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दिल्ली में नया रूल: NO PUC, NO Fuel! पेट्रोल-डीजल और CNG की मिलेगी कमी

 नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं तो अब यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है. क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पेट्रोल-डीजल लेने से पहले आपकी गाड़ी का ‘हेल्थ रिपोर्ट’ यानी PUC सर्टिफिकेट देखी जाएगी. नहीं है तो सीधा मना. कोई बहाना नहीं, कोई राहत नहीं. प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार अब सीधे आम लोगों की जिम्मेदारी तय कर रही है।  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम एयर क्वॉलिटी सुधारने के लिए बेहद जरूरी है और अब इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  ‘No PUC, No Fuel’ नियम पर सख्ती बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘No PUC, No Fuel’ नियम को सख्ती से लागू किया जाए. दरअसल, यह नियम पिछले साल दिसंबर में शुरू की गई थी, लेकिन अब भी कई वाहन बिना वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रहे हैं. सरकार का मानना है कि ऐसे वाहन प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहे हैं. नए आदेश के मुताबिक अब पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल दें जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट हो. सभी पंपों को इस नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है ताकि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।  पेट्रोल पंपों पर जाम की स्थिति दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों पर इस नए नियम की सख्ती का असर साफ तौर पर देखने को मिलने लगा है. पेट्रोल पंप बिना वैलिड पीयूसी के फ्यूल देने से इंकार कर रहे हैं, ऐसे में कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भारी भीड़ जमा होते देखी गई है. हालांकि सरकार ने इसकी तैयारी कर रखी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मामले को तत्काल निपटाया जा सके।  इस नियम को सख्ती से लागू कराने के लिए फूड एंड सप्लाई विभाग, ट्रांसपोर्ट विभाग, नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं होगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वाहन जब्त करने और अधिकतम जुर्माना लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. सभी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि इस नियम का पूरी सख्ती से पालन हो।  रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है. इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि वे अपने PUC सर्टिफिकेट को समय-समय पर अपडेट रखें और स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली बनाने में सहयोग करें।  क्या बोलीं CM राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारी सरकार ने सख्त निर्णय लेते हुए यह फैसला लिया है कि दिल्ली में अब बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. सभी पेट्रोल पंपों और एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. अब बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ प्रमाणपत्र वाले किसी भी वाहन को दिल्ली के फ्यूल स्टेशंस पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी जैसे ईंधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे. वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना समय की आवश्यकता है और हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। 

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण: US से जापान तक आर्थिक भूचाल, क्रूड $100 तक पहुंचा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले ओपनिंग के साथ ही 800 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान में टेंशन के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल ने एक बार फिर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है. विदेशों से भी सेंसेक्स-निफ्टी के लिए रेड सिग्नल मिल रहे थे।  सेंसेक्स ने लगाया तगड़ा गोता  BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के साथ अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की. इसके कुछ ही मिनटों में इंडेक्स की गिरावट तेज होती चली गई और सेंसेक्स 823 अंक फिसलकर 77,693 पर कारोबार करता नजर आया।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी ऐसी ही चाल के साथ आगे बढ़ता दिखा. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,378 की तुलना में गिरावट लेकर 24,202 के स्तर पर खुला और फिर फिसलते हुए 24,134 के लेवल पर आ गया।  विदेशों से मिल रहे थे खराब सिग्नल  कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते पहले से ही शेयर बाजार में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी. बीते कारोबारी दिन जहां अमेरिका शेयर मार्केट रेड जोन में बंद हुए थे, तो वहीं गुरुवार को खुलने के साथ ही एशियाई बाजार बिखरे हुए नजर आए थे।  जापान का निक्केई इंडेक्स खुलने के साथ ही फिसल गया और खबर लिखे जाने तक 650 अंक की गिरावट लेकर 58,952 पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 300 अंक की गिरावट लेकर 25,889 पर कारोबार करता नजर आ रहा था. अन्य एशियाई शेयर बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला था।  Crude Price से सहमा बाजार  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे का एक बड़ा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल भी है, जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार निकल गई है. Brent Crude Price करीब 8 फीसदी उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।  सबसे ज्यादा बिखरे ये शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 1095 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ रेड जोन में हुई थी और निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन, SBI लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स, M&M के शेयर तगड़ी गिरावट में नजर आए थे।  खबर लिखे जाने तक Tech Mahindra Share (2.60%), M&M Share (2.20%), Eternal Share (2.15%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3.10%), Dixon Tech Share (2%) की गिरावट में नजर आया।  US से जापान तक भूचाल विदेशों से मिल रहे हैं. दरअसल, अमेरिका से लेकर जापान तक दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल देखने को मिल रहा है. US Stock Market बुधवार को रेड जोन में बंद हुए, तो एशियाई बाजारों में से अधिकतर में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।  Japan Nikkei 600 अंक से ज्यादा, जबकि Hongkong HangSeng करीब 300 अंक टूटा दिखाई दे रहा है. इस बीत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी गिरावट में ट्रेड कर रहा है, जो सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का संकेत दे रहा है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार में दिनभर गिरावट देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 756 अंकों की गिरावट लेकर 78,516 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी दिनभर टूटने के बाद अंत में 198 अंक फिसलकर 24,378 पर बंद हुआ था।  Gift Nifty दे रहा ये संकेत  जहां एशियाई शेयर बाजार भारतीय शेयर बाजार में भगदड़ के संकेत दे रहे हैं, तो वहीं गिफ्ट निफ्टी से भी रेड सिग्नल मिल रहे हैं. दरअसल, Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. खबर लिखे जाने तक भारतीय शेयर मार्केट के लिए संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट में कारोबार कर रहा था।  क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन  अमेरिका और ईरान युद्ध में भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों में अभी भी टेंशन बरकरार है. ईरान होर्मुज खोलने को तैयार नहीं, तो अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी है. इस टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. इससे शेयर बाजारों में दबाव बढ़ा है। 

मिर्जापुर हादसा: ट्रक की ब्रेक फेल, बोलेरो को टक्कर मारने के बाद 9 लोगों की जलकर मौत

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रमंडगंज घाटी की ढलान पर तेज रफ्तार और ब्रेक फेल ट्रक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते चार वाहन आपस में टकरा गए और एक बोलेरो आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से 9 लोग बोलेरो में जिंदा जल गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण सड़क हादसे पर सीएम योगी ने दुख जताया है। ब्रेक फेल ट्रक बना हादसे की वजह पुलिस के मुताबिक हादसा ड्रमंडगंज घाटी के पास रात करीब 8:30 बजे हुआ। मध्य प्रदेश से चना लादकर आ रहा एक ट्रक ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मार दी और उसे धकेलते हुए आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रक में दे मारा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने भी संतुलन खो दिया और वह आगे चल रही कार से टकरा गया। कुछ ही पलों में सड़क पर मलबा, आग और चीख-पुकार का भयावह दृश्य फैल गया। 9 लोग जिंदा जले टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि उसमें सवार लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। बोलेरो में मौजूद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक कार सवार व्यक्ति और एक ट्रक चालक ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया। कुल 11 मौतों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मैहर धाम से लौट रहे थे श्रद्धालु पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के अनुसार बोलेरो सवार सभी लोग प्रयागराज के मांडा क्षेत्र के हाटा गांव के रहने वाले थे। ये लोग मैहर धाम से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोलेरो में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन मृतकों की संख्या और स्थिति ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और फायर टीम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया, लेकिन आग की तीव्रता के चलते बोलेरो सवारों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान कराने और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आधे घंटे बाद बचाव टीम पहुंची स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड को सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची. तब तक आग पूरी तरह विकराल रूप ले चुकी थी और सभी लोग जलकर दम तोड़ चुके थे. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  हादसे में मरने वालों में बोलेरो सवार 9 लोग शामिल हैं, जो मैहर से दर्शन कर लौट रहे थे. इनमें एक ही परिवार के मां, बेटा और बेटी के अलावा दूसरे परिवार के मां-बेटे की भी मौत हुई है. इसके अलावा एक अन्य कार सवार व्यक्ति की भी जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी केबिन में फंसने के कारण जान गंवा बैठा. इस तरह कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।  शव बुरी तरह झुलस चुके थे मृतकों की पहचान में काफी दिक्कतें आईं, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके थे. बाद में परिजनों ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर अपने प्रियजनों की पहचान की. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजन अपने प्रियजनों के शव लेकर घर लौट रहे हैं. बोलेरो में सवार वीना सिंह, इनका बेटा पीयूष सिंह, बेटी सोनम की मौत हुई है. वहीं, पंकज सिंह, वंदना सिंह और शिव सिंह की भी मौत हुई है. ये सभी मिर्जापुर के रहने वाले थे। 

बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर, लखनऊ से इंदौर तक बनेगा

सागर  लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है।  ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा।  एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा।  बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।  330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है। बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

E85 पेट्रोल आ रहा है भारत में, गाड़ियों में 85% एथेनॉल का होगा इस्तेमाल, तैयारी जोरों पर

  नई दिल्ली E85 Blended Petrol: पश्चिमी एशिया में युद्ध का तनाव है, तेल महंगा है, दुनिया भर ही निगाहें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हैं. सबको बस एक फिकर है अगले पल क्या होगा. इसी बीच अब देश के पेट्रोल की कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. अभी तक E20 फ्यूल (20% एथेनॉल वाला पेट्रोल) की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सीधा E85 की तैयारी हो रही है. मतलब पेट्रोल में पेट्रोल कम और एथेनॉल ज्यादा. या यूं कहें कि, भारत में अब गाड़ी फ्यूल पर नहीं बल्कि शराब पर दौड़ेगी. सरकार अब ऐसा फ्यूल लाने की तैयारी में है, जो कारों को चलाएगा भी और देश की तेल पर निर्भरता भी घटाएगा. सवाल ये है कि क्या आपकी गाड़ी इस नए बदलाव के लिए तैयार है? आइये विस्तार से जानते हैं पूरा मामला-  सरकार जल्द जारी करेगी ड्राफ्ट  ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बहुत जल्द E85 फ्यूल को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस पर सरकार के भीतर सहमति बन चुकी है और मार्केट लेवल पर भी तैयारी शुरू हो गई है. शुरुआती टेस्टिंग भी की जा चुकी है, जिससे यह साफ है कि योजना अब जमीन पर उतरने के काफी करीब है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक E85 को एक अलग फ्यूल ग्रेड के रूप में पेश किया जाएगा. यह मौजूदा E20 पेट्रोल से अलग होगा. अभी E20 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 27% तक जा सकती है, जबकि E85 में यह सीधे 85% तक होगी।  तेल संकट के बीच बड़ी तैयारी पूरी दुनिया इस समय तेल संकट का सामना कर रही है, खासकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, ऐसे में E85 जैसे फ्यूल से आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि, पिछले एक दशक से एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत करोड़ों बैरल कम तेल मंगा रहा है।  पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च में अपने एक बयान में कहा था कि, "एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है।  एथेनॉल क्यों है खास एथेनॉल देश में ही गन्ना, मक्का और अनाज से बनाया जाता है. यह एक रिन्यूएबल फ्यूल है और पेट्रोल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है. यही वजह है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फ्लेक्स-फ्यूल कार का इस्तेमाल कर चुके हैं और उन्होंने 100% एथेनॉल पर चलने वाली कार को देश को दिखाया था. वो लगातार वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहनों के निर्माण पर जोर देते रहे हैं।  E85 के लिए चाहिए खास इंजन E85 फ्यूल का इस्तेमाल हर गाड़ी में नहीं किया जा सकता. इसके लिए खास तरह के इंजन यानी फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की जरूरत होती है. सामान्य पेट्रोल इंजन में अगर E85 इस्तेमाल किया जाए तो इससे इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं, परफॉर्मेंस गिर सकती है और गाड़ी स्टार्ट होने में भी दिक्कत आ सकती है।  इतना ही नहीं, E85 फ्यूल के लिए पेट्रोल पंप पर अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. इसके लिए अलग नोजल और स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होगी, ताकि E20 और E85 दोनों को अलग-अलग रखा जा सके. क्योंकि E85 फ्यूल के बाजार में आने से पहले इससे चलने वाले वाहनों का बाजार में होना जरूरी है. ऐसे में सरकार E20 फ्यूल की बिक्री तत्काल नहीं बंद करेगी, बल्कि इसे फेज्ड मैनर में हटाया जाएगा।  कब से चल रही है तैयारी भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग की योजना करीब एक दशक से चल रही है. नीति आयोग ने 2021 में अपनी रोडमैप रिपोर्ट में E85 का जिक्र किया था. इसके अलावा 2016 में ही E85 और E100 फ्यूल के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका था. 2022 में सरकार ने E5 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के टेस्ट नियम भी तय किए थे।  E85 फ्यूल से देश को कई फायदे मिल सकते हैं. इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि एथेनॉल की मांग बढ़ेगी. हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की माइलेज थोड़ा कम हो सकता है. वाहन निर्माता कंपनियों को तेजी से नए इंजन तैयार करने होंगे और तेल कंपनियों को नए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना पड़ेगा. साथ ही ग्राहकों को भी सही जानकारी देना जरूरी होगा ताकि वे गलती से E85 फ्यूल को सामान्य गाड़ियों में इस्तेमाल न करें।  कुल मिलाकर, E85 फ्यूल भारत के ऑटो और एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाएगा, लेकिन इसके सफलता पूर्वक लागू होने के लिए सरकार, कंपनियों और आम लोगों सभी की तैयारी जरूरी होगी।   

महीने में 2 बार सैलरी मिलेगी, सरकार का नया कदम, जानें पूरी जानकारी और गणित

काठमांडू  खर्च बढ़ाने और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर बड़ा फैसला किया है. ताजा जानकारी के मुताबिक हर सरकारी कर्मियों को अब से हर दो हफ्ते में सैलरी दी जाएगी।  फाइनेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने इस संबंध में  बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने  इस बारे में फ़ैसला लिया और जरूरी इंतजाम करने के लिए फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस को एक लेटर भेजा है. नए नियम के अनुसार, कर्मचारियों की मौजूदा महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा और हर दो हफ्ते में इसे दिया जाएगा. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी बांटने का निर्देश दिया है।  वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि कर्मचारियों को समय पर पेमेंट मिले, जिससे खर्च बढ़ेगा और इकॉनमी में नई जान आएगी. कंट्रोलर जनरल के ऑफिस के एक अधिकारी ने इस बात को कन्फर्म किया है कि मंत्रालय से एक सर्कुलर मिला है और यह फैसला जल्द ही लागू किया जाएगा।  सिलसिलेवार समझें सैलरी का पूरा गणित     भारत के पड़ोसी देश नेपाल में अब से हर सरकारी कर्मचारियों को 15-15 दिन सैलरी दी जाएगी.     इसका मतलब महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा.     इसके पीछे सरकार का उद्देश्य देश की इकॉनमी को मजबूत करना है.     इसके पीछे मार्केट खर्च को बढ़ाने की कोशिश भी है.     कानूनी बदलाव की भी जरूरत हो सकती है.  अब जानते हैं सरकार ने क्यों लिया यह फैसला     काफी समय से नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी धीमी चल रही है.     नेपाल की नई सरकार का मानना है कि महीने में दो बार सैलरी मिलने से लोगों के पास पैसा जल्दी-जल्दी पहुंचेगा और वे लोग इसे खर्च भी करेंगे.     खर्च बढ़ने से बाजार में सामानों की डिमांड बढ़ेगी।      रुपयों का फ्लो तेजी से होगा.     इससे इकॉनमी की स्थिति सुधरेगी. यह भी जानें पहले सैलरी महीने में एक बार आती थी. नए नियम के मुताबिक अब हर 15 दिन पर सैलरी आया करेगी. ऐसे समझिए, जैसे नेपाल में किसी सरकारी कर्मचारी की महीने की सैलरी 50 हजार है, तो 15-15 दिन पर उसे 25-25 हजार रुपये मिलेंगे।  अन्य देशों में भी लागू है सैलरी का यह नियम नेपाल ऐसा पहला देश नहीं है, जहां हर 15 दिन पर सैलरी मिला करेगी. अन्य देशों जैसे- अमेरिका में भी हर सरकारी कर्मचारी को हफ्ते में 2 बार सैलरी दी जाती है. इसके अलावा कनाडा में भी सैलरी का यह नियम लागू है. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में भी कुछ सेक्टर्स में हर 15 दिन में सैलरी दी जाती है. वहीं, मैक्सिको में भी यह नियम फॉलो किया जाता है। 

एमपी में दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन, हॉकर्स कॉर्नर की जियो टैगिंग से खाद्य लाइसेंस मिलेगा

भोपाल  एमपी में अब दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर व बड़े भवनों में खानपान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिल पाएगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी भोपाल जिले में शुरुआत हो रही है। इसमें मौके पर मौजूद दुकान का ही लाइसेंस मिल पाएगा। दुकानदार को भी लाइसेंस के लिए कार्यालयों में भटकना नहीं होगा। प्रशासन को पता होगा कि जिले में किस लोकेशन पर किस तरह की दुकान है, जिससे दुकानों की निगरानी मजबूत होगी। एक क्लिक में फूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड के पोर्टल से डिटेल मिल जाएगी। ऐसे समझें स्थिति: खाद्य प्रतिष्ठान के डिजिटल सत्यापन और जियो- टैगिंग का सीधा मतलब तकनीक के जरिए आपकी दुकान या फैक्ट्री की लोकेशन और अस्तित्व को सुनिश्चित करना है। जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी आपके प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेंगे, तो वे ऐप से दुकान की फोटो खींचेंगे। उसके साथ जगह की सटीक लोकेशन अपने आप सिस्टम में सेव हो जाएगी। ऐसे मिलेगा लाभ पहले कई बार लोग कागजों पर दुकान दिखाकर लाइसेंस ले लेते थे, जबकि मौके पर कोई दुकान होती ही नहीं थी। जियो- टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस उसी पते के लिए दिया गया है, जहां वास्तव में काम हो रहा है। इससे यह साबित होगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी वास्तव में आपकी दुकान पर जांच के लिए पहुंचा था, क्योंकि ऐप तभी काम करेगा, जब अधिकारी उस लोकेशन के आसपास होगा। सरकार के पास एक डिजिटल मैप तैयार होगा कि शहर के किस इलाके में कितने रेस्टोरेंट, डेयरी या राशन की दुकानें हैं। आपको भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होती, सब कुछ स्कैन करके अपलोड होता है। आधार कार्ड के जरिए व्यापारी का डिजिटल सत्यापन किया जाता है। खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश भोपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अधिकारी पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश है। इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस कदम से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। बिना दुकान के भी लाइसेंस ले लेेने पर अंकुश लगेगा, जियो- टैगिंग से हर हाल में केवल वास्तविक दुकानदारों को ही लाइसेंस मिल सकेगा। पहले पते में दिए मौके पर कई बार कोई दुकान ही नहीं होती थी। अब दुकान के पते पर उपस्थित होने पर ही लाइसेंस सुनिश्चित होगा। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा।

माता वैष्‍णो देवी में चांदी के चढ़ावे का खेल, ₹520 करोड़ फिसले, कैंसर का खतरा भी सामने आया

कटरा   माता वैष्‍णो देवी के दरबार में चढ़ने वाली चांदी में बड़ा खेल हो गया है. इस खेल की वजह से माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड के हाथ 520 करोड़ रुपए आते-आते रह गए है. इतना ही नहीं, चांदी के इस खेल के बीच एक ऐसी साजिश भी खुलासा हुआ है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़ा हुआ है. दरअसल, बीते दिनों माता के दरबार में श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाई गई चांदी को गलाने के लिए सरकारी टकसाल में भेजा गया था।  श्राइन बोर्ड की तरफ से भेजी गई चांदी करीब 20 टन रही होगी. वहीं इस चांदी को लेकर सरकारी टकसाल से जो खबर सामने आई, वह सभी को चौंकाने के लिए काफी थी. टकसाल की तरह से श्राइम बोर्ड को बताया गया कि उनकी तरफ से भेजी गई 20 टन चांदी में से करीब 5 से 6 फीसदी ही चांदी है. बाकी कैडमियम, लोहा और जिंक जैसे धातु हैं. बोर्ड को अनुमान था कि इस 20 टन चांदी से उन्‍हें करीब 550 करोड़ रुपए मिलेंगे. लेकिन, असल में चांदी सिर्फ 30 करोड़ की ही निकली।  चांदी के सिक्‍कों में मिली कैंसर देने वाली धातु     इस मामले की जांच में यह भी सामने आया कि इन नकली चांदी के सिक्‍कों को बनाने के लिए जिन धातुओं का इस्‍तेमाल किया गया था, उसमें एक धातु ऐसी थी जो कैंसर जैसी बीमारी पैदा कर सकती है।      दरअसल, माता वैष्‍णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु दरबार में चढ़ाने के लिए अपने साथ चांदी के छत्र या सिक्‍के लेकर आते हैं. माना जा रहा है ये नकली चांदी के सिक्‍के श्रद्धालुओं ने यात्रा मार्ग या कटरा स्थित दुकानों से खरीदे थे।      टकसाल में चांदी को गलाते समय पता चला कि इन सिक्‍कों को कैडियम, जिंक और आयरन मिलाकर बनाए गए थे. इसमें चांदी तो सिर्फ नाम मात्र की थी. टकसाल में 550 करोड़ रुपए की चांदी में सिर्फ 30 करोड़ रुपए की ही चांदी निकली।      कैडमियम चांदी जैसी दिखने वाली एक जहरीली औद्योगिक धातु है, जो बिल्‍कुल चांदी की तरह दिखती है. वहीं सिक्‍कों में आयरन का इस्‍तेमाल वजन बढ़ाने के लिए किया जाता था. वहीं, जिंक का इस्‍तेमाल लागत को कम करने के लिए किया जाता है।      कैडमियम एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है, जिस पर ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड (बीआईएस) ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है. कैडमियम को पिघलाने पर जहरीला धुआं निकलता है, जो फेफड़ों और किडनी के लिए नुकसान दायक है।      सेहत को होने वाले नुकसान को देखते हुए टकसाल ने इस चढ़ावे वाली चांदी को पिघलाने से मना कर दिया था. टकसाल स्‍टाफ ने ज्‍यादा चांदी वाले टुकड़ों को हाथ से अलग करने में लगभग तीन महीने का समय लगा था।  धोखाधड़ी से बचने के लिए श्रद्धालु किन बातों का ध्‍यान रख सकते हैं? चांदी की शुद्धता के लिए बीआईएस ने 999 और 925 कोड निर्धारित किया है. इसके अलावा 6 अंकों वाला एचयूआईडी नंबर भी चांदी में दर्ज होता है. आप एचयूआईडी कोड को बीआईएस के ‘BIS Care App’ में डालकर ज्‍वैलर की जानकारी और शुद्धता के बारे में जानक सकते हैं. इसके अलावा, किसी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए छत्र और सिक्कों को केवल कटरा, अर्धकुंवारी या भवन में स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक दुकानों से ही खरीदें। 

ग्वालियर में प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछेगा, 5 जिलों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली

ग्वालियर  मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछाया जाएगा। इनपर 18 से ज्यादा जलमग्नीय पुलों का प्लान तैयार किया गया है। इससे बारिश में टापू बनने वाले गांवों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) ने ग्वालियर चंबल संभाग की प्रमुख नदियों- सांख, क्वारी, सिंध और पार्वती पर जलमग्नीय (सबमर्सिबल) पुलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल बारिश में कट जाने वाले गांवों को मुख्य सडकों से जोड़ेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा। ग्वालियर जिले के तीन प्रमुख पुलों के साथ संभाग के भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनमें से कई को हरी झंडी मिल गई है। ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है। मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है। वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा। मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे। शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है। सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है। क्या होते हैं जलमग्नीय पुल ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं। हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम : हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।

‘मैदान कप’ से चमकेगा Bastar, Sachin Tendulkar के साथ खेलेंगे हजारों बच्चे

जगदलपुर. बदलते बस्तर में आज भारत रत्न और क्रिकेट जगत के महानायक सचिन तेंदुलकर का आगमन हुआ है। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का बस्तर पहुंचना सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि उस परिवर्तन की तस्वीर है, जहां डर की जगह अब सपनों ने ले ली है। सचिन यहां बच्चों के खेल भविष्य को संवारने के मिशन के साथ पहुंचे हैं। सचिन के साथ उनकी बहु सानिया चंदोक, बेटी सारा तेंदुलकर एवं सचिन फाउंडेशन के 5 सदस्य भी पहुंचे हैं। कभी नक्सलवाद की दहशत से पहचान बनाने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिस धरती पर कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब खेल और विकास की आवाज बुलंद हो रही है। मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन तेंदुलकर ने बताया कि बस्तर में 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा, जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी। सचिन ने बताया, ‘मैदान कप’ प्रतियोगिता के जरिए हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा। इस पहल को मानदेशी और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है। करीब 5 हजार से ज्यादा बच्चों को इस अभियान से सीधा लाभ मिलेगा। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे खेलों के जरिए बस्तर के युवाओं को नई पहचान की तैयारी है। बच्चों के बल्ले पर दिया ऑटोग्राफ इस दौरान स्थानीय क्रिकेट प्रेमी बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने सचिन का स्वागत किया। सचिन तेंदुलकर ने बच्चों के बल्ले पर ऑटोग्राफ भी दिया, जिसे पाकर मासूम चेहरों पर खुशी झलक उठी। यह पल बच्चों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा बन गया। जो बस्तर कभी हिंसा की खबरों में रहता था, आज वही बस्तर खेल प्रतिभाओं की नई राजधानी बनने की ओर बढ़ रहा है। सचिन तेंदुलकर का यह दौरा साफ संदेश है कि अब बस्तर बंदूक नहीं, बल्ले और मेडल से पहचाना जाएगा। युवा क्रिकेटर द्रोण ने कहा – सचिन से मिलकर बहुत खुश हैं युवा क्रिकेटर द्रोण वर्मा ने बताया कि सचिन तेंदुलकर से मिलना उनके लिए बेहद खास पल रहा। सचिन ने उनके बैट पर ऑटोग्राफ देते हुए “Best Wishes” लिखा और आगे भी अच्छा खेलने के लिए प्रेरित किया। द्रोण ने कहा कि वह काफी देर से उनका इंतजार कर रहे थे और मुलाकात के बाद बहुत खुश हैं। बच्चों ने भी सचिन तेंदुलकर को बस्तर मॉडर्न आर्ट भेंट कर सम्मान किया। फाउंडेशन के कार्यों का जायजा लेने आए हैं सचिन : एसपी बस्तर एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि सचिन तेंदुलकर अपने फाउंडेशन के कार्यों का जायजा लेने बस्तर पहुंचे हैं। दौरे के दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि सचिन अपने निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल होंगे और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वापस लौटने की योजना है।