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विजय की सरकार तो बनेगी, मगर चलाने में RBI की मदद जरूरी, समझिए कैसे

चेन्नई  थलपति विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने की स्थिति में है. ऐसे में अब विजय ने चुनावी घोषणापत्र में जो वादे किए थे, उसपर निगाहें टिक गई हैं. इनमें से सबसे अहम है सोना बांटने वाला वादा. थलापति विजय ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हर नवजात बच्‍चे को सोने की अंगुठी और दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना और सिल्‍क की साड़ी देने का वादा किया था. अब विजय प्रदेश में सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि थलापति विजय इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से लाएंगे. बता दें कि तमिलनाडु में हर साल लाखों बच्‍चे जन्‍म लेते हैं और लाखों की तादाद में शादियां होती हैं. यदि गरीबी रेखा से नीचे वाले सिद्धांत पर भी चला जाए तो भी दोनों को मिलाकर लाखों की तादाद में लाभार्थी होंगे. इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि विजय को इसके लिए आरबीआई से भी मदद लेनी पड़ सकती है।  थलापति विजय ने सरकार बनने पर जिन कल्‍याणकारी योजनाओं को लागू करने का वादा किया है, यदि उसपर अमल किया गया तो तमिलनाडु सरकार का वेलफेयर बिल (कल्‍याणकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च) 52 फीसद तक बढ़ सकता है. इस मद में फिलहाल 65000 करोड़ रुपया खर्च होता है जो बढ़कर 1 लाख करोड़ के आसपास पहुंच जाएगा. अब सोना देने के वादे के आर्थिक पहलू पर बात करते हैं. दरअसल, TVK ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग देने के लिए एक अहम वादा किया है. पार्टी ने सालाना 5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और एक सिल्क साड़ी देने का आश्वासन दिया है. मौजूदा 22 कैरेट सोने की कीमत करीब 14,000 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से केवल सोने की कीमत ही लगभग 1.12 लाख रुपये प्रति लाभार्थी बैठती है. तमिलनाडु में हर साल 4 से 5 लाख शादियां होती हैं. एक आकलन के अनुसार, 60 फीसद परिवार विजय की स्‍कीम के तहत फिट बैठते हैं. ऐसे में हर साल लगभग 2.7 लाख दुल्हन सोने की हकदार हो सकती हैं. इस तरह सिर्फ दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना देने में 3000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का खर्च आने का अनुमान है।  नवजात को भी गोल्‍ड रिंग देने का वादा इतना ही नहीं, थलापति विजय ने प्रदेश में पैदा होने वाले हर नवजात को गोल्‍ड रिंग देने का वादा किया है. 2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की आबादी करीब 7.21 करोड़ है. राज्य में जन्म दर फिलहाल देश में सबसे कम चल है. साल 2025 में करीब 7.8 लाख बच्चों ने जन्म लिया. विजय की योजना के मुताबिक, हर नवजात को सोने की अंगूठी दी जाएगी. अब अगर हम मान लें कि इसमें से 60 प्रतिशत बच्चे उन परिवारों में पैदा होते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो भी हर साल करीब 4.7 लाख बच्चों को यह अंगूठी देनी होगी. भले ही एक छोटी अंगूठी की कीमत करीब 5,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन जब इसे लाखों बच्चों से गुणा करते हैं, तो यह अकेले 235 करोड़ रुपये का सालाना खर्च बन जाता है।  BI से लेनी पड़ सकती है अनुमति दोनों गोल्‍ड स्‍कीम को मिला दिया जाए तो थलापति विजय को बड़ी मात्रा में सोने की जरूरत होगी. बता दें कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीदने के लिए कुछ नियम कायदे हैं. यदि दुल्‍हनों को दिए जाने वाले सोने की बात की जाए तो नई सरकार को 8 ग्राम के हिसाब से 2160000 ग्राम यानी हर साल 2160 किलो गोल्‍ड की जरूरत होगी. बच्‍चों को गोल्‍ड रिंग देने की स्‍कीम में मात्रा का उल्‍लेख नहीं है. यदि उसे भी जोड़ दिया जाए तो सैकड़ों किलो का और ईजाफा होगा. ऐसे में थलापति विजय आरबीआई की मदद के बिना इस वादे को पूरा नहीं कर पाएंगे।  वेलफेयर बिल पहुंच जाएगा सातवें आसमान पर फिल्म स्टार से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की शानदार चुनावी जीत के बाद अब घोषणापत्र में किए गए बड़े वादों पर चर्चा तेज हो गई है. पार्टी ने महिलाओं के मुखिया वाले परिवारों को हर महीने ₹2,500 देने, हर परिवार को साल में छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और 10 लाख बेरोजगार ग्रेजुएट्स को ₹4,000 मासिक भत्ता देने जैसे कई बड़े ऐलान किए हैं. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि इन योजनाओं पर राज्य सरकार का सालाना खर्च करीब ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. यह राशि 2025-26 में DMK सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी पर खर्च किए गए ₹65,000 करोड़ से लगभग 52% अधिक है. अगर राज्य के कुल राजस्व से तुलना करें, तो यह खर्च तमिलनाडु के 2025-26 के बजट में अनुमानित ₹3.31 लाख करोड़ के राजस्व का करीब एक तिहाई होगा। 

CM मोहन यादव ने भोपाल से रवाना की ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’

भोपाल  धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति, इन तीनों के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' ने भोपाल से अपनी पहली यात्रा शुरू की. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना हुई यह विशेष तीर्थ यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि हजार वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा के रूप में देखी जा रही है. मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए श्रद्धालु शामिल हैं. सोमनाथ मंदिर, जो भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जाता है, इस यात्रा का केंद्र बिंदु है।  रानी कमलापति स्टेशन से दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है. हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से इस तरह की विशेष तीर्थ यात्रा श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को और आसान बनाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताते हुए इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताया।  गंगोत्री से गंगा सागर तक बिखर रहा आनंद : CM मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु जिनके चरण पखारता है, मस्तक पर जिनके चंद्र देव बिराजे हैं, अक्षय स्वाभिमान के ज्योतिर्लिंग, भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन. सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान के साथ है. द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने जब अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब पूरा समय चक्र ही बदल गया. हम सभी जानते हैं कि एक हजार साल पहले भारत को काली छाया का ग्रहण लग गया था. उस समय बाबा सोमनाथ ने इस ग्रहण को नष्ट किया था. सोमनाथ हमारे विकास का पर्याय भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा प्रारंभ हुई.  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, पुल, पुलिया, सड़क, नगर, कारखाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी लेकर चल रही है. इस सनातन संस्कृति पर हमें गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में भी सनातन धर्म के साथ सबको लेकर चलने की भावना है. यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. हमें अयोध्या और मथुरा में जो आनंद आता है, वही आनंद पश्चिम बंगाल के काली घाट पर आता है. आज भगवान की दया से गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है. लोकतंत्र की नई बयार पूरे देश को उत्साह-उमंग से भर रही है।  हमले के बाद भी लहराती रही सनातन संस्कृति की ध्वजा : मोहन यादव सीएम डॉ. यादव ने लोगों से कहा कि इस यात्रा के जरिये आपको बाबा सोमनाथ के दर्शन का लाभ मिलेगा. मेरी ओर से सभी यात्रियों को बधाई. वहीं, पास में चार पीठों में से एक द्वारका पीठ भी है. यहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कर हमारे हृदय में छवि बनाई. सोमनाथ मंदिर पर दुश्मनों ने 17 बार आक्रमण किए थे. लेकिन, हमारी सनातन संस्कृति की ध्वजा लहराती रही. एक हजार साल बाद सोमनाथ का शिखर आसमान से बात कर रहा है. दुश्मन लाख चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो बाबा सोमनाथ चाहें. उन्होंने तीर्थयात्रियों से कहा कि आप बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद लेना कि दुनिया में चारों ओर खुशहाली हो. यह सांस्कृतिक जानगरण राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करे. उन्होंने कहा कि जीवन भी एक यात्रा है. जीवन की इस यात्रा में हम आते हैं और शरीर छोड़ते हैं. लेकिन, इस बीच परमात्मा ने हमें जो मौका दिया है, इस मौके का उपयोग हम परोपकार में करें।  देवलोक बनने से बदल जाती है अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है. हमारी सरकार कई देवलोक बनवा रही है. महाकाल लोक बनने के बाद आर्थिक रूप से पूरा इको-सिस्टम बदल गया. साल 2022 से पहले उज्जैन में एक वर्ष में 25-30 हजार लोग आते थे, आज रोज डेढ़ लाख लोग दर्शन करने उज्जैन आ रहे हैं. इस तरह पूरा माहौल बदल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के देवलोक बनने के बाद होटल वालों, ठेले वालों, ऑटो वालों, दुकान वालों के जीवन में बदलाव आता है. भारतवासी जब एक-दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, तो एक-दूसरे को अपनी-अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं. इससे आंतरिक एकता का निर्माण होता है. यही एकता एकात्मवाद में परिवर्तित होती है।  मेरी अपनी ओर से सभी तीर्थयात्रियों को बधाई श्रद्धालुओं का बड़ा कारवां मध्यप्रदेश से पहली बार निकल रही इस यात्रा में 1,100 श्रद्धालुओं का दल शामिल है. यह विशेष रेलगाड़ी भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई. यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचेकर दर्शन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को साझा किया जाएग।  धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव सरकार और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है. यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करने का प्रयास है. रेलवे के माध्यम से सामूहिक तीर्थ यात्रा ने बुजुर्गों, परिवारों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाया है. यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं, आवास और कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।  ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की पृष्ठभूमि संस्कृति संचालनालय के निदेशक एन.पी. नामदेव के अनुसार, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का मूल उद्देश्य देशभर में भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, आस्था और ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति को जीवंत करना है. यह पर्व राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीकात्मक महाकुंभ है, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।  इतिहास से भविष्य तक की यात्रा सोमनाथ मंदिर को भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी निरंतर परंपरा भारतीय सांस्कृतिक जीवटता को दर्शाती है. ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' … Read more

‘वंदे मातरम्’ को मिला कानूनन संरक्षण, मुख्यमंत्री ने बताया—राष्ट्र और संस्कृति का सम्मान बढ़ा

‘वंदे मातरम्’ को वैधानिक संरक्षण: राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक अस्मिता को मिला नया सम्मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘वंदे मातरम्’ को वैधानिक संरक्षण देना राष्ट्र की आत्मा का सम्मान : मुख्यमंत्री साय 'वंदे मातरम्’ का सम्मान, राष्ट्रभावना का सम्मान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय गौरव को मिला नया सम्मान : मुख्यमंत्री राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने वाला निर्णय : मुख्यमंत्री रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करने संबंधी केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रभक्ति की भावना को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान किया जाना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।  उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’  भारत की आत्मा, स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और करोड़ों देशवासियों की राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों में नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार किया था। यह गीत आज भी हर भारतीय के मन में मातृभूमि के प्रति समर्पण, सेवा और गौरव की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार निरंतर भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और जनभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान एवं गरिमा को बनाए रखने का आह्वान भी किया।

मप्र मौसम अपडेट: ग्वालियर और 11 जिलों में बारिश का अलर्ट, कुछ शहरों में तापमान रहेगा अधिक

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। एक तरफ ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, वहीं दूसरी तरफ भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज गर्मी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विभाग ने गुरुवार को 11 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से मौसम लगातार बदल रहा है। कई जिलों में बादल, आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला बना हुआ है। गुरुवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज जिलों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  इधर दूसरी तरफ प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम का दूसरा रुख भी देखने को मिल रहा है, जहां गर्मी धीरे-धीरे अपना असर दिखा रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत करीब 40 से ज्यादा जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और कई जगह पारा 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। खासकर निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, रतलाम, नीमच और मंदसौर जैसे जिलों में गर्म हवा और तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4 दिन तक ऐसा ही मिला-जुला मौसम बना रहेगा, यानी कहीं बारिश तो कहीं लू जैसे हालात। वहीं 9 और 10 मई को प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी तेज रहने का अनुमान है, जबकि 10 मई के बाद एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिसका असर कुछ दिन बाद देखने को मिलेगा। पिछले कुछ दिनों के हालात देखें तो मध्य प्रदेश में लगातार छठे-सातवें दिन भी मौसम बदला हुआ रहा है और कई जिलों में आंधी-बारिश ने गर्मी से थोड़ी राहत दी है। धार, बालाघाट, पीथमपुर और मुलताई जैसे इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण सड़कें भीग गईं और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश के बीचोंबीच एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है, जबकि दूसरा सिस्टम ऊपरी हिस्से में बना हुआ है और पूर्वी मध्य प्रदेश से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसी वजह से मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में मई के महीने में अक्सर गर्मी और बारिश दोनों का ट्रेंड देखा जाता है, जहां कभी तापमान 46 से 48 डिग्री तक पहुंच जाता है तो कभी अचानक बौछारें राहत दे देती हैं। इस बार भी वही पैटर्न देखने को मिल रहा है और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि आने वाले दिन मौसम तेजी से बदल सकता है। अगले चार दिन मौसम रहेगा अस्थिर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले चार दिन तक प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। अगले दो दिन कुछ हिस्सों में आंधी और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन 9 और 10 मई से गर्मी का असर ज्यादा बढ़ेगा। इसके बाद 10 मई से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिसका असर अगले दो दिनों में देखने को मिल सकता है। लगातार सातवें दिन बदला मौसम प्रदेश में बुधवार को लगातार सातवें दिन भी कहीं आंधी तो कहीं बारिश का दौर बना रहा। धार समेत कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। मई की शुरुआत में लगातार बारिश होने से फिलहाल भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री से नीचे बना हुआ है। प्रदेश में क्यों बदल रहा मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश के मध्य हिस्से और ऊपरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इसके साथ ही पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इन तीनों सिस्टमों के संयुक्त असर से प्रदेश में आंधी, बादल और बारिश की स्थिति बनी हुई है।  थल-पुथल वाला मौसम रहेगा मौसम विभाग की माने तो अगले 4 दिन तक प्रदेश में उथल-पुथल वाला मौसम रहेगा। अगले 2 दिन तक कुछ जिलों में बारिश और आंधी चलने के आसार है। वहीं, 9 और 10 मई को पूरे प्रदेश में गर्मी पड़ेगी। 10 मई से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। जिसका असर अगले 2 दिन बाद देखने को मिल सकता है। छह दिन से बारिश का दौर प्रदेश में बुधवार को लगातार सातवें दिन भी आंधी-बारिश का दौर बना रहा। धार समेत कई जिलों में असर देखने को मिला। यानी, इस बार मई के शुरुआत छह दिन तक बारिश हुई है। मौसम में बदलाव होने से गर्मी का असर कम हुआ है। प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री से नीचे चल रहा है। 10 मई से नया सिस्टम मौसम विभाग की माने तो अभी कुछ दिन तक प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर बना रहेगा। वर्तमान में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) प्रदेश के बीचोंबीच में एक्टिव है तो दूसरा ऊपरी हिस्से में है। एक ट्रफ भी पूर्वी हिस्से से गुजर रही है। इस वजह से मौसम बदला हुआ है।

BJP की रणनीति और थलापति विजय की ताकत, तमिलनाडु में कांग्रेस की स्थिति पर सवाल

चेन्नई तमिलनाडु की सियासत में गजब ट्विस्ट आया है. थालापति विजय की टीवीके सरकार बनाने की कवायद में जुटी है. उसके पास बहुमत वाला नंबर नहीं है. इसलिए एक्टर विजय की पार्टी टीवीके को अन्य साथियों की जरूरत है. थलापति विजय को सरकार बनाने के लिए कुल 118 विधायकों की जरूरत है. टीवीके के पास हैं 108. अब ऐसे में कैसे 118 के आंकड़े तक पहुंचा जाए, अभी इस पर मंथन जारी है. इस बीच तमिलनाडु के सियासी गेम में अचानक भाजपा की एंट्री हो गई है. सरकार वाली फ्रेम में अब तक भाजपा नहीं थी. मगर अब भाजपा ने एआईएडीएमके को धर्मसंकट में डाल दिया है. मगर एक्टर विजय के लिए तब भी खुशखबरी ही है।  जी हां, भाजपा के नए दांव से टीवीके चीफ थलापति विजय की चांद ही चांदी है. भाजपा अब चाहती है कि टीवीके की ही तमिलनाडु में सरकार बने. इसके लिए भाजपा तमिलनाडु में अपनी सहोयगी एआईएडीएमके को थलापति विजय की TVK के साथ गठबंधन के लिए जोर दे रही है. भाजपा के इस दांव से एआईएडीएमके धर्मसंकट में है. एआईएडीएमके पर टूट यानी विभाजन का खतरा मंडरा रहा है. उसे भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसा खतरा महसूस हो रहा है।  भाजपा का चाणक्य वाला दांव इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तमिलनाडु रिजल्ट के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपने सबसे गंभीर अंदरूनी संकट की ओर बढ़ती दिख रही है. एआईएडीएमके विजय की टीवीके के साथ गठबंधन को लेकर धर्मसंकट में है. पार्टी के भीतर इस बात पर गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) को गठबंधन सरकार बनाने में समर्थन दिया जाए या नहीं. सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा बहै. भाजपा नहीं चाहती कि टीवीके और कांग्रेस का गठबंधन हो. इसके लिए भाजपा चाहती है कि एआईएडीएमके और टीवीके साथ मिलकर सरकार बनाए. इसकी वजह है भाजपा की जिद, सके तहत वह कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में आने से रोकना चाहती है।  क्यों भाजपा चाहती है टीवीके और AIADMK का गठबंधन खुद एआईएडीएमके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि भाजपा टॉप लीडरशिप इस बात से असहज है कि तमिलनाडु में कांग्रेस के सममर्थन से टीवीके की सरकार बन सकती है. वह भी ऐसी स्थिति में जब पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस ने एक बार फिर से जोरदार वापसी की है. यही कारण है कि भाजपा नहीं चाहती कि तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की किसी भी तरह वापसी हो।  तमिलनाडु में सरकार का नंबर गेम समझिए थलापति विजय की TVK के पास 108 सीटें हैं. बहुमत के लिए चाहिए 118 सीटें. मतलब बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम हैं. इसलिए तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए गठबंधन बनाना अब जरूरी हो गया है. ऐसे में भाजपा उन कोशिशों का समर्थन करती दिख रही है, जिनका मकसद AIADMK को विजय का साथ देने के लिए राजी करना है, ताकि कांग्रेस और वामपंथी दल को नई सरकार में आने से रोका जा सके।  भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट हालांकि, भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट है. यह संकट तब और गहरा गया, जब मंगलवार रात एआईएडीएमके की वरिष्ठ नेता लीमा रोज मार्टिन ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि टीवीके और AIADMK के बीच बातचीत चल रही है. लीमा रोज मार्टिन लॉटरी किंग की पत्नी हैं. उनके बेटे पुडुचेरी से विधायक हैं और एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं. इसलिए एआईएडीएमके का एक खेमा चाहता है कि विजय की पार्टी संग गठबंधन हो. मगर एक खेमा चाहता है कि गठबंधन न हो. ऐसे में एआईएडीएमके में टूट का खतरा मंडरा रहा है।  इसके बाद भी 5 सीटें उसके पास कम हैं। वजह यह कि वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, सीपीआई और सीपीएम जैसे दलों ने समर्थन देने से इनकार कर दिया है। एआईएडीएमके ने भी विजय के साथ जाने की बात खारिज की है। यही नहीं कई दलों के नेताओं ने बुधवार को एमके स्टालिन से मुलाकात की है। ऐसे में यह भी कयास लग रहे हैं कि क्या डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं। दोनों ही दल तमिलनाडु की राजनीति में कट्टर विरोधी रहे हैं। ऐसे में दोनों साथ आए तो यह उसी तरह होगा, जैसे सपा और बसपा यूपी में मिले थे। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी ने भी सरकार साथ में बनाई तो ऐसा ही सवाल उठा था। इसके अलावा महाराष्ट्र में जब उद्धव की शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी साथ आए तो वह भी राजनीति की उलटबासी थी। अब तमिलनाडु में ऐसा देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस फंसा हुआ अनुभव करेगी, जिसने जल्दबाजी में ही विजय की टीवीके को समर्थन दे दिया। डीएमके की ओर से इसकी आलोचना भी की जा रही है। वहीं कांग्रेस ने इसे विचारधारा से समझौता मानने से इनकार किया है और कहा कि विजय की विचारधारा भी सेकुलर है। यही नहीं कांग्रेस की सांसद जोथीमणि सेन्निमलाई ने डीएमके को भी जवाब दिया है। कांग्रेस बोली- हमें तो चुनाव से एक सप्ताह पहले कर दिया था बाहर उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना और टूटना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि 2014 में डीएमके ने कांग्रेस को गठबंधन से बाहर कर दिया था। वह अकेले ही लड़ी थी। तब हमने यह माना था कि डीएमके का यह कदम राजनीतिक है और इसकी हमने आलोचना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना या फिर अलग होना नेचुरल है। यहां तक कि 2014 के संसदीय चुनाव से एक सप्ताह पहले ही डीएमके ने कांग्रेस को अलायंस से बाहर कर दिया था। हमें अचानक से अकेले उतरना पड़ा था, लेकिन हमने उसकी मजबूरी को समझा था। विजय ने बुलाई अहम बैठक इस बीच टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कड़गम के संस्थापक विजय ने सरकार गठन पर चर्चा के लिए आज यानी गुरुवार को यहां चुनाव जीतने वाले पार्टी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. यह बैठक सरकार बनाने के लिए टीवीके के बहुमत से कुछ सीट पीछे रहने की पृष्ठभूमि में हो रही है. कांग्रेस के पांच विजयी उम्मीदवारों ने टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन विजय की … Read more

CM ने 8-मंजिला भोपाल निगम भवन का उद्घाटन किया, जनता सेवाओं और सोलर प्लांट का होगा लाभ

भोपाल  तुलसी नगर (सेकंड स्टॉप) पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय तैयार है। यह अटल भवन के नाम से जाना जाएगा। यह 43 करोड़ से बना है। यहां एक ही छत के नीचे पूरी नगर सरकार होगी। अब तक नागरिकों को अलग-अलग कामों के लिए शहर के कई हिस्सों में जाना पड़ता था।यह प्रदेश की पहली नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जो जियोथर्मल तकनीक से लैस है। पार्किंग पर लगे सोलर पैनलों से 300 किलोवाट बिजली बनेगी। नवनिर्मित मुख्यालय का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। इसके लोकार्पण के साथ नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। एक जगह पर आ जाएंगे सभी विभाग बिल्डिंग की शुरुआत के बाद निगम के सभी विभाग एक ही बिल्डिंग में आ जाएंगे। हालांकि, दो महीने पहले से ही कई ऑफिस शिफ्ट किए जा चुके हैं। अब सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। अभी कई जगह पर संचालित ऑफिस अभी भोपाल के कई स्थानों पर निगम के ऑफिस में शाखाएं संचालित की जा रही हैं। आईएसबीटी और माता मंदिर में महापौर, अध्यक्ष और कमिश्नर के कक्ष के साथ कई शाखाएं हैं। शाहपुरा में बिल्डिंग परमिशन शाखा है, जबकि फतेहगढ़ में स्वास्थ्य शाखा लग रही है। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि, इसकी दिशा उत्तर-दक्षिणी होने की वजह से बिजली उत्पादन में असर पड़ सकता है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है। किस फ्लोर पर क्या?     ग्राउंड फ्लोरः जनसंपर्क, टैक्स काउंटर, विवाह पंजीकरण और बच्चों के लिए विशेष गेम जोन।     पहली से चौथी मंजिलः महापौर, एमआईसी सदस्य, भवन अनुज्ञा, जलकार्य, सीवेज और राजस्व विभाग।     पांचवीं से सातवीं मंजिलः योजना प्रकोष्ठ, आईटी, स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य और उद्यान विभाग।     आठवीं मंजिलः कमिश्नर स्टाफ और स्मार्ट सिटी का मुख्य कार्यालय 10 जगहों पर बिखरे दफ्तर अब एक छत के नीचे अब तक नगर निगम के कार्यालय माता मंदिर, पीएचई दफ्तर, आइएसबीटी, स्मार्ट सिटी कार्यालय, न्यू मार्केट, श्यामला हिल्स, शाहपुरा और फतेहगढ़ सहित शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से निगम के अधिकांश विभाग एक ही परिसर में कार्य करेंगे, जिससे आम नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मुख्यालय भवन के भू-तल पर विवाह पंजीयन, भवन अनुज्ञा, स्मार्ट सिटी और कर संबंधी काउंटर बनाए गए हैं। पहली मंजिल पर महापौर, निगम परिषद अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और परिषद कार्यालय के साथ कॉन्फ्रेंस हॉल रहेगा। नगर निगम आयुक्त का कार्यालय भवन की आठवीं मंजिल पर बनाया गया है। बड़े नेताओं की मौजूदगी में होगा लोकार्पण लोकार्पण कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री Kailash Vijayvargiya, मंत्री Vishvas Sarang, प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। नीमच के सोलर प्लांट का भी शुभारंभ नगर निगम ने नीमच जिले की धमपुरा तहसील में 10.5 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया है। करीब 45 करोड़ रुपये की इस परियोजना में निगम ने 14 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, जबकि शेष राशि निजी कंपनी द्वारा लगाई गई है। गाजियाबाद की टेक्नोसिस कंपनी के साथ 25 वर्षों का अनुबंध किया गया है। इस परियोजना से ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

सपनों को नई उड़ान, मुख्यमंत्री ने कहा—अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए

आम की छांव में बदले सपनों के मायने: मुख्यमंत्री ने कहा—अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर रायपुर  कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था। आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे। गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं – कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर। जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा –  “आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।” मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है। कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है। सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण, पीएम मोदी ने नीतीश कुमार से दिखाया गर्मजोशी भरा रिश्ता

पटना  बिहार की राजनीति में आज का दिन न केवल नई कैबिनेट के गठन के लिए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच के मजबूत संबंधों के लिए भी याद किया जाएगा। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री विशेष तौर पर शामिल हुए। समारोह संपन्न होने के बाद जब मंच पर फोटो सेशन की तैयारी चल रही थी, तब पीएम मोदी और नीतीश कुमार के बीच की 'केमिस्ट्री' ने सबका ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री ने खुद पहल करते हुए नीतीश कुमार को सम्राट से कहकर अपने पास बुलाया और उसके बाद जो गर्मजोशी दिखी, वो यादगार पल बन गया। शपथ के मंच पर पीएम मोदी-नीतीश की केमिस्ट्री दरअसल, बिहार में आज मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी ने शपथ ली थी। इसके बाद 7 मई को पटना के गांधी मैदान में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पीएम मोदी आज के मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल हुए। पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के बाद मंच पर गहमागहमी थी। पीएम मोदी के बगल में सीएम सम्राट चौधरी खड़े थे। फोटो सेशन की तैयारी चल रही थी। तभी पीएम मोदी ने सम्राट चौधरी को इशारा किया कि वो नीतीश कुमार को बुलाकर लाएं। फिर सम्राट ने वहां मौजूद किसी को बोला कि नीतीश कुमार को लेकर आइए। फिर जैसे ही नीतीश कुमार पीएम मोदी के नजदीक आए उन्होंने नीतीश कुमार के हाथ पकड़कर गर्मजोशी दिखाया। दोनों नेताओं ने मुस्कुराकर अभिवादन किया। फोटोग्राफी के दौरान नीतीश कुमार हाथ हिलाकर आभिवादन करते रहे। फिर उन्होंने पीएम मोदी के दोनों कंधों झोर से हिलाकर अपनी गहरी दोस्ती को जताया। इसके बाद पीएम मोदी और नीतीश कुमार आपस में बात करते रहे। बीच-बीच लोगों के अभिवादन भी स्वीकार करते रहे। बिहार में आज 32 नए मंत्रियों ने ली शपथ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मंत्रिपरिषद का गठन के 22 दिनों बाद बृहस्पतिवार को पहला विस्तार किया गया, जिसमें 32 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह पांच पांच मंत्रियों के समूह में संपन्न हुआ। मंत्रिपरिषद विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोटे से मिथिलेश तिवारी, नीतीश मिश्र, रामचंद्र प्रसाद, नंद किशोर राम और केदार गुप्ता को मंत्री बनाया गया। इस विस्तार में पूर्व केंद्रीय मंत्री मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली। गांधी मैदान में बने विशाल पंडाल में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। लोकभवन (राजभवन) परिसर से बाहर, बड़े स्तर पर मंत्री परिषद विस्तार समारोह आयोजित किया गया। भाजपा की अगुवाई में बनी बिहार सरकार के नए मंत्रियों में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को भी मंत्री परिषद में शामिल किया गया। मंत्रिपरिषद विस्तार में नीतीश कुमार सरकार के अधिकतर पूर्व मंत्रियों को फिर से स्थान दिया गया है, जबकि कई नये चेहरों को भी मौका मिला है। भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, रमा निषाद,दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, प्रमोद चंद्रवंशी, लखविंदर पासवान, संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और अरुण शंकर प्रसाद को मंत्री बनाया गया है। जदयू कोटे से निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा, मदन सहनी, लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल, दामोदर रावत, भगवान सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार, शीला मंडल और जमा खान को मंत्री बनाया गया है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव पहले से मंत्री हैं। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) से संजय सिंह व संजय पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम से संतोष सुमन और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं।

CM भगवंत मान की शुकराना यात्रा जारी, अमृतसर में माथा टेककर लिया आशीर्वाद, फूलों से हुआ स्वागत

अमृतसर. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से निकाली जा रही शुकराना यात्रा के लिए अमृतसर पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर रईया से लेकर श्री हरिमंदिर साहिब तक पूरी तैयारियां की गई। शुकराना यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का पहला स्वागत रईया में हुआ। जहां हल्का बाबा बकाला के विधायक दलबीर सिंह टोंग की अगुवाई में विशेष कार्यक्रम रखा गया। अमृतसर व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। गांवों से भी जत्थों के रूप में समर्थक लगातार कार्यक्रम स्थल पहुंचे। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्वागत को यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गईं।  सीएम की यात्रा के लिए सुरक्षा घेरा तैयार रईया से लेकर अमृतसर तक जीटी रोड पर सुरक्षा के मद्देनजर विशेष प्रबंध किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई है ताकि यातायात और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। आसपास की इमारतों और ऊंचे स्थानों पर पंजाब पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में संभाली जा रही है। डीआईजी संदीप गोयल और अमृतसर देहाती के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी निभा रहा है। कार्यक्रम स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जालंधर से शुरू की आज यात्रा सीएम भगवंत मान ने दूसरे दिन की यात्रा जालंधर से शुरू की है। जालंधर सेंट्रल से शुकराना यात्रा शुरू करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा बेअदबी मामले में अगर कोई मानसिक रोगी होता है तो उसके परिजनों पर मामला दर्ज किया जाएगा, उन्होंने कहा ऐसा नहीं है कि घर से किसी रोगी को सीखा कर बेअदबी के लिए बाहर भेज दो और खुद इसे दूर हो ऐसे मामलों में परिजनों पर मामला दर्ज होगा। कल फतेहगढ़ साहिब में होगी यात्रा समाप्त तीन दिवसीय शुकराना यात्रा का आज दूसरा दिन है। आज ये यात्रा जालंधर से शुरू हुई है। जानें कहां-कहां जाएगी ये यात्रा- वीरवार- जालंधर, बाबा बकाला, अमृतसर, तरनतारन, जीरा, फरीदकोट और कोटकपूरा से होकर निकलेगी। शुक्रवार- मुख्यमंत्री का काफिला बठिंडा, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, सरदूलगढ़, मानसा, बरनाला, सुनाम, संगरूर, समाना और पटियाला पहुंचेगा। यात्रा का समापन श्री फतेहगढ़ साहिब में होगा।

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी ​रायपुर      छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी 'अबूझ' (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। 'नो सिग्नल' से सीधे 'कनेक्टिविटी' तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का है। ​पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली मुक्ति      ​ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से 'नो नेटवर्क ज़ोन' में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। ​विकास की नई जीवनरेखा: आपातकालीन और प्रशासनिक सेवाएँ      ​कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है। ​अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। ​इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। ​पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है। ​     ​बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर       अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है।     ​ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।