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भूमि घोटालों पर लगेगा ब्रेक: रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक की पड़ताल का नया नियम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों, धोखाधड़ी और जालसाजी की घटनाओं को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार का हालिया कैबिनेट फैसला आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकता है। रजिस्ट्री से पहले भू-संपत्ति के मालिकाना हक और उससे जुड़े दस्तावेजों की अनिवार्य जांच की व्यवस्था लागू होने से जमीन के लेनदेन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नई शुरुआत मानी जा रही है। यह फैसला भू-माफियाओं की कमर तोड़ने का भी काम करेगा साथ ही लोगों की मेहनत की कमाई लुटने से बचेगी। जमीन की खरीद-फरोख्त के मामलों में अक्सर कोई न कोई समस्या सामने आती रहती है। रजिस्ट्री होने के बाद खरीदार को पता चलता है कि जमीन विवादित है, उस पर किसी और का दावा है या फिर दस्तावेजों में गड़बड़ी है। ऐसे मामलों में कई बार लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है और उनकी मेहनत की कमाई दांव पर लग जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री से पहले ही कागजात और मालिकाना हक की जांच होने से ऐसे जोखिम काफी हद तक कम हो सकते हैं। प्रॉपर्टी विशेषज्ञ प्रदीप मिश्रा का कहना है कि यह कदम भविष्य में संपत्ति विवादों की संख्या कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। जब रजिस्ट्री से पहले जमीन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और दस्तावेजों की पुष्टि हो जाएगी, तब फर्जी सौदे, डुप्लीकेट कागजात और धोखाधड़ी की संभावनाएं स्वतः कम हो जाएंगी। इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को भरोसे के साथ निवेश करने का माहौल मिलेगा। यह फैसला भू-माफियाओं और अवैध जमीन कारोबार पर भी प्रभावी चोट साबित होगा। लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों और कानूनी खामियों का फायदा उठाकर कुछ लोग जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री करते रहे हैं। यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया में ही कड़ी जांच की व्यवस्था लागू होती है, तो ऐसे तत्वों के लिए जमीन से जुड़े फर्जी सौदे करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है। जब जमीन से जुड़े लेनदेन अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होंगे, तो निवेशकों और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। इससे शहरी और औद्योगिक विकास की योजनाओं को भी गति मिलने की संभावना है। योगी सरकार पहले से ही भू-माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और अवैध कब्जों को हटाने के अभियान पर जोर दे रही है। ऐसे में रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच की नई व्यवस्था इस अभियान को और मजबूत आधार देने में सक्षम होगी। आने वाले समय में यह पहल आम लोगों को जमीन से जुड़े जोखिमों से बचाने और संपत्ति बाजार को अधिक विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

MP की लाड़ली बहनों को बड़ी सौगात: 34वीं किस्त के 1500 रुपये ट्रांसफर

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए 13 मार्च का दिन खास रहा। उनके लाड़ले भाई प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके खातों में योजना की 34वीं किश्त के रूप में 1500 रुपये ट्रांसफर किए। सीएम डॉ. यादव ने ग्वालियर जिले के घाटीगांव स्थित शबरी माता मंदिर में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में 1.25 महिलाओं के खातों में 1836 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस मौके पर उन्होंने 121 करोड़ रुपये की लागत के 54 विकासकार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी किया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन और कन्या पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत बड़ी से बड़ी कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें प्रदेश की बहन बेटियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। जून 2023 से फरवरी 2026 तक योजना के तहत 33 किश्तों का नियमित अंतरण किया जा चुका है। इस अवधि में 54,140 करोड़ रुपये की राशि बहनों के खातों में सीधे ट्रांसफर की गई है। आज नवरात्रि से पहले बहनों को 1500 रुपए की सौगात मिली है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में हमारी सरकार ने लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत गत नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपये की वृद्धि की है। इससे अब पात्र हितग्राही बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार अब लाड़ली बहना योजना से जुड़ी महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें कौशल उन्नयन, रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जाएगा, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इस दिशा में हमारी सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। खुला सौगातों का पिटारा     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भितरवार में 122 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मिली है। इसमें 40 करोड़ लागत के भव्य सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण और नए पुल का भूमिपूजन भी शामिल है।     डबरा के जौरासी गांव में डॉ भीमराव अंबेडकर स्मारक के लिए दूसरे चरण में 12.5 हजार करोड़ के भूमि पूजन किया जाएगा।     कुलैथ, डबरा और मुरार में 50-50 सीट के बालक बालिका छात्रावास का पूजन हो रहा है। आईएसबीटी के पास 7 करोड़ की लागत से श्रमिक विश्रामगृह का निर्माण किया जा रहा है।     उन्होंने कहा 2024 से अब तक ग्वालियर में 220 औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है।     यहां 12.5 हजार करोड़ के निवेश से हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लोगों की जिंदगी बदलेगी। सीतापुर में फुटवियर क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है।     मुरैना में हाइड्रोजन निर्माण के लिए नया कारखाना लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवपुरी के कूनो नेशनल पार्क में चीता अपना कुनबा बढ़ा रहा है।     माधव नेशनल पार्क अब टाइगर, घड़ियाल और कछुआ के लिए पहचान बना रहा है। किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार ने किसानों को 40 रुपये बोनस देखकर गेहूं खरीदने का निर्णय लिया है।     प्रदेश में पशुपालन एवं दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजना की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ये घोषणाएं सीएम डॉ. यादव ने कहा कि भितरवार पीएचसी को सिविल अस्पताल बनाएंगे। घाटीगांव के उप स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन कराएंगे। भितरवार और घाटीगांव में युवाओं के कौशल विकास के लिए आईटीआई केंद्र की स्थापना करेंगे। भितरवार में मां शबरी माता का भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि का सर्वे कराया जाएगा। संस्कृति विभाग के माध्यम से भगवान देवनारायण मंदिर में आयोजन होंगे। लिखी जा रही विकास की नई इबारत     कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भितरवार विधानसभा क्षेत्र को माता शबरी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है।     प्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।     लाडली बहनों को आज योजना की 34वीं किश्त सीधे बैंक खाते में मिल रही है।     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 का संकल्प लिया है।     भारत अब अमृतकल से आगे शताब्दी काल की ओर बढ़ रहा है।     बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण के बगैर विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सकता है। इसीलिए मध्य प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना की शुरुआत की गई है।     प्रदेश की लाड़ली बहनों को आगामी वर्षों में प्रति माह 3000 तक दिए जाएंगे।     इस दौरान जल संसाधन मंत्री एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी तुलसीराम सिलावट ने कहा कि हमारी सरकार ने जो कहा है, वह किया है।     प्रदेश के अन्नदाता को समृद्ध बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प लिया है।  

होटल और रेस्तरां उद्योग को LPG संकट से राहत, सरकार का फैसला रसोई संचालन को सुरक्षित रखेगा

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जंग के कारण पैदा हुए वैश्विक गैस संकट के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसमें होटल-रेस्तरां इंडस्ट्री को राहत देने की तैयारी है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कमर्शियल एलपीजी की मौजूदा स्थिति और इसका होटल-रेस्तरां तथा पर्यटन सेक्टर पर पड़ रहे असर पर चर्चा की गई. सरकार ने हालात को संभालने के लिए तुरंत कुछ कदम उठाने का फैसला किया है. आज से व्यवसायों को हर महीने की औसत कमर्शियल LPG जरूरत का करीब 20 फीसदी कोटा दिया जाएगा, ताकि होटल और रेस्तरां की रसोई चलती रहे। इसके अलावा होटल और रेस्तरां को अतिरिक्त गैस सप्लाई देने के उपायों पर भी काम किया जा रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय आपस में मिलकर और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे, ताकि हालात पर नजर रखी जा सके और समस्याओं का जल्दी समाधान किया जा सके. सरकार का कहना है कि गैस की मौजूदा परेशानी चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुए वैश्विक संकट का हिस्सा है। होटल इंडस्ट्री परेशान दरअसल, पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत में 80-85 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी इलाके से होता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से. जहाजों की आवाजाही रुकने से देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (नीले रंग वाले) की भारी कमी हो गई है. होटल, रेस्तरां, ढाबे और पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं. कई शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली में रेस्तरां मेन्यू कम कर रहे हैं, कुछ बंद हो रहे हैं या समय कम कर रहे हैं. मुंबई में 20 प्रतिशत तक होटल-रेस्तरां बंद हो चुके हैं, और अगर हालात नहीं सुधरे तो दो-तीन दिनों में 50 प्रतिशत तक बंद हो सकते हैं. बेंगलुरु में होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि सप्लाई बंद रहने पर हजारों जगहें बंद हो जाएंगी। घरेलू सेक्टर पर जोर बैठक के बाद पुरी ने कहा कि ये समस्या वैश्विक है, जंग की वजह से पैदा हुई है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं (घरों में इस्तेमाल वाली गैस) को प्राथमिकता दे रही है. घरेलू क्षेत्र कुल खपत का 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सिर्फ 13 प्रतिशत. सरकार ने तुरंत राहत के कदम उठाए हैं. आज से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) व्यवसायों को उनकी औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी जरूरत का करीब 20 प्रतिशत कोटा देंगी. राज्य सरकारों के साथ मिलकर ये कोटा असली जरूरतमंदों को दिया जाएगा, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी न हो. ये कदम ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए है. इसके अलावा अतिरिक्त गैस सप्लाई के उपायों पर काम चल रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय मिलकर उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे।

आज से शुरू हो रहा स्वदेशी मेला, सीएम विष्णु देव साय की मौजूदगी में होगा उद्घाटन

 भिलाई  स्वदेशी जागरण फाउंडेशन की इकाई भारतीय विपणन विकास केंद्र CBMD द्वारा आयोजित होने वाले स्वदेशी मेले का भव्य शुभारंभ जयंती स्टेडियम के सामने मैदान में शुक्रवार शाम 7 बजे किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और मेले का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम करेंगे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा, विशिष्ट अतिथि प्रेम प्रकाश पांडेय-पूर्व विधानसभा अध्यक्ष छत्तीसगढ़, विधायक ललित चंद्राकर, रिकेश सेन, देवेंद्र यादव, महापौर नगर निगम भिलाई नीरज पाल, महापौर नगर निगम दुर्ग अलका बाघमार, दीपक शर्मा अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख, जगदीश पटेल, प्रांत संयोजक स्वदेशी जागरण मंच, अमर बंसल प्रांत स्वदेशी मेला प्रमुख, सतीश थोरानी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहेंगे। स्वदेशी मेला प्रांत प्रमुख अमर बंसल, प्रबंधक सुब्रत चाकी, मेला संयोजक अजय भसीन ने बताया कि मेला स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, स्थानीय उद्यमियों को मंच प्रदान करने और भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। मेले में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वदेशी उत्पाद, हस्तशिल्प, वस्त्र, घरेलू उद्योग, दैनिक उपयोग की सामग्री सहित कई नवाचारपूर्ण उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। मेले में आने वाले लोगों के लिए मनोरंजन के विशेष आकर्षण भी रखे गए हैं। बच्चों और परिवारों के लिए आकर्षक झूले एवं मनोरंजन गतिविधियाँ उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ ही स्वाद प्रेमियों के लिए एक विशेष फूड जोन बनाया गया है, जहाँ विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक व्यंजन उपलब्ध होंगे। इसके अलावा मेले में ऑटोमोबाइल जोन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहाँ विभिन्न कंपनियों के नवीनतम वाहनों और तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। स्वागत समिति के अध्यक्ष दिनकर बसोतिया ने बताया कि स्वदेशी मेले में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपराओं की भी झलक देखने को मिलेगी, जिससे यह आयोजन केवल व्यापारिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का रूप लेगा। विपणन प्रबंधक जीआर जगत व जयेश पांचाल ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ मेले में पहुँचकर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में सहभागी बनें। मीडिया प्रभारी शंकर सचदेव के मुताबिक मेला काफी रोमांचक होने वाला है। शहरवासियों से अपील की गई कि परिवार संग जरूर आएं।

अफीम की खेती के खिलाफ कड़ा एक्शन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए सख्त निर्देश

संलिप्त लोगों के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाई रायपुर, प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन और प्रशासन के सभी अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि अपने-अपने जिलों के संवेदनशील एवं संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर सर्वे पूर्ण कर अपने हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख हो कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती तो नहीं की जा रही है। प्रदेश में हाल ही में कुछ स्थानों पर अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।अवैध क़ब्ज़े के जेसीबी मशीन से हटाया गया । इसी प्रकार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्रीपानी (खजुरी) में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे (लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य) जब्त किए गए तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 एवं 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ईद पर सड़क पर नमाज, तो मेरठ में FIR और पासपोर्ट रद्द होने का खतरा

 मेरठ मेरठ पुलिस प्रशासन ने आगामी ईद और अलविदा जुमे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ईदगाह कमेटी और मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस दौरान एसएसपी अविनाश पांडे ने निर्देश दिए हैं कि ईद की नमाज किसी भी हाल में सार्वजनिक सड़क पर अदा नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में खलल डालने का प्रयास करने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ पासपोर्ट जब्ती और सख्त मुकदमेबाजी जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  फिलहाल, शहर की 544 मस्जिदों और 140 ईदगाहों की सुरक्षा के लिए पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है. ड्रोन कैमरों और 112 की गाड़ियों के जरिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी. शरारती तत्वों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।  शरारती तत्वों को SSP की सीधी चेतावनी मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे ने स्पष्ट किया कि 99 प्रतिशत लोग शांतिप्रिय होते हैं, लेकिन मुट्ठी भर अपराधी किस्म के लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं. यह सख्त संदेश उन्हीं लोगों के लिए है जो कानून हाथ में लेंगे. उन्होंने बताया कि शहर काजी के साथ बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई है और सभी को पुराने निर्देशों के बारे में दोबारा बता दिया गया है. पुलिस का लक्ष्य बहुत स्पष्ट है- शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न कराना और किसी भी बाधा को जीरो टॉलरेंस के साथ निपटाना।  ड्रोन से निगरानी और भारी पुलिस बल तैनात सुरक्षा के लिहाज से मेरठ को सेक्टर और ज़ोन में बांटा गया है. एसएसपी ने बताया कि निगरानी के लिए 6 एक्टिव ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं. नमाज के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था के लिए एसपी ट्रैफिक को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि 112 और फायर टेंडर की गाड़ियां भी मौके पर मुस्तैद रहेंगी. प्रशासन ने बिजली, पानी और नाले की सफाई से जुड़ी 90 प्रतिशत समस्याओं का निराकरण कर दिया है ताकि नमाजियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। 

जूनियर डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

जूनियर डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल उप मुख्यमंत्री  शुक्ल के निर्देश के अनुक्रम में स्टाइपेंड वृद्धि आदेश जारी 1 अप्रैल 2025 से होंगे प्रभावशील भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल के निर्देशों के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि संबंधी आदेश जारी कर दिए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त एवं जनोन्मुख बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जूनियर डॉक्टर पूर्ण समर्पण से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और सुदृढ़ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभायेंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि जूनियर डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में वे न केवल अपने चिकित्सा प्रशिक्षण को पूर्ण करते हैं। मरीजों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भी जूनियर डॉक्टर अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जूनियर डॉक्टर के हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को सकारात्मक समाधान के निर्देश दिए थे। उसके अनुक्रम में विभाग द्वारा स्टाइपेंड वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2.94 के आधार पर वृद्धि करते हुए 1 अप्रैल 2025 से संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है। इसके तहत पीजी प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 75,444 रुपये से बढ़ाकर 77,662 रुपये, द्वितीय वर्ष का 77,764 रुपये से बढ़ाकर 80,050 रुपये तथा तृतीय वर्ष का 80,086 रुपये से बढ़ाकर 82,441 रुपये किया गया है। इसी प्रकार इंटर्न का स्टाइपेंड 13,928 रुपये से बढ़ाकर 14,337 रुपये किया गया है। सुपर स्पेशिलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के स्टाइपेंड को भी बढ़ाकर 82,441 रुपये निर्धारित किया गया है। सीनियर रेजिडेंट का स्टाइपेंड 88,210 रुपये से बढ़ाकर 90,803 रुपये तथा जूनियर रेजिडेंट का स्टाइपेंड 63,324 रुपये निर्धारित किया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत एवं सेवाएं दे रहे जूनियर डॉक्टरों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।  

भारतीय संस्कृति में धरती मां समान, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री रायपुर  छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है।  साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया। इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त  सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ  व्ही निवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष  शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

लोकायुक्त ने लगाया भोपाल नगर निगम पर छापा, फर्जी बिल घोटाले की जांच में 10 साल के दस्तावेज जब्त

भोपाल  नगर निगम में शुक्रवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीम ने फतेहगढ़ स्थित कार्यालय और एक अन्य दफ्तर पर दबिश दी।यह कार्रवाई निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान की शिकायतों के बाद की गई है। लोकायुक्त की टीम शुक्रवार सुबह ठीक उस वक्त निगम दफ्तर पहुँची जब कर्मचारी अपनी सीटें संभाल ही रहे थे। फायनेंस और कंप्यूटर शाखा लोकायुक्त के घेरे में टीम ने सबसे पहले फायनेंस और कंप्यूटर शाखा को अपने घेरे में लिया। जानकारी के अनुसार, फतेहगढ़ ऑफिस खुलते ही लोकायुक्त की टीम वहाँ पहुँच गई थी। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निगम में बिना किसी जमीनी काम के, केवल कागजों पर फर्जी बिल लगाकर भुगतान का खेल चल रहा है। लोकायुक्त की दो अलग-अलग टीमें दोनों कार्यालयों में जांच कर रही हैं। कम्प्यूटर शाखा में नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण ऑनलाइन रिकॉर्ड और लेखा-जोखा रखा जाता है, इसलिए दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। संबल योजना के दस्तावेज खंगाले टीम ने संबल योजना से जुड़े रिकॉर्ड और ऑनलाइन एंट्री की जांच शुरू की है। इसके साथ ही अन्य डिजिटल रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। फतेहगढ़ स्थित कार्यालय में मौजूद तीन कर्मचारियों वसीम, सोहेल और पंकज से अंदर पूछताछ की जा रही है। टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे दोनों स्थानों पर एक साथ छापे की कार्रवाई शुरू की। 22 फरवरी को नए भवन में हुई थी शिफ्टिंग फतेहगढ़ में स्थित नगर निगम की कम्प्यूटर शाखा को 22 फरवरी को लिंक रोड नंबर-2 पर बने नए भवन में शिफ्ट किया गया था। रेड के दौरान दोनों इमारतों में रखे दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कम्प्यूटर शाखा में होते हैं ये ऑनलाइन कार्य नगर निगम की कम्प्यूटर शाखा में संबल योजना, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े काम संचालित होते हैं। लोकायुक्त टीम इनसे संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। दस साल पुराना रिकार्ड को जब्त किया जा रहा इस दौरान पिछले करीब 10 साल के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त पुलिस इस मामले में नगर निगम के दो ऑफिस बॉय और एक ऑपरेटर से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराने का मामले से जुड़ी शिकायत के बाद कार्रवाई की गई है। लोकायुक्त की टीम पुराने दस्तावेजों और भुगतान से जुड़ी फाइलों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है। संबल योजना और कर्मकार मंडल के तहत 2023 में 2 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े मामले से जुड़े रिकॉर्ड लोकायुक्त की टीम खंगाल रही है। एक दशक पुराने दस्तावेजों की जब्ती कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर पिछले 10 वर्षों के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं। यह संकेत देता है कि यह घोटाला किसी एक कार्यकाल का नहीं, बल्कि एक दशक से चल रहा एक संगठित भ्रष्टाचार है। जांच टीम अब इन दस्तावेजों का मिलान जमीनी हकीकत से करने की तैयारी में है।

पीरियड लीव याचिका: SC ने सुनवाई से इनकार किया, संभावित करियर नुकसान का जिक्र

 नई दिल्ली सरकार के पास जाइए…' पूरे देश में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की मांग वाली याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के सामने ये मामला उठाया गया था. ये याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- इस तरह की याचिकाए कभी-कभी महिलाओं को कमजोर या कमतर दिखाने का माहौल बना देती हैं. ऐसी याचिकाएं यह डर पैदा करती हैं कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ कुछ बुरा होने जैसा है. इससे उन्हें ही नुकसान होगा। महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचकेंगे… सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई तो नियोक्ता महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचक सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायिक सेवाओं में भी महिलाओं को सामान्य ट्रायल जैसे महत्वपूर्ण काम सौंपने से बचा जा सकता है, जिससे उनके करियर पर असर पड़ सकता है।  सभी कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के पीरियड्स से जुड़ी तकलीफों के लिए अवकाश का प्रावधान बनाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया है. मुकदमा सामने लाए जाने पर CJI जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई कंपनी अपनी मर्जी से (पीरियड्स) इसके दौरान छुट्टी दे रही है तो बहुत अच्छी बात है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने इस पर कहा कि स्वैच्छिक नीतियां स्वागतयोग्य हैं लेकिन उन्होंने ऐसे प्रावधानों को कानून के जरिये अनिवार्य बनाए जाने के प्रति आगाह किया. उन्होंने कहा, “स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा. उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा.” पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया. पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि याचिका दायर करने वाला व्यक्ति संबंधित प्राधिकारियों को पहले ही अभ्यावेदन दे चुका है। क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे?  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस मुद्दे के आर्थिक और व्यावहारिक पहलुओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि व्यापारिक मॉडल के बारे में सोचिए. क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे? याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि केरल, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में कुछ संस्थानों में मासिक धर्म अवकाश या रियायतें दी जाती हैं, इसलिए इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।    उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही आप इस को कानून के तौर पर सख्ती से लागू करेंगे तो इसके दूसरे पहलुओं को भी ध्यान रखना पड़ेगा. अब जैसे हो सकता है कि महिलाओं को नौकरी पाने में दिक्कत हो. उन्हें सरकारी नौकरी, न्यायपालिका या बाकी नौकरियों में रखा ही न जाए। उन्होंने कहा कि उनका करियर ही बर्बाद हो जाए. ऐसे मे उन्हें कह दिया जाए कि वो घर पर ही रहें. इसके अलावा CJI ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप पहले ही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सामने अपनी बात रख चुके हैं. सरकार को सभी पक्षों से बात करके एक पॉलिसी बनाने पर विचार करना चाहिए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि गर्भावस्था के लिए तो अवकाश मिलता है, पर मासिक धर्म सके लिए नहीं. कुछ राज्यों और कंपनियों ने महीने में 2 दिन छुट्टी का प्रावधान बनाया है. ऐसे मे सुप्रीम कोर्ट सब राज्यों को ही ऐसे नियम बनाने का निर्देश दे।