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UP Politics: चुनावी गर्मी के बीच NDA की OBC रणनीति ने बढ़ाया सियासी तापमान, अखिलेश पर दबाव

 नई दिल्ली उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात अभी से ही बिछाई जाने लगी है. लोकसभा चुनाव में सपा ने पीडीए समीकरण के जरिए बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे. अब चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर की तिकड़ी इन दिनों अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और सपा के 'पीडीए फार्मूले' को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं?  अखिलेश यादव 2024 के फार्मूले से ही 2027 का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. सपा की कोशिश पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ ब्राह्मण वोटों को जोड़ने की है. इसके अलावा अखिलेश यादव इन दिनों 'विजन इंडिया' के जरिए बीजेपी के कोर वोटबैंक माने जाने वाले व्यापारियों को अपने पाले में करने की रणनीति है।  सपा एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग के साथ विधानसभा चुनाव में उतरना चाहती है, जिसके समझते हुए बीजेपी ने अपने ओबीसी नेताओं की एक पूरी फौज सियासी रण में उतार दिया है. इसी के तहत केशव प्रसाद से लेकर संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर हर रोज अखिलेश की सियासी केमिस्ट्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।  अखिलेश के सिरदर्द बने राजभर योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 2022 में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सरकार बनने के बाद बीजेपी के साथ हो गए थे. वो पूर्वांचल से आते हैं और राजभर समाज के बड़े चेहरे माने जाते हैं. ओबीसी के मुद्दे पर राजभर आक्रमक रहते हैं. 2024 में एनडीए को बिगड़े हुए समीकरण को दुरुस्त करने के मद्देनजर से ओमप्रकाश राजभर  एक तरफ सपा में बगावत की चिंगारी भड़का रहे हैं तो दूसरी ओर अखिलेश के पीडीए पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।  राजभर यह कह रहे हैं कि सपा में बहुत जल्द बगावत होने वाली है, तमाम लोकसभा सांसद अखिलेश यादव का साथ छोड़ देंगे. इसके लिए कभी बलिया के किसी नेता की तरफ इशारा करते हैं तो कभी मुरादाबाद की सांसद रूची वीरा की तरफ इशारा करते हैं. साथ ही सपा के पीडीए फार्मूले को कठघरे में  खड़ा कर रहे हैं. राजभर ने कहा कि पीडीए का मतलब 'पीट देगा अहीर' और 'पीट देगा अल्पसंख्यक' है।  ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि सपा नेताओं को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वो दलितों पर होने वाले अत्याचारों के मामलों को सार्वजनिक नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस के आंकड़े बताता हैं कि प्रदेश में दलितों और शोषितों पर अत्याचार करने के मामले में सबसे ज्यादा यादव और मुस्लिम लोग हैं. ओपी राजभर ने दलित उत्पीड़न के आंकड़े भी गिना रहे हैं. इस तरह राजभर बताना चाहते हैं कि दलितों पर होने वाले अत्याचार यादव और मुस्लिम कर रहे हैं, जो सपा का वोटबैंक है।  संजय निषाद भी सपा पर हमलावर योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी फ्रंटफुट पर उतर गए हैं और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि सपा के कई बड़े नेता उनके संपर्क में हैं. राजभर से दो हाथ आगे निकलते हुए निषाद कहते हैं कि सपा के 25 सांसद हमारे संपर्क में है, जिसके जरिए बता रहे हैं कि सपा में बड़ी फूट होने वाली है।  

चार राज्यों से 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच तेज; डिजिटल सबूत खंगाल रही एजेंसियां

भोपाल  मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी। एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है। चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं। डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे। सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  

मौसम का कहर या आने वाली बड़ी चेतावनी? ग्लेशियर पिघलने से लेकर बाढ़ तक, क्यों बढ़ रही चिंता

 नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन का सबसे क्रूर और भयानक चेहरा अब दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले महाद्वीप यानी एशिया के सामने आ चुका है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट – स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन एशिया 2025- ने वैश्विक पर्यावरण वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के पैरों तले जमीन खिसका दी है. 17 जून 2026 को सार्वजनिक की गई इस वैज्ञानिक रिपोर्ट में यह खौफनाक खुलासा हुआ है कि एशिया महाद्वीप में तापमान बढ़ने की रफ्तार वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेज हो चुकी है।  सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि साल 1991 से 2025 के बीच एशिया में तापमान वृद्धि की दर, वर्ष 1961-1990 की अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी दर्ज की गई है. इस बेकाबू होती तपिश के कारण ही पिछला साल यानी 2025 एशिया के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म साल साबित हुआ।  यह रिपोर्ट सिर्फ मौसमी आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक ऐसी गंभीर चेतावनी है जो यह साबित करती है कि जलवायु संकट अब किसी दूर के भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि भारत, चीन, जापान और पाकिस्तान सहित पूरे एशिया की वर्तमान और सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है।  एशिया में तापमान वृद्धि की तेज रफ्तार पिछले कुछ दशकों में एशिया दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल हो गया है जहां जलवायु परिवर्तन का सबसे तेज असर दिख रहा है.रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि वैश्विक औसत की तुलना में एशिया का तापमान कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. 1991-2025 की अवधि में तापमान वृद्धि की दर पिछले लंबे समय की तुलना में दोगुनी दर्ज की गई।  2025 में यह प्रभाव साफ दिखा. जापान, चीन और दक्षिण कोरिया ने अपने रिकॉर्ड की सबसे गर्म गर्मियां देखीं. मध्य और पश्चिम एशिया में कई महीनों तक लू का कहर जारी रहा. कजाकिस्तान में कुछ महीनों में तापमान सामान्य से 14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा, जबकि बहरीन में लगातार 10 दिन 40 डिग्री से ऊपर तापमान दर्ज किया गया।  गर्मी और सूखे ने दक्षिण कोरिया में अब तक की सबसे बड़ी जंगल की आग को जन्म दिया. भारत में भी कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं और फसलों को नुकसान पहुंचा।  कहीं भारी बारिश और बाढ़, कहीं सूखा और जल संकट 2025 में एशिया के मौसम ने चरम रूप दिखाया. एक तरफ दक्षिण एशिया में असामान्य भारी मानसूनी बारिश हुई, तो दूसरी तरफ पश्चिम और मध्य एशिया सूखे की चपेट में रहे. पाकिस्तान में बाढ़ ने 1000 से ज्यादा लोगों की जान ली और 30 लाख से अधिक लोगों को विस्थापित कर दिया. वियतनाम में बाढ़ से 200 से ज्यादा मौतें हुईं और करीब 1.9 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।  चक्रवात सेन्यार ने थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में भारी तबाही मचाई. वहीं ईरान समेत कई देशों में लंबे सूखे और जल संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं. अप्रैल 2025 में पश्चिम एशिया में आए धूल-रेत के तूफानों ने परिवहन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया।  भारत में भी कुछ राज्यों में भारी बारिश से बाढ़ आई, जबकि कई हिस्सों में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बने. यह स्थिति दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन अब एक साथ सूखा और बाढ़ दोनों का खतरा बढ़ा रहा है।  हिमालय और तिब्बत के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं रिपोर्ट का सबसे अलार्मिंग हिस्सा हिमालयी और तिब्बती क्षेत्र से आया है. तिब्बती पठार दुनिया का तीसरा ध्रुव माना जाता है क्योंकि यहां ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद सबसे ज्यादा बर्फ है. लेकिन अब यह बर्फ तेजी से पिघल रही है. अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच 23 ग्लेशियरों में से सभी ने बर्फ खोई।  तियानशान और पामीर पर्वतों में बर्फ की भारी कमी दर्ज की गई. इससे न सिर्फ भविष्य में पानी की उपलब्धता पर असर पड़ेगा, बल्कि ग्लेशियर झील फटने (GLOF) जैसी आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है. भारत, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि हिमालयी नदियां इन ग्लेशियरों पर निर्भर हैं. गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का भविष्य इन ग्लेशियरों से जुड़ा हुआ है।  अब क्या करना चाहिए? डब्ल्यूएमओ की महासचिव प्रोफेसर सेलेस्टे साउलो ने स्पष्ट कहा है कि बढ़ते तापमान, गर्म महासागर, समुद्र स्तर वृद्धि और पिघलते ग्लेशियर एशिया के लिए गंभीर खतरा हैं. हमें तुरंत तीन काम करने होंगे- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां मजबूत करना और जलवायु अनुकूलन के उपाय तेज करना।   भारत को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन पर और ज्यादा निवेश करना चाहिए. शहरों में हरे-भरे क्षेत्र बढ़ाने, वर्षा जल संचयन, सूखा प्रतिरोधी फसलें विकसित करने और तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव संरक्षण जैसे कदम उठाने होंगे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी मदद मिलनी चाहिए।  समय अब कार्रवाई का है डब्ल्यूएमओ की 2025 रिपोर्ट सिर्फ पिछले साल का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि भविष्य की चेतावनी है. एशिया जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े मोर्चे पर खड़ा है. गर्मी, बाढ़, सूखा, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ता समुद्र स्तर हर दिन हमें याद दिला रहे हैं कि अब इंतजार करने का समय नहीं रहा।  भारत समेत पूरे एशिया को मिलकर काम करना होगा. अगर आज सही कदम उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी, वरना नुकसान बहुत भयानक होगा. जलवायु संकट अब कोई दूर का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती है. समय रहते जागना और ठोस कार्रवाई करना ही एकमात्र रास्ता है।  महासागरों का बढ़ता खतरा एशिया के आसपास के महासागर भी खतरे की घंटी बजा रहे हैं. 2025 में समुद्री गर्मी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. जुलाई से सितंबर के दौरान एक करोड़ वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में समुद्री लू देखी गई, जो चीन या अमेरिका जितना बड़ा क्षेत्र है।  उत्तरी हिंद महासागर में समुद्र स्तर वैश्विक औसत से तेजी से बढ़ रहा है. भारत के तटों पर यह दर 4.9 मिलीमीटर प्रति वर्ष है, जबकि वैश्विक औसत 3.6 मिलीमीटर है. समुद्र में एसिडिफिकेशन भी बढ़ रहा है, जिससे मछली पालन, कोरल रीफ और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में हैं. गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के तटीय इलाकों के लिए यह गंभीर खतरा है।  प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की … Read more

चुनावी रण से पहले कांग्रेस में हलचल, पंजाब इकाई में बड़े बदलाव की चर्चा तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि गुटबाजी, कई पावर सेंटर और अंदरूनी खींचतान का फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है।  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की बैठक की है. इस बैठक का मकसद संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं का आकलन करना है।  इसके बाद पार्टी ने अजय माकन समेत तीन सदस्यों की एक ऑब्जर्वर कमेटी गठित कर दी है. इस कमेटी को पंजाब की स्थिति का मूल्यांकन करने और भविष्य की रणनीति पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है. कमेटी की रिपोर्ट से पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम तय होगा।  हाईकमान ने हलचल बढ़ाई पंजाब को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की गंभीरता लगातार बढ़ती बैठकों से साफ दिखाई दे रही है. पिछले दो सप्ताह में ही पार्टी ने पंजाब मामलों पर चार महत्वपूर्ण बैठकें की हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि हाईकमान चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक कमियों को दूर करना चाहता है।  ऑब्जर्वर कमेटी ने करीब 70 नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है. इनमें सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं. चर्चाओं का केंद्र संगठनात्मक पुनर्गठन, लंबित चुनावी समितियां और नेतृत्व में संभावित बदलाव है।  सूत्रों के मुताबिक, ऑब्जर्वर कमेटी ने नेताओं से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर भी राय मांगी है. उनसे पूछा गया कि क्या वर्तमान नेतृत्व को जारी रखा जाना चाहिए या बदलाव की जरूरत है. कमेटी अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. इसके बाद संगठनात्मक बदलाव हो सकते हैं।  PCC में बदलाव की बहस तेज स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की बहस को तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को अपने राजनीतिक गढ़ गिद्दड़बाहा में बड़ा झटका लगा. यहां आम आदमी पार्टी ने 19 में से 17 नगर निकाय वार्डों में जीत दर्ज की थी।  इस प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नेतृत्व में बदलाव पर जोर देना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 में मजबूत चुनौती पेश करनी है, तो संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा. दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा भारी हुआ है।  चन्नी स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद अधिक मजबूत होकर उभरे हैं. चमकौर साहिब में कांग्रेस के अच्छे नतीजों ने उनके राजनीतिक कद को बढ़ाया है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि चन्नी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं. उनके साथ कई नाम चर्चा में हैं।  चन्नी की महत्वाकांक्षा और चुनौती इसमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजेंदर सिंगला के नाम भी संभावित PCC चीफ के तौर पर चर्चा में हैं. इससे साफ है कि नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर कई दावेदार मौजूद हैं. चन्नी की बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. वो अभी भी पंजाब में बड़े चेहरे हैं।  उनकी गिनती कांग्रेस के सबसे बड़े दलित चेहरे के रूप में होती है. लेकिन पार्टी नेतृत्व 2022 विधानसभा चुनाव के अनुभव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता. कांग्रेस ने तब उनको पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था. इसके बावजूद पार्टी सत्ता बरकरार नहीं रख सकी।  यही कारण है कि संगठन के भीतर इस बात पर अलग-अलग राय है कि क्या चन्नी को फिर से पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया जाना चाहिए. चन्नी समर्थकों का तर्क है कि उनके पास दलित समाज में मजबूत जनाधार है. इतना ही नहीं वो पार्टी को सामाजिक संतुलन देने की क्षमता रखते हैं।  जट्ट और दलित सिख समीकरण वहीं विरोधी खेमे का मानना है कि कांग्रेस को किसी एक चेहरे पर निर्भर होने की बजाय संगठन को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती जट्ट और दलित सिख के बीच संतुलन बनाए रखने की है. दोनों बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।  फिलहाल पार्टी के दो सबसे अहम पद जट्ट सिख नेताओं के पास हैं. राजा अमरिंदर सिंह वारिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, जबकि प्रताप सिंह बाजवा कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चन्नी समर्थक दलित नेताओं का एक वर्ग संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है।  यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब देश का वह राज्य है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी सबसे अधिक है. हालांकि, इसके साथ ही कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में चुनाव के दौरान दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुआ है।  कमेटी की रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें ऐसे में नेतृत्व से जुड़ा कोई भी फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा, बल्कि उसका सीधा असर पार्टी के सामाजिक और चुनावी समीकरणों पर भी पड़ेगा. फिलहाल पंजाब कांग्रेस की राजनीति का केंद्र अजय माकन की अगुवाई वाली ऑब्जर्वर कमेटी की रिपोर्ट बन गई है।  ये रिपोर्ट तय कर सकती है कि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव होगा या मौजूदा टीम को ही 2027 चुनाव तक मौका दिया जाएगा. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और भूपेश बघेल की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। 

मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सख्ती, हर प्रोजेक्ट में 80% पेड़ों का ट्रांसलोकेशन जरूरी; नई नीति लागू

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का ड्राफ्ट पेश किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य विकास परियोजनाओं (जैसे रोड, मेट्रो, फ्लाईओवर) के नाम पर होने वाली अंधाधुंध पेड़ों की कटाई को रोकना और वयस्क पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट करने को प्राथमिकता देना है। '20-फॉर-1' का कड़ा और नया नियम इस प्रस्तावित नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका '20-फॉर-1' वृक्षारोपण फॉर्मूला है। अगर किसी बेहद अपरिहार्य स्थिति में एक पेड़ को काटना पड़ता है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी को उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। नियमों के मुताबिक, इनमें से 10 पौधे सीधे तौर पर कटे हुए पेड़ के मुआवजे के रूप में होंगे, जबकि शेष 10 पौधे इसलिए लगाए जाएंगे ताकि ट्रांसप्लांटेशन के दौरान जिन वयस्क पेड़ों की जान नहीं बच पाती, उनके नुकसान की भरपाई की जा सके। ग्वालियर के थाटीपुर मामले से लिया सबक दरअसल, यह पूरी कवायद ग्वालियर के थटीपुर पुनर्विकास योजना के दौरान सामने आई लापरवाही के बाद शुरू हुई है। वहां बड़ी संख्या में शिफ्ट किए गए पेड़ देखरेख के अभाव में मर गए थे, जिस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार से एक व्यापक नीति मांगी थी। अब नए नियमों के तहत प्रोजेक्ट डिजाइन में बदलाव करके पहले पेड़ बचाने की कोशिश करनी होगी। पेड़ काटना केवल अंतिम विकल्प होगा। ऑनलाइन डैशबोर्ड से जनता करेगी निगरानी भ्रष्टाचार और कागजी दावों को रोकने के लिए सरकार ने इस बार तकनीक का सहारा लिया है। नीति के अनुसार, सभी ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों और नए रोपे गए पौधों की अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके लिए एक सार्वजनिक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस डैशबोर्ड पर पेड़ों की सटीक लोकेशन, उनकी तस्वीरें और रखरखाव का पूरा रिकॉर्ड रीयल-टाइम में अपडेट होगा, जिससे आम नागरिक भी इसकी सीधे निगरानी कर सकेंगे।  

150वीं जयंती वर्ष पर डोंडराही में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा के ग्राम डोंडराही में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि यह स्थल अब “बिरसा मुंडा चौक” के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन अन्याय, शोषण और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने जनजातीय अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन आज भी जनजातीय समाज सहित पूरे देश को अपने अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री  साय ने क्षेत्र के विकास एवं सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु कुल 37 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने बैगाटोली कर्मा में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 15 लाख रुपये, कुदमुरा नांदो टोली में रंगमंच निर्माण हेतु 8 लाख रुपये, कुदमुरा पतराटोली (डिबा टोली) में सांस्कृतिक मंच निर्माण के लिए 7 लाख रुपये तथा केशव घर के समीप स्थित हनुमान मंदिर परिसर में मंच निर्माण के लिए 7 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। जनजातीय विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 6,661 गांव इस योजना में शामिल हैं, जहां सड़क, पेयजल, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचना जनजातीय समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने जशपुर को जनजातीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि यहां स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम देशभर में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को ढाई वर्षों के भीतर पूरा किया है। सरकार गठन के 24 घंटे के भीतर 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिनमें से 10 लाख 60 हजार से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दिया जा रहा है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की जा रही है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस भी प्रदान किया गया है।उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण दर को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा दर्शन योजनाओं से हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। डिजिटल सेवाओं और जनसुविधाओं का विस्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 6,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ हो चुके हैं, जहां आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भविष्य में प्रत्येक पंचायत में यह सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की गई है, जिसमें शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए संचालित मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि बकाया बिजली बिलों पर अधिभार पूरी तरह माफ किया जा रहा है।  कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री  योगेश बापट ने भी भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पद्म जागेश्वर यादव, विधायक मती गोमती साय एवं मती रायमुनी भगत, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष  शंभूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष  यशप्रताप सिंह जूदेव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

Telegram Ban Case: अदालत ने खींची रेड लाइन, जरूरत पड़ने पर सरकार लगा सकती है स्थायी प्रतिबंध

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर बैन हटाने से इनकार कर दिया है. भारत सरकार ने टेलीग्राम पर RE-NEET एग्जाम के चलते अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया था, जिसको टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।  दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी के पास पावर है. कोर्ट ने कहा है कि आईटी एक्ट सरकार को पूरे प्लेटफॉर्म/ऐप पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है. सरकार के पास यह आदेश जारी करने की शक्ति थी.हाई कोर्ट के इस फैसले के मायने उन सभी मैसेजिंग ऐप के लिए हैं, जो भारत में काम करते हैं।  हाई कोर्ट के फैसले से समझ आता है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के बाहर नहीं रखा जा सकता है और उन्हें भारतीय संविधान के तहत काम करना होगा।  21 जून को भारत में NEET एग्जाम भारत में 21 जून को भारत में NEET 2026 का एग्जाम दोबारा होने जा रहा है, जिसके चलते भारत सरकार ने सावधानी के तौर पर टेलीग्राम पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और बैन हटाने से इनकार कर दिया है।  टेलीग्राम पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप  टेलीग्राम पर अक्सर पेपर लीक और फेक पेपर सर्कुलेट होने के आरोप लगते रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने दलील देते हुए बताया गया है कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई आतंकवादी गतिविधी में भी हुआ है. ये ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसको कई लोग गैर कानूनी सामान बेचने आदि में भी इस्तेमाल करते हैं।  टेलीग्राम पर ढेरों फीचर्स ऐसे हैं, जिसकी वजह से इसपर अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया गया है. इसपर बिना फोन नंबर के भी अकाउंट तैयार किया जा सकता है. साथ ही एक वर्चुअल ग्रुप में मैक्सिमम 2 लाख तक लोगों को शामिल किया जा सकता है।  व्हाट्सऐप भी जा चुका है कोर्ट  भारत में यह कोई पहला सोशल मीडिया ऐप नहीं है, जो भारतीय न्यायपालिका गया है. इससे पहले मेटा भी वॉट्सऐप पर लगाए गए एक पैनल्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा चुका है. साल 2024 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सऐप पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में किया सड़क निर्माण कार्य का किया भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर में आयोजित लोकार्पण व भूमि-पूजन कार्यक्रम में कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया है और उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  उन्होंने कहा कि  नगर निगम इंदौर ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा स्वच्छता अभियान में इंदौर ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में देश ने विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि के प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश दोनों विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिली है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में विकास के विभिन्न मानकों पर निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को विकास का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजनांतर्गत जोन 8 में सड़क का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर के जोन क्रमांक 8 के वार्ड क्रमांक 37 में तुलसी नगर पुलिया से निपानिया तक प्रस्तावित सड़क विकास कार्य और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य का आज रिमोट से भूमि-पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें सड़क निर्माण कार्य की लागत 13.26 करोड़ और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य की लागत 2.64 करोड़ रुपए है। यह सड़क लगभग 1.30 किलोमीटर लंबी एवं इन्दौर विकास योजना-2021 के अनुसार 30 मीटर चौड़ाई में निर्मित होगी। परियोजना अंतर्गत सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण, सीवर चैम्बरों का सुदृढ़ीकरण, फुटपाथ निर्माण तथा विद्युत लाइन शिफ्टिंग सहित विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्य किए जाएंगे। सड़क के निर्माण से तुलसी नगर, निपानिया, अंकुर आंगन, राजाराम ऐवेन्यु तथा महालक्ष्मी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और नागरिकों को बेहतर एवं नई कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी। भूमि-पूजन समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् के गायन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं समस्त जन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। महापौर इंदौर  पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ और तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया। विकास कार्यों की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन समारोह में कनाड़िया रोड से खजराना रोड तक लगभग 1400 मीटर लिंक रोड  बनाने की घोषणा की। उन्होंने पूर्वी रिंग रोड से रोबोट चौराहे तक 6 लेन फ्लाई-ओवर बनाने की घोषणा की। इसकी अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने कहा कि अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए भी ठोस कार्य करने के प्रयास करेंगे। हितलाभ का किया गया वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना अंतर्गत 2 हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया जिसमें  राहुल मरमट और  जगदीश उपाध्याय को 50-50 हजार के प्रतीकात्मक चेक मंच से प्रदान किये गये। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट,  क्षेत्रीय सांसद  शंकर लालवानी,  क्षेत्रीय विधायक  महेन्द्र हार्डिया,  मधु वर्मा,  रमेश मेंदोला,  सुमित मिश्रा तथा संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अमला उपस्थित रहे।

बिहार को हाईस्पीड रेल की सौगात, पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन से सफर होगा बेहद आसान

 पटना /नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को बिहार की राजधानी पटना से बुलेट ट्रेन के जरिये जोड़ने पर सरकार काफी गंभीरता से काम कर रही है.  रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि पटना एक बार बुलेट नेटवर्क से जुड़ जाएगा तो इससे बिहार को काफी सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि पटना से दिल्ली की यात्रा मात्र 4 घंटे 41 मिनट की रह जाएगी. उन्होंने कहा कि आगे पटना से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन का विस्तार किया जाएगा. आने वाले समय में इसके लिए भी तैयारी शुरू हो गई है. पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच में अगले साल शुरू होने वाली है।  रेल मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में बिहार में बुलेट ट्रेन आएगी. ये ट्रेन दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से वाराणसी, वाराणसी से पटना और पटना से सिलिगुड़ी तक जाएगी. इसके बाद दिल्ली से पटना की यात्रा मात्र 4 घंटे और 41 मिनट की रह जाएगी।  इससे पहले रेल मंत्री ने कहा था कि भारत ने अब स्वयं बुलेट ट्रेन बनाने की क्षमता रखता है. उन्होंने अगले साल मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम शुरू करने की घोषणा की है।  पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन (हाई-स्पीड रेल) प्रोजेक्ट भारत के पूर्वी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा है. यह अभी पूर्ण रूप से प्लानिंग और सर्वे स्टेज में है, यहां अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।  यह बुलेट ट्रेन दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है. पटना इस रूट पर प्रमुख स्टेशन होगा. दिल्ली से पटना की दूरी अभी लगभग 1000 से 1100 किलोमीटर के बीच में है. इस यात्रा में अभी 12 से 17 घंटे लगते हैं. लेकिन बुलेट ट्रेन के बाद ये यात्रा 5 घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी।  बिहार दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है।  राज्य के एक दिन के दौरे पर आए वैष्णव ने छपरा से दिल्ली के लिए एक नई एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की।  रेल मंत्री ने कहा, "राज्य से लोकोमोटिव (इंजन) एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. आज बिहार के मरहौरा प्लांट से 51वां लोकोमोटिव इंजन एक अफ़्रीकी देश को एक्सपोर्ट किया जाएगा." वैष्णव ने बताया कि बिहार में लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली रेल परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं।  पटना रेलवे स्टेशन पर बन रहे हैं 5 नए प्लेटफॉर्म रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चालू वित्त वर्ष में बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड रेलवे बजट आवंटित किया है।  उन्होंने बताया कि यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के लिए पटना रेलवे स्टेशन पर पांच अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं. रेल मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की राजधानी के पास स्थित फतुहा स्टेशन का भी विकास किया जा रहा है। 

42 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां, 38 हजार परिवारों का होगा गृह-प्रवेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल शनिवार, 20 जून को इंदौर जिले के सांवेर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां तथा 38 हजार से अधिक परिवारों को उनके नवीन पक्के आवासों में गृह-प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही 2 हजार 935 करोड़ रुपये लागत की 48.10 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तथा सभी पात्र परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना के निर्माण के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास को नई गति दे रही है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना मालवा अंचल की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। लगभग 48.10 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) पर विकसित किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने पर इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के बनने से बेहतर और सुगम आवागमन सुविधा प्राप्त होगी। स्थानीय निवासियों एवं किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 18 अंडर-पास तथा 19 जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन-बदनावर मार्ग के साथ ग्रेड सेपरेटेड जंक्शन विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।