samacharsecretary.com

प्रदर्शन के दौरान NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष घायल, पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष का हमला

भोपाल नीट (NEET) पेपर लीक मामले के विरोध में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वॉटर कैनन का उपयोग कर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसक झड़प में NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए 'सिद्धांत' हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स नीट परीक्षा में हुई विसंगतियों और पेपर लीक के खिलाफ एनएसयूआई द्वारा आयोजित इस उग्र प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही मजबूत बैरिकेड्स लगा रखे थे। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने के लिए इन बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर किए गए लाठीचार्ज में प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार को गंभीर चोटें आईं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की गिरफ्तारी इस बड़े विरोध-प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पुलिस ने विधिक हिरासत में लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के इस आंदोलन को वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का पूरा विधिक समर्थन मिल रहा था, जिसके चलते पेपर लीक मामले के विरोध में हुई इस गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है।  

शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा तेलीबांधा में आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में हुए शामिल

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज  गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

आर्मी चीफ का बड़ा बयान, बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया भारत क्या कर सकता है

नई दिल्ली आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह तय कर दिया है कि उकसावे पर भारत किस तरह जवाब देता है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पासिंग आउट कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए इस उच्च मानक को हमेशा बनाए रखें। पुणे के खडकवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, "आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया और एक बेंचमार्क स्थापित किया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है तो भारत उकसावे का कैसा जवाब देता है। अब इस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है।" तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी नींव एनडीए में रखी जाती है। उन्होंने कैडेट्स से कहा, "ऑपरेशन सिंदूर में आपने जो एकीकृत प्रतिक्रिया देखी, वह ठीक उसी नींव पर बनी थी जो एनडीए तैयार करता है। यहां संयुक्तता केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने की एक प्रवृत्ति है।" 42 साल बाद अकादमी लौटे सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में परेड की समीक्षा की, जहां 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इस पासिंग आउट बैच में 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद खास है क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। आपको बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के कैडेट रह चुके हैं। उन्होंने कहा, "42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए गर्व की बात है। इसी संस्थान ने मेरे मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है।"

“कमजोर के आगे कोई नहीं झुकता”, नौसेना शौर्य वाटिका लोकार्पण में सीएम योगी का बड़ा संदेश

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत होंगे तो दुनिया भी मैत्री करेगी। कमजोर के आगे कोई नहीं झुकता। हम जब अधूरी बात कहते हैं तो वह अर्थ का अनर्थ करता है, इसलिए पूरी बात कहना सीखें। भारत की ऋषि परंपरा प्रेरणा देती है कि अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च यानी सामान्य जीवन में अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म होना चाहिए, लेकिन सामने वाला देश व समाज की सुरक्षा के लिए खतरा है तो उसके लिए अंततः हिंसा ही अपनानी पड़ेगी। देश के दुश्मन के साथ यही हमारा धर्म है और भारतीय सेना पूरी मजबूती के साथ यह करती है। सीएम योगी शनिवार को राजधानी में 19 करोड़ रुपये की लागत से 2 एकड़ से अधिक क्षेत्र में निर्मित नौसेना शौर्य वाटिका (नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण) के लोकार्पण अवसर पर उपस्थित सैन्य अधिकारियों, कार्मिकों व जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री के साथ इस वाटिका का उद्घाटन किया। आकाश की ऊंचाइयां छूने के लिए बड़ी सोच चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सोच बड़ी होती है और व्यक्ति बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है तो सकारात्मक परिणाम आता है, जो युवाओं को नई प्रेरणा प्रदान करता है। इस वाटिका में आने वालों को भारतीय नौसेना के बारे में जानकारी मिलेगी। हमारे सैनिक किन सम-विषम परिस्थितियों में कार्य करते हैं, यह भी जानने का अवसर मिलेगा। यह जानकारी युवाओं के जीवन में चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा होगी। नौसेना का लक्ष्य उसकी विराट सोच का प्रतीक है। सीएम ने आदर्श वाक्य “नभः स्पृशं दीप्तम्” का जिक्र किया और कहा कि आकाश की ऊंचाइयां छूने के लिए बड़ी सोच भी चाहिए। संकुचित सोच या भाव से बड़े लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। जब सैनिक सीमा की रक्षा करते हैं, तब 140 करोड़ भारतवासी चैन से सोते हैं सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने विकसित भारत की संकल्पना को रखा है। उन्होंने हर भारतवासी को पंचप्रण के साथ जुड़ने के लिए कहा है। हमारे मन में सेना व यूनिफॉर्मधारी फोर्स के प्रति सम्मान का भाव हो। जब भारतीय सैनिक माइनस डिग्री टेंपरेचर, रेगिस्तान की झुलसाने वाली गर्मी और समुद्र की लहरों का मुकाबला करते हुए सीमाओं की रक्षा करता है, तब 140 करोड़ भारतवासी चैन की नींद सोते हैं। सुरक्षा के माहौल में ही विकास संभव सीएम योगी ने कहा कि सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही जन-कल्याण एवं विकास योजनाएं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकती हैं। 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में रोज कर्फ्यू लगता था, पेशेवर माफिया व अपराधियों ने जीना हराम कर दिया था। असुरक्षित वातावरण में विकास व निवेश की संभावनाएं क्षीण हो गई थीं। लेकिन, जब हमारे सैनिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं तो नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वे सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव रखें। एक तरफ राष्ट्र प्रेरणास्थल तो दूसरी तरफ नौसेना म्यूजियम मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में एक तरफ राष्ट्र प्रेरणास्थल है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री ने 25 दिसंबर को किया था तो दूसरी तरफ नौसेना म्यूजियम के रूप में भारतीय सेना के शौर्य व पराक्रम का अद्भुत केंद्र यहां प्राप्त हुआ है। अभी इसका विस्तार भी होगा। सेना के निष्प्रयोज्य टैंक महत्वपूर्ण चौराहों पर रखे जाने चाहिए सीएम ने कहा कि रक्षा मंत्री जी कह रहे थे कि प्रदेश में भारतीय सेना से जुड़े अन्य कार्यों के लिए तत्काल प्रस्ताव दिए जाएं। मेरा मानना है कि महत्वपूर्ण चौराहों पर भारतीय सेना के वे टैंक ऱखे जाने चाहिए, जो अब वर्किंग कंडीशन में नहीं हैं। इन्हें जो भी देखेगा, उसके मन में भारतीय सेना में जाने और सेना के प्रति सम्मान का भाव पैदा होगा। उसे राष्ट्रभक्ति की नई प्रेरणा प्राप्त होगी, क्योंकि राष्ट्रभक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता। नौसेना अध्यक्ष व उनकी टीम के प्रति जताया आभार सीएम ने रक्षा मंत्री की प्रेरणा और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर सुव्यवस्थित ढंग से समय सीमा के अंदर कार्य पूरा कराने के लिए नौसेना अध्यक्ष व उनकी टीम के प्रति आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ आने वाला हर व्यक्ति भारत की परंपरा, विरासत, सुरक्षा से जुड़े इस नौसेना वाटिका केंद्र का भ्रमण कर गौरव की अनुभूति कर सकता है। यह केंद्र प्रदेश के युवाओं को नई सोच के साथ देखने, सुनने व जानने का अवसर प्रदान कर रहा है। आईएनएस गोमती ने लंबे समय तक भारतीय नौसेना के माध्यम से भारत की समुद्री सीमा की रक्षा की। 2022 में उसे नौसेना से निवृत्त किया गया और उसका बेहतरीन उपयोग करते हुए लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती नदी के तट पर स्थापित किया गया।

आग लगते ही मची अफरा-तफरी, अभिनेता Ashutosh Rana समेत कलाकारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

जबलपुर  शक्ति भवन स्थित तरंग ओडिटोरियम शनिवार की शाम करीब सात बजे उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शार्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग लगते हैं लाइट बंद हो गई और ओडिटोरियम सहित परिसर में अंधेरा छा गया। आग लगने और कक्ष से धुआं निकलता देख दर्शक और कलाकार बाहर की तरफ भागने लगे। आयोजकों ने मोबाइल के टार्च की रोशनी अभिनेता आशुतोष राणा सहित मंडली के अन्य कलाकारों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं नगर निगम के फायर बिग्रेड को भी सूचना दी गई। ग्रीन रूम में लगी आग प्रत्यक्षदर्शियों के दौरान शनिवार की ‘ हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शाम करीब सात बजे ग्रीन के पास पास शार्ट सर्किट से आग लग गई। बिजली भी बंद हो गई। आग धीरे-धीरे भड़कने लगी और पूरे ग्रीन सहित आस-पास धुआं का गुबार छा गया। बिजली गुल होने आग लगने से आयोजन स्थल में अफरातफरी मच गई। दर्शक सीट छोड़कर बाहर आ गए। पर्याप्त नही थे अग्नि सुरक्षा के इंतजाम प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तरंगा ओडिटोरियम में आग से बचाव के सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त नही थे। आयोजक व ओडिटोरियम के कर्मचारियों ने मौजूद अग्निशमन संयंत्रों से आग बुझाने की कोशिश की परंतु सफलता नही मिली। नगर निगम के फायर बिग्रेड ने सूचना मिलते ही एक दमकल वाहन रवाना किया। दमकल कर्मियों कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। गनीमत रही कि आग भड़की नही वरना बड़े हादसे भी इंकार नही किया जा सकता।  

सीमा सुरक्षा पर बड़ा सवाल! 600 किमी का डार्क जोन बना घुसपैठ का नया कॉरिडोर

 नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा दुनिया की सबसे लंबी और जटिल सीमाओं में से एक है. कुल 4,096 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर लगभग 600 किलोमीटर का इलाका अभी भी डार्क जोन बना हुआ है. इन इलाकों में पर्याप्त बाड़बंदी नहीं है. रोशनी कम है. मोबाइल नेटवर्क कमजोर है. इलाका नदियों, दलदल और घने इलाकों से भरा है. यही जगह घुसपैठियों, तस्करों और अन्य संदिग्ध तत्वों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन गई है।  1947 के विभाजन के समय रेडक्लिफ लाइन से बनी यह सीमा 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद तय हुई.  सीमा का ज्यादातर हिस्सा घनी आबादी वाले इलाकों, खेतों, नदियों और गांवों से गुजरता है. दोनों तरफ परिवार बंटे हुए हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में लोग सीमा पार करते हैं. इससे सीमा पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो जाता है. पहले चिटमहल (एन्क्लेव) की समस्या थी, जिसे 2015 के लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट से ज्यादातर सुलझा लिया गया. लेकिन अब भी सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं।  600 किलोमीटर डार्क जोन कहां है? यह डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में है. राज्य की कुल 2,217 किलोमीटर सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, लेकिन लगभग 600 किलोमीटर अभी बिना बाड़ का है।  क्या है यह 600 किलोमीटर का 'डार्क जोन' और यह कहां स्थित है? भारत-बांग्लादेश सीमा पांच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है…     पश्चिम बंगाल: 2,217 किलोमीटर (सबसे लंबी सीमा)     त्रिपुरा: 856 किलोमीटर     मेघालय: 443 किलोमीटर     असम: 262 किलोमीटर     मिजोरम: 318 किलोमीटर यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में फैला हुआ है. पश्चिम बंगाल की 2217 किमी लंबी सीमा में से लगभग 1600 किमी पर किसी न किसी रूप में बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन लगभग 550 से 600 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला या असुरक्षित है।  यह डार्क जोन विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों और जिलों में मौजूद है…      मुर्शिदाबाद और मालदा: इन जिलों में गंगा और पद्मा जैसी नदियां बहती हैं. नदी के बहाव के कारण यहां जमीन स्थिर नहीं रहती, जिससे पक्की बाड़ लगाना असंभव हो जाता है।      उत्तर और दक्षिण 24 परगना: सुंदरबन का दलदली इलाका और इछामती जैसी इकरूखी नदियां इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बनाती हैं।      कूचबिहार और जलपाईगुड़ी: उत्तरी बंगाल के इन जिलों में कई ऐसे गांव हैं जो ठीक जीरो लाइन (अंतर्राष्ट्रीय सीमा) पर बसे हैं, जहां बाड़ लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करना एक बड़ी चुनौती रहा है।  इसे 'डार्क जोन' क्यों कहा जाता है? इसे डार्क जोन कहने के पीछे केवल रात का अंधेरा ही एकमात्र कारण नहीं है. इसके कई तकनीकी और भौगोलिक कारण हैं…      नदी तटीय क्षेत्र (Riverine Terrain): जब नदियां अपना रास्ता बदलती हैं, तो पहले से लगाई गई बाड़ बह जाती है. पानी के बीच में खंभे गाड़ना व्यावहारिक नहीं होता।      खराब मोबाइल और संचार नेटवर्क: इन सुदूर इलाकों में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल बेहद कमजोर या न के बराबर हैं, जिससे सुरक्षा बलों को समय पर खुफिया जानकारी साझा करने में दिक्कत आती है।      फ्लडलाइट्स की कमी: कई दुर्गम और दलदली पैच ऐसे हैं जहां बिजली के खंभे और हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स लगाना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाया है।      सघन आबादी (Zero Line Villages): कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा लोगों के घरों के पीछे के आंगन या खेतों से होकर गुजरती है. ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन स्थानीय नागरिक है. कौन घुसपैठिया।  नदियों और दलदलों वाले करीब 175 किलोमीटर इलाके में पारंपरिक बाड़ लगाना लगभग नामुमकिन है. यही जगह घुसपैठ और तस्करी के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है।  वहां किस तरह की घुसपैठ होती है? डार्क जोन से कई तरह की अनधिकृत गतिविधियां होती हैं…     अवैध प्रवासन (Illegal Migration): आर्थिक मजबूरियों या अन्य कारणों से लोग रात के अंधेरे में घुसते हैं. वे पश्चिम बंगाल, असम आदि में बस जाते हैं. जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं।      तस्करी (Smuggling): सबसे बड़ा कारोबार. भारत से बांग्लादेश में गाय तस्करी, फेक इंडियन करेंसी (FICN), ड्रग्स (याबा, फेंसिडिल), सोना और हथियार. नदी वाले इलाकों में नावों से रात में तस्करी आसान होती है।      मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों को मजदूरी, जबरन शादी या शोषण के लिए ले जाया जाता है।      सुरक्षा खतरे: कभी-कभी चरमपंथी तत्व, जासूस या अपराधी भी घुसते हैं. डेमोग्राफिक चेंज और कट्टरपंथ की आशंका बढ़ रही है।      छोटी-मोटी घटनाएं: चोरी, अवैध व्यापार आदि. BSF हर साल हजारों प्रयासों को नाकाम करता है, लेकिन कुछ सफल हो जाते हैं. हाल के वर्षों में प्रयास बढ़े हैं।  भारत की तरफ: सीमा सुरक्षा बल (BSF) भारत की ओर से इस सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कंधों पर है. BSF के जवान इस डार्क जोन में निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम करते हैं…  चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग: पैदल गश्त के साथ-साथ नदी वाले इलाकों में BSF 'वाटर विंग' की स्पीड बोट और फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट्स (Floating BOPs) के जरिए गश्त करती है।  तकनीकी समाधान (Smart Fencing): जहां पारंपरिक कंटीली बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां BSF अब Comprehensive Integrated Border Management System (CIBMS) का उपयोग कर रही है. इसमें लेजर दीवारें (Laser Walls), थर्मल इमेजर, अंडरवाटर सेंसर और इंफ्रा-रेड कैमरे शामिल हैं, जो अंधेरे या कोहरे में भी हलचल को पकड़ लेते हैं।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम: आसमान से निगरानी रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. साथ ही, सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों को मार गिराने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक भी तैनात की जा रही है।  स्थानीय प्रशासन से समन्वय: सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज किया है, ताकि BSF को नई चौकियां (BOPs) बनाने और बचे हुए हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जमीन मिल सके।  बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है। बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश … Read more

गर्मी से राहत लेने निकले लोग, मनाली से चारधाम तक सड़कों पर रेंगती दिखीं गाड़ियां

 मनाली/नैनीताल/चमोली उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है।  पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं।  मनाली-रोहतांग मार्ग पर थमी रफ्तार हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई का महीना खत्म होने के बावजूद रोहतांग में बर्फ मौजूद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भीड़ का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में करीब 50 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा हो जाता है, लेकिन इन दिनों यही दूरी तय करने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं। कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि रास्ते में कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे जाम और बढ़ जाता है। स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। नैनीताल में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उत्तराखंड के नैनीताल में भी इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ है। वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। माल रोड, स्नो व्यू, केव गार्डन और चिड़ियाघर जैसे स्थानों पर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। नैनी झील में बोटिंग के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक झील के आसपास पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका फायदा स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटन कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ के कारण शहर की सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में काफी समय लग रहा है। कैंचीधाम में भी बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस कार्यक्रम को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ा दबाव चारधाम यात्रा के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली और माणा-नीति घाटी जाने वाले मार्गों पर लंबी वाहन कतारें देखी जा रही हैं। जोशीमठ क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। लोगों को घंटों तक सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी भी नहीं रोक पा रही भीड़ ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। कई जगह हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले रास्तों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए पहाड़ सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि लोग लंबी यात्रा और जाम की परेशानी के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

मंत्री पटेल बोले- स्वच्छ और सुरक्षित रहें नदियों के स्रोत, तभी बचेगा पर्यावरण

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल अमरकंटक धाम में तीन दिवसीय ‘स्वच्छता व कुण्ड सेवा अभियान में स्वयं किया श्रमदान भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि माँ नर्मदा केवल आस्था की प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। हमारी नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक को अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। मंत्री पटेल ने यह विचार अमरकंटक धाम स्थित माँ नर्मदा नदी के पावन उद्गम स्थल पर 29 से 31 मई तक आयोजित इस विशेष स्वच्छता अभियान में श्रमदान के दौरान व्यक्त कियें। मंत्री पटेल ने विशेष बल देते हुए कहा कि नदियों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार है, क्योंकि यदि आज हम जल स्रोतों और उद्गम स्थलों को संरक्षित करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी। मंत्री पटेल ने स्वयं उपस्थित होकर जनभागीदारी के साथ सक्रिय रूप से श्रमदान किया। 'मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन' एवं 'निर्विकार पथ' के सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर उद्गम और कुण्ड क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण तथा सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया, जिससे यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लंबे समय से जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के माध्यम से पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और जनजागरण के कार्यों को व्यापक गति मिली है। अमरकंटक में माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पर किया गया यह श्रमदान उसी पर्यावरण-संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा और जनसहभागिता से जल संरक्षण के इस प्रयास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।  

IPL में धमाकेदार प्रदर्शन का मिला इनाम, वैभव सूर्यवंशी बने झारखंड का नया चेहरा

रांची. क्रिकेट जगत में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी, अद्भुत प्रतिभा और कम उम्र में ही पूरे देश को प्रभावित करने वाले युवा क्रिकेट सितारे वैभव सूर्यवंशी को झारखंड का स्वास्थ्य विभाग सम्मानित करने के साथ-साथ विभाग का ब्रांड एंबेसडर भी बनाएगा। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि भले ही वैभव की टीम मैच हार गई हो, लेकिन उन्होंने करोड़ों भारतीयों का दिल जीता है। इतनी कम उम्र में बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज़ों का जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता से सामना करते हुए लगातार धुनाई करना, यह असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। वैभव ने केवल अपना नाम ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, बिहार और पूरे हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है। इसके लिए दिल से बधाई देते हुए मंत्री ने कहा है कि जल्द ही उन्हें झारखंड में सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। वैभव सूर्यवंशी ने करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन का संदेश देंगे वैभव स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। एमएस धोनी भी रह चुके हैं ब्रांड एंबेसडर इससे पहले रांची के युवराज और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी झारखंड के विभिन्न विभागों के ब्रांड एंबेसडर रह चुके हैं। उन्हें राज्य सरकार की ओर से इनाम के अलावा आवासीय भूखंड समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। करोड़ों युवाओं की प्रेरणा बताया डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मात्र 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वैभव आने वाले समय में भारत का नाम विश्व क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे और देश को उन पर लंबे समय तक गर्व रहेगा।  

सुरक्षाबलों पर हमले की थी तैयारी! दिल्ली में ISI मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 आरोपी दबोचे गए

 नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया है। एनडीआर ने ऐसे 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो पाकिस्तानी आईएसआई और मुंबई अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहे थे। इन सभी लोगों को दिल्ली की खास जगहों और सुरक्षा बलों पर हमला करने का काम दिया गया था। पुलिस ने इनके पास से कई हथियार और बारूद भी बरामद किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से जुड़े 9 लोगों को दिल्ली में अलग-अलग जगह हमले का काम सौंपा गया था। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में खूफिया जानकारी मिलने के बाद ऑपरेशन चलाया गया था जिनमें इन आरोपियों को दबोच लिया गया। इसके लिए पिछले कुछ समय से मॉड्यूल पर नजर रखी जा रही थी। संवेदनशील इलाकों पर करने वाले थे हमला आरोप है कि गिरफ्तार किए गए नौ सदस्य पाकिस्तान की जासूसी एजेंसियों, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस और मुंबई के अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्हें दिल्ली में संवेदनशील ठिकानों पर हमले करने का काम सौंपा गया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपी दिल्ली, मुंबई और पंजाब के रहने वाले हैं। इनमें से कुछ विदेशी नागरिक भी हैं। आतंकवादियों के निशाने पर प्रमुख प्रतिष्ठान सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के निशाने पर दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाएं थीं. संभावित लक्ष्यों में पावर प्लांट, बिजली उत्पादन एवं वितरण केंद्र, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल थे. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन ठिकानों पर हमला कर व्यापक जनहानि के साथ-साथ देश की आवश्यक सेवाओं को बाधित करने की साजिश रची जा रही थी।  जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद विस्फोटक सामग्री कथित तौर पर सीमा पार से भारत पहुंचाई गई थी. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटकों और हथियारों की खेप देश के भीतर किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. बरामद सामग्री में ग्रेनेड और कई अत्याधुनिक विदेशी हथियार शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।  गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है. जांच एजेंसियां उनके डिजिटल उपकरणों, संचार माध्यमों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना, फंडिंग और विदेशी संपर्कों का पता लगाया जा सके. दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (स्पेशल सेल) मामले को लेकर पुलिस मुख्यालय में प्रेस ब्रीफिंग करेंगे, जिसमें ऑपरेशन की पूरी जानकारी, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और बरामद हथियारों एवं विस्फोटकों से जुड़े विवरण साझा किए जाने की संभावना है।  सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता है, क्योंकि इससे एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके तार कथित तौर पर पाकिस्तान की आईएसआई, दुबई आधारित ऑपरेटरों और अंडरवर्ल्ड से जुड़े तत्वों तक पहुंचते हैं. हालांकि जांच अभी जारी है और कई तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की विस्तृत ब्रीफिंग के बाद ही हो सकेगी।  हाई अलर्ट पर दिल्ली खूफिया एजेंसियों से आतंकी हमले की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक इस महीने की शुरुआथ में ही सुरक्षा एजेंसियों को हमले की खूफिया जानकारी मिली थी। इसमें बताया गया था कि आतंकी सेंट्रल दिल्ली की संवेदनशील जगहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बना सकते हैं। इसके लिए वे आत्मघाती हमले, गाड़ियों में IED धमाके, गोलीबारी या कई जगहों पर हमले की साजिश रच रहे हैं। इसके बाद से ही दिल्ली पुलिस इस मॉड्यूल पर नजर बनाए रखी हुई थी। हालात देखते हुए दिल्ली के सभी थानों और जिलों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही, उन्हें खुफिया एजेंसियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा गया है। विदेश में बैठकर कौन रच रहा हमले की साजिश? दिल्ली पुलिस अब इस नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाने और अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। इसके अलावा इतनी भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक कहां से मिले, इसका भी पता लगाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग के तार विदेश से कैसे जुड़े हैं और हमलों के लिए फंडिंग कहां से हो रही है। इसके अलावा विदेश में बैठे कौन-कौन से लोग इन्हें ऑर्डर दे रहे हैं।