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MP के धार में बड़ा हादसा, दो वाहनों की जोरदार भिड़ंत में 5 की जान गई, कई घायल

धार  जिले के तिरला थाना क्षेत्र में बुधवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सनसनी फैला दी। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटे के पास मजदूरों से भरी पिकअप वाहन और स्कॉर्पियो के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कैसे हुआ यह हादसा प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पिकअप वाहन में करीब 30–35 मजदूर सवार थे, जो अमझेरा की ओर जा रहे थे। रात करीब 8:15 से 8:20 बजे के बीच अचानक पिकअप वाहन असंतुलित हुआ और सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। टक्कर के बाद पिकअप पलट गई, जिससे उसमें सवार मजदूर नीचे दब गए।  

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को बताया आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी में  काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विश्व की अनूठी 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' का सूक्ष्म अवलोकन किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित हो रहे भारतीय पंचांग, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की गणना की सराहना करते हुए इसे आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम बताया। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा वर्ष 2024 में कालगणना के केन्द्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गौरवशाली अतीत को सहेजते हुए उसे वर्तमान में जीवंत बनाए रखने की मंशानुरूप वैदिक घड़ी को देश के सभी ज्योतिर्लिंगों में स्थापित किया जा रहा है। सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (3 अप्रैल 2026) को यह घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जिसे 4 अप्रैल को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया गया था। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है, जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होता है उस स्थान की काल गणना तदनुसार दिखाई देती है। स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहता है। इस घड़ी में वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टेंडर्ड टाइम, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति आदि की जानकारी समाहित है। जानिए क्या है 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' भारत का समय- पृथ्वी का समय संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया। (दिनांक 29 फ़रवरी 2024) वैदिक समय प्रणाली यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य समय की गणना करती है। दो सूर्योदयों के बीच एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त = 15 मुहूर्त सूर्यास्त से अगले सूर्योदय = 15 मुहूर्त इस प्रकार एक पूर्ण वैदिक दिवस 30 मुहूर्त का होता है। मुहूर्त, कला एवं काष्ठा प्रत्येक मुहूर्त सामान्यतः लगभग 48 मिनट के बराबर होता है, किंतु इसकी अवधि घड़ी की भौगोलिक स्थिति, सूर्योदय-सूर्यास्त समय तथा सूर्य के कोण के अनुसार परिवर्तित होती है। मुहूर्त मुहूर्त = 30 कला 1 कला = 96 सेकंड 1 कला = 30 काष्ठा 1 काष्ठा = 3.2 सेकंड अर्थात् 30 मुहूर्त : 30 कला : 30 काष्ठा इनकी अवधि भी पर्यवेक्षक के स्थानानुसार परिवर्तित हो सकती है। समय निर्धारण का आधार यह घड़ी सूर्य के कोण तथा पर्यवेक्षक की स्थान-विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को सम्मिलित कर समय का निर्धारण करती है। सूर्योदय के समय के अनुसार ही स्थान का वैदिक समय प्रदर्शित किया जाता है। घड़ी में प्रदर्शित जानकारी वैदिक समय, भारतीय मानक समय, स्थान, पंचांग, विक्रम सम्वत्, तिथि, मुहूर्त, योग, करण, नक्षत्र, सूर्य राशि, चन्द्र राशि। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों और गौरवशाली अतीत को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वाराणसी के बाद आगामी समय में अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी ज्योतिर्लिंगों पर भी ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, बल्कि नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध विरासत और काल-गणना की प्रामाणिक पद्धति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।  

7 MPs की ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलेंगे CM भगवंत मान, मनीष सिसोदिया का बयान- AAP एकजुट है

  चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगने के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐलान किया है कि वो 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने का मुद्दा उठाएंगे. उन्होंने कहा, ''मैं 5 मई को दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति से मिलने जा रहा हूं और इस मुद्दे को उनके सामने रखूंगा।  उन्होंने कहा कि वह सांसदों को वापस बुलाने के सवाल पर भी राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे, भले ही मौजूदा कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान न हो. हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर BJP का दामन थाम लिया. इनमें राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल आदि सांसद शामिल थे।  इनमें से छह सांसद पंजाब से थे. CM भगवंत मान ने इन नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक बार फिर गद्दार करार दिया. BJP की ओर से इस शब्द पर आपत्ति जताए जाने पर उन्होंने कहा, ''जो लोग जनता के जनादेश का दुरुपयोग करते हैं, वे निश्चित रूप से गद्दार हैं.'' इस घटनाक्रम के बाद AAP ने कई जगह विरोध प्रदर्शन किए थे।  हरभजन सिंह समेत कुछ सांसदों के घरों के बाहर गद्दार तक लिख दिया गया था. इस पूरे विवाद के बीच मनीष सिसौदिया ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ''हम सब एकजुट हैं. हम सब साथ हैं. कुछ लोगों के जाने से AAP को कोई नुकसान नहीं होगा. ये मामला विचाराधीन है और हमने अपनी आपत्तियां पहले ही दर्ज करा दी हैं।  पंजाब के AAP अध्यक्ष अमन अरोरा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ''ये लोग पीठ में छुरा घोंपने वाले हैं. राघव चड्ढा और संदीप पाठक कई विधायकों को पार्टी में लाए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विधायक भी पार्टी छोड़ देंगे.'' वहीं जालंधर के नकोदर से विधायक इंद्रजीत कौर ने इस पूरे मामले को ज्यादा तूल न देने की बात कही है।   उन्होंने कहा, ''पार्टी नेताओं से बड़ी होती है. नेता आते-जाते रहते हैं, लेकिन संगठन कायम रहता है.'' उन्होंने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे नेताओं का इस्तेमाल कर बाद में उन्हें छोड़ देती है, जैसा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मामले में हुआ. उन्होंने कहा कि उनसे किसी ने पार्टी छोड़ने के लिए संपर्क नहीं किया है. वो AAP के साथ खड़ी हैं। 

‘सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चिप्स के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के उन्नत संस्करण 'सेवा सेतु' का किया शुभारंभ 'सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आधुनिक तकनीक और AI से सशक्त हुआ सुशासन: ‘सेवा सेतु’ से 441 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर अब सेवाएं नागरिकों के हाथ में: ‘सेवा सेतु’ से घर बैठे मिलेगी 441 सरकारी सुविधाएं ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी नागरिक सेवाओं की डिजिटल सुविधा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा आमजन तक प्रभावशाली, पारदर्शी और डिजिटल नागरिक सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत संचालित ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के उन्नत संस्करण ‘सेवा सेतु’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से डिजिटल नागरिक सेवाएं और अधिक सशक्त और प्रभावी होंगी। वर्ष 2003 में प्रारंभ हुए चॉइस (CHOICE) मॉडल से लेकर वर्ष 2015 के ई-डिस्ट्रिक्ट और अब ‘सेवा सेतु’ तक छत्तीसगढ़ ने डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक लंबी और उल्लेखनीय यात्रा तय की है तथा यह प्लेटफॉर्म अब नागरिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन चुका है, जिससे लाखों नागरिकों को लाभ मिला है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से अब एक ही पोर्टल पर 441 शासकीय सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 54 नई सेवाएं और 329 री-डायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी सेवाओं की जानकारी सहज रूप से प्राप्त की जा सकेगी। आय, जाति, निवास, राशन कार्ड और विवाह पंजीयन जैसे प्रमुख प्रमाण-पत्रों सहित अब तक 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं और इतने ही प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 30 से अधिक विभागों के एकीकरण के साथ यह प्लेटफॉर्म एक सशक्त “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘सेवा सेतु’ राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का संचालन राज्य स्तर पर चिप्स (CHiPS) द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसाइटी (DeGS) के माध्यम से इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार, व्हाट्सएप और ‘भाषिणी’ जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकृत उपयोग किया गया है, जिससे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, सेवा की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजी लॉकर, ई-प्रमाण और उमंग जैसे प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण कर सेवाओं को और अधिक सरल, सुरक्षित और सुलभ बनाया गया है।  ‘सेवा सेतु’ में ट्रेजरी और ई-चालान का एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन भुगतान कर तत्काल डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे तथा डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, जिसकी रीयल-टाइम ट्रैकिंग एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से संभव होगी। पोर्टल में क्यूआर कोड आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल सिग्नेचर, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं तथा यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा समाप्त हो गई है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत सेवाओं की समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन, समय-सीमा संकेतक और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी। राज्य में सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं, जहां से नागरिक आसानी से सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।  ‘सेवा सेतु’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जनसेवा के केंद्र में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया को सरल और तकनीकी रूप से बाधारहित बनाया गया है, जिससे शासन और नागरिकों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और सेवाएं सीधे नागरिकों के हाथों तक पहुंच रही हैं।व्हाट्सएप इंटरफेस के माध्यम से नागरिक विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे, पावती रसीद और दस्तावेजों के लिंक तुरंत प्राप्त कर सकेंगे तथा अनुमोदन के पश्चात डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र सीधे व्हाट्सएप पर प्राप्त कर सकेंगे।  वर्तमान में यह सुविधा 25 सेवाओं के लिए उपलब्ध है, जिसे शीघ्र ही सभी सेवाओं तक विस्तारित किया जाएगा। प्रत्येक प्रमाण-पत्र में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन की सुविधा दी गई है, जबकि कैप्चा, ओटीपी और ईमेल आधारित प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। नागरिकों की पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा सुरक्षित लॉगिन हेतु डिजिलॉकर और ई-प्रमाण जैसी प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।  ‘भाषिणी’ के सहयोग से यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे हर नागरिक अपनी भाषा में सेवाओं का लाभ ले सकेगा। नागरिक ‘सेवा सेतु’ में उपलब्ध सेवाओं का लाभ वेब पोर्टल, लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे तथा फीडबैक सुविधा के माध्यम से अपने सुझाव भी दे सकेंगे, जिनके आधार पर इस परियोजना को निरंतर बेहतर बनाया जाएगा।  इस अवसर पर मुख्यसचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,  मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बदलाव, नन्हे कदम बनेंगे सशक्त भारत के भविष्य की नींव

रायपुर देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है। भवन ही बन गया शिक्षक : ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है। धमतरी का ‘बाला मॉडल’ : सीखने का नया अनुभव धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं। शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है। इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है। खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं। कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सशक्त भारत की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। * डॉ. दानेश्वरी संभाकर उप संचालक (जनसंपर्क)

BJP की धाक दिल्ली नगर निगम में, प्रवेश वाही बने मेयर, मोनिका पंत डिप्टी मेयर

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम की सियासत में बुधवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रवेश वाही को नया मेयर चुना गया. पीठासीन अधिकारी राजा इकबाल सिंह ने प्रवेश वाही के मेयर चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की. रोहिणी ईस्ट से पार्षद प्रवेश वाही ने कुल 156 वोट हासिल किए, जिनमें इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 14 पार्षदों का भी समर्थन शामिल रहा. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार हाजी जराफ को महज 9 वोट मिले।  आनंद विहार से बीजेपी पार्षद मोनिका पंत को 156 वोटों के साथ डिप्टी मेयर चुना गया. स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के लिए बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव और पहाड़गंज से पार्षद मनीष चड्ढा निर्वाचित हुए, जबकि शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी भी इस पैनल में चुने गए. मेयर चुने जाने के बाद प्रवेश वाही ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि आने वाले महीनों में दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने और विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया जाएगा।  उन्होंने कहा, 'हम दिल्ली को स्वच्छ बनाएंगे और विकास के लिए निरंतर काम करेंगे.' इस बार मेयर चुनाव के लिए कुल 273 वोटों का इलेक्टोरल कॉलेज था, जिसमें 249 पार्षद, दिल्ली विधानसभा द्वारा नामित 14 विधायक, 7 लोकसभा सांसद और 3 राज्यसभा सदस्य शामिल थे. जीत के लिए 137 वोटों की जरूरत थी, जिसे बीजेपी उम्मीदवार ने आसानी से पार कर लिया. दिलचस्प बात यह रही कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस चुनाव से दूरी बनाई और मतदान में हिस्सा नहीं लिया।  आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह फैसला बीजेपी को एमसीडी की जिम्मेदारी संभालने देने और उसके कामकाज को जनता के सामने उजागर करने के लिए लिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के सभी स्तरों पर होने के बावजूद बीजेपी दिल्ली में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकी है. इससे पहले नवंबर 2024 में आम आदमी पार्टी के महेश कुमार खिंची बेहद करीबी मुकाबले में तीन वोटों से मेयर चुने गए थे. बता दें कि 22 मई 2022 को पूर्वी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को एकीकृत कर एक ही संस्था- दिल्ली नगर निगम (MCD) का गठन किया गया था। 

UAE के OPEC छोड़ने से भारत को फायदा, पाकिस्तान को नुकसान: जानिए किसे कितना फायदा हुआ

नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात ने अपने हालिया कदमों से साफ संकेत दे दिया है कि वह पाकिस्तान-सऊदी अरब गठजोड़ के खिलाफ रणनीति बना रहा है. तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलने का उसका फैसला सऊदी अरब को बड़ा झटका देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं ये फैसला पाकिस्तान के लिए भी बड़ा मैसेज बनकर सामने आया है, जिसने पड़ोसी मुल्क की पेशानी पर निशान ला दिए हैं।  पाकिस्तान को झटका तो क्या भारत को लाभ? इसे पूरे मामले को भारत के लिहाज से देखें तो सवाल उठता है कि क्या ये फैसला भारत के पक्ष में जा सकता है? असल में यूएई के इस फैसले से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में कमी आ सकती है. इसका सीधा फायदा भारत जैसे आयात करने वाले देशों को मिल सकता है, क्योंकि उनका तेल खर्च कम होगा और महंगाई पर भी असर पड़ेगा. एक्सपर्ट्स के नजरिये को समझें तो यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।  ऐसे में जहां भारत को सस्ते तेल और मजबूत ऊर्जा साझेदारी का फायदा मिल सकता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव और रणनीतिक असहजता बढ़ाने वाली बन सकती है। UAE ने क्यों लिया ऐसा फैसला?  अब इस पूरे फैसले को कैनवस पर और बड़ा करके देखें तो नजर आता है कि इससे पहले कई घटनाक्रम तेजी से सामने आए. ईरान के साथ टकराव के दौरान यूएई को सीधे हमलों का सामना करना पड़ा, जबकि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों से उसे वह समर्थन नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर खुद को पीछे खींच लिया है, जिससे यूएई खुद को सैन्य रूप से असुरक्षित महसूस करने लगा।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल और अमेरिका की ओर से तेहरान पर हमलों के बाद सबसे ज्यादा जवाबी कार्रवाई का सामना यूएई को करना पड़ा. अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 8 अप्रैल तक उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 537 बैलिस्टिक मिसाइल, 26 क्रूज मिसाइल और 2256 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया।  पाकिस्तान को लेकर क्या है UAE की राय? यूएई का मानना है कि पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाकर ईरान के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया, जिससे अबू धाबी में नाराजगी बढ़ी. विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई इस संघर्ष को “ब्लैक-वाइट” की तरह देख रहा है, जहां बीच की कोई लाइन नहीं है. यही कारण है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता उसे रास नहीं आई।  इसी नाराजगी के चलते यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज समय से पहले लौटाने की मांग कर दी, जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा था. हालांकि बाद में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज देकर राहत दी और 5 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन देने का वादा किया।  पाकिस्तान और सऊदी के बीच रक्षा समझौता सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता भी हुआ, जिसके तहत पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर रियाद की सुरक्षा के लिए अपने परमाणु और मिसाइल संसाधन दे सकता है. ईरान के हमलों के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब को इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।  UAE और भारत के मजबूत संबंध इन घटनाओं के बीच खाड़ी देशों के भीतर दरार साफ नजर आने लगी है. जहां यूएई भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए है, वहीं सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक नए रणनीतिक गठजोड़ की चर्चा हो रही है. यमन और सूडान जैसे क्षेत्रों में भी सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद बढ़े हैं।  यमन में 2015 के सैन्य हस्तक्षेप के दौरान दोनों देश साथ थे, लेकिन बाद में रणनीति को लेकर टकराव बढ़ गया. सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के साथ राजनीतिक समाधान की कोशिश की, जबकि यूएई ने अलगाववादियों का समर्थन किया. इसी तरह, सूडान में भी दोनों देश अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं।  तेल उत्पादन को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं. दशकों से सऊदी अरब OPEC का नेतृत्व करता रहा है, लेकिन यूएई अब अपने उत्पादन पर किसी तरह की पाबंदी नहीं चाहता. OPEC से बाहर निकलने के बाद यूएई अब अपनी पूरी क्षमता से तेल उत्पादन कर सकेगा, जो वैश्विक बाजार में उसके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।  सऊदी के साये में नहीं रहना चाहता UAE यूएई के ऊर्जा मंत्री सुनील मोहम्मद अल माजुरी ने कहा कि यह फैसला देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और बाजार की जरूरतों के अनुरूप लिया गया है. वहीं उद्योग मंत्री सुल्तान अल जाबर ने इसे राष्ट्रीय हित और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिहाज से जरूरी कदम बताया।  करीब 59 साल बाद OPEC से अलग होने का यूएई का यह फैसला वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब के साथ उसके संबंध पूरी तरह खत्म हो गए हैं. दोनों देश अब भी बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और GCC के सदस्य हैं. लेकिन इतना तय है कि अबू धाबी ने यह साफ कर दिया है कि वह अब सऊदी नेतृत्व के साए में रहने को तैयार नहीं है. मौजूदा युद्ध, नाकेबंदी और बदलते गठजोड़ के बीच यूएई का यह कदम खाड़ी राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत कर सकता है। 

एग्जिट पोल के लेटेस्ट आंकड़े: बंगाल और असम में भाजपा का दबदबा, TMC और कांग्रेस के लिए बुरी खबर

 नईदिल्ली  एग्जिट पोल 2026 के आंकड़े दिलचस्प और अलग-अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. पश्चिम बंगाल में मुकाबला काफी कड़ा नजर आ रहा है. कुछ सर्वे बीजेपी को बढ़त देते हैं, जबकि कुछ टीएमसी की मजबूत वापसी का संकेत देते हैं. यहां अंतिम नतीजे चौंका सकते हैं. असम में तस्वीर अपेक्षाकृत साफ दिख रही है, जहां ज्यादातर एग्जिट पोल भाजपा गठबंधन को बहुमत से ऊपर बताते हैं और सत्ता वापसी के संकेत देते हैं. तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है, लेकिन एआईएडीएमके और टीवीके की मौजूदगी मुकाबले को पूरी तरह एकतरफा नहीं होने दे रही. केरल में यूडीएफ को बढ़त मिलने के संकेत हैं, जिससे सत्ता परिवर्तन की संभावना बनती दिख रही है, हालांकि एलडीएफ भी करीबी टक्कर में है।  इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. एग्जिट पोल के आंकड़े केवल एक अनुमान होते हैं, जो वोटर्स के फीडबैक पर आधारित होते हैं. पूर्व में कई बार ये नतीजे गलत भी साबित हुए हैं, लेकिन इनसे हवा के रुख का पता जरूर चलता है।  चुनाव आयोग 4 मई को वोटों की गिनती करेगा. उसी दिन आधिकारिक रूप से पता चलेगा कि किस राज्य में किसकी सरकार बन रही है. सभी की निगाहें अब शाम को आने वाले उन आंकड़ों पर हैं, जो देश की सियासत की नई दिशा तय करेंगे  एग्जिट पोल 2026 रिजल्ट | पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी का एग्जिट पोल केरल में यूडीएफ को बढ़त, एलडीएफ कड़ी टक्कर में पीछे केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में यूडीएफ को बढ़त मिलती दिख रही है. मैट्राइज के अनुसार यूडीएफ 75 से 85 सीटों तक पहुंच सकता है, जो बहुमत 71 से ऊपर है. वोटवाइब और पीपल्स पल्स भी यूडीएफ को 70 से 80 सीटों के बीच रखते हैं. वहीं एलडीएफ 58 से 65 सीटों के आसपास सिमटता नजर आ रहा है. एनडीए का प्रदर्शन कमजोर दिख रहा है, जहां सीटें एक अंक में रह सकती हैं. कुल मिलाकर राज्य में सत्ता बदलने के संकेत मिल रहे हैं।  तमिलनाडु में डीएमके आगे, लेकिन मुकाबला अभी बाकी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में डीएमके गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है. मैट्राइज के अनुसार डीएमके प्लस 122 से 132 सीटों तक पहुंच सकता है, जो बहुमत 118 से ऊपर है. पीपल्स इनसाइट और पीपल्स पल्स भी डीएमके को 120 से 145 सीटों के बीच रखते हैं. वहीं एआईएडीएमके गठबंधन 60 से 110 सीटों तक सिमटता नजर आ रहा है. टीवीके को 10 से 40 सीटों के बीच आंका गया है, जिससे मुकाबला रोचक बना हुआ है।  असम में भाजपा गठबंधन को साफ बढ़त, बहुमत पार करने के संकेत असम विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. एक्सिस माय इंडिया, मैट्राइज और जेवीसी जैसे सर्वे भाजपा प्लस को 85 से 101 सीटों के बीच रखते हैं, जो 64 के बहुमत आंकड़े से काफी ऊपर है. कांग्रेस गठबंधन 23 से 36 सीटों के बीच सिमटता नजर आ रहा है. पीपल्स इनसाइट भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करता है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में सत्ता वापसी की राह भाजपा के लिए आसान दिख रही है।  सीटें कम, फिर भी मजबूत रह सकती है टीएमसी की असली ताकत पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में केवल सीटों की संख्या पूरी तस्वीर नहीं दिखाती. कई बार कोई पार्टी कम अंतर से ज्यादा सीट जीत लेती है और सत्ता में आ जाती है, भले ही उसका वोट शेयर सीमित हो. दूसरी ओर विपक्ष को अच्छे खासे वोट मिलते हैं, लेकिन वे सीटों में बदल नहीं पाते. यही वजह है कि टीएमसी की असली ताकत समझने के लिए सिर्फ सीट काउंट नहीं, बल्कि वोट पैटर्न और अंतर को भी देखना जरूरी है।   बंगाल में बीजेपी की सरकार! अलग-अलग सर्वे क्या बता रहे? पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के एग्जिट पोल ने सियासी तस्वीर को बेहद दिलचस्प बना दिया है. पीएमएआरक्यू और मैट्राइज जैसे सर्वे बीजेपी को बढ़त देते दिख रहे हैं, जहां सीटें 150 के आसपास तक जा सकती हैं. वहीं पीपल्स पल्स का अनुमान टीएमसी के पक्ष में जाता दिख रहा है, जिसमें 117 से 187 सीटों की रेंज दी गई है. कांग्रेस और लेफ्ट का प्रदर्शन सीमित नजर आ रहा है. अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े बताते हैं कि मुकाबला पूरी तरह खुला है और अंतिम नतीजे चौंका सकते हैं।   केरल में कांग्रेस गठबंधन की सरकार, एग्जिट पोल का अनुमान केरल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल का डेटा आ गया है. News18 के मेगा एग्जिट पोल के अनुसार, कांग्रेस के UDF को 70 से 80 सीटें, LDF को 58 से 68 सीटें और NDA को 0-4 सीटें मिलने का अनुमान है।  चाणक्य स्ट्रैटेजीज़ ने BJP को TMC से आगे बताया, सत्ता-विरोधी लहर के संकेतों को मज़बूती चाणक्य स्ट्रैटेजीज़ का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी 150–160 सीटें जीतेगी, जबकि TMC+ को 130–140 सीटें मिलेंगी. यहां बहुमत का आंकड़ा 148 है. इसके साथ ही, Matrize और PMARQ के बाद यह तीसरी ऐसी एजेंसी बन गई है, जिसने बीजेपी को टीएमसी पर बढ़त दी है. केवल People's Pulse ही इस रुझान के विपरीत ममता बनर्जी के पक्ष में खड़ा है।  केरल में UDF की आंधी! Axis My India ने दिया सबसे बड़ा अनुमान Axis My India का अनुमान UDF के लिए अब तक का सबसे ज़्यादा आशावादी अनुमान है. इसके मुताबिक, UDF को 78–90 सीटें मिल सकती हैं, जो तीनों एजेंसियों में सबसे ज़्यादा ऊपरी सीमा है. LDF को सिर्फ़ 49–62 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि BJP+ 0–3 सीटों पर ही अटकी हुई है. तीनों एजेंसियां- People's Pulse, Matrize और Axis My India अब इस बात पर एकमत हैं कि केरल में अगली सरकार UDF ही बनाएगी।   केरल में बड़ा उलटफेर, एग्जिट पोल में लेफ्ट को मात देती दिख रही कांग्रेस  पीपल्स पल्स ने TMC को दिया बहुमत, बीजेपी दूसरे पायदान पर काफी पीछे पीपल्स पल्स का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में TMC 177–187 सीटें जीतेगी, जो बहुमत के आंकड़े 148 से काफी ज़्यादा है. वहीं BJP 95–110 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर काफी पीछे रहेगी. … Read more

E85 पेट्रोल से बदलेंगे फ्यूल नियम, पेट्रोल में 85% एथेनॉल, सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

नई दिल्ली  भारत सरकार ने सेंटर मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसका उद्देश्य देश में मौजूदा E20 पेट्रोल प्रोग्राम से आगे बड़कर अधिक इथेनॉल वाले ईंधन को औपचारिक तौर पर शामिल करना है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि इन संशोधनों में E85 ईंधन और E100 ईंधन के प्रावधान शामिल हैं। E100 होने पर वाहन लगभग पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल पर चल सकेंगे। नियमों में मुख्य बदलाव नोटिफिकेशन के अनुसार, देशभर में E20 ईंधन लागू करने के लिए पेट्रोल के मानकों को E10/3 से बदलकर E10/E20 किया जाएगा। प्रस्ताव में E85 और E100 ईंधन को औपचारिक रूप से नियमों में शामिल किया गया है। साथ ही बायोडीजल के संदर्भ को B10 से बढ़ाकर B100 कर दिया गया है। चुनिंदा श्रेणियों में वाहन के कुल वजन की सीमा को 3,000 किलो से बढ़ाकर 3,500 किलो किया गया है। इसके अलावा उत्सर्जन परीक्षण के मानकों और तकनीकी शब्दावली को भी बेहतर बनाया गया है। हाइड्रोजन ईंधन के वर्गीकरण को भी बदलकर Hydrogen + CN की जगह Hydrogen+ CNG कर दिया गया है। क्या है नया प्रस्ताव सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 27 अप्रैल को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसका मकसद इमीशन से जुड़े नियमों, फ्यूल क्लासिफिकेशन और हाई इथेनॉल ब्लेंड से जुड़े तकनीकी शब्दों में बदलाव करना है. इस प्रस्ताव में सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन कर E85 या E100 तक के फ्यूल के लिए व्हीकल स्टैंडर्ड को शामिल करने की बात कही गई है. इससे पहले ये सीमा केवल E85 तक ही थी।  इन बदलावों के तहत पेट्रोल के साथ इथेनॉल की मिलावट की सीमा E10 से बढ़ाकर E20 तक की जा रही है. साथ ही B100 बायोडीजल के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं. इससे साफ है कि सरकार अब हाई-ब्लेंड फ्यूल के पूरे रेंज को सपोर्ट करने के लिए नियम बना रही है. सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को फिलहाल पब्लिक कमेंट के लिए जारी किया है. यानी आम लोग और इंडस्ट्री से जुड़े लोग अपनी राय दे सकते हैं. सभी सुझाव मिलने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी।  इथेनॉल को लेकर रेगुलेटरी कदम CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस प्रस्तावित कदम का मतलब यह नहीं है कि ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन को तुरंत लागू कर दिया जाएगा। इसका मकसद फिलहाल टेस्टिंग और मूल्यांकन के लिए नियम बनाना है। इसका मकसद E850E100 ईंधन के लिए फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी और जरूरी ढांचे का जायजा लेना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले बताया था कि इस विषय पर संबंधित पक्षों के साथ सलाह-मशविरा जारी है। भारत यहां तक कैसे पहुंचा भारत ने 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि पिछले कई सालों की मेहनत और मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से मिले इथेनॉल की आपूर्ति के कारण संभव हो पाई है। Ethanol Programme सरकार की उस नीति का अहम हिस्सा रहा है जिसके मकसद पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना और परिवहन ईंधन के स्त्रोतों में विविधता लाना है। गडकरी पहले ही कर चुके हैं अलर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बीते कल दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि, "आने वाले समय में इन ट्रेडिशनल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) पर चलने वाली गाड़ियों का कोई भविष्य नहीं है." गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों से अपील की कि, वे जल्द से जल्द बायोफ्यूल और अन्य वैकल्पिक फ्यूल की तरफ शिफ्ट करें. उनका कहना है कि पेट्रोल और डीजल न सिर्फ महंगे हैं बल्कि ये देश के लिए गंभीर समस्या भी बनते जा रहे हैं।  वाहन निर्माता कंपनियों ने धीरे-धीरे E20 ईंधन से चलने वाले इंजन पेश किए हैं जबकि नीति निर्माता साथ-साथ इस पर काम कर रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण पर पीएम मोदी ने की सीएम योगी के नेतृत्व में हो रहे विकास की सराहना

गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण पर पीएम मोदी ने की सीएम योगी के नेतृत्व में हो रहे विकास की सराहना पीएम ने गंगा एक्सप्रेसवे को बताया विकास की नई लाइफलाइन, किसानों, उद्योग व युवाओं के लिए खुलेंगे अवसरों के द्वार हरदोई  गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में केवल एक्सप्रेसवे ही नहीं बन रहे, बल्कि इनसे भी तेज गति से प्रदेश का समग्र विकास हो रहा है। उन्होंने इसे “नए उत्तर प्रदेश” की पहचान बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी और रोजगार के लिए नई लाइफलाइन साबित होगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक परिवर्तन का आधार है, जहां प्रदेश का विकास एक्सप्रेसवे की रफ्तार से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हरिद्वार तक विस्तार की योजना पर काम शुरू प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे का यह वरदान मां गंगा के आशीर्वाद से मिला है। अब लोग कुछ ही घंटों में संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा के दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा गया है, जो प्रदेश की विरासत और विकास दोनों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले किसानों की फसलें समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन अब एक्सप्रेसवे के माध्यम से कम समय में उत्पाद बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, हरदोई का हैंडलूम, उन्नाव का लेदर और प्रतापगढ़ का आंवला जैसे उत्पादों को नई बाजार पहुंच मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों में उद्योगों को आकर्षित करेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। गंगा एक्सप्रेसवे केवल पांच वर्षों में बनकर तैयार हुआ है और इसके विस्तार की योजना पर भी काम शुरू हो गया है, जिससे यह मेरठ से आगे हरिद्वार तक पहुंचेगा। साथ ही इसे अन्य एक्सप्रेसवे से जोड़कर एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर से बदल रही यूपी की तस्वीर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। राज्य में 21 एयरपोर्ट विकसित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। ब्रह्मोस मिसाइल जैसे बड़े प्रोजेक्ट यूपी की औद्योगिक शक्ति को नई पहचान दे रहे हैं। एक समय उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य कहा जाता था, लेकिन आज वही राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों के साथ प्रदेश की छवि पूरी तरह बदल रही है और अब यूपी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। पिछली सरकारों ने अपराध-जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था प्रधानमंत्री ने कहा कि क्या पुरानी सरकारों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की कल्पना भी की जा सकती थी? पहले पलायन होता था, आज यहां इन्वेस्टर समिट हो रहे हैं। भारत में जितने मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं, उनमें से आधे से अधिक केवल उत्तर प्रदेश में ही बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने पुरानी सियासत को बदल दिया है। हमारा उत्तर प्रदेश भगवान राम और कृष्ण की पावन धरती है। पिछली सरकारों ने अपराध और जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था। जिनके हाथ से सत्ता गई है, वे आज फिर यूपी और समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे महिला विरोधी हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी उन्होंने विरोध किया। लेकिन इन विपक्षी दलों को यूपी की सीटें बढ़ने से आपत्ति है। वे आपके वोट से संसद पहुंचते हैं और फिर यूपी को गाली देने वालों के साथ खड़े हो जाते हैं।