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छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक दिन: बस्तर में 280 जोड़े बने हमसफ़र, सिटी ग्राउंड में बना विश्व कीर्तिमान

जगदलपुर बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर का प्रतिष्ठित सिटी ग्राउंड मंगलवार 10 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य नजारे का गवाह बना, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 280 जोड़ों ने एक ही मंडप के नीचे अपने नव-दाम्पत्य जीवन की सामूहिक शुरुआत की। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह ने उस वक्त और भी गौरव हासिल कर लिया, जब पूरे प्रदेश में एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसी कड़ी में जगदलपुर का यह आयोजन अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समारोह का आगाज एक भव्य बारात के साथ हुआ, जिसमें 280 वरों के साथ उनकी माताएं हाथों में कलश और दीप लेकर परंपरा अनुसार चल रही थीं। बस्तर की पारंपरिक बाजा मोहरी की सुमधुर स्वर लहरियों के बीच निकली इस बारात ने पूरे शहर को उल्लास से भर दिया। विवाह मंडप में हरिद्रालेपन, सप्तपदी और जयमाला जैसी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं और हवन से उठने वाले सुगंधित द्रव्यों ने समूचे वातावरण को महका दिया। नव-वधुओं ने वरों के साथ एकसूत्र में बंधकर नए जीवन का संकल्प लिया, जिससे सिटी ग्राउंड का माहौल अत्यंत भावुक और उत्साहजनक हो गया। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर नव विवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना गरीब माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि पूर्व में निर्धन परिवारों को बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए अपनी संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ती थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में इस जिम्मेदारी को उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2005 में मात्र 5 हजार रुपये की सहायता राशि से शुरू हुई यह योजना आज 50 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है, जो गरीब परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने, जिनमें महापौर श्री संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी और जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री पदलाम नाग शामिल थे। इन सभी ने नव-दंपत्तियों को सुखमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर सुश्री नंदिनी साहू, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री मनोज सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी में यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर किया नमन मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में की पुष्पांजलि अर्पित विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने भी किया स्मरण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती पर विधानसभा परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। विधायक  रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री  पी.सी. शर्मा, पूर्व विधायक  सुदर्शन गुप्ता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल के परिजन ने भी चित्र पर पुष्पांजलि की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 10 फरवरी 1930 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे  राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, वर्ष 1985 से 1990 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पदयात्राओं के माध्यम से जन जागरण का कार्य किया। लोकप्रिय जन नेता रहे  शुक्ल राज्य सरकार में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद, उन्होंने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने 'असंसदीय अभिव्यक्तियां' नामक पुस्तक की संकल्पना की, जो विधायी कामकाज पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उन्होंने संसदीय मामलों सहित कई पुस्तक लिखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे व्यक्तित्वों की जयंती और पुण्यतिथि पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण करने की परंपरा स्थापित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष  तोमर की सराहना करते हुए उनका आभार माना।  

मस्क और जकरबर्ग की तस्वीरें सामने आईं, एपस्टीन की ‘Wild’ पार्टी में थे शामिल

वाशिंगटन  जेफरी एपस्टीन मामले में हर दिन कोई ना कोई नया खुलासा हो रहा है. एक नई फोटो सामने आई है, जिसमें जेफरी एपस्टीन की लैविश डिनर पार्टी में एलॉन मस्क और मार्क जकरबर्ग नजर आए हैं. ये तस्वीर उस वक्त की है, जब जेफरी एपस्टीन यौन अपराध में दोषी साबित हो चुका था. यानी मस्क और मार्क ये जानते हुए पार्टी में शामिल हुए थे कि जेफरी किस तरह के काम में शामिल था. एपस्टीन ने बाद में दावा किया था कि इस पार्टी में LinkedIn को-फाउंडर रीड हॉफमैन और PayPal को-फाउंडर पीटर थिएल भी शामिल हुए थे. एक अन्य मेल में इस पार्टी को 'वाइल्ड' बताया गया था.  सामने आई तस्वीर में मस्क और जकरबर्ग एक साथ टेबल पर बैठे दिख रहे हैं. टेस्ला और SpaceX के CEO एलॉन मस्क कैमरा पर्सन की ओर देख रहे हैं, जो संभवतः एपस्टीन ने ही क्लिक की हो. वहीं तस्वीर में जकरबर्ग भी हैं, जो थोड़े सीरियस दिख रहे हैं.  मस्क ने क्या किया था दावा? जेफरी ने ये तस्वीर खुद को ही 3 अगस्त 2015 को भेजी थी. इस तस्वीर के आने के बाद इसलिए भी हंगामा मचा है क्योंकि मस्क ने दावा किया था कि वो कभी-भी जेफरी एपस्टीन की पार्टियों का हिस्सा नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं मस्क ने जेफरी के साथ क्राइम करने वालों पर भी मुकदमा चलाने की बात कही थी.  मस्क ने इस बारे में 31 जनवरी को ट्वीट किया था. एपस्टीन की पार्टियों में सिर्फ एलॉन मस्क या मार्क जकरबर्ग नहीं बल्कि कई दूसरे बड़े चेहरे भी दिख चुके हैं. यहां तक की माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी इन पार्टियों का हिस्सा थे और उन्होंने शादी से बाहर भी लड़कियों से संबंध बनाया था. बिल गेट्स का नाम भी आया है सामने एपस्टीन फाइल्स की मानें तो बिल गेट्स रूसी लड़कियों से मिले थे. इसमें STD का जिक्र भी मिलता है. एक नोट में लिखा है कि एपस्टीन ने गेट्स के लिए दवाओं का इंतजाम किया था, जिससे उन्हें संबंध बनाने के बाद होने किसी बीमारी का सामना ना करना पड़े.  गेट्स के अलावा गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में सामने आया है. डॉक्यूमेंट्स की मानें तो ब्रिन ने एपस्टीन के प्राइवेट आईलैंड का दौरा किया था, जहां उन्होंने घिसलेन मैक्सवेल से मुलाकात की थी. 2003 में भेजे एक ईमेल में मैक्सवेल ने डिनर को सामान्य और आरामदायक बताया था.

वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण में बड़ा कदम: एमपी की 1,178 संपत्तियां बाहर, 24,696 दावे खारिज

भोपाल  वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्तियां नहीं माना गया है। अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने जून में 'उम्मीद' पोर्टल शुरू कर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 5,82,541 का विवरण अपलोड किया जा चुका है। 1. डीड या घोषणा का अभाव यदि किसी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। 2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो  3. स्वामित्व विवाद यदि संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर 4. डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना 5. अधूरी जानकारी पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया? अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी दावों पर रोक लगाने और वक्फ संपतियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इंदौर में गंदे पानी से मौतें जारी, बच्ची और बुजुर्ग की जान गई; आंकड़ा 35 हुआ

इंदौर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बस्ती में दो लोगों की मौत हो गई। इनमें दो साल की बच्ची रिया भी शामिल है। इसके अलावा 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर की भी जान चली गई। उन्हें सात दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के चलते निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।   परिजनों का कहना है कि उन्हें लकवे की शिकायत थी, अन्य कोई बीमारी नहीं थी। उधर दो वर्षीय रिया प्रजापति को भी दिसंबर में उल्टी दस्त की शिकायत के चलते भर्ती किया गया था। बाद में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि बीमार होने के कारण रिया काफी कमजोर हो गई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उसे लीवर की शिकायत थी।  बच्ची ने इलाज के दौरान तोड़ा दम परिजनों के मुताबिक, बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर चाचा नेहरू अस्पताल में दाखिल किया गया था। वहां इलाज में फायदा नहीं होने पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दाखिल किया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इधर, 75 वर्षीय शालिग्राम के परिजनों ने बताया कि दो जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण शैल्बी अस्पताल में रेफर किया गया था। वहां से उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर पर ही थे। करीब 12 दिन पहले उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। फिलहाल दोनों मौतों को मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से नहीं की है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों को दूसरी बीमारियां भी थीं। बता दें कि अब तक 35 मौतें दूषित पानी के कारण हो चुकी हैं। कोर्ट ने अफसरों ने 16 लोगों की मौत डायरिया की वजह मानी है। आयोग ने जांच शुरू की इंदौर भागीरथपुरा में दूषित जल से 35 मौतें और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा गठित आयोग की जांच शुरू हो गई है। आयोग के समक्ष रहवासी या अन्य व्यक्ति शिकायत और आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। उच्च न्यायालय ने भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल प्रदूषण तथा उससे जनस्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है। आयोग द्वारा जल प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई, जनहानि, चिकित्सकीय प्रभाव तथा सुधारात्मक उपायों की जांच की जाएगी। आयोग ने इसे लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसके तहत भागीरथपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रभावित नागरिक, परिजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, अस्पताल, सामाजिक संगठन, ठेकेदार, शासकीय अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति, जिनके पास प्रकरण से संबंधित जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध हों, वह आयोग के सामने पेश कर सकता है। साथ ही पेयजल प्रदूषण से संबंधित शिकायतें या आवेदन, चिकित्सकीय अभिलेख, अस्पताल में भर्ती होने की पर्चियां, डिस्चार्ज समरी, मृत्यु प्रमाण पत्र, जल पाइप लाइन में रिसाव, सीवरेज मिश्रण या क्षति से संबंधित फोटो/वीडियो, जल आपूर्ति से संबंधित टेंडर दस्तावेज, कार्य आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट या कोई अन्य सामग्री भी आयोग के कार्यालय स्कीम नंबर 140 आरसीएम 10, प्रथम मंजिल आनंद वन स्थित आयोग के कार्यालय में 28 फरवरी तक प्रस्तुत कर सकते हैं। बच्ची के लिवर में तकलीफ बताई गई थी 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट किया गया था। यहां उसके लिवर में तकलीफ बताई गई थी। इसके बाद उसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, जहां करीब 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि दूषित पानी के कारण ही तबीयत बिगड़ी। उसका असर लिवर तक हुआ। गुइलेन बैरे सिंड्रोम से जूझ रही महिला 57 वर्षीय एक महिला गंभीर जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से जूझ रही हैं। हालांकि इस मरीज को जीबीएस होने का स्वास्थ्य विभाग खंडन कर चुका है, लेकिन परिजन का कहना है कि इसी बीमारी के कारण उन्हें HDU (High Dependency Unit) में एडमिट किया गया है। दरअसल, दूषित पानी के कारण इस महिला की हालत 28 दिसंबर को बिगड़ी थी। पहले उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। इसके बाद 2 जनवरी को दूसरे बड़े हॉस्पिटल में रेफर किया गया। इस तरह करीब डेढ़ माह से इलाज चल रहा है। इस बीच हालत गंभीर होने पर 20 दिन से ज्यादा समय तक वह आईसीयू, वेंटिलेटर पर भी एडमिट रही। परिजन के मुताबिक, अभी ठीक होने में समय लगेगा। जीबीएस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी जीबीएस एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसका एक कारण गंदे पानी में पनपने वाला कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया भी है। बीमारी के तहत हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। यह गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) देखने में आता है। इसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है। इसमें 70% मरीज स्वस्थ हो पाते हैं। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मरीज सांस तक नहीं ले पाता है और वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है। ये क्या…12 किमी दूर जाकर करें शिकायत जिस भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों व बीमारी के मामले में जांच होनी है, उसका ऑफिस भागीरथपुरा से करीब 12 किलोमीटर दूर खोला गया है। प्रशासन द्वारा ऑफिस के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। पीडितों को शिकायत करने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी। भागीरथपुरा से स्कीम 140 तक का लंबा सफर चर्चा का विषय है। HC के आदेश पर बना आयोग कर रहा जांच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच के लिए एक आयोग बनाया गया है। इस आयोग के अध्यक्ष एमपी हाईकोर्ट के रिटायर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता हैं। आयोग किन पॉइंट्स पर जांच कर रहा?     पीने का पानी कैसे और क्यों प्रदूषित हुआ?     इसमें किस स्तर पर प्रशासन की लापरवाही हुई?     कौन-कौन लोग इसके जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?     लोगों की सेहत पर इसका क्या असर पड़ा?     कितनी जनहानि हुई?     भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं? इस मामले को लेकर आयोग ने सार्वजनिक सूचना भी … Read more

PAK ने बांग्लादेश के साथ डबल गेम खेला: पहले बायकॉट का शिकार बनाया, फिर खुद यू-टर्न लिया

 नई दिल्ली    भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का ताजा यू-टर्न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि उसकी विफल राजनीति की खुली स्वीकारोक्ति है. 2026 टी20 विश्व कप से पहले जिस बायकॉट की धमकी को सिद्धांत, स्वाभिमान और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर उछाला गया, वही अंततः पाकिस्तान की कमजोरी बन गई. मैच अब खेला जाएगा- बिना शर्त, बिना रियायत…. और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सच है. धमकी की शुरुआत, लेकिन दिशा विहीन PCB ने जिस आक्रामक भाषा में भारत के खिलाफ खेलने पर आपत्ति जताई, उसने शुरू से यह संकेत दे दिया था कि यह फैसला कम और दबाव की राजनीति ज्यादा है. सुरक्षा जैसे पुराने तर्क दोहराए गए, लेकिन कोई नई परिस्थिति, कोई नया खतरा या कोई ठोस रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई यह बायकॉट कोई अंतिम निर्णय नहीं था, बल्कि सौदेबाजी का औजार था और यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनी. सीधे टकराव से बचने की चाल भारत के खिलाफ सीधे खड़े होने की हिम्मत PCB में नहीं दिखी. इसकी बजाय बांग्लादेश की मांगों को आगे कर दिया गया, ताकि विवाद को क्षेत्रीय सहमति का रूप दिया जा सके. यह एक सोची-समझी रणनीति थी- खुद पीछे रहो, माहौल दूसरों के जरिए बनाओ और ICC पर दबाव डालो. … लेकिन यह चाल ज्यादा देर नहीं चल सकी. ICC के भीतर यह स्पष्ट हो गया कि बांग्लादेश का नाम केवल ढाल है, असली एजेंडा पाकिस्तान की अपनी राजनीतिक जिद है. बांग्लादेश के साथ 'डबल गेम' यही वह मोड़ था, जहां पाकिस्तान की राजनीति पूरी तरह बेनकाब हो गई.जिस बांग्लादेश को PCB ने बायकॉट की मुहिम में आगे किया, उसी को यू-टर्न के वक्त पूरी तरह किनारे कर दिया गया. न कोई साझा बयान, न कोई संयुक्त विरोध, न कोई नैतिक जिम्मेदारी.दबाव बनाने के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल हुआ, लेकिन जब ICC के सामने चाल नाकाम हुई, तो पाकिस्तान ने अकेले पीछे हटना बेहतर समझा. यह ‘साझा चिंता’ नहीं, बल्कि सुविधाजनक साझेदारी थी- काम निकलते ही खत्म. यहीं PCB का दोहरा चरित्र उजागर होता है.पहले बांग्लादेश को ढाल बनाना और फिर हालात बिगड़ते ही उसे मैदान में अकेला छोड़ देना. क्रिकेट नहीं, आर्थिक हकीकत ने तोड़ा भ्रम PCB शायद यह भूल बैठा कि आधुनिक क्रिकेट भावनाओं और नारों से नहीं चलता. भारत–पाक मुकाबला किसी भी ICC टूर्नामेंट की आर्थिक रीढ़ है. इस एक मैच से जुड़े प्रसारण अधिकार, विज्ञापन, प्रायोजन और वैश्विक दर्शक संख्या पूरे आयोजन की दिशा तय करते हैं. इस मैच के न होने से ICC को झटका जरूर लगता, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान को ही उठाना पड़ता- आर्थिक रूप से भी और क्रिकेटिंग प्रासंगिकता के लिहाज से भी. ICC के सामने नहीं चलीं शर्तें PCB की उम्मीद थी कि हाइब्रिड मॉडल, विशेष प्रावधान या राजनीतिक सहानुभूति के जरिए वह ICC को झुका लेगा. लेकिन परिषद ने इस बार साफ कर दिया कि टूर्नामेंट किसी एक बोर्ड की जिद से नहीं चलेगा. जब यह संदेश स्पष्ट हो गया कि न तो ढांचा बदलेगा और न ही भारत पर कोई दबाव बनेगा, PCB का सख्त रुख अचानक पिघल गया. भारत–पाक मैच खेलने पर सहमति बन गई, लेकिन यह सहमति किसी समझौते की जीत नहीं, बल्कि मजबूरी की स्वीकारोक्ति है. PCB न तो कोई शर्त मनवा सका, न किसी तरह की नैतिक या कूटनीतिक बढ़त हासिल कर पाया. जिस बायकॉट को ‘सिद्धांत’ बताया गया था, वह अंततः खोखली बयानबाजी साबित हुआ. … साख पर गहरा दाग इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान क्रिकेट की विश्वसनीयता को हुआ. बार-बार राजनीतिक दबाव की रणनीति अपनाकर PCB ने यह संदेश दिया कि वह क्रिकेट को खेल की बजाय मंच के रूप में इस्तेमाल करता है. इसका असर सिर्फ बोर्ड की छवि पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों, प्रशंसकों और अंतरराष्ट्रीय भरोसे पर भी पड़ता है. नतीजा पहले से तय था भारत-पाक मुकाबले को लेकर PCB की रणनीति हर मोर्चे पर विफल रही. बायकॉट की धमकी बेअसर रही, बांग्लादेश की आड़ बेनकाब हुई और ICC पर दबाव नहीं बन सका.अंततः वही हुआ, जो शुरू से तय था- मैच खेला जाएगा, नियम ICC तय करेगी और झुकना पाकिस्तान को ही पड़ा.

गोपाल भार्गव का बयान: दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में आने का दिया था ऑफर, 20 साल मन बांधा

भोपाल/सागर  मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक सम्मान को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इसकी वजह बने हैं भाजपा के कद्दावर नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव, जिनका सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान सियासी हलकों में दूर तक गूंज रहा है. सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोपाल भार्गव ने न सिर्फ अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी नेता को भीतर से तोड़ सकती है. उनके शब्दों में दर्द भी था और अनुभव की गंभीरता भी. जिस तरह उन्होंने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय को पार्टी और संगठन को समर्पित करने की बात कही, उसने यह संकेत दिया कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत असंतोष का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल है. गोपाल भार्गव बोले-मैं टिकाऊं, बिकाऊं नहीं  गोपाल भार्गव ने कहा 'राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है, कई बार सरकार में बात नहीं सुनी जाती तो भी मन टूट जाता है. उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने तो 20 साल संघर्ष किया है, अपनी मांगे रखता रहा, जूझता रहा. लेकिन जब सरकार नहीं मानती तो मन टूट जाता है. मैंने 20 साल मन को बांधे रखा, उस दौरान कई मंत्री यहां तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते थे कि गोपालजी बीजेपी में क्या रखा है, कुछ नहीं है, आप तो हमारे पास आ जाओ, मैं आपको किसी अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा, लेकिन तब मैंने भी कहा दिया था कि  राजा साहब एक बात कहता हूं, ये माल टिकाऊ है बिकाऊ नहीं है. मैं 20 साल विपक्ष में रहा, लेकिन यहां तो लोग 20 महीने में पलटी मार जाते हैं.  9 बार के अपराजेय विधायक गोपाल भार्गव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मोहन यादव सरकार की कैबिनेट को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं. वरिष्ठ होने के बावजूद मंत्री पद न मिलना और संगठनात्मक फैसलों में कथित अनदेखी, इन सभी बातों ने उनके शब्दों को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया है. जब उन्होंने कहा कि उन्होंने 20 साल तक कठिन परिस्थितियों में खुद को टिकाए रखा, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते, तो यह सिर्फ आत्मकथा नहीं थी, बल्कि वर्तमान राजनीतिक संस्कृति पर सीधा कटाक्ष था. यही वजह है कि उनका “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” वाला बयान अब सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में वैचारिक निष्ठा बनाम अवसरवाद की बहस का प्रतीक बन गया है. राजनीति में उपेक्षा का दर्द, अनुभव और योगदान की अनदेखी से गहरी हुई पीड़ा  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने साफ शब्दों में कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि की बात सरकार या संगठन नहीं सुनता, तो उसका मनोबल टूटता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपेक्षा किसी को भी भीतर से कमजोर कर सकती है. यह बयान उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिससे अक्सर लंबे समय तक सेवा देने वाले वरिष्ठ नेता गुजरते हैं. राजनीति में पद और प्रभाव भले बदलते रहते हों, लेकिन अनुभव और योगदान की अनदेखी गहरी पीड़ा पैदा करती है. भार्गव के शब्दों में यही पीड़ा झलकती है. “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” का सियासी संदेश गोपाल भार्गव के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया, जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव का जिक्र किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि वे बिकाऊ नहीं हैं. यह टिप्पणी सिर्फ एक घटना का जिक्र नहीं थी, बल्कि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी का सार्वजनिक ऐलान भी थी. भाजपा के भीतर इसे निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे संगठन के अंदर असंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहा है. पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया, अपेक्षित सम्मान नहीं  गोपाल भार्गव ने यह भी कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है. उन्होंने कई बार चुनाव जीते, संगठन को मजबूत किया और सरकार में रहते हुए अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई. इसके बावजूद जब अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता, तो पीड़ा स्वाभाविक है. उनका यह बयान भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं की आवाज बनता दिख रहा है, जो खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं. भाजपा में वरिष्ठता और अनुभव का सवाल गोपाल भार्गव का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वे रहली विधानसभा से लगातार विधायक चुने गए हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं. संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें भाजपा के मजबूत स्तंभों में शामिल करता है. जनता ने मेरा साथ दिया  गोपाल भार्गव ने कहा 'हमने उस दौरान बहुत कोशिश की है, जब हमारी सरकार आएंगी तो हमने अपने क्षेत्र का विकास करवाएंगे, इस दौरान जनता ने भी मेरा पूरा साथ दिया है, आज जनता के साथ होने से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं.' गोपाल भार्गव का यह बयान अहम माना जा रहा है, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक तरह से उन्होंने न केवल अपनी पीड़ा जाहिर की है, साथ ही यह भी बताया है कि वह पार्टी के प्रति हमेशा वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी से काम करते रहे हैं.  गोपाल भार्गव रिकॉर्ड 9वीं बार विधायक  गोपाल भार्गव वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा में सबसे सीनियर विधायक हैं, वह सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से लगातार 9वीं बार 2023 में विधायक चुने गए थे. वह 2003 से 2013 तक लगातार अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे, जबकि 15 महीने की कमलनाथ सरकार के दौरान वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं, इसके अलावा 2023 तक वह फिर से मंत्री रहे हैं, लेकिन नई सरकार में उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिली है. बीजेपी में गोपाल भार्गव के प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को अहम माना जाता है. ऐसे में उनका यह बयान फिलहाल चर्चा में बना हुआ है.   मोहन कैबिनेट से बाहर रहने की पीड़ा मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं मिला. इसके बाद से ही उनके … Read more

राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर साइन क्यों नहीं किया

 नई दिल्ली विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. अब विपक्षी ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंप दिया है. इसमें कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के करीब 120 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर साइन किए हैं. लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है और मंगलवार को वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर नहीं आए. अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किया है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को देखते हुए विपक्ष के नेता के द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करना ठीक नहीं है. विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. विपक्ष ने नोटिस में कहा है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सदस्यों पर साफ़ तौर पर झूठे आरोप लगे. अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर से TMC का इनकार संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार गतिरोध देखने को मिल रहा है. विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है. इसके चलते कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला से बेहद नाराज हैं. यही कारण है कि विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने जा रही है. हालांकि इस बार विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है. विपक्ष की सबसे प्रमुख पार्टियों में से एक तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल पहले क्‍यों किया जाए.  लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ जब पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है, तृणमूल कांग्रेस ने अलग रुख अपनाया है. टीएमसी ने स्‍पीकर के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. इसे लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सफाई दी है. स्‍पीकर को साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी: बनर्जी  उन्‍होंने एनडीटीवी से कहा कि हमारी राय में पहले विपक्ष को अपनी मांगों को लेकर स्पीकर को एक साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी और तीन दिनों का समय देना चाहिए था.  पहले ही ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल क्‍यों करें: बनर्जी  उन्‍होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो फिर तीन दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देना चाहिए था, तब टीएमसी भी इसमें साथ देती. उन्‍होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव आखिरी कदम है, पहले ही ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल क्यों करें. अभिषेक बनर्जी चाहे कोई भी तर्क दें, लेकिन इससे संदेश ठीक नहीं है. जानकार कहते हैं कि विपक्षी एकता की बात करने वाले इंडिया गठबंधन के दलों के बीच इस तरह की स्थिति बताती है कि ऐसे मतभेद सामूहिक प्रयासों को ही कमजोर करते हैं.  विपक्ष क्यों लेकर आई अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी नेताओं का आरोप है कि स्पीकर सदन में पक्षपाती रवैया अपनाते हैं। विपक्ष की आवाज को दबाया जाता है। प्रियंका गांधी ने कहा कि स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है। 'बहुत ही जरूरी कदम…' कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा रखा है. माननीय स्पीकर का पर्सनल सम्मान करते हुए भी, हम विपक्षी MPs को पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे उठाने का मौका लगातार न देने से दुखी और परेशान हैं. कई सालों के बाद, स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है. यह एक बहुत ही जरूरी कदम है."

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: 6,412 जोड़ें आज होंगे शादी के बंधन में, मुख्यमंत्री साय देंगे आशीर्वाद

रायपुर  छत्तीसगढ़ में 10 फरवरी को सामाजिक समरसता और जनकल्याण का बड़ा दृश्य देखने को मिलेगा. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 6,412 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधेंगे. राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देंगे. यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है. राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में सुबह 11 बजे से भव्य सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां 1,316 जोड़े विभिन्न धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करेंगे. कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अध्यक्षता करेंगे, जबकि उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे. बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद और राजनांदगांव जिलों के जोड़े ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ेंगे, जबकि अन्य जिलों में जिला मुख्यालयों पर सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएंगे. नवविवाहित जोड़ों को दिया जाएगा आर्थिक सहयोग योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 35 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी. इसके अलावा 15 हजार रुपये की उपहार सामग्री और विवाह आयोजन की अन्य व्यवस्थाएं भी सरकार द्वारा की जाएंगी. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है और सामाजिक गरिमा के साथ बेटियों का विवाह संभव हो पाता है. हर धर्म, हर समाज की होगी भागीदारी इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सामाजिक विविधता भी दिखाई देगी. कुल विवाहों में से 6,281 हिंदू रीति रिवाज से, 3 इस्लामिक रीति रिवाज से, 113 ईसाई रीति रिवाज से, 5 बौद्ध रीति रिवाज से कराए जाएंगे. इसके अलावा, 10 बैगा समुदाय के जोड़े भी इस कार्यक्रम में शादी के बंधन में बंधेंगे. यानी यह आयोजन सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी देगा. इन जिलों के जोड़े कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ेंगे इस कार्यक्रम से बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद और राजनांदगांव जिलों के जोड़े ऑनलाइन माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम से जुड़ेंगे। शेष जिलों में जिला मुख्यालयों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संबंधित प्रभारी मंत्री एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से राज्य शासन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर प्रदान कर रहा है। यह वृहद आयोजन सामाजिक समानता, समरसता एवं जनकल्याणकारी शासन के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है। कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का भी होगा शुभारंभ इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री “कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” का भी शुभारंभ करेंगे. पहले चरण में 6 माह से 52 माह आयु वर्ग के 40 हजार कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण सहायता दी जाएगी. इस अभियान की शुरुआत बस्तर संभाग के बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा जिलों से होगी. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का संदेश देती है. एक ही मंच पर हजारों जोड़ों का विवाह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच को दर्शाता है, वहीं कुपोषण मुक्त अभियान भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में अहम कदम है. छत्तीसगढ़ में 10 फरवरी का दिन सामाजिक उत्सव और जनहित योजनाओं के संगम के रूप में याद किया जाएगा.

MP में बर्फ पिघलने के बाद आएंगी सर्द हवाएं, तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी, ग्वालियर-चंबल में ठिठुरन

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड से फिलहाल थोड़ी राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन प्रदेश में तापमान बढ़ेगा और दिन में सर्दी का असर कम रहेगा। इस दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में करीब 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। हालांकि यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही पहाड़ी इलाकों में सक्रिय सिस्टम आगे बढ़ेगा और बर्फ पिघलने की प्रक्रिया तेज होगी, वैसे ही उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं एक बार फिर प्रदेश में ठंड बढ़ा देंगी। फरवरी महीने में मौसम का मिजाज बार-बार बदलता रहेगा। फिलहाल प्रदेश में बारिश की कोई संभावना नहीं है।  पहाड़ी इलाकों की बर्फ से बढ़ी एमपी में ठंड भोपाल के मौसम वैज्ञानिक डॉ अरुन शर्मा के मुताबिक, पहाड़ों के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन आगे बढ़ रहा है. जैसे ही यह सिस्टम कमजोर होगा और बर्फ पिघलेगी, उसके बाद उत्तर से ठंडी हवाएं फिर से प्रदेश में असर दिखाएंगी. इसी कारण फरवरी महीने में मौसम में बार-बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. अब धीरे-धीरे बढ़ेगा तापमान मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में सोमवार को दिनभर तेज धूप रही. इससे अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. हालांकि, रात और तड़के सुबह ठंड का असर अभी बना रहेगा, लेकिन पारा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ेगा. 13 से 15 फरवरी के बीच फिर बढ़ेगी ठंड एमपी के मौसम को लेकर मौसम विभाग का कहना है कि सिस्टम गुजरने के बाद 13, 14 और 15 फरवरी को तापमान में गिरावट आएगी. इस दौरान उत्तर से चलने वाली ठंडी हवाओं के कारण एक बार फिर ठिठुरन बढ़ सकती है. प्रदेश में कटनी का इलाका सबसे ठंडा, तापमान 5.9 दर्ज रविवार-सोमवार की रात प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया. जहां प्रदेश में सबसे ठंडा स्थान कटनी का करौंदी रहा, यहां तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा खजुराहो में तापमान 6.4 दर्ज हुआ तो शहडोल के कल्याणपुर में 6.6 डिग्री, पचमढ़ी में 7.4, अमरकंटक में 7.8 तक पारा दर्ज हुआ है.  बदलेगा मौसम मौसम वैज्ञानिक पांडे ने बताया, सिस्टम गुजरने और बर्फ पिघलने के बाद मौसम में फिर से बदलाव देखने को मिलेगा। 13, 14 और 15 फरवरी को तापमान में गिरावट होगी और ठंड का असर बढ़ जाएगी। उत्तर से ठंडी हवाओं का असर भी देखने को मिलेगा। 13 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, कटनी का करौंदी सबसे ठंडा रविवार-सोमवार की रात में प्रदेश के 13 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से कम रहा। प्रदेश का सबसे ठंडा कटनी का करौंदी रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.4 डिग्री, पचमढ़ी में 7.4 डिग्री, अमरकंटक में 7.8 डिग्री, दतिया में 8.1 डिग्री, रीवा में 8.3 डिग्री, राजगढ़ में 8.6 डिग्री, उमरिया में 8.8 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, मंडला में 9.4 डिग्री, मलाजखंड में 9.5 डिग्री और नौगांव में पारा 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा। पांच बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में सबसे कम 10.2 डिग्री, इंदौर में 11.2 डिग्री, ग्वालियर में 10.6 डिग्री, उज्जैन में 12.4 डिग्री और जबलपुर में 11.4 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों के मौसम का हाल  मध्यप्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में भोपाल का न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री, इंदौर में 11.2, ग्वालियर में 10.6, उज्जैन में 12.4 और जबलपुर में 11.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. अगले दो दिन का मौसम अनुमान एमपी में 11 फरवरी को दिन और रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगी. दिन में धूप तेज रहेगी. एमपी में 12 फरवरी को तापमान 3 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है. ठंड का असर मुख्य रूप से रात और सुबह के समय ही रहेगा.