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गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में गिरावट, खरीदारी से पहले चेक करें लेटेस्ट भाव

मुंबई  भारतीय सर्राफा बाजार में 01 जून को सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com के मुताबिक, हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को बाजार खुलने के साथ 999 शुद्धता वाले यानी 24 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 56 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब है, जो बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार शाम को 1 लाख 56 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार था. वहीं, चांदी की कीमत भी अब गिरावट के साथ 2 लाख 63 हजार रुपये प्रति किलो तक आ गई है।  ibjarates.com पर 01 जून को सुबह जारी किए गए रेट्स के मुताबिक, 995 शुद्धता वाले यानी 23 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 54 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार है. वहीं, 22 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 42 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है।  बता दें कि केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के अलावा ibjarates.com पर सोमवार से शुक्रवार रोज सुबह और शाम रेट जारी नहीं किए जाते हैं. आइए देखते हैं बीते कारोबारी दिन, शुक्रवार 29 मई की शाम की तुलना में आज कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी।  01 जून 2026 को कितने रुपये सस्ता हुआ 22-24 कैरेट सोना और चांदी?   शुद्धता शुक्रवार, 29 मई शाम का भाव सोमवार, 01 जून का भाव रेट में कितना बदलाव सोना (प्रति 10 ग्राम) 999   (24 कैरेट) 156463 155599  864 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 995   (23 कैरेट) 155836 154976  860 रुपये सस्ता  सोना (प्रति 10 ग्राम) 916  (22 कैरेट)  143320 142529  791 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 750   (18 कैरेट) 117347 116699  648 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 585    (14 कैरेट) 91531 91025  506 रुपये सस्ता चांदी (प्रति 1 किलो) 999      263350 262900 Advertisement    450 रुपये सस्ती शुक्रवार, 29 मई को सुबह-शाम क्या था 22-24 कैरेट सोने का रेट?      450 रुपये सस्ती शुक्रवार, 29 मई को सुबह-शाम क्या था 22-24 कैरेट सोने का रेट? 24 कैरेट गोल्ड     सुबह का रेट- 157043     शाम का रेट-  156463 22 कैरेट गोल्ड     सुबह का रेट-  143851     शाम का रेट-  143320 इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए दाम पूरे देश में मान्य होते हैं. गोल्ड-सिल्वर की इन कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं होता और ज्वैलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज अलग से देने होते हैं.

प्रदेश में UCC लागू करने की प्रक्रिया तेज, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए बड़े संकेत

प्रदेश में चल रही है समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी.) लागू करने की प्रक्रिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गठित की गई है उच्च स्तरीय समिति आम नागरिकों से किये गये है सुझाव आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी) लागू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। वर्तमान समय में विभिन्न धर्मों में विवाहित बहनों के लिए प्रचलित अलग-अलग रीति-रिवाज और नियमों की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश को आज समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। वर्तमान में देश के तीन राज्यों उत्तराखंड, गुजरात और असम ने समान नागरिक संहिता को लागू किया है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी आज सोमवार को मंत्रालय में मीडिया को जारी वक्तव्य में दी। जिलों में विभिन्न धर्म समुदाय के लोगों से लिए जायेंगे सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों को इस समिति में स्थान दिया गया है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग धर्म-समुदाय के लोगों से सुझाव प्राप्त करेगी। सभी वर्गों के साथ संवाद और समन्वय से लागू की जायेगी समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी वर्गों के साथ संतुलन बनाते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य की जन हितैषी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश समान नागरिक आचार संहिता लागू करने के लिए सबसे अनुकूल प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के लिए एक वेबसाइट भी लॉन्च की है, जिस पर आम नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं।  

डिजिटल सरकार अब गाँव के द्वार, बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना सुशासन की नई मिसाल : सीएम विष्णुदेव साय

गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार : बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री ने अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का किया निरीक्षण, ग्रामीणों से लिया योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक अब प्रमाण पत्र से लेकर बैंकिंग, बीमा, पेंशन और ऑनलाइन सेवाएं गांव में ही उपलब्ध रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का निरीक्षण कर ग्रामीण डिजिटल सुशासन के अभिनव मॉडल ‘सेवा सेतु’ की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद कर योजनाओं की पहुंच, पारदर्शिता और प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को उनके गांव में ही सहज, सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ‘सेवा सेतु’ अभियान और अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनसे आमजन को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिल रही है। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान ग्राम की हितग्राही श्रीमती कौशल्या मानिकपुरी ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त हो रही है, जिससे घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से खेती-किसानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली है। इसी प्रकार श्रीमती सुमति मानिकपुरी, श्रीमती अमिल मानिकपुरी तथा श्रीमती पचमती बघेल ने मुख्यमंत्री को बताया कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहारा दिया है। वृद्धावस्था पेंशन और महतारी वंदन योजना का लाभ प्राप्त कर रही श्रीमती वेंकटरमणा जंगम ने भी योजनाओं की नियमित उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक गरीब, किसान और महिला तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘गाँव के द्वार, डिजिटल सरकार’ का साकार हो रहा संकल्प ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में संचालित ‘सेवा सेतु’ अभियान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को ग्रामीणों तक त्वरित, सरल और सुलभ तरीके से पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अनेक शासकीय, वित्तीय और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार होती दिखाई दे रही है। एक ही छत के नीचे मिल रही दर्जनों डिजिटल और शासकीय सेवाएं अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में आवेदन प्रेषण के लिए मात्र 30 रुपये तथा प्रिंट आउट के लिए 5 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र के माध्यम से आय, जाति, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, विवाह पंजीयन तथा भवन निर्माण अनुज्ञा जैसी सेवाएं ग्रामीणों को गांव में ही मिल रही हैं। इसके अतिरिक्त नगद आहरण, फंड ट्रांसफर, पेंशन सेवाएं, जीवन, सामान्य एवं कृषि बीमा, पैन कार्ड एवं पासपोर्ट आवेदन, बिजली बिल भुगतान, यात्रा टिकट बुकिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का ऑनलाइन पंजीयन भी इसी केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। हर माह 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल लेन-देन, स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में ‘सेवा सेतु मैनेजर’ के रूप में कार्यरत संजय मिश्रा ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल ने न केवल ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं, जिससे युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। ग्रामीणों के समय, श्रम और धन की बचत का माध्यम बना सेवा सेतु बड़ेकनेरा के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब विभिन्न शासकीय सेवाओं और योजनाओं का लाभ गांव में ही उपलब्ध हो जाने से उन्हें दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इससे समय, श्रम और धन की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल अब ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण, पारदर्शी सेवा वितरण और सुशासन की नई मिसाल के रूप में उभर रहा है।

बुजुर्गों के अधिकारों को सशक्त बना रही MP सरकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था

मध्यप्रदेश में वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की सुदृढ़ व्यवस्था कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं इसका प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।   हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।   सम्मान और सामाजिक स्वीकृति वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है। नवाचार और सुधार राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है। यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है। मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब का बड़ा कमाल, स्कूल रैंकिंग में केरल को पछाड़कर बना देश का नंबर-1 राज्य

 नई दिल्ली एक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों का नाम आते ही अभिभावकों के मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता घर कर जाती है. जर्जर इमारतें, संसाधनों की कमी और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता के बीच लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखते थे. हालात ऐसे थे कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की रैंकिंग लगातार नीचे खिसकती जा रही थी और राज्य देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाने लगा था. लेकिन कुछ ही सालों में पंजाब के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।  आज वही पंजाब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर देश में नंबर-1 बनकर उभरा है. यह सिर्फ रैंकिंग में सुधार की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत और उम्मीदों की जीत की कहानी है, जिन्होंने बदलाव पर भरोसा किया।    2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर रहा, वहीं, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था. लेकिन साल 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी. आज सिर्फ चार सालों के अंदर पंजाब ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी. नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।  ऐसे बना नंबर वन यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है. यह उन माता-पिता की जीत है जो चाहते थे कि उनका बच्चा गरीब हो या अमीर, उसे भी विश्वस्तरीय शिक्षा मिले. यह उन शिक्षकों की मेहनत की जीत है जिन्हें नई सोच और नए संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला. नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा. गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा. नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।  99.9 प्रतिशत रहा परिणाम  आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है. 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं. 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं. स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है. इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है. यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है।  गुरुग्राम का स्तर रहा सबसे खराब  सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि हरियाणा के सबसे समृद्ध और साइबर सिटी शहर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है. यह उस मॉडल की ताकत दिखाता है जिसने सरकारी स्कूलों को राजनीति का विषय नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का मिशन बनाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षा को सरकारी फाइलों से निकालकर जन आंदोलन बनाया है. शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के बेस्ट एजुकेशन मॉडल का लाभ उठा सकें. यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की है. यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा सिर्फ निजी स्कूलों की संपत्ति नहीं होती, अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य बन सकते हैं।  भर्त‍ियों का ग्राफ भी बढ़ा  राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है. 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि पंजाब का बच्चा दुनिया के किसी भी मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो सके. राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में पंजाब की नई पहचान बनने जा रहे हैं. आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब, डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं. यह वही सपना है जो विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है. पंजाब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  इन जगहों पर अब भी हो रहा है बदलाव का इंतजार दूसरी तरफ कई ऐसे राज्य हैं जहां वर्षों से एक ही सरकारें चल रही हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी अपेक्षित बदलाव का इंतजार कर रही है. हरियाणा में पिछले 12 वर्षों से बीजेपी सरकार है, लेकिन शिक्षा के कई मानकों पर पंजाब उससे काफी आगे निकल चुका है. पंजाब के गांवों में अब माता-पिता गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है. यह बदलाव किसी विज्ञापन या नारे से नहीं आया. यह बदलाव स्कूलों की नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर परिणामों और बच्चों के उज्जवल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहा है. पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है. जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है. यह सिर्फ शिक्षा की कहानी नहीं, बल्कि नए पंजाब की कहानी है। 

टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार की नई तैयारी, फर्जी बिलिंग पर सख्ती : देवड़ा

कर चोरी, फर्जी बिलिंग को रोकेगा इंफोर्मेशन मॉड्यूल : उप मुख्यमंत्री देवड़ा वाणिज्यिक कर विभाग के “इन्फॉर्मेशन मॉड्यूल” का हुआ शुभारंभ भोपाल  उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि विभाग द्वारा प्रारंभ किये गये इंफॉर्मेशन मॉड्यूल से वित्तीय चोरी को रोका जा सकेगा। इसका लाभ प्रदेश को राजस्व वृद्धि में मिलेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों को इंफोर्मेशन मॉड्यूल के निर्माण और शुभारंभ पर बधाई देते हुए कहा कि मॉड्यूल की बेहतर तरीके से मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाएं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि राज्य में कर अपवंचन की रोकथाम, राजस्व संग्रहण में वृद्धि तथा नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये “इन्फॉर्मेशन मॉड्यूल” विकसित किया गया है। यह मॉड्यूल कर चोरी, फर्जी बिलिंग, बिना बिल के व्यापार, अवैध गोदाम, कर संबंधी अनियमितताओं एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों की सूचना सीधे विभाग तक सुरक्षित एवं सरल माध्यम से उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान करेगा। मॉड्यूल से प्राप्त सूचनाओं का विभाग द्वारा विश्लेषण एवं सत्यापन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्राप्त सूचनाओं के निराकरण की स्थिति एवं विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी नागरिक पोर्टल पर उपलब्ध डैशबोर्ड के माध्यम से साझा की जाएगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी। नागरिकों द्वारा प्रदान की गई उपयोगी एवं तथ्यात्मक जानकारी राज्य के राजस्व संरक्षण, कर अपवंचन पर प्रभावी नियंत्रण तथा कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आयुक्त वाणिज्यिक कर अनय द्विवेदी ने अपील की है कि नागरिक राज्यहित में इस मॉड्यूल का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें तथा कर अपवंचन की रोकथाम एवं राजस्व वृद्धि में सहभागी बनें। नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से राज्य में निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यापारिक वातावरण को बढ़ावा मिलेगा तथा शासन की विकासात्मक योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। विस्तृत जानकारी के लिये लिंक पर क्लिक करें।… https://mptax.mp.gov.in/  

सूर्या हत्याकांड पर गरजे CM योगी, बोले- नालायक औलादों को कानून सिखाएगा सबक

 बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में सूर्या प्रताप चौहान और असद से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. नालायक औलादों को सबक सीखना होगा. सीएम ने कहा कि शस्त्र उठाना होगा अगर सामने खर-दूषण हो।  सीएम योगी ने सूर्या और असद से जुड़ी घटना पर कहा, 'दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. नालायक औलादों को सबक सीखना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की संवेदनाएं सामान्य और कानून का पालन करने वाले नागरिकों के साथ हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के अनुरूप प्रदेश और देश में सभी वर्गों को बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।  'अहिंसा और मानवता समाज के आभूषण हैं' योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अहिंसा और मानवता समाज के आभूषण हैं, लेकिन जब समाज और व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी करने वाली ताकतें हों, तब उनके मुकाबले के लिए आवश्यक कदम उठाना भी जरूरी हो जाता है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सभी को कानून और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए तथा किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं समझना चाहिए।  मुख्यमंत्री के इस बयान को गाजियाबाद की हालिया घटना के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को लेकर चर्चा जारी है. उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार कानून का राज स्थापित करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।  क्या है पूरा मामला? गाजियाबाद में 28 मई की शाम एक 17 वर्षीय युवक सूर्या चौहान की चाकू से हमले के बाद मौत हो गई. पुलिस के अनुसार, घटना के पीछे पुरानी दुश्मनी को वजह माना जा रहा है. आरोप है कि सूर्या को उसके कुछ पुराने परिचितों ने फोन कर एक स्थान पर बुलाया था. जैसे ही वह वहां पहुंचा, कई युवकों ने उसे घेर लिया और धारदार हथियार से हमला कर दिया।  बता दें कि बकरीद के दिन गाजियाबाद में हुए 17 साल के सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपी असद को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है। अब असद के घर बुलडोजर ऐक्शन का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने असद के घर को सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताते हुए 15 दिन के अंदर इसे हटाने का आदेश दिया है। असद के परिवार को जारी नोटिस में कहा गया है कि यदि 15 दिनों के अंदर कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन खुद इस मामले में कार्रवाई करेगा। एसडीएम ऑफिस की ओर से असद के घर के बाहर नोटिस चस्पा किया गया है। पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों, पूर्व सैनिकों और पट्टेदारों को भूमि स्वामित्व अधिकार प्रमाण पत्र वितरण के मौके पर सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान से आए हुए जिन परिवारों की पुश्तैनी संपत्तियों पर कब्जा किया गया था, दशकों बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला। चौथी पीढ़ी में हमने उन विस्थापित परिवारों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिया है। इनकी संख्या 1645 है यानी कुल मिलाकर 8 से 10 हजार लोगों को आज ये कागजात प्राप्त हो रहे हैं। गाय पशु नहीं हमारी माता है सीएम योगी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग करने वालों दोगले व्यवहार वाला करार देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को चेले-चपाटे ही बकरीद के मौके पर सोशल मीडिया पर गाय की फोटो लगा रहे थे। उनसे कहा गया है कि अपने चेले-चपाटों को समझा लें। गाय हमारे लिए पशु नहीं, हमारी माता है। बेटे और माता के बीच कुछ घोषित करने की जरूरत नहीं होती। हम उन्हें राष्ट्रमाता मानते ही हैं। गाय को पशु मानने वाले इंसान नहीं हैं. गाय हमारी स्वाभाविक माता है। यूपी में यदि किसी ने गाय माता के साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो फिर उसका अंजाम क्या होगा, यह सबको मालूम है। उन्होंने कहा कि सज्जन के साथ सज्जनता और दुर्जन के साथ उसी की भाषा में बात होनी चाहिए। गंभीर रूप से घायल सूर्या को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई. मामले में असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक सहित कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है. असद का एनकाउंटर किया जा चुका है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अवलोकन, कहा – प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य धरोहर

ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत बड़े कनेरा में मिलीं 150 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अवलोकन, कहा – प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य धरोहर उड़िया भाषा में लिखित पंजी, पुराण, पंचांग सहित कई महत्वपूर्ण ग्रंथ पीढ़ियों से परिवारों में सुरक्षित रायपुर   छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़े अमूल्य विरासत संरक्षण के प्रयासों को नई प्रेरणा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा का दौरा किया। यहां उन्होंने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत संरक्षित लगभग 150 वर्ष पुरानी उड़िया भाषा में लिखित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण में जुटे परिवारों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम निवासी रामूराम यादव से मुलाकात कर उनके पास सुरक्षित रखी गई आठ प्राचीन पांडुलिपियों को देखा तथा उनके इतिहास, उपयोग और संरक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुस्तकीय विरासत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की जीवंत पहचान हैं। इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री ने पीढ़ियों से इन पांडुलिपियों को सहेजकर रखने वाले परिवारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज की भागीदारी के बिना सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव नहीं है। जिन परिवारों ने दशकों तक इन धरोहरों को सुरक्षित रखा है, वे वास्तव में हमारी ज्ञान-संपदा के संरक्षक हैं। इस अवसर पर बड़े कनेरा के हरदू कश्यप, परमेश्वर मानिकपुरी, अमरावती के त्रिलोचन मानिकपुरी, पुरसोती राम मौर्य तथा कोपरा ग्राम के चमरू नाग ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां उनके दादा-परदादाओं के समय से परिवारों में संरक्षित हैं और आज भी अत्यंत सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखी जाती हैं। संरक्षकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इन पांडुलिपियों में पंजीयार, पंजी, पुराण, पंचांग तथा चक्रकूट पंचांग जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं, जिनका उपयोग परंपरागत ज्ञान, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक व्यवस्थाओं तथा ज्योतिषीय गणनाओं में किया जाता रहा है। इन ग्रंथों में स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक विधानों और समय गणना की विशिष्ट प्रणालियों का भी उल्लेख मिलता है। मुख्यमंत्री साय ने पांडुलिपियों के अध्ययन की प्रक्रिया, उन्हें पढ़ने-समझने की पारंपरिक पद्धतियों तथा वर्तमान समय में उनके संरक्षण की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में प्राचीन ज्ञान-संपदा के संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा से जुड़ी रह सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित ज्ञान भारतम् अभियान देश की प्राचीन पांडुलिपियों, ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत : राज्यपाल पटेल

महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति रहें सजग : राज्यपाल पटेल लोकभवन में लगा स्वास्थ्य शिविर  राज्यपाल ने महिलाओं को वितरित किए स्वच्छता किट भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्वस्थ समाज एवं परिवार के लिए महिलाओं का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएँ अपनी व्यस्त जीवन शैली में अपने स्वास्थ्य की चिंता करें। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए समय निकाले। संतुलित आहार, योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। राज्यपाल पटेल सोमवार को लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर शुभारंभ अवसर पर संदीपनि सभागार में उपस्थित महिलाओं से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं को स्वच्छता किट प्रदान की। संदीपनि सभागार और सिविल डिस्पेंसरी में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों का अवलोकन किया। ज्ञातव्य है कि राज्यपाल पटेल के जन्म दिवस के अवसर पर लोक भवन में सोमवार को स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया था। अस्थिरोग संबंधी चिकित्सकीय जाँच के लिए बोन मिनरल डेनसिटी जाँच और परामर्श शिविर का सिविल डिस्पेंसरी में तथा एच.पी.व्ही. और महिला स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जागरूकता के लिए चिकित्सकीय परामर्श सत्र सांदीपनि सभागार में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।  

महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही लाखों जिंदगियां : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बड़ेकनेरा में लाभार्थियों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, महिलाओं, बच्चों और स्व-सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं के तहत मिला लाभ महतारी वंदन से आर्थिक संबल, मातृ वंदना से सुरक्षित मातृत्व और महिला कोष से आत्मनिर्भरता को नई ताकत रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और स्व-सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभ प्रदान करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, सुरक्षित मातृत्व, पोषण और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि जब किसी योजना का लाभ सीधे व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाता है, तभी सुशासन का उद्देश्य सार्थक होता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को मिला बल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही श्रीमती मनिता मरकाम और श्रीमती खेमलता कोर्राम को लाभान्वित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह योजना माताओं और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व की मजबूत आधारशिला बन रही है। महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की आर्थिक ताकत महतारी वंदन योजना से लाभान्वित श्रीमती संतोषी भोयर, जो घर पर पार्लर संचालन करती हैं, तथा श्रीमती संपत्ति मानिकपुरी, जो सब्जी व्यवसाय से जुड़ी हैं, ने मुख्यमंत्री को बताया कि योजना से प्राप्त राशि घरेलू जरूरतों को पूरा करने और छोटे व्यवसाय को सहारा देने में सहायक सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती परिवार और समाज दोनों को सशक्त बनाती है। अन्नप्राशन संस्कार से बच्चों के स्वस्थ भविष्य की कामना कार्यक्रम में अंजू कोर्राम एवं पद्मनी नेताम के बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। इस अवसर पर माताओं को शिशुओं के समुचित पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल संबंधी जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के जीवन के प्रारंभिक वर्षों में पोषण पर विशेष ध्यान देना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। गोद भराई कार्यक्रम से मातृत्व का सम्मान गोद भराई कार्यक्रम के अंतर्गत मनीता मरकाम और गुड़िया मरकाम को सम्मानित किया गया। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, सुरक्षित प्रसव और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है और गर्भवती महिलाओं की देखभाल सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सुपोषण किट वितरण से कुपोषण के खिलाफ अभियान को मजबूती कार्यक्रम में काव्यांश और रौशनी को सुपोषण किट प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सुपोषण किट के माध्यम से बच्चों और माताओं को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सक्षम योजना और महिला कोष से आत्मनिर्भरता को नई दिशा कार्यक्रम में मनई यादव को सक्षम योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना महिलाओं को कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बन रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ महिला कोष के अंतर्गत बड़ेकनेरा की एकता स्व-सहायता समूह को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत इकाई हैं और इनके माध्यम से महिलाओं में उद्यमिता, बचत और आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा मिल रहा है। किशोरियों को मिली हाइजीन किट, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जोर कार्यक्रम में प्रिया नेताम, महिमा, नंदनी पटेल, पुष्पा नायक एवं हीना को हाइजीन किट प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशोरियों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ किशोरी ही स्वस्थ परिवार और समाज के निर्माण की आधारशिला बनती है। कार्यक्रम में कंसोराम नेताम एवं गांधीराम नेताम को बच्चों की देखभाल तथा आंगनबाड़ी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में माता और पिता दोनों की समान भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार की साझा जिम्मेदारी ही बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रखती है। जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा विश्वास मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं, बच्चों और परिवारों के उत्थान के लिए संचालित योजनाएं प्रदेश को अधिक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि जब योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनती हैं, तभी सुशासन का उद्देश्य पूर्ण होता है।