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महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन मुस्तैद, CM साय ने दिए राहत-बचाव के निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर महानदी के तटीय क्षेत्रों में राहत-बचाव के लिए प्रशासन मुस्तैद कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल और प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, राहत शिविर में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सहित सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित पुल पर बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए आवागमन बंद, संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल और महानदी के तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी के जलस्तर एवं बहाव की स्थिति के साथ सुरक्षा, राहत और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण बैराज और पुल के साथ तटीय क्षेत्रों तथा महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया। राहत शिविर में प्रभावित लोगों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। महानदी पुल पर आवागमन बंद, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई महानदी के पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। कलेक्टर-एसपी ने पुल और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर एवं बहाव को देखते हुए अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय, नियमित स्वास्थ्य जांच प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलभराव के कारण होने वाली संभावित बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। तटीय एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन एवं अन्य संसाधनों को तैयार रखा गया है। तटीय क्षेत्रों में मुनादी, लोगों को सतर्क रहने की समझाइश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तटीय और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से नागरिकों को संभावित जलभराव तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी के जलस्तर, पुल-पुलियों और आवागमन वाले मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति में बदलाव होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं तथा प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से बंद किए गए मार्गों और स्थानों पर जाने का प्रयास न करें। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा महानदी के तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, राहत और आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। राहत शिविर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्वास्थ्य जांच में जुटी हैं, वहीं पुलिस, राजस्व, नगर सेना और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण के अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण सुभावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

किसान चौपाल बनें किसानों से संवाद का माध्यम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का महत्वपूर्ण योगदान है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान चौपाल बनें किसानों से संवाद का माध्यम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीअन्न और धान उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन करायें किसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सेवा-संकल्प अभियान से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनूपपुर के किसानों से किया वर्चुअल संवाद मुख्यमंत्री निवास से किया बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का बड़ा योगदान है। अनूपपुर जिला जल संपदा से संपन्न है। जिले में केवई उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में तकनीक और नवाचार से कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता का विस्तार करना हमारा लक्ष्य है। प्रदेश में किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में जारी सेवा-संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान हितैषी योजनाओं की जानकारियां अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा की जायें। राज्य सरकार युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ज्वार, बाजरा जैसे श्रीअन्न के साथ धान उपार्जन के लिए पंजीयन शुरू हो गया है। उन्होंने किसानों से समय रहते पंजीयन कराने का आह्वान किया। ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री निवास से अनूपपुर में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में वर्चुअली जुड़कर किसानों से संवाद किया। राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान चौपालें लगाकर किसान हितैषी योजनाओं का प्रसार-प्रचार किया जाए। किसान चौपालों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का भी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अनूपपुर में धान, गेंहू, दलहन और तिलहन के उत्पादन के साथ हमारे किसान नई तकनीक और नई फसलों को अपना रहे हैं। किसानों द्वारा मशरूम और स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए नवीन तकनीक और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि का भविष्य उज्ज्वल है, किसान अपने बच्चों को कृषि उद्योगों से जोड़े। राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ है। ग्रामीणों को मिलेंगे सुगम परिवहन सेवा और नि:शुल्क रजिस्ट्री के लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आरंभ हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का लाभ दूरदराज के गांव वालों को मिलेगा। ग्रामीणों के लिए नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गई है। राज्य सरकार बच्चों की बेहतर पढ़ाई और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रगतिशील किसानों से संवाद बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनूपपुर जिले के प्रगतिशील किसानों से वर्चुअल संवाद किया। किसानों ने कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा पशुपालन से संबंधित गतिविधियों की जानकारी साझा की। पुष्पराजगढ़ के रमेश सिंह एवं अरुण कुमार चन्द्रवंशी ने आधुनिक कृषि यंत्रों एवं सिंचाई सुविधाओं से प्राप्त लाभ बताए। प्रेमलाल केवट ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जबकि रामभजन ने फसल प्रदर्शन एवं किसान खेत पाठशाला की जानकारी दी। पशुपालक माधव सिंह राठौर ने उन्नत पशुपालन एवं कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से बढ़े दुग्ध उत्पादन की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को प्रोत्साहित किया। उन्नतशील किसान एवं मेधावी विद्यार्थी हुए सम्मानित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उन्नतशील किसानों एवं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों का सम्मानित किया गया। उन्नतशील किसानों में रामप्रमोद साहू, ओम प्रकाश जोगी, फत्तेलाल जयसवाल, जीवनलाल एवं जगदीश सिंह को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इसी क्रम में शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अनूपपुर के मेधावी विद्यार्थियों दुर्गेश्वरी कोल, दुर्गा सिंह, धनश्वरी देवी, शुभा द्विवेदी एवं आकाश सिंह मरावी को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की दी गई जानकारी बलराम कृषि महोत्सव के दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत कृषि यंत्रों, उद्यानिकी फसलों, उन्नत पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन तथा शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी दी गई। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को अपनाकर आय में वृद्धि के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह, कलेक्टर रत्नाकर झा, पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती पार्वती वाल्मीकि राठौर जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम सहित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन विभाग के अधिकारी जनप्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।  

बीटूबी बैठकों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल, नए टूर पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं को मिला मंच

‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस-2026’ में देश-विदेश के टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स और हॉस्पिटैलिटी विशेषज्ञों का संगम बीटूबी बैठकों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल, नए टूर पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं को मिला मंच पर्यटन को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला-जनजातीय सशक्तिकरण से जोड़ने पर जोर, उत्कृष्ट पर्यटन हितधारकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से किया गया सम्मानित विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़- राजेश अग्रवाल रायपुर,  विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ ने अपने समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में मेफेयर लेक व्यू रिसॉर्ट, नवा रायपुर में ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस-2026’ का आयोजन किया गया। आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के साथ पड़ोसी राज्यों के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स, होटलियर्स, होम-स्टे संचालक, पर्यटन संस्थाओं तथा विदेशी टूर एजेंसियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ को केवल एक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन कारोबार के संभावनाशील बाजार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। बीटूबी बैठकों के माध्यम से पर्यटन कारोबारियों के बीच सीधे व्यावसायिक संवाद, नए टूर पैकेज तैयार करने, पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ लाने, निवेश की संभावनाओं को तलाशने तथा प्रदेश के पर्यटन उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रहे मुख्य अतिथि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने की। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, एलियांज इंडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप भगत, छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जसप्रीत भाटिया, कपिल जैन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही कलेक्टर विजय दयाराम के., होटल मेफेयर के जीएम नीलेश, जिला पंचायत जीपीएम के सीईओ मुकेश रावटे सहित पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि एवं पर्यटन मंडल के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। छत्तीसगढ़ के पास बस्तर की जीवंत जनजातीय संस्कृति, सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, सिरपुर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत, राजिम की धार्मिक आस्था, भोरमदेव की स्थापत्य कला और बारनवापारा का वन्यजीवन जैसी विविध पर्यटन संपदाएं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, कारीगरों एवं कलाकारों के लिए बाजार तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार करना भी है। अग्रवाल ने कहा कि ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस’ देश-विदेश के पर्यटन कारोबारियों को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण बिजनेस प्लेटफॉर्म है। इस प्रकार के आयोजन से व्यावसायिक साझेदारी बढ़ाने, नए पर्यटन बाजारों से जुड़ने, नए टूर पैकेज विकसित करने और छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को अधिक से अधिक पर्यटकों तक पहुंचाने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन फिल्म सिटी, भोरमदेव कॉरिडोर और जशपुर के मयाली क्षेत्र में पर्यटन विकास जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। 400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल से जुड़ीं छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव या औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। देश-विदेश के पर्यटन कारोबारियों और विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने तथा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली, भुवनेश्वर, पुणे और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में रोड शो एवं विभिन्न राष्ट्रीय पर्यटन आयोजनों में सहभागिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन सुविधाओं का प्रचार-प्रसार किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल से जुड़ चुकी हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क को और विस्तारित किया जाएगा। पर्यटन को स्थानीय रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाने पर जोर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा कि पर्यटन को केवल भ्रमण का विषय न मानकर विकास, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाना होगा। स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को बेहतर पर्यटन उत्पादों और पैकेज में परिवर्तित करते हुए अन्य राज्यों एवं देशों के साथ पर्यटन साझेदारी विकसित करनी होगी। उन्होंने आयोजन में बने नए संपर्कों और साझेदारियों को वास्तविक पर्यटन विकास में परिवर्तित करने तथा डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया। डिजिटल तकनीक और एआई से वैश्विक पर्यटन बाजार में नई पहुंच छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने विश्व पर्यटन दिवस 2026 की थीम ‘डिजिटल एजेन्डा एन्ड आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स टू रिडिजाइन टूरिज्म’ के संदर्भ में छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। पर्यटन संबंधी जानकारी, डिजिटल प्रचार-प्रसार, पर्यटक अनुभव, कंटेंट निर्माण और पर्यटन स्थलों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तुतीकरण में चित्रकोट, तीरथगढ़, कुटुमसर, मैनपाट, जशपुर, बस्तर दशहरा, सिरपुर, भोरमदेव, ढोलकल गणेश, नारायणपाल और मल्हार सहित छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक, जनजातीय, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पर्यटन स्थलों की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। चौबे ने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के साथ आधारभूत संरचना को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। होम-स्टे के लिए … Read more

मंत्री गुप्ता- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान

निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी मंत्री गुप्ता- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान अब निवेशकों के उद्योग लगने तक होगी हैंडहोल्डिंग- मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रदेश ने निवेशकों के बीच अपना क्रेडिट और भरोसा संवाद, सुविधा और निरंतर सहयोग के माध्यम से बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित न रहकर उद्योग स्थापित होने तक आवश्यक सहयोग और हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में किए गए रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और विश्वास को दर्शाती है। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं तथा करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।  उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें निवेशक को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान उपलब्ध कराया जाए। ‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’ नंदी ने कहा कि निवेशक के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे नीति, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और अन्य आवश्यक अनुमतियों के संबंध में भी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशक सुविधा को कार्यालय की कार्यप्रणाली और व्यवहार से जोड़ने पर जोर दिया। रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए अवसर उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र का मतलब केवल टैंक, मिसाइल या विमान बनाना नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए अवसर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में रक्षा विनिर्माण का इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी उठा सकती हैं। कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा निवेश की बुनियाद मंत्री ने कहा कि निवेश के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा। बेहतर एक्सप्रेसवे एवं परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी और औद्योगिक आधारभूत ढांचे से प्रदेश में कारोबार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने का है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। नंदी ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ कदम-दर-कदम खड़ी है और उनका निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता के विस्तार से जुड़ सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बॉक्स  रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर: कर्नल संजय सिंह यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, स्पेशल केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह अनुमान आधारित नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं पर आधारित है, इसलिए स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।

CM विष्णुदेव साय का सिंगापुर दौरा, भारत-सिंगापुर बिजनेस सम्मेलन में होंगे शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 2 से 7 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे वहां होने वाले भारत-सिंगापुर विकास एवं कारोबार सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। हालांकि अभी इस कार्यक्रम का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की इस विदेश यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।  बताया गया है कि,  सम्मेलन में श्री साय 4 से 6 अक्टूबर के बीच शामिल होंगे। उनके साथ सीएम सचिवालय के अधिकारियों के साथ उद्योग विभाग के वरिष्ट अधिकारी भी शामिल होंगे। सिंगापुर व्यापार महासंघ की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों की आर्थिक और औद्योगिक संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के सामने रख जाएगा। सम्मेलन में निवेश के अवसर, नए कारोबार बाजार तक पहुंच, औद्योगिक साझेदारी और दोन देशों की कंपनियों के बीच सहयोग पर चर्चा होगी। उद्योग, परिवहन और नई तकनीक पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री के सिंगापुर कार्यक्रम में उद्योग, परिवहन और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा।संभावित निवेशकों के साथ नई परियोजनाओं की स्थापना, तकनीकी सहयोग और उद्योगों के विस्तार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और निवेशकों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद होने की संभावना है। निवेशकों के सामने रखेंगे छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता सिंगापुर प्रवास के दौरान होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध परियोजना संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।सरकार का उद्देश्य प्रदेश में नए निवेश को आकर्षित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इसके लिए निवेशकों को राज्य में उपलब्ध संसाधनों और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी। विदेशी निवेश आकर्षित करने पर फोकस मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे में निवेशकों के साथ सीधे संवाद को प्रमुखता दी गई है। बैठकों में उद्योग स्थापना, नई परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और निवेश के उपलब्ध अवसरों पर बातचीत होगी।दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने रखने की योजना है। हरियाणा-सिंगापुर बिजनेस फोरम और निवेश सम्मेलन हरियाणा के मुख्यमंत्री भी होंगे शामिल सूत्रों के अनुसार, इसी सम्मेलन में हरियाणा के मुख्यमंत्र नायब सिंह सैनी भी शामिल होंगे। सिंगापुर की ओर से वहां के मंत्री स्तर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे सम्मेलन में भारत और सिंगापुर के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच निवेश और औद्योगिक साझेदार की संभावनाओं पर चर्चा होगी। छत्तीसगढ़ पर रहेगी नजर मुख्यमंत्री श्री साय के लिए यह दौरा छत्तीसगढ़ को अंतर्राष्ट्रीय निवेश के नए केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर होगा। राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा, बिजली उपलब्धता, अधोसंरचना और निवेश के लिए बनाई गई नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा सकती है। राज्य की कोशिश केवल कच्चे खनिज के दोहन तक सीमित न रहकर खनिज आधारित उद्योगों में अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन, विनिर्माण, परिवहन एवं भंडारण, निर्यात और नई तकनीक आधारित उद्योगों को आकर्षित करने की है। सिंगापुर जैसे अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी केंद्र में मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की संभावनाएं रखेंगे भारत-सिंगापुर विकास और कारोबार सम्मेलन में व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री यहां छत्तीसगढ़ में निवेश के अवसरों और उद्योगों के लिए उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देंगे। सरकार का उद्देश्य नए निवेश के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। सिंगापुर प्रवास के दौरान निवेशकों के साथ होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा जाएगा। दौरे के जरिए प्रदेश में विदेशी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और निवेशकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने पर जोर रहेगा। सीधे संवाद का अवसर बताया गया है कि,  सम्मेलन में निवेशकों, उद्योगपतियों और विभिन्न कारोबारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद होगा। इसके जरिए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं और राज्य में उद्योग लगाने के लिए उपलब्ध सुविधाओं को सीधे अंतर्राष्ट्रीय कारोबार समुदाय तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

30 साल पुराने नजूल भूमि विवाद का हुआ समाधान, मंडलायुक्त की निगरानी से आया बड़ा मोड़

योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा -मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़ -वादी ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का दिया शपथ-पत्र, मौके से भी हटाया 30 साल पुराना कब्जा -आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित चार नजूल भूखंड अब सुरक्षित रखने की दिशा में कार्रवाई तेज लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।  यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की। अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक  पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई। वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई। 1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है। वर्जन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन

बस्तर से रायगढ़ तक बाढ़ का कहर, 16 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

रायपुरबीजापुरजीपीएमदुर्ग छत्तीसगढ़ में तीन दिन बारिश तबाही लेकर आई. कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. शहरों में पुल पुलियों के ऊपर से पानी बहने लगा. दुर्ग रायपुर का संपर्क कट गया. गरियाबंद धमतरी के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया. ग्रामीण क्षेत्रों में कई घर बाढ़ के पानी से भर गए, लोगों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी. शनिवार देर रात से बारिश की रफ्तार कुछ कम हुई. रविवार सुबह से बारिश थम गई, जिसके बाद अब हालात पटरी पर आने लगे हैं।  सुकमा दौरे पर सीएम विष्णुदेव साय सीएम विष्णुदेव साय आज बस्तर और सुकमा जिले दौरे पर पहुंच रहे हैं. सीएम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और राहत शिविरों में जाएंगे. साय प्रभावित परिवारों के घरों तक जाकर पीड़ित परिवारों से मिलेंगे और उनकी बात कर उनकी परेशानी सुनेंगे. मुख्यमंत्री अधिकारियों से नुकसान का जायजा लेंगे।  रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत 12 जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है। तापमान की बात करें तो दुर्ग 31.6 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा। वहीं अंबिकापुर और पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 19 डिग्री दर्ज किया गया। बारिश थमने के बाद अब नदी-नालों का पानी उतर गया है। रायपुर के महादेवघाट पुल से लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। अमलेश्वर जाने वाला यह रास्ता पिछले दो दिन से बंद था। महादेवघाट में गणेश विसर्जन के लिए केवल समितियों के सदस्यों को प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं प्रदेश में उफनते नदी-नालों में अलग-अलग घटनाओं में कुल 12 लोग बह गए। इनमें 3 लोगों की मौत हो गई। इन्द्रावती नदी पार फंसे कर्मचारियों का रेस्क्यू बीजापुर जिले मे लगातार बारिश और बाढ़ के बीच इन्द्रावती नदी पार माड़ क्षेत्र में फंसे पटवारी एवं सर्वेयर सहित 6 कर्मचारियों को जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बीजापुर लाया गया. जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद सभी कर्मचारियों का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाई गई. बता दें कि गिरदावरी सर्वे कार्य के लिए पटवारी एवं सर्वेयर का 6 सदस्यीय दल बड़ेपल्ली और गुट्टामंगी क्षेत्र में गया था. इसी दौरान लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में जलस्तर बढ़ गया और क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने से कर्मचारी वहीं फंस गए।  बीजापुर में बाढ़ में फंसे कर्मचारी एयरलिफ्ट कर्मचारियों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर विश्वदीप ने तत्काल रेस्क्यू की कार्रवाई के निर्देश दिए. प्रशासन ने बिना समय गंवाए एयरलिफ्ट की व्यवस्था कर सभी 6 कर्मचारियों को सुरक्षित जिला मुख्यालय पहुंचाया.जिला अस्पताल में कलेक्टर विश्वदीप की उपस्थिति में कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. कलेक्टर ने सभी कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली. सुरक्षित लौटे कर्मचारियों के चेहरे पर राहत और अपनों से दोबारा मिलने की खुशी साफ दिखाई दी. कलेक्टर ने कठिन परिस्थितियों में अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए कर्मचारियों के कार्य की सराहना की।  कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि बाढ़ और आपदा की परिस्थितियों में जिला प्रशासन पूरी सजगता और तत्परता के साथ कार्य कर रहा है. प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. राहत एवं बचाव दल लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके और जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।  बीजापुर: सात दिनों से फंसे पटवारियों का हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू बीजापुर में इंद्रावती नदी की बाढ़ के कारण सात दिनों से फंसे दो पटवारी सहित आधा दर्जन कर्मचारियों का रेस्क्यू सफल रहा। 27 सितंबर को नईदुनिया में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने तत्परता दिखाई। कलेक्टर विश्वदीप की पहल पर रविवार शाम को हेलीकॉप्टर से इन सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बीजापुर हेलीपैड पर उतरते ही सभी को जिला अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भर्ती कराया गया। कर्मचारियों का दल एक सप्ताह पहले राजस्व सर्वे के कार्य से नाव से इंद्रावती नदी पार कर अंदरूनी गांवों में गया था। दल में दो पटवारी, दो चैनमेन और दो सर्वेयर शामिल थे। अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से वापसी का रास्ता बंद हो गया। कर्मचारियों के दो दल अलग-अलग स्थानों पर फंसे थे। SDM भैरमगढ़ विकास सर्वे ने बताया कि प्रशासन ने दो बार रेस्क्यू टीम को नदी तक भेजा, लेकिन तेज बहाव के कारण टीम लौट गई। कुछ कर्मचारियों के बीमार होने पर कलेक्टर ने वायुसेना से हेलीकॉप्टर की मांग की, जिसके बाद सभी को सुरक्षित लाया गया। रायगढ़: महानदी खतरे के निशान से 1.25 मीटर ऊपर, गांवों में घुसा पानी रायगढ़ में लगातार बारिश के चलते महानदी का जलस्तर बढ़ने से रायगढ़ और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पुसौर क्षेत्र के कई गांवों के साथ ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील के रानीडीह-पोरथ मार्ग, कोर्रा और आसपास के गांवों में पानी घुस गया है। खेत, गलियां और सड़कें जलमग्न होने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। महानदी में बढ़ते जलप्रवाह का असर कलमा बैराज में भी साफ दिखाई दे रहा है। 27 सितंबर की सुबह 11 बजे बैराज का जलस्तर 199.35 मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित खतरे के स्तर 198.50 मीटर से 0.85 मीटर अधिक है। बैराज का पूर्ण जलस्तर 197 मीटर बताया गया है। शाम तक मिली रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान से करीब सवा मीटर ऊपर पहुंच गया था। टाटी क्षेत्र के खेतों में पानी भर गया है और कल्याण गांव की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक पानी पहुंच गया है। अंबिकापुर: कनहर नदी में 14 घंटे तक फंसे रहे तीन ग्रामीण अंबिकापुर में बलरामपुर विकासखंड के कोटपाली-खजुरी में कनहर नदी के तेज बहाव के बीच तीन ग्रामीण करीब 14 घंटे तक फंसे रहे। जिला प्रशासन, नगर सेना के गोताखोरों और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त टीम ने रात करीब 12 बजे नाव के सहारे तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। तीनों की हालत सामान्य है। रेस्क्यू किए गए ग्रामीणों में ग्राम कोठली निवासी सरजू राम (45), उनकी पत्नी राजकुमारी (40) और ग्राम जाबगड़ी निवासी फूलमनिया (30) शामिल हैं। तीनों शुक्रवार को रिश्तेदार के यहां मेहमानी के लिए कोटपाली आए थे। शनिवार सुबह … Read more

भोपाल में नए नियम लागू, प्लॉट पर 12% ओपन स्पेस रखना होगा जरूरी

भोपाल भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में शहर के विकास और नई कॉलोनियों के स्वरूप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी नई कॉलोनी में महज सड़क चौड़ी होने से कोई प्लॉट कमर्शियल नहीं मान लिया जाएगा। इसके लिए लेआउट में स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, कॉलोनियों में हरियाली और बच्चों के लिए खेल मैदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुली जगह (ओपन स्पेस) का दायरा भी 10% से बढ़ाकर 12% कर दिया है। चौड़ी सड़क का मतलब सीधे कमर्शियल प्लॉट नहीं     मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, नई कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के आधार पर दुकान, ऑफिस, अस्पताल या मॉल खोलने की गुंजाइश तो दी है, लेकिन लेआउट पास करते समय ही यह तय करना होगा कि कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज के प्लॉट कहां होंगे। नई कॉलोनी में कुल आवासीय क्षेत्र के अधिकतम 5% हिस्से में ही स्थानीय जरूरतों वाली दुकानें खोलने की अनुमति होगी। हालांकि, अगर सड़क 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी है, तो इस 5% की सीमा के अलावा भी मिक्स लैंड यूज वाले प्लॉट मंजूर किए जा सकेंगे। पहले से बसी पुरानी कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कमर्शियल गतिविधियों की छूट मिलेगी, लेकिन आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय उपयोग स्वीकृत एफएआर (FAR) के अधिकतम 50% तक ही सीमित रहेगा। हरियाली और खेल मैदानों पर विशेष जोर नए प्रस्ताव में पर्यावरण और खुले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नई कॉलोनियों में अब 12 प्रतिशत सामुदायिक खुली जगह छोड़ना अनिवार्य होगा, जिसमें से आधी जगह एक साथ (सिंगल पैच में) रखनी होगी। इस कुल खुले क्षेत्र का 30 फीसदी हिस्सा पेड़-पौधों के लिए और 30 फीसदी बच्चों के खेल मैदान के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, सर्विस सुविधाओं के लिए अलग से 2% जमीन छोड़ना भी अनिवार्य किया गया है। शहर के बाहर व्यक्तिगत मकान बनाने पर सख्त हुए नियम     अक्सर लोग शहर के बाहर शांत इलाकों में बड़ी जमीन लेकर अपना अलग मकान बना लेते हैं, जिससे वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का दबाव बढ़ जाता है। अब ऐसे व्यक्तिगत मकानों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं।     इनके लिए कम से कम 9 मीटर चौड़ी सड़क का होना जरूरी है। साथ ही अधिकतम 25% ग्राउंड कवरेज, 10 मीटर ऊंचाई और 1.25 एफएआर (FAR) का प्रस्ताव रखा गया है। मकान मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी जमीन किसी अवैध कॉलोनी का हिस्सा तो नहीं है।     नक्शा पास कराते समय प्लॉट के चारों ओर छोड़ी जाने वाली जगह (मार्जिन) के नियमों में छोटे प्लॉट वालों को काफी राहत दी गई है है। 517 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सिर्फ सामने की तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। पीछे या अगल-बगल कोई जगह छोड़ने की जरूरत नहीं है।     517 से 1615 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर और पीछे 1.5 मीटर जगह छोड़नी होगी। 1615 से 2422 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर, पीछे 1.5 मीटर और एक तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। इससे बड़े आकार (5382 वर्ग फीट तक) के प्लॉट्स के लिए साइज के हिसाब से चारों तरफ जगह छोड़ने के अलग-अलग नियम तय किए गए हैं। दूसरी ओर, सामान्य आवासीय प्लॉट्स पर निर्माण की अच्छी छूट दी गई है। मसलन, 5000 वर्ग फीट के प्लॉट पर सभी मंजिलों को मिलाकर 7500 वर्ग फीट तक निर्माण किया जा सकता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 12.50 मीटर हो सकती है और इसमें ज्यादा से ज्यादा 6 फ्लैट बनाने की इजाजत होगी। अतिरिक्त निर्माण के लिए टीडीआर (TDR) और शुल्क का फॉर्मूला अगर कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक निर्माण करना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त एफएआर का 50% हिस्सा शुल्क देकर और बाकी 50% हिस्सा टीडीआर (यानी दूसरे की जमीन से मिला निर्माण अधिकार) के जरिए हासिल करना होगा। वहीं, 12.50 मीटर तक की ऊंचाई वाले मकानों में एफएआर को 1.25 से बढ़ाकर 1.50 तक ले जाने के लिए पूरा अतिरिक्त अधिकार शुल्क देकर मंजूरी प्राप्त की जा सकती है।

सपा-कांग्रेस की तकरार पर राजभर का हमला, अखिलेश से पूछा- ‘इसको गठबंधन कहते हैं?’

राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, सपा-कांग्रेस गठबंधन को बताया ‘ठगबंधन’ सपा-कांग्रेस की तकरार पर राजभर का हमला, अखिलेश से पूछा- ‘इसको गठबंधन कहते हैं?’ राजभर ने अखिलेश से पूछा- कांग्रेस के खिलाफ बोलने की परमिशन आपने दी या चच्चू आत्मनिर्भर हो गए? सपा-कांग्रेस की खींचतान पर राजभर का हमला, बोले- ‘लड़ाई इस बात की है कि कौन बड़ा ठग?’ राजभर ने अखिलेश को अमेठी जाने की दी नसीहत, राहुल गांधी पर भी कसा तंज लखनऊ  समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ती तकरार को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा-कांग्रेस के रिश्तों पर सवाल उठाते हुए संभावित गठबंधन को ‘ठगबंधन’ करार दिया। 'ए महाराज, इसको गठबंधन कहते हैं?' राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अखिलेश यादव रायबरेली गए तो कांग्रेस के लोग उन्हें इटावा जाने को कह रहे हैं। उन्होंने शिवपाल यादव को लेकर भी तंज कसा और कहा कि ‘चच्चू’ कांग्रेस वालों को जसवंतनगर बुलाकर औकात दिखाना चाह रहे हैं। राजभर ने आगे लिखा कि इमरान मसूद अखिलेश को आंखें दिखा रहे हैं और इकरा हसन कांग्रेस वालों को उनकी जगह दिखा रही हैं। वहीं, अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम ने सपा को छोटा भाई बना दिया है और सपा के प्रवक्ता कांग्रेसियों को लिमिट में रहने की सीख दे रहे हैं। इसी को लेकर राजभर ने सवाल किया, 'ए महाराज, इसको गठबंधन कहते हैं?' 'असल में इसको ठगबंधन कहा जाता है' ओमप्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर तंज कसते हुए इसे ‘ठगबंधन’ बताया। उन्होंने लिखा कि ठगी के लिए प्लानिंग भी हो रही है और ‘लूट के माल’ की बंदरबांट को लेकर भी लड़ाई हो रही है। राजभर ने आगे तंज करते हुए लिखा कि लड़ाई इस बात की है कि ‘कौन बड़ा ठग?’ अखिलेश से पूछा- नेताओं को परमिशन आपने दी है? राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल करते हुए लिखा कि क्या अपने नेताओं को कांग्रेस के खिलाफ बोलने की परमिशन उन्होंने ही दी है या फिर शिवपाल यादव और बाकी नेता इस मामले में ‘आत्मनिर्भर’ हो गए हैं। अमेठी जाने की दी नसीहत राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव को अमेठी जाने की नसीहत भी दी। उन्होंने लिखा कि अगर अखिलेश रथ निकाल रहे हैं तो लखनऊ के बगल में अमेठी है और उन्हें वहां एक चक्कर लगा लेना चाहिए। राजभर ने अमेठी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा कि यही अमेठी है, जिसने ‘आपके मित्र राहुल बाबा को सिर्फ हराया ही नहीं, बल्कि भगा दिया।’ पोस्ट के अंत में राजभर ने लिखा 'उसी अमेठी घूम आइये महाराज, कांग्रेसियों को जलने दीजिए।'

MP सरकार पर बढ़ा कर्ज का बोझ, RBI से ₹1500 करोड़ और लेगी मोहन सरकार

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार अनुपूरक बजट के पहले एक बार फिर 1500 करोड़ का बजट लेने जा रही है. यह कर्ज सरकार विकास से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए लिया जा रहा है. ओपन मार्केट से लिए जा रहा यह कर्ज राज्य सरकार दो हिस्सो में ले रही है, इसे आगामी 18 और 30 सालों में चुकाया जाएगा. इस कर्ज के साथ मध्य प्रदेश पर कर्ज को बोझ बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ हो जाएगा. इसके पहले राज्य सरकार ने 16 सितंबर को भी 2500 करोड़ का कर्ज लिया था।  सरकार लगातार ले रही कर्ज वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है. राज्य सरकार सितंबर माह में तीसरी बार कर्ज ले रही है. यह कर्ज सरकार सड़क सहित दूसरे विकास के कामों के लिए ले रही है. 1 सितंबर 2026 को राज्य सरकार ने 3600 करोड़ का कर्ज लिया था. यह कर्ज सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के जरिए दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी से लिया गया था. इसमें 1600 करोड़ का कर्ज 18 साल के लिए और 2000 करोड़ का कर्ज 30 साल के लिए लिया गया था।  16 सितंबर को 2500 करोड़ का कर्ज लिया है. तीन अलग-अलग किस्तों में लिया गया यह कर्ज 8, 12 और 22 सालों में चुकाया जाएगा. अब राज्य सरकार 1500 करोड़ का लोन लेने जा रही है. यह कर्ज सरकार दो किस्तों 800 करोड़ और 700 करोड़ के रूप में ले रही है. पहला कर्ज सरकार 18 सालों के लिए ले रही है, जबकि 700 करोड़ का लोन सरकार 30 साल के लिए ले रही है।  मध्यप्रदेश पर कर्ज पहुंच 5.42 लाख करोड़ लगातार लिए जा रहे कर्ज से मध्य प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता रहा है. वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कर्ज 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ करोड़ रुपए था. जबकि पिछले छह माह में राज्य सरकार 54 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है. सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर कांग्रेस ने वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया है।  कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अविनीश बुंदेला ने आरोप लगाया है कि, ''सरकार के पास वित्तीय प्रबंधन नहीं है. सरकार लगातार कर्ज लेकर फिजूलखर्जी कर रही है. सुख सुविधाओं और सरकारी आयोजनों में कर्ज का पैसा उड़ाया जा रहा है. सरकार को जनता को बताना चाहिए कि पिछले सालों में लिया गया कर्ज कहां कहां खर्च किया गया है।