samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री ने प्राचीन वीरगढ़ी हनुमान मंदिर परिसर की बावड़ी का किया अवलोकन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी प्राचीन बावड़ियाँ और जल संरचनाएँ हमारी समृद्ध वास्तुकला और उत्कृष्ट जल प्रबंधन की प्रतीक हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों को संजोकर रखना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को इंदौर के प्राचीन  वीरगढ़ी हनुमान मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन बावड़ी का अवलोकन कर यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की जनता की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को वैज्ञानिक पद्धति से जीर्णोद्धार, बावड़ी के मूल ऐतिहासिक स्वरूप को बिना नुकसान पहुँचाए, वैज्ञानिक पद्धति से इसकी सफाई और जीर्णोद्धार कार्य तत्काल प्रारंभ के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और आम जन की सुरक्षा के लिए बावड़ी के चारों ओर मजबूत सुरक्षा जाली अथवा रैलिंग अनिवार्य रूप से लगाई जाए। बावड़ी के प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए तकनीकी उपाय किए जाएं, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। मंदिर और बावड़ी के आस-पास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया जाए, जिससे यहाँ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समस्त विकास एवं जीर्णोद्धार कार्य एक निश्चित समय-सीमा तय कर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। नगरीय विकास प्रशासन एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव,  सुमित मिश्रा,  सुदर्शन गुप्ता, पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार और कलेक्टर  शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।  

दिल्ली से मिनटों में पहुंचेंगे सोनीपत-पलवल, मेट्रो और नमो भारत विस्तार योजना को मिली रफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख जरिया मेट्रो को माना जाता है. दिल्ली मेट्रो देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है. दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी मेट्रो रोजाना लाखों लोगों के सफर का साथी बनती है. दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में मेट्रो बिना किसी ट्रैफिक के झंझट के लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है. सरकार लगातार मेट्रो के विस्तार पर काम कर रही है. एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में भविष्य में दिल्ली और हरियाणा को कनेक्ट करने वाले 6 प्रमुख कॉरिडोर को विकसित करने पर चर्चा हुई है. सरकार इन रूट्स पर नमो भारत के साथ-साथ मेट्रो को भी चलाने की तैयारी कर रही है।  इन रूट्स पर मेट्रो चलाने की तैयारी 1. सोनीपत-पानीपत  यह नमो भारत के दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर का हिस्सा है. यहां सरकार मेट्रो भी चलाने की तैयारी कर रही है.  सोनीपत को दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (रिठाला-नरेला-सोनीपत कॉरिडोर) के जरिए भी मेट्रो से जोड़ने की योजना है।  2. गाजियाबाद-मेरठ यह देश का पहला ऐसा रूट है जहां मेट्रो और नमो भारत दोनों ट्रेनें एक साथ चलेंगी. मेरठ शहर के अंदरूनी हिस्सों के लिए स्थानीय मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है, जो RRTS के ही ट्रैक और स्टेशनों का इस्तेमाल करेगी।  3. फरीदाबाद-पलवल दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन जो अभी राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) तक आती है, उसे आगे पलवल तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।  4. फरीदाबाद-गुरुग्राम इस रूट पर मुख्य रूप से हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HMRTC) द्वारा एक स्वतंत्र मेट्रो लाइन बनाने का प्रस्ताव है. यह लगभग 52 से 60 किमी लंबा रूट पूरी तरह से मेट्रो कॉरिडोर होगा जो फरीदाबाद और गुरुग्राम के मौजूदा मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।  5. बहादुरगढ़-रोहतक फिलहाल दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन (ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेशन, बहादुरगढ़) को आगे आसौदा तक बढ़ाने के लिए फिजिकल सर्वे और DPR का काम चल रहा है. इसे भविष्य में रोहतक तक और रैपिड रेल से इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट किया जाएगा।  6. गुरुग्राम-मानेसर-रेवाड़ी गुरुग्राम (सेक्टर-56) से लेकर मानेसर तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा एक नई मेट्रो लाइन का निर्माण शुरू हो चुका है. इसके साथ ही, इस रूट पर दिल्ली-अलवर रैपिड रेल (RRTS) का काम भी चल रहा है।  हाल ही में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि एनसीआर की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. एनसीआर में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से चार नए ‘नमो' ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे. इनमें हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एक-एक शहर स्थापित किया जाएगा। 

6 बागी सांसदों को Y+ सिक्योरिटी मिलने पर भड़की शिवसेना UBT, उद्धव समर्थक सड़कों पर उतरे

मुंबई  महाराष्ट्र गृह मंत्रालय ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्देश दिया है. यह आदेश महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को जारी किया गया है. यह फैसला इन सांसदों के खिलाफ बढ़ते सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. हाल ही में, इन सांसदों ने शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया था, जिसके बाद संजय राउत ने उन्हें “गद्दार” और “धोखेबाज” करार दिया था।  सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे- अरविंद सावंत उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसद पार्टी की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए. इस पर लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि सांसदों से पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बैठक में शामिल क्यों नहीं हुए. उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा. यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे। संजय राउत भी आ जाएं- अठावले संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50-50 करोड़ रुपये दिए गए. इस पर रामदास अठावले ने कहा कि इतने पैसों की बात कर रहे हैं तो मैं उनसे कहूंगा कि आप भी आ जाइए. अठावले ने कहा कि पैसा देने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि ये झूठे आरोप हैं. उद्धव ठाकरे अगर हमारे साथ रहते तो ये नौबत नहीं आती. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो लोग आए हैं उनका शिंदे पर भरोसा है. अगर संजय राउत आरोप लगा रहे हैं तो वो इसे साबित करें कि पैसे कहां से आए।  17 जून 2026 को जारी इस मैसेज में महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस और खुफिया अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हालिया संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए संबंधित सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।  आदेश में कहा गया है कि संबंधित जिला और पुलिस इकाइयां स्थानीय परिस्थितियों और खतरे के आकलन के आधार पर इन सांसदों को सुरक्षा मुहैया कराएं. इसके साथ ही, जिला स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समितियों को उनकी सुरक्षा बढ़ाने, घटाने या यथावत रखने पर फैसला लेने को भी कहा गया है।  किन सांसदों को मिली सुरक्षा? जारी किए गए डॉक्यूमेंट में जिन सांसदों के नाम शामिल हैं, उनमें यवतमाल के सांसद संजय देशमुख, परभणी के सांसद संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व के सांसद संजय दीना पाटिल, हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकार, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाघचौरे शामिल हैं।  जारी किए गए मैसेज में यह भी निर्देश दिया गया है कि जब ये सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में दौरा करें या सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लें, तब स्थानीय पुलिस अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाए, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।  यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने और पार्टी से अलग होने की अटकलें तेज हैं. ऐसे में इन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाए जाने को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है।       

कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान, मुनगा को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी, मंत्री राजवाड़े का संदेश

‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’ बनेगा जनआंदोलन महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने जनप्रतिनिधियों से किया व्यापक पौधरोपण का आह्वान रायपुर प्रदेश में कुपोषण की समस्या के समाधान और जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ के रोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों से वर्षा ऋतु के दौरान बड़े पैमाने पर मुनगा (सहजन) का पौधरोपण कर ‘‘घर-घर मुनगा, हर घर सुपोषण’’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस संबंध में जारी अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को सुपोषित बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं हितग्राहियों के घरों में ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ लगाने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने बताया कि मुनगा एक अत्यंत पौष्टिक एवं बहुउपयोगी पौधा है, जिसके पत्ते, फलियां और अन्य भाग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के कारण इसे ‘‘मदर ट्री’’ के नाम से भी जाना जाता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुनगा का नियमित सेवन बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक है। यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी मददगार सिद्ध होता है। श्रीमती राजवाड़े ने सभी जनप्रतिनिधियों से वर्षा ऋतु में जल स्रोतों के आसपास, ग्राम पंचायत परिसरों, सार्वजनिक स्थलों तथा हितग्राहियों के घरों में मुनगा पौधों का रोपण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।  उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से संचालित यह अभियान प्रदेश में सुपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा तथा लोगों में पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर ‘‘सुपोषित छत्तीसगढ़’’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की है।

राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश: विकास और संस्कृति के संतुलन से ही बनेगा सशक्त भारत

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में "आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज के सशक्तिकरण"कार्यक्रम को किया संबोधित बैतूल राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।   राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।  राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए … Read more

तालिबान का नया फरमान, सरकारी अधिकारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक; दुनिया में बढ़ी चिंता

काबुल  अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसका फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।  यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी को छूट चाहिए तो उसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी जरूरी होगी।  एक ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म दि गार्डियन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में तालिबान अधिकारियों को यह आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि तालिबान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  पूरे देश में लागू नहीं किया जा रहा स्मार्टफोन बैन रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा. कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी इसका असर देखने को मिल रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल लोगों की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहा है और संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाए. उनका कहना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है।  इंटरनेट पर पाबंदी का कड़ा विरोध हाल के महीनों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं. पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. तालिबान ने इसे "अनैतिक सामग्री रोकने" के लिए जरूरी बताया था. हालांकि इस फैसले का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था, जिसके बाद इंटरनेट बहाल करना पड़ा।  विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे. ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए थे. आरोप है कि तालिबान बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत भी हुई थी. वीडियो सामने आने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा।  तालिबान स्मार्टफोन पर क्यों लगा रहा बैन? तालिबान को यह भी चिंता है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की जानकारी लीक कर रहे हैं. कई मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी।  हेरात के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि उनके दफ्तरों में कई महीनों से स्मार्टफोन पर अनौपचारिक रोक लगी हुई थी. एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब वह मोबाइल लेकर कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे तोड़ दिया।  तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी काम करने के बजाय घंटों मोबाइल फोन पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन इसका समाधान स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है।   

बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, हाई कोर्ट के फैसले के बाद ऋतब्रत को मिली नई जिम्मेदारी

कलकत्ता विधानसभा से लेकर संसद तक बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले पार्टी ने यहां विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस के इस फैसले को चुनौती दी थी। ममता खेमे के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस सिलसिले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश पास करने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्पीकर का फैसला बरकरार रहेगा. तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी है।   टीएमसी की तरफ से दो नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए गए थे. शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव टीएमसी नेतृत्व के गुट की तरफ से भेजा गया, जबकि पार्टी के बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम भेजा, जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु ने स्वीकार किया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया।  कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 जून, 2026) को शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहा है. जस्टिस कृष्ण राव ने सभी पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।  टीएमसी सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन याचिका स्वीकार कर ली है. अब इस मामले में फाइनल हियरिंग होगी।  मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने पूछा था कि अगर एक ही राजनीतिक दल की तरफ से दो अलग-अलग नामों का प्रस्ताव भेजा जाए, तब अध्यक्ष का कर्तव्य क्या होगा, क्या वह स्वत: संज्ञान लेते हुए फैसला ले सकते हैं या फिर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक होगा. इस पर अध्यक्ष के लिए पेश एडवोकेट बिल्वदल भट्टाचार्य ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा परिलब्धियां अधिनियम, 1937 के अनुसार नेता प्रतिपक्ष वही सदस्य होता है जिसे सदन में सबसे अधिक संख्या वाले विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हो।  उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी दल का संख्याबल या उसके नेता को लेकर कोई विवाद होता है, तो उस मामले में अध्यक्ष का फैसला अंतिम और निर्णायक होगा. उधर, विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर का मामला भी चर्चा में है, जो नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से ही जुड़ा है. आरोप है कि टीएमसी सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष के लिए भेजे गए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम के प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं।  इसे लेकर सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ही सवाल उठाए और शिकायत की, जिसके बाद मामला गरमा गया. विधायकों की शिकायत के बाद विधानसभा सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू की. जिन विधायकों के नाम विवादित दस्तावेजों पर हैं, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और हस्ताक्षरों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। 

यूपी बोर्ड की सख्त कार्रवाई, 465 स्कूलों पर गिरी गाज; मान्यता रद्द होने के बाद मचा हड़कंप

लखनऊ  माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (UP Board) ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और नियमों की अनदेखी करने वाले शिक्षण संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई की है. यूपी बोर्ड ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित 465 स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है. परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है- इन स्कूलों में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों से न तो कोई कक्षाएं संचालित हो रही थी और न ही कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुआ था, जिसके कारण इन स्व वित्तपोषित विद्यालयों की मान्यता स्वतः समाप्त हो गई है। मान्यता समाप्ति के नियम और प्रावधान यूपी बोर्ड की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के अधीन निर्मित परिषद विनियमों के अध्याय-सात (परिषद द्वारा संस्थाओं को मान्यता) के विनियम-11 (ढ़) में विहित प्रावधान हाईस्कूल नवीन (वनटाइम) अथवा इण्टरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता प्राप्त विद्यालय से लगातार दो वर्ष तक कोई छात्र परीक्षा में सम्मिलित नहीं होते अथवा कक्षाएं संचालित नहीं करते है तो विद्यालय प्रदत्त मान्यता स्वतः समझी जाएगी।  क्या कहते हैं बोर्ड के नियम यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सक्रिय रूप से काम करने वाले संस्थानों को ही मान्यता मिलती रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम पहले से मान्यता प्राप्त संस्थानों से जुड़ी इंटरमीडिएट की वन-टाइम कक्षाओं, अतिरिक्त कक्षाओं या वैकल्पिक विषयों के लिए दी गई मान्यता पर लागू नहीं होता है। प्रभावित स्कूलों की सूची बोर्ड द्वारा सार्वजनिक जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए जारी कर दी गई है। बोर्ड के अनुसार विनियम 11(d) के अनुसार, किसी नए मान्यता प्राप्त हाई स्कूल (वन-टाइम) या इंटरमीडिएट स्तर के संस्थान को दी गई मान्यता अपने आप समाप्त हो जाती है यदि स्कूल का कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल नहीं होता है या यदि लगातार दो वर्षों तक शैक्षणिक कक्षाएं नहीं चलाई जाती हैं। प्रभावित संस्थानों के वर्गीकरण से पता चलता है कि इनमें से 306 हाई स्कूल थे, जिनमें 53 बालिकाओं के स्कूल और 253 सह-शिक्षा संस्थान शामिल हैं। शेष 159 इंटरमीडिएट कॉलेज थे, जिनमें 41 बालिकाओं के संस्थान और 118 सह-शिक्षा स्कूल शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि मान्यता वापस लिए गए स्कूलों में सह-शिक्षा संस्थानों की संख्या सबसे अधिक थी। प्रयागराज में दो दर्जन स्कूलों की मान्यता खत्म बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इंटर वनटाइम, अतिरिक्त वर्ग या किसी मान्य वर्ग के वैकल्पिक विषयों की मान्यता पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा. वहीं सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि प्रयागराज में स्थित जहां माध्यमिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय है वहां भी करीब दो दर्जन स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई है।  इन जिलों में बंद हो रहे हैं स्कूल यूपी बोर्ड द्वारा जारी की गई लंबी सूची में उत्तर प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों के स्कूल शामिल है. इस सूची के अनुसार, आगरा स्थित 'श्री हर प्रसाद इंटर कॉलेज, अछनेरा', 'मां भगवती इंटर कॉलेज' और 'डी प्रिंस गर्ल्स इंटर कॉलेज' की मान्यता खत्म की गई है. फिरोजाबाद के 'सेंट पीटर्स हाई स्कूल', 'राष्ट्रीय विद्यालय शिकोहाबाद', मैनपुरी के 'राम सेवक एचएसएस', 'लोक कल्याण इंटर कॉलेज' शामिल है।  इसके अलावा प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी, सुल्तानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोंडा, गोरखपुर,  देवरिया, बलरामपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, एटा, मथुरा, इटावा, कन्नौज, अलीगढ़, हाथरस, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, बरेली, हरदोई, मुरादाबाद व लखनऊ के भी कई विद्यालय इस बड़ी कार्रवाई की जद में आए है. ये वे स्कूल थे जो कागजों पर तो चल रहे थे, लेकिन धरातल पर इनमें शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ी हुई थी। 

डिजिटल लॉकर में सुरक्षित होगा भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई; उच्च शिक्षा को केंद्र की बड़ी सौगात

विशेष आलेख ​डिजिटल लॉकर में भविष्य, 'क्रेडिट बैंक' में जमा होगी पढ़ाई ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात                रायपुर       ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है। ​क्या है यह 'क्रेडिट बैंक' और कैसे बदलेगी जिंदगी?     ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के 'क्रेडिट' (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। ​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई 'जीरो' मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या 'क्रेडिट' कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे 'थर्ड ईयर' में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही "मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट" कहा गया है। ​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का 'स्कोरकार्ड'     ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। ​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं। ​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग        तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है। ​डिजीलॉकर बना 'सुरक्षा कवच': गुम होने का डर खत्म     ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है। ​विश्वविद्यालयों को सीधे 'नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी' (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।  ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है। ​'ग्लोबल' हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा     ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।     ​'ABC ID' के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया 'डिजिटल पंख' है।  विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक

CA Final Result OUT: पटियाला के नूर सिंगला ने किया टॉप, जानिए रिजल्ट और स्कोरकार्ड देखने का आसान तरीका

नई दिल्ली CA Final की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने CA Final May 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस बार भी कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है. सबसे ज्यादा चर्चा उस कैंडिडेट की हो रही है जिसने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है. अगर आपने भी ये परीक्षा दी थी तो अब आप अपना स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कि लोगों ने टॉप लिस्ट में अपनी जगह बनाई है।  नूर सिंगला बने देश के टॉपर इस बार CA Final May 2026 परीक्षा में पटियाला के नूर सिंगला ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है. उन्हें 499 अंक मिले हैं और उनका प्रतिशत 83.17 रहा. वहीं हावड़ा के रितिज सराफ ने 475 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है. तीसरे स्थान पर डोंबिवली के सोहन अनिल मांजरेकर रहे, जिन्हें 473 अंक मिले हैं।  उम्मीदवार ICAI की ऑफिशियल वेबसाइट icai.org और icaiexam.icai.org पर जाकर रिजल्ट चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। रिजल्ट डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करना होगा। आईसीएआई की ओर से रिजल्ट के साथ-साथ पासिंग परसेंटेज और मेरिट लिस्ट भी जारी की गई है। इस बार परीक्षा में हुआ बड़ा बदलाव इस साल से ICAI ने फिर से साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने की पुरानी व्यवस्था लागू कर दी है। अब CA की परीक्षाएं केवल मई और नवंबर में होंगी, जबकि जनवरी सेशन को खत्म कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा सिस्टम को ट्रेडिशनल एकेडमिक स्ट्रक्चर के अनुरूप बनाना है. ऑफिशियल वेबसाइट से ऐसे चेक करें रिजल्ट     ऑफिशियल वेबसाइट icai.org और icaiexam.icai.org पर जाएं।     होमपेज पर ICAI CA Final Result 2026 लिंक पर क्लिक करें।     लॉगिन क्रेडेंशियल दर्ज करें।     लॉगिन डिटेल्स भरने के बाद रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।     इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। एग्जाम में शामिल सब्जेक्ट इस परीक्षा के इंटरमीडिएट लेवल पर छात्रों की अकाउंटिंग, टैक्सेशन, ऑडिटिंग और फाइनेंशियल मैनेजमेंट जैसे सब्जेक्ट का मूल्यांकन किया जाता है। स्कोर कार्ड में मिलेगी ये जानकारी ऑनलाइन जारी होने वाले स्कोरकार्ड में हर एक सब्जेक्ट के मार्क्स, कुल प्राप्त अंक, पास या फेल का स्टेटस और अगर लागू हो तो डिस्टिंक्शन की जानकारी भी दी जाएगी। छात्रों के लिए ICAI की खास सलाह ICAI ने उम्मीदवारों को सोशल मीडिया या अन्य अनऑफिशियल वेबसाइट पर शेयर किए जा रहे रिजल्ट लिंक से सावधान रहने की सलाह दी है। छात्रों को ऑफिशियल पोर्टल के माध्यम से ही अपना रिजल्ट देखना चाहिए। अगर स्कोरकार्ड में किसी भी तरह की कोई गलती दिखाई देती है, तो तुरंत ICAI के हेल्पडेस्क से संपर्क करें। कहां चेक करें रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र ICAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर देख सकते हैं. इसके लिए ये वेबसाइट्स उपलब्ध हैं।      caresults.icai.org     icai.nic.in     icai.org ऐसे देखें अपना स्कोरकार्ड     रिजल्ट चेक करने की प्रक्रिया काफी आसान है. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।      वहां CA Final May 2026 Result लिंक पर क्लिक करें.     इसके बाद अपना रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड भरें.     सबमिट करते ही आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा.     भविष्य के लिए इसकी कॉपी डाउनलोड करके रखना बेहतर रहेगा. रिजल्ट देखने के लिए क्या चाहिए रिजल्ट देखने के लिए छात्रों के पास अपना रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर होना जरूरी है. ये दोनों जानकारी एडमिट कार्ड पर लिखी होती हैं. सही जानकारी भरने पर ही रिजल्ट खुल पाएगा।