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नया कोरोना वायरस थाईलैंड में मिला, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जताई चिंता

बैंकाक  थाईलैंड में चमगादड़ों के अंदर एक नया कोरोना वायरस मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है. टोक्यो यूनिवर्सिटी के वायरस एक्सपर्ट्स की टीम ने यह खोज की है. यह वायरस SARS-CoV-2 (कोविड-19 पैदा करने वाले वायरस) से मिलता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह तुरंत कोई बड़ी महामारी नहीं फैलाएगा, लेकिन भविष्य में खतरा हो सकता है. इस खोज से वैज्ञानिकों को वायरस की निगरानी बढ़ाने की चेतावनी मिली है।  टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो की अगुवाई वाली टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में घोड़ों की नाल जैसे कान वाले चमगादड़ों (Horseshoe bats) में यह नया वायरस पाया. यह वायरस Clade B नामक ग्रुप का है. यह SARS-CoV-2 संबंधित कोरोनावायरस का नया समूह है. शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों के नमूने लेकर लैब में टेस्ट किए. अध्ययन 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'Cell' में प्रकाशित हुआ।  इस वायरस की जेनेटिक्स कोविड-19 वायरस से काफी करीब है. प्रयोगों में पता चला कि यह मानव कोशिकाओं के ACE2 रिसेप्टर से जुड़ सकता है, यानी यह इंसानों में घुसने की क्षमता रखता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह वायरस धीरे बढ़ता है और जानवरों में संक्रमण नहीं फैला पाया।  वायरस कितना खतरनाक है? प्रोफेसर केई सातो और उनकी टीम के अनुसार, यह वायरस अभी इंसानों के लिए तत्काल खतरा नहीं है. मौजूदा कोविड-19 के टीके और दवाएं इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई हैं. प्रयोगशाला परीक्षणों में यह वायरस कमजोर साबित हुआ।  फिर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि चमगादड़ों में वायरस लगातार बदलते रहते हैं. अगर इसमें छोटा-सा बदलाव आया तो यह ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बन सकता है. थाईलैंड और आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए यह वायरस युन्नान (चीन) और उत्तरी लाओस से आया हो सकता है।  प्रकृति में हजारों तरह के वायरस मौजूद हैं. चमगादड़ वायरसों के बड़े भंडार हैं. एशिया में चमगादड़ों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए. अभी कोई इंसान इस नए वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है. फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों या उनके मल-मूत्र वाले इलाकों के पास जाता है तो सावधानी बरतनी चाहिए।  सीख क्या है इस खोज से? कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया जान गई है कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं. इस नए वायरस की खोज समय पर हुई है. इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक और SARS-CoV-2 संबंधित वायरस मिल चुका है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी खोजों से हम भविष्य की महामारियों को रोक सकते हैं. नियमित निगरानी, शोध और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जंगलों, गुफाओं या चमगादड़ों वाले इलाकों में सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। 

दिल्ली और सोनीपत के प्रतिष्ठित स्थल थे ISI की योजना में, पुलिस ने किया पर्दाफाश

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित शहजाद भट्टी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई सनसनीखेज जानकारियां दी हैं, जिनसे पता चला है कि दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर भी आतंकवादियों के निशाने पर था. सूत्रों के मुताबिक इस मॉड्यूल से जुड़े एक आरोपी ने मंदिर की बाकायदा रेकी की थी. उसने मंदिर परिसर, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो तैयार किए थे. जांच एजेंसियों को शक है कि ये फोटो और वीडियो पाकिस्तान में बैठे सोशल मीडिया हैंडलर्स और कथित आईएसआई संपर्कों को भेजे गए थे।  जांच में सामने आया है कि साजिश सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं थी. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मंदिर परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर गोलीबारी करने की योजना थी. इसके जरिए बड़े स्तर पर दहशत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही थी।  दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार इस मॉड्यूल का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबा भी आतंकियों के निशाने पर था. इस ढाबे पर हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है. आरोपियों ने खुलासा किया कि वहां हैंड ग्रेनेड हमला कर भारी तबाही मचाने की योजना बनाई गई थी. एजेंसियों को आशंका है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों को टारगेट कर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी थी।  हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी इसके अलावा हरियाणा के हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने का खुलासा हुआ है. पूछताछ में सामने आया कि कैंप के वीडियो और आसपास की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजी गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी और कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गई थीं।  सूत्रों के मुताबिक मॉड्यूल का टारगेट सिर्फ दिल्ली और हरियाणा तक सीमित नहीं था. उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस स्टेशनों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाने की योजना थी. माना जा रहा है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले कर आतंकवादियों का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना और भय का माहौल बनाना था।  बता दें कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने बीते दिन दिल्ली समेत कई राज्यों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए थे. गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई राज्यों की पुलिस भी इस मामले में इनपुट साझा कर रही है।  जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मॉड्यूल को फंडिंग कहां से मिल रही थी, सोशल मीडिया के जरिए किस तरह संपर्क बनाए जा रहे थे और भारत में इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है।  मंदिर और मुरथल को लेकर क्या थी साजिश मॉडयूल की प्लानिंग थी कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और पैरामिलिट्री के जवानों को निशाना बनाया जाएगा। सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी करके पैनिक फैलाने और व्यवधान पैदा करने की कोशिश थी। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों को दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर मौजूद एक मशहूर ढाबे पर हमले का काम भी दिया गया था। यहां हर दिन हजारों लोग आते हैं। दहशतगर्दों की साजिश थी कि भीड़भाड़ के बीच अचानक गोलीबारी की जाए, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हों। मिलिट्री कैंप पर भी करने वाले थे हमला दहशतगर्त हरियाणा के हिसार में मौजूद एक मिलिट्री कैंप पर भी हमले की योजना तैयार कर रहे थे। उन्होंने कैंप की रेकी की थी और वीडियो बनाए थे। इन्हें सीमा पार भेजा गया था। उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस थानों पर भी आतंकी हमले की साजिश की बात सामने आई है।

बठिंडा में शुकराना यात्रा के दौरान सीएम का BJP पर निशाना, बंगाल की स्थिति को बताया उदाहरण

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान की शुकराना यात्रा का आज तीसरा दिन है। जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट अमेंडमेंट 2026 के लागू होने के बाद सीएम पूरे पंजाब में यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दाैरान बठिंडा में मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। शहर के अमरीक सिंह रोड पर लोगों को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां पर बुरा हाल हो चुका है। मान ने कहा कि पंजाब में कुछ पार्टियां आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब के लोग बहुत समझदार हैं। फिर भी राज्य के लोग ऐसी पार्टियों से सचेत रहें। मान ने कहा कि परमात्मा ने उन्हें हिम्मत दी, जिस कारण वे बेअदबी का इंसाफ देने के लिए कानून बनाने में कामयाब हुए।   अपनी चार दिवसीय शुक्राना यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले, मान ने जालंधर के ओल्ड बारादरी स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से कहा: “पंजाब की कठिन परिश्रम से अर्जित शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को कोई भंग नहीं कर सकता। पंजाब एक उपजाऊ भूमि है जहाँ कोई भी फसल उगाई जा सकती है, लेकिन नफरत के बीज यहाँ नहीं बोए जा सकते। हालिया विस्फोट पंजाब में भाजपा के प्रवेश के संकेत हैं।” मान ने इन घटनाओं को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनावोत्तर भाषणों से जोड़ा और उनके नारे "बंगाल सरकार हमारी है, अब पंजाब की बारी है" का हवाला दिया। उन्होंने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों को सांप्रदायिक संगठन बताया और कहा कि पंजाब, जिसने AK-47 के दौर को पार कर लिया है, अपनी "मजबूत भाईचारे" के बल पर आज भी दृढ़ है। जांच बनाम आरोप मुख्यमंत्री के दावे पुलिस के मौजूदा रुख के विपरीत हैं। जहां मान ने बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर और खासा सेना छावनी के पास हुए विस्फोटों के लिए भाजपा की "कार्यशैली" को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये विस्फोट पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित आईईडी विस्फोट थे। इन टिप्पणियों पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया हुई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मान को कानूनी नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। भाजपा ने इन आरोपों को राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलताओं से ध्यान भटकाने का "दुर्भावनापूर्ण प्रयास" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जब एक संवेदनशील आतंकी जांच चल रही हो, तब किसी राजनीतिक दल पर आरोप लगाना "खतरनाक" है। चुघ ने कहा कि मान ने बिना किसी सबूत के भाजपा पर संलिप्तता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए चुघ ने कहा, "इसीलिए उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि, झूठी सूचना फैलाने और जन अशांति भड़काने के प्रयास के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।" “सवाल सीधा सा है: क्या मुख्यमंत्री पंजाब की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, या वे राष्ट्रविरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं? जिस दिन पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य का जश्न मना रहा है, उस दिन भाजपा जैसी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी को विस्फोटों से जोड़ने का मान का प्रयास न केवल एक राजनीतिक झूठ है, बल्कि लाखों भारतीयों के जनादेश और विश्वास का अपमान है,” चुघ ने कहा। उन्होंने कहा कि अगर मान सात दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लेते और सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के उपलक्ष्य में शुरू की गई मान की शुक्राना यात्रा 9 मई को फतेहगढ़ साहिब में समाप्त होने वाली है।

योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा

9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बना उत्तर प्रदेश योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा रोजगार क्रांति के जरिए नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं युवा महिलाओं और युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक मिल रहा खूब मौका लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किये हैं। योगी सरकार ने रोजगार के मामले को मिशन के रूप में लिया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार, सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर देने के साथ निजी क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए मौके उपलब्ध करा रही है।  उत्तर प्रदेश, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य बन चुका है। इसी क्रम में बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी पुलिस में ही इस दौरान 2.19 लाख भर्ती पूरी हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। शिक्षा विभाग में करीब 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक 53 हजार से ज्यादा,  उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा 47 हजार से ज्यादा भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की गईँ। उत्तर प्रदेश में आज कारखानों की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने ही पंजीकृत थे। नौजवानों के नए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हुईं। सरकारी नौकरी की जगह अपना रोजगार करने वाले नौजवान को एमएसएमई सेक्टर से बड़ा लाभ मिला है। केवल एमएसएमई सेक्टर से ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सपना भी साकार हुआ। खादी एंव ग्रामोद्योग क्षेत्र में विस्तार से 4.63 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। विगत 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। बीते 9 वर्षों में 4 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारा गया है, जिनसे 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।  मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को 1,09,710 लाख से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई। इस तरह योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्वरोजगार के भी मौके प्रदेशवासियों के हित में उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ शुरू किया गया। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं को इस योजना का लाभ दिया गया, जिससे 4.51 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उत्कष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर सेवायोजित करने की नीति घोषित की है। इसके तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है। प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले बीसी सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन किया और 116 करोड़ का लाभांश कमाया। खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लखपति दीदी के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच गईं हैं। एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों से 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा रहा है कि आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपने ही प्रदेश में रोजगार और व्यवसाय के अवसर प्राप्त कर रहा है। योगी सरकार की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज रोजगार, निवेश, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर

एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रहा। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या यूपी में निवास करती है। गौरतलब है कि किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (Crime Rate) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए प्रामाणिक संकेतक है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है। हत्या के मामलों में देश में यूपी का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार बलवे के मामलों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। लूट के मामलों में प्रदेश 28वें स्थान पर और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यूपी का स्थान 23वां है। महिलाओं के प्रति अपराधों में यूपी 17वें नंबर पर है, जबकि बच्चों के विरुद्द अपराध के मामले में प्रदेश का स्थान 27वां है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि योगी सरकार लगातार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, जिसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महिला न्याय (Conviction Rate): यूपी देश का शीर्ष राज्य अपराधियों को सजा दिलाने (दोषसिद्धि) में उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर चुका है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अदालतों द्वारा सजा सुनाने की दर इस प्रकार है- उत्तर प्रदेश: दोषसिद्धि दर 76.6% (शीर्ष) पश्चिम बंगाल: यहां दर मात्र 1.6% है। कर्नाटक: यहां मात्र 4.8% मामलों में सजा होती है। तेलंगाना: यहां दर 14.8% है। केरल: यहां दर मात्र 17.0% है। पंजाब: यहां दर 19.0% है। तमिलनाडु: यहां दर 23.4% है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिला अपराध करने वाले अपराधी के बचने की संभावना न्यूनतम है, जबकि अन्य राज्यों में अपराधियों के छूटने की दर 75% से 98% तक है। इसी प्रकार राज्य में मर्यादा भंग के अपराधों की दर मात्र 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5, केरल में यह 23.9 है। गंभीर अपराधों पर नियंत्रण यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति लाख जनसंख्या मात्र 1.3 है, जो तेलंगाना (2.7),  झारखण्ड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। यूपी के महानगर जांच पूरी करने में देश के अन्य बड़े मेट्रो शहरों से कहीं अधिक तेज हैं। कानपुर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दर 84.4%, लखनऊ में 83.7% है। जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी यूपी का प्रशासन अन्य राज्यों से बेहतर है। यूपी में महिला जेलों में अधिभोग दर (Occupancy Rate) मात्र 36.7% है, जो महिला कैदियों को सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है। यूपी की केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3% है, जो पंजाब (118.4%) और केरल (149.9%) की तुलना में बहुत बेहतर है। एनसीआरबी रिपोर्ट का सांख्यिकीय डेटा स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश न केवल महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को दंडित करने (76.6% दोषसिद्धि) में देश में अग्रणी है, बल्कि गंभीर अपराधों (हत्या, धोखाधड़ी) और महिला सुरक्षा के मानकों पर दक्षिण भारतीय राज्यों और पंजाब/पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है।

ममता कैबिनेट बर्खास्त, विधानसभा पर राज्यपाल का वीटो प्रभाव

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं।  अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है।  · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है।  · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।  · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है।  · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  सवाल-जवाब राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है।  क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।  मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों से बिजली की मांग बढ़ी, इक्रा ने जताई 5-5.5% वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली   औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही।  इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी।  देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी।  इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है।  उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था।  समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था।  वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है।  अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं।  बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है।  इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है।  इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

NCRB रिपोर्ट: दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार 4 साल सबसे अधिक

नई दिल्ली भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित महानगरों की सूची में पहले नंबर पर आ गई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली लगातार चौथे वर्ष देश के सबसे असुरक्षित महानगर के रूप में उभरी है. रिपोर्ट बताती है कि अन्य मेट्रो शहरों के मुकाबले दिल्ली में सबसे ज्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध किए गए हैं।  एनसीआरबी के आंकड़ों में भले ही दिल्ली में कुल आईपीसी और बीएनएस अपराधों में 15.1% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई और 2023 के 3.2 लाख से ज्यादा मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या लगभग 2.8 लाख रह गई लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध में यह अभी भी बाकी मेट्रो शहरों से आगे निकल गई है. राजधानी में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों की गंभीरता और उनकी तीव्रता चिंता का विषय बनी हुई है।  महिलाओं के खिलाफ अपराध दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या 7,827 मामलों में पहुंच गई है. सबसे ज्यादा परेशान करने वाला आंकड़ा बलात्कार का है, जब दिल्ली में करीब 1,058 मामले दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा अन्य महानगरों जयपुर (497) और मुंबई (411) की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है. 6 मामलों के साथ गैंग रेप या रेप के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराधों में भी दिल्ली टॉप पर है. POCSO मामलों में भी दिल्ली (1,553) ने मुंबई (1,416) को पीछे छोड़ दिया है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।  रेप के मामले कम हुए लेकिन बाकी शहरों से ज्यादा 2024 में दिल्ली में 1,058 बलात्कार के मामले दर्ज हुए. यह संख्या जयपुर (497) और मुंबई (411) से दोगुनी से भी ज्यादा है. हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में मामलों में मामूली कमी आई है. 2023 में 1,094 और 2022 में 1,212 मामले दर्ज हुए थे. लेकिन यह कमी इसलिए मामूली है क्योंकि दिल्ली इन सभी से आगे है. NCRB के अनुसार दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ कुल 13,396 मामले दर्ज हुए, जो अन्य महानगरों से कहीं ज्यादा हैं।  अपहरण और घरेलू हिंसा की स्थिति भी गंभीर दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपहरण और अपहरण के 3,974 मामले दर्ज हुए. इनमें पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 4,647 मामले, छेड़छाड़ के 755 मामले, यौन उत्पीड़न के 316 मामले और स्टॉकिंग के 178 मामले सामने आए. सात मामले बलात्कार के साथ हत्या के भी दर्ज किए गए. दिल्ली पुलिस के पास 31,000 से अधिक मामले जांच के अधीन हैं, जो देश के 19 बड़े शहरों के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई है।  बच्चों पर बढ़ता खतरा दिल्ली बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद चिंताजनक स्थिति में है. 2024 में बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा प्रति एक लाख बच्चों पर 138.4 अपराध दर राष्ट्रीय औसत (42.3) से बहुत अधिक है. चार्जशीट दर मात्र 31.7% रही, जबकि औसत 61.4% है।  यूपी में सबसे ज्यादा महिला अपराध, शहर में दिल्ली सबसे असुरक्षित महिलाओं के मामले में दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की 19 मेट्रोपॉलिटन सिटीज में दिल्ली में सबसे ज्यादा 2024 में 13396 अपराध दर्ज किए गए हैं. इन 19 बडे शहरों में मध्य प्रदेश का इंदौर 8वें स्थान पर है. हालांकि 2023 के मुकाबले 2024 में महिला अपराधों में कमी आई है. 2023 में इंदौर में 1919 अपराध घटित हुए थे, जबकि 2024 में 1884 मामले दर्ज किए गए।  बच्चों से जुड़े अपराध में एमपी तीसरे नंबर पर बच्चों से जुड़े अपराध देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 24 हजार 171 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर 22 हजार 222 अपराधों के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. 2024 में मध्य प्रदेश में 21 हजार 908 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए. इन राज्यों में जितने बच्चों से जुड़े अपराध हैं, जांच की गति भी उतनी ही धीमी है. मध्य प्रदेश में चार्जशीट प्रस्तुत करने की दर ही 55 फीसदी है. जबकि महाराष्ट्र में 52 फीसदी और राजस्थान में 49.2 फीसदी मामलों की ही चार्जशीट कोर्ट में पेश हो पाती है।  एससी-एसटी अपराध में कौन राज्य टॉप पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में है. अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ होने अपराध सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए. यूपी में 2024 में 14 हजार 642 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है. एमपी में 7 हजार 765 और बिहार में 7 हजार 565 मामले दर्ज किए गए. जबकि राजस्थान में 7008 मामले दर्ज हुआ हैं।  वहीं अनुसूचित जनजाति यानि ST के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए. एमपी में 3165, इसके बाद राजस्थान में 2 हजार 282 और 830 अपराधों के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।  क्या सुधर रही है स्थिति? टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में अपराधों की उच्च संख्या रिपोर्टिंग और जागरूकता बढ़ने का परिणाम है. कुल अपराधों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. दिल्ली में अपराध दर 176.8 प्रति लाख है, जो अन्य महानगरों से काफी ऊंची है।  ऐसे में NCRB 2024 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि दिल्ली में कानून व्यवस्था और महिला-बाल सुरक्षा को मजबूत करने की तत्काल जरूरत है. मात्र आंकड़ों में कमी से सुरक्षा की भावना नहीं बढ़ती. आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। 

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन, ग्रामीण जीवन बदलने में समूह योजनाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन को गति, ग्रामीण जीवन में परिवर्तन का आधार बन रहीं समूह योजनाएं श्योपुर में सुदृढ़ जल अधोसंरचना का विस्तार, हर घर तक नल जल पहुंचाने की दिशा में हो रहे तेज प्रयास : मंत्री श्रीमती उइके भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में श्योपुर जिले में समूह जल प्रदाय योजनाएं तेजी से आकार ले रही हैं, जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के माध्यम से हर घर तक नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार हो रहा है। श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना, बड़े स्तर पर जल आपूर्ति की सुदृढ़ व्यवस्था म.प्र. जल निगम मर्यादित द्वारा क्रियान्वित श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना जिले की प्रमुख पेयजल परियोजनाओं में शामिल है। 782.11 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 377 गांवों को कवर करते हुए 8 लाख से अधिक आबादी को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य कर रही है। योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे घर-घर जल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित हो रही है। योजना में ग्राम बरोठा, जिला मुरैना में 90.51 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल तथा ग्राम श्यारदा, विकासखण्ड विजयपुर में 71.44 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही 86 उच्चस्तरीय टंकियों के निर्माण का कार्य निर्धारित है, जिनमें से कई पर कार्य प्रगति पर है। जल आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसमें रॉ वाटर पंपिंग मेन, क्लीयर वाटर पंपिंग मेन तथा ग्रेविटी मेन के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके अतिरिक्त एचडीपीई पाइप आधारित जल वितरण नेटवर्क गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे प्रत्येक घर तक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और चरणबद्ध तरीके से अधोसंरचना विकसित की जा रही है। मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना, ग्रामीण अंचलों के लिए प्रभावी समाधान श्योपुर जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 171.24 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 120 गांवों को कवर करते हुए लगभग 1.70 लाख आबादी को लाभान्वित करने के उद्देश्य से क्रियान्वित की जा रही है। योजना में लगभग 10 हजार घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधे घर पर जल उपलब्ध हो सकेगा। योजना का जल स्रोत मूँझरी बांध है, जो क्षेत्र में स्थायी जल आपूर्ति का आधार बन रहा है। योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और अधोसंरचना निर्माण के साथ जल वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में योजना की भौतिक प्रगति 31.66 प्रतिशत तथा वित्तीय प्रगति 25.42 प्रतिशत है, जो इसके सुव्यवस्थित क्रियान्वयन को दर्शाती है। ग्रामीण जीवन में बदलाव का आधार बन रहीं योजनाएं श्योपुर जिले में इन समूह जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन केवल पेयजल उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव का आधार बन रहा है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य स्तर में सुधार हो रहा है, महिलाओं और बच्चों को जल संग्रहण के श्रम से राहत मिल रही है और गांवों में समग्र विकास को गति मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक परिवार तक नल से जल पहुंचाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती उइके के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की मजबूत और स्थायी व्यवस्था स्थापित हो सके।  

देशभर से 15 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में, 7800 ट्रेनों का विशेष इंतजाम

उज्जैन   सिंहस्थ में 15 करोड़ लोगों के आने के अनुमान को देखते हुए रेलवे ने अभी से तैयारी तेज कर दी है। देशभर से उज्जैन और उसके आसपास के रेलवे स्टेशनों के लिए 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसी सिलसिले में पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने उज्जैन समेत आसपास के 10 रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों की अपडेट जानकारी ली। महाप्रबंधक, पश्चिम रेलवे रामाश्रय पाण्डेय रतलाम मंडल के उज्जैन प्रवास पर शहर आए। आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया। उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 1 से 8 तक का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सांसद अनिल फिरोजिया भी मौजूद रहे। महाप्रबंधक पाण्डेय ने कहा कि कुंभ के लिए देशभर से करीब 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इस बार 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। नवनिर्मित ट्रेन संचालन नियंत्रण केंद्र देखा निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने स्टेशन परिसर में उपलब्ध विभिन्न यात्री सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने रनिंग रूम, हेल्थ यूनिट, लिफ्ट एवं एस्केलेटर की कार्यशीलता की जांच की, साथ ही सर्कुलेटिंग एरिया, पे एंड यूज़ टॉयलेट, बुकिंग कार्यालय एवं प्रतीक्षालय आदि का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त प्लेटफार्म क्रमांक 8 की ओर नवनिर्मित ट्रेन संचालन नियंत्रण केंद्र एवं प्रस्तावित क्राउड होल्डिंग एरिया का भी अवलोकन किया गया। 6 से अधिक स्टेशनों का निरीक्षण किया महाप्रबंधक पाण्डेय ने उज्जैन स्टेशन के अतिरिक्त सिंहस्थ के दृष्टिगत महत्वपूर्ण स्टेशनों पिंगलेश्वर, पंवासा, नई खेड़ी, चिंतामण गणेश, मोहनपुरा एवं विक्रम नगर का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इन स्टेशनों पर प्रस्तावित एवं प्रगतिरत निर्माण कार्यों जैसे – हाई लेवल प्लेटफार्म, कवर शेड, फुट ओवर ब्रिज, क्राउड होल्डिंग एरिया, बाउंड्री वॉल एवं अप्रोच रोड आदि की समीक्षा की गई। सभी निर्माण कार्य 2027 तक पूर्ण कर लिए जाएंगे वीआइपी कक्ष में मीडिया से चर्चा करते हुए महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के दौरान संभावित अत्यधिक यात्री संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी निर्माण कार्य वर्ष 2027 के अंत तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। इस अवसर पर क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य महेंद्र गादिया एवं विजय अग्रवाल ने महाप्रबंधक का स्वागत किया। निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) अक्षय कुमार सहित रतलाम मंडल के सभी शाखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख बिन्दू -पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय का दौरा -उज्जैन सहित 10 स्टेशनों के कार्यों का निरीक्षण -प्लेटफार्म 1 से 8 तक का गहन निरीक्षण -रनिंग रूम, हेल्थ यूनिट, लिफ्ट एवं एस्केलेटर का निरीक्षण -सर्कुलेटिंग एरिया, पे एंड यूज़ टॉयलेट का निरीक्षण -बुकिंग कार्यालय एवं प्रतीक्षालय का निरीक्षण -निरीक्षण के दौरान सांसद फिरोजिया भी थे -15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान -देशभर से करीब 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी -सभी निर्माण 2027 तक पूरे हो जाएंगे