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जदयू में हलचल: Nitish Kumar ने सांसद Girdhari Yadav पर की कार्रवाई

पटना जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी ने बांका से सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ कथित दल-विरोधी गतिविधियों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता का नोटिस सौंपा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियां की हैं। चुनाव के वक्त पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल रहे। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने कहा कि जब मुझसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में पूछा जाएगा, तब मैं अपना जवाब दूंगा। मुझे नहीं पता कि दिलेश्वर कामत ने क्या कहा है। मेरे खिलाफ किसी भी तरह की दल-विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के वक्त गिरधारी यादव का बेटा चाणक्य प्रकाश राजद में शामिल हो गए। उन्होंने बेलहर सीट से जदयू प्रत्याशी और विधायक मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसमें चाणक्य की हार हुई थी। इसके बाद से ही गिरधारी यादव पर सवाल उठने लगे थे। ललन बोले- यह फैसला हमने नहीं लिया इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा कि यह फैसला हमने नहीं लिया है। यह निर्णय उन लोगों की ओर से लिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे को विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर उतारा और खुद उसके लिए प्रचार भी किया। इसी आधार पर हमारे संसदीय नेता दिलेश्वर कामैत ने आवेदन दिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को लेना है। राजद सांसद ने उठाया सवाल राजद सांसद मीसा भारती ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरधारी यादव जदयू के सांसद हैं। अगर उनके बेटे ने चुनाव लड़ा है, तो वह वयस्क है और अपने फैसले खुद ले सकता है। ऐसे में इस आधार पर कार्रवाई करना सही नहीं है। अब देखना होगा कि आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

जदयू की कमान फिर संभालेंगे नीतीश कुमार, चौथी बार निर्विरोध चुने जाने की तैयारी

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आज शाम बाद प्रदेश कार्यालय में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज समृद्धि यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश कार्यालय में आएं ताकि कार्यकर्ता और नेता उनको चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने बधाई दे सकें। इस वजह से बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में भी जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अब एक बार फिर चौथी बार भी वह निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 22 मार्च को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन किया गया था और आज 24 मार्च तक नामांकन वापस लिए जाने का दिन था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे किसी अन्य ने इस पद के लिए अपना नामांकन पर्चा नहीं भरा, इस वजह से यह साफ़ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगर इनके अलावे कोई अन्य नामांकन दाखिल करता तो 27 मार्च चुनाव होता, लेकिन ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी। अब राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पार्टी की बागडोर अपने ही हाथ में रखेंगे। इस बात की आधिकारिक घोषणा कुछ ही देर में कर दी जाएगी। निर्वाचन अधिकारीजारी करेंगे निर्वाचन प्रमाण पत्र जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आज. मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के पूर्व सांसद अनिल प्रसाद हेगडे आज दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य सभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। संजय झा ने भी जमा कराया था अपना नामांकन बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावकों में से एक संजय झा ने भी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अपना नामांकन जमा कराया था। बिहार के मुख्यमंत्री नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली नहीं आए थे। इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, जबकि उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 23 मार्च को की गई थी। राजीव रंजन सिंह के दिसंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जेडीयू की कमान संभाली। क्या कहा था संजय झा और विजय चौधरी ने? इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने कई बार कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की इच्छा हुई। इसलिए वह जा रहे हैं। यह नीतीश कुमार के खुद का फैसला है। हालांकि इस दौरान उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा और पार्टी भी उनकी छाया में ही काम करेगी। मुख्यमंत्री ने पार्टी को क्या कहा? दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर 2025 में ही होना था। लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव नहीं हो पाया। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महीने में राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी। ऐसे में कयास लगने लगे कि सीएम नीतीश कुमार अब बिहार और पार्टी की बागडोर संभालना नहीं चाहते हैं। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि आपलोग चिंता नहीं करें। मैं अब भी सक्रिय हूं और दिल्ली जाने के बाद भी आप सभी का मार्गदर्शन करता रहूंगा।

CM फेस पर सस्पेंस बरकरार: नीतीश कुमार ने फिर दिए संकेत, बड़े नेता की पीठ थपथपाई

जमुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है। पिछले 20 वर्षों के कार्यकाल में जो थोड़ी बहुत कमी रह गई है, उसे अगले पांच वर्षों के एनडीए सरकार में पूर्ण कर लिया जाएगा। वह बुधवार को समृद्धि यात्रा पर भगवान महावीर की धरती लछुआड़ पहुंचे थे। यहां उन्होंने चिर प्रतीक्षित कुंडघाट जलाशय परियोजना सहित 914 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने 2005 के पहले के बिहार की चर्चा करते हुए लोगों को विरोधियों से सावधान किया और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए के लिए समर्थन देते रहने का भरोसा लिया। 40 मिनट लंबा संबोधन नीतीश ने तकरीबन 40 मिनट के संबोधन में लगभग सभी बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि किस प्रकार उन लोगों ने बिहार को बदहाली के दलदल से बाहर निकाला। उन्होंने यह भी बताया कि शाम होते कैसे दरवाजे बंद हो जाते थे और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता था। सड़कों की क्या हालत थी और अब क्या है। 24 नवंबर 2005 को सत्ता संभालने के साथ हमने न्याय के साथ विकास करना प्रारंभ किया। नीतीश ने गिनाई अपनी उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पर नमन करते हुए अपना संबोधन प्रारंभ किया। इसके बाद वह कब्रिस्तान से लेकर मंदिरों की घेराबंदी सुनिश्चित कर सांप्रदायिक सौहार्द बहाल करने में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम शिक्षा पर काम शुरू किया और आज सरकारी शिक्षकों की संख्या 5.24 लाख हो गई। पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह 39 मरीज आते थे। आज यह आंकड़ा 11600 तक पहुंच गया है। 2005 से पहले सिर्फ छह मेडिकल कॉलेज थे। अब 12 हो गए। छह पूर्ण होने वाले हैं और 21 को भी शीघ्र पूरा किया जाएगा। पुराने को भी अपग्रेड कर दिया गया है। पीएमसीएच 5400 बेड का बन गया। इसके अलावा, पांच अन्य पुराने मेडिकल कॉलेज को ढाई हजार बेड का बनाया गया। अगले 5 साल में देंगे 1 करोड़ नौकरी नीतीश कुमार ने कहा कि आईजीएमएस भी 3000 बेड का अस्पताल हो गया। 2018 में ही उन्होंने हर घर बिजली पहुंचाने का काम किया 50 लाख घरों पर सोलर की स्वीकृति दी जा चुकी है। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ को नौकरी और रोजगार दिया जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण की कई योजनाओं को प्रारंभ किया गया। जाति आधारित गणना, पेंशन राशि बढ़ोतरी और 125 यूनिट बिजली फ्री के साथ ही रोजगार के लिए जीविका दीदी को सहायता पहुंचने की भी उन्होंने चर्चा की। जीविका दीदियों की चर्चा नारी सशक्तिकरण में जीविका दीदियों से लेकर पंचायत और नगर निकाय में महिलाओं को 50 प्रतिशत तथा पुलिस एवं सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम बताया। 25 से 30 का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा औसत आय को दोगुना करना तथा प्रत्येक जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना सरकार की प्राथमिकता में है। पुरानी बंद चीनी मीलें चालू होंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि डेयरी और मछली पालन के क्षेत्र में भी विशेष काम करने की योजना है। उन्नत शिक्षा और उज्जवल भविष्य के तहत प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खुलेंगे। सुलभ स्वास्थ, सुरक्षित जीवन के तहत विशिष्ट चिकित्सा केंद्र की स्थापना होगी। डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। सम्राट की पीठ पर रखा हाथ, मांगा समर्थन अंत में उन्होंने सम्राट चौधरी के करीब जाकर उनकी पीठ पर हाथ रख जनता से समर्थन देते रहने का भरोसा भी लिया। सभा को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी, 20 सूत्री प्रभारी मंत्री संजय सिंह खेल व सूचना प्रविधि की मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी संबोधित किया

CM फेस पर सस्पेंस: नीतीश कुमार ने सम्राट की पीठ थपथपाई, ‘जिंदाबाद’ के नारों से गरमाई सियासत

भागलपुर. राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद की पहली समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में संकेत दे दिया। उनकी सभा बैजानी में थी। नीतीश ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई। केंद्र सरकार के सहयोग का बखान किया।लोगों को भरोसा दिया कि राज्य में आगे भी सबकुछ अच्छा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भीड़ से हाथ उठाने का आग्रह किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री मंच पर अगल-बगल में खड़े थे। अन्य नेता भी खड़े थे। पीठ पर रखा हाथ, दूसरा हाथ हवा में लहराया मुख्यमंत्री मंच पर तेज कदम बढ़ाते हुए बढ़े। कई नेताओं को किनारे करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। उनकी पीठ पर एक हाथ रखा। दूसरा हाथ हवा में लहरा दिया। सम्राट के दोनों हाथ जुड़ गए। भीड़ ने भीड़ से सम्राट चौधरी जिंदाबाद का नारा बुलंद किया। सम्राट के बगल में विजय चौधरी खड़े थे। इस सभा में एक तरह से नीतीश ने अपने उत्तराधिकारी का साफ संकेत दिया। भीड़ से उस पर मुहर भी लगवा दी। संयोग यह कि मंच का संचालन कर रही महिला ने भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया। प्राय: सभी समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी चोधरी जाते रहे हैं, लेकिन राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद की समृद्धि यात्रा के हरेक मंच पर सम्राट को पहले की तुलना में अधिक तरजीह मिल रही है। सीमांचल की यात्रा में भी दिखी थी ऐसी तस्वीर इससे पहले, सीमांचल की समृद्धि यात्रा में भी नीतीश ने सम्राट की पीठ पर हाथ रखकर भीड़ का अभिवादन करवाया था। जदयू के मंत्रियों में संसदीय कार्य एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को तरजीह मिल रही है। शपथ ग्रहण के क्रम के अनुसार नीतीश मंत्रिमंडल में सम्राट चौधरी को दूसरा स्थान प्राप्त है। वे नीतीश मंत्रिमंडल के पहले गृह मंत्री हैं।

Rajya Sabha Certificate मिला नीतीश कुमार को, संजय का दावा- अब बिहार को मिलेगी नई दिशा

पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित कर दी है। पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने राजनीतिक बढ़त को और मजबूत किया है। पहले से ही संख्या बल एनडीए के पक्ष में होने के कारण नतीजे लगभग तय माने जा रहे थे। इस जीत के साथ मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं। उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने औपचारिक रूप से सौंपा। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। ‘गौरव का क्षण’ बताया संजय झा ने Sanjay Jha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक जीवन जनता की सेवा और बिहार के विकास को समर्पित रहा है। संजय झा के अनुसार, राज्यसभा में नीतीश कुमार की मौजूदगी से बिहार के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी। साथ ही उनके अनुभव का लाभ राज्य सरकार को भी मिलता रहेगा। पहले श्रवण कुमार ने लिया था प्रमाण-पत्र इससे एक दिन पहले Shravan Kumar मुख्यमंत्री की ओर से प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे थे। इसके बाद आज औपचारिक रूप से यह प्रमाण-पत्र सौंपा गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई। विपक्ष पर भी साधा निशाना दिल्ली रवाना होने से पहले संजय झा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए को अपनी जीत पर शुरू से ही भरोसा था। जिन दलों के विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे, उन्हें अपने अंदर झांकने की जरूरत है। ‘संख्या बल में कोई चुनौती नहीं’ उन्होंने कहा कि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत था और किसी तरह की परेशानी नहीं थी। कुछ दल अपने ही विधायकों को संभालने में लगे रहे, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर नजर आई। आगे की राजनीति पर नजर इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में एनडीए का मनोबल और बढ़ गया है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासी दिशा और फैसलों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

राज्यसभा चुनाव में आज चुने जाएंगे सीएम नीतीश कुमार, पहले भी बना चुके हैं अनोखा राजनीतिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली बिहार की राजनीति में फिर एक बड़ा दिन। राज्यसभा चुनाव तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी लड़ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है। नितिन विधायक रहते सांसदी का यह चुनाव लड़ रहे तो नीतीश विधान परिषद् सदस्य रहते। नीतीश कुमार की चर्चा इसलिए सबसे ज्यादा हो रही है, क्योंकि दिल्ली जाने के लिए उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ेगा और पहली बार भारतीय जनता पार्टी इस कुर्सी पर अपना आदमी बैठाएगी। ऐसे में रोचक है कि नीतीश कुमार आज के बाद फैसला क्या लेते हैं? बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को समझना असंभव जब 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के रूप में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रचारित होना शुरू होता, इससे पहले नीतीश कुमार ही ऐसे बड़े नेता थे जिन्होंने पुराने रिश्ते छोड़ दिए थे। नीतीश कुमार अटल-आडवाणी के समय से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन नमो युग की शुरुआत से पहले एनडीए से निकल गए थे। तब भी अंदाजा नहीं लग रहा था। फिर 2017 में लौटे तो 2022 में छोड़ गए। फिर 2024 में वापस साथ आए। इस साल होली के एक दिन पहले जिस तरह से वह बिहार चुनाव 2025 के तीन महीने बाद ही राज्यसभा जाने के लिए तैयार हुए, वह भी अचरज में डालने वाला था। और, अब खरमास शुरू होने से पहले उनका इस्तीफा नहीं आना भी भाजपा के लिए सिरदर्द बना हुआ है। खरमास में वह फैसला लेते भी हैं तो यही माना जा रहा है कि 15 अप्रैल तक भाजपा नए सीएम की कुर्सी पर अपना आदमी बैठाने का 'जतरा' नहीं बनाएगी। केंद्रीय मंत्री रहे नीतीश एक बार सांसद रहते विधायक भी बने थे नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। वह केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। वह पटना जिले की बाढ़ सीट से लोकसभा सदस्य हुआ करते थे। नालंदा जिले की हरनौत विधानसभा सीट से विधायक हुआ करते थे। इस सदी में वह कभी विधानसभा चुनाव में नहीं उतरे। विधान पार्षद ही चुने जाते रहे। अब राज्य सभा के चुनाव में हैं। नीतीश कुमार के बारे में यह जानना बेहद रोचक है कि वह 1991 में तत्कालीन जनता दल के टिकट पर बाढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर सांसद बने थे। इसके बावजूद उन्होंने 1995 में तत्कालीन समता पार्टी के चुनाव चिह्न पर हरनौत से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते भी। विधायक चुने जाने के बाद जब लोग सांसद के रूप में उनके इस्तीफे का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने विधायक की शपथ नहीं ली। नतीजतन हरनौत सीट के लिए 1996 में उप चुनाव हुआ, जिसमें फिर समता पार्टी के अरुा कुमार सिंह विधायक बने। कब केंद्र में मंत्री बने और कब-कब बिहार की राजनीति का रुख किया? नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधायक चुने गए थे। इसके बाद दिल्ली की राजनीतिक यात्रा के लिए पहली बार 28 नवंबर 1989 को पटना जिले के बाढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। तब, सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 13 मार्च 1991 तक रहा था। अप्रैल 1990 में तत्कालीन विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था। बाद में वीपी सिंह सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी तो केंद्रीय राज्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार का कार्यकाल भी 10 नवंबर 1990 को खत्म हो गया। 13 मार्च 1991 को लोकसभा भंग हुआ तो फिर अगले चुनाव में नीतीश कुमार फिर बाढ़ से ही सांसद चुने गए। इसके बाद, बिहार की राजनीति में वापस वह सक्रिय होते दिखे। 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह हरनौत से फिर उतरे और विधायक चुने गए, हालांकि उन्होंने लोकसभा सदस्य रहना ही उचित समझा। इसके बाद, 1996 में फिर बाढ़ से ही नीतीश कुमार सांसद बने। तब अटल बिहारी वाजपेयी 7 दिन के लिए पीएम बने और फिर मौजूदा विपक्ष सत्ता में आ गया। 15 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो नीतीश कुमार की समता पार्टी उनके साथ थी। नीतीश कुमार को केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया। अगस्त 1999 में गैसाल में रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया। फिर करगिल युद्ध के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव कराना पड़ा तो भाजपा बड़े दल के उभरी। पहली बार पांच साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार रही। नीतीश केंद्रीय मंत्री रहे। नई सदी में पहली बार जब वह चुनाव में उतरे तो 2004 के बाढ़ ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद परिस्थितियां देख वह बिहार को सुधारने के लिए यहां उतर गए। फिर तो 2005 से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार बतौर मुख्यमंत्री अब तक कुर्सी पर हैं। बीच में एक बार जीतन राम मांझी को उन्होंने ही सीएम बनाया था, वह भी लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए।  

भरी सभा में नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाई, क्या मिल गया अगले CM का संकेत?

पटना बिहार की विकास यात्रा को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने आने वाले 5 सालों के लिए एक comprehensive action plan पेश किया है। सीएम नीतीश कुमार ने गुरुवार (12 मार्च) को अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तहत पूर्णिया और कटिहार का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जनसभाओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र के सहयोग से राज्य अब विकास की एक नई इबारत लिखने के लिए तैयार है। कटिहार में जनसभा के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला, जब मंत्री लेशी सिंह अपने संघर्षों को याद करते हुए मंच पर ही आंसू नहीं रोक पाईं। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति अपना पूरा भरोसा जताया। मंच पर सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते हुए सीएम ने यह संदेश दिया कि बिहार में एनडीए गठबंधन पूरी मजबूती के साथ विकास कार्यों को गति दे रहा है। ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस सरकार की नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करना है। अब राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक 'आदर्श विद्यालय' और एक 'डिग्री कॉलेज' स्थापित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने घर से दूर न जाना पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। प्रखंड स्तर के अस्पतालों को अब स्पेशलाइज्ड (विशेष) अस्पतालों में तब्दील किया जाएगा। इसके अलावा, गांवों की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों को भी अपग्रेड करने की योजना हैग्रामीण सड़कों को अब दो लेन में बदला जाएगा, जिससे आवागमन सुलभ और तेज हो सके। खेल और युवाओं के लिए बड़ा ऐलान राजधानी पटना को खेल जगत के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वहां एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि करियर की सुरक्षा भी प्रदान करेगी। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है। मखाना किसानों के लिए विशेष पहल सीमांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मखाना किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से मखाना उत्पादन और उसके बाजार को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।  

“बिहार ने दिखाया कमाल, गरीबी 41% से घटकर 4% पर! नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुआ बदलाव”

पटना. बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है.  नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस सवाल का जवाब भी लोग जानना चाह रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जेडीयू में जॉइनिंग के साथ ही उनके सियासी उदय की भी चर्चा जोरों पर है. लेकिन, इन सबके बीच नए बिहार को लेकर जो आंकड़े सामने आए  हैं, वह सच में नीतीश कुमार के विजन और विजडम दोनों की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। दरअसल कभी विकास के मामले में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले बिहार को लंबे समय तक “बीमारू राज्य” कहा जाता रहा. लेकिन, अब तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य श्यामका रवि ने ‘प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद’ (Economic Advisory Council to the Prime Minister) से जुड़ी अपनी भूमिका के साथ इंडिया एक्स्प्रेस (The Indian Express) में लिखे लेख में बताया है कि पिछले एक दशक में बिहार ने जीवन स्तर, गरीबी और पोषण क्षमता जैसे कई अहम सूचकों पर उल्लेखनीय सुधार किया है। संजय झा ने भी शेयर किया पोस्ट इस आर्टिकल में बताया गया कि गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में राजनीतिक स्थिरता और शासन की निरंतरता का असर विकास के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है. कई मामलों में बिहार ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल को भी पीछे छोड़ दिया है. उपभोग, गरीबी में कमी और पोषण क्षमता जैसे क्षेत्रों में बिहार की प्रगति राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचती दिख रही है. राज्यसभा सांसद और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी इस आर्टिकल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट शेयर इसे आंख खोलने वाली रिपोर्ट बताई है। हैरान करने वाले हैं रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े और तथ्य     2011 से 2024 के बीच बिहार के ग्रामीण इलाकों में रियल मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि हुई, जो राष्ट्रीय औसत 3.1% से करीब 50% अधिक है।     शहरी बिहार में रियल MPCE की वृद्धि 4.6% रही, जबकि पूरे भारत में यह 2.6% रही.     ग्रामीण बिहार में मासिक प्रति व्यक्ति खर्च 2011-12 में ₹1,086 से बढ़कर ₹3,531 हो गया.     इसी अवधि में पश्चिम बंगाल में यह ₹1,211 से बढ़कर ₹3,366 तक पहुंचा, लेकिन उसकी वृद्धि दर कम रही.     शहरी बिहार में नॉमिनल MPCE की वृद्धि 10.7% रही, जबकि पश्चिम बंगाल में यह केवल 6.9% दर्ज की गई. राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बिहार की स्थिति में सुधार     बिहार का ग्रामीण MPCE राष्ट्रीय औसत के 80.5% से बढ़कर 91.7% तक पहुंच गया.     शहरी क्षेत्रों में यह 58.7% से बढ़कर 75.4% हो गया.     इसके विपरीत पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में गिरावट देखी गई.     ग्रामीण अनुपात 89.8% से घटकर 87.5% हो गया.     शहरी अनुपात 97.5% से घटकर 82.8% रह गया. गरीबों की आय में भी तेज वृद्धि     ग्रामीण बिहार में सबसे गरीब 20% आबादी की आय में 4.2% CAGR की वृद्धि हुई.     मध्यम वर्ग में यह 4.6% और अमीर वर्ग में 4.4% रही.     शहरी बिहार में गरीब वर्ग की वृद्धि 5.7% रही, जो सबसे ज्यादा है. गरीबी में भारी गिरावट     2011-12 में बिहार में गरीबी दर 41.3% थी.     2023-24 में यह घटकर 4.4% रह गई, जो राष्ट्रीय औसत 4.0% के लगभग बराबर है.     पश्चिम बंगाल की गरीबी दर इसी अवधि में 30.4% से घटकर 6% रही, जो बिहार से अधिक है। पोषण क्षमता में भी सुधार     2011-12 में बिहार में 64.7% परिवार पोषणयुक्त भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थे.     2023-24 में यह घटकर 27.4% रह गया.     पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 56% से घटकर 34.6% तक आया क्या कहता है विश्लेषण? रिपोर्ट के अनुसार बिहार में जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में तेज कमी और खपत क्षमता में बढ़ोतरी जैसे संकेत स्पष्ट हैं. विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक स्थिर शासन और नीतिगत निरंतरता ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जिस बिहार को कभी स्थायी आर्थिक पिछड़ेपन का उदाहरण माना जाता था, अब वही राज्य कई सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

नीतीश कुमार के 10 क्रांतिकारी कदम: बिहार में बदलाव की कहानी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने किया फॉलो

पटना नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हुई। उनकी योजनाओं ने बिहार की महिलाओं के साथ ही पिछड़ा,अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में काफी मदद की। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 फीसदी आरक्षण दिया। इससे निचले स्तर पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 55 फीसदी तक हो गई है। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि ने भी इस फैसले का अनुसरण किया। नौकरी/पढ़ाई में महिलाओं को 35 प्रतिशत रिजर्वेशन 2013 में नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस में 35 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया। इसका प्रभाव हुआ कि आज बिहार में कुल पुलिस बल का लगभग 30 फीसदी महिलाएं हैं और महिला पुलिस की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। नीतीश सरकार ने 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू कर दिया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण लागू है। जीविका योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की। आज इससे एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। यह महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में गोलंबद हैं। इसकी तर्ज पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं। इनमें रोजगार बढ़ाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। कन्या उत्थान/ जननी बाल सुरक्षा योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने काफी काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान 2008-09 में कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप जन्म पंजीकरण में भारी वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जन्म पंजीकरण दर 54.9% बढ़कर 5.8 से 60.7 हो गया है। जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं से गर्भवतियों व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई। वर्ष 2006-07 में केवल चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आती थीं, जो बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी, कड़े कानून बनाए अप्रैल 2016 से पूरे राज्य में देशी शराब और विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांधी जयंती पर दो 2 अक्टूबर, 2016 को नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू किया गया। यह सामाजिक सुधार की दिशा में बहुत बड़ा कदम रहा। शराबबंदी ने महिलाओं के लिए सामाजिक क्रांति लाई। इससे घरेलू हिंसा में 35 से 40 फीसदी कमी आई और परिवारों में शांति स्थापित हुई। महिलाओं की बचत बढ़ी। अपराध की दर घटी। कानून व्यवस्था से बदली बिहार की छवि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपराध पर नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इससे बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। बाहुबलियों को जेल भेजा गया और शाम होते ही घरों में दुबक जाने वाले लोग रात-बेरात सड़कों पर निकलने लगे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अपनी इस उपलब्धि का लगातार बखान किया। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 2017 से एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में ही करीब ढाई करोड़ लोगों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को समाप्त करने की शपथ ली। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्रों, सरकारी अधिकारी, गैर-सरकारी कार्यकर्ता व आम जनता भी शामिल हुए। लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों के चलते पिछले वर्षों में बाल विवाह की दर में भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन स्थापित किया। यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य सामाजिक बुराइयों से पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग की साक्षरता को चलाया अभियान 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलायी, जिससे 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हुईं। 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और एससी-एसटी की साक्षरता में पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस उपलब्धि के कारण बिहार को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त हुआ। हुनर और औजार ‘हुनर’ के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। फिर उन्हें ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत टूल-किट दी गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महादलित टोलों के विकास को लेकर इनकी बहुलता वाली पंचायत और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र बहाल किए गए।

राज्यसभा जाने से नीतीश कुमार की भूमिका यूपी में कैसे बदल सकती है, 2027 चुनाव के लिए तैयार?

लखनऊ/बदायूं  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ना केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश में हो रही है. बिहार में तो जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. पटना में जेडीयू दफ्तर के सामने भी इसको लेकर प्रदर्शन किया गया. नीतीश के इस रुख को लेकर उत्‍तर प्रदेश में पार्टी क्‍या सोच रही है. उसके प्रदेश नेतृत्‍व का इस बारे में क्‍या मानना है, ये भी जानना जरूरी है.  अनूप पटेल का इस बारे में कहना है कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो कहीं ना कहीं इसका फायदा उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों के कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिलेगा. उत्तर प्रदेश में भी जेडीयू की स्थिति मजबूत होगी।  दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम के बाद बिहार की राजनीति को लेकर तमाम सवाल उठने लगे, क्योंकि अभी कुछ समय पहले ही नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं.. लेकिन अभी कुछ दिनों से उनके बेटे निशांत कुमार की भी सक्रिय राजनीति में भागीदारी देखी जा रही है. तमाम मंचों पर उनका चेहरा दिखाया जाता है. इसके बाद कहा जा रहा है कि बिहार में इस बार जदयू के दो उप मुख्यमंत्री होंगे, जिसमें से निशांत कुमार एक हो सकते हैं. वहीं अगर मुख्यमंत्री की बात की जाए तो वह बीजेपी का ही कोई चेहरा होगा।  पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश जनता दल यूके प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने बदायूं में कहा कि हम लोग के सीनियर नेता का निर्णय देशहित में और पार्टी हित में हमेशा सही होता है. जैसा उनका निर्णय होगा हम सभी लोग उस निर्णय में उनके साथ हैं. उन्होंने कभी भी कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया, जो देश हित में ना हो या पार्टी हिट में ना हो. उन्होंने कहा कि जो फार्मूला पहले था, पार्टी उसी लाइन पर काम करेगी. इस बार दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे और मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का होगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों की बहुत समय से मांग थी कि निशांत को सक्रिय राजनीति में लाया जाए. हमें उम्मीद है कि अब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे. बिहार में समर्थकों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर वोट मांगे और प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी तो स्वाभाविक बात है कि पब्लिक को बुरा तो लगेगा ही. कार्यकर्ताओं में पीड़ा है और वह पीड़ा रहेगी. नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में आने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अन्य कई और प्रदेशों की राजनीति में हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा।