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भारत ने सिंधु पानी पर लगाया रोक, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने लिया अहम फैसला

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को मिलने वाले सिंधु नदी का पानी रोक दिया है, जिसके बाद कई इलाकों में उसे सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. इस बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में जल संकट और भी गंभीर हो सकता है.  तालिबान ने कुनार नदी का पानी नांगरहार क्षेत्र की ओर मोड़ने की योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है. इस कदम से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में नदी के बहाव में भारी कमी आ सकती है. हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर काफी तनाव हो गया था, जिसमें दोनों देशों के कई सैनिक भी मारे गए.  तालिबान के आर्थिक आयोग के पास भेजा गया प्रस्ताव अफगानिस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय के आर्थिक आयोग की तकनीकी समिति की बैठक में कुनार नदी से नांगरहार स्थित दारुंता बांध में पानी मोड़ने के प्रस्ताव को चर्चा के बाद अनुमोदित कर अंतिम निर्णय के लिए आर्थिक आयोग को भेज दिया गया. एक बार लागू होने के बाद इस परियोजना से अफगानिस्तान के नंगरहार में कई कृषि भूमि को प्रभावित करने वाली जल की कमी का समाधान होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी के प्रवाह पर असर पड़ेगा. तालिबान के फैसले से PAK पर क्या होगा असर? करीब 500 किलोमीटर लंबी कुनार नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में स्थित हिंदू कुश पर्वतमाला से निकलती है. इसके बाद यह दक्षिण की ओर अफगानिस्तान में बहती है और कुनार और नंगरहार प्रांतों से होते हुए काबुल नदी में मिल जाती है. यह नदी पाकिस्तान में बहने वाली सबसे बड़ी नदियों में से एक है और सिंधु नदी की तरह, सिंचाई, पीने के पानी और जलविद्युत उत्पादन का एक प्रमुख स्रोत है, विशेष रूप से सुदूर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के लिए जो सीमा पार हिंसा का केंद्र रहा है. अगर अफगानिस्तान कुनार नदी पर बांध बनाता है तो इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली परियोजनाओं के लिए पानी तक पाकिस्तान की पहुंच बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत द्वारा सिंधु नदी के जल आपूर्ति को प्रतिबंधित करने के कारण पहले से ही सूखे से जूझ रहे हैं. PAK-तालिबान के बीच नहीं कोई समझौता इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली के साथ सिंधु जल संधि (IWT) के विपरीत, इस्लामाबाद का काबुल के साथ इन जलक्षेत्रों के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं है, जिसका अर्थ है कि तालिबान को पीछे हटने के लिए मजबूर करने का तत्काल कोई उपाय नहीं है. तालिबान के इस कदम से पाकिस्तान-अफगानिस्तान हिंसा के फिर से भड़कने की आशंका बढ़ गई है. 

मुख्यमंत्री ने मोबाईल फॉरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना

मोबाईल फॉरेसिंक वैन से अपराध अनुसंधान तकनीकी होगी सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने मोबाईल फॉरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना तकनीकी क्षमता संवर्धन के लिए 36 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदी गई फॉरेंसिक वैन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में अपराध अनुसंधान, साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई मोबाइल फॉरेंसिक वैनों को पुलिस मुख्यालय भोपाल से झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि मोबाईल फॉरेसिंक वैन मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में सीन ऑफ क्राइम के इनवेस्टीगेशन में अत्याधिक कारगर साबित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पुलिस विभाग द्वारा की गई यह पहल फॉरेंसिक-आधारित, त्वरित और सटीक विवेचना को बढ़ावा देगी, जिससे अपराधों के शीघ्र खुलासे, दोषसिद्धि दर में वृद्धि और नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा और सुदृढ़ होगा। मध्यप्रदेश पुलिस को कुल 57 मोबाईल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी लागत 36 करोड़ 94 लाख 17 हजार 969 रुपए है। राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदाय की गई है। इनमें से 14 मोबाईल फॉरेंसिक वैन 16 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई है, जिन्हें रवाना किया गया है। शेष मोबाईल फॉरेसिंक वैन भी शीघ्र ही जिलों को उपलब्ध कराई जाएंगी। मोबाईल फॉरेंसिक वैन अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं, जिनमें स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फ्रिज, एलईडी टीवी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा सहित आवश्यक उपकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वैनों में जांच किट, अपराध स्थल सुरक्षा किट, फिंगर प्रिंट, रक्त व बाल पहचान, हाई-इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स, पैर व टायर निशान, आगजनी, साक्ष्य पैकिंग, बुलेट होल, गनशॉट अवशेष, नशीले पदार्थ, विस्फोटक पहचान तथा डीएनए कलेक्शन एवं चेन ऑफ कस्टडी से संबंधित किट भी उपलब्ध हैं।  

जिला परिषद और पंचायत समिति में AAP की बड़ी जीत, अकाली दल ने पाया संजीवनी

जालंधर  पंजाब के पंचायत समिति व जिला परिषद चुनाव में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़ी जीत दर्ज की है। 50 प्रतिशत सीटें जीतकर आप चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। साथ ही शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को भी चुनाव से संजीवनी मिली है।   आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में आप की बम्पर जीत बताती है कि पंजाब के लोगों को आप सरकार के काम कितने पसंद आ रहे हैं। ये जनता के भरोसे की जीत है। कांग्रेस ने आप को टक्कर दी है जबकि अकाली दल ने भी पिछले कुछ चुनावों के मुकाबले इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है। भाजपा के हाथ इस चुनाव में भी निराशा लगी है। चुनाव में सभी दलों के दिग्गजों को भी अपने हलकों में सीटें गंवानी पड़ी है। प्रदेश की 2838 पंचायत समिति और 347 जिला परिषद की जोन के लिए बुधवार को 154 मतदान केंद्रों पर मतगणना शुरू हुई। नतीजों में बहुमत के साथ ही आप ने जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। पंचायत समिति में आप ने 1316 व जिला परिषद में 145 सीटों पर जीत कर ली है। दिग्गजों के हलकों में हारने के बावजूद सत्तापक्ष का दबदबा जारी है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस रही, जिसने पंचायत समिति में 490 और जिला परिषद में 30 सीटों पर जीत दर्ज की है। अकाली दल ने पंचायत समिति में 290 व जिला परिषद में 26 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं भाजपा ने पंचायत समिति में 56 सीटें जीती पर जिला परिषद में उसका खाता नहीं खुला। वहीं आजाद उम्मीदवारों ने पंचायत समिति में 122 व जिला परिषद में 7 सीटें जीती। विधायक भराज व स्पीकर संधवां के गांव में आप हारी सीएम भगवंत मान के पैतृक गांव सतौज में ब्लॉक समिति चुनाव के धरमगढ़ जोन से आप प्रत्याशी हरविंदर पाल ऋषि ने जीत दर्ज की है। वहीं संगरूर से आप विधायक नरिंदर कौर भराज के जद्दी गांव भराज से आप के जिला परिषद प्रत्याशी हार गए जबकि पूर्व वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा के जद्दी गांव ऊभावाल से अकाली दल पुनर्गठित समर्थित आजाद प्रत्याशी शिंदरपाल सिंह चुनाव जीते हैं। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के गांव आप प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। पंचायत समिति के 8098 और जिला परिषद के लिए 1249 उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना के दौरान विपक्ष ने कई जगहों पर आम आदमी पार्टी पर धक्केशाही का आरोप लगाया है। अकाली दल ने आरोप लगाया कि शिअद के विजेता उम्मीदवारों को साजिश के तहत हराया गया है वहीं आप ने भी कुछ सीटों पर हार के बाद दोबारा मतगणना की मांग की। सरकार की नीतियों पर भरोसा: अमन अरोड़ा जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में पार्टी को बड़ा जनादेश देकर पंजाब के लोगों ने आप सरकार के शासन और नीतियों में विश्वास जताया है। जिस तरह के नतीजे आ रहे हैं, उससे आम आदमी पार्टी के पक्ष में एकतरफा जनादेश साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पंचायत समिति के 867 जोन में पार्टी आगे हैं। पार्टी नेताओं, विधायकों, उम्मीदवारों और खासतौर पर समर्पित कार्यकर्ता को बधाई। यह जीत जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का नतीजा है। -अमन अरोड़ा, प्रधान, आप पंजाब। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: वड़िंग आम आदमी पार्टी ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। इस बीच कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की मेहनत से जो नतीजे आएं हैं उससे मैं संतुष्ट हूं। जिस तरह से चुनाव में धक्केशाही हुई है उसे ध्यान में रखते हुए चुनाव के नतीजों से कोई ज्यादा हैरानी नहीं हुई है। सत्तापक्ष की तरफ से विपक्ष के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया गया। उम्मीदवारों को धमकाया गया लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और काफी सीटों पर जीत दर्ज की। असल मुकाबला विधानसभा चुनाव में होगा जिसमें पंजाब के लोग आप को सत्ता से बाहर करेंगे। -अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रधान, पंजाब कांग्रेस। 2027 में लोग जवाब देंगे: प्रितपाल सरकार ने चुनाव में धक्का किया है जिसका वर्ष 2027 में लोग जवाब देंगे। उम्मीदवारों के हस्ताक्षर तक नहीं करवाए गए और नतीजे जारी कर दिए गए। नतीजों को बदला गया है और इससे अधिक धक्केशाही क्या हो सकती है। आप को भाजपा से डर लगने लगा है जिस कारण ही चुनाव में धक्का किया गया। -प्रितपाल सिंह बलियावाल, प्रवक्ता, पंजाब भाजपा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह ने की सौजन्य भेंट प्रदेश की खेल प्रोत्साहन गतिविधियों के अध्ययन के लिए बिहार का दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह तथा बिहार के खेल महानिदेशक श्री रविंद्रन शंकरन ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्रम तथा स्मृति चिन्ह के रूप में धातु शिल्प के श्री राम दरबार भेंट कर बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह का अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सुश्री सिंह ने बोधि वृक्ष की प्रतिकृति तथा अंगवस्त्रम भेंट किया। इस अवसर पर प्रदेश के खेल संचालक श्री राकेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भेंट के दौरान मध्यप्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। मध्यप्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार और खिलाड़ियों की क्षमता – प्रतिभा निखारने तथा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दृष्टिगत उनके सघन प्रशिक्षण के लिए संचालित गतिविधियों के अध्ययन के लिए बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह के नेतृत्व में बिहार का 5 सदस्यीय दल प्रदेश के दौरे पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के पहले बिहार के दल ने शूटिंग अकादमी, घुड़सवारी अकादमी, वॉटर स्पोर्ट्स सेंटर, टी.टी. नगर स्टेडियम, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर आदि का भ्रमण किया। दल ने प्रदेश में ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर संचालित खेल प्रोत्साहन गतिविधियों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।  

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कही बड़ी बात

संस्कृति में होती है राष्ट्र की आत्माः योगी आदित्यनाथ भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कही बड़ी बात राष्ट्र से अगर उसकी संस्कृति को अलग कर दिया जाए तो वह हो जाता है निस्तेजः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी बोलेः भारत की कला, स्वर व लय ने अपनी इस पहचान को विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी दी निरंतरता एक संस्कृति कर्मी भी राष्ट्र निर्माण में देता है योगदानः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, कलाकार की कला है एक ईश्वरीय गुण जिसकी नहीं होनी चाहिए अवमानना लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्र की आत्मा उसकी संस्कृति में होती है। उन्होंने कहा कि जैसे किसी मनुष्य की आत्मा उसके शरीर से संबंध तोड़ देती है तो शरीर निस्तेज हो जाता है, उसी प्रकार राष्ट्र के जीवन में भी होता है। किसी भी राष्ट्र की संस्कृति को उससे अलग कर दिया जाए तो राष्ट्र निस्तेज हो जाता है। वह खंडहर में परिवर्तित हो जाता है और अपनी पहचान को खो देता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा कि यह अवसर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, भारत की कला, स्वर व लय ने अपनी पहचान को विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए जो निरंतरता दी उसी के बदौलत हमारी सनातन संस्कृति विश्व में खुद को स्थापित करने और आगे बढ़ाने में सफल हुई है। उन्होंने कहा कि कलाकार की कला एक ईश्वरीय गुण है जिसकी हमें अवमानना नहीं करनी चाहिए। कलाकार किसी भी विधा से जुड़ा हो, उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के शताब्दी वर्ष समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का सम्बोधन    "आज मुझे प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है जहां से सांसद के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी जी स्वयं देश की संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं।  यहां पर अभी हमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सोनल मान सिंह ने कहा कि यहां जब नृत्य करते हैं तो नटराज के रूप में भगवान शिव हमारे सामने दिखाई देते हैं। जब हम वीणा में अपने स्वर को लय दे रहे होते हैं तो साक्षात सरस्वती माता सरस्वती हमारे सामने होती है।  हम जब कोई संवाद किसी नाटक में कर रहे होते हैं तो राम की मर्यादा हमारे सामने उस समय देखने को मिलती है और जब हम किसी रस में डूबे होते हैं तो कृष्ण की रस धारा भी हमारे साथ जुड़ती हुई दिखाई देती है। ये कहां मिलेगा सब कुछ तो उत्तर प्रदेश के अंदर मौजूद है" एक संस्कृति कर्मी भी राष्ट्र निर्माण में देता है योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वर, लय और संस्कार को इस संस्थान ने एक नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ने पिछले 100 वर्षों में भारतीय संगीत, नृत्य, नाट्य और ललित कलाओं को न केवल संरक्षित किया है, बल्कि उन्हें आधुनिक शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़कर प्रतिष्ठित भी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक संस्कृति कर्मी भी राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दिशा में भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय से जुड़े सभी महानुभावों के योगदान के लिए उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री योगी ने इस अवसर पर पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर की चिट्ठी का उल्लेख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1940 में गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर ने एक पत्र जारी कर इस संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे की भावनाओं के अनुरूप इस संस्थान को विश्वविद्यालय का स्वरूप प्रदान किया जा सका। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश आज़ाद हुआ और वर्ष 1950 में संविधान लागू हुआ। इसके बाद वर्ष 2017 तक अनेक सरकारें आईं और गईं, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने भातखण्डे संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के विषय में उनसे संवाद किया। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रस्ताव आने में देर हुई, विभाग से निरंतर संवाद हुआ और अंततः वर्ष 2022 में सरकार ने इसे विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी। यह उत्तर प्रदेश का पहला संस्कृति विश्वविद्यालय है। उन्होंने कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा विश्वविद्यालय का कुलगीत और लोगो ‘नादाधीनं जगत्’ थीम पर आधारित किया गया, जिसका अर्थ है-पूरा जगत नाद के अधीन है। यह जीवन की सच्चाई को दर्शाता है। ओंकार है सृष्टि का पहला स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस सृष्टि का पहला स्वर ओंकार है। उन्होंने नाद योग का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति तीनों ही इसकी पुष्टि करते हैं। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय का विजन भी यही है कि नाद के अधीन पूरा जगत है। उन्होंने कहा कि संगीत की विभिन्न विधाओं के माध्यम से इसी नाद की पहचान करना साधना का विषय है। विश्वविद्यालय से जुड़े पूर्व कलाकारों को सम्मानित किए जाने पर उन्होंने कहा कि ये कलाकार न केवल भातखण्डे की परंपरा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित कर रहे हैं। कॉफी टेबल बुक के विमोचन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आने वाले समय में यह पुस्तक प्रेरणा का कार्य करेगी। देश की आज़ादी के शताब्दी महोत्सव के साथ जब विश्वविद्यालय जुड़ रहा होगा, तब यह कॉफी टेबल बुक अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होगी। पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे के योगदान को किया याद मुख्यमंत्री योगी ने पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 1926 में देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था। उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित थी और संगीत तथा कला के लिए मंच उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में पंडित भातखण्डे ने भारतीय संगीत को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। शास्त्रीय अनुशासन, सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम, राग-ताल का वर्गीकरण, क्रमिक पद्धति और गुरु-शिष्य परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना उनका ऐतिहासिक योगदान था। यह कार्य केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को आत्मसम्मान, आत्मगौरव और स्थायित्व देने का प्रयास था। कुम्भ 2019 … Read more

दिल्ली में BS‑4 गाड़ियों पर सख्ती, जानें कैसे करें अपनी कार का BS स्टेटस चेक

 नई दिल्ली देश के राजधानी की हवा को सांस लेने लायक बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने आज से सख्त एंटी-पॉल्यूशन उपाय लागू कर दिए हैं. अब BS-VI इंजन वाले वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश मिलेगा, जबकि बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा. यह फैसला GRAP के स्टेज-IV के तहत लागू किया गया है, जो प्रदूषण के सबसे गंभीर हालात में ही एक्टिव किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले का सीधा असर दिल्ली से सटे गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और नोएडा से रोजाना आने वाले करीब 12 लाख वाहनों पर पड़ेगा. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के वाहन मालिकों के बीच तमाम तरह का कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है. उन्हें डर है कि, दिल्ली में एंट्री करते ही उनकी कार को पकड़ लिया जाएगा. इसके अलावा लोगों में अपने वाहन के भारत स्टैंडर्ड (BS) यानी इमिशन मानक को लेकर भी कन्फ्यूजन है, कि उनकी कार सरकार के इस बैन लिस्ट के दायरे में आएगी या नहीं.  क्या है सरकार का आदेश दिल्ली सरकार का यह आदेश पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत जारी किया गया है, जो GRAP स्टेज-IV (Severe+) लागू रहने तक प्रभावी रहेगा. इस नियम के अनुसार, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की राजधानी में एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-एनसीआर में BS-IV एमिशन मानकों से नीचे आने वाले पुराने वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की इजाजत दे दी है. बिना PUC, नो फ्यूल अब दिल्ली में केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल (पेट्रोल, डीजल या सीएनजी) मिलेगी, जिनके मालिक उक्त वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट पेट्रोल पंप पर दिखाएंगे. यदि कोई भी वाहन फ्यूल पंप पर बिना वैलिड PUC सर्टिफिकेट पकड़ा जाता है तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा और जुर्माना लगेगा. PUC की जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे, VAHAN डाटाबेस, वॉयस अलर्ट सिस्टम से की जाएगी. कैसे पहचाने आपकी गाड़ी रोकी जाएगी या नहीं दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच BS3 और BS4 वाहनों पर पाबंदियां सख्त हो गई हैं. ऐसे में वाहन मालिकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि उनकी गाड़ी BS3 है या BS4. गलत जानकारी न सिर्फ जुर्माने का कारण बन सकती है, बल्कि वाहन जब्त होने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. वाहन के RC से पहचान आपका वाहन BS3 है या BS4, इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देखना है. RC कार्ड या डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल आरसी में “Emission Norms” या “Fuel Norms” का कॉलम होता है. इसमें साफ लिखा होता है कि वाहन BS3 है या BS4. अगर RC 2010 से पहले जारी हुई है तो अधिकतर मामलों में वाहन BS3 होता है, जबकि 2010 से 2020 के बीच रजिस्टर्ड वाहन आमतौर पर BS4 कैटेगरी में आते हैं. मैन्युफैक्चरिंग ईयर से अंदाजा भारत में BS3 मानक 2005 से 2010 तक लागू रहे. इसके बाद 2010 से अप्रैल 2020 तक BS4 नियम लागू हुए. अगर आपकी गाड़ी 2010 से पहले बनी है तो उसके BS3 होने की संभावना ज्यादा है. वहीं 2010 से 2020 के बीच बनी गाड़ियां आमतौर पर BS4 होती हैं. हालांकि यह तरीका अनुमान पर आधारित है, इसलिए पुख्ता पुष्टि के लिए RC देखना जरूरी है. इंजन और चेसिस नंबर से जानकारी वाहन के इंजन नंबर और चेसिस नंबर से भी BS नॉर्म की जानकारी निकाली जा सकती है. अधिकतर कार निर्माता इन नंबरों के जरिए वाहन की पूरी डिटेल बताते हैं. आप कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, कस्टमर केयर या अधिकृत डीलर से संपर्क कर इन नंबरों के आधार पर अपनी गाड़ी का BS3 या BS4 स्टेटस कन्फर्म कर सकते हैं. इन नंबरों को व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) भी कहा जाता है. PUC सर्टिफिकेट से भी मिलेगा सुराग PUC सर्टिफिकेट पर कई बार उत्सर्जन मानक का जिक्र होता है. हालांकि यह हर राज्य में अनिवार्य नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में यहां BS नॉर्म लिखा मिल सकता है. अगर नहीं लिखा है तो PUC सेंटर ऑपरेटर से पूछकर भी जानकारी ली जा सकती है. वाहन के स्टिकर और लेबल पर नजर कुछ वाहनों में बोनट के अंदर, दरवाजे के फ्रेम या इंजन बे में एक एमिशन लेबल लगा होता है. इस लेबल पर वाहन का एमिशन स्टैंडर्ड यानी BS3 या BS4 लिखा होता है. पुराने वाहनों में यह स्टिकर फीका या गायब भी हो सकता है, इसलिए इसे एकमात्र आधार न बनाएं. मोबाइल ऐप से करें पुख्ता जांच सरकार का mParivahan ऐप वाहन से जुड़ी सभी आधिकारिक जानकारियां देता है. ऐप में वाहन नंबर डालते ही फ्यूल टाइप, रजिस्ट्रेशन डेट और एमिशन नॉर्म की जानकारी मिल जाती है. यह तरीका सबसे भरोसेमंद माना जाता है क्योंकि डेटा सीधे सरकारी रिकॉर्ड से आता है. गलत जानकारी से बचना क्यों जरूरी. कई लोग BS3 और BS4 को लेकर भ्रम में रहते हैं और अनजाने में नियम तोड़ बैठते हैं. आज के सख्त एंटी-पॉल्यूशन दौर में सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है. एक मिनट में की गई जांच आपको चालान, फ्यूल बैन और कानूनी परेशानी से बचा सकती है. इसलिए यदि आपको अपने वाहन को लेकर कन्फ्यूजन है तो गाड़ी सड़क पर निकालने से पहले इन बातों की तस्दीक कर लें.

‘जी राम जी’ बिल लोकसभा में पारित, सदन में हंगामा और कॉपी फाड़ने की घटना

नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र का गुरुवार को 14वां दिन है. आज विकसित भारत जी राम जी बिल के लोकसभा से पारित होने की संभावना है. इस विधेयक पर बुधवार देर रात तक सदन में चर्चा चली थी. गुरुवार को ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान चर्चा का जवाब दे रहे हैं. इस बीच विपक्षी सदस्य इस विधेयक का जमकर विरोध कर रहे हैं. उसका कहना है कि इस विधेयक में राज्यों पर बोझ बढ़ाया गया है. साथ ही खेती के सीजन में 60 दिनों तक काम न देने का प्रावधान मजदूर विरोधी है. इसको विपक्षी सदस्यों ने गुरुवार सुबह में संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन किया. लोकसभा से पास होने के बाद इस विधेयक को आज राज्यसभा में पेश किए जाने की संभावना है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा, मनरेगा का नाम पहले पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया। वो तो पहले नरेगा थी। बाद में जब 2009 के चुनाव आए तब चुनाव और वोट के कारण महात्मा गांधी याद आए। बापू याद आए। तब उसमें जोड़ा गया महात्मा गांधी। इसके बाद सदन में 'VB-जी राम जी बिल' बिल ध्वनिमत से पास हो गया। इससे पहले विपक्ष ने इस बिल के विरोध में संसद परिसर में मार्च निकाला। इसमें विपक्ष के 50 से ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया और VB-G-RAM-G बिल वापस लेने के नारे लगाए। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में VB-G-RAM-G बिल पर 14 घंटे चर्चा हुई। कार्यवाही देर रात 1:35 बजे तक चली। इसमें 98 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने मांग की कि प्रस्तावित कानून को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। यह 20 साल पुराने MGNREG एक्ट की जगह लेगा। शिवराज चौहान ने याद दिलाई गांधीगीरी विपक्ष के हंगामे को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह जो आप बिल फाड़कर फेंक रहे हैं, वह महात्मा गांधी की अहिंसा की नीति के खिलाफ है। कांग्रेस की सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यह विधेयक तो मनरेगा स्कीम को ही खत्म करने की साजिश है। विपक्षी सांसदों की ओर से बिल की कॉपी फाड़कर फेंके जाने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आपको सदन में जनता के मुद्दे उठाने चाहिए, लेकिन हंगामा करने और बिल की कॉपी फाड़कर फेंकने से कोई मसला हल नहीं होता। लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्‍थगित लोकसभा में जैसे ही मनरेगा स्‍कीम का नाम बदने वाला बिल पास हुआ, वैसे ही विपक्षी दलों के सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया है। इससे पहले कुछ सांसद वेल तक आ गए और बिल की कॉपी को फाड़कर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह सिंह के ऊपर फेंक दिया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को पूरे दिन तक के लिए स्‍थगित कर दिया गया है।  विपक्षी सांसदों ने फाड़ी बिल की कॉपी… विपक्षी सदस्यों ने सदन में कागज़ फाड़कर और नारे लगाकर कार्यवाही में बाधा डाली. इससे पहले, उन्होंने बिल वापस लेने की मांग करते हुए संसद परिसर के अंदर विरोध मार्च किया था. कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून को गांधी का अपमान और ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने वाले काम के अधिकार पर हमला बताया. सीनियर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी मकर द्वार पर सांसदों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं. संसद में बुधवार की कार्रवाई की बड़ी बातें…     5 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों में एक भी स्टूडेंट नहीं- देशभर में 10.13 लाख सरकारी स्कूलों में से 5,149 में एक भी छात्र नहीं है। 2024-25 शैक्षणिक सत्र में जीरो नामांकन वाले इन स्कूलों में से 70% से ज्यादा तेलंगाना व पश्चिम बंगाल में हैं। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने संसद में दी है। शून्य या 10 से कम छात्रों वाले स्कूलों की संख्या में बीते दो साल में 24% की बढ़ोतरी हुई है।     43 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच देशभर में बंद- केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा में बताया कि 43 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कार्रवाई उन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई है, जो कानून द्वारा प्रतिबंधित कंटेंट प्रसारित कर रहे थे।

महंगाई से राहत: नए साल पर घटे CNG और PNG के दाम, आम लोगों को फायदा

नई दिल्ली  भारत भर के उपभोक्ताओं को कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कम कीमतों का फायदा मिलने वाला है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने टैरिफ में बदलाव (रैशनलाइजेशन) का ऐलान किया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा. एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में PNG RB के मेंबर AK तिवारी ने कहा कि नया यूनिफाइड टैरिफ स्ट्रक्चर लागू होने से उपभोक्ताओं को राज्य और लागू टैक्स के अनुसार प्रति यूनिट ₹2 से ₹3 तक की बचत होगी. नया यूनिफाइड टैरिफ स्ट्रक्चर PNGRB ने टैरिफ सिस्टम को आसान बनाते हुए जोन की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी है. 2023 में लागू पुराने सिस्टम के तहत दूरी के आधार पर तीन जोन बनाए गए थे. इसमें 200 किलोमीटर तक ₹42, 300 से 1,200 किलोमीटर तक ₹80 और 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के लिए ₹107 टैरिफ था. तिवारी ने बताया, हमने टैरिफ को रैशनलाइज किया है. अब तीन की जगह दो जोन होंगे और पहला जोन पूरे भारत में CNG और घरेलू PNG ग्राहकों पर लागू होगा. अब जोन-1 के लिए यूनिफाइड दर ₹54 तय की गई है, जो पहले ₹80 और ₹107 थी. इन लोगों को होगा फायदा नया टैरिफ स्ट्रक्चर भारत में काम कर रही 40 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के तहत आने वाले 312 भौगोलिक क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को फायदा देगा. तिवारी ने कहा, इससे CNG इस्तेमाल करने वाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर और रसोई में PNG इस्तेमाल करने वाले घरों को लाभ मिलेगा. PNGRB ने निर्देश दिया है कि इस रैशनलाइज्ड टैरिफ का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए और इसकी नियमित निगरानी भी की जाएगी. तिवारी ने कहा, हमारी भूमिका उपभोक्ताओं और इस बिजनेस से जुड़े ऑपरेटरों, दोनों के हितों में संतुलन बनाए रखने की है. गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार CNG और PNG इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर बात करते हुए तिवारी ने बताया कि पूरे देश को कवर करने के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं, जिनमें सरकारी कंपनियां (PSU), निजी कंपनियां और जॉइंट वेंचर शामिल हैं. PNGRB, CGD कंपनियों को राज्य सरकारों से समन्वय कराने में मदद कर रहा है, जिसके चलते कई राज्यों ने VAT कम किया है और अनुमतियों की प्रक्रिया को आसान बनाया है. तिवारी ने कहा, हम सिर्फ रेगुलेटर ही नहीं, बल्कि एक फैसिलिटेटर की भूमिका भी निभा रहे हैं. सरकार की ओर से CNG और घरेलू PNG के लिए सस्ती और रैशनलाइज्ड गैस देने की पहल से देशभर में नेचुरल गैस के इस्तेमाल में तेजी आने की उम्मीद है. भारत में CGD सेक्टर को नेचुरल गैस खपत बढ़ाने वाला मुख्य सेक्टर माना गया है.  

पेड़ों की कटाई और ऑक्सीजन की जिम्मेदारी: जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी खजाने में मुआवजे का मुद्दा उठाया

जबलपुर   मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एनजीटी कमेटी की अनुमति बिना प्रदेश में एक भी पेड़ नहीं काटने के आदेश को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने दिनों पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त है और कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रह है. इसी बीच स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज की एक याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें धिरौली कोल ब्लॉक के लिए 6 लाख पेड़ों की कटाई किए जाने का प्रस्ताव है. इस कोल ब्लॉक के लिए अबतक 20 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं. 6 लाख पेड़ काटे जाने का प्रस्ताव स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के धिरौली कोल ब्लॉक मामले में कंपनी की ओर से ये याचिका दायर की गई कि पेड़ कटाई के संबंध में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो. याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 20 हजार पेड़ काटे गए हैं, वहीं 6 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है. कंपनी की ओर से एक आवेदन पेश कर दलील दी गई कि ये कोल ब्लॉक वन क्षेत्र में आता है और ऐसे में कंपनी के उस प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप नहीं किया जाए. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति के आधार पर ही पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, तो इस व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। यदि किसी पक्षकार को इससे आपत्ति या परेशानी है, तो वह एनजीटी के समक्ष अपनी बात रखे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठा बुधवार की सुनवाई में सिंगरौली के घिरौली कोल ब्लॉक में करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई का मामला भी उठाया गया। यह याचिका बैढन जनपद पंचायत की अध्यक्ष सविता सिंह द्वारा दायर की गई है। कंपनी की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित कटाई के बदले हर पेड़ का मुआवजा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मुआवजे की राशि सरकार के खजाने में जाएगी, लेकिन उन पेड़ों के कटने से लोगों को मिलने वाली ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन होगा—यह बड़ा सवाल है। सरकार के ट्रांसलोकेशन दावे पर सवाल सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि काटे गए पेड़ों को भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र में 9.71 हेक्टेयर भूमि पर ट्रांसलोकेट किया गया है। इस पर बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो किया गया है, वह ट्रांसलोकेशन नहीं है। भोजपुर रोड और अन्य मामलों पर लिया गया था संज्ञान दरअसल, रायसेन जिले के भोजपुर मार्ग पर स्थित 448 पेड़ों की कटाई के मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में सुना था। इसके अलावा भोपाल में विधायकों के आवास निर्माण के लिए 244 पेड़ और रेलवे परियोजना के लिए करीब 8000 पेड़ों की कटाई का मामला भी सामने आया था। चीफ जस्टिस की बेंच ने पहले 20 नवंबर को भोपाल में और फिर 26 नवंबर को पूरे मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सशर्त रोक लगा दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल एनजीटी की एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति से ही पेड़ों की कटाई की जा सकती है। पेड़ कटाई के कई मामलों में हाईकोर्ट सख्त इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पेड़ कटाई के कई मामलों सुनवाई कर रहा है. राजधानी भोपाल के पास भोजपुर-बैरसिया सड़क निर्माण के लिए बिना अनुमति के ही सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की है. वहीं, पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अखबार में प्रकाशित उस खबर पर भी संज्ञान लिया था, जिसमें सागर कलेक्ट्रेट में एक हजार पेड़ काटने का खुलासा किया गया था. कलेक्टर कार्यालय में दो अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए सिर्फ दस घंटे में ये पेड़ काट दिए गए थे. इसके अलावा भोपाल में एमएलए क्वार्टर्स निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट में कितने पेड़ काटे गए हैं और कितने और काटे जाने इस संबंध में विधानसभा सचिव को स्टेटस रिपोर्ट पेश कराने के निर्देश दिए गए. याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रोजेक्ट के लिए पूर्व में 112 पेड़ काटे गए हैं और 132 पेड़ और काटा जाना है. सरकार ने इन्हें शिफ्ट करने और वृक्षारोपण की कार्ययोजना का प्लान भी प्रस्तुत किया. वहीं, धिरौली कोल ब्लॉक मामले पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को निर्धारित की गई है.

गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों के लिए राहत, यूपी सरकार की योजना

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे 19,225 परिवारों को राशन कार्ड तथा रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसके तहत परिवार के मुखिया के नाम से जारी राशन कार्ड और आधार कार्ड का मिलान कराया जा रहा है। साथ ही ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है, जो आज भी लकड़ी अथवा अन्य परंपरागत ईंधन से भोजन पकाने को मजबूर हैं। पिछले सात दिनों में 7,873 परिवारों की जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि इनमें से कई परिवारों को पूर्व में उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्रदान किया जा चुका है। जीरो पावर्टी लाइन के तहत सर्वेक्षण जीरो पावर्टी लाइन अभियान के अंतर्गत जिला पूर्ति कार्यालय द्वारा उज्ज्वला योजना से वंचित परिवारों का सत्यापन किया जा रहा है। सर्वेक्षण में सबसे अधिक 2,093 परिवार परशुरामपुर ब्लॉक में चिन्हित किए गए हैं, जबकि सबसे कम 842 परिवार कप्तानगंज ब्लॉक में पाए गए हैं। बनकटी ब्लॉक में 1,500, बस्ती सदर में 1,584, बहादुरपुर में 1,371 तथा दुबौलिया ब्लॉक में 1,022 परिवार चिन्हित हुए हैं। इसी तरह गौर में 1,618 और हर्रैया में 1,201 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। अन्य ब्लॉकों में भी एक हजार से अधिक ऐसे परिवार पाए गए हैं। सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा सरकार का उद्देश्य इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना, विकलांग पेंशन, निराश्रित पेंशन, वृद्धा पेंशन तथा उज्ज्वला गैस योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर मुख्यधारा में लाना और गरीबी के आंकड़ों को समाप्त करना है। पात्र परिवारों को राशन कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सर्वेक्षण के दौरान इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि संबंधित परिवार के मुखिया के नाम से पहले कोई गैस कनेक्शन न जारी हुआ हो और परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ी अथवा अन्य ठोस ईंधन का उपयोग करता हो। इसके आधार पर टीम पात्र और अपात्र परिवारों का चिन्हांकन कर रही है। आधार और राशन कार्ड का ऑनलाइन मिलान जिला पूर्ति अधिकारी विमल शुक्ल ने बताया कि जीरो पावर्टी लाइन में चिन्हित उज्ज्वला योजना से वंचित परिवारों के राशन कार्ड और आधार कार्ड का ऑनलाइन मिलान कराया जा रहा है। पात्र पाए गए परिवारों को शासन की मंशा के अनुरूप खाद्यान्न तथा उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।