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बिहार की राजनीति में नई हलचल: JDU के बिना सरकार गठन पर संजय झा ने क्या कहा?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली ऐतिहासिक जीत और 200 से अधिक सीटों का जादुई आंकड़ा पार करने के बाद राजनीतिक हलचल तेज है। इसबार के चुनावी आंकड़ों को देखने के बाद कयासों का बाजार भी गर्म है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बिहार की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं। वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटें मिली हैं। सीटों की संख्या में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बाद से कुछ लोगों का दावा है कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। हालांकि, जेडीयू ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ऐसे तमाम अटलकों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए एकजुट है। भाजपा और जेडीयू के अलावा एनडीए में शामिल चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास ) को 19 सीटें मिली हैं। वहीं, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को पांच सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा चार सीटें जीतने में सफल रही है। ऐसे में यह संख्या 202 तक पहुंच जाती है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा। लालू यादव की पार्टी को सिर्फ 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं सहयोगी दल कांग्रेस को छह सीटें मिली हैं। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन को दो सीटें मिली हैं। असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम पांच सीटें जीतने में कामयाब रही है। इसके अलावा इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी (IIP), माकपा और बहुजन समाज पार्टी को एक-एक सीट मिली है। संख्या को देखते हुए कयासों का बाजार गरमाया हुआ है। नीतीश के बिना भाजपा के सरकार चलानी की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक थ्योरी यह भी गढ़ी जा रही है कि नीतीश कुमार और विपक्ष के तमाम दलों के साथ सरकार बन सकती है। उसमें ओवैसी का भी साथ रहे। इन तमाम अटकलों को लेकर संजय झा से सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या बिना जेडीयू के भी सरकार बना सकती है बीजेपी? क्या नीतीश ही पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे? संजय झा ने साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “मैं इस तरह की अटकलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। समय आने पर सब स्पष्ट हो जाएगा। एनडीए के भीतर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है।” एनडीए की अंदरूनी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इस सवाल के जवाब पर संजय झा ने कहा “डायनमिक्स वही रहेंगे। हम सब मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे बीच बेहतरीन तालमेल है। इतनी बड़ी जीत के बाद हमारा फोकस सिर्फ यह है कि हम जनता के लिए डिलीवरी करें। केंद्र और राज्य के बीच संबंध पहले से ही बहुत अच्छे हैं।” उन्होंने कहा, “यह जीत एनडीए के एकजुट होकर लड़ने का नतीजा है। इसमें चिराग पासवान भी शामिल हैं। अगर सभी गठबंधन साझेदार एकसाथ नहीं होते, तो 200 का आंकड़ा पार करना संभव नहीं था।”  

नीतीश कुमार पर उपेंद्र कुशवाहा का बयान: ‘CM थे, हैं और रहेंगे’

 पटना बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों और मुलाकातों का दौर जारी है। रालोमो सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री आवास से बाहर आने के बाद मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। इसमें कहां कोई दुविधा है। पहले से ही बिल्कुल क्लियर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे, हैं और आगे भी रहेंगे। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को सोमवार को पटना बुलाया है। ऐसी संभावना है कि कल शाम विधायत दल की बैठक के बाद शपथ की तारीख तय की जा सकती है तो वहीं मंत्रियों के नामों पर भी चर्चा संभव है। इधर सीएम से मिलने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि सब बहुत जल्द ही तय हो जाएगा और 2-4 दिन के अंदर ही सरकार गठन हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एकदम ठीक हैं और वो सभी चीजों को खुद ही देख रहे हैं। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) अब सरकार गठन की तैयारियों में जुट गया है। इससे पहे शनिवार को गठबंधन दलों के नेता मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात के लिए एक-एक कर यहां उनके सरकारी आवास पहुंचे। इनमें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी शामिल रहे, जो इस संभावना से उत्साहित हैं कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) भी राज्य सरकार का हिस्सा हो सकती है। चिराग पासवान ने पत्रकारों से कहा, “मैंने नीतीश कुमार जी को विजय की बधाई दी। राजग की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि हमारे बीच किसी तरह का मतभेद नहीं था। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने उन सीट पर भी प्रचार किया जहां हमारे प्रत्याशी थे। हमने भी में जदयू प्रत्याशी का समर्थन किया, जो हमारा गृह क्षेत्र माना जाता है।” राजग के अन्य सहयोगी, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के नेता संतोष कुमार सुमन ने भी कहा कि नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। संतोष कुमार सुमन केंद्रीय मंत्री और गया से सांसद जीतन राम मांझी के पुत्र हैं। जदयू प्रमुख से मुलाकात के बाद सुमन ने कहा, “मेरा मानना है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहेंगे। अगले दो-तीन दिनों में सब तय हो जाएगा।” मुख्यमंत्री निवास पहुंचने वालों में भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव भी शामिल थे, जिनकी राजनीतिक वापसी इस बार दानापुर विधानसभा सीट से जीत के साथ हुई है।  

नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे की अटकलें: नया शपथ ग्रहण कब होगा?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने तीन चौथाई से भी बड़े बहुमत के साथ राज्य के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व तथा अप्रत्याशित जीत दर्ज की है और विपक्षी महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया है। कुल 243 सदस्यीय विधान सभा के चुनाव की शुक्रवार को हुई मतगणना में अब तक प्राप्त नतीजों और रुझानों में राजग को 202 और महागठबंधन को 35 सीटें मिली हैं जबकि छह सीटों पर अन्य उम्मीदवार विजय हुए हैं। वहीं अब बिहार के सियासी गलियारों में नई सरकार का गठन कब होगा, इस विषय पर चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार 10वीं बार लेंगे CM पद की शपथ? बता दें कि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सीएम नीतीश कुमार आज राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां मुलाकात कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते है। साथ ही शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी चर्चा कर सकते है। उम्मीद है कि अगले हफ्ते तक 18वीं विधानसभा का गठन हो सकता है। NDA ने बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 202 सीटों पर कब्जा करते हुए प्रचंड जीत हासिल की। इसी रिकार्ड तोड़ जीत के साथ नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को तैयार हैं। हालांकि, अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गौरतलब हो कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सबसे अधिक वोट प्रतिशत हासिल किया है। Election Commission Data के अनुसार RJD को 23% वोट शेयर मिला, जबकि BJP को 20.08% और JDU को 19.25% वोट मिले। इसके बावजूद दोनों एनडीए दलों ने आरजेडी से कहीं ज्यादा सीटें जीत लीं। RJD का वोट प्रतिशत ज्यादा होना उसकी सत्ता तक की दूरी को कम नहीं कर सका क्योंकि— उसने सबसे ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कई सीटों पर बड़ा मार्जिन मिला पर सीटें नहीं बढ़ीं। महागठबंधन का कुल वोट शेयर NDA के मुकाबले काफी कम था। BJP-JDU का रणनीतिक सीट प्रबंधन ज्यादा कारगर रहा। यही वजह है कि RJD Highest Vote Share Winner होने के बावजूद Seat Tally में कमजोर साबित हुई।

आधी आबादी ने बदला समीकरण—नीतीश कुमार को मिला महिला वोटरों का ज़बरदस्त साथ

  नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में एनडीए बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल चुका है। तमाम एग्जिट पोल ने साफ इशारा किया था कि एनडीए को महिलाओं, ओबीसी और ईबीसी वर्ग का बंपर समर्थन मिला है। रुझान भी इस बात पर मुहर लगा रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में दोनों चरणों में कुल मतदान 66.91 फीसदी रहा था। मतदान के दोनों ही चरणों में पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं ने ज्यादा वोटिंग की। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 फीसदी रहा था। वहीं पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8 फीसदी ही रहा। इन आंकड़ों से साफ हो जाता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने करीब 10 फीसदी ज्यादा मतदान किया। रुझानों में एनडीए को 190, महागठबंधन को 49 और अन्य के खाते में 4 सीटें जाने के संकेत मिल रहे हैं। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो एनडीए बिहार में इतिहास रच देगा। जीविका दीदी योजना ने बदल डाला सियासी माहौल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की सरकार ने राज्य में जीविका दीदी योजना के तहत 1.30 करोड़ महिलाओं को दस-दस हजार रूपये दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर को नीतीश सरकार की इस योजना की शुरुआत महिलाओं को दस-दस हजार रुपये देकर की थी। तीन अक्तूबर को 25 लाख नई महिलाओं को दस-दस हजार रुपये दिए गए। शराबबंदी के फैसले ने नीतीश को बनाया महिलाओं का 'लाडला' मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया। इसकी वजह से महिलाओं में नीतीश कुमार को काफी लोकप्रियता मिली। 2006 की ये योजना भी बनी भविष्य की गेमचेंजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत लड़कियों को साइकिल और स्कूल की पोशाक दी जाती है। इस योजना ने बिहार की उन बेटियों को काफी मजबूत किया, जो स्कूल दूर होने की वजह से पढ़ाई छोड़ देती थीं।  

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बयान से मचा राजनीतिक बवाल

रांची बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी बयानबाजी के बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि PM मोदी की कनपट्टी पर कट्टा रखिए और खुद को CM घोषित करवाइए। "कट्टा" वाली टिप्पणी पर बोलते हुए, खेड़ा ने कहा, "हम नीतीश बाबू को सलाह दे रहे हैं: बंदूक उठाओ और PM मोदी की कनपटी पर लगाओ और खुद को मुख्यमंत्री घोषित कर दो।" इससे पहले, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि बिहार चुनाव के पहले चरण में पीढ़ियों से वोट डालने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर हरियाणा में वोटों में हेराफेरी करने के लिए कथित तौर पर मिलकर काम करने का आरोप लगाया। पहले चरण में 72 सीटें जीतने का भरोसा जताया पवन खेड़ा ने  6 नवंबर को हुए बिहार चुनाव के पहले चरण में कुल 121 सीटों में से 72 सीटें जीतने का भरोसा जताया। उन्होंने इस बार स्ट्राइक रेट तोड़ने का भी दावा किया। उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि प्रधानमंत्री मोदी की कुछ रैलियों में कटौती की गई है। उन्हें डर है कि प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं है। चुनाव के पहले चरण के नतीजे सामने हैं। हम 121 में से 72 सीटें पूर्ण बहुमत से जीतेंगे।"

बिहार की राजनीति में नया ट्विस्ट! एनडीए की पीसी छोड़कर गए सभी बड़े नेता – अंदर क्या चला?

पटना  बिहार विधासनभा चुनाव में एनडीए का साझा संकल्प पत्र जारी करने के लिए पटना के होटल मौर्या में शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा समेत एनडीए के सभी शीर्ष नेता मौजूद रहे। सुबह ठीक 10 बजे शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये सभी नेता एनडीए का संकल्प पत्र जारी कर वहां से कुछ ही मिनट में निकल गए। इनमें से किसी भी नेता ने पीसी को संबोधित नहीं किया। बाद में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने एनडीए के चुनावी वादों को जनता के सामने रखा।   एनडीए की पीसी में किसी भी बड़े नेता के संबोधन नहीं देने पर सियासी पारा गर्मा गया है। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं। बिहार चुनाव में कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने शुक्रवार को पटना में कहा कि महज 26 सेकंड में एनडीए का घोषणा पत्र जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाए कि मीडिया के सवालों से जरकर एनडीए के नेता उठकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। हालांकि, पीसी से निकलने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी लोगों ने एक साथ मिलकर NDA का संकल्प पत्र जारी किया है। चुनावी व्यस्तता के चलते सभी नेताओं को अलग-अलग जगह प्रचार करने जाना था। अगर प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक घंटा समय लगाते तो प्रचार अभियान प्रभावित होता। पीसी के बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आए, उन्होंने एनडीए का संकल्प पत्र जारी किया। मैं उनका सहयोगी हूं। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोगों को बताया। नीतीश के विजन को ही हम आगे बढ़ा रहे हैं।" आधा घंटा देरी से शुरू हुई एनडीए की पीसी बता दें कि एनडीए की पीसी लगभग आधा घंटा देरी से शुरू हुई। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने गुरुवार शाम को सोशल मीडिया पोस्ट में एनडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय सुबह 9.30 बजे बताया था। मगर, पीसी 10 बजे शुरू हुई। सूत्रों के अनुसार, पहले से तय था कि पीसी में एनडीए के किसी भी बड़े नेता का संबोधन नहीं होगा, सिर्फ सम्राट चौधरी संकल्प पत्र की बातों को मीडिया के सामने रखेंगे।  

सट्टा बाजार का रुझान: NDA आगे, महागठबंधन पिछड़ा — नीतीश कुमार की किस्मत चमकने को तैयार?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक पारा चढ़ चुका है, लेकिन असली हलचल राजस्थान के मशहूर फलोदी सट्टा बाजार में देखने को मिल रही है। यहां के भाव अक्सर चुनावी नतीजों से पहले ही रुझान बता देते हैं। अगर इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की बात करें तो यहां के ताज़ा भावों के अनुसार, NDA को बढ़त मिल रही है और महागठबंधन  पिछड़ता नजर आ रहा है। NDA पर सबसे ज्यादा दांव, रिटर्न भी डबल! फलोदी सट्टा बाजार में NDA के पक्ष में तेजी से दांव लग रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति NDA की जीत पर ₹1000 का दांव लगाता है, तो उसे ₹2000 तक रिटर्न मिल सकता है। इसका मतलब है कि सटोरियों के अनुसार NDA की सरकार बनने की संभावना सबसे अधिक है। सीटों का अनुमान NDA: 128–132 सीटें (कभी-कभी 135–138 तक भी रुझान) महागठबंधन: 93–100 सीटों तक सीमित स्पष्ट है कि महागठबंधन का ग्राफ नीचे जा रहा है, जबकि NDA लगातार मजबूती पा रहा है।  नीतीश कुमार के भाव सबसे मजबूत मुख्यमंत्री पद को लेकर सट्टा बाजार में नीतीश कुमार का नाम सबसे आगे है। उनके भाव 40–45 पैसे पर टिके हैं, यानी सटोरियों का मानना है कि नीतीश ही NDA का चेहरा  बने रहेंगे। महागठबंधन के लिए बढ़ीं मुश्किलें महागठबंधन की बात करें तो उनके लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण होता दिख रहा है। सटोरियों के अनुसार, गठबंधन की सीटें 93–96 तक सीमित रह सकती हैं। हालांकि प्रचार तेज़ हो रहा है, लेकिन बाजार के भावों में फिलहाल सुधार नहीं दिख रहा। वोटिंग डेट्स और आगे का ट्रेंड बिहार में वोटिंग 6 और 11 नवंबर को होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रचार अपने चरम पर पहुंचेगा, वैसे-वैसे सट्टा बाजार में सीटवार भाव और भी स्पष्ट होंगे। फलोदी बाजार का मूड तेजी से बदलता है, इसलिए आखिरी हफ्ते के ट्रेंड निर्णायक हो सकते हैं।  

RJD में शामिल हुआ JDU का दिग्गज नेता, नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ीं

छपरा बिहार में जैसे-जैसे चुनाव  नजदीक आ रहे हैं, विभिन्न दलों में नेताओं का आना-जाना जारी है। राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू  को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, जनता दल (यूनाइटेड) के निवर्तमान जिलाध्यक्ष और मढौरा से पूर्व प्रत्याशी अल्ताफ आलम राजू .ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया है। शनिवार को पटना में तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अल्ताफ आलम राजू ने राजद की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर मढौरा के विधायक और पूर्व मंत्री जितेंद्र यादव भी मौजूद रहे। अल्ताफ आलम राजू वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में मढौरा सीट से जदयू के प्रत्याशी रह चुके हैं। इस बार एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे के दौरान मढौरा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में चली गई और अभिनेत्री सीमा सिंह को उम्मीदवार बनाया गया। इस फैसले से नाराज होकर अल्ताफ आलम राजू ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान लोजपा उम्मीदवार सीमा सिंह और अल्ताफ आलम राजू दोनों के नामांकन रद्द कर दिए गए थे। राजद को मिला मढौरा में मजबूत चेहरा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मढौरा क्षेत्र में अल्ताफ आलम राजू की पकड़ मजबूत है, जिससे राजद को स्थानीय स्तर पर लाभ मिल सकता है।  

विधानसभा चुनाव में CM नीतीश की रणनीति: कल से होगा प्रचार अभियान शुरू

पटना  जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल से चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत करेंगे। संजय झा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल से चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत करने के लिए समस्तीपुर और दरभंगा का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)एकजुट है और राजग का उद्देश्य नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने राजग सरकार के विकास कार्यों को देखा है और अब वे पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राजग के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे और उनके द्वारा लड़ी जाने वाली सीटों को लेकर कोई मतभेद नहीं है। जदयू नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार और जदयू दोनो की कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में और जदयू में जो भी निर्णय होता है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुमति और सहमति के बाद ही होता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेते हैं, सभी से चर्चा करते हैं, सभी का मंन्तव्य लेते हैं, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में राजग प्रचंड बहुमत से 2010 का रिकार्ड भी पीछे छोड़ देगा। संजय झा ने कहा कि विपक्ष को भी पता है कि इस बार आम जनता, महिलाओं और युवाओं का मूड कैसा है। इसलिए भविष्य में आने वाले परिणामो की आहट से पूरा विपक्ष दहशत में है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग निराधार खबरें चला कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बिहार की जनता से आग्रह किया कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें और केवल अधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचना पर ही विश्वास करें। 

RJD में संकट: दो बड़े नेताओं ने छोड़ा दल, अब नीतीश का हाथ थामेंगे

पटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक और बड़ा झटका लगा है। दरअसल, अब नवादा और रजौली से मौजूदा विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों ही विधायक जदयू में शामिल हो सकते हैं। दरअसल, नवादा सीट से विधायक विभा देवी और रजौली (सुरक्षित) से प्रकाश वीर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों विधायकों ने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव को सौंपा, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है। इन दोनों विधायकों के इस्तीफे से बिहार की सियासत में खलबली मच गई है। इस्तीफे पर बोलते हुए, प्रकाश वीर ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पार्टी में लौटने का कोई सवाल ही नहीं है। मैंने विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया है… वह (राजद नेता तेजस्वी यादव) एक बार नवादा में यात्रा के लिए गए थे, लेकिन उन्होंने हमें आमंत्रित नहीं किया, इसलिए हम नहीं गए। भीड़ में से कोई उन्होंने कहा, "मैंने चिल्लाकर कहा, 'तेजस्वी भैया, प्रकाश वीर को हटाओ'…इससे मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची है…(राजद में वापस जाने का) कोई सवाल ही नहीं उठता।" इसी तरह, राष्ट्रीय जनता दल की नेता विभा देवी यादव ने पद से इस्तीफा देते हुए, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में अच्छा काम किया है। विभा देवी यादव बिहार विधानसभा में नवादा का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उन्होंने कहा, "मैंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है…मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नवादा और बिहार में अच्छा काम किया है। वह आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे…जनता विकास की उम्मीद करती है। जनता सवाल उठाएगी कि विकास हुआ है या नहीं…" इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को दो चरणों वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हर परिवार को सरकार देने के अपने चुनावी वादे को दोहराया।