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भोपाल में आसमान साफ, लेकिन एमपी के 5 जिलों में बारिश की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में फरवरी का महीना इस बार पूरी तरह बदला-बदला नजर आ रहा है। प्रदेश में चौथी बार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। दक्षिणी हिस्से में बने कम दबाव के क्षेत्र और दो सक्रिय द्रोणिकाओं के कारण कई जिलों में आंधी, गरज-चमक और हल्की से मध्यम वर्षा का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बालाघाट, डिंडौरी समेत पांच जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि भोपाल और इंदौर में धूप खिलने के आसार हैं।  इन जिलों में असर ज्यादा मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिणी मध्य प्रदेश में सक्रिय सिस्टम का प्रभाव बना हुआ है। इसके चलते अनूपपुर, मंडला और सिवनी सहित आसपास के इलाकों में बादल छाने और बारिश होने की स्थिति बन रही है। दिन में धूप, शाम को बदल गया मौसम सोमवार को कई जिलों में दोपहर तक धूप खिली रही, लेकिन इसके बाद मौसम ने करवट बदली। जबलपुर, रीवा, सीधी में बारिश हुई। वहीं, रात में भी मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, ग्वालियर, मुरैना, रीवा, बड़वानी, धार, दतिया, सीधी, खरगोन, सागर और दमोह में भी गरज-चमक और बारिश की स्थिति देखने को मिली। दिन में धूप, शाम को बदला रंग सोमवार को कई शहरों में सुबह से दोपहर तक तेज धूप रही, लेकिन शाम होते-होते मौसम पलट गया। जबलपुर में धूल भरी आंधी चली और बूंदाबांदी दर्ज की गई। वहीं रीवा और सीधी में भी बारिश हुई। रात के समय ग्वालियर, मुरैना, सागर, दमोह और खरगोन सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा का असर दिखाई दिया। फरवरी में चार बार बारिश वाला मौसम बता दें कि फरवरी के शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। अब चौथी बार 23 फरवरी को बारिश का दौर शुरू हुआ, जो मंगलवार को भी जारी रहेगा। रात में सर्दी से राहत, दिन में पारा लुढ़का बारिश की वजह से दिन के तापमान में गिरावट हुई है, लेकिन रात में पारा बढ़ा हुआ है। रविवार-सोमवार की रात में पचमढ़ी में सबसे कम 11.2 डिग्री, मंदसौर में 11.7 डिग्री और राजगढ़ में 12.4 डिग्री रहा। बड़े 5 शहरों में भी तापमान 12 डिग्री से ऊपर ही दर्ज किया गया। फरवरी बना बरसाती महीना आम तौर पर फरवरी को सर्दी के विदा होने का महीना माना जाता है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। महीने की शुरुआत में ही दो बार ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। इसके बाद 18 फरवरी से तीसरा दौर चला, जो तीन दिन तक सक्रिय रहा। अब 23 फरवरी से चौथी बार बादलों ने दस्तक दी है और इसका असर अभी बना हुआ है। तापमान में उतार-चढ़ाव बारिश से दिन का तापमान नीचे आया है, जबकि रात में ठंड कुछ कम हुई है। रविवार-सोमवार की रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री, मंदसौर में 11.7 डिग्री और राजगढ़ में 12.4 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के बड़े शहरों में भी रात का पारा 12 डिग्री से ऊपर रहा। मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज फिलहाल अस्थिर बना हुआ है। कहीं धूप तो कहीं बादल और बारिश फरवरी के आखिरी दिनों में भी मौसम राहत देने के मूड में नजर नहीं आ रहा। 

ईरान में हेलिकॉप्टर हादसा, 4 सैनिकों की मौत, परमाणु प्लांट के शहर में मलबा फैलने से हड़कंप

 इस्फहान ईरान में युद्ध के माहौल के बीच सेना का एक हेलिकॉप्टर इस्फहान प्रांत में क्रैश कर गया है. सेना का हेलिकॉप्टर एक फ्रूट होलसेल मार्केट में क्रैश हुआ है. इस हादसे में अबतक 4 लोगों की मौत हो गई है. हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद ईरान के न्यूक्लियर प्लांट वाले प्रांत इस्फहान में हेलिकॉप्टर का मलबा फैल गया है.  इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि हेलिकॉप्टर ईरानी आर्मी की एविएशन यूनिट का था और यह इस्फ़हान प्रांत के खोमेनी शाहर काउंटी के दारचेह शहर के फल और सब्ज़ी मार्केट एरिया में क्रैश हो गया. एजेंसी ने कहा कि क्रैश की वजह टेक्निकल गड़बड़ी थी. इस घटना में पायलट और को-पायलट के अलावा मार्केट के दो व्यापारी भी मारे गए.  रॉयटर्स ने बताया कि ईरान का एयर सेफ्टी रिकॉर्ड खराब है, यहां बार-बार क्रैश होते हैं, जिनमें से कई एयरक्राफ्ट 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले खरीदे गए थे और मेंटेनेंस के लिए ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स नहीं थे. पिछले हफ़्ते ईरान की रेगुलर एयर फ़ोर्स का एक US-बिल्ट F-4 फाइटर विमान पश्चिमी हमादान प्रांत में क्रैश हो गया था. जिसमें एक पायलट की ट्रेनिंग फ़्लाइट के दौरान मौत हो गई.ईरान की न्यूज एजेंसियां ये तो जरूर कह रही हैं कि हादसे की वजह तकनीकी गड़बड़ी है, लेकिन इसकी सही वजह नहीं पता चल पाई है.  यह क्रैश ऐसे समय में हुआ है जब US ने ईरान पर हमले की धमकी दी है. बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच यूरेनियम एनरिचमेंट और न्यूक्लियर हथियार रखने को लेकर चल रही बात अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. इस मुद्दे पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच काफी मतभेद है.  इस समय अमेरिकी खतरे को देखते हुए ईरानी मिलिट्री हाई अलर्ट पर है क्योंकि ट्रंप देश भर में अमेरिका की मिलिट्री ताकत बनाते हुए ईरान पर हमला करने के ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं. पिछले हफ्ते ईरान की रेगुलर एयर फोर्स का एक US-बिल्ट F-4 फाइटर प्लेन पश्चिमी प्रांत हमादान में क्रैश हो गया था, जिसमें एक ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान एक पायलट की मौत हो गई थी.

WhatsApp का नया अपडेट: सिम कार्ड हटाते ही होगा ऐप बंद, जानें नया नियम

 नई दिल्ली WhatsApp प्लेटफॉर्म ने सिम बाइडिंग सर्विस को शामिल किया है और लेटेस्ट बीटा अपडेट में इसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. ये जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. दरअसल, साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए भारत सरकार के रसंचार विभाग ज्यादातर OTT ऐप्स के लिए SIM-Binding नियम का ऐलान किया है.  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि मैसेजिंग ऐप ने न्यू रेगुलेशन के साथ काम करना शुरू कर दिया है, जिसका नाम सिम बाइंडिंग है. इसकी मदद से WhatsApp अकाउंट सेफ रहेगा और एक्टिव सिम कार्ड पर ही काम करेगा.  WhatsApp beta के Android 2.26.8.6 अपडेट में पता चलता है कि वह भारत के मेंडेटरी सिम लिंक रूल्स पर काम कर रहा है.  सिम बाइडिंग नियम क्या है? SIM-Binding, असल में एक ऐसी सर्विस है कि कोई भी मैसेजिंग या कम्युनिकेशन ऐप उसी SIM कार्ड के साथ काम करेगा, जिस नंबर से वह रजिस्टर है. स्मार्टफोन से जैसे ही सिम निकाली या बदली जाती है तो WhatsApp भी काम करना बंद कर देगा. UPI ऐप्स में सिम बाइडिंग की सुविधा पहले से है.  WhatsApp चलाने के लिए चाहिए होगी एक्टिव सिम कार्ड. (Unsplash) Wabetainfo का पोस्ट  Wabetainfo ने एक स्क्रीनशॉट्स जारी किया है, जो पोस्ट में देखा जा सकेगा. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप भारत में नए नियमों को फॉलो करने के लिए तकनीकी उपाय लागू करेगा. WhatsApp पर मौजूदा समय सिस्टम   मौजूदा समय में यूजर्स समय-समय पर 6 डिजिट के वेरिफिकेशन कोड को एंटर करके WhatsAppको यूज कर सकते हैं. एक बार लॉगइन करने के बाद सिस्टम यह चेक नहीं करता है कि सिम एक्टिव है या नहीं. सिम बाइडिंग के साथ ऐसा नहीं होगा.  भारत सरकार का मकसद  भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक, सिम बाइडिंग सिस्टम डिसकनेक्टेड हो चुके हैं नंबर या फिर दोबारा सेल किए गए फोन के नंबर के मिसयूज को रोकना है. साइबर स्कैमर्स पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी. 

उज्जैन में ऐतिहासिक ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन, 7500 सेवकों की होगी उपस्थिति

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड पर मंगलवार शाम 5 बजे ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन आयोजित होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएम डॉ. मोहन यादव होंगे और अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे। सम्मेलन में 7 हजार ग्रामीण डाक सेवक (जीडीसी) शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य ग्रामीण डाक सेवकों के समर्पण और सेवा को सम्मानित करना है। ये ग्रामीण क्षेत्रों में इंडिया पोस्ट की रीड़ हैं। लोगों को जोडऩे और ग्रामीण भारत में डाक, बैंकिंग और बीमा सेवाओं का विस्तार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश परिमंडल के विभिन्न संभागों से करीब 7 हजार ग्रामीण डाक सेवक शामिल होंगे। ग्रामीण डाक सेवा समुदाय से बातचीत करेंगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ग्रामीण डाक सेवा समुदाय के साथ बातचीत करेंगे। आधुनिक और नागरिक केंद्रित डाक नेटवर्क के लिए अपना दृष्टिकोण बताएंगे और उन्हें ग्रामीण समुदायों की सरकारी और वित्तीय सेवाएं प्रदान करते विभाग को लाभ की स्थिति तक लाने में उनकी भूमिका को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करेंगे। सिंधिया करेंगे सम्मानित सिंधिया डाक और पार्सल वितरण, नए बचत खाते खोलने, डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) पॉलिसी खरीदने, ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों को सीधे भुगतान जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट और सर्वश्रेष्ठ कार्य निष्पादन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों को सम्मानित करेंगे। इंडिया पोस्ट को सशक्त बनाने निभाएगा अहम किरदार बताया जा रहा है कि, ये सम्मेलन ग्रामीण भारत में सार्वजनिक सेवा वितरण के प्रवेश द्वार के रूप में इंडिया पोस्ट को सशक्त बनाने, प्रत्येक डाकघर को नागरिक-केंद्रित सेवाओं के केंद्र में बदलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उत्प्रेरक के रूप में भूमिका निभाने को सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

साउथ अफ्रीका से हार के बाद टीम इंडिया में दो अहम बदलाव, सेमीफाइनल का गणित उलझा

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को रविवार को साउथ अफ्रीका ने 76 रनों से करारी शिकस्त दी. सुपर-8 में इस करारी हार के बाद टीम की जमकर आलोचना हो रही है. आलोचना का कारण हार से ज्यादा टीम के इंटेंट को लेकर है. क्योंकि 8 नंबर तक की बल्लेबाजी वाली टीम 111 के स्कोर पर ढेर हो गई.  किसी भी बल्लेबाज ने संघर्ष नहीं दिखाया. खासकर बाएं हाथ के बल्लेबाज ऑफ स्पिन के सामने पूरी तरह असहज नजर आए. इस हार के बाद अब टीम में बड़े बदलाव की मांग भी उठ रही है. भारत का अगला मैच 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ है. कहा जा रहा है कि इस मैच में दो बदलाव हो सकते हैं. अक्षर पटेल को वापस लाने की मांग पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल समेत कई पूर्व क्रिकेटरों ने टीम में बदलाव की मांग की है. सबसे ज्यादा चर्चा अक्षर पटेल को लेकर हो रही है, जिन्हें पिछले दो मैचों में मौका नहीं मिला. पार्थिव पटेल का मानना है कि अक्षर पटेल को टीम में वापस लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अक्षर दबाव में अहम पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं और गेंदबाजी में भी किफायती साबित होते हैं. उनका कहना है कि मैच-अप की रणनीति अपनी जगह है, लेकिन अक्षर जैसा ऑलराउंडर टीम संतुलन के लिए जरूरी है. अभिषेक शर्मा पर खतरा पार्थिव पटेल ने सलामी बल्लेबाजी पर भी सवाल उठाए. अभिषेक शर्मा लगातार चौथे मैच में नाकाम रहे हैं. ऐसे में उन्हें बाहर किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि चेन्नई में होने वाले मुकाबले में संजू सैमसन को मौका मिल सकता है. उनके अनुसार बाएं हाथ के बल्लेबाजों को ऑफ स्पिन के खिलाफ परेशानी हो रही है, इसलिए टीम प्रबंधन बदलाव पर विचार कर सकता है. भारत की ओर से ईशान किशन सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं. उन्होंने अब तक 177 रन बनाए हैं, हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वह खाता नहीं खोल सके. बिगाड़ा टीम इंडिया का खेल, उलझ गया सेमीफाइनल का गणित  आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का रोमांच जारी है. मैच दर मैच सेमीफाइनल की जंग और पेचीदा होती जा रही है. रविवार को साउथ अफ्रीका ने टीम इंडिया को करारी शिकस्त दी. इसके बाद वेस्टइंडीज ने सोमवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की. वेस्टइंडीज की इस महाजीत ने सेमीफाइनल के गणित को और उलझा दिया है. अब भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की राह और मुश्किल हो गई है. आइए इसका पूरा इक्वेशन समझते हैं… पहले अंक तालिका का हाल जान लीजिए इस जीत के साथ ही सुपर-8 के ग्रुप 1 में वेस्टइंडीज की टीम टॉप पर आ गई है. दो अंक के साथ ही वेस्टइंडीज का रन रेट +5.350 का हो गया है. वहीं, दूसरे नंबर पर साउथ अफ्रीका है जिसका नेट रन रेट दो अंकों के साथ +3.800 का है. अब तीसरे पायदान पर भारत है जिसके पास अंक नहीं है लेकिन उसका नेट रन रेट (-3.800) जिम्बाब्वे (-5.350) से बेहतर है.  अब आगे क्या… वेस्टइंडीज की इस जीत और जिम्बाब्वे की हार से अब वेस्टइंडीज का पलड़ा भारी हो गया है. वहीं, जिम्बाब्वे की हालत खराब हो गई है. वेस्टइंडीज के अब दो मैच भारत और साउथ अफ्रीका से हैं. वहीं, जिम्बाब्वे को साउथ अफ्रीका और भारत से खेलना है. अगर वेस्टइंडीज अपने आगे के दो मैच में से एक मैच जीतता है और एक हारता है तो भी उसके सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद जिंदा रहेगी. कारण है उसका सबसे बेहतर नेट रन रेट. वहीं, भारत और साउथ अफ्रीका भी अगर दोनों मैच जीतते हैं तो फिर 3 टीमें होंगी जिनके पास 6 अंक होंगे. यानी फैसला नेट रन रेट से ही होगा.  भारत कैसे करेगा क्वालिफाई अगर भारत को सेमीफाइनल में जगह बनानी है तो गणित बिलकुल साफ है. भारत अपने दोनों मैच बेहतर अंतर से जीते. साथ ही वो दुआ करे की साउथ अफ्रीका भी अपने सारे मैच जीते. अगर साउथ अफ्रीका और भारत दोनों अपने बाकी के दो-दो मैच जीतते हैं तो मतलब वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के पास केवल 2-2 अंक ही बचेंगे. ऐसे में भारत और साउथ अफ्रीका इस ग्रुप से सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर जाएगा. लेकिन अगर साउथ अफ्रीका अपना एक मैच हारती है तो फिर फैसला नेट रन रेट से ही होगा और वहां भारत के लिए मुश्किल बढ़ सकती है. क्योंकि मौजूदा समय में भारत का नेट रन रेट वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका दोनों से ही बेहद खराब स्थिति में है. अब वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे मैच के बारे में जानें… आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप का 44वां मैच सोमवार को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया. मुकाबले में टॉस जीतकर जिम्बाब्वे ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने तूफानी बैटिंग की और 254 रन ठोक डाले. इसके जवाब में उतरी जिम्बाब्वे की टीम महज 147 रन ही बना सकी और 18वें ओवर में ऑलआउट हो गई.    अब भारत का अगला मुकाबला 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ है. यह मैच टीम इंडिया के लिए करो या मरो जैसा हो सकता है, क्योंकि सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए जीत बेहद जरूरी है.

राहुल गांधी-खड़गे के साथ भोपाल किसान महासम्मेलन, शहरभर में यातायात पर असर

भोपाल भोपाल में आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का महत्वपूर्ण दौरा है. राजधानी में आयोजित किसान महा चौपाल कार्यक्रम में दोनों नेता शामिल होंगे और किसानों से सीधे संवाद करेंगे इस दौरे को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राहुल गांधी दोपहर 12 बजे दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना होंगे और लगभग 1 बजे भोपाल पहुंचेंगे. एयरपोर्ट पर संक्षिप्त स्वागत के बाद वे दोपहर 1:30 बजे जवाहर चौक के लिए प्रस्थान करेंगे और करीब 1:55 बजे वहां पहुंचेंगे. किसान महा चौपाल कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से किसान महा चौपाल कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किसानों को संबोधित करेंगे. यह कार्यक्रम लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा. दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक राहुल गांधी किसानों के बीच मौजूद रहेंगे और अलग-अलग कृषि मुद्दों, समर्थन मूल्य, फसल नुकसान, कर्ज, और अन्य समस्याओं पर खुलकर चर्चा करेंगे. बताया जा रहा है कि इस दौरान वे किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और पार्टी की नीतियों को साझा करेंगे. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राहुल गांधी दोपहर 3:35 बजे जवाहर चौक से एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे. वे शाम 4 बजे भोपाल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और 4:15 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे. यह दौरा आगामी राजनीतिक रणनीति और किसानों से बातचीत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर पर संपर्क मजबूत करने का प्रयास करेगा. राहुल-खड़गे के साथ मंच पर 250 नेता बैठेंगे मंच पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ करीब 250 नेता बैठेंगे। इनमें एमपी कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, कांग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट के नेशनल चेयरमैन पवन खेड़ा भी रहेंगे। साथ ही पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, एमपी के सभी कांग्रेस विधायक, तीनों राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, अशोक सिंह, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के मेंबर और सभी 71 जिला कांग्रेस अध्यक्ष बैठेंगे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सीईसी मेंबर भी शामिल होंगे। तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग जुटेंगे: पटवारी मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- देश के हर किसान को चाहे वह भाजपा की विचारधारा को एक्सेप्ट करता हो, लेकिन जो किसान खेती से जुड़ा है। उसे ये एहसास हो गया है कि नरेंद्र मोदी ने दबाव में आकर ट्रेड डील की है। उसी का असर है कि तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग भोपाल आ रहे हैं। 21 फरवरी को यह तय हुआ कि 24 को भोपाल में चौपाल होगी। उसमें लाखों की तादाद में लोग आएंगे। भोपाल की सड़कें पट जाएंगी। ये अपने आप में मैसेज है कि ये ट्रेड डील देश विरोधी, किसान विरोधी है। नरेंद्र मोदी दबे हुए हैं। उन्होंने कंप्रोमाइज किया है। दुनिया भर में चल रही सेक्स फाइल का भी इस डील पर असर पड़ा है। यह कोई इल्जाम नहीं है। ट्रम्प ने एक बार कहा था कि मैं नरेंद्र मोदी का पॉलिटिकल करियर खत्म नहीं करना चाहता। यह हमारे देश की बेइज्जती है। PM का अपमान होगा तो हर भारतवासी को गुस्सा आएगा जीतू पटवारी ने कहा- आखिर नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं। उनके खिलाफ विदेश का कोई राष्ट्राध्यक्ष इस तरह की बात करता है तो भारत के हर नागरिक को गुस्सा आएगा, लेकिन सवाल यह है कि इस पर नरेंद्र मोदी ने कोई बयान क्यों नहीं दिया। इस ट्रेड डील से किसानों की गर्दन ट्रम्प की तलवार पर रख दी गई है। ट्रेड डील से एमपी के 70 फीसदी किसान प्रभावित जीतू पटवारी ने कहा- राहुल जी और खड़गे जी को धन्यवाद। इस ट्रेड डील से सबसे ज्यादा किसान अगर कहीं प्रभावित हुए हैं तो मप्र में हुए हैं। सोयाबीन उत्पादक किसान सबसे ज्यादा हमारे यहां के हैं। हम सोया स्टेट थे। कपास, मक्का सबसे ज्यादा यहां पैदा होते हैं। 70% किसान इससे प्रभावित हैं तो उन्होंने मप्र को सबसे पहले चुना। मेरी और उनकी आपस में बात हुई। पार्टी ने निर्णय लिया और अब हम किसान की लड़ाई लड़ेंगे। शहरभर में रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन कार्यक्रम के दौरान जवाहर चौक और आसपास के मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। डिपो चौराहा से पीएनटी या पॉलिटेक्निक चौराहा होकर आवागमन किया जा सकेगा। प्लेटिनम चौराहा से आने वाले वाहन माता मंदिर या टीटी नगर मार्ग का उपयोग करेंगे। रंगमहल से आने वाले वाहन बाणगंगा या माता मंदिर मार्ग से गुजरेंगे। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को कंट्रोल रूम तिराहा, पीएचक्यू, लिली टॉकीज, तलेया, भारत टॉकीज, हमीदिया रोड और लालघाटी होकर जाने की सलाह दी गई है, ताकि किसी प्रकार की देरी से बचा जा सके। दिक्कत होने पर करें संपर्क पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करें और अनावश्यक रूप से कार्यक्रम स्थल के आसपास न जाएं। किसी भी असुविधा की स्थिति में यातायात कंट्रोल रूम के नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है।  शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से करेंगे लड़ाई की शुरुआत जीतू पटवारी ने कहा- यहां के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान देश के कृषि मंत्री हैं। जब अमेरिका के कृषि मंत्री का बयान आया तो उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को बहुत साधुवाद वो विश्व के ऐसे नेता हैं कि जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारत के किसानों को बचा लिया। क्या भारत के किसानों की कोई गर्दन पकड़कर हत्या कर रहा था? अगर बचा लिया तो जीरो प्रतिशत टैरिफ के एग्रीकल्चर प्रोडक्शन आएगा। 18% टैरिफ पर यहां से अमेरिका जाएंगे। हम विदिशा, बुधनी से यह किसान संवाद यात्रा शुरू करेंगे। प्रदेश का हर नेता कार्यकर्ता इसे आगे लेकर जाएंगे। जैसे नरेंद्र मोदी को तीन काले कानून वापस लेने पडे़ थे। वैसे ही ये ट्रेड डील भी वापस लेना पड़ेगी।

फॉर्मूला 1 की भारत वापसी की तैयारी, बुद्ध सर्किट पर अडानी ग्रुप का बड़ा प्लान

 नई दिल्ली Indian Grand Prix- Formula One: भारत को मोटरस्पोर्ट की ग्लोबल पहचान दिलाने वाला बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) एक बार फिर चर्चा में है. वजह है अडानी ग्रुप की दिलचस्पी और भारत में फॉर्मूला 1 रेस की संभावित वापसी. दुनिया के सबसे बेहतरीन फार्मूला वन रेस ट्रैक्स में से एक बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को लेकर अडानी ग्रुप नई रणनीति पर काम कर रहा है. यह जानकारी अडानी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी करण अडानी ने दी है. उन्होंने साफ कहा है कि भारत में F1 को दोबारा लाने को लेकर वे व्यक्तिगत रूप से काफी उत्साहित और एक्टिव हैं. अडानी ग्रुप इस समय बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का अधिग्रहण करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय खेल मंत्री मंसुख मांडविया ने हाल ही में सर्किट का दौरा किया और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से बातचीत की. इससे सरकार की दिलचस्पी भी साफ नजर आती है. वहीं देश की राजधानी में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 70वें स्थापना दिवस समारोह में करण अडानी ने कहा कि बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट इस पूरे सौदे का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि भारत में फॉर्मूला 1 के चाहने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है और देश में इस खेल की जबरदस्त संभावनाएं हैं. बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) का मालिकाना हक जेपी ग्रुप के पास है. दुनिया भर में फॉर्मूला वन रेस के जरिए भारत को ग्लोबल पहचान दिलाने वाले इस सर्किट को विशेष रूप से जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड ने बनाया था. यह सर्किट भारत में फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा. हालांकि, समय के साथ जेपी ग्रुप फाइनेंशियल क्राइसिस में फंस गया. बकाया पेमेंट न हो पाने के कारण साल 2019 के आसपास इस जमीन को यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने अपने अधीन ले लिया.  अब इस पूरे मामले में अडानी ग्रुप एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है. अडानी ग्रुप, जेपी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी, मुश्किल में फंसी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) को खरीदने की दौड़ में है. नवंबर 2025 में, अडानी ग्रुप ने कर्ज़ में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने के लिए ज़्यादातर लेंडर्स का वोट जीता, क्योंकि उसके 14,535 करोड़ रुपये के एक्विजिशन प्रपोज़ल में दूसरे बिडर्स की तुलना में ज़्यादा अपफ्रंट पेमेंट शामिल था. जिसके चलते अडानी ग्रुप को अधिकांश कर्जदाताओं का सपोर्ट मिला. माना जा रहा है कि इस डील से बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट से जुड़ी तस्वीर भी आने वाले समय में बदल सकती है. करण अडानी का कहना है कि "वे साल 2000 से इस खेल को करीब से देख रहे हैं और उनका मानना है कि भारत फॉर्मूला 1 जैसे ग्लोबल स्पोर्ट इवेंट्स के लिए एक नया स्टैंडर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि, यह केवल 3 दिन की रेस नहीं है बल्कि भारत को एक ग्लोबल पहचान देने वाला स्पोर्ट है. भारत न केवल इसे सफलतापूर्वक आयोजित करत सकता है बल्कि बाकि दुनिया के लिए एक उदाहरण भी बन सकता है." जब मायावती ने दी ट्रॉफी बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट ने 2011 से 2013 तक फॉर्मूला 1 इंडियन ग्रां प्री की मेजबानी की थी. उस समय ट्रैक और फीचर्स की दुनिया भर में तारीफ हुई थी. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार की टैक्स पॉलिसी के कारण F1 को मनोरंजन की श्रेणी में रखा गया, जिसके बाद यह रेस बंद हो गई. साल 2011 में जब भारत में पहली फॉर्मूला वन रेस हुई थी उस वक्त प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) की सरकार थी. उस वक्त मुख्यमंत्री मायावती ने पहले इंडिन ग्रां प्री (India Grand Prix) के विजेता रेडबुल टीम के रेसर सेबेस्टियन वेट्टेल (Sebastian Vettel) को जीत ट्रॉफी सौंपी थी. सेबेस्टियन ने रेड बुल रेसिंग के लिए सभी तीनों एडिशन को जीता था. रेसिंग की दुनिया ने 2023 में फिर से बुद्ध सर्किट पर कदम रखा, जब MotoGP ने भारत में डेब्यू किया. हालांकि 3 साल के एग्रीमेंट के बावजूद मोटोजीपी अभी दोबारा भारत नहीं लौट सका है. ऐसे में  F1 को भारत में वापस लाना आसान नहीं होगा. मौजूदा समय में एक रेस की मेजबानी फीस 70 से 150 मिलियन डॉलर तक बताई जाती है. दुनिया भर के कई सर्किट पहले से ही फार्मूला वन कैलेंडर में जगह बनोन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.  दिसंबर 2025 में फार्मूला वन की तरफ से एक बयान जारी किया गया था. जिसमें बताया गया कि,  भारत में फार्मूला वन के तकरीबन 7.9 करोड़ से ज्यादा फैंस हैं. खैर अभी इस बारे में कुछ भी कह पाना थोड़ा मुश्किल है, भारत में F1 की वापसी हो पाएगी या नहीं. अगर अडानी ग्रुप का अधिग्रहण पूरा होता है और सरकार का मजबूत सहयोग मिलता है, तो आने वाले वर्षों में भारत में फिर से एफ1 की रफ्तार देखने को मिल सकती है.

ASI रिपोर्ट ने खोला भोजशाला का राज, मंदिर के अस्तित्व के सबूत मिले कमाल मौला मस्जिद में

धार  मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला परिसर में मौजूद कमाल मौला मस्जिद को लेकर बड़ी खबर है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला है कि इस मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था. एएसआई के अनुसार यह निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण, खुदाई, प्राप्त अवशेषों के अध्ययन, स्थापत्य संरचनाओं, शिलालेखों, कला और मूर्तियों के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है. एएसआई की यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सौंपी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ढांचा सदियों बाद बनाया गया, जिसमें समरूपता, डिजाइन और स्थापत्य संतुलन का विशेष ध्यान नहीं रखा गया. सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने निर्देश दिया कि एएसआई की रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जाए. साथ ही, सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव और राय दाखिल करने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. ASI की रिपोर्ट में क्या-क्या? करीब 2,000 पन्नों की यह रिपोर्ट 10 खंडों में तैयार की गई है, जिसका नेतृत्व एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने किया. 98 दिनों तक चले सर्वेक्षण में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया. खुदाई के दौरान कुल 94 मूर्तियां और उनके अवशेष मिले, जिनमें से कई को क्षतिग्रस्त किया गया था. इनमें गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव सहित कई देवी-देवताओं, मानव और पशु आकृतियों की नक्काशी पाई गई. एएसआई ने संकेत दिया है कि यह स्थल संभवतः देवी सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन मंदिर रहा होगा. ASI के मुताबिक, यह स्थल देवी सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन मंदिर रहा होगा. ‘हिंदू समाज के लिए उत्साहजनक यह रिपोर्ट’  रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने कहा कि एएसआई का सर्वे स्पष्ट रूप से बताता है कि यह संपूर्ण संरचना परमार वंश काल की है और इसका निर्माण राजा भोज और उनके पूर्वजों द्वारा कराया गया था. उन्होंने दावा किया कि यह ढांचा लगभग 950 से 1,000 वर्ष पुराना है और यह रिपोर्ट हिंदू समाज के लिए उत्साहजनक है. एक अन्य याचिकाकर्ता भोज उत्सव समिति के संयोजक अशोक जैन ने कहा कि उनकी मांग शुरू से स्पष्ट रही है. यदि यह स्थल मस्जिद है तो उसे मुस्लिम पक्ष को दिया जाए और यदि यह मंदिर है तो हिंदू पक्ष को. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट से यह साबित होता है कि बाद में बने ढांचों में पुराने भोजशाला मंदिर के अवशेषों को तोड़कर इस्तेमाल किया गया.

बजट का बड़ा दांव: गुजरात को 29 गुना ज्यादा फंड, 2027 में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात को केंद्रीय बजट में रेल इंफ्रा को मजबूत करने के लिए 29 गुना अधिक धनराशि मिली है। भारतीय रेलवे में रिकॉर्ड आवंटन से विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। गुजरात के रेल बजट में 17,366 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन मिला है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के दौड़ने की तारीख का पहले ही ऐलान कर चुके हैं। गुजरात में 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन चलेगी। 2027 गुजरात के लिए चुनावी साल है। इसी वर्ष के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव भी होंगे। गुजरात को मिले 17,366 करोड़ रेलवे ने बजट में मिली 29 गुना धनराशि कहां पर खर्च की जाएगी। इसकी जानकारी साझा की है। यह धनरशि मोटे तौर पर सुरक्षा, बुलेट ट्रेन और आधुनिक स्टेशनों से गुजरात में रेल परिवहन का नया युग लेने जाने पर खर्च की जाएगी। रेलवे के अनुसार गुजरात को कुल 17,366 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।यह धनराशि साल 2009–14 के मुकाबले 29 गुना है। तब गुजरात के लिए औसत वार्षिक रेल बजट आवंटन 589 करोड़ रुपये था, जो अब 2026–27 में बढ़कर 17,366 करोड़ रुपये हो गया है। रेलवे के अनुसार गुजरात में वर्तमान में 1,28,748 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा प्रमुख सुरक्षा उन्नयन शामिल हैं। रेल नेटवर्क मजबूत करने पर फोकस पश्चिम रेलवे के अनुसार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पंजाब को जोड़ता है। सूरत में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर को जोड़ा जाएगा तथा वहां एक महत्वपूर्ण जंक्शन विकसित किया जाएगा। यह पूर्व–पश्चिम कॉरिडोर गुजरात के पश्चिमी तट के बंदरगाहों को देश के विभिन्न राज्यों से जोड़ेगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। 100 फीसदी इलेक्ट्रीफिकेशन गुजरात ने 100% रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। राज्य में 87 स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (हाई स्पीड रेल) परियोजना तीव्र गति से प्रगति कर रही है। दूसरी सुरंग की ब्रेकथ्रू प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण होगी तथा व्यावसायिक संचालन अगले वर्ष प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके अलावा अमृत स्टेशन योजना के तहत गुजरात के 87 रेलवे स्टेशनों को 6,058 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक पुनर्विकास हेतु चिन्हित किया गया है। इनमें से 19 स्टेशनों- सामाख्याली, डाकोर, हापा, जाम जोधपुर, मोरबी, ओखा, पालीताना और पोरबंदर सहित का पुनर्विकास कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे यात्री सुविधाओं और स्टेशनों की सौंदर्यात्मक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अभी दौड़ रही 6 वंदे भारत एक्सप्रेस गुजरात में अभी 6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। गुजरात के पास अभी 1 अमृत भारत एक्सप्रेस और एक नमो भारत एक्सप्रेस ट्रेन है। गुजरात में 2014 के बाद से गुजरात के रेलवे नेटवर्क का तीव्र विस्तार हुआ है। लगभग 2,900 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं, जो कई यूरोपीय देशों के कुल रेल नेटवर्क से अधिक है। राज्य में 4,005 किलोमीटर रेल मार्गों का 100% विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, जिससे हरित और ऊर्जा-कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है। 1,177 फ्लाईओवर का निर्माण रेलवे के अनुसार इस सब के अलावा लेवल क्रॉसिंग समाप्त करने के उद्देश्य से 1,177 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं, जिससे सुरक्षा में वृद्धि और सड़क-रेल यातायात में सुगमता आई है। रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे गुजरात में स्वदेशी ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रहा है। स्वीकृत 1,842 रूट किलोमीटर में से 96 रूट किलोमीटर पर ‘कवच’ स्थापित किया जा चुका है, जबकि 1,674 रूट किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है। यह रेल सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण उन्नति को दर्शाता है।

इलाज के लिए उड़ान बनी आखिरी सफर: आग में झुलसे संजय और एयर एम्बुलेंस हादसे का सच

  रांची झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के केंदू कसारी स्थित करम टॉड़ के घने जंगल में रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. ये एयर एम्बुलेंस एक हादसे में झुलसे मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए रांची से दिल्ली लेकर जा रही थी. परिवार के सदस्यों ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह पर संतोष को दिल्ली ले जाने के लिए लोन लेकर 8 लाख रुपये में एयर एम्बुलेंस बुक की थी. जानकारी के अनुसार, संजय कुमार चंदवा कस्बे में एक छोटा-सा रेस्टोरेंट चलाते थे. सोमवार को होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में वे गंभीर रूप से झुलस गए थे (करीब 63-65 प्रतिशत). उनका इलाज पहले रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने परिवार के सदस्यों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह दी और उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया था. लोन लेकर बुक की एयर एम्बुलेंस इसके बाद बेहतर इलाज की आस में परिवार ने करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एम्बुलेंस बुक की थी. इसके लिए परिवार ने लोन और अपने रिश्तेदारों से कर्ज लिया, ताकि संजय को तुरंत दिल्ली पहुंचाया जा सके. लेकिन एयर एम्बुलेंस उड़ान के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया. तेज हवाओं और खराब विजिबिलिटी के कारण विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के घने जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला और सभी की मौके पर ही मौत हो गई. एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत इस हादसे ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान छीन ली. मृतकों में मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी बसंती देवी और उनका भांजा ध्रुव शामिल हैं. इनके अलावा विमान के पायलट स्वराज दीप सिंह, सह-पायलट विवेक, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा ने भी अपनी जान गंवा दी. परिवार के सदस्यों की अचानक हुई इस मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इलाके के लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि संजय का परिवार बेहद गरीब पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है और ये रकम कर्ज पर ली गई थी, जिसमें इलाज के लिए पहले से भी लाखों रुपये कर्ज में थे. खबर से मिली हादसे की जानकारी परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें इस हादसे की जानकारी खबरों से मिली. उन्होंने बताया कि रांची एयरपोर्ट से एयर एम्बुलेंस के उड़ा भरने के बाद वो लोग अपने घर आ गए थे और थोड़ी देर बाद विमान में मौजूद अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया तो उनका फोन नहीं मिला. इसके कुछ देर बाद ही उन लोगों को एक प्लेन के क्रैश होने की खबर मिली तो उनकी चिंताएं बढ़ गई. उन्होंने बताया कि बाद में हम लोगों ने प्रशासन से संपर्क किया तो पता चला कि हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई.  ATC से टूटा संपर्क प्राप्त जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम करीब 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी, लेकिन खराब मौसम (तेज हवाएं और कम विजिबिलिटी) के कारण रूट डायवर्ट करने की कोशिश में 23 मिनट बाद ही ATC से संपर्क टूट गया. विमान चतरा के दुर्गम जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला. हादसे की जानकारी मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और एसएसबी 35वीं बटालियन के जवान तुरंत हरकत में आए. विमान सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर घने और दुर्गम जंगल में गिरा था, जिससे राहत कार्य में भारी मुश्किलें आईं. जवानों को मलबे से शवों को निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. रेस्क्यू टीम ने सभी शवों को अपने कंधों पर उठाकर चार किलोमीटर पैदल दूरी तय की और फिर एंबुलेंस के जरिए उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया. 6000 फुट ऊंचाई पर जाते ही पायलट को हो गया था अंदेशा कोलकाता से संपर्क होने के बाद, विमान ने खराब मौसम की वजह से अपना रास्ता बदलने (deviation) का अनुरोध किया था. इसके बाद, शाम 7:34 बजे वाराणसी से लगभग 100 NM दक्षिण-पूर्व में विमान का कोलकाता कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया और वो रडार से भी गायब हो गया. जानकारी के मुताबिक, IMD ने इस इलाके में पहले ही बिजली गिरने और मौसम खराब रहने का अलर्ट जारी किया था. दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी एविएशन मिनिस्ट्री डीसी कीर्तिश्री जी ने एयर एम्बुलेंस हादसे की वजह तूफान बताई. उन्होंने कहा, 'तूफान के कारण ये हादसा हुआ. डॉक्टरों की टीम ने मृतकों की संख्या 7 बताई. इनमें से दो क्रू मेंबर्स थे और बाकी पांच में एक मरीज और उसके परिवार के सदस्य थे. एविएशन मिनिस्ट्री की टीम कल दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी ताकि ब्लैक बॉक्स की पहचान की जा सके और आगे की जांच शुरू की जा सके.' बता दें कि AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की टीम आज दिल्ली स्थित रेडबर्ड एविएशन कार्यालय का दौरा करेगी. टीम यहां रेडबर्ड और क्रैश हुए प्लेन से जुड़े दस्तावेज हासिल कर सकती है. SSB के सेकंड इन कमांड ने सुनाया आंखों देखा हाल SSB के सेकंड इन कमांड रमेश कुमार ने हादसे की पूरी कहानी सुनाई है. उन्होंने बताया, 'हमें सूचना मिली थी कि एक प्लेन क्रैश हो गया है. ये इलाका काफी अंदरूनी है. यहां दो किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है. जब हम रात में यहां पहुंचे, तो हमने देखा कि कोई भी जिंदा नहीं है. शवों को निकालना बहुत मुश्किल था. हमें उन्हें यहां से दो किलोमीटर तक एक तरफ ले जाना पड़ा.' कुमार ने आगे बताया कि उनकी टीम के पास सिर्फ एक स्ट्रेचर था, जो वो एसएसबी से अपने साथ लाए थे. उन्होंने बताया कि प्लेन जंगल के बीचोंबीच क्रैश हुआ था और मेन सड़क यहां से दो किलोमीटर दूर थी. यहां रात में लोगों को निकालना और बचाना उनके लिए काफी मुश्किल रहा.