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मुख्यमंत्री ने की घोषणा: मध्यप्रदेश में बनेगा इंजीनियर्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंजीनियरों को बताया देश का शक्ति स्तंभ

भोपाल   इंजीनियरिंग डे के अवसर पर सोमवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कंवेंशन सेंटर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप, न्यूज लेटर और लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीकी नवाचार विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाएंगे और पारदर्शिता लाएंगे। मुख्यमंत्री ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि प्रदेश में इंजीनियर्स रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी, जहां अभियंताओं को नवीन तकनीक और कार्यपद्धति का प्रशिक्षण मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “इंजीनियर्स एक प्रकार से भगवान हनुमान के समान हैं, जिन्होंने हर अवसर पर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है। इस अवसर पर 7 इंजीनियरों को मोक्षगुंडम विश्वैशरैया पुरस्कार और 4 ठेकेदारों को विश्वकर्मा पुस्कार से सम्मानित किया। "ईश्वर सबसे बड़ा अभियंता है" – सीएम यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियंता शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि अभियंता का मतलब है आरंभ और शुभारंभ करने वाला। उन्होंने कहा कि “ईश्वर ने इस संसार की रचना की है, वही सबसे बड़े अभियंता हैं। सर मोक्षगुंडम विश्वैश्वरैया ने 20वीं शताब्दी में अभियांत्रिकी के नए कीर्तिमान रचे। देश के अभियंताओं ने चिनाब ब्रिज जैसे कठिन प्रोजेक्ट बनाकर अपनी अद्वितीय क्षमता साबित की है। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंजीनियरों को गति शक्ति योजना जैसे प्रोजेक्ट से लगातार प्रेरित कर रहे हैं। “जब अंतरिक्ष मिशन असफल हुआ तो पीएम मोदी वैज्ञानिकों के साथ खड़े रहे। यह संदेश है कि राष्ट्र निर्माण में तकनीक और अभियंता कितने अहम हैं।  लोक निर्माण से लोक कल्याण की ओर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग केवल सड़कें और पुल नहीं बना रहा बल्कि लोक कल्याण की नई परंपरा गढ़ रहा है। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि “उन्होंने पुष्पक विमान जैसी रचना की थी। आज हमारे इंजीनियर तकनीक के सहारे अनेक ताजमहल खड़े करने की क्षमता रखते हैं। अधोसंरचना में नई इबारत लिख रहा मध्यप्रदेश कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अधोसंरचना विकास की नई गाथा लिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का विकास तेजी से हुआ है और मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसे प्रदेश में पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर केवल पुल-पुलिया नहीं बनाते, बल्कि वे देश की तकदीर और तस्वीर गढ़ते हैं। सिंह ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में 500 लोक कल्याण सरोवर बनाए जा चुके हैं। विभाग ने लोकपथ ऐप सहित कई नवाचार किए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में एक विशेष ऐप लाया जाएगा जो कार्यों की समय-सीमा का आकलन करेगा। पीएम गति शक्ति पोर्टल से पुलों और संरचनाओं के डिजाइन में मदद मिल रही है। भारत के विकास में इंजीनियरों की विरासत प्रसिद्ध इंजीनियर और लेखक प्रशांत पॉल ने अपने वक्तव्य में भारत की इंजीनियरिंग परंपरा को याद किया। उन्होंने कहा कि आज से 2,000 साल पहले विश्व की जीडीपी का एक तिहाई भारत के पास था और इसमें हमारे इंजीनियरों का बड़ा योगदान था। “राजा भोज ने हाइड्रोलिक पावर और यांत्रिकी डिजाइन तैयार किए, चोल राजाओं ने अनाईकट्टू बांध बनाया, वराहमिहिर ने खगोल विज्ञान में क्रांति की। यह हमारी गौरवशाली विरासत है। इस अवसर पर कई अभियंताओं और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। – मोक्षगुंडम विश्वैशरैया पुरस्कार : सुनील कौरव, प्रीति यादव, प्रमेश कोरी, संजीव कालरा, भुवना जोशी, राजीव श्रीवास्तव, दीपक शर्मा और विक्रम सोनी को प्रदान किया गया। – विश्वकर्मा पुरस्कार : हैदराबाद की एनसीसी लिमिटेड, भोपाल की निविक कंस्ट्रक्शन, गुरुग्राम की आरके जैन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. और नौगांव की हरगोविंद गुप्ता को मिला। – रानी दुर्गावती पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार : एमपीआरडीसी भोपाल के सहायक महाप्रबंधक डॉ. दीपक पांडे को दिया गया। 

पूर्णिया को बड़ी सौगात! प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट टर्मिनल का शुभारंभ कर शुरू की विकास योजनाओं की उड़ान

पूर्णिया बिहार में आने वाले कुछ सप्ताह में विधानसभा के चुनाव के लिए चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कर सकता है. चुनाव के तारीखों के ऐलान के पहले राजनीतिक दल जमकर मैदान में पसीना बहा रहा हैं. रैलियों से लेकर जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है. चुनावी वादों का भी ऐलान किया जा रहा है. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के पूर्णिया पहुंचे. यहां उन्होंने नए सिविल एन्क्लेव के अस्थायी टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया है. यह नया टर्मिनल एयरपोर्ट की सुविधाओं और क्षमता में इजाफा करेगा और इलाके के विकास और इंटरकनेक्टिविटी में मदद करेगा.  पूर्णिया एयरपोर्ट बिहार का चौथा कमर्शियल बन गया है. इस एयरपोर्ट के शुभारंभ से सीमांचल क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा. आस-पास के जिलों के लोगों को हवाई सेवा का लाभ मिलेगा.  पटना, गया और दरभंगा के बाद पूर्णिया बिहार का चौथा एयरपोर्ट बन गया है, जहां से अब लोग देश के दूसरे हिस्सों में उड़ान भर सकेंगे. पूर्णिया एयरपोर्ट से फिलहाल कोलकाता और अहमदाबाद के लिए डायरेक्ट फ्लाइट मिलेगी. इंडिगो एयरलाइन की कोलकाता के लिए फ्लाइट हफ्ते में तीन दिन मिलेगी.  एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू भी साथ मौजूद रहे. विकास और रोजगार सृजन को मिलेगी नई गति प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान' के तहत देश के छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। पूर्णिया एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक परिद्दश्य बदलेगा। पूर्णिया एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन न केवल सीमांचल क्षेत्र की दशकों पुरानी मांग को पूरा करेगा, बल्कि बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को एक नई ऊँचाई भी देगा। इससे जहां स्थानीय लोगों की सुविधा बढ़ेगी, वहीं प्रदेश के विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिलेगी। इस विमान सेवा का लाभ पूर्णिया प्रमंडल समेत आसपास के करीब एक दर्जन जिलों को मिलेगा।   पूर्णिया में अब बिहार का चौथा एयरपोर्ट पटना, गया, दरभंगा के बाद पूर्णिया अब बिहार का चौथा एयरपोर्ट है जहां से कामर्शियल फ्लाइट की सेवा शुरू हुई। इंडिगो एयरलाइन्स अहमदाबाद और पूर्णिया के बीच सप्ताह में तीन दिन उड़ानें भरेगा जिससे गुजरात जैसे प्रमुख औद्योगिक शहर से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। पूर्णिया पूर्वी बिहार का सबसे महत्वपूर्ण शहर है और इसके आसपास के शहरों सहरसा, मधेपुरा , सुपौल, अररिया, कटिहार, भागलपुर, नवगछिया, फारबिसगंज के अलावा नेपाल और बंगाल के कई शहरों से इसका सम्पर्क है। छात्रों और उद्यमियों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेंगे बेहतर अवसर  पूर्णिया हवाई अड्डे के नवनिर्मित अंतरिम टर्मिनल भवन के शुरू होने से इस क्षेत्र में हवाई सेवाओं का विस्तार होगा। यह टर्मिनल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है और इसकी नई इमारत बनाने के बाद यात्री प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अब विमानो कि आवाजाही शुरू होने और उनकी संख्या में वृद्धि के साथ यात्रियों को दिल्ली, पटना और अन्य बड़े शहरों के लिए सीधी और नियमित हवाई सेवाएं मिलने लगेंगी। पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल और सहरसा जैसे जिलों के लोग अब हवाई सेवाओं का लाभ अपने नजदीकी शहर से उठा सकेंगे। अभी तक इस क्षेत्र के यात्रियों को पटना या बागडोगरा तक जाना पड़ता था, लेकिन इस टर्मिनल के शुरू होने से यात्रियों के समय और लागत दोनों की बचत होगी। पूर्णिया और आसपास का इलाका व्यापार, शिक्षा और कृषि की द्दष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हवाई संपर्क बढ़ने से यहां निवेश, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यहां के छात्रों और उद्यमियों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। 

AI से शिक्षा में क्रांति! कोटा में तैयार हो रहे हाई-टेक टीचर, छात्रों की सोच को भी करेंगे ट्रैक

कोटा  भारत की कोचिंग सिटी कही जाने वाली कोटा अब शिक्षा की दुनिया में नई क्रांति की ओर बढ़ रही है. यहां स्थापित की गई एआई लैब (सीपीएस मशीन) और आरएंडडी सेंटर में ऐसे हाई-फाई 'एडवांस टीचर' तैयार हो रहे हैं, जो केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि छात्रों के दिमाग को भी पढ़ सकेंगे. इस इनोवेटिव प्रोजेक्ट पर 1000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करना और उन्हें ज्यादा स्मार्ट, आत्मविश्वासी और परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड बनाना है. अब किताबें ही नहीं, दिमाग भी पढ़ेंगे टीचर कोटा की लैब में विकसित किए जा रहे यह फ्यूचर टीचर छात्रों की ताकत और कमजोरी को तुरंत पहचानने की क्षमता रखते हैं. ये पर्सनलाइज्ड और कस्टमाइज्ड स्टडी प्लान देंगे. हर विद्यार्थी के लिए अलग-अलग स्टडी रिपोर्ट तैयार करेंगे. परफॉर्मेंस-एफर्ट मैट्रिक्स जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल करके यह पता करेंगे कि बच्चा किस चैप्टर में मजबूत है और कहां पीछे रह गया. सिर्फ इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से यह शिक्षक छात्रों की सोचने-समझने की क्षमता को विकसित करेंगे और उन्हें एक्स्ट्राऑर्डिनरी इंटेलिजेंट बनाने में मदद करेंगे. कैसे बदल रही है पढ़ाई की दुनिया कोटा में टीचर्स अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रैक्टिस टेस्ट जनरेटर और पर्सनलाइज्ड डैशबोर्ड से छात्र की पढ़ाई का पूरा डेटा सामने आता है. वीआर/एआर सिमुलेशन के जरिए कठिन टॉपिक्स को 3D और विजुअलाइजेशन के साथ आसानी से समझाया जा रहा है. क्लास के तुरंत बाद पता चल जाता है कि बच्चे ने कितनी चीजें समझीं और किस हिस्से पर दोबारा मेहनत करनी है. छात्रों के लिए बड़ी सुविधा 1. स्मार्ट असाइनमेंट और माइक्रो टेस्ट – छात्र जैसे ही गलती करता है, तुरंत फीडबैक मिल जाता है. इससे बच्चा उसी समय अपनी कमी सुधार लेता है. 2. सीपीएस मशीन – हर स्टूडेंट की व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर अलग-अलग प्रैक्टिस शीट और स्टडी प्लान तैयार करती है. 3. रीयल टाइम एनालिसिस – एक घंटे की क्लास खत्म होते ही शिक्षक को यह जानकारी मिल जाती है कि कितने बच्चों ने विषय को समझा और कितनों को अभी और गाइडेंस चाहिए. कभी भी डाउट क्लियर, दिन हो या रात एआई टीचर का सबसे बड़ा फायदा है कि स्टूडेंट किसी भी समय अपनी समस्या का समाधान पा सकता है. रात 2 बजे भी छात्र अपने फेवरेट टीचर के एआई अवतार से सवाल पूछ सकता है. डेढ़ घंटे की क्लास को 15 मिनट की शॉर्ट क्लिप में बदलकर आसानी से रिवीजन किया जा सकता है. लगातार ट्रैकिंग से यह देखा जा सकता है कि बच्चा कितने मिनट में एक सवाल हल करता है और कहां अटक जाता है. संस्थान की ओर से दावा मोशन कोचिंग संस्थान के कंटेंट हेड जयंत चित्तौड़ा का कहना है- "अब बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनकी सोच और समझ को पढ़ने का भी काम एआई टीचर कर रहे हैं. ये बच्चों की कमजोरियों को तुरंत डिटेक्ट कर उन्हें बार-बार ट्रेंड करते हैं, जब तक कि वे कमजोरी पूरी तरह खत्म न हो जाए. इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी परफॉर्मेंस लगातार सुधार रही है." आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पढ़ाई को और ज्यादा प्रभावी, सटीक और व्यक्तिगत बना दिया है और यही वजह हे कि इससे स्टूडेंट का सिलेक्शन रेशों बढ़ा हे स्टूडेंट की रैंक इंप्रूवमेंट हुई हे आने वाले समय में जो ओर बदलाव होंगे तो ओर बेहतरी की उम्मीद लगाई जा सकती हे . परिणाम और भविष्य कोटा की इस पहल ने छात्रों के सिलेक्शन रेशो को बढ़ाया है और उनकी ऑल इंडिया रैंक में भी सुधार लाया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में शिक्षा जगत में और भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पढ़ाई को अधिक सटीक, व्यक्तिगत और प्रभावी बना दिया है. यह सिर्फ भविष्य की कहानी नहीं है, बल्कि कोटा में यह हकीकत बन चुकी है. आने वाले सालों में यह मॉडल न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे भारत में शिक्षा की दिशा बदल सकता है.    

SC के फैसले पर BJP की प्रतिक्रिया: मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, वक्फ संपत्तियों से हटेगा अवैध कब्जा

भोपाल  भारत की सर्वोच्च अदालत ने यानि सुप्रीम कोर्ट ने आज वक्फ़ बोर्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अपना निर्णय सुना दिया, कोर्ट ने वक्फ़ कानून से जुडी कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है लेकिन पूरे कानून पर रोक नहीं लगाई, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा अब वक्फ संपत्तियों पर हुए कब्जे हटेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा फैसले में  CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कलेक्टर के अधिकारों पर सुप्रीम  कलेक्टर का फैसला अंतिम फैसला नहीं होगा, इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 की उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक्फ़ बनाने के लिए किसी व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना आवश्यक बताया गया था। अदालत ने कहा कि यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक राज्य सरकारें यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना लेतीं कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सकारात्मक परिणाम देगा  सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ये फैसला निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देगा,  उन्होंने कहा वक्फ संपत्तियों पर चंद लोगों ने बेजा कब्जा कर रखा था l वक्फ संपत्ति का उपयोग उन लोगों के लिए होना चाहिए जिन्हें इन संपत्तियों के माध्यम से सहायता की जरूरत है। कुछ मुस्लिम नेताओं ने मारा गरीबों का हक़  उन्होंने कहा गरीब लावारिस बच्चों को पनाह देना, शिक्षा देना इसके लिएय वक्फ़ संपत्तियों का इस्तेमाल होना चाहिए लेकिन चंद मुस्लिम नेताओं ने अपने बच्चों के ऐशो आराम के लिए इन संपत्तियों का इस्तेमाल किया था, अब जब कानून वक्फ कानून तो उनके पेट में दर्द हुआ था। वक्फ़ संपत्तियों से हटेगा बेजा कब्ज़ा  आज सुप्रीम कोर्ट ने गलत मंतव्य से लगाई गई याचिकाओं को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है उसने कहा जो कानून बना है उस पर रोक नहीं  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद वक्फ संपत्तियों पर लोगों ने अपने वुँक्तिगत हित साधने के लिए बेजा कब्ज़ा किया था अब वो हटेगा।  

तेजस्वी ने क्यों चुनी राहुल से अलग राह? कांग्रेस बहिष्कार के बाद महागठबंधन पर मंडराया संकट

पटना  क्या बिहार महागठबंधन में सब कुछ ठीक है? यह सवाल तब से खड़ा होना शुरू हुआ है जब से तेजस्वी यादव ने अपनी अलग ‘बिहार अधिकार यात्रा’ निकालने की घोषणा की है. अब तक महागठबंधन के प्रमुख दल राजद और कांग्रेस के बीच की खटपट साफ तौर पर सियासी सतह पर दिखाई देने लगी है. हाल में ही इसकी एक बानगी बिहार के औरंगाबाद में तब दिखी जब कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के आमंत्रण के बावजूद राजद का कोई भी नेता वहां नहीं पहुंचा. जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में बीते 13 दिसंबर को एक सम्मेलन बुलाया गया था. कांग्रेस अध्यक्ष के बुलाए गए इस सम्मेलन में राजद नेताओं के नहीं आने से कांग्रेस के अंदर इसको लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है. खास बात यह है कि अब इसी विवाह भवन में आरजेडी सम्मेलन अपना सम्मेलन कर रहा है. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और राजद के भीतर तल्खी इतनी बढ़ गई हैं कि दोनों दलों के बीच की दरारें साफ-साफ नजर आने लगी हैं! कांग्रेस का आमंत्रण और राजद का बहिष्कार दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के आयोजित सम्मेलन में राजद के नेताओं के नहीं पहुंचने की खबर ने गठबंधन के उठापटक को और हवा दी है. बता दें कि राजद के नेता तेजस्वी यादव 16 सितंबर से अपनी अलग राजनीतिक यात्रा निकाल रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह स्थिति कांग्रेस के तेवरों को भांपते हुए गठबंधन में राजद के अलगाव की स्थिति की ओर इशारा कर रही है. तेजस्वी यादव के अलग कार्यक्रम और इससे पहले औरंगाबाद में कांग्रेस के कार्यक्रम का राजद नेताओं के बायकाट के साथ ही राजद की ‘एकला चलो’ वाली सक्रियता यह संकेत दे रही है कि महागठबंधन में कुछ तो गड़बड़ है. बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस घोषित नहीं किये जाने से आरजेडी असंतुष्ट है. जानकारों की नजर में कांग्रेस-आरजेडी की इस तल्खी से महागठबंधन में समन्वय बिगड़ रहा है और सहयोगी दलों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. तेजस्वी की बिहार यात्रा का रोडमैप तेजस्वी यादव की मंगलवार से शुरू हो रही 'बिहार अधिकार यात्रा' का आगाज़ जहानाबाद से होगा. इसके बाद तेजस्वी नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर के रास्ते वैशाली तक का सफर तय करेंगे. इस तरह तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा जिले से होकर गुजरेंगे तो गिरिराज सिंह के गढ़ बेगूसराय और पप्पू यादव के मधेपुरा और सुपौल की यात्रा भी करेंगे. बिहार के जिन जिलों से होकर तेजस्वी यादव गुजरेंगे, वो इलाका बीजेपी और जेडीयू का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस तरह से एक बात साफ है कि तेजस्वी 'बिहार अधिकार यात्रा' के जरिए अपने कमज़ोर माने जाने वाले गढ़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आरजेडी के पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे. तेजस्वी को क्यों निकालनी पड़ रही यात्रा? राहुल गांधी की यात्रा समाप्त हुए अभी 15 दिन ही गुज़रे हैं कि तेजस्वी यादव अकेले बिहार यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. राहुल गांधी के साथ तेजस्वी ने वोटर अधिकार यात्रा के जरिए 1300 किलोमीटर का सफर तय किया है और अब तेजस्वी अकेले दस जिलों की यात्रा पर निकल रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राहुल गांधी ने अपनी वोटर अधिकार यात्रा से बिहार कांग्रेस में एक नई जान फूँक दी है. राहुल गांधी के साथ यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव को भी प्रमुखता मिली, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी जनता का ध्यान अपनी तरफ खींचा. राहुल की यात्रा का सियासी लाभ आरजेडी को कम, कांग्रेस को ज़्यादा मिला है. यात्रा से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और सीट शेयरिंग से लेकर मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर अपनी मर्ज़ी की बात रख रही है. कांग्रेस यह बताने में जुट गई है कि वो आरजेडी के बैसाखी के सहारे नहीं, बल्कि उसका अपना जनाधार और राजनीतिक कद है. राहुल गांधी ने अपने भाषणों से जनता को यह संदेश दिया कि कांग्रेस बिहार के मुद्दों को लेकर गंभीर है. तेजस्वी यादव अकेले यात्रा निकालकर आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की रणनीति अपनाए हैं. यही वजह है कि आरजेडी की तरफ से तेजस्वी के यात्रा का संदेश सिर्फ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भेजा गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव अपनी खुद की यात्रा से यह साबित करना चाहते हैं कि वह महागठबंधन के निर्विवाद नेता हैं और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता की पहली पसंद हैं. तेजस्वी जनता से सीधे जुड़ने का प्लान तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के जरिए एक तरफ जहां अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. आरजेडी नेता संजय यादव कहते हैं कि राहुल गांधी के साथ जो यात्रा थी, वो एसआईआर के मुद्दे पर रही है. वह वोटर अधिकार यात्रा थी और अब तेजस्वी बिहार के अधिकार के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं. संजय कहते हैं कि तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान किसान, नौजवान, महिलाएं, बुजुर्ग और रोज़गार के मुद्दे को उठाएंगे और लोगों के साथ संवाद करेंगे. चुनाव के दौरान हर पार्टी अपने लिहाज़ से रणनीति बनाती है, उसी तरह आरजेडी ने अपनी रणनीति बनाई है. तेजस्वी की लोकप्रियता बिहार में सबसे ज़्यादा है और वे प्रदेश के सभी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. तेजस्वी अपने पिता आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तरह जनता से सीधे तौर पर संवाद और उनसे जुड़ना चाहते हैं. लालू यादव भी हमेशा यात्राओं और रैलियों के जरिए लोगों से सीधे संवाद करते थे. तेजस्वी की यह यात्रा लालू की उस विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है. आरजेडी ने तेजस्वी की यात्रा को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी ने सभी जिलाध्यक्षों और विधायकों को साफ निर्देश दिया है कि वे तैयारी में कोई कसर न छोड़ें. यात्रा जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों से गुज़रेगी, वहाँ पर भीड़ जुटाएँ ताकि तेजस्वी यादव जनता से सीधे संवाद कर सकें. खास बात यह होगी कि … Read more

रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार

विकसित यूपी @2047: यूपी का नया अवतार : जमीन पर रफ्तार, आकाश में विस्तार  रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार  2017 से पहले धीमी प्रगति, योगी सरकार ने दी रफ्तार – राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुना से ज्यादा बढ़ा – सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के साथ यूपी बनेगा लॉजिस्टिक हब – 2047 तक हर मंडल को एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट देने का मुख्यमंत्री का संकल्प  – पीएमजीएसवाई से गांव-गांव तक पहुंची सड़क – जेवर एयरपोर्ट बनेगा एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 'विकसित यूपी @2047' के विजन की ओर बढ़ते हुए परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव का साक्षी बन रहा है। पिछले साढ़े आठ वर्षों में जिस तेजी से सड़क, एक्सप्रेसवे और एविएशन सेक्टर में प्रगति हुई है, उसने न केवल प्रदेश की रफ्तार बढ़ाई है बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और विकास का नया केंद्र बना दिया है। 2017 से पहले की स्थिति : धीमी प्रगति, सीमित संसाधन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क और एविएशन अवसंरचना विकास की रफ्तार बेहद धीमी थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क लंबाई 2013-14 में 51,549 किलोमीटर से बढ़कर 2016-17 में मात्र 56,846 किलोमीटर हो सकी। हवाई कनेक्टिविटी भी सीमित थी और 17 वर्षों (1999 से 2016 तक) में विमान यात्रियों की संख्या में केवल 55 लाख की वृद्धि हुई थी। प्रदेश में उस समय मात्र तीन एक्सप्रेसवे और गिने-चुने हवाई अड्डे संचालित थे। साढ़े आठ साल में बड़ा बदलाव : जमीन से आकाश तक नई उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2017 के बाद सड़क, हवाई और जल परिवहन में समन्वित दृष्टिकोण के साथ ठोस कदम उठाए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क लंबाई 2024-25 तक 77,425 किलोमीटर तक पहुंच गई। वहीं, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे आगे निकलते हुए 22 एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने के महाअभियान में जुटी हुई है। एविएशन सेक्टर में भी यूपी ने छलांग लगाई और 12 घरेलू तथा 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हो चुके। एक्सप्रेसवे प्रदेश बना उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में जाना जा रहा है। 1949-50 में जहां कोई एक्सप्रेसवे नहीं था, वहीं 2016-17 तक यह संख्या केवल 3 तक पहुंच सकी थी। लेकिन 2025-26 तक यह बढ़कर 22 हो गई है, इसमें संचालित और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट न केवल आंतरिक कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं, बल्कि लॉजिस्टिक हब के रूप में यूपी की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। प्रमुख निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और व्यापक बनाने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू हो गये हैं। इनमें गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे (मुजफ्फरनगर के रास्ते) और चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश का सड़क नेटवर्क न केवल और मजबूत होगा बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार 2004-05 में उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 5,599 किलोमीटर था, जो 2023-24 तक बढ़कर 12,292 किलोमीटर हो गया। इस दोगुनी से अधिक वृद्धि ने राज्य के भीतर व्यापार, माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को नई गति दी है। इससे न केवल रसद लागत कम हुई है, बल्कि यूपी उत्तर भारत में एक रणनीतिक ट्रांजिट हब बन गया है। हवाई कनेक्टिविटी में आई क्रांति 1950 में जहां प्रदेश में एक भी हवाई अड्डा नहीं था, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 16 (पांच निर्माणाधीन सहित) हो चुकी है। इसमें 12 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शामिल हैं। विशेष रूप से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले समय में एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होगा और कार्गो तथा ट्रांजिट हब के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान देगा। विमान यात्रियों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि 2017 से पहले 17 वर्षों में हवाई यात्रियों की संख्या में 55 लाख की वृद्धि हुई थी, जबकि पिछले आठ वर्षों में यह वृद्धि 82 लाख तक पहुंच गई। 2025 में विमान यात्रियों की संख्या 1.42 करोड़ तक अनुमानित है। इस तेजी ने यूपी को विमानन क्षेत्र में नई उड़ान दी है। भविष्य की राह 2030 तक : कनेक्टिविटी का महाजाल प्रदेश में पूरब से पश्चिम की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव के बाद अब योगी सरकार 2030 तक उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी का विशाल नेटवर्क खड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। सभी जिला मुख्यालयों को एक्सप्रेसवे से जोड़ने, नेपाल सीमा पर बहुउद्देशीय ट्रांजिट हब विकसित करने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय रोपवे निर्माण की योजना है। विजन 2047 : एक मंडल-एक एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश में हर मंडल का अपना एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट हो। सभी 75 जिलों को एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ग्रीन स्मार्ट हाईवे, एयर कार्गो हब, हेलिपोर्ट और आधुनिक एविएशन इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर के रूप में स्थापित करने की योजना है।      

क्या बिहार में गेमचेंजर साबित होंगे MP के CM मोहन यादव? जानिए BJP का सियासी दांव

भोपाल  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सियासी जंग जारी है. इसी कड़ी में बीजेपी ने नई रणनीति अपनाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बिहार में उतारा है. जानकारों का मानना है कि इस कदम का मुख्य लक्ष्य यादव वोट बैंक पर सीधी पकड़ बनाना, लालू यादव की विरासत को चुनौती देना और एनडीए की पकड़ मजबूत करना है.  14 सितंबर को मोहन यादव पटना पहुंचे और यादव महासभा के बड़े आयोजन में शामिल हुए, जहां कई बड़े नेता भी मौजूद रहे. यह कदम BJP के “एमवाई समीकरण” (मुस्लिम-यादव) को तोड़ने और यादव समुदाय को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यादव समाज को साधने की कोशिश! डॉ. मोहन यादव के पटना दौरे के दौरान BJP ने यादव समाज को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम किया. इस आयोजन में ओबीसी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज अहीर, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, छत्तीसगढ़ के मंत्री गजेंद्र यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव और विधायक संजीव चौरेसिया जैसे नेताओं ने मंच साझा किया. एनडीटीवी के रिपोर्ट के अनुसार, इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान कृष्ण पर केंद्रित प्रस्तुतियां हुईं, जिससे राजनीतिक संदेश भी दिया गया. बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर जोर अपने संबोधन में मोहन यादव ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बीजेपी के चुनावी एजेंडे से जोड़ा. उन्होंने सम्राट अशोक, पाटलिपुत्र, अवंतिका (उज्जैन) और भोजपुर भाषा के साझा रिश्ते का जिक्र कर बिहार- मध्यप्रदेश की कड़ी बताई. उन्होंने कहा कि बिहार भगवान कृष्ण से जुड़ा राज्य है और यहां भगवान कृष्ण के पुत्र ने सूर्य मंदिर बनवाया था. साथ ही उन्होंने बुद्ध, जैन धर्म के तीर्थंकरों और चाणक्य-नालंदा-तक्षशिला की परंपरा का हवाला दिया. यह बयान स्पष्ट रूप से यादव समुदाय और बिहार की धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना से जुड़ाव दिखाने के लिए था. एमवाई वोट बैंक पर बीजेपी की नजर! भाजपा का यह कदम सीधे तौर पर यादव वोट बैंक को साधने के लिए है, जो अब तक लालू यादव के आरजेडी के प्रभाव में माना जाता रहा है. डॉ. मोहन यादव ने राम मंदिर के मुद्दे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और खुद को “साधारण कार्यकर्ता” बताकर यादव परिवार की वंशवादी राजनीति पर हमला किया. इससे पहले भी उन्होंने निसादराज सम्मेलन कर मछुआरा समुदाय को जोड़ने की कोशिश की थी, जो बिहार की करीब 45 सीटों पर असर डालता है.

25 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन, लाडो लक्ष्मी पोर्टल का ट्रायल आज से; CM की घोषणा के बाद बढ़ी हलचल

हिसार  हरियाणा सरकार 25 सितंबर से दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा है कि जल्द ही आवेदन के लिए पोर्टल खोला जाएगा। इसके लिए जिलों में आज से ट्रायल भी शुरू हो चुका है। हालांकि, योजना की पात्रता संबंधी सभी शर्तें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई हैं। इस योजना के लिए समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को फॉर्म भरने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। ट्रायल के दौरान आने वाली किसी भी समस्या के समाधान के लिए वे तुरंत उच्च अधिकारियों से संपर्क करेंगे। हरियाणा में 15 साल की रिहाइश प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। इसी कारण डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए भारी भीड़ लग रही है, खासकर उन परिवारों में जहां बहुएं दूसरे राज्यों से हैं और जिनकी शादी को 15 साल पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में पति डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) पर इसके लिए बड़े विज्ञापन लगाए गए हैं।   हरियाणा सरकार दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना को शुरू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की ओर से घोषित इस योजना के तहत 18 से 20 लाख महिलाओं को हर महीने ₹2100 दिए जाएंगे। योजना का आवेदन पोर्टल 25 सितंबर से खुलने की उम्मीद है और इसके लिए आज से जिलों में ट्रायल भी शुरू हो गया है। हालांकि, योजना की पात्रता से जुड़ी कुछ शर्तें लाभार्थियों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं, जिससे कई परिवारों में असमंजस की स्थिति है। विशेषकर 'डोमिसाइल' की शर्त ने उन परिवारों को सबसे ज्यादा परेशान किया है, जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों से हैं। आइए, इस योजना के हर पहलू को गहराई से समझते हैं। योजना की शर्तें मुख्यमंत्री ने भले ही 18 से 20 लाख महिलाओं को लाभ देने की बात कही हो, लेकिन इस योजना की कुछ शर्तें लाभार्थियों की संख्या को सीमित कर रही हैं। यहां उन तीन मुख्य शर्तों पर गौर करते हैं जिन्होंने इस योजना को जटिल बना दिया है। 1. उम्र की सीमा : हरियाणा में योजना का लाभ 23 से 60 वर्ष की महिलाओं को मिलेगा, जबकि देश के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में ऐसी योजनाओं के लिए न्यूनतम उम्र 18 से 21 वर्ष है। हरियाणा की यह शर्त कई युवा महिलाओं को दायरे से बाहर कर देती है। 2. आय की टफ शर्त : योजना का लाभ केवल उन महिलाओं को मिलेगा जिनकी पारिवारिक आय ₹1 लाख वार्षिक से कम है। यह शर्त महाराष्ट्र (₹2.5 लाख) और मध्य प्रदेश (₹2.5 लाख) जैसे राज्यों की तुलना में काफी सख्त है। अगर हरियाणा सरकार बीपीएल परिवारों को ही लाभ देती, तो लाभार्थियों की संख्या लगभग 42 लाख होती, लेकिन आय की सीमा ने इस संख्या को घटाकर 19-20 लाख तक सीमित कर दिया है। 3. डोमिसाइल की शर्त सबसे भारी : यह शर्त इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। आवेदन करने वाली अविवाहित महिला को खुद हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए, जबकि विवाहित महिला के लिए उसके पति का पिछले 15 साल से हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है। यह नियम उन लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है जिनकी बहुएं पड़ोसी राज्यों से आई हैं और जिनकी शादी को अभी 15 साल पूरे नहीं हुए हैं। यह शर्त उन सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित कर रही है जो हरियाणा की सीमा से सटे राज्यों जैसे पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के साथ दशकों से चले आ रहे हैं। पति बनवा रहे हैं सर्टिफिकेट डोमिसाइल इस डोमिसाइल की शर्त को पूरा करने के लिए उन परिवारों में होड़ मची हुई है, जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों की हैं। चूंकि बहुओं की शादी को अभी 15 साल नहीं हुए हैं, इसलिए उनके पति अपने 'डोमिसाइल सर्टिफिकेट' बनवा रहे हैं ताकि वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकें। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, यमुनानगर, अंबाला, सिरसा और नूंह जैसे जिलों में ऐसी संख्या बहुत ज्यादा है, क्योंकि इन जिलों की सीमाएं पड़ोसी राज्यों से सटी हुई हैं। राजस्थान के डूमोली गांव की रहने वाली अनीता, जिनकी शादी नारनौल के चिंडालिया गांव के अमित से हुई। उसने बताया कि वे भी इस डोमिसाइल की शर्त से परेशान हैं। उनकी तरह ही राजस्थान के मेघपुर की मंजू, जिनकी शादी 2014 में हुई थी, के पति भी सर्टिफिकेट बनवाने में लगे हैं। ये महिलाएं कहती हैं कि 'अब तो हम भी हरियाणवी बहुएं बन गई हैं, यह डोमिसाइल की शर्त सही नहीं है।' यह स्थिति दिखाती है कि सरकार की एक अच्छी मंशा वाली योजना भी कैसे कुछ नियमों के कारण जटिल बन सकती है। सरकारी तैयारी और पोर्टल की सुविधाएं योजना को लागू करने के लिए सरकार ने भी कमर कस ली है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को फॉर्म भरने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। आज से जिलों में फॉर्म भरने का ट्रायल वर्जन शुरू होगा, ताकि 25 सितंबर को पोर्टल खुलने पर कोई तकनीकी दिक्कत न आए। सरकार ने कुछ प्रावधानों को सरल भी किया है। • एक मोबाइल नंबर से 3 फॉर्म : एक परिवार आईडी में एक ही मोबाइल नंबर से तीन फॉर्म भरे जा सकते हैं, भले ही वह नंबर फैमिली आईडी में पंजीकृत न हो। यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी सुविधा है जहां एक ही फोन का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। • आधार और बैंक अकाउंट की अनिवार्यता : लाभार्थी का आधार कार्ड उसके मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से जुड़ा होना अनिवार्य है। साथ ही, बैंक अकाउंट का फैमिली आईडी से लिंक होना भी जरूरी है ताकि राशि सीधे खाते में भेजी जा सके। दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना एक महत्वाकांक्षी पहल दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करना है। लेकिन इसकी पात्रता की शर्तें, विशेषकर आय और डोमिसाइल की, कई योग्य लाभार्थियों को दायरे से बाहर कर सकती हैं। जहां एक तरफ सरकार इस योजना को लागू करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ उन लाखों परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है जिनकी बहुएं दूसरे राज्यों से आई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार भविष्य में इन शर्तों में कोई … Read more

सफर होगा आसान: भोपाल-इंदौर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे का रूट तय, दूरी घटेगी, रफ्तार बढ़ेगी

इंदौर   मध्य प्रदेश के इंदौर से राजधानी भोपाल की सड़क यात्रा की दूरी तय करने में फिलहाल साढ़े 3 से 4 घंटे का समय लगता है। इसे कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है। दोनों शहरों के बीच हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर बनने जा रहा है। जिससे दोनों शहरों के बीच का सफर 50 किलोमीटर तक कम होगा और दो घंटे में भोपाल से इंदौर का सफर पूरा किया जा सकेगा। इसका मार्ग फाइनल हो चुका है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) इसे भारत माला हाईवे की तर्ज पर विकसित करेगी। जिसके लिए मध्य प्रदेश सरकार की जरूरी सैद्धांतिक सहमति के बाद एनएचएआई ने इसकी अलाइनमेंट डीपीआर की मंजूरी के लिए सड़क परिवहन विभाग को भेज दी है। सिंहस्थ 2028 से पहले इस हाइस्पीड एक्सप्रेस-वे को शुरू करने की योजना है।  नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इसे भारत माला हाईवे की तर्ज पर डेवलप करेगी। राज्य सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बाद NHAI ने इसकी अलाइनमेंट डीपीआर मंजूरी के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दी है। मंजूरी मिलने के बाद एक्सप्रेस वे का मैदानी काम शुरू होगा। बता दे इस समय भोपाल इंदौर के बीच मौजूदा एक्सप्रेसवे में कई गाड़ियों की आवाजाही होती है। जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। एनएचएआई ने ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण किया तो पता चला कि यहां से रोज़ाना 30 हज़ार से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। जिसमें मेहतवाड़ा से लेकर डोडी तक जाम लगता है यहां कई वाहन खड़े होते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की जरूरत क्यों, 4 कारण 1. मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव इंदौर-भोपाल के बीच जो मौजूदा सड़क है, उस पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है। NHAI ने ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण किया तो पाया कि यहां से रोजाना 30 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। आने वाले समय में जैसे- जैसे आबादी बढ़ेगी, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता जाएगा। ऐसे में दोनों शहरों के बीच नया कॉरिडोर बनाने की जरूरत है। 2. कई हिस्सों में जाम के हालात मौजूद हाईवे पर कई स्पॉट पर जाम के हालात बनते हैं। मेहतवाड़ा से लेकर डोडी तक जाम लगता है। यहां कई वाहन खड़े रहते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती है। जावर जोड़ से होकर निकलने वाली बसें यहां रुकती है। यात्रियों को यहीं से बैठाया जाता है। सीहोर के पास कुबेरेश्वर धाम की वजह से भी आए दिन जाम के हालात बनते हैं। इसी साल सावन के महीने में कुबेरेश्वर धाम की कांवड़ यात्रा में 5 लाख श्रद्धालु जुटे थे। हाईवे पर 72 घंटे तक जाम लगा रहा। 3. हाईवे से सटे कस्बे ट्रैफिक में रुकावट भोपाल-इंदौर हाईवे सीहोर, आष्टा और सोनकच्छ कस्बों के लिए बायपास रोड है। इन कस्बों में रहने वाले लोग इंदौर या भोपाल जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। किसान भी अपने खेतों पर जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से यहां टू व्हीलर, ट्रैक्टर की आवाजाही भी रहती है। 4. ढाबा-रेस्टोरेंट और टोल नाके हाईवे के दोनों तरफ की जमीनों का व्यवसायिक इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। इस समय इंदौर- भोपाल रोड पर 50 से ज्यादा ढाबे और रेस्टोरेंट हैं। कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने से वाहनों की आवाजाही बढ़ती जा रही है। एमपीआरडीसी के यहां 4 और एनएचएआई का एक टोल है। भोपाल वेस्टर्न बायपास से इंदौर के एमआर-10 तक बनेगा प्रस्तावित एक्सप्रेस वे भोपाल के वेस्टर्न रिंग रोड से शुरू होगा और इंदौर के एमआर 10 से जुड़ेगा। इसके बीच में तीन जिले भोपाल, सीहोर, देवास की 7 तहसीलें आएंगी। ये पूरी तरह से नया रोड बनेगा। भोपाल से सीहोर इछावर होते हुए आष्टा के इलाही और देवास जिले के हाटपिपल्या और बागली तहसील को जोड़ेगा। एनएचएआई की डीपीआर के मुताबिक, भोपाल वेस्टर्न बाइपास से इंदौर एमआर 10 तक की दूरी 148–150 किमी है। वर्तमान हाईवे से देवास होकर इंदौर तक की दूसरी 195 किमी है। भोपाल-इंदौर के बीच एक्सप्रेस-वे का सफर करीब 50 किमी कम हो जाएगा और यह 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर देवास शहर से होकर नहीं गुजरेगा। 7 तहसील के 59 गांव जुड़ेंगे     भोपाल, हुजूर तहसील: अमरपुरा, समसपुरा, आमला।     सीहोर तहसील: डेहरिया खुर्द, गडिया, रत्नखेरी, पाटनी, गेरूखान, इमलीखेड़ा।     इछावर तहसील: मुबादा, सेमली जादीद, मोहनपुर नौबाद, बावड़िया, सेंधोखेड़ी, लसुड़िया कांगड़, पोंगराखाती, कस्बा इछावर, सेवनियां, निपानिया, नयापुरा, जुझारपुरा, दिवारिया, हिम्मतपुर, मुंडला, बिजोरी, चैनपुरा।     आष्टा तहसील: भऊनरा, भटोनी, अरनिया जोहरी, मगरखेड़ी, दल्लूपुरा, लाखापुरा, झारखेड़ी, कामखेड़ाजबा, कन्नौदमिर्जा, गंगलखोटरी, झानपुरा, पगरियाहट, इलाही।     जावर तहसील: देहमत, उमरदाद, जहांजनपुरा, धुराड़ाकलां।     हाटपिपल्या तहसील: साप्ती, भवरड़ा, कनेरिया, बारोली, दोकरखेड़ा, कंझार, कावड़ी, हमीरखेड़ी, बरहानपुर, पिटावली, रेहली।     बागली तहसील: बिलावली, देवपिपल्या, बावड़ीखेड़ा, गाराखेड़ी, बिजूखेड़ा। डिजाइन से तय होती है गाड़ियों की स्पीड इंडियन रोड कांग्रेस-2013 की गाइडलाइन के मुताबिक, एक्सप्रेस वे की डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रतिघंटा तय की गई है। इस स्पीड से गाड़ी चलने पर 180 किलोमीटर की दूरी दो से ढाई घंटे में पूरी होती है। ऐसे ही सिक्स लेन की डिजाइन स्पीड 100 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। इस स्पीड में 180 किमी की दूरी तीन घंटे में तय होती है। 1100 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण एनएचएआई अफसरों के मुताबिक, अलाइनमेंट को इस तरह से तैयार किया है कि हाईवे ज्यादातर सरकारी और वन भूमि से होकर गुजर रहा है। हालांकि, इसके दायरे में करीब 1100 हेक्टेयर निजी जमीन भी आ रही है। ये पूरे प्रोजेक्ट का करीब 30 से 40 फीसदी हिस्सा है। अफसरों के मुताबिक जैसे ही अलाइनमेंट डीपीआर को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलेगी, उसके बाद जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। एनएचएआई के अफसरों का कहना है कि निजी जमीन का एरिया ज्यादा नहीं है इसलिए भूमि अधिग्रहण में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ये प्रक्रिया 6 से 8 महीने के बीच पूरी कर ली जाएगी। भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रक्रिया करेगी। इसके बाद जो भी नियम के अनुसार मुआवजा बनेगा, वो निजी भूमि मालिक को दिया जाएगा। मुआवजा की राशि केंद्र सरकार देगी।

बेगूसराय में उड़ान की तैयारी! एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी पर सरकार की खास योजना

बेगूसराय बिहार के बेगूसराय में जल्द ही लोगों को एयरपोर्ट की सौगात मिलने वाली है. इस एयरपोर्ट पर सेवाएं शुरू होने के बाद व्यावसायिक उड़ान सेवा का लाभ मिल सकेगा. इसके साथ ही जिले का जुड़ाव हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से भी होगा. यह बातें बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कही. इससे लोगों को बड़ी सहूलियत मिलने वाली है. बिहार सरकार की तरफ से इसे लेकर खास प्लानिंग की गई है. डिप्टी सीएम ने रखी अपनी बात बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इसे लेकर एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी. सम्राट चौधरी ने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए समृद्ध बिहार बनना जरूरी है. एनडीए की सरकार एक बार फिर से बिहार में बनानी पड़ेगी. मोदी जी ने अर्थव्यवस्था के विकास के लिए स्वदेशी अभियान पर जोर दिया है. एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बेगूसराय सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी जमकर तारीफ की और कहा कि सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार विकास हो रहा. ऐसे में बदलते बिहार में अब हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से बेगूसराय भी जुड़ेगा. हालांकि, इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तंज भी कसा. बेगूसराय से कोलकाता की दूरी घटी दरअसल, हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे के बनने से सिर्फ 5 से 6 घंटे में ही बेगूसराय से कोलकाता की दूरी तय की जा सकेगी. इसके निर्माण के लिए 950 एकड़ में जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा. इसके अलावा जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जाएगा. इन योजनाओं के जरिये जिले में अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा. उलाव हवाई पट्टी पर हुई थी लैंडिंग दूसरी तरफ बेगूसराय के उलाव हवाई पट्टी पर सालों बाद किसी विमान की सफलतापूर्वक लैंडिंग हुई थी. जिला प्रशासन ने 8 यात्रियों वाले एवर डेलिवर लॉजिस्टिक्स के एयरक्राफ्ट को लैंडिंग की अनुमति दी थी. हालांकि, जिले में अब ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की बात कही गई है. ऐसे में देखना होगा कि जिले में एयरपोर्ट को लेकर सरकार अंतिम फैसला क्या कुछ लेती है.