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पौधरोपण महाभियान-2026: 12 जुलाई को योगी सरकार का मेगा अभियान, हरियाली के नाम बनेगा नया इतिहास

पौधरोपण में 12 जुलाई को फिर नया इतिहास रचेगी योगी सरकार  पौधरोपण महाभियान-2026  जनसहभागिता से रविवार को पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे अभियान की सफलता के लिए बैठक कर जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री, अधिकारियों को भी देंगे दिशा निर्देश  वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे, ग्राम्य विकास 10 करोड़ पौधरोपण करेगा लखनऊ  योगी सरकार 12 जुलाई (रविवार) को फिर नया इतिहास रचेगी। पौधरोपण महाभियान-2026 के तहत जनसहभागिता से पूरे प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए नोडल (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग) ने तैयारी शुरू कर दी है। अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री सोमवार से जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और अधिकारियों की भी निरंतर बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। वहीं वन मंत्री भी अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक कर इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे।  जनसहभागिता से फिर होगा अभूतपूर्व आयोजन मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्र-प्रदेश सरकार के विभागों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों-कॉलेजों समेत व्यापक जनसहभागिता से उत्सव के रूप में महाभियान चलेगा। व्यापक जनसहभागिता के साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार के विभाग मिलकर इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण करेंगे। वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधरोपण करेगा। ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़,  कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान 1.50 करोड़, पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी 5.50 लाख पौधे लगेंगे। नोडल विभाग (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन) होगा। इसे लेकर जिला वृक्षारोपण समिति की नियमित बैठकें भी चल रही हैं।  कई विशिष्ट वनों की होगी शुरुआत, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगेंगे छायादार पौधे योगी सरकार प्रत्येक वर्ष नवीन विशिष्ट वन स्थापित करती है। इस थीम के अंतर्गत पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन तैयार किए जाएंगे। महर्षि चरक औषधि वन की शुरुआत 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) पर की गई है। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी होगा। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाएगा।  52.44 करोड़ पौधे कराए जा रहे तैयार  वृहद पौधरोपण के लिए वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग निरंतर बैठक व संवाद स्थापित कर रहा है। इसके साथ ही पौधों को लेकर भी विभाग की तैयारी चल रही है। वन विभाग की लगभग दो हजार नर्सरी में इस वर्ष 52.44 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को भी अब वितरित किया जाएगा।  गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगेंगे 5.50 लाख पौधे  प्रदेश के एक्सप्रेसवे के किनारे भी पौधरोपण किया जाएगा। इस बार विशेष रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। 594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर वन विभाग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.50 लाख पौधरोपण करेगा। दोनों पटरी पर हर एक किमी. पर हरिशंकरी रोपा जाएगा, जबकि बीच-बीच में पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, गूलर, महुआ, आम, अर्जुन, चिलबिल, अमलतास, कचनार, जकरकंडा, गुलमोहर आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनकी सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग व सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सुनिश्चित की जाएगी।  मुख्यमंत्री का निर्देश- जनसहभागिता से मनाया जाए उत्सव  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महाभियान-2026 की तैयारी को लेकर निरंतर बैठक करेंगे। वहीं वन मंत्री अन्य विभागों के मंत्रियों, अधिकारियों के साथ ही इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनसहभागिता पर विशेष जोर देते हुए इसे उत्सव के रूप में मनाने का निर्देश दिया है। सीएम योगी ने महाभियान में सभी जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक-महिला मंगल दल, रोटरी-लायंस, इको क्लब, एफपीओ, व्यापार मंडल आदि की भी सहभागिता अनिवार्य रूप से करने के लिए वन विभाग को निर्देश दिया है। कृषि विभाग की देखरेख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीकृत किसान भी महाभियान का हिस्सा बनेंगे।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 का आयोजन होगा। वन विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। इस बार भी एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण होगा। सभी विभागों, संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठनों आदि के सहयोग से व्यापक जनसहभागिता के साथ इस महाभियान को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। विभागों, मंडलों व जनपदों के लक्ष्य प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट वनों की शुरुआत होगी।  सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष  वन विभाग, उत्तर प्रदेश

समुद्री सुरक्षा पर संकट गहराया: होदेइदाह के पास जहाज पर हमले से वैश्विक चिंता बढ़ी

नई दिल्ली लाल सागर में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली है। यमन के पश्चिमी तट के निकट एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन, समूह या गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई है। UKMTO केंद्र ने एक आधिकारिक सूचना में बताया कि हमला तटीय शहर होदेइदाह के पास हुआ। होदेइदाह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मजबूत नियंत्रण वाले इलाके में स्थित है। जहाज होदेइदाह से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम दिशा में था, जब अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने उस पर हमला किया। UKMTO ने स्पष्ट किया कि जहाज के चालक दल ने तुरंत हमले की सूचना दी। फिलहाल संबंधित अंतरराष्ट्रीय अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। हूती विद्रोहियों की धमकी बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर और अदन की खाड़ी में गुजरने वाले जहाजों पर हमले दोबारा शुरू करने की खुली धमकी दी थी। हालांकि, उन्होंने अभी तक इन धमकियों को अमली जामा नहीं पहनाया है। हूती प्रवक्ता ने इस घटना पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि हूतियों ने अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध के समर्थन में लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित संकरे बाब अल-मंडाब के आसपास अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था। उन्होंने ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए। इन हमलों के कारण वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) का लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ा। सोमाली समुद्री लुटेरों भी हैं ऐक्टिव लाल सागर संकट के बीच सोमाली समुद्री डाकू भी अदन की खाड़ी और आसपास के दूरवर्ती इलाकों में फिर से सक्रिय हो गए हैं। एक जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित बलहाफ बंदरगाह शहर से 76 समुद्री मील (लगभग 140 किलोमीटर) दक्षिण में एक और घटना हुई थी। UKMTO के अनुसार, चार सशस्त्र व्यक्ति छोटी नाव पर सवार होकर आए और एक जहाज के ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) को मामूली नुकसान पहुंचाया। इस घटना को संदिग्ध समुद्री लुटेरों का काम माना जा रहा है। बता दें कि लाल सागर और अदन की खाड़ी विश्व व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से रोजाना लाखों टन तेल, गैस, कंटेनर माल और अन्य सामान गुजरता है। आये दिन हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों के युद्धपोत क्षेत्र में गश्त बढ़ाए हुए हैं, इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।

धामी सरकार का विजन 2035: इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और आत्मनिर्भर उत्तराखंड पर फोकस

उत्तराखंड उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे कर लिए हैं. इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर उन्होंने राज्य के लिए एक बड़ा विजन सामने रखा है. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य साल 2035 तक उत्तराखंड को पूरी तरह से एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच साल पहले उन्हें देवभूमि की सेवा का मौका मिला था. तब से उनकी सरकार का सफर जनसेवा, सुशासन और समर्पण के सिद्धांतों पर ही आगे बढ़ रहा है. सीएम धामी ने बताया कि उत्तराखंड को डेवेलप करने के लिए बुनियादी ढांचे, निवेश और चौमुखी विकास पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश में एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम का नाम 'सेवा, सुशासन और समर्पण: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' रखा गया है. सीएम धामी ने बनाए कई रिकॉर्ड पुष्कर सिंह धामी ने पहली बार 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी. वो राज्य के इतिहास में पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनसे पहले सिर्फ कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी (2002-07) ही अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए थे. इसके साथ ही धामी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है. वो उत्तराखंड में बीजेपी के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं. इससे पहले बीजेपी का कोई भी मुख्यमंत्री राज्य में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका था. धामी साल 2021 में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी को दोबारा शानदार जीत दिलाई और दोबारा मुख्यमंत्री बने. हमारा लक्ष्य सिर्फ कार्यकाल पूरा करना नहीं: मुख्यमंत्री इस खास मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनता का आभार जताया. उन्होंने कहा, 'ये मील का पत्थर सिर्फ उत्सव मनाने का मौका नहीं है. ये उत्तराखंड को देश का बेस्ट स्टेट बनाने के हमारे अटूट संकल्प को और मजबूत करने का क्षण है. हमारा टारगेट सिर्फ सरकार का कार्यकाल पूरा करना नहीं है, बल्कि हमारा मकसद एक आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाना है. हम साल 2035 तक उत्तराखंड को एक पूर्ण विकसित राज्य में बदलने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं.' इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ, पीने के पानी, सड़कें, कृषि, टूरिज्म, इंडस्ट्री, इन्वेस्टमेंट, स्वरोजगार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर जोर दे रही है. उत्तराखंड को विकास योजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. सीएम धामी ने गर्व जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए, जिन्हें लेने का साहस पिछली सरकारें नहीं दिखा पाईं. उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने, मदरसा बोर्ड को खत्म करने, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की नींव रखने और देश के सबसे सख्त धर्मांतरण विरोधी और नकल विरोधी कानूनों को बनाने का जिक्र किया. सीएम धामी ने इस मौके को और यादगार बनाते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने देहरादून जिले के लिए 219 करोड़ रुपये से ज्यादा की 51 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया.

दिल्ली से तमिलनाडु तक मौसम बिगड़ा: कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का खतरा

नई दिल्ली दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बीच मौसम विभाग ने 15 राज्यों में अगले 10 घंटे के अंदर भीषण बारिश, आंधी और तूफान का अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिसकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। इसलिए लोगों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इन हवाओं से किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। आइए बताते हैं कि किन 15 राज्यों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। इन 15 राज्यों में अलर्ट     दिल्ली     उत्तर प्रदेश     बिहार     राजस्थान     महाराष्ट्र     मध्य प्रदेश     पश्चिम बंगाल     तमिलनाडु     हिमाचल प्रदेश     उत्तराखंड     झारखंड     छत्तीसगढ़     ओडिशा     असम     त्रिपुरा दिल्ली-एनसीआर में कल कैसा रहेगा मौसम     दिल्ली-NCR (6 जुलाई- भारी बारिश का अलर्ट): सिविल लाइंस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) कैंपस क्षेत्र, कमला नगर , मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन, आजादपुर , सदर बाजार, कश्मीरी गेट सहित पूरे उत्तरी दिल्ली और ग्रेटर कैलाश, वसंत कुंज, वसंत विहार, डिफेंस कॉलोनी, हौज खास, पंचशील पार्क, आनंद लोक सहित दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में कल यानी 6 जुलाई को बारिश और आंधी तूफान का अलर्ट है। इसके साथ ही लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज, मयूर विहार, प्रीत विहार, आनंद विहार, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा, सीलमपुर, त्रिलोकपुरी, कोंडली, मंडावली, पांडव नगर, वसुंधरा एन्क्लेव और दिलशाद गार्डन सहित पूर्वी दिल्ली में भी झमाझम की चेतावनी है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में कल अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा     यूपी (6 जुलाई- तेज हवाएं, बारिश): देवरिया, मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, बरेली, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग ने बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, हापुड़, मोरादाबाद, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, इटावा, ओरैया, कन्नौज, हरदोई, उन्नाव, कानपुर में भी भीषण बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर, शामली, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, जौनपुर, कौशांबी सहित यूपी के कई जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट है। राजधानी लखनऊ में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम     बिहार (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, बांका, जमुई, लखीसराय, अरवल में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, पटना, बक्सर, भोजपुर, बेगुसराय, सहरसा, मुंगेर, भागलपुर, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, अररिया, किशनगंज में भी हल्की बारिश की चेतावनी है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। राजधानी पटना में कल अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम     महाराष्ट्र (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): एक तरफ मुंबई के अंधेरी, मरीन ड्राइव, वसई-विरार, विवा कॉलेज रोड, आचोले रोड, सेंट्रल पार्क, विजय नगर–नागिनदास पाड़ा, गाला नगर, तुलिंज ब्रिज के आसपास भारी बारिश का अलर्ट है तो वहीं महाराष्ट्र के दूसरे जिले सतारा, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, पुणे, अहमदनगर, ठाणे, पालघर, रायगढ़, भिवंडी, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, चंदरपुर, गढ़चिरौली में भी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मुंबई में कल अधिकतम और न्यूनतमा तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा। राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम     राजस्थान (6 से 11 जुलाई- आंधी-बारिश तूफान): अगले 5 से 7 दिनों तक जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्री गंगानगर में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट है। वही, जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनूं, चुरू, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, दौसा, धोलपुर, सवाईं माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सिरोही में भी जमकर बारिश होगी। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी जयपुर में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम     मध्य प्रदेश (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश की संभावना): धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, बुरहानपुर में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, गुना, नरसिंहपुर, सागर, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी, दमोह, पन्ना, रीवा, सतना में भी झमाझम की चेतावनी है। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तो वहीं, न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। पश्चिम बंगाल में कल कैसा रहेगा मौसम     पश्चिम बंगाल (6 जुलाई- हल्की बारिश होगी): कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, पूर्व और पश्चिम बर्दवान दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा, झाड़ग्राम, बांकुरा, पुरुलिया, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार,कूच-बिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, नादिया, पूर्वी बर्धमान, पश्चिमी बर्धमान और हुगली में हल्की बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कोलकाता में कल न्यूनतम तापमान 28 और अधिकतम तापमान 30 डिग्री रहने का अनुमान है। तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम     तमिलनाडु (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश के आसार): तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अगले छह दिनों तक बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा मौसम बुलेटिन में कहा है कि 10 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। चेन्नई के लिए मौसम विभाग ने आंशिक रूप से बादल छाए रहने और शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। कल चेन्नई का अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

हिंद महासागर तक निगरानी बढ़ी: चीन का नया रडार बना भारत के लिए रणनीतिक चिंता

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच तनाव के बीच चीन ने म्यांमार सीमा से लगे अपने यूनान प्रांत में लार्ज फेस्ड एरे रडार (LPAR) चालू कर दिया है. इस रडार की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. दावा है कि यह भारत के मिसाइल टेस्टों  को ट्रैक करने और हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर नजर रखने में सक्षम है. ऐसे में इसे भारत की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में यूनान में लगाया गया यह नया LPAR रडार भी अहम माना जा रहा है. यह रडार दूर से ही बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगा सकता है, उसकी उड़ान पर नजर रख सकता है और उसकी जानकारी जुटा सकता है. इसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. चीन भारत के पूर्वी हिस्से, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रख सकता है. यह रडार ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने वाले मिसाइल टेस्टों को भी ट्रैक कर सकता है. भारत यहीं से अग्नि-5, K-4 और दूसरी आधुनिक मिसाइलों का टेस्ट करता है. अगर किसी देश को इन मिसाइलों की उड़ान और दूसरी तकनीकी जानकारी मिल जाए, तो वह अपनी रक्षा तैयारियों को उसी हिसाब से मजबूत कर सकता है. भारत के लिए चिंता की बात क्यों है? रक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिसाइल टेस्ट के दौरान मिलने वाला डेटा किसी भी देश के लिए काफी अहम होता है. इससे मिसाइल की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है और उसके खिलाफ नई रक्षा सिस्टम तैयार करने में मदद मिल सकती है. यही वजह है कि चीन के इस नए रडार को भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है. हिंद महासागर पर भी रख सकेगा नजर यूनान में इस रडार की लोकेशन ऐसी है कि चीन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से की निगरानी भी कर सकता है. हिंद महासागर भारत के लिए बेहद अहम है. यहां भारतीय नौसेना की मजबूत मौजूदगी है. दुनिया के कई बड़े समुद्री व्यापार मार्ग भी यहीं से गुजरते हैं. ऐसे में इस इलाके में चीन की बढ़ती निगरानी भारत की चिंता बढ़ा सकती है. चीन का निगरानी नेटवर्क और मजबूत हुआ चीन के पास पहले से ही शिनजियांग और कोरला में ऐसे लंबी दूरी के रडार मौजूद हैं. अब यूनान में नया LPAR रडार चालू होने के बाद उसकी निगरानी क्षमता और बढ़ गई है. हालांकि, इस तैनाती पर भारत और चीन, दोनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में भारत को अपनी एंटी-सर्विलांस तकनीक और रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना पड़ सकता है.

एनडीए में एकजुटता पर जोर, सीट बंटवारे पर चर्चा नहीं; लखनऊ में हुई अहम बैठक

 लखनऊ  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक में विधान सभा चुनाव 2027 में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने पर मंथन किया। भाजपा अध्यक्ष ने संदेश दिया कि आपसी समन्वय इस स्तर तक मजबूत होना चाहिए कि हम वर्ष 2027 में प्रदेश में तीसरी बार और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएं। इस बैठक में सीटों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। नवीन ने अगली बैठक दिल्ली में करने की बात सभी सहयोगी दलों के नेताओं से कही। सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें रविवार को होटल ताज में भाजपा अध्यक्ष ने चारों सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें की। सबसे पहले उन्होंने रालोद के राष्ट्रीय संगठन महासचिव त्रिलोक त्यागी के साथ बैठक की।जिसमें उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव के लिए कैसे और क्या किया जाना चाहिए। त्यागी ने जवाब दिया कि सभी सहयोगी दलों के बीच जिला स्तर तक समन्वय होना चाहिए। सम्मान मिलेगा तो सभी दल उत्साह से एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। रालोद को मानने वाले पूरे प्रदेश में हैं, और पार्टी पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। नवीन ने कहा कि भाजपा भी बेहतर समन्वय पर अधिक ध्यान दे रही है। मीडिया से बातचीत में त्यागी ने कहा कि हम 403 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे सिंबल अलग-अलग होंगे। अपना दल (एस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंत्री आशीष पटेल के साथ बैठक में भी भाजपा अध्यक्ष ने उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव में जीत के लिए क्या किया जाए। जिस पर आशीष ने कहा कि सभी सहयोगी दल बेहतर समन्वय के साथ पूरे प्रदेश में मिलकर काम करेंगे, फिर से हमारी जीत सुनिश्चित है। राजभर ने बताया जनजातियों का मुद्दा भाजपा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में सुभासपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें बताया कि पार्टी ने 83 सीटों पर विधान सभा प्रभारी और सह प्रभारी बना दिए हैं। बूथ स्तर तक प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोंड, खरवार, अर्कवंशी, बंंजारा, पाल, प्रजापति जैसी ऐसी कई जातियां हैं जो राजनीतिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन इनके पास राजनीतिक नेतृत्व नहीं है। इन जातियों को राजनीतिक नेतृत्व देने का सुझाव दिया। गोंड व खरवार जातियों का एसटी सर्टिफिकेट नहीं बनाए जाने का मुद्दा उठाया। यह भी कहा कि प्रदेश में कुछ अधिकारियों के कारण थाने, तहसील और ब्लाक स्तर पर आम लोगों के काम नहीं हो रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। इसे देखा जाना चाहिए। राजभर ने सहयोगी दलों के बीच समन्वय बैठक कराने के साथ ही आजमगढ़, बस्ती और देवरिया में पार्टी द्वारा आयोजित किए जाने वाले बड़े कार्यक्रमों में भाजपा अध्यक्ष को आमंत्रित भी किया। निषाद पार्टी के अध्यक्ष मंत्री डॉ. संजय निषाद ने भी सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष को बताया कि प्रदेश में निषादों की बड़ी संख्या है। निषादों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। निषाद आरक्षण परिभाषित करने का ज्ञापन भी दिया। सभी सहयोगी दलों के नेताओं से भाजपा अध्यक्ष ने बेहतर समन्वय बनाने के साथ ही विधान सभा चुनाव में प्रचंड जीत की तैयारी में जुटने का संदेश दिया। सभी से कहा कि अगली बैठक हम लोग दिल्ली में करेंगे। बैठकों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह उपस्थित थे।

साबांग पोर्ट से हिंद महासागर में भारत की बढ़ी ताकत? 6-8 जुलाई के दौरे से पहले PM मोदी की बड़ी चाल

जकार्ता  पीएम मोदी  6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे. ये दौरा समंदर सिक्योरिटी सिस्टम के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. उनकी इस यात्रा के पीछे सिर्फ दो देशों के पुराने रिश्ते नहीं हैं, बल्कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का वो सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है, जिसकी स्क्रिप्ट पिछले कुछ सालों से लिखी जा रही थी. भारत और इंडोनेशिया के बीच वैसे तो कई समझौतों पर बातचीत चल रही है, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स से लेकर चीन तक, हर किसी की नजर सिर्फ एक ही प्रोजेक्ट पर टिकी है और वो है इंडोनेशिया का ‘साबांग पोर्ट’. जिससे समंदर का पूरा खेल ही पलट जाएगा।  साबांग पोर्ट: आखिर क्या है इस बंदरगाह की पूरी कहानी? इंडोनेशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा गहरी हुई है लेकिन इस पूरी पार्टनरशिप का जो सबसे कीमती ‘हीरा’ है, वो है साबांग पोर्ट प्रोजेक्ट. सबांग इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बिल्कुल उत्तरी छोर पर स्थित एक छोटा सा बंदरगाह है. दिखने में ये जगह बहुत शांत और साधारण लग सकती है, लेकिन जब आप इसे दुनिया के नक्शे पर देखेंगे तो आपको समझ आएगा कि ये कोई मामूली बंदरगाह नहीं है. ये ठीक उसी जगह पर मौजूद है जहां से दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता ‘मलक्का स्ट्रेट’ शुरू होता है।  भारत की अंडमान और निकोबार द्वीप श्रृंखला से साबांग पोर्ट की दूरी महज 150 किलोमीटर के आसपास है. यानी भारत के अपने नेवल बेस से ये जगह इतनी पास है कि भारतीय नौसेना बहुत ही कम समय में यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है. पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान साबांग पोर्ट के कमर्शियल और मिलिट्री इस्तेमाल को लेकर जो ब्लूप्रिंट फाइनल हो रहा है, उसने चीन की रातों की नींद उड़ा दी है. भारत यहां केवल पैसे नहीं लगा रहा है, बल्कि वो इस पूरे इलाके की सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लेने की तैयारी कर रहा है।  मलक्का स्ट्रेट का वो सच, जिससे चीन को आते हैं बुरे सपने अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस साबांग पोर्ट और मलक्का स्ट्रेट से चीन का क्या लेना-देना है और वो इससे इतना क्यों घबरा रहा है? इस बात को समझने के लिए हमें चीन की सबसे बड़ी कमजोरी को जानना होगा. चीन आज भले ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अपनी सेना के दम पर पूरी दुनिया को आंखें दिखाता है, लेकिन उसकी लाइफलाइन एक बहुत ही संकरे समुद्री रास्ते के भरोसे टिकी है, जिसे मलक्का जलडमरूमध्य या चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ कहते हैं. यs इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित एक बेहद पतली समुद्री पट्टी है।  चीन जितना भी कच्चा तेल खाड़ी देशों और अफ्रीका से खरीदता है, उसका लगभग 80% हिस्सा इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर चीन के बंदरगाहों तक पहुंचता है. इसके अलावा चीन दुनिया भर में जो अपना माल एक्सपोर्ट करता है, उसका भी एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर मलक्का स्ट्रेट चीन के लिए एक गले की नली की तरह है, जिसके बिना न तो उसे खाना मिल सकता है और न ही वो सांस ले सकता है. अगर कभी ये रास्ता बंद हो गया, तो चीन की पूरी इंडस्ट्री और उसकी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।  चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ और साबांग पोर्ट पर भारत का पहरा चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने सालों पहले एक शब्द का इस्तेमाल किया था- ‘मलक्का डिलेमा’ (मलक्का का धर्मसंकट). चीन को हमेशा से ये डर सताता रहा है कि अगर कभी भारत या अमेरिका के साथ उसका कोई बड़ा युद्ध या विवाद होता है तो भारतीय नौसेना अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर मलक्का स्ट्रेट के मुहाने को पूरी तरह ब्लॉक कर देगी. अगर ऐसा हुआ तो चीन का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा और उसकी सेना बिना तेल के कमजोर पड़ जाएगी. चीन का यही सबसे बड़ा डर है जिसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा जाता है।  अब सोचिए इसी मलक्का स्ट्रेट के ठीक एंट्री पॉइंट पर स्थित साबांग पोर्ट को जब भारत डेवलप कर रहा है, तो इसका क्या मतलब हुआ? इसका सीधा सा मतलब यह है कि साबांग पोर्ट पर भारत की मजबूत मौजूदगी सीधे तौर पर चीन की इस सबसे बड़ी कमजोरी पर भारत का एक पक्का पहरा बिठा देती है. इस बंदरगाह के पूरी तरह एक्टिव होने के बाद भारतीय नौसेना मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले चीन के हर एक जहाज, हर एक सबमरीन और हर एक हरकत पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रख पाएगी. ये चीन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि अब तक वो हिंद महासागर में भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर चीन को उसी के रास्ते पर घेर लिया है।  पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा जियोपॉलिटिक्स की नई स्क्रिप्ट पीएम मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जब साबांग पोर्ट पर अंतिम मुहर लग रही है तो ये पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा मैसेज दे रहा है. अब तक चीन ये सोचता था कि वो अपनी आर्थिक ताकत के दम पर एशिया के छोटे देशों को डराकर रख सकता है लेकिन इंडोनेशिया जैसे बड़े और प्रभावशाली मुस्लिम बहुल देश ने भारत के साथ हाथ मिलाकर ये साफ कर दिया है कि वो इस इलाके में किसी एक देश की दादागिरी को स्वीकार नहीं करेगा. भारत और इंडोनेशिया का ये साथ ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की असली ताकत को दिखाता है।  इस यात्रा के जरिए भारत न केवल साबांग पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच मैरीटाइम कोऑपरेशन को एक नए लेवल पर ले जा रहा है. आने वाले समय में अगर भारतीय नौसेना के जहाजों को साबांग पोर्ट पर लॉजिस्टिक सपोर्ट और रीफ्यूलिंग की सुविधा मिल जाती है तो चीन के लिए हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट के आसपास मनमानी करना नामुमकिन हो जाएगा. पीएम मोदी की ये चाल बताती है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव कूटनीति पर चल रहा है और चीन की हर चाल का जवाब उसके अपने ही इलाके में जाकर दे … Read more

रहस्यमयी I-52 सबमरीन की कहानी, 50 साल बाद मिला मलबा लेकिन खजाना अब भी रहस्य

टोक्यो  साल 1944 की गर्मियों में एक पनडुब्बी अटलांटिक महासागर में उतरी और फिर किसी जादुई कहानी की तरह गायब हो गई। इसके बाद कई दशक तक इसके सही ठिकाने का पता नहीं चल पाया। I-52 नाम की इस जापानी पनडुब्बी I-52 में क्रू के अलावा जर्मनी भेजा जा रहा सोना, दूसरे सामान और मेडिकल सप्लाई थी। इसमें दो टन सोना लदे होने का अनुमान था। ऐसे में इसे गोल्ड सबमरीन कहा गया। आखिरकार खोजकर्ता 1995 में समुद्र के 3 मील नीचे उस जगह पहुंचे, जहां इसका मलबा था। खोजकर्ताओं ने देखा कि 50 साल से ज्यादा समय बाद पनडुब्बी का ज्यादातर हिस्सा सीधा खड़ा था। इससे दूसरे विश्व युद्ध की सबसे अनोखी समुद्री कहानियों में से एक सुरक्षित रही और अंदर मौजूद खजाने के बारे में बिना जवाब वाले सवाल पीछे छूट गए। हालांकि यह अभी एक रहस्य बना हुआ है कि क्या कीमती सोना आज भी इस मबले के भीतर है या नहीं। I-52 कैसे जापान की कीमती पनडुब्बी द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1944 तक जापान और जर्मनी के बीच व्यापारिक जहाजों का आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया था। दूसरे विश्व युद्ध में मित्र देशों की नौसेना के दबदबे की वजह से सतह पर चलने वाले जहाजों के यूरोप पहुंचने से पहले पकड़े जाने का खतरा था। ऐसे में दोनों देश लंबी दूरी तक जाने वाली पनडुब्बियों पर निर्भर हुए, जो हजारों मील के खतरनाक पानी में कीमती सामान ले जाती थीं। I-52 को बड़ी ट्रांसपोर्ट पनडुब्बी के तौर पर बनाया गया था। यह गायब होने से पहले जापान से निकली और अपना सामान लोड करने के लिए सिंगापुर रुकी। सामान में टिन, टंगस्टन और मोलिब्डेनम जैसी धातुएं, प्राकृतिक रबर, कुनैन और अफीम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल सेना के लिए किया जाना था। इसके सबसे कीमती सामान में करीब दो टन सोना था, जिसे 146 बार (ईंटों) में पैक किया गया था। वे मैसेज जिनसे I-52 का पता चला I-52 सबमरीन काअटलांटिक में घुसने से पहले ही ब्रिटिश और अमेरिकी कोडब्रेकर्स जर्मन और जापानी नेवल कम्युनिकेशन को पढ़ने में कामयाब रहे थे। उनको पता चल गया कि I-52 के जर्मन सबमरीन U-530 से कहां मिलेगी और ट्रांसफर कब होगा। 23 जून 1944 की देर शाम I-52 अटलांटिक के बीच में U-530 से मिलने के लिए सतह पर आई इसी दौरान बोग के एयरक्राफ्ट ऊपर पहुंच गए। इसके बाद जापानी सबमरीन पर भीषण हमला हुआ। अगले दिन तक अमेरिकी जहाजों को समुद्र में तैरता हुआ मलबा और बड़ी मात्रा में रबर मिला, जिससे पुष्टि हुई कि सबमरीन नष्ट हो गई थी। U-530 बिना पकड़े गए बच निकला। I-52 पर सवार सभी 109 लोग मारे गए। पनडुब्बी पर बना रहा रहस्य युद्ध के समय यह तो पक्का था कि पनडुब्बी डूब गई है लेकिन किसी को ठीक-ठीक नहीं पता था कि वह कहां है। हमला रात में, खराब मौसम में और किसी भी तट से बहुत दूर हुआ था, जिससे ये पनडुब्बी दुनिया की नजरों से गायब रही। दशकों तक इसे खोजने की कोशिश हुई और आखिर में 2 मई 1995 को पाया गया कि समुद्र की सतह से 17,000 फीट से ज्यादा नीचे समुद्र तल पर सीधी खड़ी एक बड़ी पनडुब्बी का मलबा है। एक रिमोट से चलने वाले कैमरे को मलबे के ऊपर ले जाया गया, जिसने पिछले हिस्से (स्टर्न) के आस-पास की ऐसी डिटेल्स रिकॉर्ड कीं जो जापानी टाइप C3 ट्रांसपोर्ट पनडुब्बियों के खास डिजाइन से मेल खाती थीं। जहाज की हालत ने जांचकर्ताओं को हैरान कर दिया। टॉरपीडो से हुए नुकसान से ढांचा धीरे-धीरे पानी से भरा। इससे उसका बड़ा हिस्सा नीचे जाते समय सही-सलामत रहा। ऐसे में माना गया कि सोना इसके अंदर है। पनडुब्बी खींचती है ध्यान समुद्र की तलहटी से मिले मलबे के टुकड़ों ने कानूनी तौर पर सामान निकालने के अधिकारों का समर्थन किया लेकिन शुरुआती अभियान के दौरान सोना निकालने की कोई कोशिश नहीं की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कीमती धातु पनडुब्बी के अगले हिस्से में रखी गई थी, जो 1944 से अछूता रहा है। अटलांटिक में I-52 के गायब होने के अस्सी साल से ज्यादा समय बाद भी यह पनडुब्बी ना केवल इसलिए ध्यान खींचती है कि इसमें खजाना होने का अनुमान है। बल्कि इसलिए भी कि इसकी खोज ने दिखाया कि कैसे युद्ध के समय कोड तोड़ने, पुराने रिकॉर्ड की जांच और आधुनिक तकनीक से एक ऐसे रहस्य को सुलझाया जा सकता है जिसे कई पीढ़ियों के जांचकर्ता नहीं सुलझा पाए थे। सोना अभी भी वहीं हो सकता है! एक ऐसे ढांचे के अंदर, जो अस्सी साल से तीन मील पानी के नीचे है और उस दबाव से सुरक्षित है, जिसने उसे कुचल दिया होता। I-52 की कहानी यह दिखाती है कि समुद्र की तलहटी में वह सोना हो सकता है, जो पर दशकों की खोज के बावजूद अभी नहीं मिल पाया है। सोने का रहस्य अभी भी बरकरार है

चिंतन शिविर से निकले विचार बन रहे सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा। दूसरे दिन आयोजित 'सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन' विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ  सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 'सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति' विषय पर लोकसभा सदस्य  शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 'अमृत प्रयास', 'बनयान रिवोल्यूशन' और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है। 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़' विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया। 'कृषि से समृद्धि' विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए।  चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया। दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

प्रदेश में झमाझम बारिश के आसार, 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 43 जिलों में येलो चेतावनी जारी

भोपाल  प्रदेश में मानसून की जोरदार वर्षा हो रही है। रविवार को राजधानी भोपाल सहित अधिकांश जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की वर्षा हुई। शाम करीब साढ़े चार बजे राजधानी भोपाल में अचानक घने काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसे हालात बन गए। दृश्यता कम होने के कारण वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर आवाजाही करना पड़ा। यही हाल सीहोर और ग्वालियर का रहा, जहां घने काले बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। उसके बाद झमाझम वर्षा हुई। छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट, भोपाल समेत 43 में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने प्रदेश के बैतूल, अलीराजपुर, देवास, अनूपपुर, दमोह और सागर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं विदिशा, रायसेन, भोपाल समेत 43 जिलों को येलो अलर्ट में रखा है। केंद्र के अनुसार प्रदेश में अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं है। छिंदवाड़ा में ढाई इंच (67 मिलीमीटर) बरसात हुई। हरदा में झमाझम वर्षा के कारण फसलें बह गईं और विदिशा–गुना में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। पांढुर्णा जिले के सीतापार के पगड़ी गांव में बिजली गिरने से 48 वर्षीय सुलोचना तड़ाम की मौत हो गई। मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के पूर्वी इलाके अभी तप रहे हैं। वहां का अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री से लेकर 39.0 डिग्री तक रिकॉर्ड किए गए। वहीं पश्चिमी इलाकों में लगातार वर्षा की वजह से रविवार को दिन के तापमान में 4.7 डिग्री तक गिरावट हुई। यहां पारा 27.0 डिग्री से लेकर 36.2 डिग्री तक रहे। केंद्र के अनुसार अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना जताई गई है। हरदा में बाढ़ से किसानों की मेहनत पर पानी हरदा जिले में एक दिन पहले हुई भारी वर्षा के बाद नदी–नाले उफान पर आ गए। इससे खेतों में बोई गई मक्का, सोयाबीन और उड़द की अंकुरित फसलें मिट्टी सहित बह गईं। किसानों का कहना है कि कई खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे दोबारा बोवनी की चिंता बढ़ गई है। विदिशा और गुना में जलभराव की परेशानी विदिशा की सौराई स्थित राजीव आवास कॉलोनी में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वर्षा के समय जलभराव और कीचड़ की समस्या बनी हुई है। यहां नाले पर बनी पुलिया नीची होने से वर्षा के बाद रास्ता बंद हो जाता है और करीब 300 परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। गुना के वार्ड–दो के रहवासी भी चिंतित हैं। दरअसल नदी की सफाई का वादा किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। वर्षा शुरू होने के बाद लोगों को फिर बाढ़ का खतरा सताने लगा है। शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा (फैक्ट फाइल) शहर मिलीमीटर छिंदवाड़ा 67.0 सिवनी 22.0 श्योपुर 20.0 उज्जैन 19.0 टीकमगढ़ 15.0 ग्वालियर 10.0 मंडला 8.0 रीवा 7.0 सागर 6.0 गुना 5.0 सीधी 5.0 जबलपुर 3.0 बालाघाट जिले के मलाजखंड 3.0 नरसिंहपुर 2.0 इंदौर 1.0 राजगढ़ 1.0 दतिया 0.8 प्रदेश के चार बड़े शहरों के तापमान शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान भोपाल 32.2 25.4 इंदौर 30.9 22.8 ग्वालियर 37.7 28.3 जबलपुर 34.0 24.4 (नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है)