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गलवान के बाद पहली बार भारत दौरे पर आएंगे जिनपिंग, ब्रिक्स मंच पर बढ़ रही भारत-चीन की निकटता

नई दिल्ली साल 2020 की हिंसक गलवान झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में जो बर्फ जमी थी, वह अब धीरे-धीरे पिघलती हुई नजर आ रही है। हालिया घटनाक्रमों और कूटनीतिक वार्ताओं से यह लगभग साफ हो गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। 2020 के गलवान विवाद के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी, जो कूटनीतिक लिहाज से एक बहुत बड़ा कदम है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई है। भारत और चीन ब्रिक्स (BRICS) तंत्र के तहत अपने आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। एक तरफ जहां चीन ने ब्रिक्स समूह की वर्तमान अध्यक्षता के लिए भारत का पूरा समर्थन किया है, वहीं भारत सरकार ने भी इस तंत्र के तहत आयोजित विभिन्न गतिविधियों में चीन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की है। चीनी विशेष दूत झाई जुन का भारत दौरा पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विशेष दूत झाई जुन पिछले सप्ताह नई दिल्ली में थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। झाई ने स्पष्ट किया कि दुनिया के दो प्रमुख विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत और संवाद बनाए रखा है। चीन ने की भारत की भूमिका की तारीफ चीनी दूत झाई जुन ने भारत की अध्यक्षता को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा- चीन ब्रिक्स की रोटेटिंग (वर्तमान) अध्यक्षता के रूप में भारत द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करता है। हमें उम्मीद है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर होने वाला यह ब्रिक्स परामर्श क्षेत्रीय स्थिति पर एक मजबूत संदेश देगा और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा। भारत का रुख और नीना मल्होत्रा का बयान चीन द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा ने भी ब्रिक्स तंत्र के भीतर चीन की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय तनावों को जल्द से जल्द कम करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए चीन सहित सभी ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रपति का संभावित दौरा ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी के जल्द ही भारत आने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को और आगे बढ़ाएगा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा है। पिछले साल तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक बैठक में शी जिनपिंग ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन का भरोसा दिया था। इस साल के अंत में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की उम्मीद है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प के बाद, यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह खबर इस बात का संकेत देती है कि सीमा पर तनाव के बावजूद, भारत और चीन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। कैसे तैयार हुई इस दौरे की जमीन? भारत और चीन के बीच यह कूटनीतिक नरमी अचानक नहीं आई है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में सिलसिलेवार तरीके से इसके लिए पृष्ठभूमि तैयार की गई है। LAC पर गश्त समझौता (अक्टूबर 2024): दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त की बहाली को लेकर एक अहम समझौता हुआ, जिसने तनाव कम करने की दिशा में पहली बड़ी भूमिका निभाई। रूस में मोदी-शी की मुलाकात (अक्टूबर 2024): इस समझौते के तुरंत बाद, रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच गलवान के बाद पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। SCO सम्मेलन में न्योता (अगस्त 2025): प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए चीन के तियानजिन गए थे। वहीं पर उन्होंने शी जिनपिंग को 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था, जिसे चीनी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था। 'ब्रिक्स की आड़ में' रिश्ते सुधारने के क्या मायने हैं? सीधे द्विपक्षीय स्तर पर संबंध सुधारना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। ब्रिक्स जैसा मंच दोनों देशों को एक 'ग्लोबल साउथ' के एजेंडे के तहत बातचीत करने का बहाना देता है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिका की सख्त व्यापारिक नीतियों और टैरिफ आदि के कारण भारत और चीन दोनों ही अपने क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी धीमी होती अर्थव्यवस्था के बीच चीन भारत जैसे विशाल बाजार से तनाव कम करना चाहता है। वहीं, भारत भी चाहता है कि सीमा पर शांति बनी रहे ताकि वह अपने आंतरिक विकास और वैश्विक कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर सके।

सऊदी और यूएई ने होर्मुज को बायपास किया, भारत तक तेल सप्लाई का नया मार्ग तय

  नई दिल्ली ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो भारत के लिए तेल और गैस की किल्लत हो गई. तेल और गैस के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर भारत के लिए होर्मुज का बंद होना बड़ा झटका साबित हुआ. इस बीच रूसी तेल पर लगे बैन के हटने से भारत को राहत मिली लेकिन सऊदी, यूएई से भारत को तेल सप्लाई कुछ समय के लिए लगभग बंद हो गई. लेकिन दोनों खाड़ी देशों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया और होर्मुज को बायपास कर कच्चा तेल अब भारत तक पहुंचाने लगे हैं।  सऊदी अरब से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई अब सामान्य हो गई है और यूएई से आने वाली खेप पिछले साल के औसत से काफी ज्यादा चल रही है. ऐसा इसलिए संभव हो सका है क्योंकि दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच वैकल्पिक बंदरगाहों से लोडिंग बढ़ा दी है।    शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि सऊदी अरब और यूएई से बढ़ी सप्लाई, ईरान और वेनेजुएला से दोबारा शुरू हुए आयात, और रूस से अधिक खरीद ने खाड़ी क्षेत्र से आई कमी की आंशिक भरपाई की है. इससे अप्रैल में भारत को कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रही।  केप्लर के मुताबिक, 1 से 26 अप्रैल के बीच भारत का औसत कच्चा तेल आयात 44 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 15% कम है. इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत के दूसरे सबसे बड़े स्रोत इराक से सप्लाई अभी भी बंद है, साथ ही कुवैत और कतर से भी आपूर्ति रुकी हुई है।  अप्रैल में सऊदी अरब ने भारत को 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 का औसत 6.68 लाख बैरल प्रतिदिन था. वहीं, यूएई से सप्लाई 6.19 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.33 लाख बैरल प्रतिदिन औसत से काफी ज्यादा है।  सऊदी अरब और यूएई होर्मुज के बंद होने के बीच भारत कैसे पहुंचा रहे अपना तेल? सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए भारत तक तेल भेज रहा है. फारस की खाड़ी स्थित रास तनुरा बंदरगाह से भेजी जाने वाली तेल की खेप 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यनबू टर्मिनल तक आ रही है।  दूसरी ओर यूएई 17 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ADCOP पाइपलाइन के जरिए तेल को फुजैरा बंदरगाह तक भेज रहा है, जो ओमान की खाड़ी पर स्थित है. इन दोनों देशों के अलावा खाड़ी के अन्य उत्पादक देश अब भी निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर होर्मुज पर निर्भर हैं।  भारत ने ओमान से भी तेल खरीद बढ़ा दी है क्योंकि उसका तेल होर्मुज के जरिए नहीं आता. अप्रैल में भारत को ओमान से 1.01 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि 2025-26 का औसत केवल 18 हजार बैरल प्रतिदिन था।  युद्ध के बाद रूस और ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से भारतीय रिफाइनरों को राहत मिली है, जो होर्मुज संकट के बाद विकल्प तलाश रहे थे। अप्रैल में सात साल बाद ईरान से 1.51 लाख बैरल प्रतिदिन और नौ महीने बाद वेनेजुएला से 2.58 लाख बैरल प्रतिदिन सप्लाई फिर शुरू हुई। हालांकि अमेरिका से भारत को तेल सप्लाई कम रही. अप्रैल में यह घटकर 1.15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि 2025-26 का औसत 3.14 लाख बैरल प्रतिदिन था।  रूस से सप्लाई, जो जनवरी-फरवरी में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण घटी थी, मार्च में दोगुनी होकर 20 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई थी. लेकिन अप्रैल में रूसी तेल की उपलब्धता कम रही जिस कारण यह घटकर 16 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। 

योगी सरकार के तहत पर्यटन को मिली नई दिशा, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र

योगी सरकार में पर्यटन को नई उड़ान, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, पर्यटन मंत्री ने दिए जनसुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश पर्यटन बजट 22 गुना, संस्कृति के लिए बजट 20 गुना बढ़ा 1 साल में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का यूपी आगमन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार की मजबूत नीतियों, पारदर्शी कार्यशैली और विरासत संरक्षण के संकल्प ने प्रदेश को देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन राज्यों में शामिल कर दिया है। पर्यटन विभाग की स्थायी समिति की बैठक में सामने आए आंकड़ों ने इस सफलता पर मुहर लगा दी, जहां बताया गया कि पर्यटन बजट में 22 गुना और संस्कृति के लिए बजट में 20 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन प्रदेश की लोकप्रियता का प्रमाण है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज समेत धार्मिक स्थलों का भव्य विकास योगी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही सरकार मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां पर्यटन विकास सीमित दायरे में था, वहीं आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और योजनाबद्ध विकास के माध्यम से पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए यूपी अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन विभाग के बजट में लगभग 22 गुना और संस्कृति विभाग के बजट में करीब 20 गुना वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्यमंत्री योगी की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी बनाने में पर्यटन की अहम भूमिका होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का उत्तर प्रदेश आगमन हुआ, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। महाकुंभ-2025 के आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान खींचा महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया। प्रयागराज, अयोध्या और काशी को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अनूठा आध्यात्मिक अनुभव दे रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार अब एक्सपीरियंशल टूरिज्म पर फोकस कर रही है, ताकि पर्यटक सिर्फ भ्रमण न करें बल्कि प्रदेश में अधिक समय रुकें और स्थानीय संस्कृति, खानपान तथा परंपराओं को करीब से जान सकें। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने झांसी में हेली सेवा, प्रयागराज में वाटर स्पोर्ट्स, सहारनपुर में जंगल सफारी, कानपुर में औद्योगिक पर्यटन और गाजीपुर सहित अन्य क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार से जुड़े सुझाव भी दिए हैं।

EPFO में बदलाव: ATM से पेंशन विड्रॉल होगा संभव, पेंशन 7.5 गुना तक बढ़ सकती है

 नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. सरकार पीएफ रजिर्स्‍टड कर्मचारियों को लाभ देने के लिए कई चीजों पर विचार कर रही है. खासकर पेंशन में योगदान देने वाले कर्मचारियों को बड़ा लाभ देने पर विचार कर रही है. EPS-95 पेंशन को बढ़ाने पर चर्चा कर रही है।  श्रमिक संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार ईपीएस के तहत पेंशन को 1 हजार रुपये से बढ़ाकर ₹7500 करे. अगर सरकार पेंशन को लेकर इस प्रस्‍ताव को मान लेती है तो पेंशन में 7.5 गुना इजाफा होगा. संसदीय समिति ने भी पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की. इसके अलावा, सरकार पीएफ कर्मचारियों के ब्याज को जल्द अकाउंट में डिपॉजिट करने की बात कही है।  पीएम अकाउंट होल्‍डर्स के खाते में 8.25% ब्याज जल्‍द डिपॉजिट हो सकता है, जिसका कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं. वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार मंजूरी मिलते ही खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा. ऐसा माना जा रहा है कि मई में पीएफ का ब्‍यजा अकाउंट में आ सकता है।  ATM से PF निकालने की सुविधा  ईपीएफओ पोर्टल के तहत कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिसे जल्‍द लागू किया जा सकता है. खासकर एटीएम से PF की निकासी को लेकर सबसे बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है. जल्‍द इसके लागू होने की उम्‍मीद है. एटीएम से पीएफ की निकासी लागू होने के बाद पीएफ के पैसे तक सदस्‍यों की पहुंच आसान हो जाएगी. फिर सेविंग अकाउंट की तरह, पीएफ अकाउंट से भी ATM कार्ड के जरिए पैसा निकाल सकते हैं।  EPFO ने बना दिया नया रिकॉर्ड ईपीएफओ के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ क्लेम सेटलमेंट किया गया. पिछले साल 6.01 करोड़ क्लेम से तुलना में यह एक बड़ा उछाल है. इसमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक विड्रॉल से जुड़े रहे. जानकारी के अनुसार, ईपीएफओ ने 71.11% एडवांस क्लेम 3 दिन में निपटाए, जो पिछले साल यह आंकड़ा 59.19% था।  डिजिटल सुविधा से प्रॉसेस आसान  6.68 करोड़ क्लेम बिना चेक इमेज अपलोड, 1.59 करोड़ खातों में बिना employer मंजूरी बैंक लिंक, 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटो-प्रोसेस और 29.34 लाख सदस्यों ने खुद प्रोफाइल अपडेट किया. अप्रैल 2026 के दौरान 61.03 लाख क्लेम सेटलमेंट किया गया. वहीं 98.70% क्लेम 20 दिन से कम में निपटाए गए।  नई पहल: E-PRAAPTI पोर्टल  ईपीएफओ की ओर से एक नई पहल की भी शुरुआत की है, जिसके तहत निष्क्रिय PF खातों को सक्रिय करने के लिए नया प्लेटफॉर्म आधार आधारित एक्सेस से पुराने खाते जोड़ना आसान हो जाएगा. इसका फायदा UAN से लिंक न होने वाले खातों को मिलेगा और भविष्‍य में बिना मेंबर ID वाले यूजर्स को भी सुविधा मिलेगी। 

एक्सप्रेस-वे, मेट्रो और एयरपोर्ट से UP बना देश की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

लखनऊ राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रबल हो तो राज्य को नक्शे की सीमाओं से निकलकर विचार बनते देर नहीं लगती, जैसा कि आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यह राज्य आज जीवंत, स्पंदित और संकल्पशील दिखाई देता है तो इसलिए कि यहां हर मोड़ पर नवाचार और निश्चय की छाप दिखाई देती है। यह परिवर्तन दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का वह सशक्त परिणाम है, जो आने वाली पीढ़ियों की मजबूत आधारशिला बनेगा। जेवर की धरती पर उठता हुआ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक्सप्रेस-वे का फैलता हुआ जाल, लखनऊ और कानपुर की धमनियों में दौड़ती मेट्रो ये केवल स्टील और कंक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं। ये उस सामूहिक आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं, जो करोड़ों लोगों के भीतर दशकों से दबी पड़ी थी और जो आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच की वजह से अपने साकार रूप में आकर विकसित उत्तर प्रदेश की सशक्त बुनियाद बनने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश वह राज्य है जिसकी मिट्टी ने गंगा-यमुना की सभ्यता को सींचा, जिसके आंगन में बुद्ध की करुणा और कबीर की फक्कड़ी एक साथ पली, जिसके खेतों से उठे किसानों ने स्वाधीनता संग्राम की लौ को जलाए रखा। लेकिन स्वतंत्रता के बाद के दशकों में यही राज्य एक विरोधाभास का प्रतीक बन गया। विशाल जनशक्ति और अपार संसाधनों के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ा, राजनीतिक उठापटक में उलझा और पलायन की पीड़ा को चुपचाप सहता रहा। लेकिन पिछले नौ वर्षों इसी राज्य ने अपने परिदृश्य को बदला है। अपने प्रति देश-दुनिया में गहरे तक धंसी भ्रांतियों से मुक्ति पाई। और इसीलिए इस परिवर्तन को समझना, परखना और उससे सवाल करना, तीनों एक साथ जरूरी हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति ने बदली तस्वीर उत्तर प्रदेश… यह नाम सुनते ही कुछ वर्ष पहले तक जो तस्वीर मन में उभरती थी, वह अव्यवस्था, पलायन, जातीय समीकरणों की राजनीति और विकास की अनंत प्रतीक्षा की थी। लेकिन आज जब इस राज्य की चर्चा होती है, तो बात जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की होती है। गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वेज की होती है। लखनऊ और कानपुर मेट्रो की होती है। यह परिवर्तन महज एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता है, जो जमीन पर दिख रही है, जो आंकड़ों में प्रकट हो रही है और जो उस आम नागरिक की आंखों में पूरी होती उम्मीदों के रूप में देखी जा सकती है। यह परिवर्तन एक रात में नहीं हुआ। इसकी जड़ें उस राजनीतिक इच्छाशक्ति में हैं, जो केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्रियान्वयन तक भी पहुंची। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 2017 में 13.30 लाख करोड़ था जो आज 36 लाख करोड़ के करीब है। राज्य ने अपने आप को देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है और वर्ष 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कोई हवाई महत्वाकांक्षा नहीं, यह उस बुनियाद पर टिकी योजना है जो जेवर से लेकर पूर्वांचल तक बिछाई जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर अवसरों की रफ्तार जब किसी राज्य में एक्सप्रेस-वे का जाल बिछता है, तो यह केवल सड़कें नहीं बनतीं, उन सड़कों पर अवसरों की आवाजाही होती है। आज देश के एक्सप्रेस-वे का 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 341 किलोमीटर की लंबाई लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ती है, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे 296 किलोमीटर में फैला है, और गंगा एक्सप्रेस-वे, जो 594 किलोमीटर लंबा होगा, देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बनने की ओर अग्रसर है। जब एयरपोर्ट का निर्माण होता है, तो केवल रनवे नहीं बनता, एक क्षेत्र की आकांक्षाएं उड़ान भरती हैं। जेवर हवाई अड्डा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा, लगभग 29,560 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा है। पूर्णतः निर्मित होने पर यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा और प्रतिवर्ष सात करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तत्पर है। आर्थिक शक्ति में बदलती विशाल जनसंख्या किसी भी राज्य की विकास यात्रा को समझने के लिए केवल परियोजनाओं की गणना पर्याप्त नहीं होती। यह समझना भी जरूरी है कि इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक संदर्भ क्या है। उत्तर प्रदेश, जो देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां 25 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति को अब धीरे-धीरे आर्थिक शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश के निवेशक इसे अब सुरक्षित गंतव्य मानते हैं तो उन्हें यहां की कनेक्टिविटी भी आकर्षित करती है। उद्योगों का बढ़ना रोजगार का सबसे बड़ा आधार है। जब राज्य का युवा पलायन करने के बजाय अपने जिले में ही उद्योग और रोजगार की संभावना देखने लगे, तो यह सबसे बड़ा परिवर्तन है। डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाएं सिर्फ औद्योगिक परियोजना ही नहीं, बल्कि उस पलायन की त्रासदी का उत्तर है जो दशकों से प्रदेश को खोखला कर रही थी। मेट्रो और एमआरटीएस की बात करें तो यह केवल शहरी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि एक मानसिकता का परिवर्तन है। मेट्रो और एमआरटीएस केवल यातायात के साधन नहीं, ये उस आधुनिक उत्तर प्रदेश की रीढ़ हैं जो अपने नागरिक को यह अहसास दिलाना चाहता है कि वह किसी महानगर से कम नहीं। किसी शहर में मेट्रो दौड़ती है, तो केवल यातायात की समस्या हल नहीं होती, उस शहर के नागरिक का आत्मसम्मान भी बदलता है। साहस की परीक्षा दे रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश का यह दौर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां संभावनाएं असीमित हैं और जिम्मेदारियां भी उतनी ही विशाल। इतिहास उन्हीं क्षणों को याद रखता है जब कोई समाज अपनी नियति को स्वयं गढ़ने का साहस करता है। उत्तर प्रदेश आज उसी साहस की परीक्षा दे रहा है। वह केवल वर्तमान को नहीं बदल रहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए नींव रच रहा है। यह भारत के उस केंद्र का जागरण है जिसे सदा से शक्ति का स्रोत माना गया है। अब बड़ी चुनौती यह सिलसिला बनाए रखने की है क्योंकि अनवरत … Read more

‘ममता बनर्जी आराम करें’, सुवेंदु ने कहा- बंगाल में BJP को मिलेगी 180 से ज्यादा सीटें

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है. खबर लिखे जाने तक इस फेज की 142 सीटों पर करीब 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. दूसरे फेज के चुनाव में सबकी नजर भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर पर टिकी हुई है. वोटिंग के बाद शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई दावे किए।  180 से अधिक सीटें जीतने का दावा सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में इस बार सत्ता परिवर्तन तय है और भाजपा 180 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी. उन्होंने कहा कि 4 मई को भाजपा की सरकार बनेगी और वे भवानीपुर सीट से 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करेंगे. उन्होंने ममता बनर्जी को अब आराम करने की सलाह दी. उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी अब आराम करेंगे, हम 180 से अधिक सीटें जीतेंगे।  सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ और बड़ी संख्या में हिंदू मतदाताओं ने परिवर्तन के पक्ष में वोट दिया. उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के परिश्रम के लिए आभार व्यक्त किया।  उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने स्थानीय पुलिस, केंद्रीय बलों और अन्य लोगों को डराने की कोशिश की. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी कथित तौर पर गुंडों के साथ घूमती रहीं, लेकिन सुवेंदु ने लोगों में भरोसा जगाया।  जमात-ए-इस्लामी समर्थकों पर हमले का आरोप भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आज शाम 5 बजे के बाद जब वे इकबालपुर पहुंचे, तो जमात-ए-इस्लामी समर्थकों ने उन पर हमला करने की कोशिश की, हालांकि पुलिस ने स्थिति संभाल ली. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने 'जय बंगला' के नारे लगाकर उन्हें घेरने की कोशिश की।  सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह नया बंगाल है, जो भगवा रंग में रंगा हुआ है. अंत में उन्होंने ममता बनर्जी को संदेश देते हुए कहा, 'अब आप आराम कीजिए।  जहांगीर खान का दावा- हम 200 प्रतिशत चुनाव जीत रहे हैं इस बीच तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने भाजपा और चुनावी पर्यवेक्षकों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि फाल्टा के मतदाता हर उस कार्रवाई का जवाब देंगे, जिसे वे बाहरी दबाव या हस्तक्षेप मानते हैं. उन्होंने कहा, हम 200 प्रतिशत चुनाव जीत रहे हैं।  एक विशेष बातचीत में जहांगीर खान ने कहा कि 'गुजरात और उत्तर प्रदेश की राजनीति या संस्कृति बंगाल में नहीं चलेगी.' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बंगाल की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।  ईवीएम पर टेप लगाए जाने पर क्या बोले? ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों पर उन्होंने कहा कि भाजपा उम्मीदवार ने खुद ईवीएम को टेप किया और फिर झूठे आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश की. उनके अनुसार यह एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा सकें।  फाल्टा में हाल में हुई 'सिंघम कार्रवाई' और चुनावी तनाव पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. उनका कहना था कि मतदाता इस पूरे घटनाक्रम का जवाब अपने वोट से देंगे. अभिषेक बनर्जी द्वारा कानूनी कार्रवाई की बात पर जहांगीर खान ने समर्थन जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कदम उठना चाहिए।  उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी फाल्टा सीट पर भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी. जहांगीर खान ने कहा, 'हम 200 प्रतिशत जीत को लेकर आश्वस्त हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक सम्पन्न

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री  साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री  साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।  आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। बीते चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।  नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वनमंत्री  केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सु लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष मती गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  प्रणव मरपच्ची, विधायक मती रायमुनी भगत, विधायक  चैतराम अटामी, विधायक  विक्रम उसेंडी, विधायक मती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक  नीलकंठ टेकाम, विधायक  आशाराम नेताम, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

जरूरतमंदों को सम्मान और पारदर्शिता के साथ सहायता देना ही हमारा संकल्प

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी निर्धन, निराश्रित, वृद्धजनों, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजनों के कल्याण एवं आर्थिक सहायता के लिए विभिन्न प्रकार की पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, यह सरकार के उस विश्वास का अंतरण है, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार हर परिस्थिति में हर घड़ी जरूरतमंदों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय से समग्र पेंशन योजना के तहत प्रदेश के 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों के बैंक खातों में मार्च पेड अप्रैल की 200 करोड़ 71 लाख रुपये की पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार की ओर से सभी पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यह हमारे लिए एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही यह पेंशन राशि उनके जीवनयापन में सहारा बनने के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स एवं पेंशन हितग्राहियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प है कि अंतिम पंक्ति में खड़े समाज के हर व्यक्ति तक सहायता समय पर, सम्मान के साथ और पारदर्शी तरीके से पहुंचे, जिससे कोई भी नागरिक अपने आपको असहाय महसूस न करे। सरकार हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जरूरतमंदों के हित में पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि समाज के कमजोर वर्गों को नियमित रूप से आर्थिक सहायता मिले और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति इस सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का आधार भी मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन की पेंशन योजनाओं में मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना में 62 हजार 594 हितग्राहियों को, मानसिक रूप से अविकसित/बहु दिव्यांग को आर्थिक सहायता योजना में 77 हजार 120 हितग्राहियों को और समग्र सामाजिक सुरक्षा (वृद्धजन, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजन) पेंशन योजना में 32 लाख 5 हजार 517 हितग्राहियों को, इस प्रकार कुल 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों को 600 रुपए प्रतिमाह की दर से आज कुल 200.71 करोड़ रूपए की पेंशन राशि से लाभांवित किया गया है। 

8वें वेतन आयोग से जुड़ा बड़ा फैसला, सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर होगी चर्चा

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. दिल्‍ली में 8th पे कमीशन को लेकर 3 दिनों की बैठक शुरू हो चुकी है. इस बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कितनी बढ़नी चाहिए, क्‍या फिटमेंट फैक्‍टर होना चाहिए, महंगाई भत्ता मर्ज होगा या नहीं? आदि जैसी मांगों पर बात होगी।  दरअसल, जनवरी में 8वें वेतन आयोग का गठन किया गया था, जिसे 18 महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है. इसी के मद्देनजर, आयोग ने जमीनी स्‍तर पर काम तेज कर दिया है और एक के बाद एक राज्‍यों के साथ बैठक कर रहा है और केंद्रीय कर्मचारियों के यूनियन की मांगों पर विस्‍तार से चर्चा कर रहा है।  मंगलवार को दिल्‍ली में एक बैठक शुरू की गई, जो 3 दिनों तक चलेगी. इससे पहल उत्तराखंड में 8वें पे कमीशन को लेकर बैठक हुई थी. इस बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर विस्‍तार से चर्चा की गई. 30 अप्रैल तक दिल्‍ली में इसकी बैठक चलेगी. इसके बाद मई महीने में आयोग की टीम पुणे और महाराष्‍ट्र के अन्‍य ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर उनका फीडबैक लेगी।  69,000 मिनिमम सैलरी की डिमांड  8वां वेतन आयोग मिनिमम बेसिक सैलरी के साथ ही कई भत्तों की भी समीक्षा कर रहा है, जिसमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य सेवा शर्तें शामिल हैं. कर्मचारी आयोग का कहना है कि इन भत्तों में भी सुधार की आवश्‍यकता है. इसके साथ ही बेसिक पे को भी बढ़ाने की मांग है. आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 18000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्‍ताव दिया है।  फिटमेंट फैक्‍टर इतना करने की मांग 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के सामने कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर बड़ी मांग रख दी है. फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 करने की मांग की गई है. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी उछाल आएगी।  5 यूनिट की फैमिली  एक बदलाव 5 यूनिट फैमिली को लेकर है, क्‍योंकि अभी तक 3 यूनिट की फैमिली मानकर भत्ता तय किया जाता है. अब यूनियन की मांग 5 यूनिट की फैमिली मानकर किया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में और भी बड़ा इजाफा होगा।  

Bihar MSP Hike: रबी फसलों के दाम बढ़े, सूरजमुखी की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

समस्तीपुर. किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। दरभंगा प्रमंडल के संयुक्त निदेशक ने इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश जारी कर व्यापक प्रचार-प्रसार का आदेश दिया है। गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Wheat MSP Hike) में 160 रुपये की वृद्धि कर इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके साथ ही मसूर, चना, जौ, सरसों एवं सूरजमुखी (कुसुम) के दाम भी बढ़ाए गए हैं, जिससे किसानों को विविध फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। खास बात यह है कि सूरजमुखी के एमएसपी (Sunflower MSP Hike) में सबसे अधिक 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस कदम से दलहन व तिलहन उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी। सरकार का प्रयास किसानों को मसूर, चना और तेलहन जैसी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित करने का है। इसके लिए चना, मसूर, जौ, सरसों एवं कुसुम का भी समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। मसूर और सरसों जैसी फसलें भी किसानों को आकर्षित कर सकती हैं, क्योंकि इनके दाम लागत से काफी ऊपर तय किए गए हैं। सूरजमुखी के एमएसपी में हुई सबसे अधिक बढ़ोतरी दाम बढ़ने से दलहन और तिलहन उत्पादन को बल मिलेगा। इसके साथ ही आयात पर निर्भरता घटेगी। गेहूं और चना जैसी फसलों की खरीद पर सरकार का ज्यादा ध्यान रहता है। ऐसे में किसानों को इनकी पैदावार बेचने में कोई परेशानी नहीं होगी। मसूर और कुसुम में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए यह प्रोत्साहन वाला कदम माना जा रहा है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम यानी सूरजमुखी के एमएसपी में हुई है, जिसकी कीमत 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 6540 रुपये कर दिया गया है। सूरजमुखी का पुराना एमएसपी 5940 रुपया था। इसमें 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरसों के एमएसपी में 250 रुपये की बढ़ोतरी मसूर का एमएसपी (Masoor MSP) 300 रुपये बढ़कर 7000 रुपये हो गया है। सरसों (Mustard MSP) में 250 रुपये, चना (Gram MSP) में 225 रुपये, जौ (Barley MSP) में 170 रुपये और गेहूं में 160 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि 2018-19 के बजट प्रविधानों के अनुरूप है, जिसमें लागत मूल्य का कम से कम डेढ़ गुना दाम सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित – रबी विपणन मौसम 2026-27 की रबी फसलों के लिए भारत सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग किसानों के बीच नया एमएसपी का प्रचार प्रसार कर रही है। इसमें गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अलावा जौ का 2150 रुपये, चना 5875 रुपये, मसूर 7000 रुपये, सरसो 6200 रुपये एवं सूरजमुखी 6540 रुपये प्रति क्विंटल है। – डॉ. सुमित सौरभ, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर।