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महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई उड़ान, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा होगी सुदृढ़’

रायपुर  सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम चेरपाल में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड कुआकोंडा एवं कटेकल्याण के 8 संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) के तहत टाटा मैजिक सवारी वाहनों की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर अधिकारियों ने जानकारी दी कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ दूरस्थ अंचलों में परिवहन सुविधाओं को मजबूत बनाना है। योजना के तहत प्रदाय किए गए प्रत्येक टाटा मैजिक वाहन के लिए लगभग 5 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। इन वाहनों के संचालन से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का स्रोत प्राप्त होगा तथा ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। 41 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका सशक्त करने में जुटा बिहान मिशन कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के 41 हजार 110 परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार एवं आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ा गया है। समूह की महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, लघु उद्यम, वनोपज प्रसंस्करण तथा विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गांव और शहर के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी, महिलाओं को मिलेगा स्थायी आय का स्रोत मुख्यमंत्री द्वारा प्रदाय किए गए इन वाहनों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुलभ, सुरक्षित एवं किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे दूरस्थ गांवों का बाजारों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक केंद्रों तथा जिला मुख्यालय से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। साथ ही महिलाओं को वाहन संचालन एवं प्रबंधन के माध्यम से नियमित आय प्राप्त होगी, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना से उन्हें न केवल रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा का एक नया माध्यम भी प्राप्त होगा। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

जनसेवा और सुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता, कांकेर समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री साय के निर्देश

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि समाधान शिविरों का उद्देश्य  आमजन की समस्याओं का संवेदनशील और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासनिक अमला सकारात्मक सोच और सार्थक प्रयासों के साथ कार्य करे, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे और सुशासन की भावना जमीन पर दिखाई दे। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मंगलवार शाम कांकेर जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री  साय ने कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर और बस्तर जिलों में संचालित योजनाओं एवं विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, जवाबदेह और परिणामोन्मुख कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास, धान उठाव और कृषि तैयारियों पर विशेष जोर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए ताकि हितग्राहियों को पक्के आवास का लाभ मिल सके। उन्होंने खरीदी केन्द्रों से धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने तथा स्थानीय स्तर पर धान मिलिंग को बढ़ावा देने के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खरीफ सीजन को देखते हुए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया और वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और एग्रीस्टैक पोर्टल में पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, सिकल सेल स्क्रीनिंग तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट तैयार करने का कार्य देने, कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने तथा सभी पात्र महिलाओं तक महतारी वंदन योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता को लेकर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। साथ ही डायल 112 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। बैठक में मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जनमन, बिहान योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन, अटल डिजिटल सेवा केन्द्र, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, डीएमएफ कार्यों, शिक्षा गुणवत्ता, सड़क अवसंरचना और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विभागवार समीक्षा की तथा जिलों में प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने पखांजूर क्षेत्र में मत्स्यपालन की संभावनाओं को देखते हुए जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में डीएमएफ मद से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में विधायक अंतागढ़  विक्रम उसेंडी, कांकेर विधायक  आशाराम नेताम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, बस्तर संभाग आयुक्त  डोमन सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि समाधान शिविरों का उद्देश्य  आमजन की समस्याओं का संवेदनशील और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासनिक अमला सकारात्मक सोच और सार्थक प्रयासों के साथ कार्य करे, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे और सुशासन की भावना जमीन पर दिखाई दे। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मंगलवार शाम कांकेर जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री  साय ने कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर और बस्तर जिलों में संचालित योजनाओं एवं विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, जवाबदेह और परिणामोन्मुख कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास, धान उठाव और कृषि तैयारियों पर विशेष जोर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए ताकि हितग्राहियों को पक्के आवास का लाभ मिल सके। उन्होंने खरीदी केन्द्रों से धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने तथा स्थानीय स्तर पर धान मिलिंग को बढ़ावा देने के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खरीफ सीजन को देखते हुए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया और वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और एग्रीस्टैक पोर्टल में पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, सिकल सेल स्क्रीनिंग तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट तैयार करने का कार्य देने, कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने तथा सभी पात्र महिलाओं तक महतारी वंदन योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता को लेकर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। साथ ही डायल 112 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। बैठक में मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जनमन, बिहान योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन, अटल डिजिटल सेवा केन्द्र, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, डीएमएफ कार्यों, शिक्षा गुणवत्ता, सड़क अवसंरचना और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विभागवार समीक्षा की तथा जिलों में प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने पखांजूर क्षेत्र में मत्स्यपालन की संभावनाओं को देखते हुए जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में डीएमएफ मद से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता … Read more

गर्मी से राहत: मध्यप्रदेश में प्री-मानसून की दस्तक, कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

भोपाल झुलसाने वाली गर्मी और लू के थपेड़ों वाले नौतपा की मंगलवार को आंधी–बारिश के साथ विदाई हुई। प्री–मानसून गतिविधियों के चलते मौसम का मिजाज पूरी तरह खुशनुमा हो गया है। भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बूंदाबांदी और तेज हवाओं के कारण दिन व रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। नौतपा के आखिरी दिन खंडवा और छतरपुर के खजुराहो को छोड़कर अन्य सभी जिलों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। सुबह चली धूल भरी आंधी और अंधड़ नौतपा का आखिरी दिन आंधी और गरज–चमक के नाम रहा। सुबह झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, मुरैना और भिंड जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलीं। वहीं इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, दतिया, ग्वालियर और शिवपुरी जिलों में भी 40 किमी की रफ्तार से अंधड़ चला। दोपहर को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडौरी, जबलपुर, उमरिया और कटनी जिलों में गरज–चमक के साथ हल्की आंधी चली। इंदौर–उज्जैन में बारिश, बुरहानपुर में केला फसल बर्बाद वहीं शाम को इंदौर, उज्जैन, धार व देवास जिलों के साथ छतरपुर (खजुराहो) और पन्ना जिलों में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान आया। इस दौरान इंदौर जिले में पांच मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। दमोह, भिंड, दतिया, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, आगर, शाजापुर और सीहोर जिलों में भी बौछारें पड़ीं। बुरहानपुर जिले में करीब डेढ़ घंटे की तेज बारिश ने केला उत्पादक किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लोनी, बिरोदा, मांजरोद खुर्द, दापोरा, शाहपुर और नेपानगर क्षेत्र में 80 प्रतिशत केला फसल बर्बाद हो गई। जिले में 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केला उत्पादन होता है। किसानों ने मुआवजे की मांग की है। मंदसौर, शाजापुर और नीमच में भी किसानों और व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा। अगले चार दिन के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले चार दिन तक प्रदेश के मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट भी जारी किया है। इसके अनुसार मंदसौर, नीमच में 50 से 60 किमी और आगर जिले में 40-50 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। जबकि राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, niwari (निवाड़ी) और पांढ़ुर्णा जिलों में गरज–चमक के साथ तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान भोपाल 37.0 22.0 इंदौर 38.2 22.1 ग्वालियर 37.0 25.4 जबलपुर 38.7 26.4 (नोट: तापमान के आंकड़े डिग्री सेल्सियस में हैं)  

सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को समुचित पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। गर्मी के मौसम और बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की सतत् निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि जहां जैसी आवश्यकता हो, वहां वैसी त्वरित व्यवस्थाएं की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर पानी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में पीएचई की मैदानी योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पत्तिया उइके ने बताया कि विभाग तेजी से अपनी लक्ष्य पूर्ति की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल के उद्देश्य से जल जीवन मिशन का काम पूरा कर लिया जायेगा। मिशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत् प्रतिशत कार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्य करने वाले ऐसे गांवों/ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन/सम्मानित किया जाये, जिन्होंने बेहतर तरीके से नल जल योजनाओं का संचालन/संधारण किया। मंत्री  उइके ने बताया कि बोरवेल में गिरने से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं/मृत्यु को रोकने के लिए प्रदेश में बोरवेल अधिनियम बनाया गया है। ऐसा अधिनियम बनाने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। उन्होंने विभागीय संरचना और गतिविधियों को अधिक बेहतर बनाने के लिए विभाग के सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एकीकृत करने का सुझाव दिया। मंत्री  उइके बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान- 2026 में डिंडोरी और मंडला जिले में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं पर काम पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस काम को 'कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर' अवधारणा से जोड़ा जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल समन्वय करें। केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन अन्तर्गत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल ने मध्यप्रदेश को यह आवंटन जारी करने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से राज्य में ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे कि सभी नलजल योजनाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल बचाने वाले और इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वालों का राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित करें। बताया गया कि विभाग द्वारा जल महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसमें प्रदेश में एकल एवं समूह नल जल योजना के संचालन एवं प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल महोत्सव कार्यक्रम को जल गंगा संर्वधन अभियान के साथ जोड़ने और जल बचाने के लिए अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत विभाग द्वारा ग्रामीण, शहरी एवं स्कूलों में स्थापित जल स्रोतों की वाटर टेस्टिंग की जा रही है। साथ ही हैंडपंपों की जांच एवं नल जल योजना के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल स्रोतों के लिए पीएचई केवल टयूबवेल जैसे माध्यम पर ही आश्रित न रहे। जल स्रोत के रूप में तालाब सरोवर निर्माण से कई लाभ होंगे। इससे जल संरक्षण के साथ जल स्तर में वृद्धि होगी। क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग बढ़ेगी। जल संग्रहण क्षमता बढ़ने के साथ ही नल-जल योजना के संचालन के लिए स्थायी जल संरचना भी उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (मैपकास्ट) की विशेषज्ञ सेवाओं का भी लाभ लें। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  मनीष सिंह ने बताया कि विभागीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया गया है। पेयजल आपूर्ति में आ रही समस्या की सूचना मिलते ही उसे तत्काल दूर किया जा रहा है। पेयजल से निर्माण कार्य करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि म.प्र. जल निगम के समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण खर्चे को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही हैं। पीएचई सोलर एण्ड विंड एनर्जी का बल्क यूजर है। प्रमुख सचिव  सिंह ने बताया कि प्रदेश में दिसम्बर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक  क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दिये गये, साथ ही 15 हजार 238 नवीन नलकूप/हैंडपंप भी स्थापित किये गये। प्रदेश के 14 हजार 200 गांवों में जल प्रदाय व्यवस्था का शत् प्रतिशत काम पूरा कर इन्हें हर घर जल घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत परिवारों को नल से जल के तहत कवर कर लिया गया है।   म.प्र. जल निगम के प्रबंध संचालक  वी.एस. कोलसानी ने बताया कि उज्जैन राजस्व संभाग की एकल ग्राम नल जल योजनाओं के काम पूरे कर लिये गये है। यहां 7 लाख 9 हजार 65 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दे दिए गये है। प्रदेश की 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से प्रमाणित करा लिया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं की उपयोगिता के आंकलन और हितग्राहियों से शिकायतें/सुझाव प्राप्त कर उनका निराकरण करने के लिए ऑनलाइन जल दर्पण पोर्टल भी तैयार किया गया है। उन्होंने बताया गया कि विभाग में प्रचलित प्रमुख विकास योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन का कार्य तेजी से … Read more

मुंबई पुणे मिसिंग लिंक – बिना सरकारी बोझ के 6600 करोड़ की परियोजना! महाराष्ट्र के फाइनेंस मॉडल से सीख लेगा मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच को धरातल पर उतरने के लिए मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात अध्ययन यात्रा पर गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सड़क परियोजनाओं, उनके वित्तीय मॉडल, सड़क विकास की दीर्घकालीन रणनीति और भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से तैयार की गई डिजिटल गवर्नेंस तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों विस्तार से चर्चा की। मध्यप्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से यह अध्ययन यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है बताई जा रही है। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग  सुखबीर सिंह, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सिबी चक्रवर्ती, विभाग के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा एवं  एसआर बघेल तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच को धरातल पर उतारने का प्रयास अध्ययन दौरे का उद्देश्य केवल अन्य राज्यों की परियोजनाओं को देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि सड़कों को आर्थिक विकास, निवेश, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से कैसे जोड़ा जाए। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना आवश्यक है। पहला दिन : महाराष्ट्र में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का अध्ययन एवं मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट की। बैठक में अधोसंरचना विकास, बड़े प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  फडणवीस ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं की सफलता केवल धन उपलब्ध होने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, इनोवेटिव फाइनेंस मौडलिंग, तेज निर्णय प्रक्रिया और लगातार निगरानी आवश्यक होती है। बैठक में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले राज्य राजमार्गों और प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मिलकर सीमावर्ती मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद MSRDC के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. अनिलकुमार गायकवाड़, संयुक्त प्रबंध संचालक  राजेश पाटिल,  लक्ष्मीनारायण मिश्रा तथा  राजेश निघोट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुख्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेगा इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और फाइनैन्सिंग मॉडेल्स की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 3.5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मिलकर करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उन्हें "कोर रोड नेटवर्क" घोषित किया है। इन्हें वर्ष 2047 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। MSRDC ने बताया कि कोर रोड नेटवर्क को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है     ग्रोथ कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो उद्योग, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इन मार्गों पर बेहतर सड़कें बनने से उद्योगों तक कच्चा माल जल्दी पहुंचता है, किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचती है और नए निवेश आकर्षित होते हैं।     टूरिज्म कॉरिडोर ये ऐसे मार्ग हैं जो प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अच्छी सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का विशेष अध्ययन किया क्योंकि मध्यप्रदेश में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है। समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण का केंद्र बैठक में महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं और उनके वित्तीय मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से समृद्धि महामार्ग के लिए अपनाई गई वित्तीय रणनीति ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के माध्यम से बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग कैसे किया जा सकता है। अटल सेतु का अध्ययन प्रतिनिधिमंडल अटल सेतु परियोजना के भ्रमण किया। समुद्र के ऊपर निर्मित यह पुल आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना की निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, रखरखाव व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय मॉडल की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने जाना कि इतनी बड़ी परियोजना में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित किया गया और समय-सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया। मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक : इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण अटल सेतु के बाद प्रतिनिधिमंडल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की मिसिंग लिंक परियोजना के अध्ययन के लिए पहुंचा। यह परियोजना देश की सबसे जटिल सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है। इसके साथ भारत का सबसे ऊंचा केवल-स्टे (Cable Stayed) पुल भी इस परियोजना का भाग है। परियोजना की कुल लागत लगभग 6600 करोड़ रुपये है। सबसे रोचक तथ्य यह रहा कि इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए महाराष्ट्र सरकार को अलग से वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। इसका पूरा वित्तीय प्रबंधन मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से प्राप्त टोल राजस्व के आधार पर किया गया। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने इसे एक अनुकरणीय मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए भी ऐसे नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक का भी भ्रमण किया। यहां अधिकारियों ने परियोजना के संचालन, रखरखाव, परिसंपत्ति … Read more

हाईकोर्ट में जज साहब क्यों भड़के? बोले- अदालत के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

प्रयागराज  कोर्ट की अवमानना से जुड़े एक मामले में की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत पर मामलों के बोझ की बात कही है। कोर्ट का कहना है कि कार्यवाहियों को पूरा होने में समय लगता है, लेकिन इस दौरान पक्षों को अदालत के आदेशों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसके खिलाफ सीधी चेतावनी दे दी है। याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा है कि कई बार अदालतों में एक दिन में 800 से ज्यादा केस आते हैं। जस्टिस शैलेंद्र ने कहा, '“इलाहाबाद उच्च न्यायालय जैसे अत्यधिक बोझ से दबे संवैधानिक न्यायालयों में जहां हर दिन प्रत्येक न्यायाधीश के समक्ष लगभग 400, 500, 600 और कभी कभी 800 से अधिक मामले सूचीबद्ध होते हैं, न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में काफी समय लग सकता है। कभी-कभी वर्ष और कभी-कभी दशक भी। फिर भी लोग ऐसे अत्यधिक कार्यभार वाले न्यायाधीशों से हमेशा काम करने वाले सुपर रोबोट, सुपर कंप्यूटर या सुपरह्यूमन बनने की उम्मीद करते हैं।' दे दी चेतावनी उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि इस लंबित प्रक्रिया के दौरान कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। जज ने कहा, 'कानून ऐसी हिम्मत को बर्दाश्त नहीं करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति की अनुमति दी गई, तो न्याय प्रशासन अराजकता में चला जाएगा। क्या था मामला दरअसल, कोर्ट एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोप थे कि शिक्षक की सैलरी से जुड़े आदेश को लागू नहीं किया गया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर जिला विद्यालय निरीक्षक ने 18 अप्रैल 2022 को जारी एक आदेश को लागू नहीं किया था। इसपर राज्य ने कहा कि उनकी तरफ से कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक आवेदन दिया गया है, जिसके चलते आदेश का पालन नहीं हुआ। भड़क गया कोर्ट अब राज्य की तरफ से मिले इस जवाब पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक अदालत का आदेश सिर्फ एडवाइजरी नहीं है और न ही सिर्फ कागज का टुकड़ा है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा, 'इसके साथ संविधान की पूरी शक्ति और कानून के शासन का गंभीर आदेश जुड़ा होता है। जिस पल मुकदमों में शामिल पक्षों को अदालती आदेशों को अपनी मर्जी या विकल्प के तौर पर मानने की छूट दे दी जाएगी, उसी पल संवैधानिक शासन की बुनियाद कमजोर होने लगेगी।' कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी हुई है, वह तय नहीं कर सकता कि इसका पालन करना है या नहीं। बेंच ने कहा कि इस तरह के आवेदन अदालत के आदेश को कमजोर नहीं कर सकते। महात्मा गांधी का किया जिक्र कोर्ट ने कहा कि यह न्यायपालिका की अथॉरिटी पर हमला करने जैसा है। इ दौरान अदालत ने महात्मा गांधी 'My Experiments with Truth' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी की एक मशहूर बात है, जो उन्होंने अपनी किताब 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में लिखी थी कि 'आपकी इजाजत के बिना कोई आपका अपमान नहीं कर सकता।' यह बात कोर्ट की अवमानना के मामले में भी पूरी तरह लागू होती है। एक बड़े कोर्ट ने जो आदेश दे दिया, जब तक वह लागू है और रद्द नहीं हुआ है, तब तक उसे मानना ही पड़ेगा और उसका पूरा सम्मान करना होगा। अगर ऐसे आदेश को खुलेआम ताक पर रख दिया जाए और कोर्ट सिर्फ इसलिए चुप रह जाए या कोई कार्रवाई न करे क्योंकि उस आदेश को बदलने या हटाने की कोई अर्जी अभी कोर्ट के सामने पेंडिंग है, तो इससे कोर्ट की जो साख और ताकत कम होगी, उसके लिए सिर्फ आदेश तोड़ने वाला ही जिम्मेदार नहीं माना जाएगा।' क्या हुआ फैसला चार सालों तक आदेश लागू नहीं होने के मद्देनजर अदालत ने विद्यालय निरीक्षक को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया। साथ ही 8 जुलाई को आरोप तय किए जाने की बात कही है। कोर्ट ने कहा कि वह चाहें तो अभी भी साल 2022 के अदालती आदेश का पालन कर सकता है। वह ऐसा करके खुद को कोर्ट की अवमानना के आरोप से बचा सकता है।

सोशल मीडिया पर नाबालिगों की एंट्री पर रोक, मलेशिया ने लागू किए सख्त नियम

कुआलालंपुर  मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने वाले नए नियम लागू करना शुरू कर दिया है. यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की ग्लोबल कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि इस फैसले को लेकर सभी लोग सहमत नहीं हैं और कुछ लोगों ने डेटा सुरक्षा तथा संभावित निगरानी को लेकर चिंता भी जताई है. नए नियमों के तहत मलेशिया में कम से कम 80 लाख यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उम्र की जांच करने वाली व्यवस्था लागू करनी होगी. इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे नया अकाउंट न बना सकें।  मलेशिया सरकार ने जारी किए निर्देश मलेशिया के कम्युनिकेशन और मल्टीमीडिया कमीशन के अनुसार मौजूदा यूजर्स की उम्र का सत्यापन अगले 6 महीनों के भीतर शुरू किया जाएगा. जिन यूजर्स की उम्र 16 साल से कम है, उन्हें अपने फोटो, वीडियो और अन्य डेटा डाउनलोड या ट्रांसफर करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद उनके अकाउंट पर प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई लागू की जा सकती है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 1 करोड़ रिंगिट यानी लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं यदि कोई बच्चा नियमों को दरकिनार कर अकाउंट बनाने में सफल हो जाता है, तो उसके माता-पिता के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी।  मलेशिया के अलावा अन्य देशों में बैन मलेशियाई सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य मकसद बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाना है. सरकार का मानना है कि कुछ प्लेटफॉर्म फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ सकता है. दुनिया के कई अन्य देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र आधारित नियम लागू किए हैं या उनकी घोषणा की है. वहीं ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह की नीतियों पर विचार कर रहे हैं।  सोशल मीडिया को बैन करने का खास मकसद क्या है? मलेशिया के रेगुलेटरी बोर्ड ने कहा है कि इन नियमों का मकसद बच्चों को डिजिटल तकनीक से दूर करना नहीं है. बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर सुरक्षा बढ़ाने, अत्यधिक उपयोग को रोकने और कम उम्र के यूजर्स व नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए बाध्य करना है. हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वे इन नियमों का पालन किस तरह करेंगी. इस बीच, क्लारा कोह ने चेतावनी दी है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पूरी तरह रोक लगाने से उल्टा असर भी हो सकता है. उनके अनुसार इससे किशोर सुरक्षित और नियंत्रित प्लेटफॉर्म छोड़कर इंटरनेट के ऐसे हिस्सों की ओर जा सकते हैं, जहां निगरानी और सुरक्षा के उपाय कम होते हैं।  ऑस्ट्रेलिया समेत इंडोनेशिया में सोशल मीडिया पर बैन ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है. यह नियम 10 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुआ. इसके बाद इंडोनेशिया ने 28 मार्च 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कानूनी रोक लागू की. फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का विधेयक निचले सदन से पारित हो चुका है, हालांकि इसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है. डेनमार्क भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की योजना पर काम कर रहा है।  दुनिया के कई देशों में बैन ग्रीस ने जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीं स्पेन, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, स्लोवेनिया, तुर्की और ब्रिटेन जैसे देश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए नए नियमों और संभावित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं. इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है. फ्रांस में पहले से लागू नियमों के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है. जर्मनी में भी 13 से 16 साल की उम्र के बीच के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है।   

जनता दर्शन में करीब 200 लोगों से मिले सीएम योगी

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र नागरिक तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। आवास से लेकर इलाज तक, बिटिया की पढ़ाई व विवाह से लेकर निराश्रितों व बुजुर्गों की पेंशन तक, समाज के हर जरूरतमंद के लिए सरकार की अनेक योजनाएं हैं। सभी पात्र लोगों से आवेदन कराकर इन योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जाए। सीएम योगी मंगलवार को जनता दर्शन में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। सोमवार देर शाम गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंदों को आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय संबल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन जरूर करें। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि हर पात्र व्यक्ति का संबंधित योजना में आवेदन कराकर लाभ दिलाया जाए।  सीएम योगी ने जनता दर्शन में आए लोगों के प्रार्थना पत्रों को निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और सन्तुष्टिपरक होना चाहिए। अधिकारी जन समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाएं। जनता दर्शन में इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी।  जनता दर्शन में जौनपुर जिले से आई एक महिला ने एक एनजीओ पर फर्जी प्रमाण पत्र देने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जांच की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मामले में जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाए। जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को मुख्यमंत्री ने खूब दुलारा और आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्हें खूब पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए चॉकलेट दीं। मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने की गोसेवा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा भी की। उन्होंने स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाई। उन्होंने गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए।

हार्दिक पंड्या और रोहित शर्मा पर BCCI सख्त, फिटनेस टेस्ट के बाद ही होगा चयन

 नई द‍िल्ली  अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को अपनी फिटनेस साबित करनी होगी. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने साफ कर दिया है कि अंतिम एकादश में जगह से पहले उन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से फिटनेस क्लियरेंस हासिल करना होगा।  हार्दिक पंड्या को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल तो किया गया है, लेकिन उनके नाम के साथ फिटनेस संबंधी शर्त भी जोड़ी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक हार्दिक 2 जून को बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे और सीरीज शुरू होने से पहले वहां एक सप्ताह से अधिक समय बिताएंगे।  इस दौरान 32 वर्षीय ऑलराउंडर को फिटनेस ड्रिल, फिजिकल असेसमेंट से गुजरना होगा. सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही उन्हें RTP (Return To Play) मंजूरी मिलेगी. इसके बाद ही अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उनकी उपलब्धता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।  हार्दिक के लिए यह फिटनेस टेस्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि IPL 2026 में मुंबई इंडियंस की कप्तानी करते हुए उन्हें पीठ में ऐंठन (Back Spasms) की समस्या हुई थी. इसी वजह से वह टूर्नामेंट के दौरान कुछ मुकाबलों में नहीं खेल पाए थे. उनका आखिरी वनडे मुकाबला ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ था।  रोहित शर्मा को भी CoE में रिपोर्ट करने का निर्देश सिर्फ हार्दिक ही नहीं, पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को भी BCCI ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिपोर्ट करने के लिए कहा है. रोहित IPL 2026 के दौरान हैमस्ट्रिंग चोट से जूझ रहे थे. इसी कारण अफगानिस्तान सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम में उनके नाम के आगे भी फिटनेस संबंधी शर्त लगाई गई है।  हालांकि मुंबई इंडियंस के हेड कोच महेला जयवर्धने ने हाल ही में दावा किया था कि रोहित पूरी तरह फिट हैं. जयवर्धने के मुताबिक रोहित को चोट से उबरने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और मेडिकल टीम ने उन्हें 100 प्रतिशत फिट माना है।  उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि IPL में रोहित का इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर इस्तेमाल टीम की रणनीति का हिस्सा था, इसका उनकी फिटनेस से कोई संबंध नहीं था. जयवर्धने ने कहा कि मुंबई इंडियंस अपनी टीम की जरूरतों के हिसाब से फैसले लेती है और रोहित हमेशा टीम की मांग के अनुसार खुद को ढालते हैं।  भारत और अफगान‍िस्तान की वनडे सीरीज कब से है? भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज 13 जून से धर्मशाला के HPCA स्टेडियम में शुरू होगी. दूसरा मुकाबला 17 जून को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेला जाएगा, जबकि तीसरा और अंतिम वनडे 20 जून को चेन्नई में आयोजित होगा।  अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की वनडे टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा*, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उपकप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या*, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बरार और हर्ष दुबे।  अब सबकी नजर हार्दिक पंड्या और रोहित शर्मा की फिटनेस रिपोर्ट पर रहेगी. अगर दोनों खिलाड़ियों को समय पर क्लियरेंस मिल जाती है तो अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की टीम और भी मजबूत नजर आएगी। 

खुद को ‘डीलमेकर’ और नेतन्याहू को ‘हार्डलाइनर’ बता रहे ट्रंप? वायरल दावे से सियासी हलचल

यरुशलम तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है, अगर मैं न होता, तो तुम अब तक जेल में होते. ये मैं हूं जो तुम्हारी जान बचा रहा हूं. अब हर कोई तुमसे नफरत करता है. इसी वजह से हर कोई इजरायल से भी नफ़रत करता है। ये दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष की भाषा तो कतई नहीं है. तो फिर क्या हुआ कि ट्रंप अपने सबसे करीबी साथी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर इस तरह बिफर गए।  हैरान करने वाले ये जुमले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की है. जो उन्होंने फोन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद गुस्से में कहे. इस टकराव का खुलासा अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में की है।  ये झगड़ा नहीं स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति सचुमच इजरायली प्रधानमंत्री से नाराज है. ट्रंप और नेतन्याहू के बीच टकराव मुख्य रूप से ईरान डील और लेबनान/हेजबुल्लाह पर है. यह कोई पुराना व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि ईरान-इजराइल-यूएस टेंशन के बीच का स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है।  दरअसल ट्रंप की प्राथमिकता अब एक ऐसी डील है जिसे वह अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें. ट्रंप ईरान के साथ डील में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से बड़ी लकीर खींचना चाहते हैं।  उन्होंने हाल ही में दावा किया कि ईरान के साथ समझौता निकट हो सकता है और बातचीत तेज गति से चल रही है. लेकिन ये वार्ता बार बार डिरेल हो रही है.  दूसरी ओर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों और लेबनान में बढ़ते संघर्ष ने इन वार्ताओं को बार-बार बाधित किया है. ईरान ने भी आरोप लगाया है कि इजरायली हमले कूटनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  नेतन्याहू 'हार्डलाइनर' और ट्रंप 'डीलमेकर' विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति दोहरी हो सकती है. पहला वह ईरान को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए गंभीर है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला पक्ष हमेशा वॉशिंगटन नहीं है. तेल अवीव भी ऐसा करता है. दूसरा वह नेतन्याहू पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाना चाहते हैं कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयां अमेरिकी कूटनीतिक लक्ष्यों को बाधित न करें।  कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ट्रंप को लगता है कि समझौता उनकी राजनीतिक जीत साबित हो सकता है, तो वह नेतन्याहू को "कठोर नेता" की छवि में दिखाकर खुद को "डीलमेकर" के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं. इसलिए वह ट्रंप को कथित रूप से कड़वे शब्द कह रहे हैं।  एक्सियोस के अनुसार लेबनान में ऑपरेशन के लिए ट्रंप ने नेतन्याहू को खरी-खोटी सुनाई और अपशब्दों तक का प्रयोग कर डाला. ट्रंप इजरायल द्वारा लेबनान में शुरू की जा रही सैन्य कार्रवाई से बेहद खफा थे. खासकर बेरूत पर हमले की योजना से. इजरायल का ये कदम  ट्रंप की ईरान के साथ चल रही डिप्लोमेसी को बर्बाद कर सकती थी।  इजरायल को सता रहा अलग डर वहीं इजरायली पक्ष को डर है कि ट्रंप ईरान को कमजोर करने के बजाय अस्थायी डील पर राजी हो जाएंगे, जिससे तेहरान को सांस लेने का मौका मिलेगा और हेजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी मजबूत होंगे।  ट्रंप ईरान के साथ अपनी डील को पूरा करने के लिए इजरायल की कार्रवाइयों को समस्या के रूप में पेश कर सकते हैं. इससे अमेरिकी जनता और गल्फ सहयोगियों में इजरायल पर दबाव बढ़ेगा।  ट्रंप के लिए ईरान युद्ध जल्द खत्म करना राजनीतिक जरूरत है. अमेरिका की इकोनॉमी, तेल कीमतें और 2026 के मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रंप इसे किसी भी कीमत पर पूरा करने चाह रहे हैं।  इजरायल को 'प्रॉब्लम' दिखाकर ट्रंप ईरान पर भी डील के लिए राजी होने का अप्रत्यक्ष दबाव डाल रहे हैं. इसके बाद ट्रंप के पास इजरायल को ये कहने का अधिकार होगा कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इजरायल को लेबनान पर हमला करने से रोक दिया अब ईरान की बारी है कि वो डील के शर्तों पर राजी हो।  ईरान बातचीत तेज करने का दावा कर रहा है, लेकिन लेबनान में छोटे-मोटे हमले जारी हैं. ट्रंप की 'आर्ट ऑफ डील' फिर परीक्षा की कसौटी पर है. क्या वे इजरायल को काबू में रख ईरान को मना पाएंगे, या क्षेत्र फिर आग की चपेट में आ जाएगा?