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पंजाब में 1.17 लाख से अधिक अनुसूचित छात्रों को मिलेगी स्कॉलरशिप, विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत

चंडीगढ़  पंजाब के अनुसूचित जाति (एससी) विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से छात्रवृत्ति योजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 94,092 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। इन विद्यार्थियों के लिए पंजाब सरकार ने 13.30 करोड़ रुपये जारी किए हैं। सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 1,17,142 एससी विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी भी बच्चे को स्कूल स्तर पर अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का लाभ किसे मिलेगा ? प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से स्कूल स्तर पर पढ़ने वाले पात्र एससी विद्यार्थियों के लिए है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एससी परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। जानकारी अनुसार छात्रवृत्ति से बच्चों और उनके परिवारों पर पढ़ाई का अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलती है। मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक बदलाव की सबसे मजबूत नींव है। सरकार का प्रयास है कि छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचे और सहायता मिलने में किसी प्रकार की देरी न हो। 2026-27 में बढ़ेगा लाभ का दायरा, 40 करोड़ मंजूर सरकार की योजना के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में 1.17 लाख से अधिक विद्यार्थियों को योजना के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। विभाग पात्र परिवारों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर देगा। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने और युवाओं का भविष्य मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

राजस्थान निकाय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे, एक प्रत्याशी को नहीं मिला एक भी वोट

जयपुर  चुनावी मैदान में कई बार ऐसे हैरान कर देने वाले नतीजे सामने आ जाते हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भी कुछ परिणामों ने प्रत्याशियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को चौंका दिया। कहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला, तो कहीं भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खाते में महज एक वोट आया। बालोतरा जिले के सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 का यह चुनावी परिणाम कुछ ऐसा ही अनूठा किस्सा लेकर आया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। इस वार्ड में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के उम्मीदवार ओम प्रकाश को एक भी वोट नहीं मिला। ओमप्रकाश खुद इस वार्ड के मतदाता नहीं हैं, इसलिए खुद का वोट भी नहीं मिल सका। वहीं नोटा का बटन दबाने वाला एक मतदाता जरूर मिल गया। यानी यहां नोटा आरएलपी से आगे निकल गया। इस वार्ड में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच रहा, जहां बीजेपी के खेमाराम को 93 वोट मिले और कांग्रेस के भंवरा राम ने 133 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कुल डाले गए मतों की संख्या 226 रही, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार ने बाजी मार ली। एक वोट वाले नतीजे ने खड़े किए कई सवाल परबतसर नगर पालिका चुनाव के इन दोनों नतीजों ने राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन और स्थानीय संगठन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।  BJP जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी का एक वोट तक सीमित रहना इसलिए ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि उम्मीदवार खुद भी उस वार्ड का मतदाता नहीं था. वहीं, RLP प्रत्याशी के खाते में भी सिर्फ एक वोट आना पार्टी के स्थानीय जनाधार और उम्मीदवार चयन पर चर्चा का कारण बन रहा है।  फिलहाल परबतसर नगर पालिका चुनाव का यह 'एक वोट' वाला मामला स्थानीय राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा में है. खासकर BJP प्रत्याशी कैलाश चंद्र का खुद को वोट नहीं दे पाना इस पूरे चुनावी नतीजे को और दिलचस्प बना रहा है।  परबतसर में BJP प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट दूसरा हैरान करने वाला नतीजा डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 से सामने आया। यहां भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी कैलाशचंद को महज एक वोट मिला। वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी हिना खानम ने 376 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। निर्दलीय प्रत्याशी रसीद खां को भी 195 वोट मिले। यानी निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी से 194 वोट आगे रहा। इस वार्ड में कुल 573 वोट पड़े। खास बात यह रही कि भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद के खाते में एक वोट आया और नोटा को भी एक वोट मिला। पत्नी और माता-पिता भी नहीं दे पाए वोट! कैलाशचंद के लिए यह नतीजा इसलिए और चौंकाने वाला है क्योंकि उनके मुताबिक उनका परिवार जिस वार्ड में रहता है, वहां परिवार के 12 वोट थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें वार्ड नंबर 13 से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। ऐसे में उनके परिवार के सदस्य भी उन्हें वोट नहीं दे सके।

भारत-जापान के सांस्कृतिक रिश्तों को शिक्षा-तकनीक से मिल रहा नया विस्तार : सीएम साय

भारत-जापान के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को शिक्षा और तकनीक दे रहे नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य मुलाकात मुख्यमंत्री ने जापानी विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद : छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से कराया परिचित सिरपुर सहित प्रदेश की समृद्ध विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार कर रही निरंतर प्रयास एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों से प्रभावित हुए जापानी विद्यार्थी रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी से आए 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। भारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय संवाद किया। इस दौरान भारत और जापान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप तथा दोनों देशों के युवाओं के बीच बढ़ते संवाद सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जापानी छात्र-छात्राओं का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ यह संबंध संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग के अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जापान आज परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय के साथ विश्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान की मजबूत नींव है। युवाओं तथा विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से यह संबंध आने वाली पीढ़ियों में और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया के अनेक देशों को प्रभावित किया और जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यही साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को एक विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है। उन्होंने जापानी विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध  पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और बौद्ध विरासत का अद्भुत केंद्र है। यहां प्राप्त पुरातात्विक अवशेष प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और विभिन्न संस्कृतियों के समन्वय की कहानी बताते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी और पर्यटक छत्तीसगढ़ आएं, यहां की विरासत को जानें और प्रदेश के साथ ज्ञान एवं संस्कृति का एक स्थायी संबंध स्थापित करें। मुख्यमंत्री ने साझा किए जापान यात्रा के अनुभव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी जापान यात्रा से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने जापान की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस प्रकार सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भारत भी अपनी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर आधुनिक तकनीक, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और जापान के युवाओं के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों के भविष्य के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा और तकनीक से खुलेंगी सहयोग की नई संभावनाएं मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार तथा तकनीक विकास के सबसे महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। भारत और जापान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग विद्यार्थियों को नई तकनीकों, शोध और नवाचार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एहिमे यूनिवर्सिटी और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों के बीच संवाद से भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग, स्टार्टअप और इनोवेशन के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम दो देशों के बीच केवल संस्थागत संबंध ही नहीं बनाते, बल्कि युवाओं के बीच मित्रता और आपसी समझ का मजबूत आधार भी तैयार करते हैं। भारतीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ की आत्मीयता से प्रभावित हुए जापानी विद्यार्थी जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव भी साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि रायपुर में उन्हें अत्यंत आत्मीय अनुभव हुआ। यहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और उसके सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला। जापानी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक बताया कि उन्होंने मेहंदी लगवाई और भारतीय परिधानों की खरीदारी भी की। विद्यार्थियों ने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें भारत को पुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर यहां के समाज, संस्कृति और जीवनशैली के माध्यम से समझने का अवसर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के अनुभव सुनकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सहजता, आत्मीयता और अतिथि सत्कार की परंपरा के लिए जाना जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे यहां से छत्तीसगढ़ की सुखद स्मृतियां लेकर जाएं और भविष्य में पुनः प्रदेश आएं। एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों में दिखाई विशेष रुचि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने एनआईटी रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटरों और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने वहां संचालित स्टार्टअप की गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और विकसित की जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली। विशेष रूप से ऐसे स्टार्टअप ने जापानी विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया, जो तकनीक के माध्यम से आम लोगों की दैनिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित कर रहे हैं। … Read more

बिजली संकट पर CM मान का बड़ा ऐलान, पंजाब के सभी 5 थर्मल प्लांटों के लिए कोयले की पर्याप्त व्यवस्था

 चंडीगढ़ पंजाब में बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि प्रदेश में बिजली की समस्या अब खत्म होने वाली है। उन्होंने कहा कि झारखंड की कोयला खदानों में बाढ़ का पानी भरने के कारण कोयले की शॉर्टेज हुई थी, जिसका असर पूरे देश में बिजली उत्पादन पर पड़ा। पंजाब भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन अब कोयले की उपलब्धता को लेकर रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत हुई है। वह खुद भी दो-चार दिन बाद रांची जाकर हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उनका धन्यवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड की पचवाड़ा कोयला खदान से मिलने वाला कोयला केवल सरकारी थर्मल प्लांटों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पंजाब के दो निजी थर्मल प्लांटों को इस व्यवस्था के तहत कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। मान ने बताया कि पंजाब सरकार ने कोल इंडिया से अनुरोध किया था कि निजी थर्मल प्लांटों को भी कोयला उपलब्ध करवाया जाए। कोल इंडिया ने इस पर सहमति दे दी है। अब झारखंड सरकार की स्थानीय स्तर पर जरूरी मंजूरी भी मिल गई है। इससे पंजाब के पांचों थर्मल प्लांटों को आने वाले दिनों में पर्याप्त कोयला मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ बंद पड़ी बिजली उत्पादन इकाइयों को भी चलाने में मदद मिलेगी और प्रदेश में बिजली की स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट किसी एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड की खदानों में बाढ़ के कारण पूरे देश में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। मनप्रीत बादल पर भी साधा निशाना मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मनप्रीत बादल को किसी एक पार्टी में रहना चाहिए, क्योंकि आज बहुत ज्यादा पार्टियां हो गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मनप्रीत बादल आजकल किस पार्टी में हैं। पिछले साल से 3500 मेगावाट ज्यादा मांग सौंद ने कहा कि सितंबर में इस वर्ष पंजाब की बिजली मांग पिछले वर्षों की तुलना में करीब 3500 मेगावाट अधिक है। इसके बावजूद पावरकाम की ओर से उपलब्ध सभी स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली उत्पादन करवाया जा रहा है। हालांकि राज्य में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों की तुलना में बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन मांग में अपेक्षित कमी नहीं आई है। ऐसे में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार और पावरकाम के सामने चुनौती अभी भी बनी हुई है। उद्योग और किसान जता चुके हैं नाराजगी बिजली कटौती को लेकर पंजाब का औद्योगिक क्षेत्र लगातार चिंता जताता रहा है। खासकर रात के समय बिजली प्रतिबंध और उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की लागत और डिलीवरी शेड्यूल पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।  किसानों की ओर से भी धान के सीजन में पर्याप्त बिजली आपूर्ति की मांग लगातार उठाई जाती रही है। ऐसे में बिजली मंत्री का पावर कट खत्म होने का दावा उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है। हालांकि 16 हजार मेगावाट से अधिक की लगातार मांग के बीच अगले दिनों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना पावरकाम के लिए बड़ी चुनौती होगी।  

दिशा सालियान केस में CBI की FIR से मचा हड़कंप, आदित्य, उद्धव ठाकरे समेत कई चर्चित नाम शामिल

मुंबई  दिवंगत बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत मामले में CBI ने FIR दर्ज कर ली है। बड़ी खबर ये है कि इस संदिग्ध मौत के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने सीधे तौर पर शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल किया है। यही नहीं, दिशा के पिता सतीश सालियन की शिकायत के आधार पर CBI ने FIR में बॉलीवुड एक्‍टर डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली के साथ-साथ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, जेल में बंद पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के नाम लिए हैं। केंद्रीय जांच ब्‍यूरो ने दिशा के पिता सतीश सालियान के बयान के आधार पर यह FIR दर्ज की है। पिता का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके उनकी बेटी की मौत से जुड़े सबूत मिटा दिए गए थे। CBI ने यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी और उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के बयान में क‍िन-क‍िन का नाम CBI के समक्ष सतीश सालियान के बयान के मुताबिक, मामले में कई लोगों की भूमिका की गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है। उन्होंने आपराधिक साजिश, दिशा की मौत को आत्महत्या बताने वाली गलत कहानी तैयार करने और उसे फैलाने के साथ-साथ सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित छेड़छाड़ किए जाने जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। सतीश सालियान ने बयान में जिन लोगों के नाम का जिक्र किया गया है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड्स, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, डीसीपी विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे और अनिल देशमुख समेत कई पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। द‍िशा साल‍ियान के प‍िता के वकील बोले- हमने गैंग-रेप और हत्या के आरोप लगाए हैं CBI की ओर से FIR दर्ज होने से दो दिन पहले 11 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपना बयान दर्ज कराया था। तब उनके वकील निलेश ओझा भी CBI दफ्तर पहुंचे थे। यहां वकील निलेश ओझा ने कहा, 'हम आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के ख‍िलाफ गैंग-रेप और हत्या के मामले में FIR दर्ज कराने आए हैं। दूसरी बात, हमारे पास मौजूद सबूतों के अलावा, हमारे पास सचिन वाजे का न्यायालय के बाहर किया गया कबूलनामा भी है… नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पास सबूत होने के बावजूद, NCB अधिकारी संजय सिंह 6 साल तक आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और अन्य आरोपियों के ख‍िलाफ चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहे। क्‍योंकि जांच के दौरान इसमें भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, इसलिए हम एक अलग जांच की मांग कर रहे हैं।'   सीबीआई ने इन्हें बनाया आरोपी     आदित्य ठाकरे     रोहन रॉय     डिनो मोरिया     सूरज पंचोली     आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड     रिया चक्रवर्ती     शोविक चक्रवर्ती     सचिन वाजे     परमबीर सिंह     DCP विशाल ठाकुर     उद्धव ठाकरे     अनिल देशमुख     API अशोक देवाड़े     PI जगदेव कलापड़     PI शैलेंद्र नगरकर     PI चिमाजी आधव     PI अर्जुन राजाने     मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी     देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव     कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser     तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी द‍िशा के प‍िता की श‍िकायत में पुलिस अध‍िकारी, डॉक्‍टर और स्‍टाफ का भी ज‍िक्र दिशा के पिता ने इस मामले में मालवणी पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों, दिशा के पोस्टमार्टम में कथित देरी से जुड़े डॉक्टरों और स्टाफ, कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के कर्मचारियों, रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड्स और कई अन्य लोगों का भी बयान में जिक्र किया गया है। हाईकोर्ट ने CBI को नए स‍िरे से जांच के आदेश द‍िए CBI ने इससे पहले दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए मालवणी पुलिस को पत्र लिखा था। एजेंसी ने ये रिकॉर्ड अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए मांगे थे। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में नए सिरे से जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा था कि जांच की निगरानी के लिए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाए।     हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी शुरू: वनतारा जारी रखेगा मेडिकल केयर     हथिनी माधुरी की कोल्हापुर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। हाई-पावर्ड कमिटी (HPC) ने इसकी मंजूरी दे दी है। जुलाई 2025 में जामनगर लाए जाने के बाद अनंत अंबानी के ‘वनतारा’ ने उसकी देखभाल की। इलाज से माधुरी की हालत स्थिर है, लेकिन उसे लगातार मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है। वनतारा, नंदानी में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने में मदद कर रहा है और उसके डॉक्टर हर 15 दिन में वहां जाकर माधुरी की जांच और रिपोर्टिंग करेंगे। क्या लिखा है FIR में आदित्य ठाकरे के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा अन्य लोगों ने भी साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भी इस बात के लिए जांच की जानी चाहिए कि क्या उन्होंने मामले से जुड़े कागजात, फाइलों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट या दबाया, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर/फर्जीवाड़ा किया और आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी धन, कर्मचारियों और पुलिस मशीनरी का गैरकानूनी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया।  FIR में कई बड़े नाम शामिल मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, उसके बाद झूठी आत्महत्या की कहानी तैयार करने और उसे फैलाने, तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने और/या उनमें हेरफेर करने के संबंध में जिन लोगों की भूमिका की जांच की जरूरत है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, … Read more

वर्षा ऋतु के बाद निर्माणाधीन सड़कों के कार्यों में लाएं तेजी, समयबद्ध रूप से पूर्ण हों सड़क निर्माण के कार्य – मुख्यमंत्री साय

अंबिकापुर के सड़क की वायरल वीडियो का  मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान:  कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर की चर्चा, सड़क को तत्काल सुधारने के दिए निर्देश बारिश के दौरान निर्माणाधीन सड़कों पर आवागमन में नागरिकों को न हो परेशानी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी कलेक्टरों को दिए निर्देश – स्वयं मौका मुआयना करें, मानसून में भी सड़कों को आवागमन योग्य बनाए रखना सुनिश्चित करें वर्षा ऋतु के बाद निर्माणाधीन सड़कों के कार्यों में लाएं तेजी, समयबद्ध रूप से पूर्ण हों सड़क निर्माण के कार्य – मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में बारिश के दौरान निर्माणाधीन सड़कों के कारण नागरिकों को आवागमन में हो रही परेशानियों को गंभीरता से लिया है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर शहर के खरसिया चौक में सड़क की खराब स्थिति के कारण नागरिकों को हो रही परेशानी की वाईरल वीडियो का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। उन्होंने तत्काल सड़क का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य सुनिश्चित कराने के निर्देश कलेक्टर को दिए। मुख्यमंत्री साय ने खरसिया चौक की सड़क में बड़े गड्ढों को भरने, आवश्यक समतलीकरण तथा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां यातायात का दबाव अधिक है, वहां पुलिस एवं यातायात विभाग के साथ समन्वय कर सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों में निर्माणाधीन सड़कों की स्थिति की नियमित निगरानी करें, आवश्यकता के अनुसार स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करें और संबंधित विभागों एवं निर्माण एजेंसियों से समन्वय कर सड़कों को आवागमन योग्य बनाए रखना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि बारिश के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। जहां सड़क क्षतिग्रस्त होने, निर्माण कार्य, पुल-पुलिया के आसपास कटाव, जलभराव अथवा अन्य किसी कारण से आवागमन प्रभावित होने या दुर्घटना की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। आवश्यकता के अनुसार चेतावनी संकेतक, बैरिकेडिंग और सुरक्षित वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून के दौरान किसी भी क्षेत्र में सड़क की खराब स्थिति के कारण नागरिकों को आवागमन में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। जहां निर्माण कार्य प्रगति पर हैं अथवा बारिश के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां गड्ढों को भरने, समतलीकरण, जल निकासी सहित सभी आवश्यक अंतरिम सुधार कार्य प्राथमिकता से किए जाएं। स्थायी निर्माण में मौसम संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयां होने पर भी सड़क को चलने योग्य बनाए रखने के लिए हर आवश्यक उपाय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, नगरीय निकाय अथवा अन्य किसी एजेंसी से संबंधित सड़क हो, जिला प्रशासन संबंधित विभाग के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे। कलेक्टर अपने जिले में अधिक यातायात दबाव वाली प्रमुख सड़कों और निर्माणाधीन मार्गों को चिन्हांकित कर उनकी स्थिति की नियमित समीक्षा करें। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु समाप्त होते ही निर्माणाधीन एवं स्वीकृत सड़क कार्यों में तेजी लाई जाए। निर्माण एजेंसियों के साथ कार्ययोजना बनाकर सड़क निर्माण एवं स्थायी मरम्मत के कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों के कारण लोगों को लंबे समय तक असुविधा न हो, इसके लिए निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करते हुए समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

क्या FATF को दिखावा कर रहा पाकिस्तान? मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम घोषित, बैठक से पहले नया दांव

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर के खिलाफ एक बार फिर कार्रवाई का दिखावा किया है. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की मोस्ट वांटेड लिस्ट में मसूद अजहर के नाम के साथ अब 70 लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अहम बैठक होने वाली है।  रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इससे पहले भी मसूद अजहर को लेकर कार्रवाई का दावा किया था. साल 2021 में FIA की रेड बुक में उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. वहीं, अब करीब पांच साल बाद इस राशि में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है।  कहां है मसूद अजहर? पाकिस्तान का दावा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान से गायब है और अफगानिस्तान में है. हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की तकनीकी निगरानी से जुड़े इनपुट में उसके पाकिस्तान में ही छिपे होने की बात सामने आई है।  रिपोर्ट में भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पिछले करीब छह महीनों के तकनीकी जांच में मसूद अजहर के पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में छिपे होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर वह पाकिस्तान में ही मौजूद है तो उसके खिलाफ केवल इनाम घोषित करने की कार्रवाई कितनी प्रभावी है।  पाकिस्तान की लिस्ट में और भी कई नाम शामिल FIA की नई मोस्ट वांटेड लिस्ट में केवल मसूद अजहर ही नहीं, बल्कि मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले से जुड़े कई संदिग्धों के नाम भी शामिल किए गए हैं. लिस्ट में 19 आतंकियों के नाम बताए गए हैं, जिनमें से कई पर हमले के लिए आर्थिक मदद करने, आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने और लॉजिस्टिक सहायता देने के आरोप हैं. FIA ने कुछ नामों के साथ पहले मौजूद तस्वीर और आतंकी संगठन से जुड़े विवरण को भी हटा दिया है।  भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने लगाए ये आरोप भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि पाकिस्तान की ऐसी कार्रवाई वास्तविक कदम से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने की कोशिश हो सकती है. गौर करने वाली बात यह भी है कि पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड लिस्ट में आतंकियों की संख्या पिछले कुछ सालों में बढ़ी है. 2021 में FIA की रेड बुक में करीब 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकी थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।  FIA की नई लिस्ट में 26/11 से जुड़े 19 आतंकी पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की अपनी अपडेटेड लिस्ट जारी की है. इसमें मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम शामिल हैं. इनमें कुछ पर हमलावरों को आर्थिक मदद देने, जबकि कुछ पर आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में सहयोग करने का आरोप है. लिस्ट में शामिल 17 आतंकियों की तस्वीर के साथ 26/11 हमले में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।  हालांकि, लिस्ट में दो आतंकियों के मामले में अहम जानकारियां हटा दी गई हैं. उनके नाम तो मौजूद हैं, लेकिन तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और मुंबई हमले में उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी अब लिस्ट में नहीं है. साल 2021 में जारी FIA की लिस्ट में इन दोनों आतंकियों के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।  2021 में भी किया था इनाम का ऐलान पाकिस्तान ने साल 2021 में भी मसूद अजहर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब करीब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 70 लाख रुपये कर दिया गया है। पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की तकनीकी निगरानी के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले करीब छह महीनों से उसके सिंध प्रांत के नवाबशाह में होने के इनपुट सामने आ रहे हैं। 26/11 के 19 आतंकियों के नाम भी सूची में FIA की नई अपडेटेड मोस्ट वांटेड सूची में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें से 17 आतंकियों की तस्वीर और 26/11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। हालांकि, दो आतंकियों के मामले में तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और हमले में उनकी भूमिका का विवरण हटा दिया गया है। सिर्फ उनके नाम सूची में रखे गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान का नाम भी सूची में है। आरोप है कि उसने आतंकियों को मुंबई पहुंचाने के लिए ‘अल-हुसैनी’ नाव उपलब्ध कराई थी। 2021 की सूची में उसकी तस्वीर और भूमिका का भी उल्लेख था, लेकिन नई सूची से ये विवरण हटा दिए गए हैं। इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान की तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से उसके संबंध का विवरण भी नई सूची में नहीं है। दो संदिग्धों की तस्वीर और जानकारी हटाई तुर्बत निवासी मोहम्मद खान का नाम नई लिस्ट में शामिल किया गया है. आरोप है कि उसने आतंकियों को मुंबई तक पहुंचाने के लिए ‘अल-हुसैनी’ नाव उपलब्ध कराई थी. लेकिन इस बार FIA ने उसकी तस्वीर के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा से उसके संबंध और हमले में उसकी भूमिका का विवरण हटा दिया है।  इसी तरह बहावलनगर निवासी लश्कर-ए-तैयबा आतंकी अब्दुल रहमान का नाम भी लिस्ट में है, लेकिन उसकी फोटो और आतंकी संगठन से जुड़े होने की जानकारी हटा दी गई है. 2021 की लिस्ट में दोनों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26/11 हमले में उनकी भूमिका की जानकारी दी गई थी।  दो नावों से आतंकियों को समुद्र के रास्ते पहुंचाया FIA की मौजूदा लिस्ट में उन 11 आतंकियों के नाम भी हैं, जिन पर 26/11 के हमलावरों को समुद्र के रास्ते आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप है. बताया गया है कि आतंकियों को ‘अल-हुसैनी’ और ‘अल-फौज’ नाम की दो नावों के जरिए समुद्र पार कराया गया था।  इन 11 लोगों में मुल्तान के मोहम्मद अमजद खान, बहावलपुर के शाहिद गफूर, साहीवाल के मोहम्मद उस्मान, लाहौर के अतीक उर रहमान, हाफिजाबाद के रियाज अहमद, गुजरांवाला के मोहम्मद मुश्ताक, डेरा गाजी खान के … Read more

राजनाथ सिंह ने स्वागत में मिला चांदी का मुकुट लौटाया, बोले- इसे गरीब बेटी की पायल के लिए इस्तेमाल करें

 आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।  'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे' सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है।  उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।  'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते' रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है।  'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया' राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा।  सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना। खटीक समाज की तारीफ 1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था। खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे। यूपी तेजी से विकास कर रहा आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे। अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उज्जैन-रतलाम समेत 7 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पश्चिमी हिस्से में बने मौसम तंत्र के असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग के कई इलाकों में बारिश का दौर चला। बड़वानी में नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए, जबकि रतलाम, मुरैना, शाजापुर, झाबुआ, खरगोन और खंडवा में भी तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में निम्न दाब क्षेत्र के साथ द्रोणिका सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। जिन इलाकों में पिछले दिनों बारिश की कमी बनी हुई थी, वहां भी अब बारिश का दौर पहुंचा है। सोमवार को उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना और श्योपुर में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, झाबुआ, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, रीवा, सतना, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।  नदी-नाले उफने, बांध के गेट खुले रविवार को बड़वानी के सेंधवा क्षेत्र में रुक-रुककर तेज बारिश होती रही। कई नदी-नालों और तालाबों का जलस्तर बढ़ गया। रलावती का बड़ा तालाब भी ओवरफ्लो हो गया।टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के चार गेट खोलने पड़े। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद, खंडवा, महू, ओंकारेश्वर और रतलाम में भी तेज बारिश हुई। भोपाल में भी बारिश के असर से जलाशयों में पानी बढ़ा। रविवार रात कलियासोत डैम के तीन गेट खोले गए। 15 सितंबर से बारिश की रफ्तार घटने के संकेत मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 14 सितंबर को भी पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। निम्न दाब क्षेत्र के राजस्थान-गुजरात की ओर बढ़ने के दौरान पश्चिमी जिलों में इसका असर बना रहेगा। हालांकि 15 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता और दायरा धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अगले सात दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूबे रविवार को भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा में नदी-नाले और तालाब उफान पर रहे। रलावती में जिले का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया। मुरैना में चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूब गए। दोनों बाबू महाराज मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद और खंडवा में भी मूसलधार बारिश हुई। टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के 4 गेट खोल दिए गए। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। महू, ओंकारेश्वर, रतलाम समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। 32 जिलों में अब भी बारिश की कमी प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में स्थिति पिछले सप्ताह की तुलना में सुधरी है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2 से 25 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। पश्चिमी हिस्से में कमी ज्यादा है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7 से 52 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।  झोंकेदार हवा से सावधान मौसम विभाग ने आगे बताया कि प्रदेश के शेष जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलेगी. इस दौरान खुले में, टिन शेड, हल्की नुकीली या धारदार वस्तुओं आदि के आसपास न खड़े हों।  MP में क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक मजबूत कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के साथ पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. मानसून ट्रफ इस वक्त मध्य प्रदेश के बीच से गुजर रहा है. इसी के चलते प्रदेश में अभी भी बारिश का माहौल बना हुआ है. माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक मानसून राज्य से विदा हो सकता है। 

फर्जी पासपोर्ट कांड में STF का बड़ा एक्शन, 12 अफसरों पर शक; मास्टरमाइंड रियाल के अलग-अलग शहरों से 4 पासपोर्ट

 ग्वालियर प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल के 12 पुलिस अधिकारियों व अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो अब STF की रडार पर हैं। साल 2021 में बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने का यह खेल ग्वालियर के डबरा से शुरू हुआ था। 17 फर्जी पासपोर्ट्स पर एक ही गवाह, एक ही पता और एक ही मोबाइल नंबर होने के बावजूद पुलिस को भनक तक नहीं लगी, जिससे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस समय ग्वालियर डबरा थाना प्रभारी के रूप में विनायक शुक्ला व थाना पर पासपोर्ट वैरीफिकेशन सेल का इंचार्ज प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुर्जर हुआ करता था। इन दोनों से एसटीएफ जल्द तलब कर पूछताछ करेगी। विदेश मंत्रालय ने 3 साल पहले (2023 में) PHQ को चेताया था रैकेट की पैठ भोपाल से डबरा तक फैली हुई थी। विदेश मंत्रालय ने 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) को रिपोर्ट भेजकर फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के प्रति आगाह किया था। इसके बाद भी पीएचक्यू से कोई ठोस संदेश जारी नहीं किया गया। जिसका नतीजा यह रहा कि आज इन 70 बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेज व पासपोर्ट ने पूरे देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। 100 के पार पहुंच सकती है संख्या प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट की संख्या 100 के पार जाने की आशंका है। क्योंकि एसटीएफ को कुछ और भी संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही साल 2021-22 और उसके बाद के दो साल में डबरा सहित इन शहरों से जितने पासपोर्ट बने हैं उनमें कई संदिग्ध की श्रेणी में आ रहे हैं। एसटीएफ की पांच टीम मध्य प्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। रैकेट का मुख्य नेटवर्क ग्वालियर और भोपाल में सक्रिय था। भोपाल के गोविंदपुरा के एक ही पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट के आवेदन तैयार कर अलग-अलग जिलों के पासपोर्ट सेल में वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते रहे और पासपोर्ट बनते रहे। इसी तरह दूसरा सबसे बड़ा गढ़ ग्वालियर का डबरा रहा था। यहां से एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के भारतीय दस्तावेज बने और पासपोर्ट तैयार हुए। आवेदन आने से पहले ही थाने में बजती थी घंटी- 'अर्जेंट है, जल्दी निकालो' स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन वेरिफिकेशन के लिए डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन आ जाता था। थाने में कहा जाता था आवेदन अर्जेंट है, इसे जल्दी क्लियर करके निकालो। एक फोन कॉल पर पासपोर्ट आनन-फानन में वैरिफिकेशन कर निकाल दिया जाता था। अब तक यह चार पकड़े गए बांग्लादेशियों के मध्य प्रदेश से फर्जी पासपोर्ट कांड में मास्टर माइंड रियाल चौधरी, जाय चौधरी बरुआ, महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़ा गया प्रियान राय और विप्लव अधिकारी को साउथ दिल्ली से पकड़ा था। अब तक यह चार पकड़े गए हैं। जबकि 08 की तलाश में एसटीएफ की अलग-अलग टीम दबिश दे रही हैं। जांच के घेरे में तत्कालीन TI व आरक्षक जिस अवधि (2021) में डबरा से ये फर्जी पासपोर्ट वेरीफाई हुए, उस दौरान विनायक शुक्ला (वर्तमान में दतिया में DSP) डबरा थाना प्रभारी थे, जबकि पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल का जिम्मा प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास था। कुछ समय के लिए सुरेंद्र सिंह भी थाना प्रभारी रहे। STF यह पता लगा रही है कि थाने में पहले से फोन कौन करता था और उसे आवेदनों की गुप्त जानकारी कैसे मिलती थी। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी के खुद के बने थे 4 फर्जी पासपोर्ट एसटीएफ और पुलिस की पूछताछ में रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रियाल चौधरी के खुद के 4 पासपोर्ट बने हैं और चारों में ही फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। उसने डबरा के दो स्थानीय दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, रियाल से पूछताछ के आधार पर 5 अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए भेजी गई हैं। बौद्ध विहार के एक भिक्षु के तीन अलग-अलग नाम आए थे सामने बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने के मामले में खुलासा हुआ है। डबरा के जिस बुद्ध विहार के पते से 17 बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के भिक्षु के ही तीन अलग-अलग नाम सामने आए हैं। आधार कार्ड में नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा है। आधार में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का है। वहीं वोटर आईडी में उनका नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। इस पर उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही बौद्ध धर्म अपनाया है। धर्म अपनाने के बाद नाम संघप्रिय रखा गया। इस पर कुछ नहीं कहा कि नया नाम मिलने पर क्या दस्तावेज भी बदल जाते हैं। मठों में कौन आया और कौन गया… बौद्ध मठ का कोई रिकॉर्ड ही नहीं, इसलिए अब वह जांच के घेरे में हैं। STF की जांच में एक और गंभीर बात सामने आई है। बुद्ध मठों में आने-जाने वाले लोगों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। मठ में कौन आया, कहां से आया, कितने दिन रुका और कब चला गया, इसका हिसाब नहीं है। संदेह के आधार पर मठों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एमपी के बाहर दबिश दे रहीं पांच टीम इस मामले में एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले में हमारी पांच टीम मध्यप्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। साथ ही पांच साल में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज बनाने से लेकर पासपोर्ट वैरीफिकेशन तक कई विभागों और पुलिस थानों तक यह फाइल पहुंचीं। इनसे जुड़े पुलिस अफसर, पुलिसकर्मी व अन्य विभाग के कर्मचारियों की सूची बनाई है। सभी हमारी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी। कई आरोपियों के दो से तीन दस्तावेज भी मिले हैं।