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18 साल की अनाहत सिंह का कमाल, एशियन गेम्स स्क्वैश फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं

नागोया  भारत की 18 वर्षीय स्कॉश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने रविवार को विमेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसी के साथ जूनियर वर्ल्ड चैंपियन अनाहत, भारत की पहली विमेंस सिंगल्स सिल्वर मेडलिस्ट बनीं। हालांकि, उन्हें फाइनल में मलेशिया की मौजूदा चैंपियन शिवसंगरी सुब्रमण्यम के हाथों 4-11, 4-11, 7-11 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ अनाहत ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने का पहला मौका भी चूक गईं, क्योंकि सिंगल्स इवेंट के विजेता को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए कोटा मिलना तय था, जहां स्कॉश पहली बार शामिल हो रहा है। मलेशिया की खिलाड़ी से हारीं अनाहत नागोया किंजो फुतो एरिना में प्रतिभाशाली भारतीय खिलाड़ी का मुकाबला मलेशिया की कहीं ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी से था। अनाहत को अपनी प्रतिद्वंद्वी के शानदार खेल का मुकाबला करने में मुश्किल हुई और उन्होंने पहला गेम 4-11 से गंवा दिया। इसके बाद मलेशियाई खिलाड़ी ने अपने मजबूत अटैक और डिफेंस से अगले दो गेम पर भी अपना दबदबा बनाए रखा। अनाहत को कोई खास मौका नहीं मिला और वह दूसरा गेम भी 4-11 के अंतर से हार गईं, जबकि मौजूदा चैंपियन ने शानदार खेल दिखाते हुए तीसरा गेम 11-7 से जीता। सेमीफाइनल में किया था कमाल अनाहत ने सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 6 सतोमी वातानाबे को दो गेम से पिछड़ने के बाद हराया था, जिसके साथ वह एशियन गेम्स के विमेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं। इससे पहले, भारत के अभय सिंह को भी सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी ने शानदार खेल दिखाते हुए मेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में भारतीय खिलाड़ी को 11-9, 11-5, 11-5 से मात दी। अभय ने जीता सिल्वर मेडल रविवार को यह स्कॉश में भारत का दूसरा पदक रहा। अभय, सौरव घोषाल के बाद इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। हालांकि, फाइनल में हारने की वजह से अभय एलए 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने से चूक गए।

इंदौर में तेज रफ्तार सिटी बस का कहर, 4 लोग चपेट में आए; एक की मौत

इंदौर. मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के प्रसिद्ध राजबाड़ा क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार को एक बेकाबू सिटी बस ने राह चलते चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस फिलहाल सभी पीड़ितों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है। घायलों का उपचार जारी एमजी रोड थाना प्रभारी विजय सिसौदिया से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा सिटी बस चालक की गफलत और लापरवाही के कारण घटित हुआ। अनियंत्रित बस अचानक सड़क से गुजर रहे पैदल यात्रियों पर चढ़ गई, जिससे चारों लोग उसकी चपेट में आ गए।

विरोध के बाद TVK सरकार ने बदला फैसला, Public Department को RTI से बाहर रखने का आदेश रद्द

चेन्नई तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार को कड़े विरोध के बाद आखिरकार अपना एक बड़ा फैसला वापस लेना पड़ा है। सरकार ने उस आदेश को रद कर दिया है, जिसके तहत 'पब्लिक डिपार्टमेंट' यानी सार्वजनिक कानून-व्यवस्था विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने की कोशिश की गई थी। इस फैसले पर चौतरफा आलोचनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विरोध? इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की तरफ से 21 सितंबर 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश के तहत आरटीआई अधिनियम की धारा 24 की उप-धारा (4) का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था विभाग को एक 'खुफिया और सुरक्षा संगठन' मानकर आरटीआई के दायरे से छूट देने का प्रयास किया गया था। बता दें कि सार्वजनिक कानून-व्यवस्था के दायरे में कई संवेदनशील विषय आते हैं, जैसे कि पुलिस फायरिंग और हिरासत में हुई मौतों व पुलिस टॉर्चर की जांच रिपोर्ट। सांप्रदायिक और जातिगत संघर्षों से जुड़ी रिपोर्टें और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने के अनुरोध और मानहानि के मामलों से जुड़ी अभियोजन मंजूरी। विपक्ष का क्या था तर्क? बात अब इस फैसले के विरोध की करें तो आलोचकों और विपक्षी नेताओं का कहना था कि अगर इस विभाग को आरटीआई से बाहर कर दिया जाता, तो जनता से ये तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां छिप जातीं, जिससे पारदर्शी शासन पर सवाल खड़े होते। फैसले के विरोध में खुलकर सामने आए विपक्ष दूसरी ओर सरकार के इस फैसले के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न दलों के नेता खुलकर विरोध में उतर आए थे। सीपीएम (CPM) सांसद वेंकटेशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि यह कदम तमिलनाडु को एक पुलिस राज में बदलने की खुली कोशिश है और सरकार को तुरंत यह आदेश वापस लेना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि आरटीआई कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला था, जिसका उद्देश्य देश में 'लोकतांत्रिक जवाबदेही' को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि इस तरह महत्वपूर्ण सूचनाओं को जनता से छिपाना सही मिसाल नहीं है। विरोध के बाद राज्य सरकार का यू-टर्न गौरतलब है कि शुरुआत में बचाव की मुद्रा अपनाते हुए टीवीके मंत्रियों ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने सफाई दी थी कि इस कदम का उद्देश्य केवल सामुदायिक संघर्षों से जुड़े विवरणों को सुरक्षित रखना था, क्योंकि लोग इसे लेकर लगातार आरटीआई मांग रहे थे। वहीं मंत्री राजमोहन ने कहा था कि सरकार पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है। हालांकि, बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता की नाराजगी को भांपते हुए मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर आम जनता में असंतोष है, तो इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करके पुनर्विचार किया जाएगा। आखिरकार, विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने शासनादेश को रद्द करते हुए अपना यह विवादास्पद फैसला वापस ले लिया है।

ट्रंप-शी की मुलाकात के बाद बड़ा ट्रेड डील, 30 अरब डॉलर के सामान पर घटेगा टैरिफ

वाशिंगटन अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा। वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए। एआई पर भी बात होगी व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की। अन्य समझौते भी हुए शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए। क्या है टैरिफ विवाद? अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई। इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

छत्तीसगढ़ में PG छात्रों को बड़ी सौगात, मेडिकल के साथ डेंटल की छात्रवृत्ति बढ़ी

रायपुर. मेडिकल और डेंटल के पीजी छात्रों की सालों पुरानी मांग को पूरी करते हुए आखिरकार छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी छात्रवृत्ति में वृद्धि कर ही दी है. शासन ने केवल छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी ही नहीं की है, बल्कि अब तक मेडिकल पीजी छात्रों की तुलना में कम छात्रवृत्ति पाने के दर्द को दूर करते हुए उन्हें समकक्ष ला दिया है. शासन द्वारा तय नई दर एक अक्टूबर 2026 से प्रभावशील होगी. छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चिकित्सा शिक्षा से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर शासकीय चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अध्ययनरत् चिकित्सकों की शिष्या वृत्ति में वृद्धि की है. इस संबंध में विभाग की ओर से 26 सितंबर को आयुक्त, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा को पत्र जारी किया है. इसमें पीजी मेडिकल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को दी जा रही 67,500 रुपए के स्थान पर 85,050 रुपए, द्वितीय वर्ष के छात्रों को 71,450 रुपए के स्थान पर 90,027 रुपए और तृतीय वर्ष के छात्र को 74,600 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है. इसी तरह पीजी डेंटल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को 53,500 रुपए की जगह 85,050 रुपए, पीजी डेंटल द्वितीय वर्ष के छात्र को 56,700 रुपए की बजाए 90,027 रुपए और पीजी डेंटल तृतीय वर्ष के छात्र को 59,200 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है. लड़ाई खत्म नहीं हुई, जारी है – जेडीयू अध्यक्ष — जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यशवंत सिंह और जेडीए रायपुर अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने छात्रवृद्धि में बढ़ोतरी का स्वागत किया है. इसके साथ उन्होंने दोहराया कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, उनकी 17 सूत्रीय मांग अधूरी है, जिसकी वजह से उनका आंदोलन जारी है. पुराने और नए स्टाइपेंड के आधार पर वृद्धि प्रतिशत में —- पाठ्यक्रम    पुराना    नया    मासिक वृद्धि    वृद्धि % PG मेडिकल प्रथम वर्ष    ₹67,500    ₹85,050    ₹17,550    26.00% PG मेडिकल द्वितीय वर्ष    ₹71,450    ₹90,027    ₹18,577    26.00% PG मेडिकल तृतीय वर्ष    ₹74,600    ₹93,996    ₹19,396    26.00% PG डेंटल प्रथम वर्ष    ₹53,500    ₹85,050    ₹31,550    58.97% PG डेंटल द्वितीय वर्ष    ₹56,700    ₹90,027    ₹33,327    58.78% PG डेंटल तृतीय वर्ष    ₹59,200    ₹93,996    ₹34,796    58.78%

रायपुर में दिल दहला देने वाली घटना, पति पर पत्नी और दो बच्चों की हत्या का आरोप

रायपुर. रायपुर में शनिवार देर रात ट्रिपल मर्डर की घटना सामने आई है। पति ने अपनी पत्नी और 2 नाबालिग बच्चों की धारदार चाकू से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने खुद पर भी चाकू से वार कर लिया, जिससे वह घायल हो गया। आरोपी को इलाज के लिए मेकाहारा में भर्ती कराया गया है। मामला माना थाना क्षेत्र के डूमरतराई का है। आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू (34) के रूप में हुई है। वह जिला बालोद का रहने वाला है और डूमरतराई के साहू पारा में किराए के मकान में रहता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पत्नी के कैरेक्टर पर शक के चलते उसने हत्या की है। पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या के बाद खुद पर किया वार जानकारी के मुताबिक, आरोपी भुनेश्वर साहू ने रात 1:30 बजे विवाद के बाद पहले पत्नी खिलेश्वरी साहू पर हमला किया। इसके बाद उसने दोनों बच्चों आशीष साहू (10) और ज्ञान साहू (8) पर हमला किया। तीनों की मौत के बाद उसने खुद पर भी चाकू से वार किए। पड़ोसियों को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। माना पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। महिला की हालत बेहद गंभीर थी। वहीं पति भी घायल हालत में पड़ा हुआ था। पत्नी को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सब्जी मंडी में काम करते थे पति-पत्नी पुलिस ने बताया का परिवार करीब 2 साल पहले किराए के मकान में रहने आया था। पति और पत्नी सब्जी मंडी में काम करते थे। 2 महीने पहले पति ने काम छोड़ दिया था। पड़ोसियों के मुताबिक चरित्र शंका को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। शनिवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। अंबेडकर अस्पताल में आरोपी का इलाज जारी पुलिस ने घायल आरोपी को इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया है। उसका इलाज जारी है। जबकि पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मेकाहारा भेज दिया है और घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस घटना के कारणों और वारदात से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

हजारों शिक्षकों का भोपाल में प्रदर्शन, नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू

भोपाल. मध्य प्रदेश के शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने के लिए प्रदेश भर के करीब हजार की संख्या में शिक्षक भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। मोर्चे का कहना है कि मांगों के ठोस निराकरण तक संघर्ष जारी रहेगा। मोर्चा संयोजक एवं राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों से कई बार चर्चा और संवाद हो चुका है, लेकिन अभी तक ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में संयुक्त मोर्चा अब चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की जा रही है। मोर्चे की मांग है कि मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित किया जाए तथा केंद्र सरकार को भेजा जाए। प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना हो शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि एवं वरिष्ठता की गणना की जाए, ताकि ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में वास्तविक सेवा अवधि का लाभ मिल सके। ई-अटेंडेंस व्यवस्था स्वैच्छिक की जाए मोर्चे ने शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक करने की मांग की है। मोर्चे का कहना है कि शिक्षकों के विभागीय एवं अन्य शासकीय दायित्वों को देखते हुए व्यवस्था में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं। शिक्षकों की आवाज अब भोपाल से उठेगी- जगदीश यादव जगदीश यादव ने कहा कि संयुक्त मोर्चा शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है। प्रदेश के विभिन्न संभागों से शिक्षक आंदोलन में शामिल होंगे तथा आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें मजबूती से पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक वर्षों से अपनी सेवा संबंधी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ज्ञापन, संवाद और चर्चा के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाना शिक्षकों की मजबूरी है। संयुक्त मोर्चा के सभी पदाधिकारी एकजुट आंदोलन को सफल बनाने के लिए मोर्चा के संयोजक श्री राकेश दुबे, मनोहर दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, डी.के. सिंगौर, राकेश पटेल सहित समस्त शिक्षक संगठन के पदाधिकारी प्रदेशभर के शिक्षकों से आंदोलन में सक्रिय सहभागिता की अपील कर रहे हैं। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि 27 सितंबर से भोपाल में शुरू होने वाला अनिश्चितकालीन धरना शिक्षकों की तीनों मांगों के समाधान के लिए सामूहिक संघर्ष का मंच होगा। मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा। शिक्षक पीछे नहीं हटेंगे।

पाकिस्तान को राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंकवाद जारी रहा तो हमले के लिए भारत तैयार

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब-जब पड़ोसी देश आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, तब-तब भारत आतंकवादियों के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार रहेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति चाहता है। भारत न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करना चाहता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। समाचार चैनल एनडीटीवी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पड़ोसी देश कहकर पाकिस्तान की ओर इशारा किया। जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल धीरज सेठ ने कहा है कि टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से लड़ाइयों को छोटा कर रही है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह युद्धों को भी छोटा करे। उन्होंने कहा कि जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत है। उन्होंने आगे कहा, "आज सोशल मीडिया पर हम दुनिया भर में युद्ध से जुड़ी कई खबरें और बातें देखते हैं। जहां जानकारी और नैरेटिव के जरिए असली लड़ाई की तस्वीर को धुंधला करने की कोशिश की जाती है। इससे अनिश्चितता और भ्रम पैदा होता है।'' उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि इस सब शोर-शराबे के बीच एक सच्चाई कभी नहीं बदलती। सफलता के लिए जमीन हमेशा एकमात्र ठोस और काम की चीज रहेगी। जीत को हमेशा इलाके के आधार पर मापा गया है, मापा जाता है और मापा जाएगा। उस इलाके पर कब्जा करने, उसे सुरक्षित करने और उसकी रक्षा करने का काम सेना ही करेगी।" पाकिस्तान ने बीत कई वर्षों में कई ऐसे आतंकी नेटवर्क को पनाह दी है जिन्होंने भारत में हमले किए हैं। भारत का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि पाकिस्तानी या पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई आतंकी हमले किए हैं। आपको बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के मशहूर टूरिस्ट टाउन पहलगाम पर हमला किया। इस हमले में एक नेपाली नागरिक समेत 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर, रावलकोट, चकस्वारी, भीमबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल की जगहों को निशाना बनाया गया। राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत बातचीत में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो बातचीत वहीं खत्म हो जाएगी। भारत सहयोग चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय हित की कीमत पर नहीं।"

सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे, PM मोदी बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति साफ

नई दिल्ली  रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 138वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय सेना द्वारा लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार की गई 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद का जवाब मजबूत और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक ने दुनिया के सामने भारत की आतंक-रोधी नीति का एक नया उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि देश कल यानी 28 सितंबर को इस स्ट्राइक की दसवीं वर्षगांठ मनाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया यह देखकर हैरान रह गई थी कि आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के लिए किस तरह बहादुर भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण-रेखा पार की थी। 'आतंकवादी हमलों का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब' उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के कारण देश लंबे समय से दर्द झेल रहा था और सर्जिकल स्ट्राइक इसी का निर्णायक जवाब था। पिछले दशक में बालाकोट एयरस्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने बार-बार यह संदेश दिया है कि आतंकवादी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले देश में सिलसिलेवार धमाका आम बात थी। 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली के सिलसिलेवार धमाकों में कई लोग मारे गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई में 26 नवंबर का हमला हुआ लेकिन अब भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति पर चल रहा है और इसका नतीजा सामने है। जनगणना को लेकर क्या बोले पीएम मोदी? प्रधानमंत्री ने जनगणना के संबंध में कहा कि इसका पहला चरण लगभग सभी राज्यों में पूरा हो गया है और 32 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का डेटा दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दूरदराज के और बर्फीले इलाकों में अभी काम चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि इन इलाकों से कई प्रेरणादायक अनुभव सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली के माणा गांव में 83 साल की पूर्णिमा रावत के साथ हुई। माणा को देश का पहला गांव माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उत्तरकाशी के बागौरी गांव में होमस्टे चलाने वाले हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल तरीके से अपना ब्योरा खुद दर्ज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना सभी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और लोग अपने मोबाइल से ही अपनी और अपने परिवार की जानकारी 17 भाषाओं में दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने लोगों से ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in पर जानकारी देने की अपील की और कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग 20 मिनट लगते हैं और किसी दस्तावेज को अपलोड नहीं करना पड़ता। अब तक 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोगों ने मोबाइल से अपना ब्योरा दर्ज कराया है। नागरिकों के बारे में सही जानकारी देश के भविष्य की सटीक तस्वीर बनाने में मदद करती है। पीएम मोदी ने अशोक सिंघल को किया याद प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की सौवीं जयंती है। उन्होंने कहा कि सिंघल ने अपना पूरा जीवन संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। 27 सितंबर, 1926 को आगरा में जन्मे अशोक सिंघल ने समाज में रहते हुए भी एक तपस्वी जैसा जीवन जिया। राम जन्मभूमि आंदोलन को उन्होंने जो दिशा और ऊर्जा दी, अयोध्या में भव्य मंदिर उसी का परिणाम है। सिंघल ने सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी। सोमनाथ मंदिर को लेकर क्या कहा? प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने इस साल की शुरुआत सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ की। उन्होंने बताया कि महमूद गजनवी ने पहली बार 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, फिर भी यह मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्ष 1026 ईस्वी में जब गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, उसी साल गुजरात के मोढेरा में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर को भी हमला कर नष्ट कर दिया गया था जिसे राजा भीमदेव ने 1025 में बनवाया था। पीएम मोदी ने कहा कि मोढेरा सूर्य मंदिर को बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने भी नष्ट कर दिया था। हमारे लिए सूर्य प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतरता की प्रेरणा का प्रतीक है, इसीलिए आज मोढेरा न केवल अपने सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता है, बल्कि देश का पहला सूर्य ग्राम यानी सोलर विलेज भी बन गया है। मोढेरा में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण और सुविधाओं की शुरूआत की गई है। मकर संक्रांति के बाद जनवरी में मोढेरा नृत्य महोत्सव होता है। इसमें सांस्कृतिक और शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। स्वच्छता अभियान की दिलाई याद प्रधानमंत्री ने आगामी 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता, बापू के जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा एक नदी को साफ करने का काम कर रहे हैं। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में युवा पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई कर रहे हैं, जिससे भारत की प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है। मुंबई में कुछ युवा समुद्र तटों को साफ रखने की पहल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में बच्चे और युवा कचरा अलग करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने ते लिए जागरूकता बढ़ा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में विद्यार्थी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पिकनिक स्थलों के बाजार-क्षेत्रों की सफाई कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों की शुरुआत एक व्यक्ति से होती है और दूसरे लोगों के जुड़ने से आंदोलन बढ़ता जाता है। यही जन- भागीदारी का सार है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नशा मुक्त युवा अभियान प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा–मुक्त युवा अभियान के तहत देश के लाखों युवाओं ने हाल ही में, नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा की है और इसकी जानकारी दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है। यह अभियान सौ सप्ताह चलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ही देश भर में हजारों शपथ और जागरूकता कार्यक्रम हुए हैं। उन्होंने नशा-मुक्ति का संदेश पहल की सराहना की। इसमें युवा अपनी भाषा और अपने तरीके से इस संदेश का प्रसार करते … Read more

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से पहले रविवार को खुले बैंक, कल से 30 सितंबर तक कामकाज प्रभावित

भोपाल. अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम अटका हुआ है, तो उसे आज ही पूरा कर लें। 5 डे वर्किंग की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी सोमवार से 30 सितंबर तक हड़ताल पर जा रहे हैं। इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम जनता की सहूलियत के लिए रविवार की छुट्टी होने के बावजूद आज सभी सरकारी बैंकों को खुला रखने का विशेष आदेश दिया है। प्रदेश की 7 हजार शाखाओं में कामकाज रहेगा ठप इस हड़ताल का असर पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। प्रदेश भर में कुल 7 हजार बैंक शाखाएं हैं, जिनमें अकेले भोपाल की 400, इंदौर की 800 और उज्जैन की 300 ब्रांच शामिल हैं। हड़ताल में मुख्य रूप से स्केल-3 तक के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। हालांकि, स्केल-4 या इससे ऊपर के वरिष्ठ अधिकारी बैंक में मौजूद रहेंगे, लेकिन स्टाफ न होने के कारण वे ग्राहकों को कोई सेवा नहीं दे पाएंगे। रविवार को बैंक खोलने का क्या है कारण? शनिवार और रविवार को बैंकों की नियमित छुट्टी होती है। इसके बाद सोमवार से लगातार तीन दिन की हड़ताल थी। ऐसे में बैंक लगातार 5 दिनों तक बंद रहते, जिससे हाहाकार मच सकता था। जनता को इसी भारी असुविधा से बचाने के लिए आरबीआई ने रविवार को बैंक शाखाओं के साथ-साथ करेंसी चेस्ट भी चालू रखने का फैसला किया है। करोड़ों का लेन-देन होगा प्रभावित बैंक कर्मचारियों के काम बंद करने से नकदी जमा करने, पैसे निकालने, चेक क्लियरिंग, पासबुक अपडेट कराने और ड्राफ्ट बनवाने जैसे सभी जरूरी काम पूरी तरह से रुक जाएंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से काम करती रहेंगी। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में रोजाना लगभग 5500 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेन-देन होता है, जिस पर इस हड़ताल का सीधा असर पड़ेगा। इससे पहले इसी महीने 11 से 13 सितंबर के बीच भी बैंकिंग सेवाएं बाधित रही थीं। क्या है '5 डे बैंकिंग वीक' की मांग? मौजूदा समय में बैंक कर्मचारियों को महीने के केवल दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। बैंक यूनियनों की एक ही प्रमुख मांग है कि हर शनिवार और रविवार को पूर्ण अवकाश दिया जाए, यानी हफ्ते में केवल 5 दिन ही बैंक खुलें। इसके बदले में कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव रखा है। यूनियनों का तर्क है कि इससे काम के घंटों का नुकसान भी नहीं होगा और कर्मचारियों को राहत भी मिलेगी।