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रेल बजट जैसा तोहफा! छपरा-दिल्ली एक्सप्रेस लॉन्च, पटना स्टेशन होगा और आधुनिक

 पटना केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार, 19 जून को बिहार की राजधानी पटना में रेलवे विकास को नई गति देने वाली कई बड़ी घोषणाएं की हैं. रेल मंत्री ने कहा कि बिहार में रेलवे के 1.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को रेलवे बजट में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी गई है. उन्होंने कहा, बिहार में पूरी तरह से रेलवे विकास हो रहा है।  रेल मंत्री ने पटना के हार्डिंग पार्क इलाके में 5 नए प्लेटफॉर्म बनाने का ऐलान किया है. पटना स्टेशन का विस्तार होगा तो रेल क्षमता बढ़ेगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और ट्रेनों का आना-जाना सुगम होगा. हार्डिंग पार्क में इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है।  रेल मंत्री ने कहा कि छपरा से दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की जा रही है. इससे यात्रियों को सीधा और आरामदायक सफर मिलेगा. रेल मंत्री ने बिहार में बने रेल इंजनों की सराहना की।  मढ़ौरा रेल इंजन कारखाने से आज 51वां लोकोमोटिव इंजन निर्यात के लिए रवाना हो रहा है. यह इंजन अफ्रीकी देश गिनी को भेजा जाएगा. वैष्णव ने कहा कि बिहार में बने इंजन अब विदेशों में भी जा रहे हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।  रेल मंत्री ने बताया कि बिहार में चल रही सभी रेलवे परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी. केंद्र सरकार बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. आने वाले समय में और नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।  दिल्ली और एनसीआर के यात्रियों को मिलेगी राहत रेल मंत्रालय के अनुसार छपरा और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। बढ़ती मांग को देखते हुए 12527/12528 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस-छपरा साप्ताहिक एक्सप्रेस तथा 14055/14056 मऊ-आनंद विहार टर्मिनस-मऊ एक्सप्रेस को मंजूरी दी गई है। नई सेवाओं से यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। छपरा-दिल्ली साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय 12527 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार रात 8:50 बजे छपरा से रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2:00 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में 12528 आनंद विहार टर्मिनस-छपरा एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार शाम 4:25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 9:40 बजे छपरा पहुंचेगी। इन स्टेशनों पर होगा ठहराव यह ट्रेन बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे के अनुसार उद्घाटन के अवसर पर इन ट्रेनों का संचालन विशेष उद्घाटन गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। इससे यात्रियों को नई सेवाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा।  

मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु सिकल सेल उन्मूनल मिशन भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ऐतिहासिक पहल केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में किया सराहनीय कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने शहडोल से लांच किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन आनुवंशिक रोगों की जांच की उपलब्धि में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण राष्ट्रपति ने म.प्र. में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में हुई सामुदायिक भागीदारी को सराहा मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल सिकल सेल मुक्त मध्यप्रदेश का हमारा संकल्प जन सहयोग से होगा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस का हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम ओंकारेश्वर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मैं इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित response देने की दूरदर्शी सोच भी थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। ICMR, Tribal Health Research Institutes, AIIMS, NHM, WHO और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आंकलन सामने आया कि:-     भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं।     लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं।     सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय क्षेत्र में है।     अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, Genetic Science और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी:     पहलाः बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना।     दूसराः व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना।     तीसराः प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाये रखना। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी carrier भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया … Read more

अयोध्या को बदनाम मत करो, 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और कर लो’, चढ़ावा चोरी मामले पर योगी का जवाब

अयोध्या  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे. राम मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम मत करो. अयोध्या का विकास कुछ लोगों से नहीं पच रहा. जब 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार कर लो. रुदौली में कामाख्या मंदिर के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि वे लोग उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने जय श्रीराम का नारा लगाने पर राम भक्तों पर गोली चलवाई थी. वे लोग ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने राम मंदिर ना बने इसके लिए कोर्ट में वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी थी. मुख्यमंत्री का इशारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तरफ था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि SIT जांच कर रही है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. अपराधियों को ऐसे सजा मिलेगी जो इतिहास बनेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के पास सबूत हो तो SIT को मुहैया कराए. किसी के बहकावे में ना आएं. इन लोगों ने अयोध्या को सकरी गलियों में धकेल कर रखा था, आज अयोध्या का नाम हो रहा है, इन्हें अच्छा नहीं लग रहा है.  SIT अपना काम कर रही है. किसी को अगर SIT से कोई शिकायत रहेगी तो उसको भी SIT से पूछने का मौका दिया जाएगा. जांच के दौरान किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें. किसी का चारित्रिक हनन नहीं किया जाना चाहिए. दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा।  आज विपक्ष रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहा है उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध किया. भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी की सरकार में रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं. इतना ही नहीं, जय श्रीराम के उद्घोष पर लाठियां बरसाई गईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यही लोग रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और यह जांच पूरी निष्पक्षता से होगी. उन्होंने रामभक्तों से मर्यादा और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “जब हमारे पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के लिए 500 वर्षों तक मर्यादा के साथ संघर्ष और इंतजार किया है, तो अब 15 दिन और धैर्य रखिए।  बाबर से प्यार करते हैं अखिलेश मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई दस्तावेजी प्रमाण है तो उसे एसआईटी को सौंपे और जांच पूरी होने तक कोई भी अनावश्यक बयानबाजी न करें. साथ ही उन्होंने लोगों से अयोध्या और राम मंदिर को बदनाम करने वाले दुष्प्रचार के बहकावे में न आने की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबर को प्यार करने वाले अखिलेश यादव राम मंदिर की बात कर रहे हैं। 

भोपाल में विकास कार्यों पर फिर सवाल, करोड़ों का फुटपाथ तैयार; लोगों के लिए पहुंचना बना चुनौती

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है।  शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है।  स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है।  सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं।  रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है।  ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं? फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है।  रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।   

धुस्सी बांध सड़क परियोजना शुरू, जालंधर के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत; सीचेवाल ने जताई खुशी

 जालंधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज जालंधर दौरे के दौरान शाहकोट में सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर बनने वाली 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का शिलान्यास किया। गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ेगी। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के लंबे प्रयासों और मान सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित इलाके के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इससे उनकी वर्षों पुरानी मांग भी पूरी हो गई है। बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इससे लोगों का सफर आसान होगा। भारी सुरक्षा के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को विशेष रूप से जालंधर दौरे पर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जालंधर में सतलुज नदी के पूरे किनारे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसी कड़ी सुरक्षा के बीच उन्होंने शाहकोट पहुंचकर धुस्सी बांध सड़क का शिलान्यास किया। 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण इस प्रोजेक्ट के तहत सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक एक मजबूत और पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क लगभग 35 किलोमीटर लंबी होगी। इसके बनने से पूरे क्षेत्र और आसपास के लोगों की आवाजाही में बड़ा सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। संत सीचेवाल के प्रयासों की सराहना इस शिलान्यास समारोह के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल विशेष रूप से मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए संत सीचेवाल लंबे समय से लगातार प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोग उनके इन प्रयासों को बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। 2023 की बाढ़ के बाद उठी थी मांग सीचेवाल ने इस मौके पर 2023 की पुरानी आपदा को याद करते हुए कहा कि मंडाला छन्ना के पास अचानक धुस्सी बांध टूट गया था। बांध टूटने के कारण पूरे इलाके में बाढ़ आ गई थी, जिससे लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। तभी से बांध को मजबूत करने और उस पर पक्की सड़क बनाने की मांग लगातार उठ रही है। दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा संत सीचेवाल ने आगे बताया कि गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह पक्की सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में सीधे जोड़ेगी। इससे लोगों का सफर आसान होगा और बांध की मजबूती भी बढ़ेगी। इस इलाके की यह मांग पिछले कई सालों से लंबित थी, जिसे अब भगवंत मान सरकार ने पूरा कर दिया है। पिछली सरकारों के प्रति स्थानीय लोगों में था रोष इस मौके पर मंडाला छन्ना, गट्टा मुंडी कासू, गिदड़पिंडी समेत आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे कई सालों से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे थे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। मान सरकार का जताया आभार ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए कहा कि मौजूदा मान सरकार द्वारा इस सड़क का नींव पत्थर रख दिया गया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे क्षेत्रवासियों को वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिलेगी और उनका जीवन अधिक सुगम हो जाएगा।  

बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

PM मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- उनकी नेतृत्व शैली प्रभावशाली और दृढ़ है

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं।  इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं।   भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा "प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!"

कच्चा तेल हुआ सस्ता, लेकिन पेट्रोल-डीजल के भाव जस के तस! 19 जून के ताजा रेट चेक करें

नई दिल्ली कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज  के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले आइए जानते हैं आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल किस कीमत पर मिल रहा है और क्या कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा जल्द ग्राहकों तक पहुंचेगा।  देश के बड़े शहरों में क्या हैं नए रेट? सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा कीमतों के मुताबिक, आज पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।      दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.     मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.     कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है.     चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है. गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भुवनेश्वर और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता हुआ है। कच्चा तेल  79 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 9% की बड़ी गिरावट ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है.पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 9% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है।  क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? मंत्री ने दिया जवाब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं. इसके अलावा परिवहन लागत, बाजार की स्थिति और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत जैसे कई अन्य कारक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।  सुरेश गोपी के मुताबिक, कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लेता है. यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है और वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में भी कुछ समय लगेगा. मंत्री ने साफ कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल कुछ सस्ता हुआ है।  सरकार पर पड़ा 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया में इस साल हुए युद्ध के दौरान ग्लोबल ऑयल मार्केट  में काफी अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा.उन्होंने बताया कि बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. इसके कारण सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।  मंत्री ने यह भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने टैक्स में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा. केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना जरूरी है।  देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य, घबराकर  न करें खरीदारी सरकारी तेल कंपनियों ने कहा है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां भी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.फ्यूल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तेल सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) लगातार सरप्राइज निरीक्षण कर रहे हैं. नियमों के उल्लंघन पर 14 पेट्रोल पंपों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 598 पेट्रोल पंपों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।  आम लोगों को सलाह दी गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।  US-Iran शांति समझौते का क्या पड़ा असर? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है.इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो गई है. यही जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।  अमेरिका ईरान युद्ध के दौरान ईरान और अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।  क्या ग्राहकों को जल्द मिलेगा सस्ते तेल का फायदा? एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत मिल सकती है.हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।   

इजरायल में ट्रंप की लोकप्रियता को झटका, सिर्फ 11% लोगों ने माना युद्ध का विजेता

यरुशलम मिडिल-ईस्ट में हालिया संघर्ष के बाद सामने आए एक इजरायली चैनल के सर्वे ने वहां की राजनीति और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चैनल 12 के सर्वे के मुताबिक, बड़ी तादाद में इजरायली नागरिक न तो इस जंग में अपने देश को स्पष्ट विजेता मानते हैं और न ही उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वे ईरान के साथ किसी समझौते में इजरायल के हितों की रक्षा करेंगे।  सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिससे इजरायल की घरेलू राजनीति में बढ़ती असंतुष्टि के संकेत मिले हैं।  गुरुवार को पब्लिश हुए एक टेलीविज़न पोल में पाया गया कि बहुत कम इजरायली मानते हैं कि उनका देश ईरान के साथ हुई लड़ाई जीता है, या उन्हें भरोसा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक रिपब्लिक के साथ डील करते वक्त उनके हितों का ध्यान रखेंगे। . नेतन्याहू के बर्ताव पर सवाल! चैनल 12 न्यूज़ के मुताबिक, ज़्यादातर इजरायली नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायल के हितों को नुकसान पहुंचा है. ये आंकड़े उस मजबूत समर्थन से बिल्कुल अलग हैं, जो इजरायली लोग सालों से हर पोल में ट्रंप को देते आए हैं।   हालांकि, अब इस हफ्ते साइन किए गए US-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की शर्तों को लेकर पूरे इजरायल में गहरी चिंता है, जबकि ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों की तरफ से हाल ही में इजरायली अधिकारियों की कड़ी सार्वजनिक आलोचना से US-इजरायल संबंधों में दरार का संकेत मिलता है।  चैनल 12 के पोल में यह पूछा गया कि क्या नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायली हितों को फायदा हुआ या नुकसान; इसमें पाया गया कि 52% लोगों का कहना है कि इससे नुकसान हुआ, जबकि 24% को लगता है कि इससे मदद मिली और बाकी 24% को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।  यह पूछे जाने पर कि क्या वे ईरान के साथ समझौते में इजरायली हितों का ध्यान रखने के लिए ट्रंप पर भरोसा करते हैं? इस पर 71% लोगों ने कहा कि वे ऐसा नहीं करते हैं, जबकि केवल 13% ने कहा कि वे ऐसा करते हैं और अन्य 16% को नहीं पता. ये संख्या पिछले हफ्ते से इस सवाल पर ट्रंप के लिए गिरावट का संकेत देती हैं, जब आंकड़ा 62% से 21% था।  इन सवालों को एक सर्वे के हिस्से के रूप में शामिल किया गया था कि अगर अक्टूबर में आम चुनाव आज होते हैं, तो इजरायल के लोग किसको वोट देंगे, जिसमें दिखाया गया है कि जायोनी विपक्षी दल नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से कम रहेंगे।  ‘बिबी का समर्थन करने की सबसे ज्यादा संभावना’ ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच मौजूदा मतभेद को और साफ करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि वे आने वाले चुनावों में नेतन्याहू का समर्थन 'शायद' करेंगे, लेकिन पहले यह देखना चाहते हैं कि उनके खिलाफ और कौन चुनाव लड़ रहा है।  ट्रंप ने 'कान' (Kan) पब्लिक ब्रॉडकास्टर को फोन पर दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू के निकनेम का इस्तेमाल करते हुए कहा, "मुझे देखना होगा कि कौन चुनाव लड़ रहा है, लेकिन मुझे बिबी बहुत पसंद हैं. सबसे ज्यादा संभावना यही है कि मैं उनका समर्थन करूंगा।  ट्रंप ने आगे कहा, "वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा और समझदारी से काम लेना चाहिए." ऐसा लगता है कि वे लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमलों का जिक्र कर रहे थे, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि वे बिना सोचे-समझे किए गए थे।   

चंदा चोरी विवाद पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, कहा—SIT जांच सच सामने लाएगी

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जनपद के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सहित ₹378 करोड़ से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने वहां वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण भी किया. मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल संघर्ष हुआ है, इसलिए कोई भी अयोध्या को बदनाम न करे. किसी के पास चंदा चोरी का कोई सबूत है तो वह एसआईटी को दे, इसकी पूरी जांच और सख्त एक्शन होगा।  अयोध्या को बदनाम करने वालों पर बरसे सीएम सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले लोग केवल बदनाम करने का काम कर रहे हैं. इनका आचरण सबके सामने है, जिन्होंने कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं, श्री राम बोलने पर लाठियां चलवाईं और कोर्ट में प्रभु राम के खिलाफ केस लड़े।  मुख्यमंत्री ने नसीहत दी कि जांच रिपोर्ट आने तक कोई भी इस मामले में बयानबाजी न करे और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करे. उन्होंने भरोसा दिया कि अगर कोई अपराधी है तो वह बचेगा नहीं, यह पूरी तरह कन्फर्म है।  बकौल सीएम योगी- सबको अपनी जिम्मेदारी का दायित्व निभाना होगा. जिम्मेदारी का दायित्व निभायेंगे तभी विकास होगा. सपा जय श्री राम कहने पर गोली चलवाती थी. हमने ट्रस्ट की मांग पर SIT बनवाई. जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा. हां, अगर… किसी के पास कोई सुबूत हो तो SIT को दे. लेकिन बयानबाजी से अयोध्या का अपमान न करे. जनता अपमान करने वालों से सावधान रहे।  बेटियों के लिए पीएसी की 3 नई बटालियन अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों और वीरांगनाओं के प्रति श्रद्धा भाव को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया. उन्होंने घोषणा की कि डबल इंजन की सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई और उदा देवी के सम्मान में कई अभियान शुरू किए हैं. इसी कड़ी में सरकार ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई कोरी और वीरांगना उदादेवी पासी के नाम पर पीएसी की तीन नई बटालियन गठित की हैं. सबसे खास बात यह है कि इन तीनों बटालियन में केवल बेटियों की ही भर्ती की जाएगी।