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अफगानिस्तान में आतंक की बारिश, बच्चों समेत 9 की दर्दनाक मौत

काबुल  पाकिस्तान के पेशावर में आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान खुद के बुने जाल में फंस रहा है. हालांकि इस देश की जड़ों में जो आतंक बसा है वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया है. अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी सेना के हमले में नौ बच्चों समेत दस लोग मारे गए. अफगान सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है. घरों को बनाया गया निशाना अधिकारियों के अनुसार, यह हमला आधी रात के कुछ समय बाद हुआ और इसमें एक स्थानीय निवासी के घर को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर दुश्मनी बढ़ने की चिंता फिर बढ़ गई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि यह हमला मंगलवार को सुबह करीब 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल नागरिक, वालियत खान, काजी मीर के बेटे के घर पर बमबारी की, इस हमले में 9 बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला की मौत हो गई और उनका घर तबाह हो गया. पहले भी पाकिस्तान ने किया था अटैक मुजाहिद ने यह भी बताया कि उसी रात कुनार और पक्तिका प्रांतों में अलग-अलग हवाई हमले हुए, जिनमें चार आम नागरिक घायल हो गए. खोस्त में हुआ ताजा हमला लोगों में डर पैदा कर रहा है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर फिर से हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है. अक्टूबर में दोनों देशों के बीच भारी झड़पों के बाद कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी हुई थी, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है. इससे पहले, 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की. दोनों देशों में हुई थी गोलीबारी तालिबान सेनाओं ने 11 और 12 अक्टूबर की रात के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया, जिससे भारी गोलीबारी हुई. हमलों के बाद, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनका ऑपरेशन खत्म हो गया है, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी सीजफायर की घोषणा को खारिज कर दिया और अपनी मिलिट्री कार्रवाई जारी रखी. उस समय तालिबान के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया था कि लड़ाई 12 अक्टूबर की सुबह तक जारी रही. दोनों देशों ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई बॉर्डर पोस्ट को तबाह कर दिया है या उन पर कब्जा कर लिया है.

भारतीय रक्षा शक्ति में बड़ा इजाफा: 1000 किलो बम का सफल निर्माण, दुश्मन देशों में हड़कंप

नई दिल्ली सैन्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने 1000 किलो का बम बनाया है। भारत ने न सिर्फ ये बम बनाया है बल्कि इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। इस स्वदेशी बम को ‘गौरव’ नाम दिया गया है, जो लक्ष्य को दूर से ही सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है। DRDO ने Su-30MKI फाइटर जेट से ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है। 1000 किलो वजनी यह देसी बम दुश्मन की वायु सुरक्षा सीमा के बाहर से सटीक हमला करेगा। DRDO ने इस हथियार को दो स्वरूपों में तैयार किया है। पहला वर्जन Gaurav-PCB है, जिसे मजबूत संरचनाओं और जमीनी बंकरों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। यह पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन की स्थिति में उपयोगी साबित हो सकता है। दूसरा संस्करण Gaurav-PF है, जिसका उपयोग खुले ठिकानों, सैन्य तैनाती या रणनीतिक लक्ष्य पर एक साथ कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा। ‘गौरव’ वह हथियार है, जो विमान को जोखिम में डाले बिना दुश्मन पर प्रहार कर सकता है। यह हवा से छोड़े जाने के बाद काफी दूरी तक ग्लाइड करता है और ठीक उसी स्थान पर जाकर वार करता है, जहां लक्ष्य मौजूद हो। ज्यादा दूरी से हमला करने की वजह से यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देता है। इसका भारी वजन और उच्च विनाश क्षमता इसे बंकर, किलेबंद ठिकानों और पहाड़ी ठिकानों पर बेहद कारगर बनाती है। Su-30MKI के साथ ‘गौरव’ का जुड़ना भारतीय वायुसेना का Su-30MKI पहले से ही कई एडवांस हथियारों से लैस है। इसके साथ Rudram मिसाइल, SAAW हथियार प्रणाली और BrahMos-A पहले से जुड़े हैं और अब ‘गौरव’ के जुड़ जाने से यह विमान लंबी दूरी से जमीन पर हमला करने में और भी सक्षम हो गया है। यह संयोजन वायु सेना को आधुनिक युद्ध के लिए ऐसी क्षमता देता है, जिसे दुनिया की बड़ी सेनाएं भी महत्व देती हैं। भारत क्यों तेजी से बना रहा है अपने इंजन और डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट इंजन के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता लंबे समय से भारत की बड़ी चुनौती रही है। यही कारण है कि तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के प्रोजेक्ट में देरी हुई। अब सरकार और DRDO दोनों मिलकर अपने इंजन और हथियार प्रणाली को देश में ही विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। बम, मिसाइल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक। ऐसे सभी क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है ताकि आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।

Gen-Z का बगावत मोड ऑन! पाकिस्तान में शहबाज-मुनीर की सत्ता पर उठे सवाल

इस्लामाबाद  नेपाल के बाद अब पाकिस्तान की नई पीढ़ी यानी जेन-जी में भी अपनी सरकार के खिलाफ आक्रोश उफान पर है. पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कुछ हफ्तों पहले ही हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे और एक बार फिर विरोध की आग धधक उठी है. इस बार इसकी अगुवाई कर रही है जेनरेशन Z, यानी छात्र वर्ग, जो शिक्षा सुधारों को लेकर सड़कों पर उतर आया है. शुरुआत में यह विरोध बढ़ती फीस और मूल्यांकन प्रक्रिया के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन में बदल गया है. यह आंदोलन कब्जे वाले क्षेत्र में पाकिस्तान के प्रति युवा पीढ़ी के गहरे असंतोष को दिखाता है. इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में हुई थी और यह शुरू में शांतिपूर्ण रहे. लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब एक अज्ञात बंदूकधारी ने छात्रों के एक ग्रुप पर गोली चला दी, जिसमें एक छात्र घायल हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि मुजफ्फराबाद में एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर रहा है, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई. हालांकि, वीडियो की पुष्टि नहीं की जा सकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई. यह घटना आंदोलन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई- गुस्साए छात्रों ने टायर जलाए, आगजनी और तोड़फोड़ की, और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए. इन प्रदर्शनों में नेपाल और बांग्लादेश में हुए जेन जी आंदोलनों की झलक देखी जा सकती है. प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई? यह आंदोलन मुजफ्फराबाद की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी में बढ़ती फीस और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ था. जैसे-जैसे आंदोलन ने जोर पकड़ा, प्रशासन ने यूनिवर्सिटी में सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी. ऐसा ही एक विरोध जनवरी 2024 में भी हुआ था, जब छात्रों ने हर तीन–चार महीने में लाखों रुपये फीस के नाम पर वसूले जाने का आरोप लगाया था. उस समय PoK के शिक्षक और प्रशासनिक कर्मचारी भी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल हुए थे. छात्रों की मांगें क्या हैं? इस बार इंटरमीडिएट स्तर के छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. उनकी मुख्य नाराजगी नई ई-मार्किंग या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर है, जिसे इस साल शैक्षणिक सत्र से लागू किया गया है. 30 अक्टूबर को इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर के रिजल्ट्स घोषित किए गए, छह महीने की देरी के बाद लेकिन रिजल्ट्स में कई छात्रों को बेहद कम मार्क्स दिए जाने पर नाराजगी भड़क उठी. कुछ छात्रों ने तो यह भी दावा किया कि उन्हें उन विषयों में पास कर दिया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी. सरकार ने इस मामले पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन मीरपुर शिक्षा बोर्ड ने ई-मार्किंग प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है. छात्रों ने रीचेकिंग फीस माफ करने की भी मांग की है, जो फिलहाल 1,500 रुपये प्रति विषय रखी गई है. यानी जिन छात्रों को सभी सात विषयों की कॉपियां दोबारा जांचवानी हैं, उन्हें 10,500 रुपये तक देने होंगे. यह मुद्दा अब लाहौर जैसे पाकिस्तानी शहरों तक पहुंच गया है, जहां इंटरमीडिएट छात्रों ने लाहौर प्रेस क्लब के बाहर धरना दिया. लेकिन अब छात्रों की शिकायतें केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहीं, जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन की कमी ने युवा पीढ़ी की नाराजगी को और बढ़ा दिया है. JAAC का समर्थन और बढ़ती ताकत इस आंदोलन को ताकत दी है जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने, जिसने अक्टूबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों की अगुवाई की थी. अक्टूबर में फैले विरोध प्रदर्शनों में 12 से अधिक नागरिक मारे गए थे. ये प्रदर्शन 30 मांगों वाले चार्टर को लेकर शुरू हुए थे जिनमें टैक्स राहत, आटे और बिजली पर सब्सिडी और अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने की मांग शामिल थी. लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए गोलीबारी का सहारा लिया, तो यह गुस्सा सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन में बदल गया. आंदोलन के चलते पूरा पीओके ठप हो गया. आखिरकार शहबाज शरीफ सरकार को झुकना पड़ा और सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगें मान लीं. नेपाल से लेकर श्रीलंका तक, Gen-Z सड़कों पर PoK का यह नया आंदोलन अलग है, इसे अब राजनीतिक कार्यकर्ताओं नहीं, बल्कि जेनरेशन Z ने संभाला है. यह समय भी अहम है, क्योंकि पड़ोसी नेपाल में हाल ही में हुए जेन जी आंदोलन ने केपी शर्मा ओली सरकार को गिरा दिया था. वहां भी सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ विरोध जल्द ही भ्रष्टाचार-विरोधी जनआंदोलन में बदल गया था. नेपाल में गुस्सा इतना था कि लगभग सभी मंत्रियों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया और संसद भवन तक जला दी गई. 2024 में बांग्लादेश में भी ऐसा ही युवा आंदोलन देखने को मिला, जिससे शेख हसीना सरकार गिर गई. 2022 में श्रीलंका में भी घरेलू संकटों पर जनता का गुस्सा भ्रष्टाचार विरोधी विद्रोह में बदल गया था. 

भारत को सलाम, पाकिस्तान के आगे गिड़गिड़ाने वालों को सीख: ED की जमकर तारीफ

नई दिल्ली मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने वाली इंटरनेशनल संस्‍था फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) ने भारतीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) की तारीफ की है. FATF ने कहा कि दुनिया के अन्‍य देशों को ईडी से सीखना चाहिए कि किस तरह से मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाई जाए और क्रिमिनल केस में में एसेट्स की रिकवरी की जाए. यह वही FATF है, जिसके सामने पाकिस्‍तान की हेकड़ी गुम रहती है. पाकिस्‍तान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के लिए पूरी दुनिया में कुख्‍यात है. FATF ऐसे देशों को विभिन्‍न क्‍लासीफाइड कैटेगरी में डालता रहता है, जिससे संबंधित देशों की इकनॉमी पर बुरा असर पड़ता है. विदेशी निवेश प्रभावित होता है. FATF के कड़े प्रतिबंधों से बचने के लिए पाकिस्‍तान इस ग्‍लोबल ऑर्गेनाइजेशन के सामने मेमियाता रहता है. अब उसी संस्‍था ने भारत की जांच एजेंसी ईडी की तारीफ की है. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने बुधवार 5 नवंबर 2025 को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और उन्हें पीड़ितों को वापस दिलाने में भारत के प्रयासों की सराहना की है. FATF की यह रिपोर्ट ‘Asset Recovery Guidance and Best Practices’ के नाम से प्रकाशित हुई है, जिसमें खासतौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तेज और प्रभावी कार्रवाई को प्रमुख उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है. विश्व स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्त पोषण पर नजर रखने वाली FATF ने कहा कि भारत ने आपराधिक मामलों में अवैध संपत्तियों का पता लगाने, उन्हें फ्रीज़ करने, जब्त करने और समाज के हित में उपयोग करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था विकसित की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ED ने घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक अपराधों के मामले में देश से भागे अपराधियों के खिलाफ विशेष सक्रियता दिखाई है. 340 पेज की रिपोर्ट ED की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि FATF की 340 पृष्ठों वाली इस रिपोर्ट में व्यावहारिक उपाय सुझाए गए हैं, जिनसे विभिन्न देशों को अपराध से जुड़े धन की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और पीड़ितों को वापस संबंधित संपत्तियां लौटाने में सहायता मिलेगी. बयान के मुताबिक, यह गाइडेंस नीति निर्माताओं और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक मानक है, जिससे वे अपनी राष्ट्रीय रणनीति को बेहतर बना सकें और वैश्विक बेस्ट प्रैक्टिस के अनुसार कार्य कर सकें. रिपोर्ट में कहा गया है कि ED ने क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी, साइबर अपराध और पोंजी स्कीम जैसे मामलों में बेहद तेजी से कार्रवाई की है. FATF ने बताया कि कई मामलों में अपराधी विदेश भाग गए थे, लेकिन ED ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी संपत्तियों को या तो जब्त कर लिया या फ्रीज़ किया.

ट्रंप ने बताया बड़ा राज, पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण

इस्लामाबाद  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से  उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि हम भी परीक्षण करेंगे क्योंकि दूसरे देश परमाणु परीक्षण करते हैं.  ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया के कई देश परमाणु बम की टेस्टिंग कर रहे हैं. लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इस बारे में बात नहीं करते. वे इसे बताते नहीं हैं. हम एक खुला समाज हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं. हमें इस बारे में बात करनी ही होगी क्योंकि वरना आप लोग कल को रिपोर्ट कर देंगे. उनके पास ऐसे पत्रकार नहीं हैं जो इस बारे में लिखें."  ट्रंप ने आगे कहा कि अब अमेरिका भी न्यूक्लियर टेस्ट करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान भी परमाणु बम का परीक्षण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परीक्षण करेंगे क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं. और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है." गौरतलब है कि पाकिस्तान की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक 1998 में परमाणु परीक्षण किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को माने तो पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करता आ रहा है. और ऐसी ही स्थिति रूस और चीन की है. ट्रंप के मुताबिक दोनों ही देश लंबे समय से परमाणु परीक्षण करते आ रहे हैं.  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज चैनल सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम पर एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं.  ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने 33 साल के प्रतिबंध के बाद अमेरिकी सेना को परमाणु हथियार परीक्षण करने के अपने आदेश को उचित ठहराया. ट्रंप के खुलासे के मुताबिक अगर पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो ये भारत के लिए चिंताजनक सूचना है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "परमाणु हथियार संपन्न देश आपको इसके बारे में बताने नहीं जाते… वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं जहां लोगों को ठीक से पता ही नहीं चलता कि परीक्षण में क्या हो रहा है. बस आपको थोड़ा कंपन महसूस होता है." 33 सालों बाद न्यूक्लियर टेस्ट क्यों कर रहा है अमेरिका बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका 33 वर्षों के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण शुरू करने जा रहा है. अमेरिका ने आखिरी बार परीक्षण 1992 में किया गया था. इसके बाद शीत युद्ध के अंत की घोषणा की गई थी.  सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पेंटागन को "हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने" का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई न्यूक्लियर सिस्टम के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है.

पाकिस्तान युद्ध की ओर? तालिबान से न बनने वाली वार्ता में भारत को दोषी ठहराया

इस्लामाबाद  अफगानिस्तान के साथ तनाव का ठीकरा पाकिस्तान अब भारत पर फोड़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के आरोप हैं कि अफगानिस्तान भारत के लिए काम कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर भारत या अफगानिस्तान सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तुर्की में हुई शांति वार्ता बगैर किसी समाधान के खत्म हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आसिफ के आरोप हैं कि काबुल का नेतृत्व भारत की धुन पर नाच रहा है। उन्होंने कहा, 'काबुल में बैठे लोग जो कठपुतली का तमाशा कर रहे हैं, उनका नियंत्रण दिल्ली से किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि भारत पश्चिमी सीमा पर अपनी हार की भरपाई के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान के चार या पांच बार पलटने के बाद तुर्की में हुई शांति वार्ता असफल हो गई। उन्होंने कहा, 'जब भी हम समझौते के करीब होते हैं और वार्ताकार काबुल को खबर करते हैं, तो बीच में कोई दखल होती है और समझौता वापस ले लिया जाता है।' उन्होंने कहा, 'भारत पाकिस्तान के साथ धीमा युद्ध लड़ना चाहता है। इसे पूरा करने के लिए वह अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहे हैं।' अफगानिस्तान की तरफ से दी जा रही जवाबी कार्रवाई की धमकी पर आसिफ ने कहा, 'अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की तरफ देखा, तो हम उनकी आंखें निकाल लेंगे।' उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए काबुल जिम्मेदार है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से बात नहीं बनती है, तो अफगानिस्तान के साथ युद्ध छिड़ सकता है। वार्ता बेनतीजा, बढ़ सकता है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में चल रही वार्ता किसी नतीजे के खत्म हो गयी। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई और परस्पर शत्रुता के कारण यह वार्ता बेनतीजा रही। एजेंसी वार्ता ने पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया, क्षेत्रीय मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव गहराने और क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंताएं और बढ़ी हैं। तुर्की और कतर ने दोनों पक्षों के नेताओं से संवाद बनाए रखने और तनाव को कम करने का आग्रह किया है ताकि पहले से अस्थिर क्षेत्र में हिंसा और न बढ़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थों ने स्वीकार किया है कि किसी भी पक्ष के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। दोनों देशों की प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत रहीं, जिससे वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह किसी गंभीर वार्ता के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। एजेंसी के अनुसार, इस सहयोग की कमी ने आगे संभावित तनाव बढ़ने की आशंका को जन्म दिया है। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) की गतिविधियों को रोकना और इस समूह के लड़ाकों को अफगानिस्तान में पनाह लेने से रोकना किसी भी समझौते की मुख्य शर्त है। पाकिस्तान टीटीपी विद्रोह को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। हाल में सीमा पर हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि टीटीपी के हमले जारी रहे तो वह अफगान क्षेत्र में लक्षित सैन्य अभियान चलाना जारी रखेगा। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती नागरिकों और सैन्य चौकियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने काबुल क्षेत्र में कोई हमला किया तो वह इस्लामाबाद के प्रमुख ठिकानों पर 'गंभीर जवाबी कार्रवाई' करेगा। अफगानिस्तान पक्ष ने यहां तक कहा कि उसकी सेना 'पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाकों तक वार करने की क्षमता रखती है।'

गाजा के लिए चंदा जुटाने के बाद पाकिस्तान की अगली योजना: फिलिस्तीन में सैनिक तैनात

 इस्लामाबाद गाजा में इजरायली हमलों को लेकर चिंतित रहने वाला पाकिस्तान अब वहां अपने सैनिक भेजेगा। पाकिस्तान की सरकार ने गाजा में बड़े पैमाने पर मदद भेजी थी। इसके अलावा इस्लामिक संगठनों ने गली-गली से चंदा और सहायता सामग्री जुटाई थी। अब पाकिस्तान की ओर से वहां सेना भेजने की भी तैयारी है, जो इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा होगी। फिलहाल सरकार इसे लेकर विचार कर रही है। फिलहाल पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच इसे लेकर चर्चा चल रही है। फिलहाल खबर यही है कि पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि हमारी सेना गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बने। गाजा जाने वाली फोर्स में ज्यादातर सैनिक मुस्लिम बहुल देशों के ही रहेंगे। इस फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखे। इसके अलावा यह भी तय किया जाए कि हमास निरस्त्रीकरण हो। वहीं बॉर्डर क्रॉसिंग की सुरक्षा और मानवीय सहायता को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा गाजा में तमाम इमारतों को दोबारा से बनाने करने की तैयारी है। इनकी निगरानी भी स्टेबिलाइजेशन फोर्स करेगी। अहम बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैनिकों को गाजा भेजने से इनकार किया है। फिलहाल अमेरिका की सलाह पर इंडोनेशिया, यूएई, मिस्र, कतर, तुर्की और अजरबैजान की ओर से सेनाएं भेजी जा रही हैं। हालांकि इजरायल ने तुर्की के इस फोर्स में शामिल होने पर ऐतराज जताया है। इजरायल का कहना है कि यह सीधे तौर पर हमारे खिलाफ खड़े होना और चैलेंज करना है। रविवार को तो बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा ही था कि हम तय करेंगे कि किन देशों को गाजा में जाने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने तुर्की के सुरक्षा बलों की भूमिका का विरोध करने की बात भी कही थी। ऐसे में देखना होगा कि तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर से गाजा में सेना भेजे जाने पर इजरायल का क्या रिएक्शन रहता है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस बहाने इस्लामिक दुनिया में खुद को एक मजबूत मुल्क के तौर पर स्थापित करना चाहता है। सालों से पाकिस्तान इस्लामिक मुद्दों पर आक्रामक रहा है और गाजा एवं कश्मीर के मसले को यही रंग देने की उसकी कोशिश रही है।

पुलवामा जैसे हमले की साजिश नाकाम, TTP के 3 आतंकवादी मारे गए

पाकिस्तान पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में आत्मघाती हमले की कथित साजिश में शामिल तीन आतंकियों को मार दिया। ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने जिले के झल्लार क्षेत्र में खुफिया सूचना पर आधारित ऑपरेशन (IBO) के तहत एक ‘बड़ी आतंकवादी घटना को नाकाम कर दिया और एक संभावित विनाशकारी हमले को टाल दिया।’ यह अभियान ‘फितना अल-खवारिज’ से संबंधित आतंकवादियों की उपस्थिति के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित था। ये आतंकी एक बड़ी आतंकवादी गतिविधि के लिए वाहन पर बम लगाकर आत्मघाती हमला करने की तैयारी कर रहे थे। ‘फितना अल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकवादियों के लिए करती है। बयान में कहा गया है कि सैनिकों ने आतंकवादियों के ठिकानों पर उनका प्रभावी ढंग से मुकाबला किया और आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जा रहे वाहन को नष्ट कर दिया तथा मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया।आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में तलाश अभियान जारी है ताकि इलाके में यदि कोई और आतंकवादी हैं तो उन्हें भी खत्म किया जा सके। बता दें कि टीटीपी को लेकर ही इन दिनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान के आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी को पनाह देता है और पाकिस्तान में दहशतगर्दी में समर्थन करता है। वहीं अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के आरोपो को शिरे से खारिज किया है। तुर्की में पाक और अफगान के बीच बातचीत के दौरान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुली जंग में उतरने की धमकी तक दे डाली। गौरतलब है कि इससे पहले दोनों देश दोहा वार्ता कर चुके हैं और तब संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया गया था।  

सरहद पर ऑपरेशन त्रिशूल की धमक, पाकिस्तानी सेना में मचा हड़कंप

नई दिल्ली भारत पश्चिमी सीमा पर 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक त्रि-सेवा (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) सैन्य अभ्यास करने वाला है। इसे लेकर पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। तीनों सेना का संयुक्त अभ्यास त्रिशूल के नाम से होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक्सरसाइज सर क्रीक-सिंध-कराची अक्ष पर केंद्रित होगी, जिसे पाकिस्तानी 'पाकिस्तान का गहरा दक्षिण' बताते हैं। इसे देखते हुए इस्लामाबाद अपनी दक्षिणी कमांड में सतर्कता बढ़ाने के लिए मजबूर हो गया है और पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा सूत्रों ने बताया कि सिंध और पंजाब में दक्षिणी कमांड के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही, वायुसेना और नौसेना को किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब देने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, बहावलपुर स्ट्राइक कोर और कराची कोर को विशेष तैयारियों के लिए चुना गया है। शोरकोट, बहावलपुर, रहीम यार खान, जैकोबाबाद, भोलारी और कराची जैसे हवाई अड्डे भी स्टैंडबाय हैं। इसके अलावा, अरब सागर में गश्त और नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सैन्य अभ्यास का क्या है मकसद सूत्रों के अनुसार, भारत का यह अभ्यास थार रेगिस्तान और सर क्रीक क्षेत्र के बीच होगा। इसे दक्षिणी क्षेत्रों में नौसेना, वायुसेना और थलसेना के बीच समन्वय जांचने के लिए डिजाइन किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों को डर है कि इस एक्सरसाइज का इस्तेमाल समुद्री चोकपॉइंट्स और कराची से जुड़े तटीय ढांचे को खतरे में डालने के लिए हो सकता है। ध्यान रहे कि कराची बंदरगाह और बिन कासिम के माध्यम से पाकिस्तान का लगभग 70 प्रतिशत व्यापार होता है, जो इन सुविधाओं को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।  

पाकिस्तान के लिए FATF का कड़ा संदेश, ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने का मतलब नहीं मिलेगा टेरर फंडिंग की छूट

इस्लामाबाद  ग्लोबल टेरर फंडिंग वॉचडॉग संस्था FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि भले अक्टूबर 2022 में उसे 'ग्रे लिस्ट' से बाहर कर दिया गया था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लेकर पूरी तरह सुरक्षित हो गया है. FATF की अध्यक्ष एलिसा डे एंडा मद्राजो ने कहा कि सभी देशों को, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, अपराधों को रोकने और उन्हें टालने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए. 'टेरर फंडिंग रोकने के लिए काम करते रहें' FATF अध्यक्ष ने फ्रांस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कोई भी देश जो ग्रे लिस्ट में है या पहले ग्रे लिस्ट में था, वह अपराधियों- चाहे मनी लॉन्ड्रर हों या आतंकवादी- की गतिविधियों को लेकर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. इसलिए हम सभी देशों से, जिनमें डिलीस्टेड देश भी शामिल हैं, आग्रह करते हैं कि वे अपराधों को रोकने के अपने अच्छे प्रयास जारी रखें.' पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की 'ग्रे लिस्ट' से हटा दिया गया था और अब यह सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप किया जा रहा है कि वह टेरर फंडिंग विरोधी उपाय लागू कर रहा है. हालांकि, पाकिस्तान FATF का सदस्य नहीं है, इसलिए एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) इस फॉलो-अप का संचालन कर रहा है. डिजिटल वॉलेट से आतंकी कैंपों को फंड कर रहा पाकिस्तान FATF अध्यक्ष ने कहा कि ग्रे लिस्ट में शामिल देशों और क्षेत्रों की निगरानी इसलिए की जाती है क्योंकि वहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में गंभीर कमियां पाई गई हैं. इन टिप्पणियों के बीच ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर आतंकवादी कैंपों को फंड कर रहा है, जिससे वित्तीय लेन-देन को छुपाया जा रहा है.  भारत की नेशनल रिस्क असेसमेंट 2022 ने पाकिस्तान को टेरर फंडिंग के 'उच्च जोखिम वाले' स्रोत के रूप में चिन्हित किया था. भारत के योगदान वाली एक अध्ययन रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स से पैदा होने वाले जोखिमों पर चिंता जताई. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान क्षेत्र में प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग के लिए उच्च जोखिम वाला देश बना हुआ है.