा है. यानी अब इसमें नए अपडेट नहीं मिलेंगे और आगे चलकर इसकी सेवाएं भी बंद हो जाएंगी. इसलिए यूजर्स को नए Aadhaar App पर शिफ्ट होने की सलाह दी गई है।  नया Aadhaar ऐप पहले वाले ऐप से काफी अलग है. इसमें कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब आपको हर जगह आधार कार्ड की फोटो कॉपी देने की जरूरत नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर आप ऐप से QR Code के जरिए अपनी पहचान दिखा सकेंगे।  इस नए ऐप में फेस ऑथेन्टिकेशन सिस्टम भी दिया गया है. यानी कई जगह आपकी पहचान सिर्फ चेहरे से हो सकेगी. इसके अलावा आप अपने आधार का बायोमेट्रिक लॉक भी ऐप से ऑन या ऑफ कर सकते हैं. इससे आधार से जुड़े फ्रॉड का खतरा कम हो सकता है।  नया Aadhaar App इंस्टॉल करने के लिए हम नीचे एंड्रॉयड और आईफोन लिंक दे रहे हैं. आप अपने फोन के हिसाब से लिंक पर क्लिक करके अपने फोन पर डाउनलोड कर सकते हैं।   यहां से एंड्रॉयड के लिए आधार ऐप डाउनलोड कर सकते हैं.  यहां से आईफोन के लिए नया आधार ऐप डाउनलोड कर सकते हैं UIDAI का कहना है कि नया ऐप आपकी प्राइवेसी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. अगर किसी जगह सिर्फ नाम और उम्र की जरूरत है, तो आपको पूरा आधार नंबर या पूरी जानकारी शेयर नहीं करनी पड़ेगी. आप जरूरत के हिसाब से ही जानकारी साझा कर सकेंगे।  अगर आप नया ऐप डाउनलोड करना चाहते हैं, तो एंड्रॉयड यूजर गूगल प्ले स्टोर और आईफोन यूजर ऐपल ऐप स्टोर पर जाकर Aadhaar App सर्च करें. यहां आपको ऐप के नाम और लोगो के साथ ऐप का पब्लिशर भी चेक करना है, क्योंकि आधार के नाम पर कई फर्जी ऐप्स भी उपलब्ध हैं जो आपका अकाउंट खाली कर सकते हैं।  ऐप के नाम के नीचे पब्लिशर्स या डेवेलपर्स सेक्शन में UIDAI होना जरूरी है. दूसरे किसी आधार ऐप को डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि ये मैलवेयर भी हो सकते हैं।  ऐप इंस्टॉल करने के बाद आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें. OTP और Face Authentication के बाद आपका अकाउंट तैयार हो जाएगा।  सरकार चाहती है कि आने वाले समय में आधार से जुड़े ज्यादातर काम इसी नए ऐप से किए जाएं. इसलिए अगर आप मोबाइल में आधार रखते हैं या अक्सर आधार का इस्तेमाल करते हैं, तो जितनी जल्दी हो सके mAadhaar की जगह नया Aadhaar App डाउनलोड कर लेना बेहतर होगा।