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कर्मचारियों के लिए बुरी खबर, 8वें वेतन आयोग के हिसाब से नहीं मिलेगा डीए का एरियर

नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी बढ़ाने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन इसका फायदा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत नहीं दिया जाएगा. केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले दिनों जनवरी-जून, 2026 के लिए महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी देने का ऐलान किया है. यह महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से बढ़ाया जाएगा, लेकिन आगे जब 8वां वेतन आयोग लगेगा तो इस महंगाई भत्‍ते का एरियर केंद्रीय कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा।  केंद्रीय कर्मचारी संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अभी 8वां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है. लिहाजा सरकार ने 2 फीसदी महंगाई भत्‍ता बढ़ाने का ऐलान 7वें वेतन आयोग के हिसाब से ही किया है. आगे जब 8वां वेतन आयोग लागू होगा तो माना जा रहा है कि इसे 1 जनवरी, 2026 से ही प्रभावी किया जाएगा. ऐसे में कर्मचारी संगठन कयास लगा रहे थे कि तब 8वें वेतन आयोग और 7वें वेतन आयोग के बीच जो भी अंतर होगा, उस राशि को जनवरी-जून, 2026 के महंगाई भत्‍ते के हिसाब से एरियर बनाकर दिया जाएगा. लेकिन, मामले से जुड़े लोगों को कहना है कि सरकार इस एरियर के भुगतान को नजरअंदाज कर सकती है।  अभी तक क्‍या था नियम कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि ने बताया कि अभी तक जब भी नया वेतन आयोग लागू होता था तो पहला महंगाई भत्‍ता शून्‍य कर दिया जाता था और उसकी शुरुआत 6 महीने बाद होती थी. तब कर्मचारियों को बीच की अवधि वाले महंगाई भत्‍ते की राशि को एरियर के रूप में नए वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके दिया जाता था. इस बार कर्मचारियों को भले ही मूल वेतन पर महंगाई भत्‍ते का एरियर मिल जाएगा, लेकिन जनवरी-जून अवधि के लिए 8वें वेतन आयोग के हिसाब से अलग एरियर नहीं दिया जाएगा।  इस बार क्‍या होगा नुकसान कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि का कहना है कि इस बार जनवरी-जून का महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से दिया जा रहा है, लिहाजा इस अवधि का कोई डीए बकाया नहीं होगा. आगे जब 8वें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा तब जुलाई से 7वें वेतन आयोग के तहत जो डीए की बढ़ोतरी होगी, उस पर 8वें वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके महंगाई भत्‍ते के एरियर का भुगतान किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी जनवरी, 2026 से ही बढ़ाए जाने का अनुमान है।  असली मुद्दा एचआरए का फंसेगा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हर बार जब भी नया वेतन आयोग लगता है तो एचआरए का एरियर ही फंस जाता है. सरकार को चाहिए कि 8वां वेतन आयोग लगने के बाद महंगाई भत्‍ते की तरह एचआरए के एरियर का भी भुगतान किया जाए. अगले महंगाई भत्‍ते का ऐलान दिवाली के आसपास अक्‍टूबर में किया जाएगा. तब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से कर्मचारियों को डीए के एरियर का भुगतान किया जा सकता है।   

शेयर बाजार में बड़ा बदलाव, आज 71 हजार करोड़ का स्वाहा, आगे क्या होने वाला है?

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता से पहले शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अब खबर है कि अमेरिका ने ईरानी जहाज पर कब्‍जा जमाया है. इस बीच, होर्मुज को लेकर टेंशन बनी हुई है. अमेरिका का कहना है कि अभी नाकबंदी जारी है, जबकि ईरान का कहना है कि होर्मुज उसके कंट्रोल में है।  वहीं शुक्रवार रात में खबर आई थी कि होर्मुज को खोल दिया गया है, जिसके बाद अमेरिकी बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी. भारतीय बाजार में भी तेजी का संकेत दिख रहा था. गिफ्ट निफ्टी सोमवार को 400 अंक ऊपर खुलने का संकेत दे रहा था, लेकिन फिर शनिवार को फिर से होर्मुज के बंद होने की खबर के बाद शेयर बाजार का गेम पूरी तरह पलट गया।  इन्‍हीं सभी चीजों को लेकर भारतीय शेयर बाजार में काफी उठा-पटक रही, लेकिन अंत तक यह ग्रीन जोन में क्‍लोज हुआ.सेक्‍टर वाइज बात करें तो आईटी और रियल्‍टी सेक्‍टर में काफी दाव देखने को मिला, दूसरी ओर ऑटो और पीएसयू बैंक ने मार्केट को ऊपर लाने की काफी कोशिश की, लेकिन मिड और स्‍माल कैप के शेयरों में भारी बिकवाली रही।  इन सभी चीजों के बीच ओवरऑल BSE पर लिस्‍टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज 71 हजार करोड़ रुपये कम हो गया यानी निवेशकों की रकम 71 हजार करोड़ रुपये कम हो गई. कारोबार बंद होने तक सेंसेक्‍स 26.7 अंक या 0.03 फीसदी की मामूली तेजी के साथ 78,520.30 और निफ्टी 11.30 अंक या 0.05 फीसदी की तेजी के साथ 24,364.85 पर बंद हुआ।  बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से 18 शेयरों में गिरावट रही. 12 शेयर मामूली तेजी पर बंद हुए. टाटा ट्रेंट जैसे शेयर 3 फीसदी से ज्‍यादा तेजी पर रहे. वहीं एल एंड टी के शेयर में 1 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट रही।  क्‍यों आई शेयर बाजार में गिरावट?      होर्मुज रुकावट के बाद तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई संबंधी समस्‍याएं बढ़ गईं, जिस कारण मार्केट का सेंटिमेंट बदल गया. ब्रेंट क्रूड 95-98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा.      भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच वैश्विक संकेत सतर्क रहे. ग्‍लोबल मार्केट भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने के बाद अब गिरावट का संकेत दे रहा है.      सत्र के दौरान भारतीय VIX में 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जो भू-राजनीतिक जोखिमों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की प्रतिक्रिया से उत्पन्न उच्च अस्थिरता का संकेत है.      मिड और स्‍मॉल कैप सेक्‍टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसने मार्केट को और नीचे की ओर खींच दिया. शेयर बाजार में अब आगे क्‍या?  भारतीय शेयर बाजार अब पूरी तरह से होर्मुज और तेल कीमतों पर निर्भर दिखाई दे रहा है. अगर होर्मुज खुलता है तो शेयर बाजार में तेजी आ सकती है, लेकिन अगर ईरान अमेरिका के बीच फिर से तनाव बढ़ता है तो गिरावट देखने को मिल सकती है. फिलहाल, निफ्टी का इंडिकेटर गिफ्ट निफ्टी 350 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट का संकेत दे रहा है। 

मोनालिसा गर्भवती, केरल से खाली हाथ लौटी MP पुलिस, पेशी की संभावना नहीं

खंडवा  प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान वायरल हुई मोनालिसा भोंसले और उसके पति मोहम्मद फरमान को हिरासत में लेने के लिए कुछ दिन पहले केरल के कोच्चि पहुंची मध्य प्रदेश पुलिस की एक टीम को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरमान ने पुलिस को बताया कि मोनालिसा गर्भवती है इसलिए वह पुलिस के सामने तुरंत पेश होने में असमर्थ है। जिसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस फिलहाल वहां से लौट गई। इस टीम में एक महिला अधिकारी सहित कुल पांच सदस्य थे। मनोरमा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार MP पुलिस की टीम 17 मार्च को यहां पहुंची थी और इस जोड़े का पता लगाने में नाकाम रही। इसके अलावा पुलिस को फरमान के एक दोस्त जोशुआ की तलाश थी, हालांकि उसे खोज पाने में भी पुलिस नाकाम रही। जोशुआ पर आरोप है कि उसने शादी कराने से लेकर वहां रहने का इंतजाम करने तक में इस जोड़े की मदद की। फरमान ने दी MP पुलिस को जानकारी रिपोर्ट के अनुसार MP से आई महेश्वर पुलिस एक महिला सब-इंस्पेक्टर को मोहम्मद फरमान ने अपनी पत्नी के गर्भवती होने की जानकारी दी। इस जोड़े ने 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में शादी की थी। इसके तुरंत बाद, लड़की के पिता ने मध्य प्रदेश में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल है। इसके बाद मोहम्मद फरमान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, लड़की का दावा है कि वह बालिग है। मोनालिसा ने सरकार से की थी सुरक्षा की मांग मध्य प्रदेश पुलिस के कोच्चि पहुंचने के बाद मोनालिसा ने केरल के मुख्यमंत्री और कोच्चि शहर के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की थी। वहीं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जारी फरमान के गिरफ्तारी वारंट पर केरल हाई कोर्ट ने पहले ही आगे की कार्यवाही तक रोक लगा दी थी। यह रोक 20 मई तक के लिए लगाई गई है। ST आयोग की जांच में नाबालिग निकली थी मोनालिसा मध्य प्रदेश की रहने वाली मोनालिसा भोसले ने पिछले महीने तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में यूपी के पालरा के रहने वाले फरमान खान से शादी कर ली थी। इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया था, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में मोनालिसा को नाबालिग पाया गया था। उधर लड़की के माता-पिता ने भी दावा किया था कि उनकी बेटी की उम्र अभी सिर्फ 16 साल है, जिसके बाद फरमान के खिलाफ महेश्वर पुलिस ने मोनालिसा के अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था। मोनालिसा खुद को बता रही 18 साल का MP पुलिस के कोच्चि पहुंचने पर मोनालिसा ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कोच्चि के पुलिस कमिश्नर को एक आवेदन सौंपकर सुरक्षा की मांग की थी। उस आवेदन में मोनालिसा ने दावा किया है कि उसकी उम्र 18 साल है और आरोप लगाया था कि उसे जबरन मध्य प्रदेश ले जाने की कोशिशें की जा सकती हैं। ऐसे में उसने ऐसी किसी भी कोशिश को रोकने के लिए अपने और फरमान के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इससे पहले लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 25 मार्च को मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में खान के खिलाफ कथित अपहरण और पॉक्सो अधिनियम और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। 

राज्यपाल पटेल का बयान: प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण में ही सेवा का असली उद्देश्य

प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें। उनके कल्याण प्रयासों में ही आपकी सेवा की सार्थकता है। यह याद रखें कि आपका आत्मीय व्यवहार, वंचितों के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता ही आपकी सफलता का अंतिम पैमाना होगी। राज्यपाल पटेल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा में चयन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। पर्यावरण संरक्षण के लिए सोच, संकल्प और सेवा भाव जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक पेड़-माँ के नाम” अभियान की चर्चा की। इसे स्थानीय सहभागिता से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की सराहनीय पहल बताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है। सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण, आपकी जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश में जनजातीय आबादी और वनों में मध्यप्रदेश प्रथम है। यहाँ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण के द्वारा और अधिक समृद्ध बनाना आपकी जिम्मेदारी है। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, विश्वास, मान्यताओं और मौलिकता के प्रति सम्मान के भाव के साथ कार्य करना, आपका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में उनके सशक्तिकरण और कल्याण में आपकी भूमिका बहुत प्रभावी है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र, जैव विविधता के संकटों के समाधान में करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग के साथ वन, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करें। जनजातीय समुदाय की प्रकृति आधारित जीवन शैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और कला की मौलिकता से आधुनिक जगत को परिचित कराएं। उनके लिए सतत आजीविका के प्रयासों में सहयोग करें। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का महत्व बताएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब भी मैदानी भ्रमण पर जाएं तो स्थानीय लोगों से उनके बच्चों की शिक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्हें शिक्षा का महत्व बताएं। अभिभावकों और बच्चों के साथ शिक्षा से जीवन में होने वाले बदलावों के संबंध में प्रेरक संवाद करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल उन्नयन तथा स्वास्थ्य और आजीविका की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनों और प्रावधानों का लाभ लेने प्रेरित और प्रोत्साहित करें। राज्यपाल पटेल का प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। उनका यादव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच.आर.डी.) डॉ. बी.एस अन्निगेरी ने दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुसौम्या ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। उप वन संरक्षक मयंक सिंह गुर्जर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, वन विभाग-लोकभवन के अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।  

CJI सूर्यकांत का बंगाल में सख्त कदम, कलकत्ता HC से तुरंत मांगी रिपोर्ट; वोटिंग में रुकावट?

नई दिल्ली  भारत में चुनाव सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है इसे जनता के अधिकारों का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. लेकिन जब इसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है. पश्चिम बंगाल के SIR केस में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जिस तरह सख्ती दिखाई है, उसने इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया है. सवाल यह है कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे तो क्या हजारों-लाखों लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं? यह चिंता सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोकतंत्र के मूल ढांचे से जुड़ी है।  अब CJI की टिप्पणी और तुरंत रिपोर्ट मांगने का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. कलकत्ता हाई कोर्ट से आज ही स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. यह दिखाता है कि अदालत इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. चुनाव से ठीक पहले ऐसी गड़बड़ियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है. अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सीधे मतदान पर पड़ सकता है. यही वजह है कि अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी है।  ट्रिब्यूनल पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट सख्त     पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनलों के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तुरंत रिपोर्ट मांगी गई है. अदालत यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में आदेशों की अनदेखी हो रही है और क्या नागरिकों को न्याय पाने में दिक्कत हो रही है।      वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में दलील दी कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं. लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति नहीं दी जा रही. यहां तक कि वकीलों को भी पक्ष रखने का मौका नहीं मिल रहा. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।      कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में हर दिन नए मुद्दे सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि अब हाईकोर्ट से सीधे रिपोर्ट लेकर स्थिति साफ करने का फैसला लिया गया है. अदालत का यह कदम इस बात का संकेत है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है।  SIR मामला क्या है और विवाद क्यों बढ़ा? SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक प्रक्रिया है, इसमें चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है. इसमें नाम जोड़ने और हटाने का काम होता है. विवाद तब बढ़ा जब आरोप लगा कि कई लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और अपील के लिए बने ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे. इससे हजारों लोगों के वोट देने का अधिकार प्रभावित हो सकता है।  सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन होना जरूरी है. अदालत ने कहा कि जिन लोगों की अपील मतदान से दो दिन पहले तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी तो नहीं हो रही।  क्या सच में लोग वोट देने से वंचित हो सकते हैं? अगर ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं करते और अपील समय पर नहीं सुनी जाती, तो यह संभावना बन सकती है. कई लोग अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं. यही वजह है कि अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और तुरंत हस्तक्षेप किया है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।  आगे क्या हो सकता है? अब सबकी नजर कलकत्ता हाईकोर्ट की रिपोर्ट पर टिकी है. अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आती है, तो सुप्रीम कोर्ट कड़े निर्देश जारी कर सकता है. इससे ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली में बदलाव हो सकता है. चुनाव से पहले यह मामला और भी अहम हो गया है, क्योंकि इसका सीधा असर मतदाताओं के अधिकार पर पड़ता है. अदालत का यह रुख साफ करता है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

पचपदरा रिफाइनरी में आग से मची अफरातफरी, कल पीएम मोदी करने वाले थे उद्घाटन, सीएस पहुंचे मौके पर

बालोतरा  राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अगले ही दिन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफाइनरी के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित है। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और रिफाइनरी प्रबंधन में हलचल तेज हो गई।   प्रोसेसिंग यूनिट में लगी आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग रिफाइनरी की एक प्रोसेसिंग यूनिट में लगी है। घटना के बाद परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। आग किस कारण से लगी, इसका अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। तकनीकी टीम और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और कारणों की जांच में जुटी हुई हैं। दूर तक दिखाई दिया धुएं का गुबार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग काफी तेज थी और उसका घना धुआं करीब एक किलोमीटर दूर से भी साफ दिखाई दे रहा था। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता दिखाई दिया, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।   राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 20 से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत मोर्चा संभाला। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आग को अन्य यूनिटों तक फैलने से रोका जा सके। 2013 में रखी गई थी रिफाइनरी की आधारशिला रिफाइनरी की आधारशिला सबसे पहले 22 सितंबर, 2013 को सोनिया गांधी ने राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान रखी थी, जिसकी शुरुआती अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। सरकार बदलने के बाद, PM मोदी ने 16 जनवरी, 2018 को इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया और इसकी लागत को संशोधित करके 43,129 करोड़ रुपये कर दिया। लोकार्पण की तैयारियों के बीच 'अग्निपरीक्षा' जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर को रिफाइनरी की एक विशेष यूनिट में अचानक स्पार्किंग या अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी। कल होने वाले प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूरी रिफाइनरी को छावनी में तब्दील किया गया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने तकनीकी टीम और प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय, बुझाने के प्रयास तेज आग लगते ही रिफाइनरी का इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम तुरंत सक्रिय हो गया। मौके पर मौजूद दर्जनों दमकल गाड़ियां और हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। धुएं की तीव्रता इतनी अधिक है कि इसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। रिफाइनरी के उच्चाधिकारी और जिला प्रशासन के आला अफसर मौके पर पहुँच चुके हैं और स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।   उद्घाटन कार्यक्रम पर पड़ सकता है असर बताया जा रहा है कि 21 अप्रैल को सुबह करीब 11:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन किया जाना था। ऐसे में आग लगने की इस घटना ने प्रशासन और प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस हादसे का उद्घाटन कार्यक्रम पर भी असर पड़ सकता है।   अधिकारियों की नजर स्थिति पर फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाना और किसी भी तरह के बड़े नुकसान को टालना है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही आग पर नियंत्रण पाने की उम्मीद है। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में हुआ प्लेन क्रैश, पहाड़ी से टकराने के बाद आग की लपटें, पायलट-को-पायलट की मौत की आशंका

जशपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के आरा पहाड़ से एक प्राइवेट विमान के टकराने की सूचना है। दरअसल, यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान के टकराते ही पहाड़ के हिस्से से आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते चारों ओर धुएं का काला गुबार छा गया।इस हादसे में पायलट और को-पायलट की मौत की आशंका जताई जा रही है। पहाड़ से टकराते ही विमान बना आग का गोला जशपुर-नारायणपुर क्षेत्र के पास यह हादसा हुआ है, जहां अनियंत्रित होकर विमान सीधे पहाड़ के सीने से जा टकराया। स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाया है, जिसमें आग की लपटें साफ दिखाई दे रही हैं। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर रवाना घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत एक्शन में आ गए हैं। SSP लाल उमेंद खुद भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल के लिए निकल चुके हैं।पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) में जुट गई हैं। स्थानीय लोगों की मदद से मलबे के पास पहुंचने की कोशिश की जा रही है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। हताहतों की संख्या पर सस्पेंस बरकरार गौरतलब है कि अभी तक विमान में सवार कुल लोगों की संख्या या इस हादसे में जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल आग पर काबू पाने और किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। जांच के बाद खुलेगा राज बता दें कि यह विमान किसका था और इसने कहां से उड़ान भरी थी, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे के असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच टीम गठित की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और घायलों को निकालने के लिए एंबुलेंस भी मौके पर तैनात है।

Raipur Update: पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ‘श्री अग्रोहा पैलेस’ की रखी नींव

रायपुर. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर में प्रस्तावित ‘श्री अग्रोहा पैलेस’ का विधिवत भूमिपूजन कर आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि परम पूज्य महाराजा अग्रसेन जी के वंशज होने का गौरव केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि एक पुनीत उत्तरदायित्व भी है। सेवा, त्याग और लोकमंगल की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह परियोजना समाज के सामूहिक संकल्प और सहभागिता का प्रतीक बनेगी। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि किसी भी भवन की सार्थकता केवल उसके भौतिक स्वरूप में नहीं, बल्कि उसमें निहित सेवा भावना और समाज के प्रति समर्पण में होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि समस्त समाज के सहयोग से निर्मित ‘श्री अग्रोहा पैलेस’ आने वाले समय में जनसेवा, सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि यह भव्य परिसर 150 अत्याधुनिक कमरों, विशाल हॉल तथा सर्वसुविधायुक्त लॉन से सुसज्जित होगा, जो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि अग्र समाज का इतिहास सेवा, समर्पण और लोककल्याण की गौरवशाली परंपरा से परिपूर्ण रहा है। हमारे पूर्वजों ने धर्मशालाएं, बावड़ियां और अन्न क्षेत्र बनाकर मानवता की सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी भवन केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि उसमें समाहित भावना, सहभागिता और सेवा के भाव से जीवंत बनता है। सांसद अग्रवाल ने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे इस प्रकल्प को सफल बनाने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति को भी जोड़ें। साथ ही उन्होंने गरीब बच्चों की शिक्षा, जरूरतमंद मरीजों के उपचार और बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोग देने का संकल्प लेने की अपील की, ताकि ‘श्री अग्रोहा पैलेस’ वास्तव में समाज सेवा का जीवंत केंद्र बन सके। कार्यक्रम में अग्रवाल सभा अंबिकापुर के अध्यक्ष संजय मित्तल, अजय अग्रवाल, बाबूलाल गोयल, योगेश अग्रवाल, विनोद, कृष्ण कुमार, मनोज जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

BJP का बड़ा प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर सड़क पर उतरी पार्टी; CM ने विपक्ष को नारी अपमान याद दिलाया

भोपाल   लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। अब इसकी गूंज सड़कों तक पहुंच गई है। राजधानी भोपाल में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा की ओर से ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें भाग लेकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की। भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई पदयात्रा रोशनपुरा चौराहे की ओर बढ़ी। इसमें छह विशेष रथ भी शामिल किए गए थे। महिलाओं के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस यात्रा में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पद यात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे पहुंची। यहां मुख्यमंत्री ने काले गुब्बारे उड़ाकर इसका समापन किया। इससे पहले हुई सभा में मुख्यमंत्री यादव ने कहा- नारी सब भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाईं। जश्न मनाया। हम बहनों के अधिकार को कुचलने के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे।     मुख्यमंत्री ने कहा- प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यही कांग्रेस का अतीत है।     बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा- जब मौका लगे, तब बहनें अपना आक्रोश दिखाएं। कांग्रेस के नेताओं से पूछे कि बहनों को अपमानित करने का अधिकार आपको किसने दिया? कांग्रेसियों के घर जाकर पूछें कि जो बहन आपके घर की शोभा बढ़ाती है, जिस मां ने आपको जन्म दिया, उनके सपनों को चूर-चूर करने का हक किसने दिया?     बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा- कांग्रेस के नेताओं ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिराकर जश्न मनाया, यह महिलाओं के अपमान का प्रतीक था। मातृ शक्ति इस अपमान का जवाब देगी। अब याचना नहीं, रण होगा।     पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह, अपनी बेटी अंजलि सिंह के साथ जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुई। उन्होंने कहा- आजादी के इतने सालों बाद भी हमें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। राहुल गांधी को शर्म आना चाहिए कि उन्होंने बहनों का साथ नहीं दिया।     मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा- कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं को हक देने का विरोध किया है। हम सड़कों पर उतरकर उसका विरोध कर रहे हैं।     सागर लोकसभा सीट से सांसद लता वानखेड़े ने कहा- ये केवल बिल नहीं, बल्कि महिलाओं के पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचने का दरवाजा था, जिसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बंद कर दिया। विपक्ष को महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो मंच पर महिलाओं की बात करके बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं। लेकिन इनकी सोच है कि महिलाएं सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहें। तालियां बजाएं, नेतृत्व न करें। क्या है पूरा मामला? 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। लेकिन इसे पास कराने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में भाजपा ने इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाने की रणनीति शुरू कर दी है। भाजपा का आरोप – महिलाओं के अधिकारों पर चोट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस और विपक्ष पर महिलाओं के सपनों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम हो रहा था, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि अब यह सवाल घर-घर तक पहुंचाया जाएगा कि महिलाओं के अधिकारों को रोकने का जिम्मेदार कौन है। सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की है। उन्होंने कहा कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। महिलाओं के अधिकारों के लिए सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन बहुमत नहीं मिल सका। सीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश की आधी आबादी के अधिकारों का सम्मान नहीं किया। सच सामने लाया जाएगा – भाजपा नेता कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। नगरीय निकायों में निंदा प्रस्ताव पारित कराने और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की बात कही गई। नेताओं ने कहा कि विपक्ष के खिलाफ जनता के बीच जाकर सच सामने लाया जाएगा। महिला मोर्चा का ऐलान – अब याचना नहीं, रण होगा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विधेयक गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है और अब देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। आंदोलन को देशभर में ले जाने की तैयारी भाजपा महिला मोर्चा इस पदयात्रा को एक बड़े आंदोलन की शुरुआत मान रही है। नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में इसे प्रदेश से बाहर देशभर में ले जाया जाएगा, ताकि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।

जापान में 7.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी के खतरे को लेकर अलर्ट जारी

टोक्यो   सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। टोक्यो तक महसूस हुए झटके भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।  इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया। सुनामी की चेतावनी जारी भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है। एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई। मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है। एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।" सालो पहले जापान में आया था प्रलय जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे।