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सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के संकल्प की सिद्धि का प्रयास है यह यात्रा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ साक्षी है कि सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से प्रभावी होती है। सोमनाथ की प्रत्येक ईट, भक्ति का ताप और भारत के पुनरुत्थान का गौरव कहती है। इतिहास में कई बार मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। सत्रह बार आक्रमण के बाद भी शाश्वत शिव यहीं विराजते हैं। मंदिर के इतिहास में वर्ष 2026 खास महत्व रखता है। एक हजार वर्ष पहले 1026 में पहली बार मंदिर पर आक्रमण हुआ था। इसी वर्ष जनवरी में आक्रमण के ठीक एक हजार वर्ष बाद प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ में भव्य स्वाभिमान पर्व मनाया गया। बाबा सोमनाथ की दिव्यता और भव्यता आज भी अलौकिक और अद्वितीय है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' के प्रथम जत्थे को रवाना कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत निकाली जा रही है। मुख्यमंत्री को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप भेंट किया त्रिशूल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया और कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश की प्रमुख 21 नदियों के जल कलशों का भी पूजन–अर्चन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर ढोल–धमाकों और डमरू की थाप पर उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 21 नदियों का जल अर्पित करने के लिए यात्रियों को जल कलश तथा ध्वजा सौंपी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया। कार्यक्रम में विधायक  रामेश्वर शर्मा के साथ  रविन्द्र यती,  राहुल कोठारी, अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे। भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ यात्रा रहेगी अविस्मरणीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, नीमच, मंदसौर, आगर–मालवा आदि जिलों के तीर्थयात्रियों को लेकर यह ट्रेन, 8 मई को सोमनाथ पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन के सभी यात्रियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति "जियो और जीने दो'' की संस्कृति है। भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ परस्पर स्नेह और प्रेम के वातावरण में की गई यात्रा सभी भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहेगी। हम अपने जीवन का उपयोग भाईचारे के साथ कल्याणकारी कार्यों में करें और सम्पूर्ण मानव जाति को परिवार की तरह देखते हुए जीवनयापन करें, यही भारतीय संस्कृति का मूल्य है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में जारी सांस्कृतिक जागरण का अभियान राष्ट्रीय एकता को निरन्तर सुदृढ़ कर रहा है। भगवान राम के अयोध्या धाम और भगवान कृष्ण की मथुरा के साथ ही बंगाल के कालीघाट तक सनातन संस्कृति की ध्वजा चारों तरफ लहरा रही है। गंगोत्री से गंगा सागर तक यह भाव सर्वत्र व्याप्त है। महाकाल महालोक से सुदृढ़ हो रही एकता की भावना मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के लिए हेलिकॉप्टर सेवा आरंभ की गई है। इंदौर से उज्जैन, ओंकालेश्वर, महाकालेश्वर और भोपाल से ओरछा–चंदेरी तथा जबलपुर से मैहर की माता और कान्हा किसली तथा पेंच के लिए हेलिकाप्टर सेवा उपलब्ध है। राज्य सरकार ने 13 धार्मिक लोक का निर्माण कराया है। बाबा महाकाल का महालोक बनने के बाद उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। वर्तमान में प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक लोग उज्जैन में दर्शन के लिए पधार रहे है। इससे होटल, ऑटो, ठेले वाले आदि सभी के व्यवसाय में वृद्धि हो रही है। महाकाल महालोक देश के विभिन्न भागों में रह रहे लोगों के मध्य आपसी सांस्कृतिक आदान–प्रदान का अवसर उपलब्ध कराकर एकता की भावना को भी सुदृढ़ कर रहा है, यही एकता की भावना एकात्मता में परिवर्तित हो रही है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोगों को मिलेगा सोमनाथ मंदिर के दर्शन का लाभ विधायक  रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक महत्व के भवनों और स्थानों को वैभव प्रदान किया जा रहा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोगों को सोमनाथ मंदिर के दर्शन के साथ अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह यात्रा सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के संकल्प की सिद्धि का प्रयास है। यह यात्रा जन–जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा के भाव का संचार करेगी "मध्यप्रदेश से पहली बार निकलने वाली इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालुओं का दल सम्मिलित हो रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ की पावन धरा पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करेंगे। श्रद्धा और भक्ति के इस अनूठे संगम का समापन 11 मई, 2026 को होगा, जब यह दल सोमनाथ महादेव का आशीर्वाद और सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां लेकर वापस लौटेगा। यह यात्रा जन–जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा के भाव का संचार करेगी।  

चिलचिलाती धूप में फंसे लोग, कांग्रेस के प्रदर्शन से आमजन परेशान

इंदौर  किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को प्रदेशभर में चक्काजाम किया, लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। इंदौर के राऊ-पिगडंबर स्थित आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग (एबी रोड) पर ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर करीब सवा तीन घंटे तक सड़क जाम रखी। जिससे यात्री, विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और ट्रक चालक तेज गर्मी में बेहाल होते रहे। एंबुलेंस, बारात और यात्री बसें तक जाम में फंस गईं। जीतू पटवारी का नेतृत्व: मक्सी टोल प्लाजा पर प्रदर्शन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शाजापुर के मक्सी रोजवास टोल प्लाजा पर भी प्रदर्शन किया, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज दबाई जा रही है, जरूरत पड़ी तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। आरोप लगाया कि गेहूं बेचने के लिए किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और टोकन व्यवस्था पूरी तरह फेल है। इस दौरान पटवारी गेहूं से भरी ट्राली पर बैठे रहे, जिससे ट्राली से गेहूं सड़क पर बिखर गया और कार्यकर्ता उसी पर चलते रहे। इंदौर में ट्रैक्टर-ट्रालियों से दोनों लेन बंद, लगा लंबा जाम इधर, इंदौर के मेडिकैप्स चौराहे पर कांग्रेस और किसान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुबह करीब 11 बजे ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर एबी रोड की दोनों लेन बंद कर दीं। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आंदोलन में विधायक विक्रांत भूरिया, बदनावर विधायक भैरोसिंह शेखावत, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी, इंदौर कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और किसान कांग्रेस अध्यक्ष जीतू ठाकुर समेत कई नेता शामिल हुए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कुछ देर रुक कर अपनी बात रखी। दोपहर ढाई बजे आंदोलन खत्म हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त: छात्र और बाराती हुए परेशान चक्काजाम से मेडिकैप्स यूनिवर्सिटी की कक्षाएं प्रभावित हुईं और विद्यार्थी कॉलेज नहीं पहुंच सके। बारात की गाड़ी करीब एक घंटे तक सड़क पर अटकी रही। जयपुर से महू जा रहीं यात्री जयवंती सोनी तीन घंटे तक बस में फंसी रहीं। वहीं पीथमपुर में नौकरी ज्वाइन करने जा रहे अर्जुन झा समय पर कंपनी नहीं पहुंच सके। धार के खलघाट और खरगोन-धार-बड़वानी सीमा क्षेत्र में भी प्रदर्शन हुआ।  

बेटियों की शिक्षा के पर्याप्त प्रबंध करना, हर माता-पिता का दायित्व

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति में विवाह जन्म-जन्मांतर का पवित्र बंधन है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहे वर-वधुओं के लिए आने वाला समय कई जिम्मेदारियां लेकर आता है। सभी परिवारों के लिए विवाह का आयोजन आनंद और उत्सव का वातावरण निर्मित करता है। सामूहिक विवाह सम्मेलन में एक ही मंडप में समाज के विभिन्न वर्गों के बेटे-बेटी वैवाहिक बंधन में बंधते हैं, सामूहिक चेतना का यह उत्सव फिजूल खर्ची और दिखावे पर रोक का संदेश देता है। सरकार और समाज ने जब से सामूहिक विवाह का बीड़ा उठाया है तब से गरीब माता-पिता ने चैन की सांस ली है। समाज के समृद्ध लोग सादगी को अपने व्यवहार में उतारे और सामूहिक विवाह सम्मेलनों में विवाह का ट्रेंड सेट करें। इससे समाज का हर वर्ग विवाह के अनावश्यक खर्च से बचेगा और उपलब्ध संसाधनों का परिवार के भविष्य निर्माण में उपयोग किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी अपने पुत्र का विवाह सामूहिक सम्मेलन में ही किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियों की शिक्षा की चिंता करना और उसके लिए पर्याप्त प्रबंध करना, हर माता-पिता का दायित्व हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित 200 बेटियों के सामूहिक विवाह सम्मेलन को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर-वधु को आशीर्वाद प्रदान कर उनके परिजन को शुभकामनाएं दीं। सामूहिक विवाहों के आयोजन से माता-पिता को नहीं लेना पड़ रहा है कर्ज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दिसंबर 2023 से अप्रैल 2026 तक 1 लाख 70 हजार 187 बेटियों के विवाह मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के तहत कराये गए है। योजना अंतर्गत अब तक लगभग 1000 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन से आर्थिक रूप से कमजोर भाई-बहनों की बेटियां भी पूरे सम्मान के साथ विदा होती हैं। समाज का कोई भी वर्ग हो, बच्चों का विवाह हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। सामूहिक विवाहों के आयोजन से अब विवाह के लिए माता-पिता को कर्ज नहीं लेना पड़ रहा है। समाज और सरकार एक-दूसरे के पूरक हैं। परिवर्तन के लिए समाज और सरकार दोनों का हाथ मिलाकर चलना जरूरी है। सामूहिक विवाह सम्मेलन जैसे आयोजन वर्तमान समय में समाज सेवा का सर्वोत्तम माध्यम बन चुके हैं। सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित कार्यक्रम में विधायक आष्टा  गोपाल सिंह इंजीनियर, अध्यक्ष जनपद पंचायत आष्टा मती दीक्षा सोनू गुणवान, जनप्रतिनिधि सहित वर-वधु और उनके परिजन उपस्थित थे।  

तीनों सेनाओं ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का विस्तृत हाल, 13 एयरक्राफ्ट और 11 बेस तबाह

नई दिल्ली   भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताया. पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के एक साल बाद सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऑपरेशन की सफलता और उसके सबकों पर विस्तार से चर्चा की।  लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश भारती और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने संयुक्त रूप से कहा कि यह ऑपरेशन आतंकवादियों और उनके समर्थन ढांचे के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का एक प्रतीक है. उन्होने कहा कि भारत ने 13 पाकिस्तानी विमान गिराए, 11 बेस को तबाह किया और 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों मार गिराया।  'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने गुरुवार को कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, पेशेवर तरीके से और पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगा, और आतंक के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी।  राजस्थान के जयपुर में 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट घई ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हो गया है, और उस समय के डीजीएमओ के तौर पर, मैं इसे न सिर्फ एक मिलिट्री ऑपरेशन बल्कि शायद भारत की रणनीतिक यात्रा में एक अहम पल के तौर पर देखता हूं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों और तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और पाकिस्तान के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंक को टारगेट किया।  ऑपरेशन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सटीकता, अनुपात और मकसद की स्पष्टता के साथ, यह एक देश का पक्का इरादा, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का बयान था।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि शुरू से ही सरकार ने हमें दो साफ निर्देश दिए थे, साफ राजनीतिक-मिलिट्री मकसद और इन्हें पाने के लिए परिचालन लचीलापन. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आतंक पारिस्थितिकी तंत्र (terror ecosystems) को खत्म करना और कमजोर करना, उनकी प्लानिंग में रुकावट डालना और इन बेस से भविष्य में होने वाले हमले को रोकना बहुत साफ-साफ बताया गया था. जबकि आर्म्ड फोर्सेज को इस ऑपरेशन की प्लानिंग करने और उसे पूरा करने के लिए जरूरी चीजें सौंपी गई थीं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई अंत नहीं है, यह तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा, "आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी. भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, प्रोफेशनल तरीके से और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करेगा।  यह बताते हुए कि ऑपरेशन तीनों सेनाओं का एक मिला-जुला प्रयास था, लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि इसमें जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को हालात की जानकारी, कॉमन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस तस्वीरों और रियल टाइम में फैसले लेने के साथ जोड़ा गया।  उन्होंने कहा, "सटीक हमले, कुल नौ, जिनमें से सात भारतीय सेना ने और दो भारतीय वायुसेना ने किए, एकदम सही समय पर किए गए, पूरी तरह से हैरान करने वाले थे और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर और पाकिस्तान के बीचों-बीच हर बने हुए हब में ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाया।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि ऑपरेशन ने स्वदेशी क्षमता को भी दिखाया और कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार सिस्टम, गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइल, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया और बनाया गया था।  उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस, आकाश, एडवांस्ड सर्विलांस और टारगेटिंग सिस्टम के साथ-साथ देसी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स, सभी ने अहम भूमिका निभाई. एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि पहलगाम की घटना अपने आप में एक ऐसी घटना थी जिसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम होगी।  उन्होंने कहा, "हम 22 अप्रैल, 2025 को बेरहमी से मारे गए अपने देश के लोगों को वापस नहीं ला सकते. लेकिन हम यह पक्का करने का पक्का इरादा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. ऑपरेशन सिंदूर, जो अभी रुका हुआ है, उसी इरादे की तरफ एक कोशिश है।  यह कहते हुए कि भारत जियो और जीने दो की सीधी-सादी सोच के साथ जीता है. उन्होंने कहा, "लेकिन, जब शांति की हमारी चाहत को कमजोरी समझ लिया जाता है, और हमारी चुप्पी को गैर-मौजूदगी समझ लिया जाता है, तो काम करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. जब हम काम करते हैं, तो कोई आधा-अधूरा तरीका नहीं होता. यह अहम होता है, यह जानलेवा होता है, और यह ऑपरेशन सिंदूर में बदल जाता है।  इससे पहले दिन में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर, हम अपने सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को सलाम करते हैं, जिनका साहस और समर्पण देश की सुरक्षा करता रहता है. ऑपरेशन के दौरान उनके कामों में बेमिसाल सटीकता, बिना रुकावट के तालमेल और सभी सेनाओं के बीच गहरा तालमेल दिखा, जिसने मॉडर्न मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए एक बेंचमार्क सेट किया।  मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर देश के पक्के इरादे और तैयारी का एक मजबूत निशान है, जो दिखाता है कि हमारी सेनाएं सबसे जरूरी समय पर मजबूती से काम करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।  उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति का भी प्रमाण है, जो लचीलेपन को मजबूत करते हुए क्षमता को बढ़ाता है। 

इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम

रायपुर बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय “सल्फी” को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। हर्षवर्धन “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके। उन्होंने बताया कि सल्फी का रस पेड़ से निकालने के कुछ समय बाद ही प्राकृतिक रूप से किण्वित होने लगता है, जिससे यह हल्का मादक पेय बन जाता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हर्षवर्धन ने अपने प्रयोगों के माध्यम से इस फरमेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सल्फी की मूल गुणवत्ता और स्वाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके। बस्तर की संस्कृति से जुड़ी है सल्फी सल्फी बस्तर की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग “बस्तर बीयर” के नाम से भी जानते हैं। यह कैरियोटा यूरेन्स (Caryota urens) नामक ताड़ प्रजाति के पेड़ से निकलने वाला मीठा रस है। ताज़ा सल्फी का स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और ताज़गीभरा होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद इसमें प्राकृतिक खमीर बनने लगता है, जिससे यह हल्का नशीला हो जाता है।ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सल्फी का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष है। विवाह, पारंपरिक उत्सव और सामाजिक आयोजनों में इसे प्रमुखता से परोसा जाता है। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सल्फी पर निर्भर है। स्थानीय लोग इसे पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी भी मानते हैं। जीआई टैग दिलाने का सपना हर्षवर्धन का सपना है कि बस्तर की इस पारंपरिक पेय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। वे चाहते हैं कि सल्फी को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक पेय के रूप में प्रचारित किया जाए और भविष्य में इसे बस्तर के लिए जीआई टैग भी प्राप्त हो।उनका मानना है कि यदि सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो यह बस्तर के आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

जिस मंत्री के जवाब से नाराज थीं मैथिली ठाकुर, सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ

पटना  बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो गया है. नीतीश कुमार के बेटे सहित 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है. बीजेपी कोटे से 15 मंत्री बनाए गए हैं तो जेडीयू से 13 मंत्री बने हैं. इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री बने हैं।  सम्राट सरकार में ज्यादातर नीतीश कैबिनेट में रहने वाले मंत्रियों को ही जगह मिली है. ऐसे में बीजेपी के एक ऐसे दिग्गज मंत्री का पत्ता सम्राट कैबिनेट से कट गया है, उनका नाम मंगल पांडेय है. बीजेपी ने तीन पुराने मंत्रियों को सम्राट सरकार में जगह नहीं दी है।  मंगल पांडेय सीवान से विधायक हैं और बीजेपी के दिग्गज नेता हैं. नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. इसी साल फरवरी में बजट सत्र के दौरान मशहूर लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली का मुद्दा उठाया था. इस पर स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा दिए जवाब से संतुष्ट नहीं थी और उसी मंत्री मंगल पांडेय का पत्ता कट गया है।  मंगल पांडेय का मंत्री पद से पत्ता कटा बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता मंगल पांडेय को सम्राट चौधरी के अगुवाई वाली सरकार में जगह नहीं मिल सकी. बीजेपी ने उन्हें इस बार मंत्री नहीं बनाया है जबकि इससे पहले वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जैसा विभाग संभाल रहे थे. मंगल पांडेय 2017 से लेकर 2022 तक स्वास्थ्य मंत्री रहे. तब मंगल पांडेय को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था।   मंगल पांडेय 2024 से लेकर 2025 तक दूसरी बार मंत्री बने. इस बार स्वास्थ्य मंत्री और कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. साल 2025 में जब एनडीए की सरकार बनी तो फिर से मंत्री बने और उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा मिला, लेकिन सम्राट चौधरी के अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।  स्वास्थ्य मंत्री से मैथिली ठाकुर ने किया सवाल 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर बीजेपी से विधायक चुनी गई. मैथिली ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में अस्पताल की इमारत की हालत का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यह इतनी जर्जर है कि एक बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है.उन्होंने कहा था कि छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी रिसता है, जो लोगों की जिंदगी लिए सीधा खतरा है।  मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया था कि बिहार सरकार द्वारा हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाने के बाद अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब हालत में क्यों हैं? उन्होंने कहा Le कि डॉक्टरों और दवाओं की कमी एक समस्या है,लेकिन इससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं. क्या सरकार नए भवनों के निर्माण से पहले किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही है।  मंगल पांडेय के जवाब से संतुष्ट नहीं मैथिली बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के सवालों का जवाब देते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की इमारतों को लेकर गंभीर है. कई अस्पतालों के लिए नई बिल्डिंग को मंजूरी दे दी गई है और कुछ जगह पर काम जारी है. हालांकि, मंत्री के जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नहीं हुईं।  उन्होंने सदन में ही तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके इलाके का अस्पताल कई सालों से लिस्ट में है, लेकिन आज तक न मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नई इमारत बनी है. उन्होंने कहा था कि कागजों पर जो 'सब ठीक' बताया जा रहा है, धरातल पर सच्चाई उसके ठीक उलट है।  मैथिली ठाकुर ने कहा था कि हर साल सिर्फ योजना बनाने और मंजूरी देने की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि मरीज और उनके परिवार डर के साये में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं. मैथिली ठाकुर के बार-बार पूछे गए सवालों के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था. तीन महीने के बाद ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी के अगुवाई में कैबिनेट गठन किया तो मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली।  बिहार में तीन पुराने मंत्रियों का पत्ता कटा नीतीश कुमार के अगुवाई वाली सरकार में जितने भी मंत्री थे, उनमें से तीन मंत्री को छोड़कर बाकी मंत्रियों को सम्राट कैबिनेट में जगह मिल गई है. सम्राट कैबिनेट में मंगल पांडे को जगह नहीं मिली. इसके अलावा नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता को भी जगह नहीं मिली. नीतीश सरकार में नारायण प्रसाद आपदा प्रबंधन मंत्री थे और इससे पहले पर्यटन मंत्री रह चुके हैं. सुरेंद्र मेहता पूर्व की नीतीश सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री थे, लेकिन इस बार उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। 

सिंधूर बरसी पर भारत का सख्त संदेश: आजादी के बाद पहली बार रोका रावी का पानी

नई दिल्‍ली  दशकों से रावी की लहरें अपनी ही मिट्टी को प्यासा छोड़कर सरहद पार उस मुल्क की ओर बह जाती थीं जिसने दोस्ती के बदले हमेशा दगा दिया. लेकिन अब वक्त बदल चुका है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर भारत ने पानी की एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दी है जिसने भूगोल और किस्मत दोनों को बदल कर रख दिया. शाहपुर कंडी बैराज के कपाट क्या खुले मानो हिमालय की गोद से निकला नीर भारत की संप्रभुता का शंखनाद करने लगा. पहली बार रावी का पानी अपनी पुरानी राह छोड़ पूरी ठसक के साथ कठुआ के उझ बैराज की ओर मुड़ गया. यह सिर्फ पानी का बहाव नहीं, पाकिस्तान के लिए एक सख्त संदेश है कि अब भारत के हक की एक बूंद भी मुफ्त में सीमा पार नहीं जाएगी. जहां कल तक जम्मू-कश्मीर की कंडी बेल्ट की धरती प्यास से चटक रही थी, वहां आज रावी की गर्जना किसानों के चेहरों पर मुस्कान और पाकिस्तान के हलक में खुश्की बनकर उतरी है।  आजादी के बाद पहली बार पाक नहीं जाएगा रावी का पानी पंजाब के पठानकोट जिले में बने शाहपुर कंडी डैम से एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. पहली बार रावी नदी के पानी को उज्ह बैराज तक डायवर्ट करने का काम शुरू कर दिया गया है. आजादी के बाद यह पहला मौका है जब रावी नदी के पानी का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और पंजाब में बड़े स्तर पर किया जाएगा।  भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग करते हुए दशकों के इंतजार के बाद रावी नदी का वह पानी जो अब तक बहकर पाकिस्तान चला जाता था, उसे पूरी तरह रोककर जम्मू-कश्मीर की प्यासी धरती की ओर मोड़ दिया गया है. शाहपुर कंडी बैराज परियोजना के पूरे होने के साथ ही रावी का पानी पहली बार कठुआ स्थित उझ बैराज तक पहुंच गया है. यह घटनाक्रम न केवल कृषि के लिहाज से क्रांतिकारी है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत की एक बड़ी जीत मानी जा रही है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के अवसर पर मिली यह सफलता भारत की जल सुरक्षा नीति को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है. कठुआ और सांबा के कंडी बेल्ट में आज दिवाली जैसा माहौल है क्योंकि अब यहां के खेतों को मानसून के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।  पंजाब में 5000 हैक्‍टेयर जमीन पर 12 महीने सिंचाई अब तक रावी नदी का अधिकांश पानी जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा से होकर पाकिस्तान चला जाता था, जबकि भारत के सीमावर्ती इलाकों के किसान सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहते थे. खासकर उज्ह बैराज में केवल बरसात के मौसम में 2 से 3 महीने तक ही पानी रहता था और उसके बाद बैराज लगभग सूख जाता था. लेकिन शाहपुर कंडी डैम बनने के बाद तस्वीर बदलनी शुरू हो गई है. डैम से उज्ह बैराज तक बनाई गई नई नहर के जरिए अब पानी पहुंचाया जा रहा है. इससे किसानों को लगभग पूरे साल सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।  इस परियोजना से पंजाब की करीब 5000 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जबकि जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की लगभग 32 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा फायदा पहुंचेगा. इसके साथ ही इस परियोजना से 206 मेगावाट बिजली उत्पादन भी किया जाएगा, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।  पाकिस्‍तान जाने वाली सभी 6 नदियों के पानी का हो रहा इस्‍तेमाल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इंडस वॉटर ट्रीटी को “केप्ट इन एबेयंस” रखने का फैसला लिया, जिसके बाद अब भारत अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल रणनीतिक और विकासात्मक जरूरतों के अनुसार कर रहा है. अब केवल रावी, सतलुज और ब्यास ही नहीं बल्कि चिनाब, झेलम और इंडस नदी के पानी के उपयोग को लेकर भी भारत ने अपनी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. पहले भारत को इन नदियों पर काम करने के लिए कई शर्तों और पाकिस्तान के साथ सूचना साझा करने की प्रक्रिया का पालन करना पड़ता था लेकिन अब कई वर्षों से लंबित परियोजनाओं को मंजूरी देकर तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।  विकास की नई धारा · ऐतिहासिक उपलब्धि: शाहपुर कंडी बैराज से पानी का प्रवाह शुरू होने के बाद रावी का पानी पहली बार आधिकारिक तौर पर उझ बैराज तक पहुंचा है. · सिंचाई की बड़ी सौगात: इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर और पंजाब की लगभग 37,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी. · जम्मू-कश्मीर को मुख्य लाभ: कुल सिंचित भूमि में से 32,000 हेक्टेयर हिस्सा अकेले जम्मू-कश्मीर में आता है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी. · कंडी क्षेत्र का कायाकल्प: कठुआ और सांबा जिले के कंडी बेल्ट के किसान जो दशकों से पानी की किल्लत झेल रहे थे अब साल भर सिंचाई की सुविधा का लाभ उठा पाएंगे. · पाकिस्तान की मुश्किलें: भारत द्वारा अपने हिस्से का पानी रोकने से पाकिस्तान के कई इलाकों में जल संकट गहराने की आशंका है जो अब तक मुफ्त के पानी पर निर्भर थे. ऑपरेशन सिंदूर और जल कूटनीति भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि (1960) के प्रावधानों के तहत रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर अपने पूर्ण नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू किया है. शाहपुर कंडी परियोजना का पूरा होना भारत की उस दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है जहां उसने तय किया कि अपने हक की एक बूंद भी सीमा पार नहीं जाने दी जाएगी।  सामरिक दृष्टि से, यह परियोजना पाकिस्तान पर दबाव बनाने का एक सॉफ्ट पावर टूल भी है. पाकिस्तान जो अब तक रावी के सरप्‍लस पानी का उपयोग कर रहा था अब उसे अपनी कृषि नीतियों पर दोबारा से विचार करना होगा. वहीं भारत के लिए यह कदम खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा मील का पत्थर है। 

72 घंटे में भारत की जीत, अमेरिकी विशेषज्ञ ने साझा किया रणनीति का विश्लेषण

 नई दिल्ली अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कहा है कि भारत ने इस संघर्ष में रणनीतिक रूप से बड़ी जीत हासिल की. उन्होंने बताया कि 10 मई की सुबह तक भारत ने हवाई क्षेत्र में पूरी श्रेष्ठता बना ली थी, जबकि पाकिस्तान अपने हवाई ऑपरेशनों को जारी रखने में कमजोर हो चुका था।  यह नतीजा किसी एक हमले या छोटी लड़ाई का परिणाम नहीं था, बल्कि कई दिनों तक चली सावधानीपूर्वक योजना और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने की मुहिम का नतीजा था. मई 2025 में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए।  जब पाकिस्तान ने भारत के शहरों और सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया, तब भारत ने भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मजबूत जवाब दिया. यह चार दिन का संघर्ष 10 मई को पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम के साथ खत्म हुआ. इस दौरान भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम और कई अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया।  भारत की रणनीति कैसे काम की अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर जॉन स्पेंसर अब मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज के चेयर और अर्बन वारफेयर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर विस्तार से बताया कि भारत ने कैसे पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कमजोर किया. उन्होंने कहा कि 8 मई को भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा ठिकानों पर हमले किए, जिनमें चूनियां और पासरूर में अर्ली वार्निंग रडार और कम से कम एक HQ-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी शामिल थी. 9 मई को भी और हमले किए गए।  ये हमले ज्यादातर लॉइटरिंग मुनिशन से किए गए. इनका मकसद था कि पाकिस्तान के रडार और मिसाइल सिस्टम को लगातार दबाव में रखा जाए, चाहे वे पहले हमलों से बचे हों या नई जगह पर तैनात किए गए हों. स्पेंसर ने लिखा कि इन हमलों से पाकिस्तान की देखने, कॉर्डिनेशन करने और जवाब देने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई. हवाई युद्ध में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे पहले कि लड़ाकू विमान आमने-सामने आएं, दुश्मन की रक्षा प्रणाली ही ध्वस्त हो जाती है।  S-400 ने बदला खेल, पाकिस्तानी विमानों पर हालत खराब हो गई स्पेंसर ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई. भारत की S-400 मिसाइल सिस्टम ने एक हाई वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को करीब 300 किलोमीटर दूर से निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान एयर फोर्स को यह सोचना पड़ा कि वे कहां और कैसे अपने विमानों को उड़ा सकते हैं. इस वजह से पाकिस्तानी विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र सीमित हो गया. उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ी।  स्पेंसर ने माना कि शुरू के कुछ घंटों में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय विमानों को गिराने में सफलता हासिल की. यह शुरुआती सफलता पाकिस्तान के लिए प्रचार का अच्छा मौका बनी, लेकिन स्पेंसर कहते हैं कि छोटी-मोटी सफलता पूरे अभियान की जीत नहीं तय करती।  पाकिस्तान ने बाद में सैकड़ों ड्रोन, CM-400एकेजी मिसाइलें, फतेह और हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत की एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें रोक लिया. भारत ने अपनी स्वदेशी आईएसीसीसीएस (Integrated Air Command, Control and Communication System) और आकाशतीर प्रणाली का इस्तेमाल किया, जिसने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम कर दिया।  आधुनिक युद्ध: सिर्फ विमान नहीं, पूरा सिस्टम लड़ता है जॉन स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान एक-दूसरे से नहीं लड़ते. इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कमांड नेटवर्क और एकीकृत सिस्टम बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत के पास बड़े पैमाने, गहराई और बेहतर एकीकरण था. इसी वजह से भारत शुरुआती झटके को सहन कर सका और फिर अपना ऑपरेशनल टेम्पो पाकिस्तान पर थोप दिया।  दूसरी ओर पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से मिले हथियारों पर निर्भर था. शुरुआत में इनसे कुछ सफलता मिली, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान की महत्वपूर्ण नोड्स को नष्ट कर दिया तो पाकिस्तान लड़ने लायक नहीं बचा।  रणनीतिक जीत भारत की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिखाया कि अच्छी योजना, स्वदेशी तकनीक और मजबूत एकीकरण से छोटी-मोटी शुरुआती असफलताओं को भी पलटकर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है. जॉन स्पेंसर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने हवाई श्रेष्ठता हासिल कर पाकिस्तान को ऑपरेशन करने लायक ही नहीं छोड़ा. यह संघर्ष दिखाता है कि भविष्य के युद्धों में सिस्टम की मजबूती और निरंतर दबाव कितना निर्णायक साबित होता है। 

नोएडा एयरपोर्ट: लखनऊ की पहली उड़ान, टिकट बुकिंग शुरू और किराया जानें

 ग्रेटर नोएडा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत की आधिकारिक तारीख और रूट फाइनल हो गया है. IndiGo आज से अपनी उड़ानों के लिए टिकटों की बिक्री शुरू करने जा रही है।  एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट 15 जून को उड़ान भरेगी. यह न सिर्फ जेवर एयरपोर्ट के लिए बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. इंडिगो इस एयरपोर्ट से ऑपरेशन शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है।  लखनऊ-नोएडा के बीच पहला रूट शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा के लिए संचालित की जाएगी. यह रूट उत्तर प्रदेश की राजधानी और उभरते हुए औद्योगिक हब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को कई गुना मजबूत कर देगा. किराए की बात करें तो 10 हजार रुपये से शुरू होगा।  15 जून की स्पेशल फ्लाइट्स डिटेल:-  लखनऊ से नोएडा, नोएडा से लखनऊ नोएडा से बेंगलुरु, बेंगलुरु से नोएडा 16 जून से नोएडा से लखनऊ के अलावा जम्मू, श्रीनगर, धर्मशाला सहित 16 मंजिलों के लिए फ्लाइट्स चलेंगी।  1 जुलाई से उड़ानों के शेड्यूल का विस्तार होगा. दरअसल, 1 जुलाई से नोएडा पर हर दिन लगभग 28 उड़ानें उतरेंगी और उड़ान भरेंगी. इसके अलावा, कुछ स्पेशल डेस्टिनेशन के लिए स्पेशल उड़ानें भी होंगी।  बिजनेस और टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट जेवर एयरपोर्ट को भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.  इसके शुरू होने से दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को अब फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली (IGI) एयरपोर्ट जाने की मजबूरी नहीं होगी।  इसके अलावा, एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से इलाके में नए इन्वेस्टमेंट और व्यापारिक अवसरों के द्वार खुलेंगे. साथ ही आगरा और मथुरा जैसे पर्यटन केंद्रों के करीब होने के कारण विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह पसंदीदा विकल्प बनेगा। 

ममता के इस्तीफे की घोषणा नहीं, बंगाल में असामान्य स्थिति अगले दो दिन

कलकत्ता पश्चिम बंगाल अगले कुछ घंटों के लिए एक गजब संवैधानिक संकट की ओर जा रहा है. सीएम ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से दो-दो बार इनकार कर दिया है. पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल आज यानी कि 7 मई को खत्म हो रहा है. अगर ममता बनर्जी आज 12 बजे रात तक इस्तीफा नहीं देती हैं तो 8 मई की रात 12 बजे से लेकर राज्य में नई सरकार बनने तक पश्चिम बंगाल की कमान किसके हाथ में होगी. पश्चिम बंगाल को संभालेगा कौन? बीजेपी ने कहा है कि उसका नया सीएम 9 मई को शपथ लेगा. ऐसी स्थिति में बंगाल में क्या होगा. 8 से 9 मई तक पश्चिम बंगाल की संवैधानिक स्थिति क्या होगी?  बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में ये अहम सवाल बनकर उभरा है।   संविधान का अनुच्छेद-172 राज्य विधानसभाओं का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित करता है. पहली बैठक की तारीख से ये गणना शुरू होती है. 5 वर्ष पूरे होते ही विधानसभा का स्वतः विघटन (automatic dissolution) हो जाता है. इसके लिए किसी आदेश की जरूरत नहीं. इस लिहाज से गुरुवार (7 मई) रात 12 बजते ही पुरानी विधानसभा अपने आप भंग हो जाएगी, इसके साथ ही सीएम, मंत्री, विधायक सभी का दर्जा खत्म हो जाएगा और इनका वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा।  अब राज्यपाल आर एन रवि क्या करेंगे? संविधान का अनुच्छेद-164 कहता है कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत ही अपने पद पर बने रह सकते हैं. चुनाव हारने के बाद बहुमत खोने पर राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकता है और बहुमत वाली पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है।  अगर सत्ता गंवाने वाला CM इस्तीफा नहीं देते हैं तो राज्यपाल को अधिकार है कि वह मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दे।  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल कहते हैं, "चूंकि ममता ने इस्तीफा नहीं दिया है, इसलिए उनका कार्यकाल 7 मई को अपने आप खत्म हो जाएगा।  गवर्नर को यह फैसला लेना होगा कि क्या वे उस परंपरा का पालन करेंगे जिसके तहत वे ममता को अगले CM के शपथ लेने तक पद पर बने रहने को कह सकते हैं।  पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल कहते हैं कि हो सकता है कि राज्यपाल 9 तारीख को नई सरकार के शपथ लेने तक एक दिन के लिए कोई व्यवस्था कर दें. यह एक अभूतपूर्व स्थिति है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. लेकिन रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि यथास्थिति कायम रखा जाएगा।  ECI ने केंद्रीय बल तैनात कर दिए हैं और गवर्नर ने आदेश जारी किया है कि कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।  कानूनी तौर पर इसका कोई उदाहरण नहीं है लेकिन गवर्नर के पास अंतरिम व्यवस्था करने की शक्ति है. अब तक की परंपरा यही रही है कि वे मौजूदा CM से तब तक पद पर बने रहने को कहते हैं, जब तक कि अगला व्यक्ति शपथ न ले ले।  चुनाव आयोग के अनुसार मौजूदा बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 8 मई 2021 को शुरू हुआ था और 7 मई को समाप्त हो रहा है. इसके बाद, राज्यपाल को नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी. जिसका मतलब है कि नए विधायकों को शपथ लेनी होगी और एक नई सरकार का चुनाव करना होगा।  अगर बनर्जी सचमुच अपने फैसले पर कायम रहती हैं और कोई गतिरोध पैदा होता है तो यह एक अभूतपूर्व घटना होगी।  मैं इस्तीफा नहीं दूंगी-ममता ममता बनर्जी ने 5 मई 2026 को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि वे इस्तीफा नहीं देंगी, उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, इसका सवाल ही नहीं उठता, मैं हारी नहीं हूं, मैं राजभवन नहीं जाऊंगी।  ममता ने कहा हम चुनाव नहीं हारे हैं, हमें हराया गया है. चुनाव आयोग के माध्यम से वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने चुनाव जीता है।  6 मई 2026 को ममता बनर्जी ने TMC के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में अपने इस्तीफे पर दोबारा सख्त रुख दोहराया. उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी.चाहे वे मुझे बर्खास्त कर दें. मैं चाहती हूं कि यह काला दिन हो।