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एमपी कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, 3 हजार से लेकर 5 हजार तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा

भोपाल  एमपी के कर्मचारियों, अधिकारियों को जल्द ही बड़ी सौगात मिलेगी। उनके वेतन में 5 हजार तक की बढ़ोत्तरी होगी। प्रदेश के शिक्षा विभाग के अमले को यह लाभ मिलेगा। विभाग के टीचर्स के साथ सहायक संचालक स्तर के अधिकारियों तक के वेतन में इजाफा होगा। चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) मिलने से उन्हें यह लाभ प्राप्त होगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया चौथे समयमान वेतनमान संबंधी प्रस्ताव अंतिम रूप से तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया है। शिक्षा विभाग में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके टीचर्स व अन्य संवर्गों को इसका लाभ मिलेगा। अनुमान के मुताबिक विभाग के करीब सवा लाख कर्मचारियों को चौथे समय मान वेतनमान का लाभ मिलेगा। ये सभी टीचर्स, कर्मचारी, अधिकारी पिछले 3 साल से इसका इंतजार कर रहे हैं। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार पात्र टीचर्स, हेड मास्टर, प्रिंसीपल व अन्य अधिकारियों को चौथा समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने का प्रस्ताव है। इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। शिक्षा विभाग के प्राइमरी, मिडिल व अन्य टीचर्स, लेक्चरर्स, प्रिंसीपल्स और सहायक संचालक स्तर के ऐसे अधिकारियों को चौथा समयमान वेतनमान मिलेगा जिनके विभाग में 35 साल पूरे हो चुके हैं। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती के लेक्चरर्स और प्रिंसीपल्स को यह लाभ मिल चुका है लेकिन पदोन्नत होकर आए टीचर्स और अन्य अधिकारी इससे वंचित हैं। कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर बताते हैं कि चतुर्थ समयमान लागू होने से टीचर्स को हर महीने कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ होगा। शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार चौथे समयमान वेतनमान से विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आएगा। कैबिनेट की अनुमति मिलते ही इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे। पात्र टीचर्स व अधिकारियों के वेतन में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेशम उत्पादन की बारीकियों को जाना और बुनकरों से किया संवाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को अपने असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के समीप स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र सुआलकुची का भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने 'सिल्क विलेज' के नाम से विख्यात सुआलकुची पहुँचकर रेशम उत्पादन की प्राचीन और पारंपरिक प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा और इस कला की बारीकियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। बुनकरों के कौशल से अभिभूत हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुआलकुची में बुनकरों के घरों और कार्यशालाओं का अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि किस तरह यहाँ की समृद्ध विरासत को सहेजते हुए लगभग हर घर में हाथकरघों (हैंडलूम) के माध्यम से कलाकृतियाँ उकेरी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुनकरों से सीधे संवाद कर उनके श्रम और शिल्प कौशल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ की पारंपरिक बुनाई तकनीक न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ रीढ़ भी है। 'पूर्व का मैनचेस्टर' है सुआलकुची उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित सुआलकुची को 'पूर्व का मैनचेस्टर' कहा जाता है। यह गाँव अपनी विशिष्ट रेशम बुनाई तकनीकों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार के रेशम मूगा (सुनहरा), पैट (हाथीदांत जैसा सफेद) और एरी (हल्का बेज) का उत्पादन किया जाता है, जो असम की मूल पहचान हैं। संग्रहालय और वस्त्र कला का अवलोकन भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बस्त्रा उद्यान' और 'आमार सुआलकुची' संग्रहालय का भी दौरा किया। संग्रहालय में प्रदर्शित हाथकरघा गतिविधियों और इस शिल्प के क्रमिक विकास की प्रदर्शनी ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने यहाँ तैयार होने वाले पारंपरिक परिधानों जैसे मेखला चादर, साड़ियाँ, कुर्ते और गमछे की निर्माण पद्धति को भी समझा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस भ्रमण का उद्देश्य अन्य राज्यों की श्रेष्ठ पारंपरिक कलाओं और कुटीर उद्योगों की कार्यप्रणाली को समझना और उनके अनुभवों से प्रदेश के शिल्प क्षेत्र को लाभान्वित करना है।  

मध्यप्रदेश से असम को दिये जायेंगे एक जोड़ा टाइगर और 6 मगरमच्छ

असम से आगामी 3 साल में 3 समूहों में आयेंगे 50 जंगली भैंस एक जोड़ा गेंडा और 3 कोबरा भी आयेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को गुवाहाटी प्रवास के दौरान असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान को लेकर चर्चा की। दोनों राज्यों के बीच में सहमति बनी कि असम से 50 जंगली भैंसे 3 समूहों में 3 साल में, गैंडे का एक जोड़ा और 3 कोबरा मध्यप्रदेश में लाये जायेंगे। इन्हें भोपाल के वन विहार में रखा जायेगा। मध्यप्रदेश इसके बदले में असम की मांग के अनुसार एक जोड़ा टाइगर और 6 मगरमच्छ देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में चीते के बाद अब भैंस पुनर्स्थापना से प्रदेश की जैव विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। यह प्रयास एक प्रजाति के संरक्षण के साथ ही प्रदेश के जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। सफल चीता पुनर्स्थापना के बाद जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना से राज्य के जैव विविधता संरक्षण क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ ही उन प्रजातियों की वापसी के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, जो कभी इस भूमि की पहचान हुआ करती थीं। मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी पिछले सौ वर्षों से भी अधिक समय पहले समाप्त हो चुकी थी। वर्तमान समय में देश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी ये हैं, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि कान्हा टाइगर रिज़र्व जंगली भैंसों के पुनःस्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है। अध्ययन में घास के मैदानों की गुणवत्ता, जल स्रोतों की उपलब्धता, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारकों का मूल्यांकन किया गया है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस संबंध में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) तथा भारत सरकार से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पुनर्स्थापन को चरणबद्ध और सुरक्षित ढंग से अंजाम दिया जाएगा। यह योजना दीर्घकालिक संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है।  

पंजाब सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, बदले गए अहम विभागों के प्रभार

चंडीगढ़ पंजाब सरकार एक बार फिर अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक इस बार कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को लोकल बॉडी (नगर निकाय) विभाग दिया गया है, जबकि डॉ. रवजोत सिंह को एनआरआई विभाग की कमान सौंपी गई है। माना जा रहा है कि ये बदलाव प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किए गए हैं। यह सातवीं बार है जब भगवंत मान सरकार ने अपने मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया है। आप सरकार के सत्ता में आने के बाद लगातार कई मंत्रियों के विभाग बदले गए या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया गया है। जुलाई 2025 में भी हुए थे बड़े बदलाव जुलाई 2025 में संजीव अरोड़ा को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था। उसी समय कुलदीप सिंह धालीवाल को कैबिनेट से हटाया गया और उनका एनआरआई विभाग अरोड़ा को सौंपा गया था। इससे पहले सितंबर 2024 में बड़ा फेरबदल हुआ था, जिसमें चेतन सिंह जौड़ामाजरा, बलकार सिंह,  ब्रह्म शंकर जिम्पा और अनमोल गगन मान जैसे चार मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह पांच नए चेहरों को मौका दिया गया था।   राजनीतिक समीकरण और उपचुनाव बने आधार इन बदलावों को मंत्रियों का आंतरिक प्रदर्शन और उपचुनावों के नतीजों से जुड़ा माना जा रहा है। तरुणप्रीत सिंह सोढ़ी के पास पहले उद्योग और वाणिज्य विभाग था, जिसे बाद में अरोड़ा को दे दिया गया। बदले में सोढ़ी को पर्यटन, संस्कृति, श्रम और पंचायत जैसे विभाग दिए गए। यह फेरबदल 2022 से लगातार चल रहे हैं, जब पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। अब तक 4–5 मंत्रियों को हटाकर नए विधायकों को मौका दिया जा चुका है, ताकि सरकार में संतुलन और ताजगी बनी रहे। 2027 चुनाव की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा बदलाव राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ये बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हैं। वहीं राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इन सभी बदलावों को मंजूरी दे दी है।  

भारतीय AI स्टार्टअप्स से पीएम मोदी का संवाद, कहा– तकनीक से आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर सुबह भारतीय एआई स्टार्टअप के साथ बैठक की। यह बैठक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले हुई है, जो कि अगले महीने भारत में होने वाला है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वह 12 एआई स्टार्टअप शामिल हुए हैं, जिन्होंने एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए क्वालिफाइड किया है और इसमें उन्होंने अपने विचार और कार्य के बारे में बताया। पीएम कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि यह स्टार्टअप हेल्थकेयर, बहुभाषी लार्ज लैग्वेज मॉडल, मटेरियल रिसर्च, डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग सिमुलेशन और अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने समाज में परिवर्तन लाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत अगले महीने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा, जिसके माध्यम से देश टेक्नोलॉजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही कहा कि भारत एआई का उपयोग करते हुए परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्टार्टअप और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं और कहा कि देश में इनोवेशन और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन दोनों की अपार क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा एआई मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए जो "मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड" की भावना को दर्शाता हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर दुनिया का भरोसा ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस कारण भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही कहा कि भारत किफायती एआई, समावेशी एआई और किफायती इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल विशिष्ट होने चाहिए और स्थानीय एवं स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाले हो। इस बैठक में अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, गैन, जेनलोप, ज्ञानी, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सॉकेट एआई, टेक महिंद्रा और जेंटिक सहित भारतीय एआई स्टार्टअप्स के सीईओ, प्रमुख और प्रतिनिधि शामिल हुए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में उपस्थित थे।

जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू, कई घरों वाले क्या करेंगे, जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली 7 जनवरी 2026 को केंद्रीय सरकार ने भारतीय जनगणना2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. ये दो चरणों में होगा. पहले चरण में 1 अप्रैल देशभर में मकानों को लिस्ट में दर्ज किया जाएगा. ये काम केंद्र सरकार के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त आफिस के जरिए होगा. इस सर्वे को लेकर कई सवाल लोगों की जेहन में हो सकता है जैसे मकान में आकर क्या क्या पूछा जाएगा. अगर आपके कई मकान हैं तो उसका क्या असर होगा. अगर आप किराएदार हैं तो मकान दर्ज करने आए कर्मचारी क्या जानेंगे. भारत का रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त हर बार जनगणना का काम करता है. इस बार भी यही विभाग ये काम करेगा. ये विभाग गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है. इसमें ये ना केवल योजना बनाता है बल्कि डेटा जुटाता है और इसको प्रोसेस भी करता है. इससे संबंधित ट्रेनिंग और पब्लिकेशन का काम भी उसका है. इसका विभाग के मौजूदा आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण हैं. यह कार्यालय 1950 के दशक से स्थायी रूप से अस्तित्व में है. इसमें राज्य स्तर के निदेशालय मिलकर काम करते हैं. 2027 की जनगणना में कई नई चीजें और कई नई बातें शामिल की जा रही हैं. जैसे ये जनगणना डिजिटल होगी. इसमें ऐप, सेल्फ-एनुमरेशन और जाति गणना शामिल है. सवाल – जनगणना 2027 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसके पहले दौर में क्या होगा. जिसे हाउस लिस्टिंग ज्यादा कहा जा रहा है? – भारत की जनगणना एक बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जो हर 10 साल में होती है. हालांकि इस बार ये 5-6 साल के विलंब से हो रही है. इसकी वजह COVID-19 महामारी रही. पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का होगा, जो 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी. दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में होगा. इस काम में पूरे देश में 30 लाख लोगों को काम में लगाया जाएगा. सवाल – क्यों आपका घर पहले दौर में दर्ज होगा? – पहले चरण का फोकस घरों की सूची बनाना है, ताकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार हो सके. इससे पता चलता है कि देश में कितने घर हैं, उनकी स्थिति कैसी है. वहां कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इस चरण में घर को लिस्ट में दर्ज करने के साथ घर की स्थिति यानि कच्चा या पक्का, सुविधाएं यानि जल, बिजली, शौचालय आदि दर्ज होंगी. फिर इसी के साथ ये भी दर्ज होगा कि आपके पास घर में कौन सी संपत्तियां हैं यानि टीवी, कार आदि. ये डेटा सरकार को नीतियां बनाने में मदद करता है, जैसे गरीबी उन्मूलन, आवास योजनाएं और संसाधनों का वितरण. सवाल – क्या जनगणना राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का काम भी करेगा? – हां, ऐसा ही होगा. ये राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने में भी मदद करेगा. बिना घरों की सूची के, जनसंख्या गणना अधूरी रह जाएगी, इसलिए ये घर घर जाकर की जाएगी. सवाल – पहले दौर में क्या-क्या होगा? – जनगणना कर्मचारी आपके घर आएंगे. उनके साथ सवालों की एक लिस्ट होगी, ये आपके घर से संबंधित जानकारियों को हासिल करने के लिए होगी. ये काम 30 दिनों के भीतर पूरा होना है. इस बार सरकार हर किसी को भी ये विकल्प दे रही है कि वो अपने घर की जानकारी खुद आनलाइन भर सकें. ये सुविधा जनगणना साइट पर 15 मार्च से उपलब्ध हो जाएगी. आप Census ऐप या पोर्टल (https://se.census.gov.in/) पर जाकर रजिस्टर कर सकते हैं. जनगणना कर्मचारी और अधिकारी टैबलेट या ऐप से डेटा भरेंगे, जो रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड होगा. इससे डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी. सवाल – जब जनगणना स्टाफ आपके घर आएगा तो क्या जानकारी लेगा? – घर कैसा है. पक्का/कच्चा, कितने कमरे. मालिकाना हक – किराए का या अपना या किसी और का. अगर घर खाली है, तो उसे ‘वैकेंट’ के रूप में नोट किया जाएगा. ये भी देखा जाएगा कि घर का उपयोग आवासीय है या व्यावसायिक या फिर मिक्स्ड. सुविधाएं – पीने का पानी, बिजली, शौचालय, किचन, ईंधन (गैस, लकड़ी). संपत्तियां – टीवी, फ्रिज, कार, बाइक, इंटरनेट आदि. सवाल – पहले चरण की जनगणना में क्या नहीं होगा? – इस चरण में व्यक्तिगत जनसंख्या डेटा नहीं ली जाएगी. मसलन आपका या परिवार के लोगों का नाम, उम्र, लिंग. ये काम दूसरे चरण में होगा. सवाल – जिनके पास कई घर हैं, उनका क्या होगा? – जनगणना का ये पहला चरण केवल घरों की गिनती कर रहा है ना कि मालिकों की गिनती. अगर आपके पास कई घर हैं तो हर घर को अलग-अलग सूचीबद्ध किया जाएगा. अगर किसी ने अपने घर को किराए पर उठा दिया है तो किराएदार की जानकारी ली जाएगी. अगर खाली है तो उसे वैकेंट मार्क किया जाएगा लेकिन फिर भी उसकी सुविधाओं का डेटा तो लिया ही जाएगा. कई घर होना कोई समस्या नहीं है. जनगणना टैक्स या संपत्ति जांच के लिए नहीं है. आपका डेटा केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा, न कि व्यक्तिगत जांच के लिए. सवाल – आपके घर कौन आएगा? – जनगणना के लिए राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन के नियुक्त कर्मचारी. ये ज़्यादातर शिक्षक, पटवारी, आंगनवाड़ी सुपरवाइज़र, नगर निगम, पंचायत के कर्मचारी होते हैं. इनके पास सरकारी पहचान पत्र, जनगणना का ऑथराइजेशन लेटर होगा. आपको उनकी ID देख लेने का पूरा हक़ होगा. सवाल – अगर आप सहयोग नहीं करें तो क्या होगा? – जनगणना संविधानिक और कानूनी प्रक्रिया है. जानबूझकर गलत जानकारी देना या पूरी तरह मना करना दंडनीय है और जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अपराध है. अगर आपने असहयोग किया तो जुर्माना लगाया जा सकता है. सवाल – क्या जनगणना का डेटा “कानूनी दस्तावेज” होता है? -नहीं. जनगणना कतई कानूनी दस्तावेज नहीं होती. आप जनगणना की एंट्री दिखाकर यह नहीं कह सकते कि सरकार ने मान लिया है कि मैं यहीं का निवासी हूं. इसमें कोई दस्तावेज़ सत्यापन के लिए नहीं होता. सवाल – फिर जनगणना किस तरह कानूनी या सरकारी कामों में काम आती है? – नीति और कानून बनाने में. लोकसभा/विधानसभा सीटों के परिसीमन में. नगर निकायों और पंचायतों की सीमा तय करने में. आरक्षण आंकड़ों में. सवाल – अगर जनगणना वाले घर आए … Read more

“ट्रंप को जाना होगा…” मिनेसोटा में महिला की हत्या के बाद अमेरिका में उबाल, प्रदर्शन तेज

वाशिंगटन अमेरिका में एक महिला की हत्या ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों को भड़का दिया है. ट्रंप को जाना होगा…ICE हमारे राज्य से बाहर जाओ… जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और आव्रजन और सीमा शुल्क विभाग (ICE) को राज्य से बाहर करने की मांग कर रहे हैं. एक आईसीई अधिकारी ने मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में एक महिला की गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी जिसके बाद से ही पूरे राज्य के लोगों में भारी गुस्सा है. अमेरिकी महिला की हत्या राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच हुई है. 37 साल की रेनी निकोल गुड को सुबह करीब 10:30 बजे सेंट्रल टाइम पर 34वीं स्ट्रीट और पोर्टलैंड एवेन्यू के चौराहे के पास गोली मारी गई. तब वो अपने SUV में थीं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने महिला की मौत पर उसे ही दोष दिया. उन्होंने कहा कि महिला मौके पर मौजूद आईसीई एजेंट्स के काम में दखल दे रही थी जो कि उकसाने वाला था. नोएम ने मृत महिला को ही जिम्मेदार ठहराया ट्रंप के सख्त प्रवासन मुहिम की प्रमुख चेहरा मानी जाने वाली नोएम ने कहा कि जब अधिकारियों ने गुड से गाड़ी से बाहर निकलने को कहा तो उन्होंने उनकी बात नहीं मानी और जानबूझकर एसयूवी को 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करते हुए अधिकारी को टक्कर मारने की कोशिश की. उनके अनुसार, एजेंट ने आत्मरक्षा में उन पर तीन गोलियां चलाईं. नोएम ने बुधवार शाम पत्रकारों से कहा, 'यह बिल्कुल साफ है कि वो महिला अधिकारियों की कार्रवाई में बाधा डाल रही थी और अधिकारियों को परेशान कर रही थी. हमारे अधिकारी ने अपनी ट्रेनिंग के अनुसार काम किया, ठीक वही किया जो ऐसी स्थिति में उन्होंने करने के लिए सिखाया जाता है. अधिकारी ने खुद की और अपने साथी अधिकारियों की सुरक्षा में गोली चलाई.' आईसीई एजेंटों को यह ट्रेनिंग दी जाती है कि वे कभी भी किसी गाड़ी के सामने से पास न जाएं, चलती गाड़ी पर गोली न चलाएं और बल का प्रयोग केवल तभी करें जब गंभीर चोट या मौत का तत्काल खतरा हो. लेकिन मिनियापोलिस शहर के मेयर जैकब फ्रे ने आईसीई के उस बयान को 'बकवास' बताया है जिसमें कहा गया कि गोली आत्मरक्षा में चलाई गई. उन्होंने कहा कि आईसीई को शहर से फौरन बाहर निकाला जाना चाहिए.  हालांकि, क्रिस्टी नोएम ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, 'उन्हें नहीं पता कि वो किस बारे में बात कर रहे हैं.' महिला की हत्या को लेकर राज्य में उबाल मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने गुड की मौत को व्हाइट हाउस की 'लापरवाही' का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक शासित शहरों में संघीय अधिकारियों और सैनिकों की तैनाती के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई. वॉल्ज ने गुड की मौत के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की और कहा कि राज्य इस गोलीबारी में जवाबदेही तय करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा. शाम होते-होते घटनास्थल के पास सड़कों पर हजारों लोग जमा हो गए. 'ICE Not Welcome', 'Trump Must Go Now', 'Stop ICE Terror' जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर लोग ट्रंप और आईसीई के खिलाफ नारे लगाने लगे. कौन हैं रेनी गुड जो ICE अधिकारियों के गोली का शिकार हो गईं रेनी गुड सोशल मीडिया पर थीं जहां उन्होंने इंट्रो में खुद को एक 'कवयित्री, लेखिका, पत्नी और मां' बताया है. उन्होंने लिखा था कि वो मूल रूप से कोलोराडो की रहने वाली हैं, लेकिन इस समय मिनेसोटा में रह रही हैं. रेनी गुड की पहले एक व्यक्ति से शादी हुई थी, जिनसे उनका एक बच्चा है. उस बच्चे के दादा टिम्मी रे मैकलिन सीनियर ने मिनेसोटा स्टार ट्रिब्यून को बताया कि उनके बेटे और गुड का एक बच्चा है, जो अब छह साल का है. रेनी गुड के पिता टिम गैंगर ने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को बुधवार को पहले ही अपनी बेटी की मौत की सूचना दे दी गई थी और वो अभी भी इस जानकारी को समझने की कोशिश कर रहे हैं. 'द वॉशिंगटन पोस्ट' से बातचीत में गैंगर ने कहा कि रेनी गुड ने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय कोलोराडो में बिताया था जब उनके सैनिक पति जिंदा थे. करीब तीन साल पहले उनके पति की मौत हो गई जिसके बाद वो कुछ समय के लिए अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए कंसास के वैली फॉल्स चली गई थीं. गैंगर बताते हैं, 'उसकी जिंदगी अच्छी थी, लेकिन आसान नहीं थी. वो एक बेहतरीन इंसान थी.'  

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत: VB-G RAM G अधिनियम 2025, सुश्री निर्मला भूरिया का अहम बयान

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत : VB-G RAM G अधिनियम, 2025 : सुश्री निर्मला भूरिया हर ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि विकसित भारत–ग्रामीण आजीविका मिशन गारंटी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत है। यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि यह कानून महात्मा गांधी की भावना के अनुरूप गरीबों, जनजातीय और पिछड़े वर्गों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यय किया गया है, जो ग्रामीण रोजगार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। VB-G RAM G अधिनियम, 2025 पूर्ववर्ती MGNREGA का स्थान लेगा, जहां राहत आधारित व्यवस्था के स्थान पर अब रोजगार और आजीविका को राष्ट्रीय विकास लक्ष्य से जोड़ा गया है। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए बुवाई और कटाई के मौसम में राज्य सरकारें 60 दिनों का 'कार्य विराम' घोषित कर सकेंगी, जिससे कृषि क्षेत्र में श्रम की कमी नहीं होगी और मजदूरों की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। नए कानून में कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है— जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा निर्माण, आजीविका संपत्तियों का सृजन तथा जलवायु संरक्षण। समयबद्ध भुगतान और पारदर्शिता मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अनिवार्य किया गया है। देरी की स्थिति में श्रमिकों को स्वतः मुआवजा दिया जाएगा। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी तथा एआई आधारित निगरानी को कानून का हिस्सा बनाया गया है। प्रत्येक छह माह में डिजिटल साक्ष्यों के साथ सोशल ऑडिट भी अनिवार्य होगा। इस योजना में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच 60:40 का व्यय अनुपात होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 रहेगा। बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है। ग्रामीण योजनाओं को पीएम गति शक्ति और विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा गया है। सुश्री भूरिया ने कहा कि VB-G RAM G अधिनियम, 2025 केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में जवाबदेही, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुरक्षा की नई प्रतिबद्धता है, जो ग्रामीण नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाता है। इस अवसर पर विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार, श्री ओमप्रकाश सकलेचा, श्री अनिरुद्ध माधव मारू उपस्थित रहे।  

BMC मेयर चुनाव: फडणवीस का ऐलान, मराठी हिंदू ही होगा मेयर, पठान ने की थी बुर्के की चर्चा

मुंबई 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी (BMC) चुनावों से ठीक पहले मुंबई की सियासत गरमा गई है। 'मुंबई मंथन' कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि देश की सबसे अमीर महानगरपालिका का अगला मेयर एक मराठी हिंदू ही होगा। फडणवीस का यह बयान विपक्षी दलों और विशेषकर AIMIM नेता वारिस पठान के दावों के जवाब में आया है। आपको बता दें कि हाल ही में AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा था कि मुंबई की मेयर की कुर्सी पर "बुर्का पहनने वाली एक नमाजी मुस्लिम महिला" बैठ सकती है। इस पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने यह जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "जब विपक्षी नेता ऐसे बयान देते हैं, तो बाकी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल चुप क्यों रहते हैं? मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मुंबई का अगला मेयर निश्चित रूप से एक मराठी हिंदू ही होगा।" जब उनसे सीधा सवाल पूछा गया कि क्या यह पद मराठी हिंदुओं के लिए ही आरक्षित माना जाए, तो मुख्यमंत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, "हां, बिल्कुल।" मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस दौरान अपनी पार्टी की विचारधारा को भी स्पष्ट किया। उन्होंने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि बीजेपी वोटरों को 'मराठी' और 'गैर-मराठी' के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी विकास के नाम पर वोट मांग रही है और मुंबई के हर नागरिक का हित उनके लिए सर्वोपरि है। मुंबई में आगामी 15 जनवरी को मतदान होना है, जिसमें इस बार मुकाबला काफी रोचक है। एक तरफ महायुति (भाजपा-शिंदे शिवसेना) अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं दूसरी तरफ ठाकरे बंधु (उद्धव और राज) भी 'मराठी मानुस' के मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। ऐसे में फडणवीस का 'मराठी हिंदू' कार्ड मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। मुंबई का ट्रैफिक दिल्ली से बेहतर, कोई लेन ब्रेक… सीएम फडणवीस महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव के बीच मुंबई में 'मुंबई मंथन' का मंच सजा है. आजतक के इस आयोजन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पहुंचे. सीएम फडणवीस ने दशकों पुरानी एक बहस को फिर से जिंदा कर दिया है. यह कहते हुए कि दिल्ली के ट्रैफिक से मुंबई का ट्रैफिक बेहतर है. इस पर लोगों की अपनी-अपनी राय हो सकती है, लेकिन आजतक के मंच से सीएम फडणवीस ने खुलकर अपनी बात की. उन्होंने कहा कि मुंबई में ट्रैफिक की स्थिति दिल्ली से तो बहुत बेहतर है. मुंबई के लोग अनुशासित हैं और धैर्य के साथ ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं. सीएम फडणवीस ने कहा कि मुंबई में कोई लेन नहीं तोड़ता. लोग धैर्य के साथ इंतजार करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में सड़कों पर इधर गाड़ियां पिचकी दिखेंगी, उधर ठुकी दिखती हैं. मुंबई में ऐसा कहीं भी नजर नहीं आएगा. सीएम फडणवीस ने मुंबई में ट्रैफिक सिस्टम ठीक करने के लिए सबअर्बन रेलवे से मेट्रो तक, महाराष्ट्र सरकार के प्रयास गिनाए और कहा कि आप एक सिंगल ऐप पर अपना पूरा ट्रैवल प्लान तैयार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमने ऐसा सिस्टम तैयार किया है कि कोई भी एक टिकट पर किसी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकता है. सीएम फडणवीस ने कहा कि मुंबई का 80 फीसदी ट्रैफिक वेस्टर्न एक्सप्रेसवे से जाता है. उन्होंने कहा कि हम वेस्टर्न एक्सप्रेसवे के समानांतर लूपलाइन तैयार कर रहे हैं, जिससे उस पर ट्रैफिक लोड कम हो सके. सीएम फडणवीस ने कहा कि हम अटल सेतु को एक टनल के माध्यम से जोड़ना चाहते हैं. हम वाटर ट्रांसपोर्ट शुरू कर रहे हैं. हम पूरे मुंबई को इंटीग्रेट करने का काम करेंगे. मुंबई को स्लम फ्री बनाने को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि धारावी के पुनर्विकास की शुरुआत हमने कर दी. हम 10 लाख लोगों को बसा रहे हैं. आज लोगों के मन में यह विश्वास जागृत हो गया है कि ये हो सकता है. सीएम फडणवीस ने कहा कि अब हमने घरों की डिलीवरी शुरू की है. हम नए डेवलपर लाए हैं. उन्होंने कहा कि अब मुझे कॉन्फिडेंस है कि अगले सात से आठ साल में स्लम फ्री कर लेंगे. उन्होंने मुंबई में जलभराव के कारण ट्रैफिक की समस्या के सवाल पर कहा कि इस बार ट्रैफिक रुकने की खबरें कम ही आईं. मुंबई तटीय शहर है. बारिश का पानी समुद्र में ही जाता है. सीएम फडणवीस ने कहा कि यहां हाईटाइड पानी को वापस भेजता है. हमने कई पंपिंग स्टेशन का काम पूरा किया. हंड्रेड परसेंट पूरा हो जाएगा, तो जलभराव बंद हो जाएगा. बीएमसी खत्म करने के आरोप पर क्या बोले सीएम सीएम फडणवीस ने मुंबई को अलग करने, बीएमसी खत्म करने के आरोपों पर कहा कि एमएमआरडीए की स्थापना 30-40 साल पहले हुई थी. पिछले साल में एमएमआरडीए ने कुछ काम किया, पहले नहीं करता था. उन्होंने कहा कि मुंबई में तो बीएमसी ही काम करता है. मुंबई के बाहर एमएमआरडीए को हमने काम दिया. उद्धव ठाकरे ने मेट्रो में योगदान देने से इनकार कर दिया, तब हमने एमएमआरडीए से योगदान दिया. इसके बावजूद, एमएमआरडीए का बीएमसी के क्षेत्र में कोई अतिक्रमण नहीं है. हमने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराया. मराठी, हिंदू बनेगा मुंबई का मेयर- फडणवीस बीएमसी में बीजेपी मेयर के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि हमारे अलायंस का मेयर बनेगा. वो हिंदू बनेगा, मराठी बनेगा. चेन्नई की महानगर पालिका का चुनाव हो, तो लोग कहेंगे न कि तमिल महापौर बनेगा. मुंबई में वैसे ही मराठी महापौर बनेगा. मैं हिंदू हूं, मैं मराठी हूं. उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का गर्व है. फडणवीस ने कहा कि मराठी में कोई भेद नहीं है. जिनकी रगों में छत्रपति शिवाजी का खून बहता है, जो उनके विचारों पर चलते हैं, वह सभी मराठी हैं. उन्होंने कहा कि जो अन्य राज्यों से आकर यहां बसे हुए हैं, वह भी मुंबइकर हैं. भले उनकी भाषा हिंदी होगी. अगर मुंबई के गणेश उत्सव में देखें तो मुंबई का हर नागरिक पूरे उल्लास के साथ मनाता है. हम सारे हिंदू हैं, इसलिए एक हैं. सीएम फडणवीस ने कहा कि हमारी आत्मा हिंदुत्व है. कोई बांग्लादेशियों को हटाने की बात कह … Read more

ट्रंप ने मंजूर किया 500% टैरिफ लगाने वाला बिल, भारत, चीन और ब्राजील पर अमेरिकी प्रतिबंध की तैयारी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी. इसके बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, कुछ मामलों में यह 500 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को झकझोर देने वाला बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आ गए हैं। ट्रंप ने एक ऐसे विवादित विधेयक को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध बना वजह यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका की सख्त रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने साफ कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। इसी को रोकने के लिए अमेरिका अब टैरिफ को हथियार बनाने की तैयारी में है। अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक अच्छी रही और इस बिल पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग हो सकती है. रूस से तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई यह बिल लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है. इसके तहत ऐसे देशों पर सख्ती की जा सकेगी जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम खरीद रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग जारी रखने के लिए पैसा मिलता है. भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव सीनेटर ग्राहम के मुताबिक, इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें. पिछले साल ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी टैक्स लगाया था. इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया. इससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया और दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई. चीन के साथ भी बिगड़े रिश्ते अमेरिका और चीन के बीच भी टैक्स को लेकर तनाव बढ़ चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया था. हालांकि, बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे 90 दिनों के लिए अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे. समझौते के अनुसार, अमेरिका चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करेगा. वहीं चीन अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर देगा. भारत को लेकर ट्रंप का बयान हाल के दिनों में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि भारत पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मुझे खुश रखना जरूरी था. हम बहुत जल्दी टैक्स बढ़ा सकते हैं.' चावल पर भी टैक्स की चेतावनी पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बात तब सामने आई, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचने का आरोप लगाया. अटकी हुई है बातचीत  भारत और अमेरिका के बीच टैक्स को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है. अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स कम करे. वहीं भारत सरकार साफ कह चुकी है कि वह अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी. किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? भारत – फिलहाल भारत पर अमेरिका का करीब 50% तक टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर सीधे 500% करने का प्रस्ताव है। चीन – पहले से जारी अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच यह फैसला तनाव को और बढ़ा सकता है। ब्राजील – लैटिन अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील को भी भारी आर्थिक झटका लग सकता है। लिंडसे ग्राहम का बयान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसका मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित करना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।'