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छिंदवाड़ा हादसे पर CM यादव का शोक, मृतकों के परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता देने का किया ऐलान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा के पास हुई सड़क दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छिंदवाड़ा जिला प्रभारी मंत्री राकेश सिंह को घटना में प्रभावित लोगों से मिलने के लिये निर्देशित किया है। जिक्रयोग है कि गुरुवार की शाम को छिंदवाड़ा-नागपुर रोड पर हृदय विदारक सड़क दुर्घटना हुई है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभावित परिवारों के प्रति  संवेदनाएं व्यक्त करते हुए परम पिता परमात्मा से प्रार्थना  की है कि सभी दिवंगत नागरिकों की आत्मा को शांति प्रदान करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना में घायलों के शीघ्र स्वास्थ लाभ की कामना की है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मृतकों के निकटतम परिजनों को चार-चार लाख रूपये की सहायता राशि और गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपये की सहायत राशि प्रदान की जाएगी। सभी घायलों का इलाज निःशुल्क किया जाएगा। राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग में नियंत्रण कक्ष  बनाकर सभी घायलों के उपचार की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। जबलपुर से डॉक्टर्स के दल पैरामेडिकल स्टाफ सहित  छिंदवाड़ा और नागपुर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री डॉ. यादव ने छिंदवाड़ा के प्रभारी मंत्री श्री राकेश सिंह  को भी अपने कार्यक्रम परिवर्तित कर तत्काल छिंदवाड़ा पहुँचने के लिए निर्देशित किया है।  कार्यक्रम से लौट रही बस हादसे का शिकार, 10 लोगों की मौत, 45 से ज्यादा घायल  मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में हुए दर्दनाक बस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम से लौट रही एक बस हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 10 लोगों की मौत और 41 लोग घायल हो गए। लेकिन इस हादसे ने सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही को भी उजागर कर दिया है। मौके पर राहत और बचाव कार्य हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन ने मिलकर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ट्रैफिक को रोककर घायलों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने का काम किया गया, जिससे समय रहते कई लोगों की जान बचाई जा सकी। एक ही गांव के थे सभी यात्री हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बस में सवार सभी लोग मोहखेड़ ब्लॉक के करेर पंचायत के निवासी थे। एक ही गांव के 10 लोगों की मौत से पूरा इलाका गम में डूब गया है। हादसे के बाद का मंजर घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। जैसे ही गांव में खबर पहुंची, लोग अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े। कई लोग अपने परिजनों को तलाशते नजर आए, तो कईयों को अपनों की मौत की खबर ने तोड़ दिया।

MP में रामनवमी का महापर्व: भोपाल से उज्जैन तक भक्ति की धारा, जबलपुर-ग्वालियर में विशेष पूजा

भोपाल  रामनवमी के अवसर पर राजधानी भोपाल इस बार भक्ति और उत्सव के रंग में पूरी तरह सराबोर रहेगा। शहर में करीब 2500 से 3000 स्थानों पर भंडारों का आयोजन होगा, वहीं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य कार्यक्रम दिनभर चलते रहेंगे।हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि इस बार भोपाल में राम जन्मोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। शहर के न्यू मार्केट, पुराने भोपाल के प्रमुख राम मंदिरों और जहां-जहां भगवान राम के मंदिर हैं, वहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे भगवान राम के जन्म का मुख्य आयोजन होगा। इस दौरान मंदिरों में भोग, आरती और जन्मोत्सव का उल्लासपूर्ण आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।  रामनवमी के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। राजधानी भोपाल से लेकर उज्जैन, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर तक मंदिरों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना, शोभायात्राएं, भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यापक तैयारियां की गई हैं। भोपाल में हजारों भंडारे और शोभायात्राएं भोपाल में इस वर्ष रामनवमी का उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा। शहर के विभिन्न इलाकों में लगभग 2500 से 3000 स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और दोपहर 12 बजे भगवान राम के जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आरती, भोग और भजन-कीर्तन का कार्यक्रम रहेगा। भवानी चौक सोमवारा क्षेत्र से घोड़ा निकास के साथ भव्य जुलूस भी निकलेगा, जिसमें आकर्षक झांकियां और पारंपरिक प्रस्तुतियां लोगों को आकर्षित करेंगी। हर गली में भंडारे, सेवा का माहौल समिति के अनुसार, शहर के अलग-अलग इलाकों में हजारों भंडारे आयोजित किए जाएंगे, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इससे पूरे भोपाल में सेवा और भक्ति का माहौल बनेगा। घोड़ा निकास के साथ निकलेगा भव्य जुलूस रामनवमी पर भवानी चौक सोमवारा क्षेत्र से घोड़ा निकास के साथ भव्य जुलूस निकलेगा। इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी कई शोभायात्राएं आयोजित होंगी। जुलूस में आकर्षक झांकियां, भजन-कीर्तन और पारंपरिक प्रस्तुतियां खास आकर्षण रहेंगी। मंदिरों में खास तैयारियां खेड़ापति मंदिर, सब्जी मंडी क्षेत्र सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में सजावट, लाइटिंग और भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। गर्मी को देखते हुए व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, इस बार रामनवमी पर भोपाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी और पूरा शहर भक्ति, उत्साह और सेवा भाव से सराबोर नजर आएगा।  इंदौर के रणजीत हनुमान में साकेतधाम इंदौर के प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में रामनवमी का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर पूरी तैयारी भी की जा चुकी है। रामनवमी पर मंदिर में साकेतधाम सजाया गया है। जहां प्रभू राम के दर्शन होंगे। गुरुवार से ही मंदिर में सजावट शुरू कर दी गई थी। भक्तों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि गर्मी में उन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास ने बताया कि रामनवमी के पर्व पर मंदिर में साकेतधाम सजाया गया है। ये अयोध्या का ही प्राचीन नाम है साकेत। रणजीत हनुमान मंदिर में साकेतधाम का स्वरूप दिया है। मंदिर में फूलों से सजावट भी की गई है। जिक-जैक पैटर्न में भक्त लाइन से भगवान के दर्शन कर सकेंगे। गर्मी को देखते हुए भक्तों को दिक्कत ना हो इसके लिए यहां 24 कूलर भी लगाए है। अखंड रामायण की होगी स्थापना, पंचामृत से होगा अभिषेक उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में रामनवमी पर सुबह 6 बजे सात दिवसीय अखंड रामायणजी की स्थापना की जाएगी। 3 अप्रैल को हनुमान जयंती के अगले दिन काकड़ आरती के बाद अखंड रामायणजी का समापन होगा। शुक्रवार को सुबह 8 बजे रामजी का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद रामजी का शृंगार होगा। 12 बजे रामजी की जन्मोत्सव आरती होगी। भक्तों को प्रसाद वितरत किया जाएगा और शाम को भजन संध्या का आयोजन होगा। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों में भी रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। कई मंदिरों में सुंदर सजावट करने के साथ ही आकर्षक लाइटिंग भी की गई है। मंदिरों को फूलों से भी सजाया जा रहा है। उज्जैन में यज्ञ अनुष्ठान के साथ महाआरती उज्जैन में राम नवमी पर शिप्रा नदी के पास राम मंदिर में यज्ञ अनुष्ठान के साथ 12 बजे महाआरती होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त आरती में शामिल होंगे, साथ ही प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी रामनवमी पर्व पर ऐतिहासिक वीरभद्र ध्वज चल समारोह का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह ध्वज चल समारोह महाकाल इंटरनेशनल चौराहे से शुरू होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए रात्रि 9:30 बजे गोपाल मंदिर पहुंचेगा। जबलपुर में आविर्भाव समारोह जबलपुर में रामनवमी के अवसर पर 27 मार्च को मां नर्मदा तट गौरीघाट पर 'आविर्भाव समारोह' का आयोजन किया जाएगा। श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 6:30 बजे से शुरू होगा। समारोह की शुरुआत नरसिंहपुर के लोकगायक सुमित दुबे और उनके साथियों के लोक-भक्ति गायन से होगी। इसमें बुंदेली लोकधारा के माध्यम से भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान किया जाएगा। इसके बाद नूपुर माहौर एवं उनकी टीम भरतनाट्यम शैली में 'लव-कुश की रामायण' पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत करेगी। इस प्रस्तुति में श्रीराम के आदर्श, त्याग और धर्मनिष्ठा को सांस्कृतिक रूप में मंचित किया जाएगा। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति सिवनी के रुद्रकांत ठाकुर के भक्ति गायन की होगी। आयोजकों के अनुसार, इस सांस्कृतिक संध्या का उद्देश्य जनमानस को रामकथा, लोकभक्ति और भारतीय परंपरा से जोड़ना है। ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में ‌विशाल भंडारा ग्वालियर में रामनवमी के अवसर माता मंदिरों पर पूजा अर्चना की जाएगी। सुबह 5:00 बजे से ही मंदिरों के पट खोल दिए जाएंगे और श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे। उसके साथ ही मंदिरों में विशाल भंडारों का आयोजन भी किया जाएगा। ग्वालियर से लगभग 25 किलोमीटर दूर शीतला माता मंदिर पर भी बड़ा भंडारा आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा ग्वालियर की मंदिर वाली माता पर भी विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। साथ ही छोटी करौली माता मंदिर पर भी भक्तों की भीड़ देखने को मिलेगी। महाअष्टमी पर प्रदेश की मंदिरों में आस्था और … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वोत्तम

सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मिलता है मनुष्य का शरीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव छिंदवाड़ा के सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सपत्नीक हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। यज्ञ के माध्यम से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मनुष्य का शरीर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को छिंदवाड़ा के सिहोरा मॉल स्थित रामेश्वरम धाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यज्ञ में सहभागी होकर व्यक्ति अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है और यश, सुख तथा समृद्धि की कामना करता है। ऐसे आयोजनों से सनातन संस्कृति के प्रति आस्था मजबूत होती है और सात्विक भाव से जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवद्गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और निडरता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आज नवरात्रि के पावन पर्व पर हनुमान लोक का लोकार्पण भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंचतत्व से बना होता है जिसमें पांच कर्मेन्द्रियां और पांच ज्ञानेन्द्रियां होती है। इन दसों इंद्रियों से लगातार सात्विक भाव से कार्य करने पर सात्विक शक्ति उत्पन्न होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सपत्नीक सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल हुए और लगभग 3200 श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में पूर्णाहुति दी। महायज्ञ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतविवेक जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सिहोरामाल स्थित भगवान शंकर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं कीं। इस अवसर पर सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नंबर वन कार्य हो रहे हैं।  

होर्मुज स्ट्रेट का संकट समाप्त, तेल-गैस वाले देशों का गठबंधन, अब बिना दिक्कत जलेंगे चूल्हे

 मुंबई  ईरान जंग ने एक बार फिर से फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल आदि) बेस्‍ड डेवलपमेंट मॉडल की खामियों को उजागर कर दिया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का तीन तिहाई आयात करता है. अरब देश एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तेल के साथ ही गैस का भी आयात किया जाता है. इनसे ही भारत में गाड़ियां सड़कों पर सरपट भागती हैं और घरों में चूल्‍हे जलते हैं. ऐसे में खाड़ी देश में किसी भी तरह का संकट आने पर उसका सीधा असर भारत भी पड़ता है. अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान अटैक करने के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी इसका व्‍यापक असर पड़ा है. इससे तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्‍य काफी अहम है, क्‍योंकि इसी रूट से तेल और गैस के अधिकांश शिपमेंट आते हैं ।  अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया गया है. भारत अगले 9 से 10 साल में नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड पावर कैपेसिटी को कुल उत्‍पादन का 60 फीसद करने का लक्ष्‍य रखा है. इस तरह फॉसिल फ्यूल यानी तेल आधारित ऊर्जा जरूरतों को तकरीबन एक तिहाई तक सीमित कर दिया जाएगा. ऐसे में यदि होर्मुज जैसे संकट की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ेगा।  अब समझ‍िए कि होर्मुज स्‍ट्रेट पर निर्भरता आने वाले कुछ सालों में कैसे खत्‍म होगी. दरअसल, वैश्विक जलवायु संकट के बीच भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के तहत 2031-2035 अवधि के लिए देश के अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी. इस नए लक्ष्य के तहत भारत ने 2005 के स्तर के मुकाबले अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी लाने और 2035 तक कुल बिजली क्षमता में 60% हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यह कदम पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के तहत भारत की जिम्मेदारियों का हिस्सा है और इसे देश की तीसरी NDC प्रस्तुति माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि पहले से हासिल प्रगति पर आधारित है।  संकट से सीख, टार्गेट से आगे की बात सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत ने साल 2015 में तय किए गए अपने पूर्व NDC लक्ष्यों (33-35% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता) को समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया था. इसी आधार पर अब नए और अधिक कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. अपडेटेड NDC समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों (CBDR-RC) के सिद्धांतों के अनुरूप है और ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक परिकल्पना को भी मजबूती देता है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता के बीच कई देश अपने जलवायु लक्ष्यों से पीछे हटते दिख रहे हैं. ऐसे समय में भारत का यह कदम वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. ऊर्जा और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस बार जलवायु महत्वाकांक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आकलनों के अनुसार 2035-36 तक भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 70% तक पहुंच सकती है, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तौर पर 60% का ही लक्ष्य रखा है, जिससे यह लक्ष्य यथार्थवादी और विश्वसनीय बना रहे।  ऐसे बनेगी बात सरकार ने स्पष्ट किया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई मौजूदा और नई नीतियों का सहारा लिया जाएगा. इनमें ग्रीन एनर्जी का विस्तार (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) बैटरी स्टोरेज, स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाएं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा International Solar Alliance जैसे वैश्विक सहयोग मंच और राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना (NAPCC) के तहत चल रहे कार्यक्रम भी इन लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे. सरकार कार्बन कैप्चर तकनीकों और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. नई NDC केवल उत्सर्जन में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन उपायों पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसमें तटीय सुरक्षा, ग्लेशियर निगरानी, हीट एक्शन प्लान और आपदा लचीलापन शामिल हैं. सरकार ने Lifestyle for Environment (LiFE) पहल के जरिए आम नागरिकों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल करने का लक्ष्य रखा है, ताकि रोजमर्रा की जीवनशैली में पर्यावरण अनुकूल बदलाव लाए जा सकें। 

भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार: आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा।  छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं।  इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यह फायदा होगा दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी। 6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट  बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे बनेगा कोटा-इटावा के बीच, NHAI 3 जिलों की जमीन लेकर देगा दो गुना पैसा

 भोपाल  कोटा से इटावा के बीच 404 कि.मी लंबे अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की योजना है। राज्य शासन से संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित 90 गांवों की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी इसमें शामिल हैं, जिनके सत्यापन होना है। तीन साल पहले चिन्हित की गई जमीनों का दोबारा सत्यापन कराने के पीछे कारण ये है कि, इस गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव और रकबा प्रकाशित किया जाएगा। दावे-आपत्ति पूरी होते ही खातों ट्रांसफर होगा पैसा दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनसे ली गई जमीन का पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं। नए रूट अलाइनमेंट के विरोध के बाद रोकी गई थी कार्रवाई 6 साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट चेंड कर दिया। लेकिन, नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष दिखने लगा, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की ज्यादा जमीनें जा रही थी। इस दौरान सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों में कड़ा विरोध भी देखने को मिला, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दी। 3 साल बाद धरातल पर आया प्रोजेक्ट इसके बाद 3 साल ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब एक बार फिर ये धरातल पर आया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपए लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा मिलेगा इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बची वहीं, अगर नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है, जो आजीवन उनकी केती के इस्तेमाल में आती रहेगी। फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान। मध्य प्रदेश में एंट्री श्योपुर से होगी कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की श्योपुर से प्रदेश में एंट्री होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं। 43 गांव चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं। पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए। 3 राज्यों को कवर कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से मिलेगा अटल प्रोग्रेस-वे अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। वहां इटावा के ननवा गांव से प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। पूरे मार्ग में करीब 150 गांव प्रोग्रेस-वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या उन बीहड़ों से सटे हैं।

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

गॉडमैन अशोक खरात केस में 100 अश्लील वीडियो और 1500 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

 नासिक महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां गिरफ्तार स्वयंभू गॉडमैन अशोक खारत से जुड़े एक मंदिर को साल 2018 में राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड मिला था. यह जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर सामने आई है. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने 31 मार्च 2018 को क्षेत्रीय पर्यटन विकास योजना के तहत इस मंदिर के विकास के लिए 1.05 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी. उस समय पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग की जिम्मेदारी बीजेपी नेता जयकुमार रावल के पास थी।  यह मंदिर नासिक जिले के सिन्नर इलाके में स्थित श्री इशान्येश्वर देवस्थान ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसकी जिम्मेदारी अशोक खरात संभालते थे. इस मंदिर परिसर के विकास के लिए सरकार ने कई कामों को मंजूरी दी थी, जिनमें हॉल का निर्माण, परिसर में पेविंग ब्लॉक लगाना, पुरुष और महिलाओं के लिए अलग शौचालय, चेंजिंग रूम, पार्किंग सुविधा, श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, गार्डन और बिजली व्यवस्था शामिल थे।  अशोक खरात से जुड़े मंदिर को 1.05 करोड़ की मंजूरी सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, कुल स्वीकृत राशि में से 2017-18 वित्तीय वर्ष में 25 लाख रुपये जारी भी किए गए थे. यह फंड सार्वजनिक निर्माण विभाग यानी PWD के जरिए खर्च किया गया. सूत्रों के अनुसार, नासिक जिले में इस योजना के तहत शामिल चार प्रोजेक्ट्स में से इस मंदिर को सबसे ज्यादा फंड मिला था. यह भी बताया गया कि उस समय अशोक खरात के खिलाफ कोई आरोप सामने नहीं आए थे, इसलिए यह फंड सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर किया गया था।  दरअसल, यह मंजूरी एक बड़े फैसले का हिस्सा थी, जिसमें राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में धार्मिक स्थलों और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए करीब 112 करोड़ रुपये के कामों को मंजूरी दी थी. इनमें से करीब 17 करोड़ रुपये विभिन्न एजेंसियों जैसे PWD, नगर निगम और जिला परिषदों को जारी करने के लिए तय किए गए थे।  2018 में पर्यटन योजना के तहत मिला सरकारी फंड इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ लिया जब 18 मार्च को अशोक खरात को एक 35 साल की महिला द्वारा लगाए गए रेप के आरोपों के बाद गिरफ्तार किया गया. महिला ने आरोप लगाया कि खरात ने तीन साल तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया. फिलहाल वह पुलिस हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।  जांच के दौरान सामने आया कि अशोक खरात के पास कई बड़े राजनीतिक नेताओं का आना-जाना था. इससे उनके प्रभाव और पहुंच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई आईपीएस अधिकारी तेजस्वी सतपुते कर रही हैं. SIT ने अब तक खरात के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज किए हैं. इनमें एक पीड़िता गर्भवती महिला भी शामिल बताई जा रही है।  रेप आरोप में गिरफ्तारी के बाद मामले ने लिया नया मोड़ जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. SIT को अशोक खरात से जुड़े करीब 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं. इसके अलावा उनके पास करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की बात भी सामने आई है. अब इस मामले में आयकर विभाग भी सक्रिय हो गया है और खरात तथा उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है. वहीं साइबर पुलिस इन आपत्तिजनक वीडियो की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।  महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और राज्य सरकार इस पूरे मामले की जांच पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए फंड जारी करना एक नियमित प्रक्रिया होती है और उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही फैसले लिए जाते हैं. हालांकि अब जब अशोक खरात के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो इस पूरे मामले को नए नजरिए से देखा जा रहा है।  जांच में 100 वीडियो और 1500 करोड़ की संपत्ति का खुलासा यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सरकारी फंडिंग, राजनीतिक संपर्क और बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियों की भी जांच हो रही है. आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

पिछलग्गू BJP ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैसे बनाई चुनौती, जानें उनकी रणनीति

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दो-तरफा मुकाबला देखा जा रहा है. 2021 के चुनाव के बाद राज्य में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में राज करने वाले वामदल और कांग्रेस की ताकत जहां लगातार सिमटती जा रही है, वहीं उस खाली हुए स्पेस को बीजेपी भरती दिख रही है. कभी टीएमसी के साथ गठबंधन में सहयोगी रही बीजेपी मौजूदा वक्त में उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बन चुकी है।  पिछले कुछ सालों में, भारतीय जनता पार्टी साइडलाइन से हटकर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी है. बीजेपी ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देने की सबसे मज़बूत उम्मीद बन चुकी है. 2016 में सिर्फ़ तीन विधानसभा सीटें जीतने से लेकर 2021 के चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरने तक, BJP ने राज्य में काफ़ी बढ़त बनाई है. बंगाली बोलने वाले राज्य में नेशनल पार्टी की बढ़त लोगों को अचंभित कर रही है।  बंगाल में लगातार बढ़ रहा बीजेपी का वोट शेयर 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे. उस चुनाव में पूरे राज्य में केवल चार फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. 2016 में, उसे लगभग 10 फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीटें मिली थीं. 2021 में 77 सीटों और 38 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर तक पहुंची. इसके साथ ही बीजेपी ने दिखा दिया कि वह बंगाल जैसे राज्य में भी मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकती है. बेहद कुछ सालों में ही बीजेपी ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की जगह ले ली, जो दशकों से बंगाल की राजनीति पर हावी थे. इस तरह बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन गई।  2021 में, BJP के लिए एक अहम पल तब आया जब नंदीग्राम में मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी की जीत हुई. सुवेंदु, जो कभी ममता के करीबी थे, 1,956 वोटों के बहुत कम अंतर से जीते. यह मुकाबला एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था जब CM ने खुद अधिकारी को उनके घरेलू मैदान पर चुनौती देने का फैसला किया, जिससे यह नतीजा पार्टी के लिए एक सिंबॉलिक जीत बन गया।  उत्तर बंगाल के जरिए बीजेपी ने मजबूत की पकड़ BJP की बढ़त ज़्यादातर स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में केंद्रित रही है. उत्तर बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और मालदा और दिनाजपुर के कुछ हिस्से में 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, पार्टी का गढ़ बन गया है. दार्जिलिंग हिल्स में, BJP ने दार्जिलिंग, कुर्सेओंग और माटीगारा-नक्सलबाड़ी जैसी सीटों पर दबदबा बनाया, जिससे उसे गोरखा समुदाय का समर्थन मिला. डुआर्स और तराई बेल्ट – जिसमें जलपाईगुड़ी, राजगंज, डाबग्राम-फूलबाड़ी, माल, अलीपुरद्वार और कुमारग्राम शामिल हैं- में आदिवासी और राजबंशी वोटरों का दबदबा है, जबकि सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्र भी BJP की तरफ झुके हुए हैं।  2021 में, BJP ने अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसने कूचबिहार की नौ में से सात सीटें जीतीं. जलपाईगुड़ी में, BJP ने सात में से चार सीटें और हिल्स की छह में से पांच सीटें जीतीं, जिसमें सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग टाउन शामिल हैं, जबकि कलिम्पोंग एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।  2019 के लोकसभा चुनावों ने न केवल बीजेपी को केंद्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश दिया, बल्कि राज्य में पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया. बीजेपी ने 18 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं, जो टीएमसी की 22 सीटों से पीछे थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 2 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी BJP ने नॉर्थ बंगाल की 8 में से 7 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में, BJP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि TMC ने 29 सीटों के साथ दबदबा बनाया।  BJP की बढ़ती पकड़ के पीछे की रणनीति क्या है?       राज्य में BJP की बढ़त कई वजहों से हो सकती है. 2014 से, पार्टी ने RSS के सपोर्ट वाले एक मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए अपनी ऑर्गनाइज़ेशनल पहुंच को मज़बूत किया है. इसने पहचान की राजनीति का कामयाबी से फ़ायदा उठाया, राजबंशी, आदिवासी और शहरी समुदायों के बीच हिंदू वोटों को मज़बूत किया, साथ ही तृणमूल के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय शिकायतों को भी सामने लाया।      पिछले कुछ सालों में टीएमसी और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे बंगाल में पार्टी की लीडरशिप का दबदबा बढ़ा.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सीनियर नेताओं के बार-बार दौरों से भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे क्रेडिबिलिटी और वोटर अपील बढ़ी।      साथ ही, तृणमूल की कमज़ोरियों, जिसमें कथित कुशासन और एंटी-इनकंबेंसी भावना शामिल है. खासकर नॉर्थ बंगाल में BJP को पूरे राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका दिया।   

1 अप्रैल से देश में होंगे 5 बड़े बदलाव: LPG, ATM, PAN और अन्य, हर नागरिक पर होगा प्रभाव

नई दिल्ली नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों और टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे। PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी। HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है। क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा। अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा। कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। नया आयकर अधिनियम 2025 लागू 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्या है इसका सीधा असर? इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।