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क्या अमेरिकी सेना बन रही है पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा? डॉक्युमेंट्री में पेंटागन को लेकर बड़ा दावा

वाशिंगटन  वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर बड़े-बड़े देशों और औद्योगिक घरानों को कटघरे में खड़ा किया जाता है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा महा-प्रदूषक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियों में ‘फ्री पास’ यानी पूरी छूट मिली हुई है. प्रसिद्ध खोजी पत्रकार एबी मार्टिन (Abby Martin) की नयी खोजी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘अर्थ्स ग्रेटेस्ट एनिमी’ (Earth’s Greatest Enemy) ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. 120 मिनट की फिल्म ने पुख्ता सबूतों और अविश्वसनीय आंकड़ों के साथ साबित किया है कि अमेरिकी सेना (US Military) और उसका रक्षा मुख्यालय पेंटागन वैश्विक जलवायु संकट को बढ़ाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संस्थागत प्रदूषक है।  140 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक कार्बन फैलाता है पेंटागन लॉरा पोलक (Laura Pollock) की ओर से की गयी फिल्म की समीक्षा के अनुसार, इस डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी रक्षा विभाग और उसकी नौसेना एवं वायुसेना के प्रदूषण फैलाने संबंधी जो आंकड़े पेश किये गये हैं, वे चौंकाने वाले हैं।      विमानों का ईंधन ईकोसाइड : फिल्म में पत्रकार एबी मार्टिन बताती हैं कि औसत अमेरिकी नागरिक अपने पूरे जीवनकाल में (लगभग 40 वर्ष) जितना ईंधन का इस्तेमाल करता है, बोइंग पेगासस (Boeing Pegasus) जैसे अमेरिकी सैन्य टैंकर की सिर्फ एक उड़ान में उतना ईंधन खत्म हो जाता है. अमेरिका ऐसे 600 से अधिक उड़ान टैंकर हवा में उड़ाता है।      140 देशों से भी बड़ा प्रदूषक पेंटागन : अमेरिकी सेना का कुल कार्बन उत्सर्जन दुनिया के 140 देशों के संयुक्त उत्सर्जन से भी कहीं अधिक है. इसके बावजूद वैश्विक जलवायु सम्मेलनों (जैसे COP26) में सैन्य उत्सर्जन के इन आंकड़ों को छिपा लिया जाता है।      लाखों समुद्री जीवों का कत्लेआम : एक डरावना आंकड़ा यह भी है कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) को अपने 5 साल के युद्धाभ्यास और परीक्षणों के दौरान 2.6 मिलियन (26 लाख) से अधिक समुद्री स्तनधारी जीवों (Marine Mammals) को नुकसान पहुंचाने या उन्हें मार डालने की कानूनी छूट मिली हुई है. इतना ही नहीं, इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान छोड़े गये 2.5 लाख से अधिक गोले और प्रदूषण ने वहां की भूमि को स्थायी रूप से बंजर बना दिया है।  जहां-जहां अमेरिकी बेस, वहां-वहां ‘जहरीली मौत’ खोजी पत्रकार एबी मार्टिन और उनके पति माइक प्रिसनर ने इस सच्चाई को उजागर करने के लिए पूरी दुनिया का दौरा किया. वे ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से लेकर अलास्का, हवाई और जापान के ओकिनावा द्वीप तक गये. कैंप लेज्यून और कोरल रीफ को कैसे नुकसान पहुंचा है, यहां जानें।  डॉक्युमेंट्री का संदेश : एक साथ कई मोर्चे पर संघर्ष कर रही है हमारी प्रकृति।  Earths Greatest Enemy: उत्तरी कैरोलिना के कैंप लेज्यून का सच उत्तरी कैरोलिना के ‘कैंप लेज्यून’ में अमेरिकी सेना के ही घरेलू बेस से हुए ईंधन रिसाव, जहरीले कचरे और औद्योगिक अपशिष्टों के कारण स्थानीय अमेरिकी बस्तियों के पानी में जहर घुल गया. फिल्म में उन माताओं का रुदन दिखाया गया है, जिन्होंने इस दूषित पानी के कारण अपने बच्चों को खो दिया।  हवाई और ओकिनावा में कोरल रीफ का विनाश हवाई और ओकिनावा (जापान) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाया जा रहा है. उसके मलबे को समुद्र में फेंककर दुर्लभ कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को हमेशा के लिए दफन किया जा रहा है. जब पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कायक (नावों) के जरिये समुद्र में इसका विरोध किया, तो अमेरिकी स्पीडबोट्स ने उनकी नावें पलट दीं और उन्हें हिरासत में ले लिया।  अमेरिकी नेताओं का पाखंड डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के पाखंड पर भी तीखा प्रहार किया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि एक तरफ तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी और प्रगतिशील प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसी नेता लाइव स्ट्रीम पर कॉप-26 (COP26) के लक्ष्यों को ‘ऐतिहासिक’ बताती हैं, लेकिन जब उनसे सवाल पूछा जाता है कि नेट-जीरो (Net-Zero) के दावों के बीच पेंटागन का बजट और सैन्य खर्च लगातार क्यों बढ़ाया जा रहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।  अमेरिकी पाखंड का सबसे अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज यह फिल्म सीधे तौर पर व्हाइट हाउस और पेंटागन को कटघरे में खड़ा करती है, जो आम जनता को पर्यावरण बचाने के लिए ‘प्लास्टिक स्ट्रॉ’ छोड़ने और ‘इलेक्ट्रिक कारें’ खरीदने का उपदेश देते हैं, लेकिन खुद खरबों गैलन कच्चा तेल फूंकने वाली अपनी युद्ध मशीनरी के प्रदूषण को आधिकारिक रिकॉर्ड की किताबों से ही गायब रखते हैं. यह डॉक्युमेंट्री पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पूंजीवादी ताकतों द्वारा चलाये जा रहे इस सबसे बड़े पाखंड का एक अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज है। 

भोपाल में बनेगा गैस त्रासदी मेमोरियल, भुज के स्मृतिवन से प्रेरित परियोजना पर सरकार की तैयारी

भोपाल  भोपाल में 1984 में हुए भीषण गैस कांड की याद में अब एक भव्य और विश्वस्तरीय स्मारक बनाने की योजना तैयार की जा रही है. यह स्मारक गुजरात के भुज स्थित प्रसिद्ध ‘स्मृतिवन’ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यूनियन कार्बाइड की केमिकल कचरा-मुक्त भूमि पर यह स्मारक बनाया जाए।  इस परियोजना के लिए एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कॉर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (Environmental Planning and Coordination Organisation) को जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें भुज के भूकंप स्मारक और म्यूजियम का अध्ययन करने तथा उसके आधार पर एक डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है।  हजारों लोगों की याद में बने स्मारक मुख्यमंत्री मोहन यादव फरवरी 2026 में कच्छ दौरे के दौरान भुज के स्मृतिवन से काफी प्रभावित हुए थे. 2001 के विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले हजारों लोगों की याद में बने इस स्मारक ने उन्हें प्रेरित किया. यह स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम है, जिन्होंने इसे 2011 में चीन के सिचुआन भूकंप स्मारक को देखकर तैयार करने की योजना बनाई थी।  भुज का ‘स्मृतिवन’ 470 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे देश का सबसे बड़ा स्मारक माना जाता है. यह 2001 के भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की स्मृति में बनाया गया है. यहां 7 थीम आधारित गैलरियां बनाई गई हैं, जहां आधुनिक तकनीक जैसे सिम्युलेटर, थ्री-डी और प्रोजेक्टर के जरिए भूकंप का वास्तविक अनुभव कराया जाता है।  सीएम ने दिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एप्को की एक विशेष टीम गुजरात के भुज में बने आधुनिक भूकंप स्मारक व संग्रहालय का मौका-मुआयना करे। वहां की व्यवस्थाओं और डिजाइन का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद भोपाल में भी वैसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए एक विधिवत प्रस्ताव और ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जाए। भुज का 'स्मृतिवन' मॉडल क्यों है खास? भोपाल में जिस भुज मॉडल को आधार बनाकर स्मारक की रूपरेखा तैयार की जा रही है, वह बेहद अनूठा है। 2001 के गुजरात भूकंप पीड़ितों की याद में बना भुज का 'स्मृतिवन' अपनी आधुनिक गैलरी, मियावाकी वन और आपदा प्रबंधन के जीवंत अनुभवों (सिम्युलेटर तकनीक) के कारण दुनिया भर में मशहूर है। अब इसी तर्ज पर भोपाल गैस त्रासदी के इतिहास और पीड़ितों की याद को सहेजने के लिए यूनियन कार्बाइड परिसर को नया रूप दिया जाएगा। कच्‍छ दौरे के समय सीएम हुए थे प्रभावित दरअसल, फरवरी 2026 में अपने कच्छ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भुज के 'स्मृतिवन' को देखकर बेहद प्रभावित हुए थे। वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की याद में 470 एकड़ में फैला भुज का यह अनूठा स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम था। पीएम मोदी ने साल 2011 में चीन के सिचुआन प्रांत के भूकंप स्मारक को देखने के बाद इस भव्य स्मृतिवन का खाका तैयार किया था। क्यों अनूठा व विश्वस्तरीय है भुज का 'स्मृतिवन'? देश का सबसे बड़ा स्मारक: यह स्मारक 2001 के गुजरात भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की याद में भुज की भुजिया पहाड़ी पर पूरे 470 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। भूकंप का वास्तविक अहसास: स्मृतिवन में 7 थीम-आधारित गैलरी बनाई गई हैं। यहाँ विशेष सिम्युलेटर की मदद से आने वाले आगंतुकों को भूकंप का वास्तविक (लाइव) अनुभव कराया जाता है। कच्छ की संस्कृति और इतिहास: थ्री-डी प्रोजेक्टर व आधुनिक गैजेट्स के जरिए कच्छ की अनूठी संस्कृति, भूकंप का इतिहास और इस भीषण आपदा के बाद हुए अद्भुत पुनर्निर्माण की पूरी कहानी को जीवंत रूप में दिखाया गया है। पर्यावरण और जल संरक्षण: पूरे परिसर में 50 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके साथ ही, दिवंगत आत्माओं की याद में 50,000 से अधिक पौधे लगाकर एक भव्य 'मियावाकी वन' विकसित किया गया है। पुनर्निर्माण की कहानी को दिखाया इस स्मारक में कच्छ की संस्कृति, इतिहास और भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण की कहानी को भी दिखाया गया है. इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 50 चेकडेम बनाए गए हैं और 50,000 से अधिक पौधों के साथ मियावाकी वन विकसित किया गया है।  इसी मॉडल को आधार बनाकर भोपाल में बनने वाला नया स्मारक गैस कांड का दर्द, इतिहास और सबक को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करेगा। 

Right to Business Act: चंडीगढ़ में बिजनेस के लिए नई व्यवस्था लागू, पढ़ें कैसे मिलेगा फायदा और कैसे करें आवेदन

चंडीगढ़  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 को कुछ जरूरी संशोधनों के साथ लागू कर दिया है। तारीख 2 जुलाई, 2026 से यह प्रभावी रूप से लागू हो चुका है।। इस नए कानून के आने से चंडीगढ़ में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को एक नई मजबूती मिलेगी। आइए समझते हैं यह राइट टू बिजनेस एक्ट क्या है और लोगों व व्यापारियों को कैसे इसका फायदा होगा। राइट टू बिजनेस एक्ट क्या है? राइट टू बिजनेस एक्ट का मुख्य उद्देश्य नए व्यवसायों को शुरू करने के लिए दी जाने वाली सरकारी मंजूरियों से है। जहां पहले किसी भी कारोबार को शुरू करने से पहले एनओसी के लिए व्यवसासियों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं, अब इसके लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम बनाया जाएगा है। इसके जरिए आवश्यक मंजूरियां एक ही जगह से और एक तय समय-सीमा के अंदर दी जाएंगी। चंडीगढ़ तक एक्सटेंड करने के पीछे क्या है उद्देश्य? चंडीगढ़ में इस एक्ट को लागू करने का मुख्य उद्देश्य लोगों के समय को बचाना है। वहीं, सरकार भी चाहती है कि चंडीगढ़ देश में निवेश और कारोबार के लिए एक पसंदीदा और आकर्षक केंद्र बने। इसके लिए प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा ताकि कारोबारी घर बैठे सरकारी काम आसानी से करवा सके। कौन-कौन से बिजनेस इसमें आएंगे? इस एक्ट के दायरे में मुख्य रूप से तीन बड़े सेक्टर्स को शामिल किया गया है। पहला उद्योग मसलन नए कारखाने और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, व्यापार- रिटेल, होलसेल और सर्विस सेक्टर आईटी कंपनियां और स्टार्टअप्स इत्यादि। क्या होगी आवदेन की प्रक्रिया व्यवसाय शुरू करने के लिए अब किसी भी निवेशक को अलग-अलग विभागों में जाने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन करने की प्रक्रिया सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और फीस एक ही बार में जमा करनी होगी।  चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 को मिलेगी नई रफ्तार मास्टर प्लान-2031 के अंतर्गत चंडीगढ़ के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के आधुनिकीकरण में यह कानून एक गेम-चेंजर साबित होगा। राइट टू बिजनेस एक्ट इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए मुख्य भूमिका निभाएगा। इसके लागू होने से शहर में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ लालफीताशाही खत्म होगी। कारोबार बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

Crude Oil Forecast: सिटी बैंक का बड़ा दावा, कच्चे तेल की कीमतें और गिरेंगी; क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

नई दिल्ली  दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्‍स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ कम होगा और देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है।  सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्‍य पर दोहरी नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई थी. इस वजह से कच्‍चे तेल की सप्‍लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई. लेकिन अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से तनाव कम हुआ है और इस महत्‍वपूर्ण समुद्री रास्‍ते पर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है. कच्चा तेल पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध है. इस वजह से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दूसरी तिमाही में लगभग 30% तक टूटकर 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।  भरपूर मात्रा में उपलब्‍ध है कच्‍चा तेल सिटी बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, तेल बाजार अब तेजी से अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति में लौट रहा है. होर्मुज रूट खुलने से रिफाइनरियों को भरपूर कच्चा तेल मिल रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश चीन फिलहाल बाजार से थोड़ी दूरी बनाए हुए है, जिससे कच्चे तेल की फिजिकल मांग कमजोर हुई है. वैश्विक तेल भंडारों में उम्मीद के मुकाबले बेहद कम गिरावट दर्ज की गई है, यानी स्टॉक में तेल की कोई कमी नहीं है।  $60-65 के दायरे में आएगा ब्रेंट क्रूड सिटी के विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के दौरान अगर तेल की कीमतों में कोई अस्थायी तेजी आती भी है, तो उसे केवल बिकवाली का अवसर माना जाना चाहिए क्योंकि अंततः कीमतों को नीचे ही आना है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच जाएगा।  केवल सिटी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय संस्थान भी कच्‍चे तेल में गिरावट का अनुमान जता चुके हैं. गोल्डमैन सॉक्‍स ने कहा था कि ईरान विवाद शांत होने के बाद बाजार में फिर से ओवरसप्‍लाई की स्थिति बन जाएगी. वहीं, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भी पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कच्चे तेल के अपने अनुमानित दामों में कटौती कर चुका है।  भारत के लिए इसके क्या मायने हैं? भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का $60 के स्तर पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम कम होने से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा. इससे कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का रेट घटाने का मौका मिलेगा। 

कांग्रेस का बड़ा एक्शन: जिला अध्यक्ष तैयार करेंगे विवादित नेताओं की सूची, अनुशासनहीनों पर गिरेगी गाज

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में अक्सर अपने ही नेताओं के कारण पार्टी की मुसीबतें बढ़ती रहती हैं। कई नेता सीधे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तक को निशाने पर ले लेते हैं। अब पार्टी लाइन से हटकर अक्सर विवादित बयान देने वाले कांग्रेसियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। एमपी कांग्रेस अब ऐसे विवादित नेताओं की लिस्ट तैयार करने जा रही है जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं। जिला अध्यक्ष बनाएंगे विवादित बयानवीरों की लिस्ट एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी फोरम पर सीनियर लीडर्स ने कई बार यह विषय उठाया है कि कई कार्यकर्ता ऐसे हैं जो अक्सर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते हैं। ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए अब पार्टी कड़ा फैसला लेने जा रही है। सोशल मीडिया पर भी पार्टी के खिलाफ लिखने वाले होंगे चिन्हित कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने सभी जिला अध्यक्षों को भेजे पत्र में लिखा है कि पार्टी को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और फैसलों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं। इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। चिन्हित करें नोटिस दें न मानें तो एक्शन लें पत्र में कहा गया है कि प्रदेश प्रभारी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तय किया है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पहले नोटिस जारी करें। यदि इसके बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं होता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें और इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजें। जिले में कार्रवाई नहीं हो सकती तो सबूतों के साथ प्रदेश को रिपोर्ट भेजें पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन नेताओं के खिलाफ जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं है, उनके मामलों की पूरी जानकारी और साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए, ताकि उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। संगठन ने जिला इकाइयों से इस काम को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मध्यप्रदेश में हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य की सराहना की

भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने इंदौर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) एवं मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, सुलभ और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि जिस दक्षता और पारदर्शिता के साथ यह कार्य मध्यप्रदेश में हुआ है, वैसा उदाहरण देश के अन्य राज्यों में दुर्लभ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय प्रक्रियाओं में से एक है। मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शिता और दक्षता के कारण भारत आज विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के संगठन इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी  राम प्रताप सिंह जादौन, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  शिवम वर्मा भी विशेष रूप से मौजूद थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान वृद्धजन, दिव्यांगजन, प्रवासी श्रमिक, अशिक्षित नागरिकों तथा वंचित समुदायों तक मतदाता सेवाएँ पहुँचाने पर केंद्रित रहा है, जिससे कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे, साथ ही यह सुनिश्चित ‍किया जा रहा है कि किसी भी अपात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो। इसके लिये ‍विशेष गहन पुनरीक्षण का सफलतापूर्वक अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा सरल भाषा में दिशा-निर्देश, सोशल मीडिया जागरूकता अभियान, समाचार पत्र, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप, पंचायत स्तरीय बैठकों एवं मोहल्ला सूचना अभियानों के माध्यम से व्यापक जनजागरण किया गया।  कुमार ने बीएलओ की भूमिका को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क स्थापित करते हैं, नए मतदाताओं का पंजीयन करते हैं तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले बीएलओ की सराहना की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संचालन विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं। देश में चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में 1 करोड़ 80 लाख चुनावकर्मी शामिल होते हैं। यह संख्या दुनिया की कई बड़ी सरकारी और निजी संस्थाओं से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि इतने विशाल स्तर पर भी भारत की चुनाव प्रणाली पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करती है। चुनाव आयोग के डिजिटल नवाचारों का उल्लेख करते हुए ‘ईसीआई नेट’ (ECI Net) ऐप को पारदर्शिता और सुगमता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐप बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधे संपर्क का माध्यम बना है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका सफल उपयोग हो रहा है। मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता समझाते हुए बताया कि मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल, मतदान के दौरान पोलिंग एजेंट की उपस्थिति, फॉर्म 17-सी के माध्यम से रिकॉर्ड सत्यापन और मतगणना के दौरान एजेंटों की मौजूदगी भारत की चुनाव प्रणाली को अत्यंत विश्वसनीय बनाती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल आकार में ही नहीं, बल्कि सहभागिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में भी सबसे सशक्त है। उन्होंने विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशतों की तुलना करते हुए कहा कि भारत में स्वैच्छिक मतदान होने के बावजूद मतदान प्रतिशत कई अनिवार्य मतदान वाले देशों से अधिक रहता है, जो लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रमाण है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करना संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र मतदाताओं को चिन्हित कर सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हुए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने एसआईआर अभियान को उत्कृष्टता के साथ पूरा कर देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सभी बीएलओ को लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बताते हुए उनके समर्पण, परिश्रम और संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए बधाई दी तथा कहा कि सशक्त मतदाता ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने बीएलओ से संवाद करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा है और इसकी मजबूती में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) की उपलब्धियों, नवाचारों एवं सफलताओं पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बीएलओ ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर मतदाता सूची के परिशोधन एवं अद्यतन कार्य को सफलतापूर्वक संपादित किया गया। संवाद के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ने बीएलओ के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा ने कहा कि मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है तथा इस उपलब्धि के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को बधाई दी। भारत इस वर्ष International IDEA की अध्यक्षता कर रहा है और भारत निर्वाचन आयोग की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को वैश्विक स्तर पर साझा किया जाएगा। यह देश के लिए गर्व का विषय है।  झा ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं से भरा राज्य है, जिसके कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में कई चुनौतियाँ सामने आईं। वर्ष 2003 के पुराने डेटा को वर्तमान सॉफ्टवेयर सिस्टम के अनुरूप परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए विभाग ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने … Read more

श्रीअन्न के उत्पादन को दें प्राथमिकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक खेती में बड़ा स्कोप है। यह बड़े मुनाफे का काम है। किसानों को चाहिए कि वे परम्परागत खेती के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनायें। मुख्यमंत्री ने इस साल अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने कृषि कार्यों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक योजना बनाएं तथा कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को विशेष प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के माध्यम से जिलेवार सतत समीक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का विशेष महत्व है। किसान भाई-बहन खेतों में उपलब्ध नमी का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अधिकाधिक उपयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग द्वारा जारी तकनीकी सलाह का पालन करते हुए परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से विशेष रूप सेअन्न (मोटा अनाज) जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित अन्य कम पानी में सफलतापूर्वक पैदा होने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप होने के साथ कम लागत, अधिक पोषण एवं किसानों की आय वृद्धि के बेहतर विकल्प की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भीअन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर ही उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अपने अनुभव, परिश्रम और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा परिस्थितियों के अनुरूप हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी किसान को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों के हित भी हर तरह से सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कृषि और अन्नदाता प्रदेश के साथ देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है। इसी आशय से प्रदेश में वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों को कर रहे जागरूक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को मानसून और बारिश की अपडेट्स के लिए सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। बारिश कम होने की स्थिति में बीज उपचार, बुवाई की तकनीक, कम पानी में उपज देने वाली फसलों जैसे- बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग, अरहर, कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी फसलें कम पानी और कम अवधि में बेहतर उत्पादन के लिए अच्छा विकल्प हैं। इसके अलावा किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर भी मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी सलाह दी जा रही है।  

होर्मुज संकट पर PM मोदी का बड़ा बयान, बोले- भारतीय कूटनीति से 40 देशों से मिला तेल, संभले हालात

जोधपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान पहुंचे. PM मोदी ने राजस्थान में कहा कि जंग के चलते पूरी दुनिया पर असर हुआ है. भारत ने सही फैसले लिए, सही रणनीति बनाई और अपनी कूटनीतिक ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल किया, और इसी वजह से भारत इस संकट से उबरने में सफल रहा. भारत ने संकट का समय रहते आकलन किया है. पीएम मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान हमने 40 देशों से ईंधन प्राप्त किया।  प्रधानमंत्री ने कहा, जब कुछ ताकतें अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रही थीं, तब संकट से निपटने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे थे। PM मोदी ने कहा कि भारत ने संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया आज जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्घाटन किया गया है।  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से संकट में थे- PM मोदी PM मोदी ने कहा, भारत LPG आयात पर 60% तक निर्भर है. पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने के बाद हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन हमारे प्रयासों ने हमें इस संकट से उबरने में मदद की, राजस्थान की इस धरती ने हमें इससे उबरने में मदद की।  इसके अलावा PM मोदी ने कहा, राजस्थान में कांग्रेस सरकार के असहयोग के कारण रिफाइनरी का काम ठप पड़ा था, लेकिन राज्य में सत्ता में आने के बाद डबल इंजन वाली सरकार के कारण, हम आज रिफाइनरी का उद्घाटन करने में सफल रहे।  राजस्थान को जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो देंगे नई उड़ान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि राजस्थान हर रोज विकास के नए आयाम छू रहा है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो फेज-2 के उदघाटन इसी का उदाहरण है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो राजस्थान को नई उड़ान दे रहे हैं। अब राजस्थान हरियाणा लाए शेखावाटी के लिए पानी पीएम मोदी ने आगे कहा कि अभी भजनलाल शर्मा बड़े भावुक होकर पानी के काम का वर्णन कर रहे थे। राजस्थान हरियाणा दोनों में भाजपा की सरकार है। पहली बार आपसी सहमति से समाधान निकाले गए। हरियाणा और राजस्थान सरकार मिलकर शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाएंगे। वसुंधरा राजे के साथ पहले मिलकर किया राजस्थान के पानी का सपना साकार पीएम मोदी ने सूर्य उर्जा के बाद पानी के संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पानी लाने के लिए हमने पहले भी प्रयास किया और अब भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं गुजरात के रास्ते वसुंधरा राजे के कार्यकाल में राजस्थान का पानी का सपना साकार किया। राजस्थान पर सूर्य देवता की कृपा, हमने सोलर पार्क का काम चलाया प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान पर सूर्य देवता की कुछ ज्यादा ही कृपा है। लिहाजा यहां इस बात का फायदा उठाते हुए सरकार को विश्वस्तरीय सोलर पार्क बनाने का काम चल रहा ह। यहां पीएम सूर्यघर बिजली योजना के तहत 1.5 लाख से ज्यादा घरों, कुसुम योजना के तहत 65 हजार से ज्यादा सोलर पंप किसानों को दिए गए हैं। किसानों को लेकर की बात पीएम मोदी ने आगे कहा कि दुनिया में युद्ध और अशांति से हमारे किसानों के लिए भी चुनौतियां पैदा हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद एक यूरिया की बोरी 3000 हजार के ऊपर पहुंच गई। पीएम मोदी ने खाद का जिक्र करते हुए कहा कि जो दुनिया में 3000 की बोरी थी, वो हमने अपने किसानों को 300 रुपए में दे दी। तेल कंपनियों को हआ ₹75,000 का घाटा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में दाम नहीं बढ़ाए गए। अप्रैल से जून तक हमारी सरकारी तेल कंपनियों को ₹75,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ। यह घाटा इतना बड़ा है कि इसमें देश में एक पूरी नई रिफाइनरी खड़ी की जा सकती थी, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई। सरकारी खजाने से तेल कंपनियों के घाटे को कम किया गया भारत में नहीं आई सप्लाई की कोई दिक्कत पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी गई। छोटी-मोटी दिक्कतों को छोड़ दें, तो पूरे देश में सप्लाई पूरी तरह सामान्य और सुचारू रही। दूसरे देशों में 40 प्रतिशत तक हुआ पेट्रोल में इजाफा पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान देशों में पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी इजाफा हुआ। हाहाकार मच गया, लेकिन भारत ने फिर भी स्थिरता बनाई रखी। पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर जमकर राजनीति की गई और अफवाहें फैलाई गईं। उनके ये मंसूबे और साजिशें पूरी तरह असफल रहीं। युद्ध संकट में एलपीजी उत्पादन की बढ़ाई गई क्षमता पीएम मोदी ने बताया कि वैश्विक युद्ध संकट के दौरान देश में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए कदम उठाया गया। देश की जिन रिफाइनरियों ने अपने इतिहास में कभी एलपीजी (LPG) का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें आपातकालीन स्थिति में तुरंत री-कॉन्फ़िगर (तैयार) किया गया।एलपीजी उत्पादन की क्षमता बढ़ाई गई। एलपीजी सप्लाई कट गई तो राजस्थान से मिली सीख पीएम मोददी ने इस दौरान कहा कि 'अचानक युद्ध के हालातों के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से आने वाली देश की 90 एलपीजी प्रतिशत सप्लाई कट गई, तब राजस्थान की इस धरती की सीख काम आई। हमने तुरंत रिफाइनरी के काम पर फोकस किया और युद्ध स्तर पर घरेलू रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए'। राजस्थान की धरती ने चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया: पीएम मोदी बालोतरा के पचपदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने राजस्थान के शौर्य और परिश्रम को सलाम किया। पीएम ने इस दौरान वैश्विक स्तर पर हुए युद्ध संकटों का जिक्र करते हुए कहा, ' राजस्थान की धरती ने हमें हर मुश्किल से लड़ना और चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है। जोधपुर से शुरू हुई 'उड़ान' योजना से आने वाले दिनों में छोटे शहरों को करेगी एयर कनेक्ट जोधपुर में नए टर्मिनल के उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित 'उड़ान' (UDAN) योजना पर बात रखी। उन्होंने कहा कि जोधपुर में संशोधित उड़ान में आने वाले दिनों में छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी देगा। राजस्थान में इतनी गर्मी में इतने लोगों को आना भाजपा के प्रयासों पर विश्वास बालोतरा के … Read 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TMC में सियासी भूचाल, चंद्रिमा भट्टाचार्य का सभी पदों से इस्तीफा; ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शुरू हुए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बुरे दिन खत्म होते नहीं नजर आ रहे. पार्टी विधायक और सांसदों की बगावत के बाद अब बागी गुट ने कोलकाता में पार्टी के हेड ऑफिस पर भी कब्जा जमा लिया. अभी पार्टी दफ्तर पर कब्जे की रार मची ही है, इस बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है. बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर बताया कि वह 3 जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं. चंद्रिमा ने तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया. इसके अलावा, राज्य की पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की भूमिका से भी इस्तीफा दे दिया है।  टीएमसी में मच रही उठापठक के बीच ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा का इस तरह अचानक जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है।   जानकारी के मुताबिक, टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस पत्र में भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सांगठनिक पदों से मुक्त हो रही हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी 'साइनिंग अथॉरिटी' के पद से भी तत्काल प्रभाव से कदम पीछे खींच लिए हैं।  ममता के लिए ये कितना बड़ा झटका? चंद्रिमा को ममता का करीबी माना जाता है। वे सरकार से लेकर संगठन तक में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। पार्टी में जारी हालिया उथल-पुथल के बीच भी वे ममता के साथ खड़ी नजर आई थीं। हालांकि, उनके बेटे सौरव बसु को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक में देखा गया था। तबसे ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने ममता से दूरी बना ली है।     चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रही हैं और सरकार से लेक संगठन तक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 

8 जुलाई को वाराणसी से CM योगी करेंगे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ

मुख्यमंत्री 8 जुलाई को वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का करेंगे शुभारंभ  – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी घोषणा, देशभर में मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा – 7.89 लाख से अधिक बेसिक शिक्षा विभाग के लाभार्थियों ने कराया पंजीकरण, 3 जुलाई से माध्यमिक शिक्षकों के लिए भी पोर्टल शुरू – डिजिटल पोर्टल के जरिए होगा पंजीकरण, सत्यापन और ई-केवाईसी, शिक्षकों और उनके परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई वाराणसी में शिक्षकों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे। योजना के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अनुरूप कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना की घोषणा की थी।  बेसिक विभाग के 7 लाख से अधिक लाभार्थियों ने पोर्टल पर दर्ज कराई डिटेल्स साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए डिजिटल व्यवस्था को अपनाया गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पात्र लाभार्थियों का विवरण संकलित करने के लिए ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया। पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन डिजिटल प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए विकसित पोर्टल पर अब तक 7,89,032 लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। लाभार्थियों द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण का सत्यापन संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) द्वारा किया जाएगा। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अंतिम अनुमोदन प्रदान करेंगे। बीएसए स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के बेनिफिशरी एडेंटिफिकेशन सिस्टम (बीआईएस) पोर्टल से एकीकृत किया जाएगा। इसके पश्चात लाभार्थी आधार आधारित ईकेवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर अपना डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 3 जुलाई से पोर्टल शुरू माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों के लिए भी डेटा संग्रह पोर्टल 3 जुलाई से संचालित कर दिया गया है। पोर्टल पर शिक्षक अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज करेंगे। उनके आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अंतिम अनुमोदन देंगे। अनुमोदन के बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाएगा। आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी होने के बाद शिक्षक अपना कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। साचीज सीईओ ने बताया कि पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना के तहत लाभार्थियों को वही सभी सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ प्राप्त होंगे, जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उपलब्ध हैं। इसके साथ ही वे देशभर में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान शिक्षकों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। उच्च शिक्षा विभाग के लिए भी जल्द संचालित होगा पोर्टल योगी सरकार ने योजना का दायरा और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में भी तैयारी शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों एवं कार्मिकों के लिए भी शीघ्र ही अलग डेटा संग्रह पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी भी अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज कर योजना से जुड़ सकेंगे और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।