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बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार गठन की तैयारी तेज

तमिलनाडु  TVK प्रमुख विजय ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। तीन दिनों में विजय की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाकात है। पहले दो बार में राज्यपाल ने विजय को जरूरी बहुमत का आंकड़ा लाने के लिए कहा था। पहले सिर्फ कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया था। अब सीपीआई, सीपीआईएम, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विजय की टीवीके का समर्थन करने का फैसला किया है। इसके बाद, विजय के पास 120 की संख्या हो गई है। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल दोनों वामपंथी दलों- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कहा कि यह (समर्थन देने का) निर्णय भाजपा को राज्य में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने से रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्य के अधिकारों के मामले में वे (वाम दल) डीएमके के साथ बने रहेंगे। वाम दलों ने घोषणा की कि वे टीवीके मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे। दोनों के दो-दो विधायक हैं। उन्होंने दिनभर की चर्चा के बाद अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उनके समर्थन के साथ, टीवीके प्रमुख ने बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने के अपने दावे को दोहराया। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की 108 सीटें हैं, लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। टीवीके ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सहयोगी वामदलों, और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) से संपर्क किया था तथा 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके, प्रत्येक के दो-दो विधायक हैं। वाम दलों ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में टीवीके को अपना समर्थन देने की जानकारी दी। पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन दे दिया है। विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पार्टी संस्थापक विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक को छोड़ना होगा। विजय को चेन्नई के पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीटों में से एक को छोड़ना पड़ेगा।

रेडक्रॉस की सेवाओं और मिशन से जनता को करें प्रेरित, राज्यपाल पटेल का आह्वान

रेडक्रॉस के उद्देश्य और सेवा कार्यों से जन-जन को करें प्रेरित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने विश्व रेडक्रॉस दिवस पर प्रदान किए "सेवा सम्मान" भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा, ईश्वर की सेवा का सशक्त माध्यम है। मानवता की सेवा ही प्रभु की सेवा है। अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार ग़रीब, वंचित और ज़रूरतमंदों की हमेशा मदद करते रहे। उन्होंने कहा कि सेवा का दायरा बहुत विस्तृत है। रेडक्रॉस सदस्य दूरस्थ, ग्रामीण इलाकों जाकर जरूरतमंदों से मिले, उनकी समस्याओं को करीब से देखें, समझे और यथा संभव समाधान के आत्मीय प्रयास करें। हर सदस्य कम से कम 5 व्यक्तियों को रेडक्रॉस से जोड़े। राज्यपाल पटेल ने रेडक्रॉस के सिद्धांतों, उद्देश्यों और कार्यों से जन-जन को प्रेरित करने का आह्वान किया। पीड़ित मानवता के प्रति रेडक्रॉस के संवेदनशील समर्पण से प्रेरणा लेने, वंचितों के उत्थान में सहभागी बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की युवाओं से अपील की। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को विश्व रेडक्रॉस दिवस पर आयोजित "सेवा सम्मान समारोह" को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रेडक्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यू-नॉट के जन्म दिवस पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। समर्पित कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समाज सेवी संस्थाओं को सम्मानित किया। मानवता की सेवा कार्यों और प्रयासों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सभी सम्मानित जनों को सम्पूर्ण समाज के सच्चे नायक और प्रेरणा स्रोत बताया। मध्यप्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (मेपकास्ट) परिसर में किया गया। रेडक्रॉस की सीख कर्मों में भी झलकनी चाहिए राज्यपाल पटेल ने कहा कि विश्व रेडक्रॉस दिवस, मात्र एक दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, करुणा और समर्पण की निरंतर प्रवाहित धारा का स्मरण है। युद्ध के मैदान में पीड़ा देख कर लिया गया संकल्प, आज पीड़ित मानवता की सेवा का वैश्विक आंदोलन बन गया है, जो हमें बताता है कि "सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।“ उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस के 7 मूल सिद्धांत- मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सर्व व्यापकता,  जीवन जीने के सच्चे मार्गदर्शक हैं। इनका मन, वचन और कर्म से 365 दिन पालन ही, समावेशी समाज निर्माण के संकल्प को सिद्ध करने का प्रभावी तरीका है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस की सीख, शब्दों तक सीमित नहीं हो, यह हमारे कर्मों में भी झलकनी चाहिए। इसके लिए समाज को और अधिक संवेदनशील बनाना होगा। सम्मानित लोग, रेडक्रॉस के कार्यों में अपनी निष्ठा, समर्पण, सेवा-भाव के संस्कारों से भावी पीढ़ी को नेतृत्व प्रदान कर प्रोत्साहित करें। मानवता की सेवा के संकल्प के साथ पीड़ितों और वंचितों का दिल खोलकर सहयोग करें। मन, समय और संसाधनों से उनका साथ दें। समाज में पारस्परिक सहयोग तथा संवेदनशीलता की भावना को और अधिक सशक्त बनाएं। जन औषधि योजना हर वर्ग के लिए वरदान राज्यपाल पटेल ने कहा कि जन-औषधि योजना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अत्यंत संवेदनशील पहल है। यह योजना हर वर्ग के लिए वरदान है। उन्होंने इस अभूतपूर्व योजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में अधिक से अधिक जन-औषधि केन्द्र खोलने के प्रयास करें। इस पहल से स्थानीय युवाओं को जोड़े। उन्हें जन-औषधि केन्द्र में उपलब्ध दवाओं, गुणवत्ता और कीमतों की जानकारी दें। राज्यपाल पटेल का समारोह में मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे और वाइस चेयरमैन मनीष रावल ने शॉल एवं श्रीफल से अभिनंदन किया। चेयरमैन डॉ. कुमरे ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। आभार जनरल सेक्रेटरी रामेन्द्र सिंह ने माना। कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अमित कोठारी, डॉ. ब्रिजेश श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी की राज्य और जिला इकाई के पदाधिकारी, रेडक्रॉस सदस्य, स्वयंसेवक, सम्मान प्राप्तकर्ता और उनके परिजन उपस्थित थे।  

आत्महत्या के मामलों में बड़ी गिरावट, पंजाब में 2015 के बाद रिकॉर्ड कमी

 चंडीगढ़ खेती संकट और कर्ज के बोझ को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे पंजाब के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट राहत भरी मानी जा रही है।क्राइम इन इंडिया-2024 रिपोर्ट के अनुसार राज्य में किसान और खेतिहर मजदूर आत्महत्या के मामलों में पिछले दस वर्षों का सबसे कम आंकड़ा दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता, मुफ्त बिजली, राहत योजनाएं और फसल विविधीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों का असर आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान पंजाब में कुल 127 किसान और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की। इनमें 57 किसान और 70 खेतिहर मजदूर शामिल हैं। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 161 था। इस तरह एक साल के भीतर मामलों में करीब 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 के बाद यह सबसे कम संख्या है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए गए। किसानों को मुफ्त बिजली, फसल नुकसान पर मुआवजा, कर्ज राहत और धान-गेहूं के अलावा दूसरी फसलों की तरफ बढ़ने के लिए प्रोत्साहन जैसी योजनाओं का असर धीरे-धीरे सामने आ रहा है। यही वजह है कि खेती से जुड़े आत्महत्या मामलों में कमी दर्ज की गई। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि स्थिति को पूरी तरह सामान्य नहीं माना जा सकता। खेतिहर मजदूरों में आत्महत्या के मामलों की संख्या अब भी ज्यादा है, जो ग्रामीण आर्थिक ढांचे की कमजोर स्थिति की तरफ इशारा करती है। छोटे और सीमांत किसान अभी भी बढ़ती लागत, कर्ज और घटती आय जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में स्थिति में सुधार दर्ज हुआ है। इसके बावजूद कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास जरूरी हैं, ताकि खेती से जुड़ा संकट स्थायी रूप से कम किया जा सके।

पुष्पा साहू बनीं माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव, रोक्तिमा यादव को कोरिया कलेक्टर की कमान

रायपुर राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां जारी की हैं। इस आदेश के तहत शिक्षा और जिला स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।  वर्ष 2012 बैच की आईएएस अधिकारी  पुष्पा साहू को सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर नियुक्त किया गया है। ज्ञातव्य है कि 6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत  पुष्पा साहू को कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया था, जिसमें जिसमें आंशिक संशोधन करते हुए सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर पदस्थ किया गया है।            वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव को जिला-कोरिया का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी।  6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत श्रीमती रोक्तिमा यादव, द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया था, जिसमें आंशिक संशोधित करते हुए कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया है।          वर्ष 2019 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रीता यादव को आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया है। इसके साथ ही उन्हें प्रबंध संचालक, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उनके पदभार संभालते ही इस पद को वरिष्ठ वेतनमान के संवर्गीय पद के समकक्ष माना जाएगा।

अमित शाह ने किया ऐलान, सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री

कोलकाता  गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बंगाल के सीएम के रहस्य से पर्दा हटा दिया. उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि बंगाल के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही होंगे. साथ ही उन्होंने नाम से पहले चले मंथन के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा सदस्यों की एक मीटिंग रखी गई. उन्होंने कहा कि मुझे और मोहन चरण माझी जी (ओडिशा के सीएम) को पर्यवेक्षक के तौर पर हमें यहां भेजा गया. सभी प्रस्ताव और समर्थन एक ही नाम के मिले हैं, कोई दूसरा नाम नहीं आया है. मैं सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता के रुप में निर्वाचित करता हूं।  पश्चिम बंगाल दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के बीच अपनी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बंगाल के दुर्ग को फतह कर लिया है. प्रचंड बहुमत के साथ मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. बंगाल की कमान राज्य के कद्दावर नेता और ‘भूमिपुत्र’ सुवेंदु अधिकारी को मिलना तय माना जा रहा है. भाजपा आलाकमान की ओर से बस इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी है. साथ ही खबर ये आ रही है कि भाजपा बंगाल में कोई भी उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) नहीं बनाएगी. पार्टी का यह फैसला साफ तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास और राज्य में सत्ता के एक सशक्त केंद्र को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज इतिहास रच दिया गया है. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया. अमित शाह और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी की मौजूदगी में विधायकों ने सर्वसम्मति से शुभेंदु को अपना नेता चुना. शुभेंदु अधिकारी कल यानी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।  श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ पूरा- अमित शाह अमित शाह ने अपने संबोधन में पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विशेष जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज बंगाल की धरती पर बीजेपी की सरकार बनना डॉ. मुखर्जी के संघर्षों और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है. शाह के मुताबिक, जिस राष्ट्रवाद की नींव उन्होंने रखी थी, आज उसी पर चलकर बंगाल में पहली बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनने जा रही है।  शाम 6:30 बजे राज्यपाल से मिलेंगे शुभेंदु अधिकारी, पेश करेंगे दावा कोलकाता में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. शुभेंदु अधिकारी आज यानी शुक्रवार शाम 6:30 बजे राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे बीजेपी विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे और आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।    9 मई का दिन बंगाल के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है. इसी शुभ अवसर पर राज्य की पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु के साथ दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाने की चर्चा है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।   बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने 7 मई को राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है. कोलकाता गजट में जारी आधिकारिक अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया है कि विधानसभा को भंग करने का यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद उठाया गया है।  चुनाव के बाद प्रदेश के कई हिस्‍सों से हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं. मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल बीजेपी के दिग्‍गज नेता सुवेंदु अधिकारी के निकट सहयोगी और पीए चंद्रनाथ रथ की हत्‍या ने माहौल को और गरमा दिया है. इन सबके बीच बंगाल में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावित पहली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पार्टी का नया मंत्रिमंडल अनुभवी नेताओं और राजनीति में नए चेहरों का मिश्रण हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सबसे प्रमुख दावेदारों में माने जा रहे हैं. भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को कोलकाता में होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री मोहन चरण माझी करेंगे. चुनाव में जीत के बाद अमित शाह पहली बार बंगाल पहुंच रहे हैं।  अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंचेंगे और बैठक से पहले राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा करेंगे. शाम 4 बजे नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक होगी, जहां मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार सरकार और संगठन दोनों में वैचारिक प्रतिबद्धता तथा संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहता है. भाजपा के संभावित मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें पहली बार विधायक बनीं रत्ना देबनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं. इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ के संत रहे उत्पल महाराज, पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं. भाजपा इन चेहरों के जरिए सामाजिक और भावनात्मक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माणिकतला से विधायक तपस रॉय को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो रहा है. वहीं पार्टी महिला नेतृत्व को भी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और एक महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सभी नाम चर्चा के स्तर पर … Read more

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का बयान: निर्माणाधीन विकास कार्यों के पूरा होने से जिले का विकास तेज होगा

निर्माणाधीन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले के विकास की बढ़ेगी रफ्तार : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जर्जर शासकीय विद्यालयों को चिन्हित कर कराएं मरम्मत शहडोल जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित निर्माणाधीन विकास कार्यों में तेजी लाकर उन्हें समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना अत्यंत आवश्यक है। विकास कार्यों के पूर्ण होने से शहडोल जिले के विकास को नई गति मिलेगी। उक्त निर्देश उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री शुक्ल ने सर्किट हाउस बाणसागर में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में विभागीय अधिकारियों को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शहडोल- उमरिया मार्ग, ब्यौहारी के विजयसोता पूल निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहडोल- उमरिया मार्ग, ब्यौहारी के विजयसोता पूल, भन्नी सिंचाई परियोजना जैसे अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कलेक्टर समय-सीमा की बैठक में अनिवार्य रूप से करें एवं जल्द से जल्द पूर्ण कर आमजन को उन सुविधाओं का लाभ दिलाए। उन्होंने कहा कि स्वीकृत विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर कार्य करने की अत्यंत आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज एवं शहडोल जिले में निर्माणाधीन हेल्थ सेंटरो को यथाशीघ्र पूर्ण कर जनप्रतिनिधियों द्वारा शुभारंभ कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए की शहडोल जिले में संचालित शासकीय विद्यालय जो जर्जर हैं उन्हें सूचीबद्ध कर उनका मरम्मत कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने जिले में बनाए जा रहे सांदीपनि विद्यालय के कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर जल्द से जल्द से पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जनहित को दृष्टिगत रखते हुए जनपद पंचायत कार्यालय ब्यौहारी के सामने संचालित शराब की दुकान हटाने के निर्देश कलेक्टर को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बैठक में मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया, भू अर्जन कार्य में प्रगति, टेटका – शहडोल मार्ग की प्रगति, जयसिंहनगर बाईपास, ब्यौहारी -सपटा मार्ग, जल जीवन मिशन के कार्य, प्रगतिरत कटनी से सिंगरौली डबल रेलवे लाइन के कार्य सहित अन्य विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्यों द्वारा विकास कार्यों के लिये अपने अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। बैठक में सांसद संसदीय क्षेत्र सीधी डॉ.राजेश मिश्रा, विधायक जयसिंह मरावी, शरद कोल,श्रीमती मनीषा सिंह, कलेक्टर डॉ.केदार सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति सहित अन्य जन प्रतिनिधि, अधिकारी एवं जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य उपस्थित रहे।  

चार पार्टियों के समर्थन से सरकार गठन में विजय का रास्ता आसान, जादुई आंकड़ा पूरा

चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर जारी हलचल के बीच थलपति विजय को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है. वामपंथी दलों कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI), सीपीएम और वीसीके ने विजय की टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है. इस तरह विजय की टीवीके जो 108 सीटों के साथ बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, अब उसे बहुमत का आंकड़ा भी मिल गया है।  तो इस तरह अब 118 के जादुई आंकड़ों पर बात करें तो विजय के पास 108 सीटें हैं. लेकिन विजय दो सीटों पर जीते थे. वहीं कांग्रेस के समर्थन से उन्हें कांग्रेस की पांच सीटें मिल गईं. इस तरह विजय के पास 113 सीटों का आंकड़ा हुआ. अब सीपीआई के दो विधायक, सीपीएम के दो विधायक और वीसीके के भी दो विधायक विजय की टीवीके के साथ हैं. इस तरह इन चार दलों के समर्थन से विजय के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा न सिर्फ पूरा हो गया है बल्कि एक अधिक भी हो गया है।  टीवीके- 108 इंडियन नेशनल कांग्रेस-  5 कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- 2 कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)- 2 विदुथलाई चिरिथागकुल काची- 2 टोटल – 119 बता दें कि थलपति विजय अब चार राजनीतिक दलों के सहयोग से सरकार बनाने जा रहे हैं. उनकी पार्टी तमिलिगा वेट्री कझगम (TVK) को अब कई दलों का खुला समर्थन मिला है. जानकारी के मुताबिक, आधारव अर्जुन पट्टिनपक्कम स्थित विजय के आवास पहुंचे हैं. वहीं CPI की वर्किंग कमेटी की बैठक में TVK को समर्थन देने का फैसला लिया गया है।  इसके अलावा CPI(M) की राज्य कमेटी की बैठक में भी विजय की पार्टी को समर्थन देने पर सहमति बनी है. सूत्रों के अनुसार, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने भी TVK का समर्थन करने पर हामी भर दी है. बताया जा रहा है कि इन सभी दलों के नेता शाम 4:30 बजे संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं. माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया जाएगा. तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति के बीच यह घटनाक्रम सरकार गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है।   टीवीके को मिला सीपीएम का साथ शुक्रवार को TVK चीफ विजय के लिए राहत की खबर आई। सूत्रों के अनुसार, सीपीएम ने TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन देने का फैसला किया है। इसके साथ ही विजय के पास 115 विधायक हो चुके हैं। अब उन्हें 3 विधायकों का इंतजार है। राज्यपाल ने उन्हें 10 मई तक का समय दिया है।  VCK, CPM, CPI ने किया TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन, थलपति विजय के पास 118 का जादुई आंकड़ा तमिलनाडु में अब TVK चीफ थलपति विजय की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। 2-2 विधायकों वाले VCK, CPM, CPI ने कांग्रेस-TVK गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है। साथ ही बीजेपी ने भी मतदान से दूर रहने के संकेत दिए हैं। इसके बाद विजय के लिए बहुमत हासिल करने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।  चेन्नई में लोकभवन के सामने TVK कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन टीवीके कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लोकभवन के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से विजय को शपथ दिलाने की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस ने उन कार्यकर्ताओं को मौके से हटा दिया। TVK कार्यकर्ता सुरेश ने कहा कि अगर विजय को मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया गया, तो भविष्य में और भी प्रदर्शन किए जाएंगे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद से विजय की TVK तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से, गठबंधन के पास अब 112 सीटें हैं, जो 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से अभी भी छह कम हैं। इस बीच, AIADMK के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने TVK के सबसे बड़ी पार्टी होने के दावों पर निशाना साधा और कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की आलोचना की।

रायपुर: वन मंत्री केदार कश्यप ने दी सुविधा, अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी

रायपुर : अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी- वन मंत्री केदार कश्यप 13 लाख संग्राहक परिवारों को स्थानीय भाषाओं में मिलेगा आजीविका और बाजार भाव का अपडेट रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने वनांचल में रहने वाले वनोपज संग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से “छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी” और आईवीआरएस (IVRS) आधारित सूचना एवं संवाद तंत्र का शुभारंभ किया। यह नवाचार राज्य के 13 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह डिजिटल कदम छत्तीसगढ़ के वनांचल में आर्थिक क्रांति और जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा। कैसे काम करेगी यह व्यवस्था? (मिस्ड कॉल सेवा)          संग्राहकों को जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। संग्राहकों को टोल फ्री नंबर +91-9811125813 पर एक मिस्ड कॉल करना होगा। मिस्ड कॉल के बाद 911 से शुरू होने वाले नंबर से उपयोगकर्ता को कॉल बैक आएगा। कॉल रिसीव करते ही संग्राहक अपनी स्थानीय बोलियों जैसे हल्बी, गोंडी आदि में महत्वपूर्ण जानकारियां सुन सकेंगे। जानकारी सुनने के साथ ही उपयोगकर्ता अपनी राय, अनुभव और सुझाव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। ’प्रमुख लाभ और उद्देश्य’        स्थानीय बोलियों को प्राथमिकता के कारण वनांचल की क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलने से सूचनाओं का प्रसार अधिक प्रभावी होगा। जंगल, वनोपज संरक्षण, सतत संग्रहण, बाजार भाव (Market Rates) और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी सीधे संग्राहकों तक पहुंचेगी। बाजार भाव और मूल्य संवर्धन की सही जानकारी मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और संग्राहकों की आय बढ़ेगी। यह केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि संग्राहकों और शासन के बीच संवाद का एक मजबूत मंच बनेगा। ’मंत्री केदार कश्यप का संदेश’        वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक जानकारी पहुँचाने का यह प्रयास राज्य के लाखों परिवारों के लिए आजीविका का संबल बनेगा। वनोपज संरक्षण वाणी तकनीक और जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संचालन और महत्व        यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर द्वारा संचालित की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीआरएस आधारित यह संवाद तंत्र राज्य में वनाधारित आजीविका को संगठित और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित की ईडी- श्रीमती संजीता गुप्ता, डीजीएम जाधव सागर रामचंद्र, महाप्रबंधक सुबीर कुमार दत्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

थलपति के सामने चुनौती: तमिलनाडु के 8 दलों का नंबरगेम और सत्ता की रणनीति

चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से 'करिश्माई व्यक्तित्वों' और 'द्रविड़ अस्मिता' के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजे ने राज्य को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां सियासी गणित ने अभिनेता से नेता बने विजय को उलझा दिया है. विधानसभा चुनाव में भले ही विजय की पार्टी नंबर वन बन गई हो, लेकिन बहुमत का नंबर जुटाने के लिए जूझ रहे हैं।  विजय को सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होने के लिए बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. टीवीके के पास 108 विधायक हैं और कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के बाद 113 का ही आंकड़ा पहुंच रहे हैं. इसके बाद भी 5 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. डीएमके व AIADMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले दलों को बिना साथ लिए सरकार बनाना संभव नहीं है?  तमिलनाडु की सियासत में करीब छह दशक के बाद दो ध्रुवीय के बजाय त्रिकोणीय मुकाबला रहा. इस बार तमिलनाडु की राजनीतिक बिसात पर केवल विजय नहीं हैं, बल्कि छोटे दल बड़े धमाल करने की स्थिति में है. राज्य में 8 छोटे दल और बहुमत का जटिल नंबरगेम है, जो थलपति के राजनीतिक भविष्य को बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है?  सरकार बनाने के नंबर गेम में उलझे विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने अपनी पार्टी TVK के जरिए सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर हमला बोला है. इस तरह उनका लक्ष्य युवाओं का वह वोट बैंक रहा, जो DMK और AIADMK के दशकों पुराने चक्रव्यूह से ऊब चुका था. थलपति के लिए चुनौती यह है कि क्या उनका 'सिनेमाई करिश्मा' बूथ स्तर के 'वोट मैनेजमेंट' में बदल पाएगा?  विधानसभा चुनाव में बिना किसी गठबंधन के राज्य की सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ना और 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया. पहली ही सियासी पारी में भले ही विजय शतक लगाने में कामयाब रहे, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रह गए. विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन भी दे दिया. उसके बाद भी बहुमत का 118 का आंकड़ा नहीं पहुंच पा रहा।  तमिलनाडु के राज्यपाल आरवी अर्लेकर तमिलनाडु में विजय को सरकार का न्योता देने से इनकार कर दिया. राज्यपाल का कहना है कि विजय पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं. ऐसे में विजय के सामने बहुमत का नंबर गेम जुटाना काफी मुश्किल लग रहा है, क्योंकि राज्य में जो भी छोटे दल हैं, वो डीएमके और AIADMK गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं।  तमिलनाड में 8 दलों के पास सरकार बनाने की चाबी थलापति विजय को सरकार बनाने और बहुमत का आंकड़े जुटाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है. विजय ने पहले कई छोटी पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. तमिलनाडु चुनाव में टीवीके को 108 सीटें मिली तो डीएमके को 59 और AIADMK ने 47 सीटें जीती हैं।  तमिलनाडु में इन तीनों प्रमुख दलों के अलावा कांग्रेस 5 सीटें जीती है, जिसने पहले ही विजय को अपना समर्थन दे दिया है. पीएमके के 2, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के 2, सीपीआई के 2, सीपीएम  के 2, वीसीके के 2, बीजेपी के एक, डीएमडीके के एक और एक विधायक AMMKMNKZ के हैं।  विजय अगर वामपंथी दलों के चार विधायकों के साथ वीसीके का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो आसानी से सरकार बना लेंगे. हालांकि, कांग्रेस के सिवा कोई भी दल अपनी तक अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं. मुस्लिम लीग ने साफ कर दिया है कि डीएमके साथ खड़ी है. वीसीके भी लेफ्ट के साथ सुर में सुर मिलाती नजर आ रही है।  छोटे दलों किसका गेम बनाएगा-बिगाड़ेंगे? तमिलनाडु की सियासत इस जगह पर खड़ी है कि बिना किसी छोटे दल के किसी की भी सरकार नहीं बनने वाली. पीएमके ने बीजेपी से साथ में चुनाव लड़ा था, जिसके चलते उसके साथ खड़ी है. कांग्रेस के बाद अगर लेफ्ट और वीसीके विजय को समर्थन दे देते हैं तो आसानी से राज्य में सरकार बन जाएगी।  कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय को सिर्फ 5 विधायकों के अतरिक्त समर्थन की जरूरत है. विजय जरूर वामपंथी दलों का समर्थन चाहते हैं, पर वो भी डीएमके साथ छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. मुस्लिम लीग भी डीएमके साथ खड़ी है. इसी तरह डीएमडीके भी स्टालिन के साथ मजबूती से खड़ी हुई है. केरल के चुनाव नतीजे के बाद लेफ्ट अब कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार नहीं है. इसीलिए विजय का सियासी गेम उलझा हुआ है।  तमिलनाडु में पलटेगा गेम!  तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर पेच फंसता ही जा रहा है. सूबे में किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत का नंबर नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है. ऐसे में दक्षिण भारत के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी।  अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का नंबर पूरा नहीं हो रहा. कांग्रेस ने जरूर विजय की टीवीके को समर्थन दे रखा हो, लेकिन उसके बाद भी सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं पूरा हो रहा।  तमिलनाडु में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले AIADMK अब एनडीए से बाहर निकालने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद AIADMK तमिलनाडु में टीवीके और डीएमके में किसके साथ हाथ मिलाएगी? बीजेपी से अलग होने जा रही AIADMK  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी से आगे नहीं नहीं निकल सकी. राज्य में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए।  कांग्रेस ने जरूर विजय की पार्टी को अपना समर्थन दिया है, जिसे मिलकर 113 का नंबर ही हो रहा है. विजय ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन राज्यपाल ने अभी तक उन्हें मंजूरी नहीं दी. राज्यपाल ने विजय … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश मंत्री विजय शाह को फटकारा, कहा- ‘बस बहुत हो गया, आदेश मानें’

भोपाल   मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाई है और कड़े शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। बस बहुत हुआ, अब हमारे आदेश का पालन कीजिए। 'बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें' शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा अभियोजन की मंजूरी के लिए भेजा गया प्रस्ताव दो सप्ताह पहले ही निपटाया जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIT ने मामले की जांच की थी और मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी। इसके बाद CJI सूर्य कांत ने कहा, 'बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें, सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी। यह तब हुआ जब हमने स्वतः संज्ञान लिया। इस मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करें।' कोर्ट की तरफ से यह टिप्पणी तब की गई, जब सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला अभी लंबित है। मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की आदत है- सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री विजय शाह का बचाव करते हुए कहा कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया है वो महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक राजनेता के तौर पर उन्हें ये अच्छे से पता है कि महिला अधिकारी की तारीफ कैसे की जाती है। इसके साथ ही कोर्ट ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये भी कहा कि मंत्री को इस तरह के कमेंट्स करने की आदत है। मंत्री विजय शाह ने ये कहा था.. पिछले साल भारत के द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इस के बाद मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था- 'जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।' मंत्री विजय शाह के इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया और हर तरफ इसकी निंदा हुई थी। यहां ये भी बता दें कि मंत्री विजय शाह इससे पहले भी विवादित और आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। विजय शाह के विवादित बयान     साल 2013 के विधानसभा चुनावों से पहले विजय शाह ने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी और ये मामला गर्माने और विवाद बढ़ने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था।     सितंबर 2022 में राहुल गांधी के अविवाहित होने के पर भी उन्होंने विवादित टिप्पणी की थी। तब उन्होंने कहा था कि 50-55 साल की उम्र में भी शादी न हो तो लोग पूछने लगते हैं लड़के में कुछ कमी है क्या?     साल 2023 में बालाघाट में फिल्म शूटिंग के दौरान मंत्री विजय शाह ने अभिनेत्री विद्या बालन से रात में मिलने की इच्छा जताई थी जिस पर विद्या बालन ने आपत्ति की तो विजय शाह ने वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवा दी थी और तब ये मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था।